27.8.17

घुटनों के दर्द के लिए चमत्कारी उपाय //Miracle remedies for knee pain




दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट - 
किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी  या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें। इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर या जो घुटना दर्द करता है उस स्थान पर  लगा ले और ऊपर से  बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें | इसको रातभर लगा रहने दें , सुबह सादा पानी से इसको  ले इस तरह से लगभग 1 सप्तासे लेकर 2 सप्ताह तक इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है |

दर्द से  दिलाये सौंठ का लेप - 

   सौंठ भी एक बहुत अच्छा दर्द निवारक दवा के रूप में फायदेमंद साबित हो सकता है, सौंठ से दर्द निवारक दवा बनाने के लिए  आप एक छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा तिल का तेल लें  इन दोनों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट जैसा बना ले। दर्द या मोच के स्थान पर या चोट के दर्द में आप इस दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को हल्के हल्के प्रभावित स्थान पर लगाएं और इसको दो से 3 घंटे तक लगा रहने दें इसके बाद इसे पानी से धो लें ऐसा करने से 1 सप्ताह में आपको घुटने के दर्द में पूरा आराम मिल जाता है और अगर मांसपेशियों में भी खिंचाव महसूस होता है तो वह भी जाता रहता है।
खजूर से घुटने में दर्द का इलाज -
 सर्दियों के मौसम में रोजाना 5-6 खजूर खाना बहुत ही लाभदायक होता है, खजूर का सेवन आप इस तरह भी कर सकते हैं रात के समय 6-7 खजूर पानी में भिगो दें और सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले और साथ ही वह पानी भी पी ले जिनको जिसमें आपने रात में खजूर भिगोए थे. यह घुटनों के दर्द के अलावा आपके जोड़ों के दर्द में भी आराम दिलाता है।
           
पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज

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26.8.17

आंकड़े से करें बवासीर का अचूक उपचार


   

आक के वैसे तो सैंकड़ो प्रयोग आयुर्वेद शास्त्र में मिलते हैं, आक को आयुर्वेद का जीवन भी कहा जाता है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे महान प्रयोग के बारे में बताने जा रहें हैं जिस से कैसी भी बवासीर की समस्या हो वो 

    50 ग्राम आक के कोमल पत्रों के समभाग पांचों नमक लेकर (1. सौंचर या सौवर्चल नमक (कालानमक), 2. सैंधानमक, 3. बीड़ नमक, 4. समुद्री नमक तथा 5. सांभर नमक). अर्थात 10 – 10 ग्राम ये सभी पांच नमक. ये सभी नमक आपको थोड़ी मेहनत से किसी पंसारी के पास से मिल जायेंगे.अभी कितने आक के पत्ते लिए हैं उनके बराबर नमक ले लीजिये और उसमें सबके वजन के बराबर से चौथाई वजन तिल का तैल और इतना ही नींबू रस मिला कर एक मिटटी के बर्तन में डाल लीजिये अभी इस बर्तन के मुख कपड़ मिट्टी (अर्थात उस बर्तन को ढक्कन लगा कर इस के मुंह को सूती कपडे से अच्छे से लपेट कर उस पर गीली मिटटी से अच्छे से पैक कर दीजिये तांकि उसमे किसी प्रकार की कोई लीकेज ना रहे) अभी इसको गोबर के कन्डो की आग पर एक घंटे तक चढ़ा दें,
  ध्यान रहे के आग ज्यादा तेज़ ना हो, और धीरे धीरे कंडे लगाते रहें, अधिक तेज़ आग करने से मिटटी का बर्तन टूट सकता है। एक घंटे के बाद बर्तन को नीचे उतार लीजिये, अभी इसके अन्दर आक के पत्ते जल चुके होंगे तो सब चीजों को निकाल के पीस कर रख लें, 500 मिलीग्राम से 3 ग्राम तक आवश्यकता और आयु के अनुसार गर्म जल, काँजी, छाछ के साथ सेवन कराने से बादी बवासीर नष्ट होता है।
आक के बवासीर के लिए प्रयोग.
 


1. हल्दी चूर्ण को आक के दूध में भिगोकर सुखा लें, ऐसे सात बार करें. फिर आक के दूध द्वारा ही उसकी बेर जितनी गोलियाँ बना छाया में शुष्क कर रखें। प्रातः सायं शौच कर्म के बाद थूक में या जल में घिसकर मस्सो पर लेप करने से कुछ ही दिनों में वह सूखकर गिर जाते है।


किडनी फेल रोग की अचूक औषधि

2.  तीन बूंद आक के दूध को राई पर डालकर उसपर थोड़ा कूटा हुआ जवाखार बुरक कर बताशे में रखकर निगलने से बवासीर बहुत जल्दी नष्ट हो जाती है।
3.  शौच जाने के बाद आक के दो चार ताजे पत्ते तोड़ कर गुदापर इस प्रकार रगड़े कि मस्सो पर दूध ना लगे केवल सफेदी ही लगे। इससे मस्सों में लाभ होता है।
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स्टेमिना बढ़ाने के प्राकृतिक तरीके


   आज की इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में हमे सबसे ज्यादा जरूरत होती है। एनर्जी, पावर और स्टैमिना की अगर हमारे अंदर स्टेमिना की कमी है तो हम अपना कोई भी काम अच्छे से नही कर सकते स्टेमिना बढाने के लिए डाइट के साथ साथ कुछ बातों का ख्याल भी रखना पड़ता है जैसे कि शरीर में सोडियम की कमी न हो, क्योंकि इससे स्टेमिना गिरने लगता है। आप भले ही व्यायाम करे लेकिन अपनी सीमा में रहकर। क्योंकि जब आप हिम्मत से ज्यादा व्यायाम करते हैं तब आपकी मांसपेशियों को नुकसान होता है।
स्टेमिना को बढाने के प्राकृतिक उपाय 
शरारिक परीक्षण-
अगर आप अपनी स्टेमिना को बढ़ाना चाहते हैं तब आपको आधारभूत चिकित्सा परीक्षण करना शुरु कर देना चाहिए। इससे आपको यह पता चलता है कि आप कितने फिट हो साथ ही आप अपनी बीमारी, चोट, थकान को अपने से कितने दूर रखते हो।



व्यायाम-

व्यायाम को आयुर्वेद में स्टेमिना का सबसे अच्छा साधन माना जाता है। क्योकि जब भी हम व्यायाम करते है तो हमारी ऊर्जा प्रयोग में आती है। जिससे हमारी सारी थकान दूर होती है अगर आप व्यायाम नही करते तो आपको जल्द ही शुरू करना चाहते हो तो आप को इसे धीरे धीरे शुरू करना चाहिए। आप को इसके छोटे छोटे स्टेप लेने चाहिए। जिससे आप को अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े जब हम प्रतिदिन व्यायाम करते है तो हमारा स्टेमिना बढने लगता है और हम अपना काम अच्छे से करने लगते हैं।

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संतुलित आहार-
स्टेमिना को बढाने के आयुर्वैदिक तरीके में संतुलित आहार का सेवन अति आवश्यक है। इसमें आपको अधिक मात्रा में फल, सब्जिया, बिना चर्बी का मांस और कम वसा वाले उत्पादकों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इस प्रकार का सेवन करने से आप स्वास्थ्य रहते हैं। इसके सेवन से आप शारीरक के साथ साथ मानसिक तौर पर भी सहनशील प्राप्त होती है।
खेल खेले में बढायें स्टेमिना -
स्टेमिना को बढने का सबसे अच्छा तरीका होता है खेल । खेल खेलना जब भी आप किसी प्रकार का खेल खेलते हैं तो उससे आप का स्टेमिना बढने लगता है और साथ ही इससे आप का अच्छा व्यायाम भी हो जाता है। अगर आप फूटबाल, बास्केटबाल या फिर कोई अन्य दौड़ने वाली खेले खेलते हो तो आप का दिल मजबूत होता है और आप के शरीर में अधिक ऑक्सीजन पंहुचती है।
बीमारियों से बचे-


स्टेमिना को बढ़ाने के लिए हमे बीमारियों से बचना चाहिए। क्योंकि जितना हम बीमार होते हैं उतना ही हमारा स्टेमिना कमज़ोर होता है। हमें छोटी छोटी बीमारियों से बचकर रहना चाहिए जैसे कि खांसी, जुकाम, बुखार, सिरदर्द आदि। इसके लिए आप को अपने आप को साफ़ रखना होता है। आप जितना साफ़ रहते हो बीमारी उतनी ही आप से दूर रहती है।

भोजन का प्रयोग-
भोजन खाने से हमारे शरीर में शक्ति पैदा होती है और इसके साथ साथ हमे भोजन से ऊर्जा प्राप्त होती है। इसलिए हमे थोडा थोडा भोजन बार बार खाना चाहिए। क्योकि इससे हमारे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
पानी का सेवन-
अपने आप को फिट रखने के लिए हमे पानी की मात्रा सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। अपनी थकान को कम करने के लिए भी पानी पीना चाहिए। अगर हम पानी की मात्रा को कम रखते हैं तो हमारे शरीर का रक्त जमने लगता है। जिससे वो सही ढंग से रक्त संचार नही कर सकता और हमारी मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी आ जाती है।इसके साथ हमे कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
   पानी को अधिक मात्रा में पीये तो हमारा खून पतला पड़ जाता है। जिससे वो आसानी से हमारे शरीर के विभिन्न अंगो तक आसानी से पंहुच जाता है।
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24.8.17

यूरिक एसिड को खत्म करने का रामबाण उपाय

    



यूरिक एसिड की समस्या आज सबसे तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थय समस्याओं में से एक है,  जानकार लोग बताते हैं कि यह मुख्य तौर पर अनुचित खानपान के कारण होने वाला रोग है जो कही ना कही शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति से भी जुड़ा हुआ है । हम आपको एक  विशेष चूर्ण के बारे में बता रहे हैं जो यूरिक एसिड को बहुत प्रभावी 
रूप से नियंत्रित करने में बहुत लाभकारी होता है । 
जरूरी सामग्री :-
1. गिलोय का चूर्ण :- 200 ग्राम
2. मेथी दाना चूर्ण :- 100 ग्राम
3.  अजवायन चूर्ण :- 100 ग्राम
4.  अर्जुन छाल चूर्ण :- 100 ग्राम
5.  चोबचीनी चूर्ण :- 100 ग्राम
      गिलोय का चूर्ण आपको गिलोय की बेल को सुखाकर पीसकर मिल जायेगा, बाकी चार सामग्री  आपको अपने आस पास किसी जड़ीबूटी वाले अथवा पँसारी की दुकान पर आसानी से मिल जायेंगे ।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

बनाने की विधि :-
इन सभी सामानों को एक साथ लेकर हल्का दरदरा कूटकर मिक्सी में डालकर महीन चूर्ण तैयार कर लें और किसी काँच की साफ एयरटाईट शीशी में भरकर रख लें । आपका चूर्ण तैयार है ।

सेवन विधि  :-

इस चूर्ण को 3-3 ग्राम की मात्रा में रोज सुबह और शाम लेना है । इस चूर्ण का सेवन गुनगुने जल के साथ करना अधिका उचित है । इसके सेवन काल में उचित परहेज का जरूर पालन करें । इस चूर्ण को लागातार 100 दिन तक सेवन करने से पुराने से पुराने यूरिक एसिड के रोगी को भी बहुत अच्छा लाभ मिलते हुये देखा गया है ।
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विशिष्ट परामर्श-  



संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|  औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| 
औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 

    








गले और छाती मे जमे कफ, बलगम का तुरंत असर उपचार


   

क्या आपको गले और छाती में कुछ जमा हुआ सा महसूस हो रहा है? सांस लेने में तकलीफ और लगातार छीकें आ रही हैं? ये सारे लक्षण बलगम जमा होने के होते हैं। साथी ही, नाक बहना और बुखार आना भी इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं। बलगम हालांकि खतरनाक नहीं होता लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक जना रहे तो इससे आपको श्वास संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। बलगम जमने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि सर्दी-जुकाम, फ्लू, वायरल इन्फेक्शन, साइनस, अत्यधिक स्मोकिंग। इस समस्या से निपटने के लिए बहुत सारे घरेलू उपाय मौजूद हैं, आइये जानते हैं उनके बारे में।


बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

 अदरक और शहद
अदरक में ऐसे बहुत से तत्व होते हैं जो बहुत सारी बीमारियों का सामना कर सकते हैं। इसके सेवन से सर्दी खांसी में फायदा होता है और श्वसन प्रक्रिया ठीक हो जाती है। 100 ग्राम ग्राम अदरक को कूट लें। दो-तीन चम्मच शहद को उसमें मिला लें। इस पेस्ट को दो-दो चम्मच दिन में दो बार लें। समस्या दूर हो जाएगी।
 लेमन टी
नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड और शहद के एंटीसेप्टिक तत्व बलगम कम करने और गले का दर्द दूर करने में मदद करते हैं। ब्लैक टी बनाइये, और उसमें एक चम्मच ताजे नींबू का रस और एक चम्मच शहद का मिला दीजिए।

आँखों  का चश्मा  हटाने का अचूक  घरेलू उपाय

अंगूर का जूस
अंगूर की प्रकृति एक्सपेक्टोरेंट होता हैं और इसलिए ये आपके फेफड़ों के लिए और बलगम दूर करने में फायदा पहुंचाता है। दो चम्मच अंगूर के जूस में दो चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार लें।
गरारे
एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं। अपनी गर्दन थोड़ी सी पीछे की तरफ गिराएं और फिर इस नमक के पानी से गरारे करें। इस पानी को निगलें न। कुछ देर तक गले में रखकर गरारे करने के बाद आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगे।

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प्याज और नींबू
एक प्याज छील कर उसे पीस लें। एअब एक नींबू का रस निकाल लें। इसे एक कप पानी में इन दोनों को मिलाकर दो तीन मिनट के लिए उबाल लें। आंच से उतार लें और एक चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्सचर को एक दिन में तीन बार पियें, बलगम की समस्या दूर हो जाएगी।
 प्राकृतिक जड़ी बूटियाँ खाएँ
मुलैठी (licorice), मेथी और चिकवीड (chickweed) जैसी जड़ी बूटियाँ खाना आपके गले से बलगम साफ करने में मदद करेगा। इन्हें अपने खाने में जोड़ें या अगर आप स्वाद को बर्दाशत कर सकते हैं, तो इन्हें कच्चा खाएँ या पानी में उबालकर इनकी चाय बनाएँ

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 गाजर
गाजर में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की वजह से ये आपके इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है। इसके अलावा इसमें ऐसे बहुत से विटामिन और पोषक तत्व होते हैं जो खांसी और बलगम की समस्या को दूर करते हैं। 3-4 ताजी गाजर का जूस निकालें। उसमें थोड़ा पानी और दो-तीन चम्मच शहद मिलाएं। अच्छी तरह इस मिश्रण को मिलाएं। इस मिश्रण को एक दिन में दो से तीन बार पियें, आपकी बलगम की समस्या ठीक हो जाएगी।
 लहसुन और नींबू
लहसुन में सूजन दूर करने वाले तत्व मौजूद होते हैं और नींबू में सिट्रिक एसिड। जब दोनों का इस्तेमाल किया जाता है तो ये बलगम दूर करने में हमारी मदद करते हैं। एक कप पानी उबालें। उसमें तीन नींबू निचोड़ें। थोड़ा सा कुटा हुआ अदरक मिलाएं। साथ में आधी चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक चुटकी नमक। इन सब को अच्छे से मिला लें और पी लें। इससे आपको बलगम की समस्या से फौरन निजात मिल जाएगी।

प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज

 सफेद-मिर्च
आधी चम्मच सफेद कालीमिर्च को पीस लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्सचर को 10-15 सेकेंड माइक्रोवेव करें। फिर पी लें। इसे पीते ही आपको फौरन आराम मिलेगा। बलगम से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार जरूर लें।
 हल्दी
बलगम के उपचार के लिए हल्दी सबसे अधिक प्रभाव डालने वाली चीज है। ये एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती है और इसमें कर्क्यूमिन होता है जो शरीर की बहुत सारी आंतरिक और बाहरी समस्याओं में फायदा पहुंचाता है। एक ग्लास गर्म दूध में हल्की और आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाएं। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। बलगम को दूर करने के लिए इसे रोज पियें।
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21.8.17

सौंफ है गुणों का खजाना


सौंफ सम्पूर्ण सँसार में बहुत ज्यादा  उपयोग में  आने वाला मसाला है । अपने विशिष्ट स्वाद और मनभावन सुगन्ध के कारण यह विशेष मौको पर बनाये जाने वाले व्यंजनों का हिस्सा जरूर रहता है । खाने के बाद सौंफ का प्रयोग एक अच्छा माउथफ्रेशनर के तौर पर किया ही जाता है । प्रस्तुत लेख में प्रकाशित आयुर्वेद क्लीनिक, मेरठ के सौजन्य से हम आपको बता रहे हैं कि इस छोटी सी सौंफ से हमको कितने बड़े बड़े लाभ मिलते हैं
सौंफ है गुणकारी नेत्र विकारों में :-
125 ग्राम सौंफ लेकर उसको बारीक पीस लें और एक लीटर पानी के साथ तांबे के बरतन में घोलकर रख दें । सुबह इस पानी को सबसे हल्की आग पर तांबे के बरतन में ही पकने के लिये रख दें और चलाते रहें जिससे बरतन में नीचे लगे ना । जब पकते पकते बहुत गाढ़ा अवलेह जैसा हो जाये तो एक शीशी में सुरक्षित रख लें । यह आँखों के लिये अन्जन का काम करता है । रोज रात को सोते समय आँखों में अन्जन की तरह लगाकर सोने से नेत्र विकारों में बहुत लाभ होता है ।

किडनी फेल रोग की अचूक औषधि

सौंफ बहुत गुणकारी है गला बैठ जाने पर :-
गला बैठ जाना जिसको स्वर भंग होना भी बोलते हैं की समस्या में सौंफ बहुत लाभकारी होती है । गला बैठ जाने की समस्या अगर हो जाये तो भुनी हुयी सौंफ को मिश्री के साथ चूसते रहने से गला खुल जाता है और आवाज भी साफ आने लगती है ।
सौंफ से मिलता है आराम मूत्र विकारों में :-
पेशाब में जलन होना और रुक कर पेशाब आना ये दो प्रमुख मूत्र रोग हैं जो सामान्य हर किसी को हो ही जाते हैं । इन समस्याओं के लिये सौफ से बहुत अच्छा लाभ लिया जा सकता है । 20 ग्राम सौफ का काढ़ा पकाकर उसमें 1 ग्राम खाने का सोडा मिलाकर रोज दो या अधिकतम तीन बार सेवन करने से पेशाब की पुरानी जलन में भी आराम मिलने लगता है

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 


 सौंफ से लाभ मिलता है फोड़े फुन्सियों में भी :-
गरमी के मौसम में हो जाने वाले फोड़े और फुन्सियों में भी सौंफ आराम देती है । सौंफ के तेल से फोड़े और फुन्सियों पर मालिश करने से वो ठीक हो जाते हैं और त्वचा पर निशान भी नही रहते हैं । ये तेल आपको अपने आसपास किसी जड़ी बूटी वाले की दुकान पर अथवा आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान पर आसानी से मिल जायेगा ।
सौंफ खाने से रहता है मुँह साफ :-
तवे पर सूखी गयी सौफ को दो चुटकी सेंधा नमक के साथ मिलाकर मुँह में डालकर धीरे धीरे चबाने से और उसकी लार को मुँह में चलाकर थूक देने से मुँह के अन्दर की सारी गन्दगी निकल जाती है और मुँह साफ हो जाता है । इस प्रयोग से मुँह से आने वाली बदबू भी दूर होती है और साँसों में ताजगी आ जाती है ।

प्रोस्टेट वृद्धि से मूत्र समस्या का 100% अचूक ईलाज 

सौंफ है लाभकारी मुँह आने में :-
मुँह का आना अर्थात जीभ पर छाले हो जाना और पूरी मुखगुहा का पक जाना बहुत ही कष्टकारी रोग है । इस दशा में भी यह सौफ लाभकारी पाया जाता है । 10 ग्राम सौंफ 10 ग्राम फिटकरी को 200 मिलीलीटर पानी के साथ पकाकर इस पानी को ठण्डा कर लें और कुल्ले करें । ये कुल्ले रोज दो या तीन बार करने से मुँह आने की समस्या में जल्दी आराम हो जाता है ।
सौंफ है कब्ज़ का पक्का इलाज :-
कब्ज के रोगियों को सबसे बड़ी समस्या रहती है कि कई कई बार जाने के बाद भी पेट खुलकर साफ नही होता है । ज्यादा जोर लगा देते हैं तो गुदा में जलन की समस्या हो जाती है । इस परेशानी का समाधान छिपा है इस छोटी सी सौंफ में । बाजार से आधा किलो गुलकंद लाकर उसमें 200 ग्राम सौंफ को बहुत अच्छी तरह से मिलाकर रख लें । रोज दो बार 30-30 ग्राम की मात्रा में सेवन करने और उसके बाद गरम पानी पीने से हफ्ते भर में ही शौच खुलकर होने लगती है । यह कई रोगियों का आजमाया हुआ प्रयोग है ।

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

सिरदर्द का ईलाज -
सौंफ को दरदरा कूटकर 10 ग्राम लेकर उसका आधा लीटर पानी में काढ़ा पकायें । जब पानी चौथाई अर्थात 125 मिलीलीटर शेष रहे तो इसको ठण्डा करके पी जायें । यह काढ़ा सिर के दर्द का समाधान कर देता है ।
सौंफ के प्रयोग से मिलता है दस्तों में आराम :-
100 ग्राम सौंफ लेकर उसको हल्का भून लें और चूर्ण बना लें इसमें बरामर मात्रा में पिसी मिश्री मिलाकर रख लें । इस स्वादिष्ट चूर्ण का सेवन ताजी बनी छाछ के साथ करने से दस्त के रोगी को आराम मिलता है । ध्यान रखें कि यदि दोपहर के बाद छाछ पी रहे हैं तो बहुत कम मात्रा लगभग 50-100 मिलीलीटर ही पीनी चाहिये । शाम 4 बजे के बाद तो छाछ का सेवन बिल्कुल भी नही करना चाहिये ।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

सौंफ से मिलता है पेट के अफारे में आराम :-
कुछ भी हल्का या भारी खाने के बाद जिन रोगियों को तुरन्त पेट फूलने और अफारा आने की समस्या हो जाती है उनके लिये ये हरे बीज किसी वरदान से कम नही होते हैं । इस तरह के रोगी 20 ग्राम सौंफ लेकर उसको 200 मिलीलीटर जल के साथ पकायें । जब पकते पकते आधा जल शेष रहे तो उसको उतारकर छानकर पी जायें । यह प्रयोग रोज दो तीन बार करने से पेट में अफारे की यह समस्या चली जाती है ।
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20.8.17

बासी रोटी के ये फायदे नहीं जानते होने आप// You may not know the benefits of stale bread



    अक्‍सर हम सभी के घरों में हर रोज 2-4 रोटी जरूर बच जाती है और उसे हम कूड़े में डाल देते हैं। पिछले जमाने में बासी रोटी को जानवरों के लिए रखा जाता था लेकिन अब शहरों में जानवर नहीं मिलते ऐसे में बहुत सारा अनाज हर रोज बर्बाद किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको जो बताने जा रहे है उसे सुनकर शायद आप चौंक जाएंगे।
आज भी कई सारे घरों में रात के समय ज्यादा रोटी बनाई जाती है ताकि सुबह जाने वाले लोग बची हुई बासी रोटी को खाकर जा सकें। जबकि कई लोग ऐसे भी हैं जो बासी रोटी को हानिकारक मानते हैं और बची हुई रोटी को फेंक देते हैं। जब भी कुछ घरों में बासी रोटी बच जाती थी तो सुबह उसे सेंक कर उसमें नमक तेल लगाकर खाते हैं।


किडनी फेल रोग की अचूक औषधि

हम आपको बता दें कि जो बासी रोटी हम फेंक देते है उसे खाने से बहुत ही ज्यादा फायदा होता है ये खासकर उनके लिए है जो दिन भर भागदौड़ का काम करते है और उनको ह बीपी का प्रॉब्‍लम है। ऐसे लोग अगर हर रोज सुबह गेहूं के 2 बासी रोटी को दूध में मिला कर खाएं तो उनका ब्लूड प्रेशर कंट्रोल हो जाता है और अगर आपको बीपी नहीं भी है तो कभी होने नहीं देता इसलिए आप हर रोज बसी रोटी जरूर खाएं और स्वस्थ्य रहें।
*आपको बता दें रोटी में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। फाइबर खाना पचाने में मदद करता है। जब कभी भी घर में रात की रोटियां बच जाती हैं तो सुबह उसे गाय या कुत्ते को खाने के लिए दे दी जाती हैं। लेकिन अगर रोज सुबह बासी रोटी दूध के साथ खायी जाए तो कई फायदे होते हैं। 


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

*डायबिटीज के रोगियों के लिए बासी रोटी खाना फायदेमंद हो सकता है। अगर आपको डायबिटीज है, तो सुबह के समय बासी रोटी को दूध के साथ खाना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपके शरीर में शर्करा का स्तर संतुलित रहेगा।
*अगर आप सुबह कुछ न कुछ खा लेते हैं औ,र फिर बाजार निकलते हैं तो गैस बनने लगता है अगर आप यही घर से निकलने से पहले सुबह सुबह अगर बासी रोटी दुध के साथ खा लेते हैं तो आपको गैस की प्रॉब्‍लम नहीं होती है। इस एसिडिटी से ही आपको तनाव और शुगर जैसी बिमारी का सामना करना पड़ता है। इसलिए जो लोग बासी रोटी साथ दूध का सेवन करके बाहर निकलते हैं उनका शुगर कंट्रोल में रहता है।
*इतना ही नहीं जिन्‍हें पेट से संबंधित कोई समस्‍या है वो लोग अगर दूध के साथ बासी रोटी खाएं तो पेट की हर समस्या ठीक हो जाती है।बासी रोटी के सेवन से पेट से जुड़े रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है। हर सुबह दूध के साथ बासी रोटी दूध के साथ खाने से एसिडिटी ठीक हो जाती है और व्यक्ति की पाचन शक्ति भी काफी मजबूत हो जाती है।


पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 


*जिन्हें उच्च रक्त चाप समस्‍या है वो अगर रोज सुबह ठंडे दूध के साथ 2 बासी रोटी खाए तो शरीर का रक्त चाप संतुलित रहता है। इसके अलावा ज्यादा गर्मी के मौसम में भी इसका सेवन करने से शरीर का तापमान सही रहता है

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


       






18.8.17

शरीर को विषैले पदार्थ से मुक्त करने का सुपर ड्रिंक




मानव  शरीर का विषाक्त पदार्थो से मुक्त होना बहुत जरूरी है अन्यथा यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते है बहुत से प्राकृतिक तरीकों से शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त किया जा सकता है, इस लेख में आपको बता रहा हूँ कि शरीर को विजातीय पदार्थ (टोक्सिन) मुक्त करने का सही और प्राकृतिक तरीका क्या है यह औषधि इस्तेमाल के बाद आप इससे मिलने वाले परिणाम से दंग रह जायंगे इस विधि से आपका शरीर टोक्सिन मुक्त हो जाएगा और आपका शरीर पूरा दिन ऊर्जा से भरा रहेगा


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 


औषधि तैयार करने की सामग्री
1. गिलास पानी
2. 4 सेब
3. 1 ताजा अदरक (3 चम्मच के बराबर पिसा हुआ )
4. 1 नींबू
यदि संभव हो तो यह सामग्री आर्गेनिक ही उपयोग की जाये
औषधि तैयार करने की विधि

नींबू का छिलका उतारकर सेब ,नींबू अदरक और पानी को एक साथ जूसर में डालकर रस निकाल ले सुबह इसका खाली पेट सेवन करें आप महसूस करेंगे कैसे विषैले तत्व आपके शरीर से बाहर निकल रहे है और अपनी सेहत में आपको सुधार नजर आएगा आप पहले से ज्यादा ऊर्जा से भरे महसूस करेंग| इससे किडनी स्वच्छ रहती है| 


किडनी फेल रोग की अचूक औषधि

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जीरा के ये फायदे जानते हैं आप ?

    

जीरा का लैटिन नाम-क्यूमिनम साइमिनम हैं। यह अपच और दर्द को खत्म करता है। जीरा एक स्वादिष्ट मसाला है और औषधियों में भी जीरे का बहुत उपयोग किया जाता है। जीरा भारत में बहुत होता है। यह 3 प्रकार का होता है- सफेद जीरा, शाह जीरा या काला जीरा और कलौंजी जीरा। इनके गुण एक जैसे ही होते हैं। तीनों ही जीरे रूखे और तीखे होते हैं। ये मलावरोध, बुद्धिवर्धक, पित्तकारक, रुचिकारक, बलप्रद, कफनाशक और नेत्रों के लिए लाभकारी हैं।
सफेद जीरा दाल-सब्जी छोंकने और मसालों के काम में आता है तथा शाह जीरे का उपयोग विशेष रूप से दवा के रूप में किया जाता है। ओथमी जीरा और शंखजीरा ये 2 वस्तुएं जीरे से एकदम भिन्न है। ओथमी जीरे को छोटा जीरा अथवा ईसबगोल कहते हैं।

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

जीरा एक ऐसा मसाला है जो खाना बनाने में यूज तो होता ही है साथ ही इससे बनी चाय भी वजन कम करने में इफेक्टिव है. मेडिकल डायटीशियन डॉ. अमिता सिंह के अनुसार जीरे की चाय पीने से एसिडिटी कम होती है. जीरे की चाय में मौजूद मैग्नीशियम और आयरन जैसे न्यूट्रिएंट्स भी हेल्थ के लिए इफेक्टिव हैं। मेडिकल डायटीशियन डॉ. अमिता सिंह के अनुसार जीरे की चाय पीने से एसिडिटी कम होती है. वैसे तो सादी चाय से एसिडिटी होती है. लेकिन इसे बनाते समय अगर जीरा मिला दिया जाए तो एसिडिटी की संभावना कम हो सकती है. जीरे की चाय में मौजूद मैग्नीशियम और आयरन जैसे न्यूट्रिएंट्स भी हेल्थ के लिए इफेक्टिव हैं. हम बता रहे हैं रोज जीरे वाली चाय पीने के 10 फायदे.

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

वजन कम :
जीरे वाली चाय पीने से बॉडी में फैट का अब्जोब्रशन कम होता है. जिससे वजन तेज़ी से कम होने लगता है.
हार्ट प्रॉब्लम :
 इस चाय को पीने से कोलेस्ट्रोल कम होता है जिससे हार्ट प्रॉब्लम से बचाव होता है.
डाइजेशन : 
जीरे की चाय में मौजूद थायमौल से डाइजेशन इम्प्रूव होता है और कब्ज़ की प्रॉब्लम से बचाव होता है.
कैंसर :
 इस चाय में क्यूमिनएलडीहाइड होते है जो कैंसर से बचाने में मदद करते है.
एनर्जी :
 इसे पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस रहते है और एनर्जी बनी रहती है.

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

सर्दी-जुकाम : 
इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते है जो सर्दी-जुकाम से बचाने में फायदेमंद है.
बीमारियों से बचाव : 
इस चाय को पीने से बॉडी की इम्युनिटी बढती है और बीमारियों से बचाव होता है.
एनीमिया : 
जीरे की चाय में आयरन की मात्रा अधिक होती है जो एनीमिया (खून की कमी) से बचाने में मदद करता है.
हार्ट प्रॉब्लम :
 इस चाय को पीने से कोलेस्ट्रोल कम होता है जिससे हार्ट प्रॉब्लम से बचाव होता है.
डाइजेशन : 
जीरे की चाय में मौजूद थायमौल से डाइजेशन इम्प्रूव होता है और कब्ज़ की प्रॉब्लम से बचाव होता है.

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

कैंसर : 
इस चाय में क्यूमिनएलडीहाइड होते है जो कैंसर से बचाने में मदद करते है.
एनर्जी : इसे पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस रहते है और एनर्जी बनी रहती है.
बीमारियों से बचाव : 
इस चाय को पीने से बॉडी की इम्युनिटी बढती है और बीमारियों से बचाव होता है.
एनीमिया : जीरे की चाय में आयरन की मात्रा अधिक होती है जो एनीमिया (खून की कमी) से बचाने में मदद करता है.
ब्रेन पावर : 
इसमें विटामिन B6 होते है जो ब्रेन पावर बढ़ाने में मदद करते है. इसे पीने से मेमोरी तेज होती है.
खांसी : जीरे का काढ़ा या इसके कुछ दानों को चबाकर खाने से खांसी एवं कफ दूर होता है।
रतौंधी :
जीरा, आंवला और कपास के पत्तों को मिलाकर ठण्डे पानी में पीसकर लेप बना लें। कुछ दिनों तक लगातार इस लेप को सिर पर लगाकर पट्टी बांधने से रतौंधी दूर होती है।
जीरे का चूर्ण बनाकर सेवन करने से रतौंधी (रात में दिखाई न देना) में लाभ होता है।

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


बिच्छू का जहर : 

जीरे और नमक को पीसकर घी और शहद में मिलाकर थोड़ा-सा गर्म करके बिच्छू के डंक पर लगायें।
बुखार : 
जीरे का 5 ग्राम चूर्ण पुराने गुड़ के साथ मिलाकर गोलियां बनाकर खाने से बुखार व जीर्ण बुखार उतर जाता है
दांतों का दर्द :
काले जीरे के उबले हुए पानी से कुल्ला करने से दांतों का दर्द दूर होता है।
3 ग्राम जीरे को भूनकर चूर्ण बना लें तथा उसमें 3 ग्राम सेंधानमक मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इस मंजन को मसूढ़ों पर मलने से सूजन और दांतों का दर्द खत्म होता है।
पेशाब का बार-बार आना :
जीरा, जायफल और काला नमक 2-2 ग्राम की मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस मिश्रण को अनन्नास के 100 मिलीलीटर रस के साथ खाने से लाभ मिलता है।
मुंह की बदबू : मुंह में बदबू आती हो तो जीरे को भूनकर खाएं। इस प्रयोग से मुंह की बदबू दूर हो जाती है।

सिर्फ आपरेशन से ही नहीं ,घरेलू आयुर्वेदिक तरीके से पाएँ बवासीर से छुटकारा

मलेरिया का बुखार :
एक चम्मच जीरे को पीसकर, 10 ग्राम गुड़ में मिला दें। इसकी 3 खुराक बनाकर बुखार चढ़ने से
पहले, सुबह, दोपहर और शाम को दें।
1 चम्मच जीरा बिना सेंका हुआ पीस लें। इसका 3 गुना गुड़ इसमें मिलाकर 3 गोलियां बना लें। निश्चित समय पर ठण्ड लगकर आने वाले मलेरिया के बुखार के आने से पहले 1-1 घण्टे के बीच गोली खाएं कुछ दिन रोज इसका प्रयोग करें। इससे मलेरिया का बुखार ठीक हो जाता है।
काला जीरा, एलुआ, सोंठ, कालीमिर्च, बकायन के पेड़ की निंबौली तथा करंजवे की मींगी को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसे दिन में 3-3 घंटे के अन्तर से 1-1 गोली खाने से मलेरिया का बुखार दूर हो जाता है।
पुराना बुखार : 
 कच्चा पिसा हुआ जीरा 1 ग्राम इतने ही गुड़ में मिलाकर दिन में 3 बार लगातार सेवन करें। इससे पुराना से पुराना बुखार भी ठीक हो जाता है।

मुह के छाले से परेशान है तो ये उपाय करे

पाचक चूरन : 
जीरा, सोंठ, सेंधानमक, पीपल, कालीमिर्च प्रत्येक सभी को समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच खाना खाने के बाद ताजा पानी के साथ खाने से भोजन जल्दी पच जाता है।
खूनी बवासीर : 
 जीरा, सौंफ, धनिया को एक-एक चम्मच लेकर 1 गिलास पानी में उबालें, जब आधा पानी बच जाये तो इसे छान लें, फिर इसमें 1 चम्मच देशी घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में रक्त गिरना बंद हो जाता है। यह गर्भवती स्त्रियों के बवासीर में ज्यादा फायदेमंद होता है।
चेहरा साफ करने के लिए :
 जीरे को उबालकर उस पानी से मुंह धोएं इससे चेहरे की सुन्दरता बढ़ जाती है।
खुजली और पित्ती : 
जीरे को पानी में उबालकर, उस पानी से शरीर को धोने से शरीर की खुजली और पित्ती मिट जाती है।

खून की कमी (रक्ताल्पता) की घरेलू चिकित्सा

पथरी, सूजन व मुत्रावरोध :
 इन कष्टों में जीरा और चीनी समान मात्रा में पीसकर 1-1 चम्मच भर ताजे पानी से रोज 3 बार खाने से लाभ होता है।
स्तनों में गांठे : 
दूध पिलाने वाली महिलाओं के स्तन में गांठ पड़ जाये तो जीरे को पानी में पीसकर स्तन पर लगायें। फायदा पहुंचेगा।
स्तनों का जमा हुआ दूध निकालना :
 जीरा 50 ग्राम को गाय के घी में भून पीसकर इसमें खांड 50 ग्राम की मात्रा में मिला देते हैं। इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह दूध के साथ प्रयोग करना चाहिए। इससे गर्भाशय भी शुद्ध हो जाता है और छाती में दूध भी बढ़ जाता है।
स्तनों में दूध की वृद्धि :
सफेद जीरा, सौंफ तथा मिश्री तीनों का अलग-अलग चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर रख लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दिन में तीन बार देने से प्रसूता स्त्री के दूध में अधिक वृद्धि होती है।
सफेद जीरा तथा सांठी के चावलों को दूध में पकाकर पीने से कुछ ही दिनों में स्तनों का दूध बढ़ जाता है।
125 ग्राम जीरा सेंककर उसमें 125 ग्राम पिसी हुई मिश्री मिला लें। इसको 1 चम्मच भर रोज सुबह और शाम को सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

कष्टसाध्य रोग जलोदर के आयुर्वेदिक घरेलू  उपचार


अजीर्ण : 
3 से 6 ग्राम भुने जीरे एवं सेंधानमक के चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार जरूर लें। इससे अजीर्ण का रोग समाप्त हो जाता है।
पेचिश : 

सूखे जीरे का 1-2 ग्राम पाउडर, 250 मिलीलीटर मक्खन के साथ दिन में चार बार लें। इससे पेचिश ठीक हो जाती है।
खट्टी डकारें : 
5-10 ग्राम जीरे को घी में मिलाकर गर्म कर लें, इसे भोजन के समय चावल में मिलाकर खाने से खट्टी डकारे आना बंद हो जाती हैं।
ब्रेन पावर : 
इसमें विटामिन B6 होते है जो ब्रेन पावर बढ़ाने में मदद करते है. इसे पीने से मेमोरी तेज होती है.

चक्कर आना के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार 

दांतों का दर्द :
काले जीरे के उबले हुए पानी से कुल्ला करने से दांतों का दर्द दूर होता है।
3 ग्राम जीरे को भूनकर चूर्ण बना लें तथा उसमें 3 ग्राम सेंधानमक मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इस मंजन को मसूढ़ों पर मलने से सूजन और दांतों का दर्द खत्म होता है।
पेशाब का बार-बार आना :
जीरा, जायफल और काला नमक 2-2 ग्राम की मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस मिश्रण को अनन्नास के 100 मिलीलीटर रस के साथ खाने से लाभ मिलता है।
मुंह की बदबू : मुंह में बदबू आती हो तो जीरे को भूनकर खाएं। इस प्रयोग से मुंह की बदबू दूर हो जाती है।
मलेरिया का बुखार :
एक चम्मच जीरे को पीसकर, 10 ग्राम गुड़ में मिला दें। इसकी 3 खुराक बनाकर बुखार चढ़ने से
जिस जीरे को आप मामूली समझते है वो इन 20 समस्याओ में संजीवनी साबित होता है

मोतियाबिंद  और कमजोर नजर के आयुर्वेदिक उपचार

जीरा का लैटिन नाम-क्यूमिनम साइमिनम हैं। यह अपच और दर्द को खत्म करता है। जीरा एक स्वादिष्ट मसाला है और औषधियों में भी जीरे का बहुत उपयोग किया जाता है। जीरा भारत में बहुत होता है। यह 3 प्रकार का होता है- सफेद जीरा, शाह जीरा या काला जीरा और कलौंजी जीरा। इनके गुण एक जैसे ही होते हैं। तीनों ही जीरे रूखे और तीखे होते हैं। ये मलावरोध, बुद्धिवर्धक, पित्तकारक, रुचिकारक, बलप्रद, कफनाशक और नेत्रों के लिए लाभकारी हैं।
सफेद जीरा दाल-सब्जी छोंकने और मसालों के काम में आता है तथा शाह जीरे का उपयोग विशेष रूप से दवा के रूप में किया जाता है। ओथमी जीरा और शंखजीरा ये 2 वस्तुएं जीरे से एकदम भिन्न है। ओथमी जीरे को छोटा जीरा अथवा ईसबगोल कहते हैं।
वजन कम : 
जीरे वाली चाय पीने से बॉडी में फैट का अब्जोब्रशन कम होता है. जिससे वजन तेज़ी से कम होने लगता है.
        इस लेख के माध्यम से दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक,comment  और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|

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14.8.17

पाचन संस्थान स्वस्थ रखने के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय /Home remedies to Keep Digestive System Healthy


    स्वस्थ शरीर पाने लिए पाचन ठीक होना आवश्यक है। हम जो कुछ भी खाते है उसे पाचन तंत्र शरीर में पहुंचाता है। पाचन तंत्र भोजन को ऊर्जा में बदल कर शरीर को पोषण और शक्ति देता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। पाचन क्रिया कमजोर हो जाने पर खाया पिया अछे से पचता नहीं और शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते। खराब पाचन से शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है जिस कारण बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। अनहेल्थी लाइफस्टाइल और खाने पीने की बुरी आदतों का बुरा प्रभाव हमारे डाइजेशन पर पड़ता है। पाचन शक्ति मजबूत ना होने पर पेट में गैस, क़ब्ज़,अल्सर, मोटापा, दुबलापन, बदहज़मी, पेट और लिवर की बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है, इसलिए जरुरी है की पाचन क्रिया ठीक करने के तरीके किये जाये। 
पाचन क्रिया कमजोर होने के निम्न कारण है-
बेवक़्त खाना
नींद पूरी ना लेना
तनाव अधिक लेना
फास्ट फुड अधिक खाना
जल्दी जल्दी भोजन खाना
शारीरिक क्रिया कम होना
एक ही जगह कई घंटे लगातार बैठ कर काम करना।

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पाचन शक्ति बढ़ाने के घरेलू नुस्खे
1. एक छोटा टकड़ा अदरक ले और इस पर नींबू का रस डाल कर चूसे, इस घरेलू नुस्खे से पाचन क्रिया बढ़ती है।
2. काला नमक, जीरा और अजवाइन बराबर मात्रा में ले और मिक्स करके इस मिश्रण का एक चम्मच पानी के ले।
3. अजवाइन के पानी से भी पाचन मजबूत होता है।
4. इलायची के बीजों को पीस कर चूर्ण बना ले और बराबर मात्रा में मिश्री मिला ले। तीन ग्राम मात्रा में ये देसी दवा दिन में दो से तीन बार खाए।
5. आँवले का पाउडर, भूना हुआ जीरा, सौंठ, सेंधा नमक, हींग और काली मिर्च मिलाकर इसकी छोटी छोटी वडी बनाकर सेवन करे। इस उपाय से पाचन शक्ति मजबूत होती है और इससे भूख भी बढ़ती है।


पाचन क्रिया ठीक करने के उपाय-

1.पुदीने का प्रयोग पेट की कई बीमारियों के उपचार में होता है। रोजाना इसका सेवन करने से पेट की बीमारियों से छुटकारा मिलता है।
2.  हरी सब्जियाँ पालक, मेथी पाचन सुधारने का अछा उपाय है, इनके सेवन से क़ब्ज़ का उपचार होता है और शरीर को ज़रूरी पोषण मिलता है।
3. मूली का सेवन पेट में गैस की समस्या में रामबाण इलाज है। मूली पर काला नमक लगाये और सलाद जैसे खाये। मूली की सब्जी और रस पिने से भी फायदा होता है। इसे रात को ना खाए।
4. संतरे का रस पीने से पाचन क्रिया दरुस्त होती है।
5. अंकुरीत गेंहू, मूँग दाल और चने खाने से भी पाचन शक्ति ठीक रहती है।
6. तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह खाली पेट पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
7.  विटामिन सी और फाइबर युक्त चीज़े खाने से डिजेस्शन की प्राब्लम से छुटकारा मिलता है।



8.  पाचन क्रिया सुधारने के लिए सलाद अधिक खाए। सलाद में टमाटर, कला नमक और नींबू का प्रयोग करे।

9. पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए पानी अधिक पिए। खाना खाने से आधा घंटा पहले गुनगुना पानी पीने से पाचन मजबूत होता है।
10. खाने में फलों का इस्तेमाल अधिक करे। फलों में पपीता, अमरूद, अंजीर, संतरे और अनार खाए। इनमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है जिससे पाचन क्रिया ठीक होती है और पेट भी साफ़ रहता है।

विशिष्ट परामर्श-

यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय  गुणों  के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली  है|औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|





13.8.17

भगंदर (फिश्चूला)की आयुर्वेदिक चिकित्सा



भगन्दर: भगन्दर गुदा क्षेत्र में होने वाली एक ऐसी बीमारी है जिसमें गुदा द्वार के आस पास एक फुंसी या फोड़ा जैसा बन जाता है जो एक पाइपनुमा रास्ता बनता हुआ गुदामार्ग या मलाशय में खुलता है.
शल्य चिकित्सा के प्राचीन भारत के आचार्य सुश्रुत ने भगन्दर रोग की गणना आठ ऐसे रोगों में की है जिन्हें कठिनाई से ठीक किया जा सकता है. इन आठ रोगों को उन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ सुश्रुत संहिता में 'अष्ठ महागद' कहा है.
भगन्दर कैसे बनता है?
गुदा नलिका जो कि एक वयस्क  मानव में लगभग ४ से.मी. लम्बी होती है, के अन्दर कुछ ग्रंथियां होती हैं व इन्ही के पास कुछ सूक्ष्म गड्ढे जैसे होते है जिन्हें एनल क्रिप्ट कहते हैं; ऐसा माना जाता है कि इन क्रिप्ट में स्थानीय संक्रमण के कारण स्थानिक शोथ हो जाता है जो धीरे धीरे बढ़कर एक फुंसी या फोड़े के रूप में गुदा द्वार के आस पास किसी भी जगह दिखाई देता है. यह अपने आप फूट जाता है. गुदा के पास की त्वचा के जिस बिंदु पर यह फूटता है, उसे भगन्दर की बाहरी ओपनिंग कहते हैं.
भगन्दर के बारे में विशेष बात यह है कि अधिकाँश लोग इसे एक साधारण फोड़ा या बालतोड़ समझकर टालते रहते हैं, परन्तु वास्तविकता यह है कि जहाँ साधारण फुंसी या बालतोड़ पसीने की ग्रंथियों के इन्फेक्शन के कारण होता है, जो कि त्वचा में स्थित होती हैं; वहीँ भगन्दर की शुरुआत गुदा के अन्दर से होती है तथा इसका इन्फेक्शन एक पाइपनुमा रास्ता बनाता हुआ बाहर की ओर खुलता है.


भगन्दर के लक्षण:

गुदा के आस पास एक फुंसी या फोड़े का निकलना जिससे रुक-रुक कर मवाद (पस) निकलता है.
प्रभावित क्षेत्र में दर्द का होना
प्रभावित क्षेत्र में व आस पास खुजली होना
पीड़ित रोगी के मवाद के कारण कपडे अक्सर गंदे हो जाते हैं.

वात रोग (जोड़ों का दर्द ,कमर दर्द,गठिया,सूजन,लकवा) को दूर करने के उपाय

आचार्य सुश्रुत ने भगन्दर और नाड़ीव्रण (sinus) में छेदन कर्म और क्षार सूत्र का प्रयोग बताया है.

आयुर्वेद क्षार सूत्र चिकित्सा :-
आयुर्वेद में एक विशेष शल्य प्रक्रिया जिसे क्षार सूत्र चिकित्सा कहते हैं, के द्वारा भगन्दर पूर्ण रूप से ठीक हो जाता है. इस विधि में एक औषधियुक्त सूत्र (धागे) को भगन्दर के ट्रैक में चिकित्सक द्वारा एक विशेष तकनीक से स्थापित कर दिया जाता है. क्षार सूत्र पर लगी औषधियां भगन्दर के ट्रैक को साफ़ करती हैं व एक नियंत्रित गति से इसे धीरे धीरे काटती हैं. इस विधि में चिकित्सक को प्रति सप्ताह पुराने सूत्र के स्थान पर नया सूत्र बदलना पड़ता है.
इस विधि में रोगी को अपने दैनिक कार्यों में कोई परेशानी नहीं होती है, उसका इलाज़ चलता रहता है और वह अपने सामान्य काम पहले की भांति कर सकता है. इलाज़ के दौरान एक भी दिन अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत नहीं होती है. क्षार सूत्र चिकित्सा सभी प्रकार के भगन्दर में पूर्ण रूप से सफल एवं सुरक्षित है. 
    इस लेख के माध्यम से दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा  मिलती है|





7.8.17

हर प्रकार की गांठ का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार //Ayurvedic home remedies for every type of lump


गांठे (Lump)

अक्सर हमारे शरीर के किसी भी भाग में गांठे बन जाती हैं. जिन्हें सामान्य भाषा में गठान या रसौली कहा जाता हैं. किसी भी गांठ की शुरुआत एक बेहद ही छोटे से दाने से होती हैं. लेकिन जैसे ही ये बड़ी होती जाती हैं. इन गाठों की वजह से ही गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं. ये गांठे टी.वी से लेकर कैंसर की बीमारी की शुरुआत के चिन्ह होती हैं. अगर किसी व्यक्ति के शरीर के किसी भाग में कोई गाँठ हो गई हैं. जिसक कारण उस गाँठ से आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव हो रहा हो. तो हो सकता हैं कि यह कैंसर की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो. लेकिन इससे यह भी सुनिश्चित नहीं हो जाता कि ये कैंसर के रोग को उत्पन्न करने वाली गांठ हैं. कुछ गाँठ साधारण बिमारी उत्पन्न होने के कारण भी हो जाती हैं. किन्तु हमें किसी भी प्रकार की गांठों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा उसका तुरंत ही उपचार करवाना चाहिए


गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) के रामबाण उपचा

कुछ स्त्रियाँ या पुरुष नासूर या ऑपरेशन कराने के डर से जल्द गाँठ का इलाज नहीं करवाते. लेकिन ऐसे व्यक्तियों के लिए यह समझना बहुत ही आवश्यक हैं कि इन छोटी सी गांठों को यदि आप लगातार नजरअंदाज करेंगें. तो इन गांठों की ही वजह से ही आपको बाद में अधिक परेशानी का सामना करना पड सकता हैं. आज हम आपको शरीर के किसी भी भाग में होने वाली गांठ को ठीक करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचारों के बारे में बतायेंगें. जिनका वर्णन नीचे किया गया हैं.
उपचार-


१.  आकडे का दूध -


 गाँठ को ठीक करने के लिए आप आकडे के दूध में मिटटीमिला लें. अब इस दूध का लेप जिस स्थान पर गाँठ हुई हैं. वहाँ पर लगायें आपको आराम मिलेगा.

२.  गेहूं का आटा –


 गेहूं का आटा लें और उसमें पानी डाल लें. अब इस आटे मेंपापड़खार मिला लें और इसका सेवन करें. आपको लाभ होगा.

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

३. . निर्गुण्डी (Nirgundi) – 




किसी भी प्रकार की गाँठ से मुक्त होने के लिए 20 से 25 मिली काढ़ा लें और उसमें 1 से 5 मिली लीटर तक अरंडी का तेल मिला लें. इन दोनों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें. तो आपकी गांठ ठीक हो जायेगी.
आपके शरीर मे कहीं पर भी किसी भी किस्म की गांठ हो। उसके लिए है ये चिकित्सा चाहे किसी भी कारण से हो सफल जरूर होती है। कैंसर मे भी लाभदायक है।
आप ये दो चीज पंसारी या आयुर्वेद दवा की दुकान से ले ले:-



रतनजोत के औषधीय प्रयोग,उपयोग,लाभ




कचनार की छाल
गोरखमुंडी-
                                                             
                                                                  गोरखमुंडी
वैसे यह दोनों जड़ी बूटी बेचने वाले से मिल जाती हैं पर यदि कचनार की छाल ताजी ले तो अधिक लाभदायक है।

कचनार का पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान है - सिरे पर से काटा हुआ पत्ता । इसकी शाखा की छाल ले। तने की न ले। उस शाखा (टहनी) की छाल ले जो 1 इंच से 2 इंच तक मोटी हो । बहुत पतली या मोटी टहनी की छाल न ले|गोरखमुंडी का पौधा आसानी से नहीं मिलता इसलिए इसे जड़ी बूटी बेचने वाले से खरीदे ।



कैसे प्रयोग करे :-


कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम (सुखी छाल 15 ग्राम ) को मोटा मोटा कूट ले। 1 गिलास पानी मे उबाले। जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे 1 चम्मच गोरखमुंडी (मोटी कुटी या पीसी हुई ) डाले। इसे 1 मिनट तक उबलने दे। छान ले। हल्का गरम रह जाए तब पी ले।


पेट मे गेस बनने के घरेलू,आयुर्वेदिक उपचार 

ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है। गांठ कैसी ही हो, प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो, जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो , गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो (Goiter) या LIPOMA (फैट की गांठ ) हो लाभ जरूर करती है। कभी भी असफल नहीं होती। अधिक लाभ के लिए दिन मे 2 बार ले। लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा। 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े।
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4.8.17

मूत्र विकार के के आयुर्वेदिक घरेलु उपचार//Ayurvedic Home Remedies for Urinary Disorders/


मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं| यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं| यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं|

मूत्र विकार का कारण

यदि मूत्राशय में पेशाब इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध कहते हैं| स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब रुक जाता है| वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट ग्लैंड) बढ़ जाती है जिसके कारण उनका मूत्र रुक जाता है|

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है| जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो पेशाब रुक जाता है| इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है|


मूत्र विकार की पहचान

मूत्र की कमी या न निकलने से मूत्राशय फूल जाता है| रोगी को बड़ी बेचैनी होती है| मूत्र बड़े कष्ट के साथ बूंद-बूंद करके निकलता है| कब्ज, मन्दाग्नि, अधिक प्यास, पेशाब अधिक आने, मूत्र पीला होने आदि के कारण रोगी को नींद नहीं आती| वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है| कमर, जांघों तथा पिंडलियों में दर्द होता है|
मूत्र विकार के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*



मक्का, पानी और मिश्री

मक्के के भुट्टे (कच्ची मक्का) को पानी उबाल लें| फिर लगभग एक गिलास पानी छानकर उसमें मिश्री मिलाकर पी जाएं| इससे पेशाब की जलन जाती रहती है|

ईसबगोल

लगभग चार चम्मच ईसबगोल की भूसी पानी में भिगो दें| फिर उसमें बूरा डालकर पी जाएं| पेशाब की जलन शान्त हो जाएगी|

चावल और चीनी

एक कप चावल का मांड़ लेकर उसमें चीनी मिलाकर पिएं|

लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत करें ये पाँच उपाय 

तरबूज और मिश्री

पेशाब की जलन दूर करने के लिए रात में तरबूज को ओस में रखें तथा सुबह उसका रस निकालकर मिश्री मिलाकर पी जाएं|

फालसे और काला नमक

चार चम्मच फालसे के रस में काला नमक डालकर पिएं| पेशाब की जलन जाती रहेगी|

पानी और जौ

एक गिलास पानी में 25 ग्राम जौ उबालें| फिर उसे ठंडा करके केवल पानी को घूंट-घूंट पिएं|

पानी, काला नमक, जीरा, कालीमिर्च और शक्कर

थोड़ा-सा बथुआ पानी में उबालें| फिर उसमें काला नमक, भुना जीरा, कालीमिर्च तथा जरा-सी शक्कर डालकर सेवन करें
प्याज, पानी और चीनी

50 ग्राम प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े काटें| फिर एक गिलास पानी में वह प्याज उबालकर छान लें| अब उसमें थोड़ी-सी चीनी डालकर सेवन करें| यह मूत्र रोगी के लिए बड़ा अच्छा नुस्खा है|

पानी, शक्कर और शहद

हरे आंवले के रस को पानी में मिलाकर पिएं| स्वाद के लिए जरा-सी शक्कर या शहद डाल लें|

कलमी शोरा और इलायची

कलमी शोरा दो चम्मच तथा बड़ी इलायची के दानों का चूर्ण एक चम्मच-दोनों को मिलाकर सेवन करें|




कालीमिर्च और शहद

बेल के पत्तों को पानी में पीस लें| इसमें जरा-सी कालीमिर्च तथा दो चम्मच शहद मिलाएं| फिर घूंट-घूंट पी जाएं|

*किडनी में क्रिएटिनिन और यूरिया की समस्या के घरेलू उपचार* 



सोंठ, दूध और मिश्री

यदि पेशाब करते समय दर्द होता हो तो दूध में सोंठ और मिश्री मिलाकर सेवन करें|

काला तिल और गुड़

काले तिल में गुड़ मिलाकर खाने से बहुमूत्र रोग ठीक हो जाता है|

जावित्री, मिश्री और गाय का दूध

1 ग्राम जावित्री तथा 5 ग्राम मिश्री को गाय के दूध के साथ लें|

हल्दी और दूध

सुबह-शाम 5-5 ग्राम पिसी हल्दी को दूध के साथ लेने से बहुमूत्रता की व्याधि खत्म हो जाती है


कान दर्द,कान पकना,बहरापन के उपचार


पालक और नारियल

यदि पेशाब में जलन हो, खुलकर पेशाब न आए या बूंद-बूंद पेशाब हो तो पालक के एक कप रस में आधा कप नारियल का पानी मिलाकर पी जाएं|

मूत्र विकार में क्या खाएं क्या नहीं 


उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें| सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा आदि का सेवन करें| दालों में मूंग व चने की दाल खाएं| अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें| फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें| गुड़, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले, मैथुन तथा अधिक व्यायाम से परहेज करें| गन्ने के ताजे रस में नीबू तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है| मूत्र खुलकर आता है|

विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की   केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 




 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl