30.12.16

वायरल बुखार के घरेलू उपचार //Home Remedies For Viral Fever

    

 तापमान में अचानक परिवर्तन होने या संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं। ऐसा ही एक मौसमी संक्रमण वाला बुखार होता है वायरल बुखार (Viral Fever)। इस बुखार से निपटने के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या कुछ ओटीसी (ओवर-द-काउंटर) का सहारा लिया जाता है। आप चिकित्सक के पास जाएं उससे पहले कुछ घरेलू नुस्खे आजमाकर भी बुखार को कम या इससे पूरी तरह आराम पाया जा सका है।तेज बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, यह किसी छुपी हुई परिस्थिति का संकेत हो सकता है। आमतौर पर यह बुखार या तबीयत खराब का संकेत हो सकता है। हालांकि, बुखार के कई गैर-संक्रामक कारण भी हो सकते हैं, लेकिन वायरल संक्रमण बुखार का एक सामान्‍य लक्षण हो सकता है। वायरल संक्रमण कई प्रकार के वायरस से हो सकता है। इनमें इंफ्लूएंजा यानी फ्लू सबसे ज्‍यादा प्रचलित है। वायरल शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है जैसे आंत, फेफड़े, वायु मार्ग और अन्‍य कई हिस्‍से। इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि आपके शरीर का कौन सा हिस्‍सा इससे प्रभावित हुआ है, आपको सामान्‍य तौर पर बुखार की शिकायत होती है। इसके अलावा सिरदर्द, बहती नाक, गले में सूजन, आवाज बैठना, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, पेट में दर्द, डायरिया और/अथवा उल्‍टी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। 

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जब आपको बुखार होता है, तो इसका अर्थ है कि बीमारी या संक्रमण की प्रतिक्रिया के रूप में आपके शरीर का तापमान बढ़ गया है। विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि बुखार संक्रमण के प्रति शरीर की कुदरती प्रतिरक्षा का हिस्‍सा है। गर्मी से शरीर संक्रमण को नष्‍ट करने का काम करता है। और यह बात समझ लें कि एंटी बायोटिक्‍स का संक्रमण पर कोई असर नहीं होगा। 
 आइए आपको बताते वायरल बुखार के इलाज के लिए कुछ आसान घरेलू उपचार, जो कि निम्नलिखित हैं-
मेथी का पानी (Fenugreek Water)
रसोई घर में आसानी से उपलब्ध, मेथी के बीज में डायेसजेनिन, सपोनिन्स और एल्कलॉइड जैसे औषधीय गुण शामिल है। मेथी के बीजों का प्रयोग अन्य बहुत सी बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है और यह वायरल बुखार के लिए बेहतरीन औषधि है।कैसे तैयार करें- आधा कप पानी में में एक बड़ा चमचा मेथी के बीच भिगोएँ। सुबह में, वायरल बुखार के इलाज के लिए नियमित अंतराल पर इस पेय को पिएं। कुछ और राहत के लिए मेथी के बीज, नींबू और शहद का एक मिश्रण तैयार कर उसका प्रयोग भी किया जा सकता है।

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स्‍नान करें
गुनगुने या ठंडे पानी के टब में बैठने से आपको बेहतर महसूस होगा।
सूखी अदरक मिश्रण (Dry ginger mixture)
अदरक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसमें एंटी फ्लेमेबल, एंटीऑक्सिडेंट और वायरल बुखार के लक्षणों को कम करने के लिए Analgesic गुण होते हैं। इसलिए, वायरल बुखार से पीड़ित लोगों को परेशानी को दूर करने के लिए शहद के साथ सूखी अदरक का उपयोग करना चाहिए।कैसे करें तैयार- एक कप पानी में दो मध्यम आकार के सूखे टुकड़े अदरक या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। दूसरे उबाल में अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी आदि को उबालें। इसे दिन में चार बार थोड़ा थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है।

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गर्मी को नियंत्रित रखें
कमरे के तापमान को कम करें इसके लिए आप खिड़की खोल सकते हैं। और अगर ठंड हो तो अपने पास एक गर्म कंबल रखें। अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए उन कपड़ों का इस्‍तेमाल करने के बजाय जिन्‍हें उतारना मुश्किल हो, कंबल का इस्‍तेमाल बेहतर रहता है। ठंडा भोजन करने से भी आपको मदद मिल सकती है।
चावल स्टार्च (Rice starch)
वायरल बुखार के इलाज के लिए प्राचीन काल से आम घर उपाय है चावल स्टार्च (हिंदी में कांजी के रूप में जाना जाता है)। यह पारंपरिक उपाय प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है। यह विशेष रूप से वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए, एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय के रूप में कार्य करता है।
कैसे तैयार करें- एक भाग चावल और आधा भाग पानी डालकर चावल के आधा पकने तक पकाएं। इसके बाद पानी को निथार कर अलग कर लें और इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर, गर्म गर्म ही पिएं। इससे वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।

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खूब पानी पियें
वायरल की हालत में आपको खूब पानी पीना चाहिये। इसके अलावा जूस और कैफीन रहित चाय का सेवन करें। ज्‍यादातर फलों में एंटी-ऑक्‍सीडेंट्स पाये जाते हैं जिनका सेवन करने से आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं। अगर आपको डायरिया या उल्‍टी की शिकायत है तो इलेक्‍ट्रॉल का सेवन आपके लिए फायदेमंद होगा। इसके अलावा, नींबू, लैमनग्रास, पुदीना, साग, शहद आदि भी आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं।



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धनिया चाय (Coriander Tea)

धनिया के बीज में phytonutrients होते हैं जो कि शरीर को विटामिन देते हैं और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाते हैं। धनिया में मौजूद एंटीबायोटिक यौगिक वायरल संक्रमण से लड़ने की शक्ति देते हैं।
कैसे तैयार करें- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्म्च धनिया के बीच डालकर उबाल लें। इसके बाद इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं। धनिया की चाय तैयार है, इसे पीने से वायरल बुखार में बहुत आराम मिलता है।
नींबू के पानी की जुराब
एक कप गर्म पानी में एक नींबू का रस निचोड़ लें। इस पानी में रूई के पतले फोहे डुबो लें। अतिरिक्‍त पानी को निचोड़ लें और इसे जुराबों के जोड़े में डालकर रात भर पहनकर सो जाएं।
तुलसी के पत्ते का काढ़ा (Brew of Basil leaves)
वायरल बुखार के लक्षण होने पर प्राकृतिक उपचार के लिए सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है तुलसी के पत्ते। बैक्टीरियल विरोधी, कीटाणुनाशक, जैविक विरोधी और कवकनाशी गुण तुलसी को वायरल बुखार के लिए सबसे उत्तम बनाते हैं।
कैसे तैयार करें- आधे से एक चम्मच लौंग पाउडर को करीब 20 ताजा और साफ तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी को तब तक उबालें जब तक कि पानी घट कर आधा न रह जाए। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें।
लहसुन
कच्‍चे लहसुन के टुकड़े खायें। आप इस पर शहर लगाकर भी खा सकते हें। इसके अलावा लहसुन की दो कलियों को दो चम्‍मच ऑलिव ऑयल में मिलाकर इसे गर्म कर लें और इससे अपने पैरों के तलों में मसाज करें। अपने पैरों को सारी रात के लिए लपेटकर रखें।
नींबू
नींबू को बीच में से काट लें और फिर इस टुकड़े से पैरों के तलों पर मसाज करें। आप चाहें तो नींबू के इस कटे हुए टुकड़े को जुराबों में डालकर सारी रात पहनकर रख सकते हैं।




28.12.16

पार्किंसन रोग :लक्षण एवम उपचार //Parkinson's disease: symptoms and treatment


पार्किंसंस दिमाग से जुड़ी बीमारी है। इसमें दिमाग की कोशिकाएं बनना बंद हो जाती हैं। शुरुआती सालों में इसके लक्षण काफी धीमे होते हैं जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञ आम लक्षणों से इस बीमारी की पहचान करते हैं जिसमें कांपना, शारीरिक गतिविधियों का धीरे होना (ब्राडिकिनेसिया), मांसपेशियों में अकडऩ, पलकें न झपका पाना, बोलने व लिखने में दिक्कत होना शामिल हैं। यह बीमारी कुछ साल पहले तक बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, आजकल युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।यह एक दिमागी बीमारी है इसमें व्यक्ति को कंपकंपी महसूस होती है साथ ही मांसपेशियों में कठोरता और धीमापन होने की शिकायत होती है | जानकारों कहते है कि यह दिमाग के हिस्से बेंसल गेंगिला में विकृति के चलते पैदा होती है और न्यूरोट्रांसमीटर डोपामीन में कमी के चलते पैदा होती है और आंकड़े बताते है कि दुनियाभर में 6.3 मिलियन लोग इस बीमारी से पीडित है और आपको बता दें वैसे तो यह बीमारी अमूमन 60 साल के बाद की उम्र में ही होती है और महिलाओं के मुकाबले पुरुषो को यह निशाना अधिक बनाती है 

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प्रमुख लक्षण-

 हाथ-पैरों में कंपन
पार्किंसंस बीमारी का प्रमुख लक्षण हाथ-पैरों में कंपन होना है। लेकिन बीस प्रतिशत रोगियों में ये दिखाई नहीं देते। फोर्टीस अस्पताल की कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुषमा शर्मा के अनुसार, यह बीमारी शारीरिक व मानसिक रूप से रोगी को प्रभावित करती है। अक्सर डिप्रेशन, दिमागी रूप से ठीक न होना, चिंता व मानसिकता को इस बीमारी से जोड़कर देखा जाता है। इसके कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुए हैं लेकिन इसका कारण आनुवांशिक हो सकता है।

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कीटनाशकों (Insecticide) के सम्पर्क में आने के कारण भी यह हो सकती है – एक पत्रिका में छपे लेख के अनुसार कई रोगी जो पार्किंसन बीमारी (parkinson disease )से ग्रस्त मिले उनमे से ज्यादा संख्या उन लोगो की थी जो कभी न कभी कीटनाशकों के साथ लम्बे समय तक सम्पर्क में रहे थे और अमेरिका की एक अकादमी ने इस बात का समर्थन भी किया है इसलिए तो हर जगह सलाह दी जाती है कि जब भी आप बाजार से कभी भी सब्जी या फल लेकर आते है तो उन्हें अच्छे से पानी में धो लेना आवश्यक है क्योंकि न धोने पर हम कीटनाशकों के सम्पर्क में आते है और हो सकता है हम भी आगे जाकर पार्किंसन बीमारी (parkinson disease ) का शिकार हो जाएँ हाँ ऐसा अगर संभव हो तो बेहतर है कि हम आर्गेनिक फल और सब्जियों का उपयोग करना शुरू कर दें जो कि समय और मांग के अनुसार अभी तो हमारे लिए महंगा होता है अगर हम एक मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करते है तो क्योंकि आमतौर पर आर्गेनिक फल सब्जियां बाजार भाव से महंगी मिलती है क्योंकि वो कंही अधिक शुद्ध और प्राकृतिक तरीके से पैदा की गयी होती है इसलिए उनकी पैदावार कम होती है फलस्वरूप वो तुलनात्मक रूप से महंगी भी होती है |



पार्किन्संस बीमारी को अक्सर डिप्रेशन या दिमागी रूप से ठीक न होने की स्थिति से जोड़ा जाता है, लेकिन इस संदर्भ में यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि इस बीमारी से पीडि़त रोगी मानसिक रूप से विकलांग नहीं होते हंै। उन्हें समाज से अलग नहीं देखना चाहिए।

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शुरुआती स्टेज पर डॉक्टर लक्षणों को मैनेज करने के लिए दवाओं का सहारा लेते है, लेकिन दवाओं के प्रभावी न होने और इनके साइड इफेक्ट के सामने आने पर अंत में डीप ब्रेन स्टीमुलेशन (डीबीएस) थेरेपी काफी कारगर साबित हुई है।
पार्किंसंस के लिए आयुर्वेदिक उपचार
पार्किंसन रोग केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। पार्किंसन का आरम्भ आहिस्ता-आहिस्ता होता है। पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए। अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है तब अहसास होता है कि कुछ गड़बड़ है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि आयुर्वेदिक की मदद से पार्किंसंस के प्राकृतिक उपचार में मदद मिलती है, जिससे बीमारी से छुटकारा पाकर आपका शरीर पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो जाता है। यह एक ऐसा इलाज है जिसमें पूरे शरीर का इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार तथ्‍य पर आधारित होता है, जिसमें अधिकतर समस्‍याएं त्रिदोष में असंतुलन यानी कफ, वात और पित्त के कारण उत्‍पन्‍न होती है।

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

दिमाग का टॉनिक ब्राह्मी
पार्किसन के लिए ब्राह्मी को वरदान माना जाता है। यह दिमाग के टॉनिक की तरह काम करती है। भारत में सदियों से कुछ चिकित्‍सक इसका उपयोग स्‍मृति वृद्धि के रूप में करते आ रहे हैं। मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर के अध्‍ययन के अनुसार, ब्राह्मी मस्तिष्‍क में ब्‍लड सर्कुलेशन में सुधार करने के साथ मस्तिष्‍क को‍शिकाओं की रक्षा करती है। पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के द्वारा किए एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ब्राह्मी के बीज का पाउडर पार्किंसंस के लिए बहुत बढि़या इलाज है। यह रोग को दूर करने और मस्तिष्क की नुकसान से रक्षा करने करने का दावा करती है।
लोकप्रिय जड़ी-बूटी काऊहेग (Cowhage)
भारत में लोकप्रिय जड़ी बूटी काऊहेग या कपिकछु देश भर में तराई के जंगलों की झाड़ि‍यों में पाया जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर ने काऊहेग के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें लेवोडोपा या एल-डोपा, दवा में मौजूद एल-डोपा की तुलना में पार्किसंस रोग के उपचार में बेहतर तरीके से काम करता है।
पार्किंसन रोग केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। पार्किंसन का आरम्भ आहिस्ता-आहिस्ता होता है। पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए। अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है तब अहसास होता है कि कुछ गड़बड़ है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि आयुर्वेदिक की मदद से पार्किंसंस के प्राकृतिक उपचार में मदद मिलती है, जिससे बीमारी से छुटकारा पाकर आपका शरीर पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो जाता है। यह एक ऐसा इलाज है जिसमें पूरे शरीर का इलाज किया जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार तथ्‍य पर आधारित होता है, जिसमें अधिकतर समस्‍याएं त्रिदोष में असंतुलन यानी कफ, वात और पित्त के कारण उत्‍पन्‍न होती है।
हल्दी का प्रयोग 
हल्‍दी एक ऐसा हर्ब है, जिसमें मौजूद स्‍वास्‍थ्‍य गुणों के कारण हम इसे कभी अनदेखा नहीं कर पाते। मिशिगन स्‍टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बसीर अहमद भी इसके बहुत बड़े प्रशंसक है। उन्‍होंने एक ऐसी शोधकर्ताओं की टीम का नेत्तृव भी किया, जिन्‍होंने पाया कि हल्‍दी में मौजूद करक्यूमिन नामक तत्‍व पार्किंसंस रोग को दूर करने में मदद करता है। ऐसा वह इस रोग के लिए जिम्‍मेदार प्रोटीन को तोड़कर और इस प्रोटीन को एकत्र होने से रोकने के द्वारा करता है।

नई और पुरानी खांसी के रामबाण उपचार 

जिन्कगो बिलोबा
जिन्‍कगो बिलोबा को पार्किंसंस से ग्रस्‍त मरीजों के लिए एक लाभकारी जड़ी-बूटी माना जाता है। मेक्सिको में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के राष्ट्रीय संस्थान में 2012 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, जिन्कगो पत्तियों के सत्‍त पार्किंसंस के रोगी के लिए फायदेमंद होता है।
दालचीनी से ईलाज
एक नए अध्ययन से पता चला है कि भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी
पार्किंसन के रोग को बढ़ने से रोकने में मददगार हो सकती है।
अमेरिका में रश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अध्ययन कर यह पता लगाया है कि दालचीनी का इस्तेमाल इस बीमारी के दौरान बायोकेमिकल, कोशिकीय और संरचनात्मक परिवर्तनों को बदल सकता है। इस अध्ययन के दौरान दालचीनी के इस्तेमाल से चूहे के दिमाग में इस तरह के परिवर्तन हुए।
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता कलिपदा पहन और रश में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डेविस ने कहा, सदियों से दालचीनी का इस्तेमाल व्यापक रूप से एक मसाले के रूप में दुनिया भर में होता रहा है। उन्होंने कहा, पार्किंसन से ग्रस्त रोगियों में इस बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए संभवत यह सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक हो सकता है।11 अप्रैल को हम वर्ल्ड पार्किंसंस डिज़ीज़ डे के तौर पर भी जानते हैं। आँकड़े बताते हैं कि भारत में पार्किंसन के क़रीब 25 फीसदी मरीज़ 40 साल से कम उम्र के हैं, इसलिए इस रोग के प्रति सचेत रहना बहुत जरूरी है।

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आमतौर पर पार्किंसन की बीमारी 50 की उम्र से अधिक के लोगों में ही होती है, लेकिन एम्स के मुताबिक, भारत में 25% मामलों में यह 40 से कम उम्र के लोगों में देखी गई है।
   अगर रास्ता चलते हुए आपको झटका-सा लगता है और आप अपना बैलेंस नहीं बना पाते। आप आराम से बैठे हैं और हाथों में स्टिफनेस महसूस करने लगते हैं या फिर अचानक ही आपकी आवाज भी धीमी होने लगती है, तो आपको फिक्रमंद होना चाहिए। ये लक्षण पार्किंसन के हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो, पार्किंसन में आदमी थोड़ा स्लो हो जाता है, लेकिन कोई भारी खतरा नहीं होता है। सही इलाज और नियमित व्यायाम काफ़ी कारगर साबित होते हैं।
    विशेषज्ञ बताते हैं कि यह अजीब किस्म की बीमारी हजार में से किसी एक को ही हो सकती है। दरअसल, इसमें शरीर को जितनी डोपामिन की जरूरत है, उससे कम बनने लगता है। इसकी वजह से 80% सेल्स का जब लॉस हो जाता है, तब जाकर बीमारी का पहला सिंपटम दिखाई देता है। जाहिर है कि जब लक्षण ही देर से पता लगेंगे, तो समस्या स्वाभाविक है।




न्यूरोलोजिस्ट्स की मानें तो इस रोग के लिए सबसे बड़ी समस्या, लोगों में जागरूकता की कमी है। मरीज़ जब किसी फिजिशियन के पास स्पीड के स्लो होने जैसी प्रॉब्लम लेकर जाते हैं, तो उन्हें विटामिंस लेने का सुझाव दे दिया जाता है जबकि विटामिन और प्रोटीन की डोज इस बीमारी में दवाइयों के प्रभाव को कम करता है। इसलिए जो न्यूरॉलॉजिस्ट पार्किंसन के इलाज का विशेषज्ञ हो, वही सही ट्रीटमेंट दे सकता है।
डॉक्टर्स के मुताबिक अगर आप शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हैं, तो पार्किंसन का सामना अच्छी तरह से कर सकते हैं। ऐसा देखा गया है कि, डिप्रेशन और एंग्जाइटी का भी इसमें निगेटिव रोल होता है। कई रोगियों में पार्किंसन के अटैक से पहले सूंघने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसा भी देखा गया है कि यह रोग होने से 5-10 साल पहले लोगों को नींद में अधिक बड़बड़ाने या हाथ-पैर चलाने की शिकायत होती है।
पार्किंसन की जाँच हर जगह नहीं हो सकती। इसे आप न्यूरोलॉजिस्ट से ही करा सकते हैं। जितनी जल्दी मरीज़ का इलाज शुरू हो जाए, असर भी उसी के अनुसार जल्दी होता है। ज़रूरी है कि इलाज के दौरान दवाइयों में लापरवाही बिल्कुल न की जाए । पार्किंसन के रोगी को योग और व्यायाम किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।







24.12.16

ज्यादा पसीना होना:कारण और उपचार:// Excess sweating treatment


   

गर्मियों के मौसम में पसीना आना स्वाभाविक है। और पसीना आना शरीर के लिए सेहतमंद भी है। लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है उन्हें डीहाइड्रेशन या नमक की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती है। जी हां बहुत ज्यादा पसीना आना वैसे तो कोई बीमारी नहीं, लेकिन कभी-कभी इसके पीछे स्वेट ग्लैंड में गड़बड़ी, स्ट्रेस, हार्मोनल बदलाव, मसालेदार डाइट, अधिक दवाएं, मौसम और मोटापे जैसे कारण हो सकते हैं। बहुत अधिक पसीना आने की स्थिति को हाइपरहाइड्रोसिस भी कहा जाता है।

हायपरहाइड्रोसिस से हमारी आबादी का दो से तीन प्रतिशत हिस्सा प्रभावित है
क्यों आता है पसीना
हमें पसीना इसलिए आता है ताकि हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। क्योंकि हमारे शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फैरनहाइट के आसपास ही रहना चाहिए। इसे नियंत्रण में रखने के लिए हमारे शरीर में कोई 25 लाख पसीने की ग्रंथियां हैं। ये ग्रंथियां एयर कंडीशनिंग का काम करती हैं। जब गर्मी बहुत बढ़ जाती है (चाहे वह बाहरी कारणों से हो या खान-पान की वजह से), तो शरीर को ठंडा करने के लिए इन ग्रंथियों से पसीने की बूंदें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब पसीना हवा में सूखता है तो ठंडक पैदा होती है और हमारे शरीर का तापमान कम हो जाता है।
पसीना ज्यादा आने पर बचने के घरेलु उपाय-
*साफ-सफाई का ध्यान रखें
पसीना अधिक आने की समस्या होने पर साफ सफाई का खास खयाल रखें। इससे पसीने को रोकने में बहुत मदद मिलती है। इससे पर्सनल हाइजीन होती है और आपकी त्‍वचा भी संक्रमण और बीमारी से बचती है। जब भी कोई कपड़ा पहने तो उससे पहले अपने अंडरआर्म को सुखा लें। इससे कम पसीना आएगा। ठीक प्रकार से नहाएं और गर्मियों के मौसम में रोजाना दो बार नहाएं।

    *जैतून का तेल
    अन्य तेलों से ज्यादा गुणकारी होता है, यह पसीने को कम करता है। यह पाचन तंत्र को ठीक करता है जिससे शरीर सही काम करता है। इसमें एंटी-ओक्सीडेंट्स होते हैं जो कि पसीना पैदा करने वाले बैक्टीरिया को नियंत्रित रखते हैं। इसलिए जैतून के तेल को अपने रोजाना के खाने में शामिल करें। साथ ही सब्जियों को भी जैतून के तेल में पकाए।
    .* विटामिन बी
    आपके शरीर में विटामिन बी और प्रोटीन का संतुलन सही हो तो शरीर सही कार्य करता है। विटामिन बी शरीर के लिए ईंधन की तरह काम करता है जिससे आवश्यक मेटाबोलिक क्रियाएँ और शरीर का नर्वस तंत्र ठीक तरह काम करता है। यदि बिना ज्यादा वर्कआउट के ही आपको पसीने ज्यादा आते है तो अपने आहार में विटामिन बी की चीजें शामिल करें। आप रोजाना इसकी एक टेबलेट भी ले सकते हैं। विटामिन बी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए सब्जियाँ, प्रोटीन और अनाज ले।




    सब्जियाँ
    संतुलित आहार पसीने को नियंत्रित करने में कारगर हैं। सब्जियों में पानी और कैल्शियम होने के कारण यह पसीने जैसी शर्म की स्थिति को पैदा नहीं होने देती। सब्जियों के सेवन से ना केवल पसीना नियंत्रित होता है बल्कि ये आपको स्लिम रखती हैं, पाचन बढ़ता है और शरीर में नमी रहती है।
    *केले
    केले में पोटेशियम की अधिकता होती है। यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखता है और पोटेशियम की कमी को पूरी करता है। केला आपके पाचन को ठीक रखता है, आपको खुश रखता है और अधिक पसीने को दूर रखता है।
    * ग्रीन टी
    ग्रीन टी वजन कम करने में मददगार है और साथ ही यह शरीर के नर्वस सिस्टम को शांत रखती है जिससे पसीना कम आता है। पसीने की परेशानी को दूर रखने के लिए वर्कआउट से पहले ग्रीन टी का सेवन करें।
    .*दही
    दही में कैल्शियम की अधिकता होती है और यह पसीने को कम करता है। यह आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है जिससे पसीना कम आता है। यदि आप दही नहीं लेते हैं तो ऐसे खादय पदार्थ ले सकते हैं जिनमें पोटेशियम और कैल्शियम की अधिकता होती है।
    डाइट का खयाल रखें-
    टमाटर का जूस लें। प्रतिदिन एक बार एक कप टमाटर का जूस लेने से अधिक पसीने आने की समस्या से राहत मिलती है। इसके अलावा ग्रीन टी पियें, इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर रहहती है बल्कि यह पसीने को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है। हां पानी अधिक से अधिक पिएं। ताकि पसीने की दुर्गंध से आपको छुटकारा मिल सके और शरीर भी हाइड्रेट रहे। ध्यार रहे कि स्ट्राबेरी, अंगूर और बादाम आदि में सिलिकॉन अधिक मात्रा में होता है जिससे पसीना अधिक बनता है। कोशिश करें कि डाइट में इन्हें कम ही लें।
    *पसीने के साथ शरीर के अंदर मौजूद बहुत सारी नुकसानदायक चीजें भी बाहर निकलती रहती हैं। इसलिए पसीना निकलना भी बहुत जरूरी है लेकिन परेशानी तब बढ़ जाती है जब ये बहुत ही ज्यादा मात्रा में निकलने लगता है।
    *रोजाना के कामकाज में पसीने के साथ डिहाइड्रेशन की भी शिकायत होने लगती है।हाथ, पैरों में बहुत ज्यादा पसीने की प्रॉब्लम हो रही हो, तो ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि ये प्राइमरी या फोकल हाइपरहाइड्रोसिस भी हो सकता है। इससे ज्यादातर लोग प्रभावित होते हैं। लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि ये किसी प्रकार की कोई बीमारी है। कई बार ज्यादा दवाइयां खाने, किसी प्रकार के इलाज के कारण भी पसीने की समस्या शुरू हो जाती है जिसे सेकेंडरी हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है। इसमें मौसम ठंडा रहने पर भी पसीना निकलता ही रहता है।




    हृदय संबंधी समस्या का संकेत-
    बिना किसी काम और एक्‍सरसाइज के सामान्‍य से अधिक पसीना आना हृदय की समस्याओं की पूर्व चेतावनी संकेत हो सकते हैं। दरअसल अवरुद्ध धमनियों के माध्यम से खून को दिल तक पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जिससे शरीर को अतिरिक्त तनाव में शरीर के तापमान को सामान्‍य बनाए रखने के लिए अधिक पसीना आता है। 
    *जिन लोगों को पसीना ज्यादा आता है उन लोगों को साफ सफाई का कुछ ज्यादा ही ध्यान रखना पड़ता है अगर आपको भी पसीना ज्यादा आता है तो आप अपने बदन की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें तभी आप अधिक पसीना आने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं अगर हो सके तो गर्मियों के दिनों में आप कम से कम 2 बार जरूर नहाने और आपके नहाने का जो पानी है उसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा डालकर भी ज्यादा पसीना आने की समस्या को कम कर सकते हैं.
    *पसीना ज्यादा आता है उन्हें दिन में एक बार रोजाना टमाटर का जूस पी लेना चाहिए ऐसा करने से भी आपके शरीर में पसीना आना कम हो जाता है.
    *उसके अलावा एक उपाय और है जिन लोगों को बहुत अधिक पसीना आता है उन्हें चाय या कॉफी छोड़ देनी चाहिए और उसकी जगह ग्रीन टी का इस्तेमाल कीजिए ग्रीन टी पीने से पसीने आने की शिकायत ना के बराबर ही हो जाती है.
    *जिनको ज्यादा पसीना आता है उन्हें पानी ज्यादा पीना चाहिए क्योंकि पसीना ज्यादा आएगा तो आपके शरीर में दुर्गंध भी ज्यादा होगी और अगर आप ज्यादा पानी पिएंगे तो यह दुर्गंध कम हो जाएगी.
    *जिन लोगों को ज्यादा पसीना आता है उन लोगों को स्ट्रोबेरी, बादाम या अंगूर जैसी चीजें नहीं खाने चाहिए क्योंकि स्ट्रॉबेरी, अंगूर और बादाम में सिलिकॉन अधिक मात्रा में होता है जोकि पसीना ज्यादा आने में सहायक होता है अगर आप यह बंद कर देंगे तो भी आप का पसीना आना कम हो सकता है.
    *जिन व्यक्तियों या महिलाओं को पसीना ज्यादा आने की शिकायत हो ऐसे लोगों को फंगल इंफेक्शन होने की संभावना अधिक बनी रहती है। आप इस दिक्कत से इस तरह बच सकते हैं, अपने बॉडी की सफाई पर विशेष ध्यान देना और जितना सम्भव हो आप सिर्फ सूती कपडे ही पहने क्योंकि रेशमी या सिंथेटिक कपडे आपका पसीना नहीं सोख पाते हैं और इस वजह से आपको फंगल स्किन या चार्म रोग होने की संभावना और ज़्यादा बढ़ जाती हैं
    *पसीना जिनको ज्यादा आता हूं उनको कुछ तेज पत्ते लाकर मैं पानी में बहुत अच्छी तरह से उबाल लेना चाहिए और अच्छे से उबाल आ जाने पर इस पानी को ठंडा होने के बाद यह पानी उन जगहों पर लगाएं जिस जगह से ज्यादा पसीना आता है. जैसे बगलों में, पढ़ पर, या रान पर.
    *शरीर में जिन हिस्सों में ज्यादा पसीना आता है उन्हें कच्चे आलू की स्लाइस को काटकर उन हिस्सों पर मलें ऐसा करने पर आप को पसीना आना कम हो जाएगा.
    * शर्ट के बगल वाले हिस्से को पसीने के निशान से बचाने के लिए स्वेट पैड्स का इस्तेमाल करना चाहिए।






    * डियो, स्प्रे के बजाय रोलॉन या टेलकम पाउडर का इस्तेमाल ज्यादा अच्छा रहता है, लेकिन इसके ज्यादा प्रयोग करने से बचें क्योंकि ये स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
    *पसीने की अधिकता से सिर की त्वचा में दाने निकल आते हैं जिसे दूर करने के लिए माइल्ड शैंपू बहुत ही कारगर होता है।
    * हमेशा खुश रहने की कोशिश करें, क्योंकि कई बार ज्यादा पसीना निकलने का कारण तनाव और गुस्सा भी होता है।
    * एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करें। जितनी बार नहाएं उतनी बार इसका प्रयोग करें। नहाने के पानी में यूडी कोलन की कुछ बूंदें डालना भी फायदेमंद होता है।
    *पसीने की वजह से पैरों में फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। इससे बचने के लिए उंगलियों के बीच एंटी फंगल पाउडर छिड़कने के बाद ही मोजे और जूते पहनें।
    * इस मौसम में कुछ लोग मोजे पहनना छोड़ देते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं, इससे पैरों में एलर्जी हो सकती है।
    * तलवों से अधिक पसीना निकलता हो तो इससे बचने के लिए नहाने से पहले, पानी से भरे टब में दो चम्मच फिटकरी पाउडर डालकर उसमें दो मिनट तक पैरों को डुबोकर रखना चाहिए।
    *गर्मी के मौसम में बगल से सबसे ज्यादा पसीने की प्रॉब्लम होती है। तो बाहर निकलने से पहले कुछ मिनटों तक शरीर के इस हिस्से पर बर्फ रखना फायदेमंद होता है। इससे ज्यादा पसीना नहीं निकलता।


    किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

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    22.12.16

    डकार आने के कारण और घरेलू उपचार: burp treatment

      

      खाना खाने के बाद डकार आना ठीक माना जाता है। लेकिन जब यह बार-बार आने लगे तो यह एक समस्या बन सकती है जो आपको तकलीफ देती है। पेट के अंदर की गैस को बाहार निकालने का प्राकृतिक तरीका है डकार। यदि पेट के अंदर की गैस डकार के जरिए बाहार न आए तो यह कई पेरशानी पैदा करती है जैसे पेट में दर्द और पेट मे जलन आदि। यदि डकार अधिक आने लगे तो कुछ सरल उपायों को आप अजमाकर इससे तुरंत राहत पा सकते हैं। आइये जानते हैं डकार दूर करने के उपाय।
    दही या लस्सी-
    दही में मौजूद बेक्टीरिया आंतों और पेट से जुड़ी हुई हर तरह की दिक्कतों को दूर करते हैं। डकार आने पर आप लस्सी या छाछ भी पी सकते हैं।दही एक आसान घरेलू नुस्खा है और यह एक प्रभावी नुस्खा है जो आपको डकार की समस्या से बचने में मदद करता है। पेट की समस्या का उपचार करने के लिए अपने रोजाना के खानपान में दही को शामिल करें। दही में जीवित बैक्टीरिया (bacteria) होते हैं जो पेट की समस्याओं से आपको निजात दिलाते हैं और आपके पेट में अच्छे बैक्टीरिया का सृजन भी करते हैं। दही का प्रयोग दूध और दुग्ध उत्पादों के स्थान पर किया जा सकता है जो कि एक अच्छी बात है, क्योंकि दुग्ध उत्पादों से डकार में वृद्धि होती है। आपके लिए यही अच्छा होगा कि छाछ में दही को मिश्रित कर लें। छाछ का प्रयोग भी डकार आने से रोकने के लिए किया जाता है। पानी के साथ दही का मिश्रण करें और इन दोनों को अच्छे से मिलाएं। इसमें थोड़ा सा जीरा मिलाएं जिससे पेट का स्वास्थ्य बना रहेगा और डकार भी नहीं आएगी।

    बवासीर  के  रामबाण  उपचार

    *पपीते में पपेन नामक महत्वपूर्ण एंज़ाइम पाया जाता है जो आपके पाचन तंत्र को अच्छी स्थिति में रखता है। यह प्राय: उन व्यक्तियों द्वारा उपभोग में लाया जाता है जो अपनी त्वचा की देखभाल करते हैं लेकिन यह पाचन और डकार को ठीक करने की एक दवा है।
    बेकिंग सोडा और नींबू का प्रयोग- यदि डकार से ज्यादा ही दिक्कत बन गई हो तो आप इसको दूर करने के लिए दो गिलास पानी में एक चौथाई बेकिंग सोड़ा और एक छोटी चम्मच नींबू का रस को मिलाकर इसे अच्छे से घोलें और तुरंत इसे पी जाएं। ये उपाय थोडी ही देर में डकार को खत्म कर देगा।
    *काला जीरा- अधिक या ज्यादा डकार आने पर काला जीरा का सेवन करें। क्योंकि काला जीरा पेट और पाचन तंत्र को ठीक रखता है जिससे डकार की समस्या पल भर में दूर हो जाती है।
    *मेथी के हरे पत्ते उबालकर, दही में रायता बनाकर सुबह और दोपहर में खाने से खट्टी डकारे, अपच, गैस और आंव में लाभ होता है।

    *किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

    *सौंफ के बीजों में पेट को अकड़ से छुटकारा दिलाने वाले गुण होते हैं। यह आपके हाजमे की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है, जिससे आपको व्यर्थ की परेशानियों से गुज़रना नहीं पड़ता। तनावमुक्त रहने और रोजाना व्यायाम करने से भी मरोड़ों की समस्या हल हो जाती है। कार्मिनेटिव (Carminative) भ पेट की जमी हुई गैस को निकालने का एक बेहतरीन तरीका है। यह पेट की सूजन को दूर करने में भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक कप उबला पानी लेकर इसमें 1 चम्मच अच्छे से पिसे हुए सौंफ के बीजों का मिश्रण करें। इसे 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर इस मिश्रण को छान लें। इस मिश्रण का सेवन हर भोजन के पहले और बाद में करें। इससे पेट की गैस तेज़ी से बाहर निकलती है।
    *दालचीनी बेहतरीन प्राकृतिक नुस्खा है। यह पेट की समस्याओं को दूर करता है और आपके हाजमे को दुरुस्त करता है। यह आपको डकार और पेट में गैस की समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है। अपने द्वारा बनाई जा रही सब्जियों में भुनी हुई दालचीनी अवश्य डालें। आप चावल पका लेने से पहले इसमें भी दालचीनी भी डाल सकते हैं। इससे गैस की समस्या से आपका पीछा छूटता है। वैकल्पिक तौर पर दिन में 2 से 3 बार दालचीनी चबाएं। इससे भी गैस की परेशानी से निजात प्राप्त होती है। वैकल्पिक तौर पर चाय बनाएं और इसमें थोड़ी सी दालचीनी मिलाएं। इसमें थोड़ा सा ताज़ा अदरक भी मिश्रित करें। उबलते हुए पानी में एक चम्मच सौंफ डालें। इन्हें कुछ देर तक उबलने दें। इसके बाद इसे थोड़ा सा ठंडा होने दें और हल्की गर्म अवस्था में इसे पियें। इसका सेवन दिन में कई बार करने से पेट में गैस की समस्या से छुटकारा प्राप्त होता है।

    पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा  का  अचूक  इलाज 

    *नौसादर, कालीमिर्च, 5 ग्राम इलायची दाना, 10 ग्राम सतपोदीना पीस लें, इसे आधा ग्राम लेकर प्रतिदिन 3 बार खुराक के रूप में पानी के साथ लेने पर खट्टी डकारे, बदहजमी, प्यास का अधिक लगना, पेट में दर्द, जी मिचलाना तथा छाती में जलन आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।
    *बिजौरे नींबू की जड़, अनार की जड़ और केशर पानी में घोटकर रोगी को पिलाने से डकार और जुलाब बंद हो जाते हैं।
    *हर्बल चाय- यदि आप नियमित रूप से हर्बल चाय पीते हैं तो इससे आपको अधिक डकार की समस्या नहीं आती है। हर्बल चाय में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पेट की गैस को कम करते हैं। इसलिए खाना खाने के बाद हर्बल चाय का सेवन कर सकते हैं।
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    20.12.16

    सीताफल के बेमिसाल फायदे, आप जरूर जानना चाहेंगे.



       आज के जमाने  में बाल सफेद होना, झडऩा या गंजापन एक आम बीमारी बन चुका है। इस समस्या से दुनिया में अधिकतर लोग पीड़ित हैं।
    सीता फल के सेवन से बहुत सारे फायदे होते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं सीताफल के सेवन से होने वाले लाभो के बारे में जिनको आप इस फल के सेवन से प्राप्त कर सकते है |
    औषधि की तरह काम करता है ये सीताफल |

    गंजेपन से छुटकारा पाने के लिए -



    सीताफल के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीसकर लगाने से सिर के उड़े हुए बाल भी फिर से उग आते हैं।

    उच्च रक्तचाप की समस्या में सीताफल -
    सीताफल घबराहट दूर कर हार्टबीट को सही करता है। कमजोर हृदय या उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए इसका सेवन बहुत ही लाभदायक है।
    पेचिश के लिए सीताफल -
    कच्चा सीताफल खाने से अतिसार और पेचिश में फायदा मिलता है। कच्चे सीताफल को काटकर सुखा दें और पीसकर रोगी को खिलाएं। इसके कुछ दिन के सेवन से ही डायरिया बिलकुल सही हो जाएगा।
    सीताफल एक बड़ा ही स्वादिष्ट फल है जिसकी खूबियों के बारे में आयुर्वेद में भी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि सीता ने वनवास के समय श्रीराम को यह भेंट स्वरूव दिया  था। तभी से इस फल का नाम सीताफल पड़ा।
    सीताफल सिर्फ फल नहीं, बल्कि एक दवा भी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो लोग शरीर से दुबले पतले होते हैं उन्हें सीताफल का सेवन जरूर करना चाहिए। सीताफल खाने से शरीर की दुर्बलता तो दूर होती ही है साथ ही पुरुषत्व को बढ़ाने में भी यह रामबाण की तरह काम करता है।

    हर प्रकार की खांसी और कफ की समस्या के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

    मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए-
    सीताफल खाने से शरीर की दुर्बलता, थकान दूर होकर मांस-पेशियां मजबूत होती है।
    *आयुर्वेद के अनुसार सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है। कफ एवं वीर्यवर्धक, फल पित्तशामक, उल्टी रोकने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, तृषाशामक,, वात दोष शामक ,मांस एवं रक्त वर्धक ओर हृदय के लिए लाभदायी है।
    दुर्बलता को दूर करने के लिए -



    सीताफल दवा का काम भी करता है। इस फल को खाने से दुर्बलता दूर हो जाती है और यह पुरुषत्व  को बढ़ाने में रामबाण है
    अल्सर के लिए सीताफल-
    सीताफल एक मीठा फल है जिसमें कैलोरी काफी मात्रा में होती है। यह फल आसानी से पचने वाला होने समेत पाचक और अल्सर तथा एसिडटी में लाभकारी है।
    फोड़ो और फुंसी के सीताफल -
    सीताफल के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से वो ठीक हो जाते हैं।
    सिर को जुओं से मुक्त करने के लिए सीताफल- 
    सीताफल के बीजों को बारीक पीस कर रात को सिर में लगा लें और किसी मोटे कपड़े से सिर को अच्छी तरह बांध कर सो जाएं। इससे जुएं मर जाती हैं।
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    2.12.16

    सर्दी मे छुहारा दूध के साथ खाने के नायाब फायदे




    * सोते समय 1 छुहारा दूध में उबालकर खा लेते हैं और दूध को पी लेते हैं इसके सेवन के 2 घंटे बाद पानी न पिये। ऐसा करने से आवाज साफ हो जाएगी|
    *सुबह-शाम 3 छुहारे खाकर गर्म पानी पियें। छुहारे सख्त होने से खाना सम्भव न हो तो दूध में उबालकर ले सकते हैं। छुहारे रोजाना खाते रहने से बवासीर, स्नायुविक दुर्बलता, तथा रक्तसंचरण ठीक होता है। सुबह के समय 2 छुहारे पानी में भिगोकर रात को इन्हें चबा-चबाकर खाएं। भोजन कम मात्रा में करें या रात को 2 छुहारे उबालकर भी ले सकते हैं। इससे कब्ज दूर हो जाती है|
    * रोजाना 2 से 4 छुहारा मिश्री मिले हुए दूध में उबालकर गुठली हटाकर छुहारा खाने के बाद वहीं दूध पीने से बहुत लाभ होता है। इससे शरीर में ताकत आती है तथा बलगम निकल जाता है जिससे श्वास रोग (दमा) में राहत मिलती है|
    * छुहारे के पेड़ से प्राप्त गोंद को 3 ग्राम से लेकर 6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम चाटने से अतिसार (दस्त) में आराम मिलता है-
    * 2 से 4 छुहारों को गाय के दूध में उबाल लें। उबल जाने पर छुहारे निकालकर खायें तथा बचे हुए दूध में मिश्री मिलाकर पीयें। रोजाना सुबह-शाम इसका सेवन करने से मसूढ़ों से खून व पीव का निकलना बंद हो जाता है|
    * छुहारे की गुठली और ऊंटकटारे की जड़ की छाल का चूर्ण खाने से अग्निमान्द्यता (भूख का न लगना) में आराम मिलता है|

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    * गुठली निकालकर छुहारे के टुकड़े दिन में 8-10 बार चूसें। कम से कम 6 महीने तक इसका सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है|
    * 2-4 छुहारों को दूध में डालकर ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध को उबाल दें गुठली हटाकर खाने से और दूध को पी लेने से रक्तपित्त में लाभ होता है|
    * छूहारा बराबर रूप से दूध में उबालकर खाने से वीर्य बढ़ता है|
    * 2 छुहारों और मिश्री को दूध में डालकर उबालें और गर्म हो जाने पर उसकी गुठली को निकालकर छुहारे को हल्के गर्म दूध के साथ लेने से बुद्धि का विकास होता है|



    * छुहारे को जलाकर राख बनाकर मक्खन के साथ मिलाकर घाव पर लगाने से उपदंश में बहुत लाभ मिलता है|
    * 2 या 3 छुहारे रोजाना दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से वीर्य की कमी से होने वाला सिर का चकराना ठीक हो जाता है|
    *छुहारा खाने से खून साफ हो जाता है और त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं|
    * 2 छुहारे रात को 300 मिलीलीटर दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है|
    * सिर दर्द होने पर छुहारे की गुठली को पानी में घिसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है|
    *अगर बालक को दस्त कराना हो तो रात को छुहारों को पानी में भिगो दें। सबेरे छुहारों को पानी में मसलकर निचोड़ लें और छुहारे को फेंक दें। उसके बाद वही पानी बच्चे को पिलायें। इससे दस्त साफ होगा। अथवा थोड़े से गुलाब के फूल और चीनी खिलाकर ऊपर से पानी पिला दें। इससे भी दस्त साफ होगा|
    * अगर बच्चा कमजोर हो तो उसे उम्र के अनुसार 6 ग्राम से 30 ग्राम तक छुहारे लेकर पानी में धोकर साफ कर लें और गुठली निकालकर दूध में भिगो दें। थोड़ी देर बाद छुहारों को निकालकर सिल पर पीस लें और कपड़े में रस निचोड़ लें। इस तरह दिन में तीन बार हर बार ताजा रस निकालकर बच्चे को पिलायें। बच्चे के शरीर में खूब ताकत आ जायेगी। 1 महीने से कम उम्र के बच्चे को यह रस नहीं पिलाना चाहिए|
    *लगभग 10 ग्राम छुहारे लेकर पीस लें। रोजाना कम से कम 2 ग्राम की मात्रा में इस छुहारे के चूर्ण को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ सोते समय लेने से शरीर मजबूत होता है। इसका सेवन केवल सर्दियों के दिनों में ही करना चाहिए|
    * छुहारा शरीर को मजबूत व शक्तिशाली बनाता है। दूध को गर्म करते समय यदि उसमें छुहारा या खजूर डाल दिया जाए और फिर उस दूध को पियें तो वह शरीर को बहुत ही शक्तिशाली बनाता है|



    * 250 ग्राम गुठली रहित छुहारे, 250 ग्राम भुने चने, 250 ग्राम गेहूं का आटा, 60-60 ग्राम चिलगोजा, बादाम की गिरी, 500 ग्राम गाय का घी, 500 ग्राम शक्कर और 2 लीटर गाय का दूध। दूध में छुहारों को कोमल होने तक उबालें, फिर निकालकर बारीक पीस लें और फिर उसी दूध में हल्की आग पर खोवा बनने तक तक पकाएं। अब घी को आग पर गर्म करके गेहूं का आटा डालकर गुलाबी होने तक धीमी आग में सेंक लें, इसके बाद उसमें चने का चूर्ण और खोवा डालकर फिर धीमी आग पर गुलाबी होने तक भूने। जब सुगंध आने लगे तो इसमें शक्कर डालकर खूब अच्छी तरह मिलाएं। हलवा तैयार हो गया। इसमें और सारी चीजों को डालकर रखें। इसे 50-60 मिलीलीटर की मात्रा में गाय के गर्म दूध के साथ रोजाना 1 बार सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है|
    * लगभग 500 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर उसमें 2 छुहारे डाल दें। अब दूध के आधा रह जाने तक गर्म करें, फिर इस दूध में 2 चम्मच मिश्री या चीनी लेकर मिलाकर पीयें और छुहारे को खा जायें। इसको खाने से शरीर में मांस बढ़ता है, शरीर की ताकत बढ़ती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। छुहारा खून बढ़ाता है। इसका प्रयोग केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए। इसका सेवन करने के 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। एक बार में चार से ज्यादा छुहारों का सेवन नहीं करना चाहिए|
    * छुहारा गर्म होता है। यह फेफड़ों और सीने को बल देता है। कफ व सदी में इसका सेवन लाभकारी होता है|
    * 250 मिलीलीटर दूध में 2 छुहारा डालकर उबाल लें- जब दूध अच्छी तरह से उबल जाये और उसके अन्दर का छुआरा फूल जाये तो इस दूध को ठण्डा करके छुआरे को चबाकर खिलाने के बाद ऊपर से बच्चे को दूध पिला दें ऐसा रोजाना करने से कुछ दिनों में ही बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है|
    * यदि बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हो तो रोजाना रात को सोते समय खाली 2 छुहारे खिलाने से लाभ होता है|
    * बूढे़ आदमी बार-बार पेशाब जाते हो तो उन्हें रोजाना 2 छुहारे खिलाना चाहिए तथा रात को 2 छुहारे खिलाकर दूध पिलाना चाहिए|
    * छुहारा शरीर में खून को बनाता है तथा शरीर को बलवान व मोटा बनाता है- दूध में 2 छुहारे उबालकर खाने से मांस, बल और वीर्य बढ़ता है- बच्चे के लिए छुहारा दूध में भिगो देते हैं- जब दूध में रखा छुहारा फूल जाता है तो इसे छानकर तथा पीसकर बच्चों को पिलाना चाहिए|
    *पथरी, लकवा, पीठदर्द: पथरी, लकवा, पीठदर्द में छुहारा सेवन करना लाभदायक होता है। यह मासिक-धर्म को शुरू करता है। छुहारा अवरोधक अर्थात बाहर निकालने वाली चीजों को रोकता है। जैसे दस्त, आंसू, लार, वीर्य और पसीना आदि सभी को रोकता है। छुहारे में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग जैसे हडि्डयों की कमजोरी, दांतों का गलना आदि छुहारा खाने से ठीक हो जाते हैं|
    * छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और दूध पीने से नपुंसकता खत्म हो जाती है|
    * बराबर मात्रा में मिश्री मिले दूध में छुहारों को उबालकर गुठली हटाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है और इससे वीर्य, बल, बुद्धि भी बढ़ती है|




    *रात को पानी में 2 छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है|
    * पान में छुहारा और सोंठ रखकर कुछ दिनों तक चूसने से श्वास रोग (दमा) दूर हो जाता है|
    *छुहारे के बीज को पानी के साथ पीसकर गुहेरी पर दिन में 2 से 3 बार लेप करने से अंजनहारी में बहुत लाभ होता है।
    * छुहारे से गुठली निकालकर उसमें गुग्गुल भर दें। इसके बाद छुहारे को तवे पर सेंककर दूध के साथ सेवन करें। सुबह-शाम 1-1 छुहारा खाने से कमर दर्द मिट जाता है|
    *सुबह-शाम 2 छुहारों को खाने से कमर दर्द में लाभ होता है|
    * बिना बीज वाले छुहारे को पीसकर इसके साथ पिस्ता, बादाम, चिरौंजी और मिश्री मिलाकर, इसमें शुद्ध घी मिलाकर रख दें। एक सप्ताह बाद इसे 20-20 ग्राम तक की मात्रा में सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है|
    * 2-3 छुहारों को स्टील या चीनी मिट्टी के बर्तन में रात-भर पानी में भिगोए रखने के बाद सुबह गुठली अलग कर दें और छुहारे को दूध में पकाकर सेवन करें। इससे कमजोरी मिट जाती है|
    * 2 छुहारे रोजाना खाने से शीघ्रपतन के रोग में लाभ मिलता है और जिन लोगों का वीर्य पतला निकलता है वह गाढ़ा हो जाता है|
    * गैस के लिए-एक छुहारा बिना गुठली का और 30 ग्राम जयपाल खोपरा, 2 ग्राम सेंधा नमक को पीसकर और छानकर 3 खुराक बना लें। 3 दिन तक इस खुराक को 1-1 करके गर्म पानी के साथ सुबह लेने से गैस के रोग समाप्त हो जाते हैं|
    *रोजाना रात को सोते समय छुहारों को दूध में उबालकर पीयें। इसको पीने के 2 घण्टे बाद तक पानी न पीयें। इसके रोजाना प्रयोग से तीखी, भोंड़ी, आवाज साफ हो जाती है|


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