किडनी (गुर्दे) सेम के आकार के दो महत्वपूर्ण अंग हैं, जो आपकी पीठ में पसलियों के नीचे रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होते हैं; इनका मुख्य काम खून को छानना, शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट (waste) पदार्थों को मूत्र के रूप में बाहर निकालना, रक्तचाप को नियंत्रित करना और शरीर के तरल पदार्थों व इलेक्ट्रोलाइट्स (खनिजों) को संतुलित करना है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है.
किडनी खराब होने के मुख्य कारण डायबिटीज (मधुमेह) और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) हैं , जो किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं; इनके अलावा, बार-बार होने वाले इन्फेक्शन, पथरी, कुछ दवाओं (जैसे पेनकिलर) का अधिक सेवन, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), धूम्रपान, मोटापा, और पॉलीसिस्टिक किडनी रोग जैसे आनुवंशिक विकार भी किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।
किडनी खराब होने के प्रमुख कारण:
डायबिटीज (मधुमेह):
अनियंत्रित ब्लड शुगर किडनी को नुकसान पहुँचाता है, जिससे वे रक्त को ठीक से फिल्टर नहीं कर पातीं।
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure):
लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर उन्हें क्षति पहुँचाता है।
दवाओं का अत्यधिक सेवन:
डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर (NSAIDs) जैसी दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
बार-बार होने वाले इन्फेक्शन:
मूत्र मार्ग (Urinary Tract) या किडनी में बार-बार होने वाले संक्रमण (Infection) से किडनी खराब हो सकती है।
डिहाइड्रेशन (पानी की कमी):
शरीर में पानी की कमी होने से विषाक्त पदार्थ जमा हो सकते हैं और किडनी पर दबाव बढ़ सकता है।
धूम्रपान:
धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है और किडनी में रक्त संचार को कम करता है।
अस्वस्थ आहार:
नमक और प्रोसेस्ड फूड से भरपूर आहार रक्तचाप बढ़ाता है और किडनी पर अतिरिक्त भार डालता है।
आनुवंशिक बीमारियाँ:
पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) जैसे पारिवारिक इतिहास वाली बीमारियाँ किडनी फेलियर का कारण बन सकती हैं।
ऑब्स्ट्रक्शन (रुकावट):
किडनी स्टोन (पथरी) या ट्यूमर के कारण मूत्र मार्ग में रुकावट भी किडनी फेलियर का कारण बन सकती है।
मोटापा:
अधिक वजन होने से ऐसी स्थितियाँ पैदा होती हैं जो किडनी फेलियर का कारण बन सकती हैं।
बचाव के तरीके:
ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
खूब पानी पिएं और डिहाइड्रेशन से बचें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें।
स्वस्थ आहार लें और नमक का सेवन कम करें।
धूम्रपान से बचें।
इन कारणों को समझकर और जीवनशैली में बदलाव करके किडनी को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।
किडनी खराब होने के लक्षणों में थकान, पैरों और टखनों में सूजन, पेशाब में बदलाव (कम या ज़्यादा आना, झाग, खून), मतली, उल्टी, भूख में कमी, सांस लेने में तकलीफ, खुजली और रात में बार-बार पेशाब आना शामिल हैं, जो शरीर में अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने के कारण होते हैं, इसलिए इन संकेतों पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है.
किडनी खराब होने के प्रमुख लक्षण:थकान और कमजोरी: किडनी के ठीक से काम न करने से खून में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है.
पेशाब में बदलाव:
पेशाब कम या ज़्यादा आना.
पेशाब में झाग या खून दिखना.
पेशाब करते समय दर्द या कठिनाई होना.
रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना.
सूजन: पैरों, टखनों, और चेहरे पर सूजन (एडिमा), क्योंकि किडनी अतिरिक्त तरल
पदार्थ नहीं निकाल पाती.
मतली और उल्टी:
रक्त में अपशिष्ट जमा होने से भूख न लगना, मतली और उल्टी हो सकती है.
सांस लेने में तकलीफ: फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने के कारण सांस फूलना.
त्वचा में खुजली और सूखापन:
शरीर में विषाक्त पदार्थों के जमाव से त्वचा में तेज खुजली होती है.
मांसपेशियों में ऐंठन: इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण मांसपेशियों में ऐंठन (cramps) हो सकती है.
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई:
मानसिक भ्रम या एकाग्रता की कमी महसूस होना.
पीठ या कमर में दर्द:
किडनी के स्थान पर दर्द महसूस होना.
भूख और स्वाद में बदलाव:
भोजन का स्वाद कड़वा लगना या भूख कम लगना.
किडनी विफलता (Kidney Failure) या खराब कार्यक्षमता का पता लगाने के लिए
खून (ब्लड) की जांच (KFT - Kidney Function Test) में निम्नलिखित मुख्य पदार्थ बढ़े हुए पाए जाते हैं:
सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine):
यह किडनी फेल होने का सबसे प्रमुख संकेतक है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो मांसपेशियों द्वारा उत्पादित यह अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और खून में जमा होने लगता है।
ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN - Blood Urea Nitrogen):
किडनी खराब होने पर खून में यूरिया का स्तर बढ़ जाता है, जो प्रोटीन के टूटने से बनता है।
यूरिक एसिड (Uric Acid):
किडनी खराब होने पर शरीर से यूरिक एसिड का उत्सर्जन कम हो जाता है, जिससे इसका स्तर खून में बढ़ जाता है।
पोटेशियम (Potassium):
किडनी के काम न करने से शरीर में पोटेशियम की मात्रा बढ़ जाती है (हाइपरकलेमिया), जो गंभीर स्थिति हो सकती है।
फास्फोरस (Phosphorus):
किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता कम होने पर फॉस्फोरस का स्तर भी खून में बढ़ जाता है।
किडनी खराब होने पर दर्द किस क्षेत्र में होता है?
दर्द पीठ के निचले हिस्से और कमर के आसपास के क्षेत्र में देखा जा सकता है
किडनी के लिए कौन सा फल सबसे अच्छा है?
सबसे अच्छे फल केले, संतरे और तरबूज हैं क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थ होता है जो किडनी की कार्यक्षमता में सुधार करता है।
गुर्दे की विफलता के पहले लक्षण क्या हैं?
पेशाब के समय में बदलाव, बार-बार पेशाब आना, उल्टी और थकान किडनी खराब होने के कुछ शुरुआती लक्षण हैं
यहाँ कुछ सामान्य आयुर्वेदिक उपाय और जीवनशैली में बदलाव दिए गए हैं जो गुर्दे के कार्य में सहायता कर सकते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा डॉक्टर के मार्गदर्शन में ही अपनाना चाहिए:
आहार और जीवनशैली में परिवर्तनकम नमक वाला आहार:
सोडियम का सेवन कम करने से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जिससे गुर्दों पर दबाव कम पड़ता है पोटेशियम और फास्फोरस पर नियंत्रण: गुर्दे
की विफलता के चरण के आधार पर, डॉक्टर पोटेशियम (जैसे केला, आलू) और फास्फोरस (जैसे डेयरी उत्पाद, कुछ मेवे) युक्त खाद्य पदार्थों को सीमित करने की सलाह दे सकते हैं
किडनी खराब होने की स्थिति में आहार और जीवनशैली (खान-पान और रहन-सहन) में विशेष बदलाव करना महत्वपूर्ण है। यह किडनी पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है।
आहार में क्या शामिल करें (What to Eat)कम पोटैशियम वाले फल: सेब, नाशपाती, अनानास, जामुन (स्ट्रॉबेरी, क्रैनबेरी) और आड़ू जैसे फल अच्छे विकल्प हैं।
सब्जियां: गोभी, खीरा और शिमला मिर्च जैसी कम पोटैशियम वाली सब्जियां खाएं।
प्रोटीन: डॉक्टर की सलाह के अनुसार, सही मात्रा में मछली, अंडे का सफेद भाग, और लीन मीट (वसा रहित मांस) का सेवन करें। डायलिसिस के मरीजों को अक्सर उच्च प्रोटीन आहार की सलाह दी जाती है।
साबुत अनाज (सीमित मात्रा में): सफेद ब्रेड या सफेद चावल, साबुत अनाज के मुकाबले बेहतर विकल्प हो सकते हैं क्योंकि इनमें पोटैशियम और फास्फोरस कम होता है।
तेल: ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली (जैसे सैल्मन) रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
हाइड्रेशन: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन डॉक्टर द्वारा बताई गई तरल पदार्थ की कुल मात्रा का ध्यान रखें।
किन चीजों से परहेज करें (What to Avoid)सोडियम (नमक): डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड स्नैक्स, फास्ट फूड और अचार से बचें, क्योंकि इनमें नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो उच्च रक्तचाप का कारण बन सकती है।
पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ: केला, संतरा, एवोकाडो, टमाटर, पालक और सूखे मेवे से परहेज करें या इनका सेवन सीमित करें।
फास्फोरस: डेयरी उत्पाद (दूध, दही, पनीर), साबुत गेहूं की ब्रेड, और गहरे रंग के सोडे (dark sodas) में फास्फोरस अधिक होता है, इसलिए इन्हें सीमित करें।
अतिरिक्त चीनी और वसा: केक, बिस्कुट, तले हुए चिप्स और मीठे पेय पदार्थों से बचें。
दर्द निवारक दवाएं (NSAIDs): डॉक्टर की सलाह के बिना इबुप्रोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दवाएं न लें, क्योंकि ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes)
नियमित व्यायाम: डॉक्टर की सहमति से नियमित रूप से व्यायाम करें (जैसे चलना, तैरना)।
वजन नियंत्रण: स्वस्थ वजन बनाए रखें।
धूम्रपान और शराब: धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन सीमित करें या बंद कर दें।
तनाव प्रबंधन: ध्यान या योग के माध्यम से तनाव को प्रबंधित करें।
नियमित जाँच: रक्तचाप, रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) और कोलेस्ट्रॉल के स्तर की नियमित रूप से निगरानी करें और डॉक्टर से नियमित जांच कराएं। पर्याप्त पानी का सेवन: हाइड्रेशन महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर गुर्दे की विफलता में, शरीर तरल पदार्थ को ठीक से संसाधित नहीं कर पाता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें
प्रोटीन का सेवन:
बहुत अधिक प्रोटीन गुर्दों पर दबाव डाल सकता है। डॉक्टर आपके लिए सही मात्रा में प्रोटीन की सलाह देंगे
किडनी खराब होने मे उपयोगी सहायक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ-आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर कुछ जड़ी-बूटियों का उपयोग गुर्दे के कार्य को समर्थन देने के लिए करते हैं, लेकिन इनकी प्रभावशीलता और सुरक्षा व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है:
गोक्षुर (Gokshura): यह मूत्र पथ के स्वास्थ्य में सहायता करता है और गुर्दे के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
वरुण (Varuna): यह जड़ी-बूटी गुर्दे से संबंधित समस्याओं में सहायक मानी जाती है।
आंवला, हल्दी, और अन्य:
कुछ प्राकृतिक यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं जो गुर्दे के कार्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
पथरचट्टा (Patharchatta): कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह गुर्दे की पथरी और समग्र गुर्दे के स्वास्थ्य में मदद कर सकता है।
किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता बढ़ाने में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| किडनी ख़राब होने के लक्षण जैसे युरिनरी फंक्शन में बदलाव,शरीर में सूजन आना ,चक्कर आना और कमजोरी,स्किन खुरदुरी हो जाना और खुजली होना,हीमोग्लोबिन की कमी,उल्टियां आना,रक्त में यूरिया बढना आदि लक्षणों में दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि रामबाण की तरह असरदार सिद्ध होती है|डायलिसिस पर आश्रित रोगी भी लाभान्वित हुए हैं| औषधि हेतु Damodar hospital & reaserch center शामगढ़ से संपर्क कर सकते हैं
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