18.11.10

मोटापा से मुक्ति पाएँ


मोटापा निवारण के सरल उपचार

                             


                       
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           मोटापे से कई बीमारियां जन्म लेती हैं जैसे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर। स्त्री हो या पुरुष, उनका वजन उनकी लंबाई के हिसाब से होना चाहिए जैसे 5 फिट लंबाई हो तो वजन 60 किलोग्राम कुछ कम या ज्यादा हो तो एडजस्ट किया जा सकता है। मोटापे का मतलब है हमारी ऊंचाई के अनुपात में अत्यधिक वजन होना। मोटापे की समस्या होने पर व्यक्ति का पूरा शरीर थुलथुला हो जाता है और मांसपेशियां भी ढीली हो जाती है। कूल्हे व पीठ का भाग बढ़ जाता है, पेट लटक जाता है, हाथ व जांघ थुलथुले हो जाते हैं। यह सभी मोटापे के ही लक्षण हैं।
 मोटापा होने के कारण--

१) शरीर की आवश्यक्ता से ज्याद केलोरी वाला भोजन खाना।
२) मेटाबोलिस्म(चयापचय)की दर कम होना।
३)थायराईड अथवा पीयूष ग्रंथि( पिचुट्री) के विकार।
४) अधिक समय बैठक का जीवन।
५) हार्मोन का असंतुलन होना।


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 लगभग प्रतिदिन मांस-मदिरा का सेवन करने वाले लोगों में तो मोटापे की समस्या रहती ही है। मांस से शरीर में चर्बी बढ़ती है।

हमारे शरीर में ऊर्जा ज्यादा उत्पन्न होती है और उस ऊर्जा का पूर्ण उपयोग ना होने पर वह शरीर के उन्हीं भागों में चर्बी के रूप में जमा हो जाती है। इसके परिणाम स्वरूप वजन बढऩे लगता है।

शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने के कुदरती उपचार-




१)  चर्बी घटाने के लिये व्यायाम बेहद आवश्यक उपाय है।एरोबिक कसरतें भी लाभप्रद होती हैं। आलसी जीवन शैली से मोटापा बढता है। अत: सक्रियता बहुत जरूरी है।



२) शहद मोटापा निवारण के लिये अति महत्वपूर्ण पदार्थ है। एक चम्मच शहद आधा चम्मच नींबू का रस गरम जल में मिलाकर लेते रहने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी नष्ट होती है। यह दिन में ३ बार लेना कर्तव्य है।









३) पत्ता गोभी(बंद गोभी) में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबोलिस्म ताकतवर बनता है। फ़लत: ज्यादा केलोरी का दहन होता है। इस प्रक्रिया में चर्बी समाप्त होकर मोटापा निवारण में मदद मिलती है।









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४) पुदीना में मोटापा विरोधी तत्व पाये जाते हैं। पुदीना रस एक चम्मच २ चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से उपकार होता है।








५) सुबह उठते ही २५० ग्राम टमाटर का रस २-३ महीने तक पीने से शरीर की वसा में कमी होती है।










६) गाजर का रस मोटापा कम करने में उपयोगी है। करीब ३०० ग्राम गाजर का रस दिन में किसी भी समय लेवें।












शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 


७) एक अध्ययन का निष्कर्ष आया है कि वाटर थिरेपी मोटापा की समस्या हल करने में कारगर सिद्ध हुई है। सुबह उठने के बाद प्रत्येक घंटे के फ़ासले पर २ गिलास पानी पीते रहें। इस प्रकार दिन भर में कम से कम २० गिलास पानी पीयें। इससे विजातीय पदार्थ शरीर से बाहर निकलेंगे और चयापचय प्रक्रिया(मेटाबोलिस्म) तेज होकर ज्यादा केलोरी का दहन होगा ,और शरीर की चर्बी कम होगी। अगर २ गिलास के बजाये ३ गिलास पानी प्रति घंटे पीयें तो और भी तेजी से मोटापा निवारण होगा।
८) कम केलोरी वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग करें। जहां तक आप कम केलोरी वाले भोजन की आदत नहीं डालेंगे ,मोटापा निवारण दुष्कर कार्य रहेगा। अब मैं ऐसे भोजन पदार्थ निर्देशित करता हूं जिनमें नगण्य केलोरी होती है। अपने भोजन में ये पदार्थ ज्यादा शामिल करें--

नींबू

जामफ़ल (अमरुद)

अंगूर

सेवफ़ल

खरबूजा

जामुन

पपीता

आम


नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 


संतरा

पाइनेपल

टमाटर

तरबूज

बैर




स्ट्राबेरी

सब्जीयां जिनमें नहीं के बराबर केलोरी होती है--

पत्ता गोभी

फ़ूल गोभी

ब्रोकोली

प्याज

मूली

पालक

शलजम

सौंफ़

लहसुन

९) कम नमक,कम शकर उपयोग करें।









१०) अधिक वसा युक्त भोजन पदार्थ से परहेज करें। तली गली चीजें इस्तेमाल करने से चर्बी बढती है। वनस्पति घी बेहद हानिकारक है।

११) सूखे मेवे (बादाम,खारक,पिस्ता) ,अलसी के बीज,ओलिव आईल में उच्चकोटि की वसा होती है। इनका संतुलित उपयोग उपकारी है।

पिपली  के गुण प्रयोग लाभ 




१२) शराब और दूध निर्मित पदार्थों का उपयोग वर्जित है।












१३) अदरक चाकू से बरीक काट लें ,एक नींबू की चीरें काटकर दोनो पानी में ऊबालें। सुहाता गरम पीयें। बढिया उपाय है।













१४) रोज पोन किलो फ़ल और सब्जी का उपयोग करें।













१५) ज्यादा कर्बोहायड्रेट वाली वस्तुओं का परहेज करें।शकर,आलू,और चावल में अधिक कार्बोहाईड्रेट होता है। ये चर्बी बढाते हैं। सावधानी बरतें।कम खाएं।





१६) केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं सोयाबीन,चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फ़यदेमंद है।


१७) शरीर के वजने को नियंत्रित करने में योगासन का विशेष महत्व है। कपालभाति,भस्त्रिका का नियमित अभ्यास करें।
१८) सुबह आधा घंटे तेज चाल से घूमने जाएं। वजन घटाने का सर्वोत्तम तरीका है।



१९) भोजन मे ज्यादा रेशे वाले पदार्थ शामिल करें। हरी सब्जियों ,फ़लों में अधिक रेशा होता है। फ़लों को छिलके सहित खाएं। आलू का छिलका न निकालें। छिलके में कई पोषक तत्व होते हैं।









मस्सों को जड़ से ख़त्म करने के रामबाण आयुर्वेदिक उपचार

20) मोटापा एवं अनेक रोगों से मुक्त होने का एक और अचूक उपाय-...
मेथी दाना -250 ग्राम
अजवाइन-100 ग्राम ,
काली जीरा-50 ग्राम
।उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेक लें ,फिर तीनों को मिलाकर मिक्सर में इसका पॉवडर
बनालें और कांच की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय आधा चम्मच पॉवडर एक गिलास
कुनकुने पानी के साथ नित्य लें ,इसके बाद कुछ भी खाना या पीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के लोग ले सकते हैं
फायदा पूर्ण रूप से 80-90 दिन में हो जायेगा ।
बने शाकाहारी :
शाकाहार अपनाने से आपकी लाइफ स्‍टाइल में कई बदलाव आएंगे, लेकिन वे कारगार और प्रभावी होंगे। अध्‍ययन बताते हैं कि ज्‍यादा मांसाहार के सेवन का असर भी मोटापे पर पड़ता है।

यदि आप अधिक मांसाहार करते हैं तो एकदम से इसें बंद करना आसान नहीं होता। जब तक आप पूर्ण रूप से इसे न छोड़ पाएं, तब तक मांसाहार और शाकाहार का सेवन जारी रखें और धीरे-धीरे शाकाहार को पूरी तरह अपनाएं।

मलेरिया की जानकारी और विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से इलाज  

फास्‍ट फूड से तौबा :
तली हुई चीजे जैसे- आलू चिप्‍स, कुकीज का कम से कम उपयोग करें। फास्‍ट फूड जैसे- बर्गर, पिज्‍जा की जगह सलाद, फ्रूट जैसी स्‍वस्‍थ चीजों का चुनाव करें।
फाइबर युक्‍त भोजन -
खाने में फाइबर युक्‍त भोजन लें। यह आपके शरीर को कोलेस्‍ट्रोल से बचाता है और उसे आपके शरीर से बाहर करता है। फाइबरयुक्‍त भोजन आपके शरीर की एक्‍स्‍ट्रा कैलोरी को भी बर्न करता है|

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6.11.10

सूखी खांसी की आयुर्वेदिक घरेलु चिकित्सा


                                                               
                       

श्वसन पथ में एकत्र विजातीय तत्वों को बाहर निकालने के लिये खांसी शरीर की नैसर्गिक प्रक्रिया है। खांसी दो प्रकार की होती है।
१) गीली या उत्पादक खांसी जिसमें खांसी होने पर कफ़ या श्लेष्मा निकलती है।
२) सूखी या खोखली खांसी जिसमें कफ़ नहीं निकलता है।
खांसी का प्राकृतिक पदार्थों से इलाज करना निरापद और शीघ्र प्रभावकारी है। रसायनिक फ़ार्मुलों से इलाज के कई साईड इफ़ेक्ट सामने आते हैं। सैंकडो वर्षों से लाभप्रद साबित हो रहे खांसी के निरापद उपचार नीचे दिये जा रहे हैं--
 १) अदरक का रस ५ मिलि निकालकर १० ग्राम शहद में मिलाएं। दिन में चार बार लेने से खांसी में लाभ होता है।


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२) काली मिर्च और शकर बराबर मात्रा में पीस लें। अब गाय के शुद्ध घी में इस पावडर को मिलाकर गोलियां बनालें। दिन में तीन बार गोली चूसें । खांसी की अच्छी दवा है।



३) सूखी खांसी निवारण के लिये २ ग्राम हल्दी पावडर में एक चम्मच शहद मिलाकर चाट लें । दिन में दो बार सेवन करना हितकारी रहता है।
४) नींबू का रस ५० मिलि, शहद २०० ग्राम , अदरक रस २० ग्राम मिलाएं । इसमें ५० मिलि गरम पानी मिश्रित करें । खांसी का की दवा तैयार है। शीशी में भर लें। २-२ चम्मच दिन में ३-४ बार कुछ दिन लेने से खांसी ठीक हो जाती है।
५) अंगूर में फ़ेफ़डे को शक्ति देने के गुण है। इससे इम्यून सिस्टम(सुरक्षा तंत्र) मजबूत होता है। एक गिलास अंगूर का रस कुछ दिन सेवन करना फ़ायदेमंद है। आर्थिक असुविधा न हो तो इसे लंबे समय तक जारी रख सकते हैं।


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६) काली मिर्च 7 नग, शहद के साथ पीस लें। दिन में तीन बार यह नुस्खा बनाकर चाट लेने से सूखी खांसी में आशानुरुप लाभ होता है।

७) ग्लीसरीन ३० मिलि,नींबू का रस ३० मिलि,शहद ३० मिलि सबको मिलालें । दवा तैयार है। ५ से १० मिलि दवा दिन में ३ बार लेने से खांसी रोग शीघ्र ही नियंत्रण में आ जाता है।
८) काली मिर्च को शकर के साथ चबाकर खाने से सूखी खांसी में राहत मिलती है।
९) लहसून खांसी में बेहद लाभप्रद है। ३-४ लहसून की कली चाकू से बारीक काटकर १०० मिलि दूध में उबालकर रात को सोते वक्त लेने से खांसी में लाभ होता है।
१०) १०-१५ ग्राम गुड को सरसों के तेल मे अच्छी तरह घोटकर दिन में दो-तीन बार चाटने से खांसी काबू में आ जाती है।
११) पालक का रस २०० मिलि गाजर का रस ३०० मिलि मिलाकर सुबह के वक्त लेते रहने से खांसी में स्थायी लाभ होता है।



भटकटैया (कंटकारी)के गुण,लाभ,उपचार




१२) २-३ ग्राम हल्दी का पावडर ५० मिलि दूध में उबालकर लेने से खांसी ठीक होती है।दिन में दो बार लेना उत्तम है।
१३) आम को भोभर में भून लें। इस प्रकार भुना हुआ आम दिन में तीन बार खाने से सूखी खांसी का निवारण होता है।
१४) खारक में फ़ेफ़डे को शक्ति देने के गुण हैं। रात को सोते वक्त ५ नग खारक दूध में उबालकर लेना आशातीत गुणकारी है।
१५) ताजा अदरक का एक टुकडा चाकू से काट लें उस पर नमक बुरकें और मुहं मे चूसें। बहुत लाभकारी उपाय है।


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14.6.10

मोतियाबिंद और कमजोर नजर के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार.


                                                                                                             
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      नेत्र रोगों में कुदरती पदार्थों से ईलाज करना फ़ायदेमंद रहता है। कम उम्र में चश्मा लगना आजकल आम बात होती जा रही है| लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी कारण से एक बार चश्मा लग गया तो वह उतर नहीं सकता | ऐनक लगने के प्रमुख कारण आँखों की भली प्रकार देख रेख नहीं करना,पोषक तत्वों की कमी, या आनुवांशिक हो सकता है| इनमें से आनुवांशिक को छोडकर अन्य कारण से लगा चश्मा सही देख भाल ,व् खान पान का ध्यान रखने के आलावा देशी उपचार के द्वारा उतारा जा सकता है|
      मोतियाबिंद बढती उम्र के साथ अपना तालमेल बिठा लेता है। अधिमंथ बहुत ही खतरनाक रोग है जो बहुधा आंख को नष्ट कर देता है। आंखों की कई बीमारियों में नीचे लिखे सरल उपाय करने हितकारी सिद्ध होंगे-


१) सौंफ़ नेत्रों के लिये हितकर है। मोतियाबिंद रोकने के लिये इसका पावडर बनालें। एक बडा चम्मच भर सुबह शाम पानी के साथ लेते रहें। नजर की कमजोरी वाले भी यह उपाय करें।



२) विटामिन ए नेत्रों के लिये अत्यंत फ़ायदेमंद होता है। इसे भोजन के माध्यम से ग्रहण करना उत्तम रहता है। गाजर में भरपूर बेटा केरोटिन पाया जाता है जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। गाजर कच्ची खाएं और जिनके दांत न हों वे इसका रस पीयें। २०० मिलि.रस दिन में दो बार लेना हितकर माना गया है। इससे आंखों की रोशनी भी बढेगी। मोतियाबिंद वालों को गाजर का उपयोग अनुकूल परिणाम देता है।






३) आंखों की जलन,रक्तिमा और सूजन हो जाना नेत्र की अधिक प्रचलित व्याधि है। धनिया इसमें उपयोगी पाया गया है।सूखे धनिये के बीज १० ग्राम लेकर ३०० मिलि. पानी में उबालें। उतारकर ठंडा करें। फ़िर छानकर इससे आंखें धोएं। जलन,लाली,नेत्र शौथ में तुरंत असर मेहसूस होता है





४) आंवला नेत्र की कई बीमारियों में लाभकारी माना गया है। ताजे आंवले का रस ५ मिलि. इतने ही शहद में मिलाकर रोज सुबह लेते रहने से आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है। मोतियाबिंद रोकने के तत्व भी इस उपचार में मौजूद हैं।

५) भारतीय परिवारों में खाटी भाजी की सब्जी का चलन है।इसका अंग्रेजी नाम Indian red sorrel है| खाटी भाजी के पत्ते के रस की कुछ बूंदें आंख में सुबह शाम डालते रहने से कई नेत्र समस्याएं हल हो जाती हैं। मोतियाबिंद रोकने का भी यह एक बेहतरीन उपाय है।
६) अनुसंधान में साबित हुआ है कि कद्दू के फ़ूल का रस दिन में दो बार आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है। कम से कम दस मिनिट आंख में लगा रहने दें।



७) घरेलू चिकित्सा के जानकार विद्वानों का कहना है कि शहद आंखों में दो बार लगाने से मोतियाबिंद नियंत्रित होता है।

८) लहसुन की २-३ कुली रोज चबाकर खाना आंखों के लिये हितकर है। यह हमारे नेत्रों के लेंस को स्वच्छ करती है।
९) पालक का नियमित उपयोग करना मोतियाबिंद में लाभकारी पाया गया है। इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। पालक में पाया जाने वाला बेटा केरोटीन नेत्रों के लिये परम हितकारी सिद्ध होता है। ब्रिटीश मेडीकल रिसर्च में पालक का मोतियाबिंद नाशक गुण प्रमाणित हो चुका है
१०) एक और सरल उपाय बताते हैं| अपनी दोनों हथेलियां आपस में रगडें कि कुछ गर्म हो जाएं| फिर आंखों पर ऐसे रखें कि ज्यादा दबाव मेहसूस न हो। हां, हल्का सा दवाब लगावे। दिन में चार-पांच बार और हर बार आधा मिनिट के लिये करें। आंखों की रोशनी बढाने का नायाब तरीका है|
११) किशमिश ,अंजीर और खारक पानी में रात को भिगो दें और सुबह खाएं । मोतियाबिंद और ज्योति बढाने की अच्छी घरेलू दवा है।
१२) भोजन के साथ सलाद ज्यादा मात्रा में शामिल करें । सलाद पर थोडा सा जेतून का तेल भी डालें। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के गुण हैं जो नेत्रों के लिये भी हितकर है।

१३) पाठकों , अब मैं वो उपचार बता रहा हूँ जिससे कई लोगों के चश्मे उतर गए हैं| नेत्र ज्योति वर्धक इस उपचार की जितनी भी प्रशंसा की जाय थोड़ी है| इसमें तीन पदार्थ जरूरी हैं| बड़ी सौंफ,मिश्री और बादाम | तीनों बराबर मात्रा में १००-१०० ग्राम लेकर महीन पीस लें | कांच के बर्तन में भर कर रखें| रात को सोते वक्त दस ग्राम चूर्ण एक गिलास गरम दूध के साथ लें| यह प्रयोग ४०-५० दिन तक निरंतर करना है|
१४) सूरज मुखी के बीजों का सेवन करना आंखों के लिए सेहतमंद रहता है| इसमें विटामिन सी,विटामिन ई,बीता केरोटीन और एंटीआक्सीडेंटस होते है जो आंखों की कमजोरी दूर करते हैं|
१५) दूध व् अन्य डेयरी उत्पाद का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करना नेत्र विकारों में फायदेमंद रहता है| इन चीजों से आखों को उचित पोषण मिलता है|



१६) केवल बादाम का सेवन भी आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है| रोजाना चलते फिरते ८-१० बादाम खाने से जरूरी मात्रा में विटामिन ई प्राप्त होने से आँखें स्वस्थ रहती हैं| बादाम में रेशा,वसा,विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं| आयुर्वेद में उल्लेख है कि बादाम को भिगोकर खाने के बजाय अंकुरित करके खाना ज्यादा लाभप्रद होता है| अंकुरित करने के लिये बादाम १२ घंटे पानी में भिगोएँ | छानकर बादाम सुखालें| कांच के जार में रखें और अंकुरित होने के लिये ३- ४ दिन फ्रीज में रखें|
रात को नो बादाम भिगोएँ ,सुबह पीसकर पानी में घोलकर पी जाएँ| इससे आँखे स्वस्थ रहती हैं| और निरंतर उपयोग से आँखों का चश्मा भी उतर जाएगा|
१७) आँखों को स्वस्थ रखने के लिए सोया मिल्क ,दही,मूंगफली,खुबानी का उचित मात्रा में सेवन करना लाभ दायक है|
१८) एक शौध के अनुसार हरे पतेदार सब्जियों में केरोटिन नामक पिगमेंट की ऐसी मात्रा मौजूद रहती है जिसमें आँखों की रोशनी तेज करने की क्षमता होती है| विशेषज्ञों के अनुसार यह कुदरती केरोटीनाईड आँख की पुतली पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और आँखों की रोशनी सुरक्षित रखने के अलावा अनेक नेत्र रोगों से भी बचाव करता है|
१९) एक चने के दाने बराबर फिटकरी को सेककर इसे १०० ग्राम गुलाब जल में डालें और रोजाना सोते वक्त २-बूँदें आँख में डालने से चश्मे का नंबर कम हो जाता है|
२०) बिल्व पत्र का ३० मिली रस पीने और २-४ बूँद रस आँखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग में लाभ होता है| अंगूर का रस भी आँखों के लिए वरदान तुल्य माना गया है|
२१) इलायची आँखों के लिये बहुत लाभदायक होती है\ रात को सोने से पहले २ इलायची पीसकर दूध में डालें| अच्छी तरह उबालकर फिर मामूली गरम हालत में पी जायें| इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है|
२२) अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते रहने से नेत्र ज्योति बढ़ती है|
२३) हल्दी की गांठ को तुवर की दाल में उबालकर फिर छाया में सुखाकर रखलें| इसे पानी में घिसकर सूर्यास्त से पूर्व आँखों में काजल की तरह लगाएं | आँखे स्वस्थ रहती हैं और आँखों की लालिमा भी दूर होती है|


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की अमृत औषधि 

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार






4.6.10

संधिवात (आर्थराईटिज) की आयुर्वेदिक घरेलू चिकित्सा // Ayurvedic Home Medicine of Arthritis




संधिवात रोग में शरीर के जोडों और अन्य भागों में सूजन आ जाती है और रोगी दर्द से परेशान रहता है। चलने फ़िरने में तकलीफ़ होती है।यह रोग शरीर के तंतुओं में विकार पैदा करता है,प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है,जोड शोथ युक्त हो जाते हैं,हिलने डुलने में कष्ट होता है।कलाई,घुटनों और ऊंगली ,अंगूठे में संधिवात का रोग ज्यादा देखने में आता है। कभी-कभी बुखार आ जाता है।भूख नहीं लगना भी इस रोग का लक्षण है। समय पर ईलाज नहीं करने पर आंखों,फ़ेफ़डों,हृदय व अन्य अंग दुष्प्रभावित होने लगते हैं।
संधिवात के कारण-
१)आनुवांशिक कारण
२)खान-पान की असावधानियां
३) जोडों पर ज्यादा शारीरिक दवाब पडना
४) जोडों का कम या जरूरत से अधिक उपयोग करना
५) स्नायविक तंतुओं में विकार आ जाना और मेटाबोलिस्म में व्यवधान पड जाना।
६) सर्द वातावरण में शरीर रखने का कुप्रभाव
७)बुढापा और हार्मोन का असुंतुलन


संधिवात रोगी क्या करें और क्या न करें-
१) सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि रोगी २४ घंटे में मौसम के अनुसार ४ से ६ लिटर पानी पीने की आदत डालें। शरीर के जोडों में यूरिक एसीड जमा हो जाता है और इसी से संधिवात रोग जन्म लेता है। ज्यादा पानी पीने से ज्यादा पेशाब होगा और यूरिक एसीड बाहर निकलता रहेगा
२) फ़ल और हरी सब्जीयां अपने आहार में प्रचुरता से शामिल करें।इनमें भरपूर एन्टीओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो हमारे इम्युन सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं।रोजाना ७५० ग्राम फ़ल या सब्जियां या दोनों मिलाकर उपयोग करते रहें।इनका रस निकालकर पियेंगे तो भी वही लाभ प्राप्त होगा।
३)ताजा गाजर का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिश्रण कर १५ मिलि प्रतिदिन लें।
४) ककडी का रस पीना भी संधिवात में लाभकारी है।
५) संधिवात रोगी को चाहिये कि सर्दी के मौसम में धूप में बैठे।

६) शकर का उपयोग हानिकारक होता है।
७) चाय,काफ़ी,मांस से संधिवात रोग उग्र होता है इसलिये जल्दी ठीक होना हो तो इन चीजों का इस्तेमाल न करें।
८)तेज मसाले,शराब ,तला हुआ भोजन,नमक,शकर ,मिर्च- छोडेंगे तो जल्दी ठीक होने के आसार बनेगे।९) संधिवात रोगी के लिये यह जरूरी है कि हफ़्ते में दो दिन का उपवास करें।
१०) काड लिवर आईल ५ मिलि की मात्रा में सुबह शाम लेने से संधिवात में फ़ोरन लाभ मिलता है।
११) पर्याप्त मात्रा में केल्शियम और विटामिन डी की खुराकें लेते रहें। ये विटामिन भोजन के माध्यम से लेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा।

१२) तीन नींबू का रस और ४० ग्राम एप्सम साल्ट आधा लिटर गरम पानी में मिश्रित कर बोतल में भर लें। दवा तैयार है। ५ मिलि दवा सुबह शाम पीयें। यह नुस्खा बेहद कारगर है।
१३) मैने साईटिका रोग में आलू का रस पीने का ईलाज बताया है। संधिवात में भी आलू का रस अशातीत लाभकारी है। २०० मिलि रस रोज पीना चाहिये।
१४) ज्यादा सीढियां चढना हानिकारक है।
१५)अपने काम और विश्राम के बीच संतुलन बनाये रखना जरूरी है।
१६) अदरक का रस पीना संधिवात के दर्द में शीघ्र राहत पहुंचाता है।
१७) अलसी के बीज मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें। २० ग्राम सुबह और २० ग्राम शाम को पानीके साथ लें। इसमे ओमेगा फ़ेट्टी एसीड होता है जो इस रोग में अत्यंत हितकर माना गया है।इससे कब्ज का भी निवारण हो जाता है।
१८) सभी प्रकार के वातरोगों में लहसुन का उपयोग करना चाहिए। इससे रोगी शीघ्र ही रोगमुक्त हो जाता है तथा उसके शरीर की वृद्धि होती है।'
कश्यप ऋषि के अनुसार लहसुन सेवन का उत्तम समय पौष व माघ महीना (दिनांक 22 दिसम्बर से 18 फरवरी 2011 तक) है।
प्रयोग विधिः 

200 ग्राम लहसुन छीलकर पीस लें। 4 लीटर दूध में ये लहसुन व 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर दूध गाढ़ा होने तक उबालें। फिर इसमें 400 ग्राम मिश्री, 400ग्राम गाय का घी तथा सोंठ, कालीमिर्च, पीपर, दालचीनी, इलायची,तमालपात्र, नागकेशर,पीपरामूल, वायविडंग, अजवायन, लौंग, च्यवक, चित्रक, हल्दी,दारूहल्दी, पुष्करमूल, रास्ना,देवदार, पुनर्नवा, गोखरू, अश्वगंधा, शतावरी, विधारा,नीम, सोआ व कौंचा के बीज का चूर्ण प्रत्येक 3-3 ग्राम मिलाकर धीमी आँच पर हिलाते रहें। मिश्रण में से घी छूटने लग जाय,गाढ़ा मावा बन जाय तब ठंडा करके इसे काँच की बरनी में भरकर रखें।
10 से 20 ग्राम यह मिश्रण सुबह गाय के दूध के साथ लें (पाचन शक्ति उत्तम हो तो शाम को पुनः ले सकते हैं।
भोजन में मूली, अधिक तेल व घी तथा खट्टे पदार्थों का सेवन न करें। स्नान व पीने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
 


विशिष्ट परामर्श-  



संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त सक्रियता हासिल करते हुए  सीढ़ी चढ़ना उतरना और 2-3 किलोमीटर सैर करने की क्षमता विकसित करते हैं|औषधि के लिए वैध्य  श्री दामोदर जी से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|







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2.5.10

सफ़ेद दाग से मुक्ति के आयुर्वेदिक प्राकृतिक उपाय



              
  ल्युकोडर्मा चमडी का भयावह रोग है,जो रोगी की शक्ल सूरत प्रभावित कर शारीरिक के बजाय मानसिक कष्ट ज्यादा देता है।इसे ही श्वेत कुष्ठ कहते हैं। इस रोग में चमडे में रंजक पदार्थ जिसे पिग्मेन्ट मेलानिन कहते हैं,की कमी हो जाती है।चमडी को प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाले इस पिग्मेन्ट की कमी से सफ़ेद दाग पैदा होता है।
     यह चर्म विकृति पुरुषों की बजाय स्त्रियों में ज्यादा देखने में आती है।
ल्युकोडर्मा के दाग हाथ,गर्दन,पीठ और कलाई पर विशेष तौर पर पाये जाते हैं। अभी तक इस रोग की मुख्य वजह का पता नहीं चल पाया है।लेकिन चिकित्सा विज्ञानियों ने इस रोग के कारणों का अनुमान लगाया है।पेट के रोग,लिवर का ठीक से काम नहीं करना,दिमागी चिंता ,छोटी और बडी आंर्त में कीडे होना,टायफ़ाईड बुखार, शरीर में पसीना होने के सिस्टम में खराबी होने आदि कारणों से यह रोग पैदा हो सकता है।

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शरीर का कोई भाग जल जाने अथवा आनुवांशिक करणों से यह रोग पीढी दर पीढी चलता रहता है।
रोग अगर अधिकांश त्वचा पर व्यापक हो चुका हो तो ठीक होने की संभावना नहीं के बराबर होती है।
    लेकिन सीमित त्वचा आक्रांत होने पर रोग को नियंत्रित करने और चमडी के स्वाभाविक रंग को पुन: लौटाने हेतु कुछ घरेलू उपचार कारगर साबित हुए हैं ,मैं ऐसे ही कतिपय उपचार यहां प्रस्तुत कर रहा हूं---
१) दस लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें जब ४ लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें और इसमें आधा किलो सरसों का तेल मिला दें,यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। ४-५ माह तक ईलाज चलाने पर अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।

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२.) बाबची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है।५० ग्राम बीज पानी में ३ दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें।बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखालें। पीस कर पावडर बनालें।यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में घिसकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।
3) बाबची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर ४ दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत कारगर नुस्खा है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज रोक देना उचित रहेगा।


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एक और कारगर नुस्खा बताता हूँ-
लाल मिट्टी लावें। यह मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। अब यह लाल मिट्टी और अदरख का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन ल्युकोडेर्मा के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है। और अदरख का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।
५) श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना फ़ायदेमंद है।
६) मूली के बीज भी सफ़ेद दाग की बीमारी में हितकर हैं। करीब ३० ग्राम बीज सिरका में घोटकर पेस्ट बनावें और दाग पर लगाते रहने से लाभ होता है।



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७) काली मिर्च ५ दाने सुबह-शाम लेने से सफ़ेद दाग में फ़ायदा होता है।
८) एलोवेरा जेल आधा कप मात्रा में रोज सुबह लेते रहने से सफ़ेद दाग नियंत्रण में आ जाते हैं|
९) उडद को पानी के साथ पीस लें याने पेस्ट जैसा बनालें अब इसे सफ़ेद दाग के चकत्तों पर लगावें। दो तीन माह तक लगाते रहने से सुखद परिणाम की आशा की जा सकती है।यह सफ़ेद दाग का अच्छा उपचार है।
१०) एक चौथाई लिटर दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर ६ माह तक पीने से सफ़ेद दाग और कई अन्य चर्म रोग नष्ट हो जाते हैं।
अल्ट्रावायलेट किरणों से ईलाज-
अल्ट्रा वायलेट किरणों की सिकाई सफेद दाग के ईलाज का सर्वाधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं कारगर तरीका है। अल्ट्रावायलेर किरणों से ईलाज का तरीका सारी दुनिया में प्रचलित है। इस तरह की सिकाई से त्वचा का प्राकृतिक रंग आ जाता है, एवं मेंन्टेनेंस भी किया जा सकता है। 


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१२) सफेद दाग का ईलाज सर्जरी से-
सफेद दाग या ल्यूकोडर्मा का एक ईलाज सर्जरी भी है। जिन सफेद दागों का ६-९ महीने के ईलाज के बाद भी आशानुकूल परिणाम नहीं आता तो उसे सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। सर्जरी द्वारा उस हिस्से की स्किन ग्राफ्टिग कर दी जाती है। स्किन ग्राफ्ट फिर से रंग बनाने में मदद करता है। एवं पूरे हिस्से में कुदरती रंग बन जाता है |
१३) सफ़ेद दाग के मामले मे हर्बल चिकित्सा सर्वाधिक संतोषप्रद परिणाम प्रस्तुत करती है | वैध्य दामोदर 98267-95656 की जड़ी - बूटी निर्मित औषधि से सफ़ेद दाग मिटकर चमड़ी का कुदरती रंग बहाल हो जाता है| 
१४) बथुआ के पत्तों का रस दो कप निकालें इसमें आधा कप तिल का तैल मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं जब सिर्फ़ तैल ही शेष रह जाए तो आंच से उतारकर शीशी में भरलें। यह दवा सफ़ेद दाग के चकत्तों पर ६ माह तक लगाते रहने से अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं। धीरज रखें। बथुआ की सब्जी खाएं ।

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१५) होम्योपैथिक चिकित्सा का सफ़ेद दाग चिकित्सा में विशेष महत्व है। जिन दवाओं का उपयोग किया जाता है,निम्न हैं।
इग्नेशिया ३०
नेट्रम म्यूर-३०
पल्सेटिला-३०
नक्स वामिका- ३०
किसी रासायनिक पदार्थ के संपर्क में आने से सफ़ेद दाग रोग हुआ हो तो सल्फ़र-३० और अर्सेनिक एल्बम-३० दवाएं उपयोग में लाना उचित है।
आनुवांशिक कारणों से पैदा होने वाले सफ़ेद दाग के लिये सिफ़लिनम-२०० दवा उपयुक्त मानी जाती है। लेकिन आर्सेनिक सल्फ़ फ़्लेवम-६ यह ऐसी दवा है जो किसी भी कारण से होने वाले सफ़ेद दाग के लिये उपयोग की जा सकती है।


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1.5.10

कब्ज जड़ से खत्म करेंगे ये घरेलू आयुर्वेदिक उपचार



      अनुपयुक्त खान-पान के चलते कब्ज लोगों में एक सर्वाधिक प्रचलित रोग बन चुका है। यह पाचन-तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल विसर्जन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को २-३ बार होता है। कुछ लोगों को हफ़्ते में २ या ३ बार ही शौचालय जाने से काम चल जाता है।
     ज्यादा कठोर और सूखा मल जिसे बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे,यही कब्ज का लक्षण है। ऐसा मल हफ़्ते में ३ बार से भी कम होता है और यह कब्ज का दूसरा मुख्य लक्षण होता है। कब्ज रोगियों में पेट के फ़ूलने की शिकायत भी आमतौर पर मिलती है। वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज की प्रधानता पाई जाती है। कुदरती पदार्थों के इस्तेमाल करने से यह रोग जड से खत्म हो जाता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।

१) शरीर में तरल की कमी होना कब्ज का मूल कारण है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर ३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा मेहसूस होगी
लेकिन धीरे-धीरे आदत पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।

२) भोजन में रेशा की मात्रा ज्यादा रखने से स्थाई रूप से कब्ज मिटाने में मदद मिलती है। सब्जियां और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।
३) सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।
४) पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।
५) रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।


विशिष्ट परामर्श-


यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय  गुणों  के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज  और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली  है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी  निराश रोगी  इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|





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