आयुर्वेद में बहरेपन का मुख्य कारण 'वात दोष' का असंतुलन माना जाता है। 2026 के नवीनतम शोध और पारंपरिक पद्धतियों के अनुसार, यहाँ कुछ प्रभावी घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार दिए गए हैं:
1. कर्णपूरण (कान में तेल डालना)
यह बहरेपन के लिए सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक क्रिया है, जिसमें औषधीय तेलों का उपयोग किया जाता है:
1. कर्णपूरण (कान में तेल डालना)
यह बहरेपन के लिए सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक क्रिया है, जिसमें औषधीय तेलों का उपयोग किया जाता है:
बिल्व तेल (Bilva Oil): संक्रमण और सुनने की क्षमता में सुधार के लिए सबसे अधिक अनुशंसित।
तिल या सरसों का तेल:
तिल या सरसों का तेल:
हल्का गर्म तेल कान में डालने से कान की नसों को पोषण मिलता है।
अन्य तेल:
अन्य तेल:
अपामार्ग क्षार तेल,
दशमूल तेल
या क्षीरबला तेल
का उपयोग भी वात को शांत करने के लिए किया जाता है।
2. घरेलू नुस्खे -
2. घरेलू नुस्खे -
मूली का रस और तिल का तेल:
मूली के रस को तिल के तेल में उबालकर बनाया गया मिश्रण सुनने की समस्याओं में लाभप्रद हो सकता है।
नीम और हल्दी:
नीम और हल्दी:
हल्दी और नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उसकी भाप लेने से कान के संक्रमण और सूजन में कमी आती है।
लहसुन का तेल:
लहसुन का तेल:
लहसुन को तिल के तेल में पकाकर कान में डालने से संक्रमण से राहत मिलती है।
प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ:अश्वगंधा:
तंत्रिका तंत्र को शांत करती है और ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाती है.
ब्राह्मी:
ब्राह्मी:
मस्तिष्क और श्रवण तंत्रिकाओं के लिए उत्तम, तनाव कम करती है.
वच (Vacha):
वच (Vacha):
चक्कर आने और कान के असंतुलन में राहत देती है.
सारिवा (Shatavari):
सारिवा (Shatavari):
पित्त को संतुलित करती है और जलन शांत करती है.
गुडुची (Giloy):
गुडुची (Giloy):
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और सूजन कम करती है.
जिन्कगो बिलोबा (Ginkgo Biloba): कानों में रक्त संचार बढ़ाती है.
यष्टिमधु (Licorice): श्रवण तंत्रिकाओं को शांत करती है.
हल्दी (Turmeric):
जिन्कगो बिलोबा (Ginkgo Biloba): कानों में रक्त संचार बढ़ाती है.
यष्टिमधु (Licorice): श्रवण तंत्रिकाओं को शांत करती है.
हल्दी (Turmeric):
सूजन और संक्रमण में जीवाणुरोधी गुणों के लिए.
उपयोग के तरीके (घरेलू उपचार):
उपयोग के तरीके (घरेलू उपचार):
हर्बल तेल:
तिल या सरसों के तेल में लहसुन, हल्दी, नीम या अदरक उबालकर छान लें और इसकी 2-3 बूँदें कान में डालें (कर्णपूरण).
काढ़ा:
काढ़ा:
गुडुची काढ़ा या त्रिफला चूर्ण आंतरिक रूप से लिया जा सकता है.
रस (Juice):
रस (Juice):
भांगरा या आम/नीम के पत्तों का रस निकालकर कान में डालने से आराम मिलता है.
वटियां (Tablets):
वटियां (Tablets):
सारिवादि वटी, चन्द्रप्रभा वटी, और शिलाजीत रसायन जैसी आयुर्वेदिक दवाएं उपयोग की जाती हैं.
अगर आपके कान बंद हैं, तो अपनी यूस्टेशियन ट्यूब खोलने के लिए निगलने, जम्हाई लेने या शुगर-फ्री गम चबाने की कोशिश करें। अगर यह काम नहीं करता है, तो गहरी सांस लें और अपनी नाक को बंद करते हुए और अपना मुंह बंद रखते हुए धीरे से अपनी नाक से हवा बाहर निकालने की कोशिश करें।कानों को साफ रखें
कई बार कानों में अत्यधिक मैल जमा होने के कारण बहरापन या कम सुनाई देने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कानों को खुद से न साफ करें। डॉक्टर कानों के अंदर कुछ लिक्विड डालते हैं जिससे कानों की मैल नर्म हो जाती है, जिसे ख़ास उपकरण की मदद से निकाला जा सकता है।
*पित्ताशय की पथरी (Gallstones) का रामबाण हर्बल उपचार
आहार और जीवनशैली:
एंटी-इंफ्लेमेटरी भोजन:
अदरक, हल्दी और लहसुन का सेवन करें।
विटामिन सी:
विटामिन सी:
संतरा, कीवी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल कान के ऊतकों (tissues) की मरम्मत में मदद करते हैं।
सावधानी:
सावधानी:
कान में कोई भी नुकीली चीज न डालें और शोर-शराबे वाली जगहों से बचें।
महत्वपूर्ण नोट:
महत्वपूर्ण नोट:
किसी भी गंभीर समस्या या तेल का उपयोग करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि कान का पर्दा फटा हो।
उम्र बढ़ने के साथ बहरापन
बढ़ती उम्र के साथ-साथ अधिकतर लोगों की श्रवण शक्ति कमजोर होने लगती है. कई लोगों को उम्र बढ़ने के साथ बहरेपन की समस्या आनुवंशिक भी होती है.
बीमारियों के कारण बहरापन
कई लोगों को सुनाई कम देने की समस्या उनकी बीमारियों की वजह से भी हो सकती है, जैसे डायबिटीज, खसरा या कंठमाला आदि की बीमारी है. ऐसे लोगों की श्रवण शक्ति कमजोर हो सकती है.
कान में संक्रमण भी बहरेपन का कारण
बढ़ती उम्र के साथ-साथ अधिकतर लोगों की श्रवण शक्ति कमजोर होने लगती है. कई लोगों को उम्र बढ़ने के साथ बहरेपन की समस्या आनुवंशिक भी होती है.
बीमारियों के कारण बहरापन
कई लोगों को सुनाई कम देने की समस्या उनकी बीमारियों की वजह से भी हो सकती है, जैसे डायबिटीज, खसरा या कंठमाला आदि की बीमारी है. ऐसे लोगों की श्रवण शक्ति कमजोर हो सकती है.
कान में संक्रमण भी बहरेपन का कारण
कुछ लोगों को बहरेपन की समस्या कान में संक्रमण के कारण भी होती है. कान से पानी आता है या कई लोग कान की सफाई के लिए किसी चीज का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से कान के पर्दे में सूजन आ जाती है. इसके किसी प्रकार की चोट की वजह से भी कान में संक्रमण फैल जाता है. इन सभी कारणों से कम सुनाई देने की समस्या शुरू हो जाती है. लेकिन काफी हद तक उपचार द्वारा इस समस्या को ठीक भी किया जा सकता है.
इन कारणों से भी आता है बहरापन
बहरेपन के और भी कई कारण हो सकते हैं,
इन कारणों से भी आता है बहरापन
बहरेपन के और भी कई कारण हो सकते हैं,
जैसे आजकल लोग तेज आवाज में गाने सुनते हैं और ध्वनि प्रदूषण आज बहुत ज्यादा बढ़ गया है इस वजह से भी श्रवण शक्ति कमजोर हो जाती है या बहरापन होने की समस्या शुरू हो जाती है.
कम सुनने पर करें ये घरेलू उपचार
क्या अदरक सुनने में मदद कर सकती है?
अपने एंटीबायोटिक और एंटीवायरल घटकों के साथ, अदरक संक्रमण को रोकने में मदद करता है यह जड़ी बूटी मस्तिष्क तक ध्वनि संचरण तरंगों को सुविधाजनक बनाने वाली नसों को सक्रिय और नियंत्रित करती है।
क्या अदरक सुनने में मदद कर सकती है?
अपने एंटीबायोटिक और एंटीवायरल घटकों के साथ, अदरक संक्रमण को रोकने में मदद करता है यह जड़ी बूटी मस्तिष्क तक ध्वनि संचरण तरंगों को सुविधाजनक बनाने वाली नसों को सक्रिय और नियंत्रित करती है।
नमक से इलाज
कान के इंफेक्शन के घरेलू उपचार में टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आप एक कप नमक को गर्म करें और उसे एक कपड़े पर रखकर पोटली बना लें। अब आप इस टुकड़े को कान के संक्रमित हिस्से पर 5 से 10 मिनट तक रखें और आप महसूस करेंगे कि दर्द दूर हो रहा है। इस प्रक्रिया को आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दोहरा सकते हैं।
सेब का सिरका
मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक और मैंगनीज से युक्त सेब का सिरका आपके शरीर में उन खनिज की कमी को पूरा कर सकता है जो सुनने से जुड़ा है। अगर बहुत अधिक शोर के कारण आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तो ऐसे में आप सेब के सिरके का इस्तेमाल कर सकते हैं। तुलसी का रस:
यह कान के संक्रमण और दर्द को ठीक करने में मदद कर सकता है और बहरापन को भी कम कर सकता है,
घरेलू उपाय-
नोट: यदि दर्द तेज हो या कान से मवाद आ रहा हो, तो घरेलू नुस्खे न आजमाएं और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सरसों या तिल का तेल: हल्का गुनगुना सरसों का तेल कान में 1-2 बूंद डालने से जमा हुआ मैल नरम होकर बाहर निकल आता है।
तुलसी का रस:
सेब का सिरका
मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक और मैंगनीज से युक्त सेब का सिरका आपके शरीर में उन खनिज की कमी को पूरा कर सकता है जो सुनने से जुड़ा है। अगर बहुत अधिक शोर के कारण आपकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है तो ऐसे में आप सेब के सिरके का इस्तेमाल कर सकते हैं। तुलसी का रस:
यह कान के संक्रमण और दर्द को ठीक करने में मदद कर सकता है और बहरापन को भी कम कर सकता है,
घरेलू उपाय-
नोट: यदि दर्द तेज हो या कान से मवाद आ रहा हो, तो घरेलू नुस्खे न आजमाएं और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। सरसों या तिल का तेल: हल्का गुनगुना सरसों का तेल कान में 1-2 बूंद डालने से जमा हुआ मैल नरम होकर बाहर निकल आता है।
तुलसी का रस:
तुलसी की पत्तियों का रस निकालकर उसकी 1-2 बूंद कान में डालने से संक्रमण में लाभ मिल सकता है।
लहसुन और तेल:
लहसुन और तेल:
सरसों के तेल में लहसुन की कली जलाकर उस तेल को छान लें। गुनगुना होने पर इसे कान में डालने से दर्द और सूजन में आराम मिलता है।
भाप लेना: यदि सर्दी-जुकाम के कारण कान बंद महसूस हो रहे हों, तो गर्म पानी की भाप लेने से बंद नसें खुल सकती हैं।
भाप लेना: यदि सर्दी-जुकाम के कारण कान बंद महसूस हो रहे हों, तो गर्म पानी की भाप लेने से बंद नसें खुल सकती हैं।
सुनने की शक्ति बढ़ाने के लिए क्या खाएं?
सुनने की शक्ति बढ़ाने के लिए, आप अपने आहार में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं, जो आपके कानों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें शामिल हैं:
ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ: मछली, अलसी, अखरोट, और चिया बीज.
सुनने की शक्ति बढ़ाने के लिए, आप अपने आहार में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं, जो आपके कानों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें शामिल हैं:
ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ: मछली, अलसी, अखरोट, और चिया बीज.
विटामिन A, C, और E युक्त खाद्य पदार्थ: गाजर, पालक, खट्टे फल, और मछली.
जिंक युक्त खाद्य पदार्थ: बीन्स, मटर, और बादाम.
कैरोटीन युक्त खाद्य पदार्थ: गाजर, शकरकंद, और कद्दू.
विटामिन B12 युक्त खाद्य पदार्थ: मांस, मछली, और अंडे.
पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ: केला.
फोलेट युक्त खाद्य पदार्थ: शिमला मिर्च, और अंडे.
आयरन युक्त खाद्य पदार्थ: पालक.
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना सिर्फ सुनने की शक्ति बढ़ाने का एक तरीका है। अपने कानों के स्वास्थ्य के लिए, आपको तेज आवाज से बचना चाहिए, नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए
बंद कान खोलने के लिए कौन से घरेलू उपाय हैं?अगर आपके कान बंद हैं, तो अपनी यूस्टेशियन ट्यूब खोलने के लिए निगलने, जम्हाई लेने या शुगर-फ्री गम चबाने की कोशिश करें। अगर यह काम नहीं करता है, तो गहरी सांस लें और अपनी नाक को बंद करते हुए और अपना मुंह बंद रखते हुए धीरे से अपनी नाक से हवा बाहर निकालने की कोशिश करें।
कई बार कानों में अत्यधिक मैल जमा होने के कारण बहरापन या कम सुनाई देने के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कानों को खुद से न साफ करें। डॉक्टर कानों के अंदर कुछ लिक्विड डालते हैं जिससे कानों की मैल नर्म हो जाती है, जिसे ख़ास उपकरण की मदद से निकाला जा सकता है।
टिनिटस की समस्या
कान में दबाव के कारण होने वाली टिनिटस की समस्या को अदरक से कम किया जा सकता है।
कान में दबाव के कारण होने वाली टिनिटस की समस्या को अदरक से कम किया जा सकता है।
इस विडिओ मे दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहिले किसी चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श करलें | इसी प्रकार के घरेलु आयुर्वेद के विडियो देखने के लिए हमारे channel को subscribe कीजिये धन्यवाद,आभार
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