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7.10.19

कफ बलगम निकालने के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय



कफ निकालने के घरेलू उपाय जुकाम और अन्‍य ऊपरी श्वसन संक्रमण के लक्षणों को कम कर सकते हैं। कफ का आना कोई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या नहीं है लेकिन कफ बनने का कारण लोगों की असुविधा का कारण बन सकता है। लेकिन यदि समय पर कफ का इलाज या कफ निकालने के लिए घरेलू उपाय समय पर न लिए जाएं तो गंभीर स्थिति बन सकती है। कफ (बलगम) निकालने के उपाय अपनाकर आप ब्रोन्कियल नलियों को अवरूद्ध होने और जलन को रोक सकते हैं। कफ निकालने के घरेलू उपाय आमतौर पर गले की सफाई, लगातार खांसी, नाक से पानी आना, सांस लेने में दिक्‍कत और शारीरिक कमजोरी आदि को दूर कर सकते है।
कफ एक मोटा और चिपचिपा पदार्थ होता है जिसे बलगम भी कहा जाता है। कफ अक्‍सर बीमार होने या जुकाम होने के दौरान गले में जमा हो जाता है। संक्रमण और प्रतिरक्षा शक्ति में कमी कफ बनने का कारण हो सकता है। हालांकि कफ या बलगम झिल्‍ली आपके श्वसंन तंत्र की रक्षा करने और स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में सहायक होते हैं। मानव शरीर में कफ मुंह, नाक, गला, साइनस और फेफड़ों आदि में मुख्‍य रूप से होता है। कफ चिपचिपा होता है ताकि यह धूल एलर्जी और वायरस आदि को बीच में ही रोक ले। सामान्‍य रूप से कफ पतला होता है लेकिन यदि कफ अधिक गाढ़ा है तो यह जांच कराने योग्‍य है। कफ आपके श्वसन तंत्र का एक स्‍वस्‍थ्‍य हिस्‍सा है लेकिन यदि यह आपके लिए असुविधा का कारण बने तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
छाती में कफ जमने का कारण –
बीमार होने के दौरान सीने में सूजन और जकड़न का अनुभव होता है। ऐसा छाती में कफ जमने का कारण होता है। छाती में कफ जमना और इसके अन्‍य लक्षणों में घरघराहट, नींद लेने में कठिनाई, गले में खराश आदि हैं। कफ का निकलना भी अक्‍सर खांसी के साथ होता है। हालांकि छाती में कफ जमना सामान्‍य है लेकिन कुछ स्थितियों में अधिक मात्रा में कफ का जमाव चिंता का कारण बन सकता है। छाती में कफ जमने के कारणों में शामिल हैं :
कफ निकालने के घरेलू उपाय –
कफ या बलगम अक्‍सर खांसी के साथ आता है। आप छाती और गले में जमा कफ निकालने के घरेलू उपाय से इस समस्‍या को दूर कर सकते हैं। खांसी और बलगम आने का प्रमुख कारण वायरस या संक्रमण होता है। हालांकि यह कुछ दिनों में सामान्‍य रूप से ठीक हो जाता है। हालांकि आप इसके इलाज के लिए अपने डॉक्‍टर से संपर्क कर सकते हैं। सामान्‍य रूप से डॉक्‍टर कफ का कोई इलाज नहीं कर सकते हैं। लेकिन वे इसके लक्षणों को कम करने के लिए कुछ दवाएं दे सकते हैं। हालांकि कफ का इलाज करने के लिए आप घरेलू उपाय अपना सकते हैं। जो इस प्रकार हैं।


गर्म पानी से स्नान –

श्वसन तंत्र में ऊपरी संक्रमण को दूर करने के लिए आप भाप और गर्म शॉवर का उपयोग कर सकते हैं। भाप लेना बलगम का इलाज कर सकता है। कफ और खांसी के घरेलू उपचार के लिए भी भाप लेना सबसे अच्‍छा तरीका होता है। ऐसा करने पर आप अपने श्वसन तंत्र को शुष्‍क होने से बचा सकते हैं। इसके अलावा स्‍टीम शॉवर लेने से छाती में जमा बलगम को निकालने में भी मदद मिलती है। इसके लिए आप कम से कम 5 मिनिट तक भाप लें या गर्म शॉवर का उपयोग करें। आप अपनी स्थिति और आवश्‍यकता के अनुसार दोहरा भी सकते हैं। ऐसा करने से आपको कफ संबंधी समस्‍याओं से राहत मिल सकती है।
सर्दी, खांसी और कफ जैसी समस्‍याएं बच्‍चों को सबसे अधिक होती हैं। लेकिन यह समस्‍याएं किसी भी उम्र में किसी भी व्‍यक्ति को हो सकती हैं।
विटामिन सी का सेवन
ऐसा मुख्‍य रूप से कमजोर प्रतिरक्षा शक्ति के कारण होता है। लेकिन यदि आप स्‍वयं और अपने बच्‍चों को पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन सी का सेवन कराते हैं तो इस समस्‍या से बचा जा सकता है। विटामिन सी एक एंटीऑक्‍सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने और वायरल संक्रमण से लड़ने में सहायक होता है। विटामिन सी का पर्याप्‍त सेवन आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ निकालने के उपाय में आप संतरे या नारंगी का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए नियमित रूप से प्रतिदिन 2 से 3 गिलास संतरे का जूस पीने पर आपको कफ और सर्दी के लक्षणों को दूर करने में मदद मिल सकती है।
लौंग की चाय –
अध्‍ययनों से पता चलता है कि थाइम और लौंग (thyme and clove) दोनो में रोगाणुरोधी गुण होते हैं। इन दोनों औषधीयों के तेल टिंचर्स के रूप में काम करते हैं जो ऊपरी श्वसन संक्रमण को रोकने में प्रभावी होते हैं। कफ का इलाज करने के लिए आप उबलते पानी में अजवाइन फूल और लौंग की पत्तियां या लौंग को मिलाएं और 10 मिनिट तक पकाएं। इसके बाद इस पेय पदार्थ को ठंडा होने दें और फिर इसका सेवन करें। दिन में 1-2 कप लौंग की चाय पीने से कफ की मात्रा को कम किया जा सकता है।
अदरक की चाय –
अदरक में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसके कारण नियमित रूप से अदरक की चाय का सेवन करने पर यह प्रतिरक्षा को मजबूत करने के साथ ही मौजूद संक्रमण और विषाणुओं के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। अदरक की चाय का सेवन करना आपके शरीर को हाइड्रेट रखने और गले की सूजन को दूर करने में मदद कर सकता है। आप कफ नाशक के रूप में अदरक की चाय का उपयोग कर सकते हैं।
हाइड्रेट रहें
किसी भी प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या या संक्रमण से ग्रसित होने की स्थिति में हाइड्रेट रहना बहुत ही फायदेमंद होता है। यदि आप सर्दी से या कफ जैसी समस्‍या से परेशान हैं तब शरीर में पानी की कमी होना आम है। लेकिन यह पानी की कमी आपके शरीर को अन्‍य नुकसान भी पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में आप अपने शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए नियमित रूप से पानी पीना, स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक पेय पदार्थों और अन्‍य जड़ी बूटी युक्‍त चाय या तरल पदार्थ का सेवन कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके गले की सूजन और चिड़चिड़ाहट आदि को रोका जा सकता है। साथ ही औषधीय जड़ी बूटी युक्‍त चाय का सेवन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करने में सहायक होता है।


नींबू का रस –

कफ के जमा होने से जकड़न, जलन, सूजन और दर्द जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। लेकिन गले में बलगम का इलाज नींबू के रस से किया जा सकता है। नींबू का रस गले में जमा बलगम को ढ़ीला और कमजोर करने में सहायक होता है। जिससे कफ को आसानी से बाहर किया जा सकता है। इसके अलावा नींबू के रस में विटामिन सी होता है जो जीवाणुरोधी है।
बलगम का इलाज करने के लिए आप 1 गिलास गर्म पानी में 2 चम्‍मच नींबू का रस और 1 बड़ा चम्‍मच शहद मिलाएं। इस मिश्रण का सेवन दिन में कम से कम 2-3 बार करें। ऐसा करने पर कफ उत्‍पादन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा विकल्‍प के रूप में आप नींबू के टुकड़े में काली मिर्च पाउडर और नमक को छिड़कें और फिर नींबू को चूसें। ऐसा करने से कफ आसानी से आपके गले से बाहर निकल सकता है।
नमक का पानी –
यदि आप अधिक मात्रा में कफ निकलने जैसी समस्‍या से परेशान हैं तो नमक के पानी का उपयोग करें। नमक का पानी कफ निकालने का तरीका है जो बहुत ही प्रभावी है। इसके लिए आप गर्म पानी में नमक को मिलाएं और गरारे करें। ऐसा करने से कफ आसानी से निकल सकता है। इसके अलावा गले में होने वाले दर्द और सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में भी नमक का पानी बहुत ही प्रभावी होता है। नमक में मौजूद गुण और एंटीऑक्‍सीडेंअ बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने में मदद करते हैं जो आपके गले के संक्रमण का प्रमुख कारण होते हैं। बलगम का इलाज करने के लिए आप 1 गिलास गुनगुने पानी में ½ चम्‍मच नमक घोलें और इस पानी से गरारे करें। आप इस उपाय को दिन में अपनी सुविधा के अनुसार कई बार कर सकते हैं।
हल्‍दी –
हल्‍दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो बलगम के उत्‍पादन करने वाले बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा हल्‍दी का नियमित सेवन हमारी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ दूर करने के घरेलू उपाय में आप हल्‍दी का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को रात में सोने से पहले और सुबह के समय खाली पेट सेवन करें। इसके अलावा आप दिन में 2-3 बार 1 गिलास गर्म पानी में 1 चम्‍मच हल्‍दी पाउडर को घोल कर सेवन करें। यह भी आपको कफ दूर करने में मदद कर सकता है।
शहद –
शहद में एंटीवायरल, जीवाणुरोधी और एंटीफंगल गुण होते हैं जो कफ के कारण गले के दर्द, सूजन और अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने में प्रभावी होते हैं। शहद कफ निकालने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है साथ ही प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है। कफ का इलाज करने के लिए आपको शहद का नियमित सेवन करना चाहिए।
1 चम्‍मच शहद में 1 चुटकी कालीमिर्च पाउडर मिलाएं। काली मिर्च गले के संक्रमण को दूर करने में मदद करती है। जबकि शहद श्‍लेष्‍म झिल्‍ली को शांत करता है। नियमित रूप से 1 सप्‍ताह तक दिन में दो बार इस मिश्रण का सेवन करने पर यह कफ को प्रभावी रूप से कम कर सकता है।
लाल मिर्च –
लाल मिर्च नाक, गले और छाती में जमा होने वाले कफ को आसानी से दूर करने में मदद करती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि लाल मिर्च की तासीर गर्म होती है इसके अलावा अपनी उत्‍तेजक प्रकृति के कारण यह सीने में दर्द को कम करने में भी सहायक होती है।
सर्दी या बलगम के लक्षणों को कम करने के लिए आप 1 चौथाई लाल मिर्च पाउडर, ¼ अदरक का पेस्‍ट, 1 चम्मच शहद और 2 बड़े चम्‍मच सेब के सिरका को मिलाकर सेवन करें। इस मिश्रण का सेवन करने से कफ के उत्‍पादन को कम करने में मदद करता है।
चिकन सूप –
गर्म चिकन सूप भी कफ का इलाज करने में मदद कर सकता है। गर्म चिकन सूप आपके वायुमार्ग को मॉइस्‍चराइज करने में मदद करता है और कफ की स्थिरता को पतला करेगा। साथ ही यह गले की सूजन और दर्द को भी प्रभावी रूप से दूर करने में मदद कर सकता है। आप अपने गले से कफ को दूर करने के लिए कम से कम दिन में 2 से 3 बार चिकन सूप का सेवन करें। चिकन सूप को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आप इसमें लहसुन औरी अदरक को भी शामिल कर सकते हैं।
गाजर –
कफ और इससे संबंधित अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने में गाजर बहुत ही प्रभावी औषधी मानी जाती है। गाजर विटामिन सी का सबसे अच्‍छा स्रोत है। विटामिन सी एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करता है जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसके अलावा गाजर में मौजूद अन्‍य पोषक तत्‍व और विटामिन भी कफ के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं।
कफ संबंधी समस्‍या को दूर करने के लिए आप 4 से 5 ताजा गाजर का रस निकालें। यदि रस कुछ गाढ़ा हो तो इसे पतला करने के लिए कुछ पानी मिलाएं और 2 चम्‍मच शहद शामिल करें। आप अपने गले और छाती में जमा कफ को निकालने के लिए इस जूस की थोड़ी-थोड़ी मात्रा दिन भर पिएं। यह कफ निकालने का सबसे अच्‍छा उपाय है।


प्‍याज का रस –

प्‍याज में एंटीबायोटिक और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जिसके कारण गले के संक्रमण को दूर करने में प्‍याज का रस प्रभावी होता है। इसके अलावा प्‍याज में मौजूद अन्‍य घटक प्रतिरक्षा प्रणाली को भी स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। आप कफ निकालने के लिए प्‍याज के रस का उपयोग कर सकते हैं।
इसके लिए आप मध्‍ययम आकार की प्‍याज लें और इसे अच्‍छी तरह से धो कर साफ कर लें। फिर इस प्‍याज को बारीक काट लें। बारीक कटी हुई 2 चम्‍मच प्‍याज लें और इसमें 2 चम्‍मच चीनी मिला कर कुछ देर के लिए रख दें। ऐसा करने पर प्‍याज और चीनी के मिश्रण से एक तरल पदार्थ प्राप्त होता है। इस तरल पदार्थ की 1 चम्‍मच मात्रा हर 2 से 3 घंटे के बाद सेवन करें। आप इस मिश्रण 2 से 3 दिनों के लिए फ्रिज में स्‍टोर करके भी रख सकते हैं।
बच्‍चों और वयस्‍कों में कफ जमा होने की समस्‍या आम होती है। हालांकि गंभीर स्थिति होने पर ही डॉक्‍टरी उपचार की आवश्‍यकता होती है। इसके साथ आप ऊपर बताये गए कफ दूर करने के घरेलू नुस्‍खे आजमा सकते हैं।
छाती और गले में जमे कफ के लिए घरेलु उपाय शहद और नींबू
नींबू के रस और शहद मिलाकर सेवन करने से छाती और गले में जमे कफ से बहुत जल्दी छुटकारा पाया जा सकता है। क्योंकि नींबू में सिट्रिक अम्ल होता है, जो कफ को नष्ट करने में उपयोगी होता है।
शहद और अदरक
इस घरेलू नुस्खे का उपयोग करने के लिए एक चम्मच शहद में एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर इसे थोड़ा गरम कर लें, और इसका सेवन करें।
काली मिर्च
5-6 काली मिर्च लेकर उन्हें बारीक पीस लें। अब एक गिलास पानी लेकर उस पानी में यह काली मिर्च का मिश्रण डाल दें और इसे अच्छी तरह गर्म करें। जब यह गुनगुना ठंडा हो जाए, तो इसका सेवन करें। इससे छाती और गले में जमे कब की समस्या से 1 दिन में छुटकारा मिल जाता है।

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




7.8.19

छाती (सीने) मे दर्द के प्रभावी उपचार


सीने में दर्द या हम कहें छाती में होने वाला दर्द आज के समय में एक आम समस्या है। छाती में दर्द होते ही आदमी को इमरजेंसी डिपार्टमेंट में जाना पड़ता है। अक्सर सीने में दर्द शरीर में रक्त का संचार कम होने के कारणहोता है। बहुत से लोग चेस्ट में दर्द होने से इतने चिंतित रहते हैं कि उन्हें लगता है की यह हार्ट अटैक से रिलेटेड प्रॉब्लम तो नहीं है। लेकिन यह समस्या कुछ समय के लिए होती है जब तक उस जगह से गैस बाहर नहीं निकल जाती।
सीने में दर्द की बात आते ही हम दिल के दौरे की बात सोचने लगते हैं, मगर सीने में दर्द कई कारणों से हो सकता है। फेफड़े, मांसपेशियाँ, पसली, या नसों में भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर सीने में दर्द होता है।
किसी-किसी परिस्थिति में यह दर्द भयानक रूप धारण कर लेता है जो मृत्यु तक का कारण बन जाता है। लेकिन एक बात ध्यान में रखें कि खुद ही रोग की पहचान न करें और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरन्त चिकित्सक के पास जायें।
वैसे जैसे ही आपको सीने में दर्द का अहसास हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूर है। वैसे आज हम आपको सीने में दर्द होने के कारण, लक्षण और छाती में दर्द का इलाज के घरेलू उपचार और देसी आयुर्वेदिक नुस्खे बताएँगे। आयुर्वेदिक दवा को लेकर आप अपने छाती के दर्द यूँ ही दूर कर सकते हैं। पुराने समय से ही सीने में दर्द का घरेलू उपाय करते आया जा रहा है।
कारण
जब धमनियों में रक्त का थक्का जमने लगता है तब साँस लेने में मुश्किल होने लगती है और सीने में दर्द शुरू हो जाता है। अगर परिस्थिति को संभाला नहीं गया तो मृत्यु तक हो सकती है। एनजाइना का दर्द साधारणतः आनुवंशिकता के कारण, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल, पहले से हृदय संबंधित रोग से ग्रस्त होने के कारण होता है।हर व्यक्ति को सीने में दर्द होने के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। किसी को चेस्ट के लेफ्ट साइड में दर्द होता है तो किसी को चेस्ट के राइट साइड में दर्द। इसके अलावा, किसी को यह दर्द तेज और ज्यादा देर के लिए हो सकता है, तो किसी को यह दर्द हल्का और कम समय के लिए हो सकता है।


दिल संबंधी कारण

हार्ट अटैक।
ह्रदय की रक्त वाहिकाओं के अवरुद्ध होने पर एनजाइना।
पेरिकार्डिटिस, जो आपके ह्रदय के पास एक थैली में सूजन आने के कारण होता है।
मायोकार्डिटिस, जो हृदय की मांसपेशियों में सूजन के कारण होता है।
कार्डियोमायोपैथी, हृदय की मांसपेशी का एक रोग।
एऑर्टिक डाइसेक्शन, जो महाधमनी में छेद होने के कारण होता है।
फेफड़े संबंधी कारण
ब्रोंकाइटिस
निमोनिया
प्लूरिसी
न्यूमोथोरैक्स, जो फेफड़ों से हवा का रिसाव के कारण छाती में होता है।
पल्मोनरी एम्बोलिज्म या फिर रक्त का थक्का
ब्रोन्कोस्पाज्म या आपके वायु मार्ग में अवरोध (यह अस्थमा से पीड़ित लोगों में आम है)
मांसपेशी या हड्डी संबंधी कारण
घायल या टूटी हुई पसली
थकावट के कारण मांसपेशियों में दर्द या फिर दर्द सिंड्रोम
फ्रैक्चर के कारण आपकी नसों पर दबाव
छाती के दर्द से राहत पाने के घरेलू उपाय
लहसुन
सामग्री :
एक चम्मच लहसुन का रस
एक कप गुनगुना पानी
क्या करें?
एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच लहसुन का रस डालें।
इसे अच्छी तरह मिलाएं और रोजाना पिएं।
आप रोज सुबह लहसुन के दो टुकड़े चबा भी सकते हैं।
ऐसा कब-कब करें?
इस प्रक्रिया को दिन में एक या दो बार दोहराएं।
यह कैसे काम करता है?
हृदय में रक्त प्रवाह बिगड़ने के कारण हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती है। इस कारण सीने में दर्द का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, रोजाना लहसुन का इस्तेमाल सीने में दर्द से बचाता है। लहसुन हृदय में रक्त प्रवाह को दुरुस्त कर हृदय रोग से बचाता है। छाती में दर्द के उपाय में यह बेहतरीन नुस्खा है।
सेब का सिरका
सामग्री :
एक चम्मच सेब का सिरका
एक गिलास पानी
क्या करें?
एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर अच्छी तरह मिला लें।
फिर इस पानी को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप खाना खाने से पहले या जब भी चेस्ट पेन हो, तो इस मिश्रण को पिएं।
यह कैसे काम करता है?
सेब के सिरके में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स से राहत दिलाने में मदद करता है। इन्हीं के कारण सीने में दर्द की शिकायत होने लगती है । छाती में दर्द के उपाय में यह जाना-माना उपचार माना जाता है।
मेथी के दाने
एक चम्मच मेथी के दाने
क्या करें?
एक रात पहले मेथी दानों को पानी में भिगोकर रख दें और अगली सुबह इन्हें खाएं।
इसके अलावा, आप एक चम्मच मेथी दानों को पांच मिनट के लिए पानी में उबाल लें। फिर इस पानी को छानकर पिएं।
ऐसा कब-कब करें?
आप इस पानी को दिन में एक से दो बार पिएं।
यह कैसे काम करता है?
मेथी के बीज में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो हृदय के स्वास्थ्य को बढ़ाते हैं और सीने में दर्द को रोकते हैं । हृदय में रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं।


लाल मिर्च

सामग्री :
एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर
किसी भी फल का एक गिलास जूस
क्या करें?
फल के एक गिलास जूस में एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाएं।
इस जूस को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप इस जूस को दिन में एक बार पिएं।
यह कैसे काम करता है?
इस मिर्च में कैप्सैसिन होता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है। यह आपके सीने में दर्द की तीव्रता को कम करने में मदद करता है । यह हृदय में रक्त के प्रवाह को दुरुस्त करने में भी मदद करता है, जिससे हृदय रोगों को रोका जा सकता है।
एलोवेरासामग्री :
¼ कप एलोवेरा जूस
क्या करें?
एलोवेरा जूस को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप दिन में एक से दो बार एलोवेरा जूस पिएं।
यह कैसे काम करता है?
एलोवेरा एक चमत्कारी पौधा है, जो कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को मजबूत करने, अच्छे कोलेस्ट्रॉल को नियमित करने, आपके ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने और रक्तचाप को कम करने में भी मदद कर सकता है । ये सभी छाती के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
तुलसी
सामग्री :
आठ से दस तुलसी के पत्ते
क्या करें?
तुलसी के पत्तों को चबा लें।
इसके अलावा, आप तुलसी की चाय भी पी सकते हैं।
आप तुलसी के पत्तों का रस निकालकर इसमें शहद मिलाकर खा सकते हैं।
ऐसा कब-कब करें?
बेहतर परिणाम के लिए आप रोजाना इसका सेवन करें।
यह कैसे काम करता है?
तुलसी में प्रचुर मात्रा में विटामिन-के और मैग्नीशियम होता है। सफेद मैग्नीशियम हृदय तक रक्त प्रवाह को दुरुस्त करता है और रक्त वाहिकाओं को आराम देता है। वहीं, विटामिन-के रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल के निर्माण को रोकता है । यह हृदय संबंधी विकारों के साथ-साथ सीने में दर्द के उपचार में मदद करता है।


हल्दी और दूध

सामग्री :
½ चम्मच हल्दी पाउडर
एक गिलास गर्म दूध
क्या करें?
एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं।
हल्दी वाले इस दूध को पी लें।
ऐसा कब-कब करें?
आप रोजाना रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पिएं।
यह कैसे काम करता है?
हल्दी करक्यूमिन का बेहतरीन स्रोत है। यह कोलेस्ट्रॉल ऑक्सिडेशन, क्लोट फॉर्मेशन व धमनी में थक्के को बनने से रोकता है। ये सभी हृदय की समस्याओं और सीने में दर्द का कारण बन सकते हैं । करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो सीने में दर्द की तीव्रता को कम करने में मदद करता है।
विटामिन
अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि विटामिन-डी और विटामिन-बी12 की कमी से सीने में दर्द हो सकता है। यहां तक कि इससे मायोकार्डियल इंफार्कशन या हार्ट अटैक भी हो सकता है (4), । इसलिए, अगर आप चेस्ट पेन से पीड़ित हैं, तो अपने खानपान पर ध्यान दें। आप पौष्टिक खाना खाएं, जिसमें भरपूर रूप से विटामिन हों।
आप मछली, चीज] अंडे की जर्दी, अनाज, सोया उत्पाद और मीट अपने खानपान में शामिल करें। आप डॉक्टर की सलाह से विटामिन के जरूरी अनुपूरक भी ले सकते हैं।
टिप्स
अधिक परिश्रम से बचें।
संतुलित आहार का सेवन करें।
शराब का सेवन सीमित करें।
तंबाकू के सेवन से बचें।
खुद को तनाव मुक्त रखें।
मत्स्यासन (फिश पोज), भुजंगासन (कोबरा पोज) और धनुरासन (बो पोज) जैसे योगासनों का अभ्यास करें।
आप एक्यूप्रेशर भी करवा सकते हैं।
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