21.5.19

केले की चाय के अनोखे लाभ नहीं जानते होंगे आप!


आप भी सोच रहे होंगे कि चाय में केला डालकर कौन पीता है? पर शायद आपको पता नहीं होगा कि चैन की नींद पाने के लिए बहुत से लोग केले वाली चाय पीते हैं.
अगर आपको भी अच्छी नींद नहीं आती है और सोने के दौरान आप बीच-बीच में उठ बैठते हैं तो केले वाली चाय पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद है.
आमतौर पर लोग अच्छी नींद के लिए नींद की गोली ले लेते हैं लेकिन आप चाहें तो नींद की गोली की जगह केले वाली चाय ले सकते हैं. वैसे भी नींद की गोली लेने से अक्सर भारीपन, कब्ज और पेट दर्द की शिकायत हो जाती है.दूध की चाय, तुलसी की चाय, काली चाय और नींबू की चाय तो आप सभी ने जरूर पी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं केले की भी चाय बनती है। जो आपकी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। केले की चाय पीने से कई सारी समस्याएं दूर होती हैं। यह एक अचूक घरेलू उपाय है रोगों से बचने का। आइये जानते हैं केले की चाय के फायदों के बारे में ।
केले की चाय के फायदों को जानने से पहले जरूरी है कि आपको यह पता हो कि केले की चाय को किस तरह से बनाया जाता है।
सामग्री
एक मध्यम या छोटे आकार का केला
एक कप पानी
दालचीनी चूर्ण


केले की चाय बनाने की विधि

सबसे पहले आप एक कप पानी को गैस या चूले में उबालें इसके बाद स्वाद के हिसाब से इसमें दालचीनी पाउडर को डाल दें। और फिर केला का छिलका उतार कर उबलते हुए पानी में डाल दें। दस मिनट के बाद इसे छानकर इसे किसी कप डालकर पीजिए। बहुत ही कम समय में बन जाती है यह चाय ।
अब जानते हैं केले की चाय से मिलने वाले फायदों के बारे में
केले की चाय के फायदे
1. पेट से जुड़ी प्रॉब्लम्स
मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर होने के कारण इसका सेवन पेट से जुड़ी की प्रॉब्लम को दूर करता है। अगर आपको पेट दर्द, पेट में गैट, एसिडिटी या अपच की समस्या है तो इसका सेवन करें। आपकी प्रॉब्लम दूर हो जाएगी।
2. कब्ज से छुटकारा
पुरानी से पुरानी कब्ज से छुटकारा पाने के लिए आप इस चाय का सेवन करें। इसके अलावा रोज इसकी चाय पीने से पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है।
3. तनाव या टेंशन
बिजी शेड्यूल और भागदौड़ के कारण आजकल हर कोई टेंशन और तनाव की समस्या से झूझ रहा है। केले की चाय सीधे दिमाग पर असर करती हैं, जिससे आपका बढ़ा हुआ तनाव और टेंशन दूर होने लगती है।
4. अनिंद्रा की समस्या
अगर आपको अनिद्रा की समस्या तो इस चाय का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद है। इसे पीने से नींद न आने की समस्या दूर होती है। इसके लिए आप रात को सोने से पहले सिर्फ 1 कप केले की चाय का सेवन करें।


5. नर्वस सिस्टम के लिए फायदेमंद

केले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पोष्टिक तत्व नर्वस सिस्टम को रीलैक्स करने में मददगार होते हैं। इससे आप कई गंभीर बीमारियों से बचे रहते हैं और सारा दिन आपके शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है।
6. दिल को रखें स्वस्थ
पोटेशियम से भरपूर होने के कारण केले की चाय दिल को स्वस्थ रखने में बेहद मददगार होती है। इसके अलावा इसका सेवन उच्च रक्तचाप को भी कम करता है।
7. बूस्ट इम्यून सिस्टम
केले की चाय में विटामिन सी और ए भरपूर मात्रा में होते हैं, जोकि एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं। इसलिए इसका सेवन इम्यून सिस्टम को बूस्ट करके आपको कई बीमारियों से बचाता है।
8. वजन कम करने के लिए
अगर आप तेजी से अपना वजन कम करना चाहते हैं तो इस चाय को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। इस चाय में विटामिन ए,बी, पोटेशियम, ल्यूटिन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण आपका वजन तेजी से कम होता है।




7.4.19

वजन घटाएँ खीरे और पुदीने के सूप से


सूप में शामिल की जाने वाली सामाग्री और उसके फायदे:

खीरे
गर्मियों की यह औषधि आपकी कमर के लिए चमत्कार कर सकता है। खीरे में लगभग 98 प्रतिशत सिर्फ पानी होता है। यह एंटीऑक्सिडेंट, महत्वपूर्ण विटामिन और खनिजों से भरा हुआ है। खीरे सुपर फिलिंग होते हैं और फाइबर से भरपूर होते हैं जो तृत्पि करते हैं। यदि आपका पेट भरा रहेगा तो आपका मन बाकी की अस्‍वस्‍थ्‍य चीजों की तरफ नहीं जाएगा।
दही
दही प्रोटीन और कैल्शियम से युक्‍त होते हैं, दोनों ही वजन घटाने और वसा संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं।
लहसुन
लहसुन एक तरह की तीखी जड़ी बूटी है जो आपके मेटाबॉलिज्‍म यानी चयापचय के लिए चमत्कार से कम नहीं है। शरीब का अच्‍छा मेटाबॉलिज्‍म कैलोरी के तेजी से बर्न करने में सक्षम बनाता है।



नीबू का रस और पुदीने के पत्‍ते
नीबू का रस और पुदीने के पत्‍ते, दोनों ही गर्मी में शरीर के लिए अच्‍छे पोषक तत्‍व का काम करते हैं, चयापचय को भी बढ़ावा देते हैं। वे पाचन की सुविधा के लिए भी बहुत प्रभावी हैं।
सूप बनाने की समाग्री
सबसे पहले आप एक छोटा खीरा ले लीजिए, एक छोटी कटोरी में दही, चार कली लहसुन की, और एक नीबू के साथ 8 से 10 पुदीने के पत्‍ते लेकर रख लें।
कैसे बनाएं सूप
खीरे का ये सूप बनाना बहुत ही आसान है। इसे बनाने के लिए आप सबसे पहले जरूरत के अनुसार उपरोक्‍त सभी खद्य पदार्थ को इकट्ठा कर लीजिए। इसके बाद बाद उन्‍हें मिक्‍सर में एक साथ मिक्‍स कर लीजिए और आखिर में नींबू का रस मिलाकर सेवन करें।




5.4.19

वजन तेजी से कम करने के उपाय

                                                         
वजन कम करने के लिए लोगो द्वारा कई तरह के प्रयास किये जाते है| जैसे की कुछ लोग तो यह सिद्धांत बना लेते है की कम खाएंगे तो वजन कम होगा| लेकिन जब आप तेजी से वजन कम करना चाहते है, तो केवल डाइटिंग करने से बात नहीं बनेगी| और लम्बे समय तक यदि आपने डाइटिंग को अपनाया तो आप अपना वजन तो नहीं कम कर पाएंगे लेकिन हा कई सारी बीमारियाँ जरूर आपको घेर लेंगी| जल्द से जल्द वजन कम करने के लिए आपको कुछ अतिरिक्त देना होगा|
मोटापा आम तौर पर लाइफ स्टाइल की देन होती है। मोटा शरीर या फिर शरीर में फैट बिल्कुल भी अच्छा नहीं दिखता। अगर आप सिर्फ दो आदतों को रोजाना अपनाते हैं तो आप एक हफ्ते में ही तेजी से वजन घटा सकते हैं।
ये दो वो अचूक उपाय है जिसके लिए ना तो आपको जिम जाने की जरूरत है और ना ही वजन कम करनेवाली दवाइयों की। मोटापा कम करने का सबसे बड़ा सिद्धांत यही है कि आपको अपने शरीर में जमा कैलरी को उसी अनुपात में खर्च करनी होती है।
 अपने खाने की आदत को बदलें
अगर आप एक हफ्ते के अंदर तेजी से दुबले होने या मोटापा कम करने की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको अपने डेली रुटीन में बदलाव लाना होगा। खाने की आदत में तब्दीली करनी होगी। हम जो खाते हैं वो हमारे शरीर को लगता है। उस प्रकार का खाना जिसमें ज्यादा शुगर, कैलोरी हो खाने से परहेज करना चाहिए। मिसाल के तौर पर बेक्ड चीजें, फ्राइड फूड, स्वीट बेवरेज को अपने आहार में शामिल करने से बचना चाहिए। इन चीजों में बहुत ज्यादा फैट होता है जिससे मोटापा बढ़ता है।
इन्हें हरगिज ना खाएं
इसका मतलब यह हुआ कि आपको केक, कुकीज, कपकेक्स, मफिंस, ब्रेड, पेस्ट्री तो बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। साथ ही खाने में साल्टी फूड, स्नैक फूड, फ्रेंच फ्राइज, पोटैटो चिप्स को बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा मछली, मीट, पॉल्ट्री के ब्रेडेड प्रोडक्ट के सेवन से आपको बचना चाहिए।
संतुलित और पौष्टिक आहार ले
जैसा की हमने कहा की आप अपने वजन कम करने की राह में भूखे रहने से कामयाब नहीं हो पाएंगे| इसलिए रोज अच्छे से भोजन करे ताकि आपको व्यायाम करने के लिए भरपूर ऊर्जा मिले| रोज भोजन करने की खासियत यह की आप बीमार भी नहीं पड़ेंगे जिससे की आपको अपने लक्ष्य प्राप्ति में रुकावट भी नहीं आएगी| सादा भोजन करने के अलावा कई ऎसे खाद्य पधार्त है जो आपका वजन कम करने में सहायक है|
 तेजी से चलने की आदत डालें
घूमना, टहलना, तेजी से पैदल चलना एक ऐसा एक्सरसाइज है जिसके आपका वजन तेजी से कम होता है। इनकी मदद से आप मनचाहा रिजल्ट भी कुछ दिनों में आसानी से पा लेते हैं। महज चलने मात्र से ही आप 0.46 किलोग्राम यानी कि एक पाउंड वजन कम कर सकते हैं, लेकिन यह सब निर्भर करता है कि आप एक हफ्ते में कितना चलते हैं।
यह सच है कि आप बिना जिम जाए सिर्फ चलने से ही 9 किलो तक अपना वजन आराम से घटा सकते हैं। 10,000 कदम चलने से रोजाना आप अपने वजन में अभूतपूर्व कमी कर सकते हैं और आपको यह असर एक हफ्ते में ही दिखने लगेगा।


क्या करना चाहिए आपको
इसके लिए आप कार पार्किंग एरिया से हमेशा अपना गंतव्य दूर रखें। ताकि इसी बहाने आप पैदल चलने की आदत डाल सकेंगे। आप लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का सहारा लें। यानी अपने रोजाना की दिनचर्या में ही पैदल चलने की आदत डालें।
छोटी दूरियों के लिए गाड़ी लेने की आदत को छोड़ दे। हालांकि एक व्यक्ति को वजन कम करने के लिए 2000 कदम के आस-पास चलने की जरूरत होती है। आप इस बात को समझ लीजिए की एक मील में आपकी 100 कैलोरी बर्न होती है। लेकिन अगर आप 10,000 कदम थोड़े अंतराल पर भी चलने की आदत बना लेते हैं तो आपका वजन तेजी से घटना तय है और आपको इसके लिए जिम जाने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है।
• 1.6 किमी (1 मील) = 2000 कदम + 100 कैलोरी बर्न
• 0.45 किलोग्राम ( 1 पाउंड) = 3500 कैलोरी
• हफ्ते में 0.45 किलोग्राम (1 पाउंड) वजन कम = 500 कैलोरी बर्न रोजाना
• अगर आप 10 हजार स्टेप्स रोजाना चलेंगे तो सप्ताह में 0.45 किलोग्राम (1 पाउंड) वजन कम

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2.4.19

नींद की गोली खाने की आदत हानिकारक है ,जानें कैसे?

  


अक्सर तनाव या कोई मानसिक समस्या होने पर हम नींदकी गोली खा लेते हैं और हमें नींद भी आ जाती है। धीरे धीरे ये बड़ी परेशानी में बदल जाता है। नींद की गोली हमारे दिमाग पर बुरा असर डालती है। यह बात हम नहीं बल्कि बहुत सारे शोधों में कहीं गई है। हाल ही में एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया गया है कि एंटी कोलीनर्जिक युक्त गोलियां और नींद की गोली लेने से मैमरी ( याद्दाश्त) कमजोर हो जाती हैं। व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है। दिंमाग काफी धीमी गति से काम करता है। शोधकर्त्ताओं की मानें तो इन गोलियों के सेवन से एसेटिलकोलाइन नामक केमिकल ब्लॉक हो जाता है। वहीं, जामा न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, एसेटिलकोलाइन का स्तर कम होने से लोग डिमेंशिया समेत अन्य दिमागी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। यह दवाइयां एक दम से असर नहीं दिखाती ब्लकि लगभग एक माह के बाद इसका असर दिखना शुरू हो जाता है। ये नींद की दवाएं भले कुछ समय के लिए आपको आराम देती हैं लेकिन लंबे समय के लिए ये परेशानी में भी डाल सकती हैं। इस बारे में लखनऊ के न्यूरोलॉजिस्ट एके पांडेय बताते हैं, नींद की दवाइयों का सेवन करना एक सीमा तक सही होता है लेकिन गोलियों का नियमित सेवन बीमारियां बढ़ा सकता है। विश्व में नींद की दवाई लेने वाले व नींद की दवाई का सेवन नहीं करने वाले लोगों की मृत्यु स्तर में अंतर होता है, इन गोलियों के सेवन से ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज का भी खतरा बना रहता है।
नींद की कोई भी दवाई लेने से पहले आप डॉक्टर से पूछ भी सकते हैं कि आपको इसे कितने समय तक लेना होगा और कितनी मात्रा में। डॉक्टर जब भी इन दवाईयों को देते हैं तो वो उन्हें एक क्रम से देते हैं ताकि आपको उनकी आदत न पड़े और उनका दुष्प्रभाव भी आप पर न हों। लेकिन आपको इन दवाईयों को लेने के अलावा, खुद को सही रखने के लिए वर्कआउट करना चाहिए और कैफीन के सेवन से बचने के लिए चाय या कॉफी को कम पीना चाहिए।


कई बार ये भी देखा जाता है कि सोने या उठने का कोई निर्धारित समय न होना भी पूरा रूटीन खराब कर देता है। जल्दी सोने और उठने की आदत डालें। ऐसा करने से आपको खुद ही अंतर दिखेगा, दिनभर ताजगी रहेगी। सुस्ती या थकान भी कम होगी। सही दिनचर्या पूरे दिनभर के काम पर असर डालती है। टीवी या मोबाइल का देर रात तक इस्तेमाल न करें नींद न आने में सबसे ज्यादा भूमिका मोबाइल, इंटरनेट और टीवी का है। इसमें इंसान देर रात तक व्यस्त रहता है और सुबह देर से उठता है ये पूरी दिनचर्या को खराब कर देता है। इसलिए कोशिश करें कि सोने का एक निश्चित समय हो और उसके हिसाब से ही सोने का माहौल बनाएं। सोते समय हमेशा मन में अच्छे और सकारात्मक विचार रखिए। सोने की जगह शांत हो और लाइट हल्की हो या बंद हो।
नशे से बचें सिगरेट, शराब या गुटखा आदि के नियमित सेवन से भी अनिद्रा की समस्या आती है। ज्यादा नशा करने और नशा न मिलने की वजह से भी नींद नहीं आती है। एल्कोहल से आपके सोने की दिनचर्या पर भी असर पड़ता है। इसे पूरे दिन चिड़चिड़ापन और थकान रहती है। रात में सोने से पहले दूध पिएं, जिससे अच्छी नींद आएगी। चाय या कॉफी का सेवन न करें चाय-कॉफ़ी को नींद का दुश्मन समझा जाता है। बहुत ज्यादा सेवन स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसलिए रात को सोने से पहले तो चाय या कॉफी की आदत न डालें। इसके अलावा दिन में भी दो या तीन से ज्यादा बार न पिएं। तलवे की मसाज करें सोने से पहले हाथ-पैर साफ करें और फिर अपने तलवों की मसाज करें। अच्छी नींद के लिए रोज सोने से पहले इस मसाज से आपकी अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी। इससे रक्त का संचार सही से होता है। व्यायाम सोने से पहले हल्के फुल्के व्यायाम करें। कुछ योग ऐसे हैं जिनसे अनिद्रा की बीमारी दूर होती है, जैसे शवासन, वज्रासन, भ्रामरी प्राणायम आदि। इन्हें नियमित रूप से करने से नींद अच्छी आती है।








13.2.19

वृक्क अकर्मण्यता (किडनी फेल ) रोगी का आहार और हर्बल उपचार

                                   
 हमारे शरीर के हानिकारक पदार्थो को शरीर से छानकर बाहर निकालने का काम किडनी का ही होता है! किडनी हमारे शरीर के लिए रक्त शोधक का काम करती है, दुख की बात तो ये है के इस बीमारी का बहुत देर से पता चलता है जब तक किडनी 60-65% तक ख़राब हो चुकी होती है!

क्यों होती है किडनी फेल-

ब्लड प्रेशर किडनी फेल होने का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाते रहना आवश्यक है। 

लक्षण:

हाथ-पैरों और आंखों के नीचे सूजन,
* सांस फूलना, 
*भूख न लगना और हाजमा ठीक न रहना, 
*खून की कमी से शरीर पीला पड़ना,
* कमजोरी, थकान, 
*बार-बार पेशाब आना,
 *उल्टी व जी मिचलाना, 
*पैरों की पिंडलियों में खिंचाव होना,
 *शरीर में खुजली होना आदि लक्षण यह बताते हैं कि किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं।

किडनी निष्क्रियता रोगी  के लिए डाईट चार्ट एवं हर्बल उपचार :

*प्रोटीन, नमक, और सोडियम कम मात्र में खाए!
* नियमित व्यायाम करे, अपने वजन को बढ़ने न दे, खाना समय पर और जितनी भूख हो उतनी ही खायें, बाहर का खाना ना ही खाए तो बेहतर है, सफाई का विशेष ध्यान रखे, तथा पौषक तत्वों से भरपूर भोजन करें!
*अंडे के सफ़ेद वाले भाग को ही खाए उसमे किडनी को सुरक्षित रखने वाले तत्व जैसे के फोस्फोरस और एमिनो एसिड होते है|
*मछली (Fish) खाए इसमे ओमेगा 3 फैटी एसिड किडनी को बीमारी से रक्षा करता है!
*किडनी रोग मे प्याज, स्ट्राबेरी, जामुन, लहसुन इत्यादी फायेदेमंद होते है ये मूत्र के संक्रमण से भी  बचाते है | 


किडनी के रोग में परहेज-

किडनी के रोगी को नमकीन चटपटी खट्टी चीजे तली हुई चीजें बेकरी आइटम जैसे पाव, ब्रेड, बटर, खारी बिस्कुट, नान खटाई, सूप, जूस, कोल्ड ड्रिंक सभी प्रकार की दाले, करेला, भिन्डी, बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्ची, पत्ते वाली सब्जी जैसे पालक, चौलाई, मेथी, फलो का रस, सूखे मेवे,बेसन, पापड़, आचार, चटनी, बेकिंग पाउडर एवं सोडा लेने की मनाही है।

किडनी के रोगी के लिए चाय-

अदरक और तुलसी के पत्ते वाली काली चाय मे थोड़ा सा काली मिर्च, सोंठ, दालचीनी, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, तेजपत्ता, अजवायन और लवंग का चूर्ण डालकर बनाए, सुबह शाम 100- 150 ग्राम चाय दे, ध्यान रखे, इसमें चाय पत्ती ना डाले।


किडनी के रोगी के लिए नाश्ता-

उपमा, पोहा, कुरमुरा दलिया, इडली, सफेद ढोकला, साबुदाना, रवा, साबुदाना खिचड़ी बिना मूँगफली नारियल के।


किडनी के रोगी के लिए रोटी-

किडनी के रोगी के लिए रोटी सूखी होनी चाहिए, मतलब बिना घी, तेल लगाये, मक्का, जवार, बाजरी की हो तो उत्तम, नही तो गेहू थोड़ा मोटा पिसा हुआ ले मैदे या बारीक पिसे आटे की ना बनवाए।इसके आलावा अंकुरित मूंग थोड़ी मात्रा मे उबालने के बाद खाना उपकारी होता है|


किडनी के रोगी के लिए सब्जी -

हमेशा दो तरह की सब्जी ले एक जमीन के नीचे होने वाली जैसे आलू, मूली ,गाजर अरुई चुकंदर,शकरकन्द| दूसरी जमीन के उपर वाली लौकी भोपला गोभी पत्ते वाली ,सेम ,सहजन ,नेनुआ ,तुरई, कूनरू, परवल, रायता आदि।


किडनी के रोगी के लिए सलाद-

ककड़ी, खीरा, गाजर, बीट रूट, पत्ते वाली गोभी, मूली, प्याज लेकिन मूली का सेवन रात्रि मे ना करे।


किडनी के रोगी के लिए दूध दही पनीर 

गाय का दूध मलाई निकालकर 100 – 150 मिली नाश्ते के समय,दही एक  कटोरी दोपहर भोजन के समय और पनीर 30 ग्राम डिनर के साथ ले।


किडनी के रोगी के लिए फल-

सेब बिना छिलके के, बेर, अमरूद, पपीता और पाईनेपल  मे से कोई एक फल।

किडनी अकर्णयता रोगी के लिए हितकारी उपचार-

*किडनी फेल्योर रोगी के लिए  हर्बल मेडिसीन(वैध्य दामोदर 98267-95656) बहुत फायदेमंद रहती है|यह औषधि 10 मिली  की मात्रा मे दिन मे 3 बार खाली पेट सेवन करना चाहिए|इससे क्रिएटीनिन  और यूरिया लेविल नीचे लाने मे मदद  मिलती है| 
*गेंहू के जवारों का रस 50 ग्राम और गिलोय (अमृता की एक फ़ीट लम्बी व् एक अंगुली मोटी डंडी) का रस निकालकर – दोनों का मिश्रण दिन में एक बार रोज़ाना सुबह खाली पेट निरंतर लेते रहने से डायलिसिस द्वारा रक्त चढ़ाये जाने की अवस्था में आशातीत लाभ होता है।
 *इसके आलावा किडनी  रोगी को छोटे गोखरू का काढ़ा बनाकर भी  उपयोग करना लाभप्रद रहता है||

सामग्री -

 छोटा गोखरू  250 ग्राम लें| इसे 4 लीटर पानी मे  तब तक उबालें  की एक लीटर  शेष रह जाये|ठंडा होने पर छानकर एक बोतल मे भर लें| 

खुराक :

यह औषधि सुबह -शाम 100 मिली की मात्रा मे दिन मे 2 बार खाली पेट लेना चाहिए |पीने के वक्त औषधि की 100 मिली मात्रा मामूली गरम कर लेना चाहिए| काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रूटीन पूर्ववत ही रखिए।औषधि समाप्त होने पर फिर बना लेना चाहिए|जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है।

यह भी आज़माएँ-

किडनी के रोगी चाहे उनका डायलासिस चल रहा हो या अभी शुरू होने वाला हो चाहे उनका क्रिएटिनिन या यूरिया कितना भी बढ़ा हुआ हो और डाक्टर ने भी उनको किडनी ट्रांसप्लांट के लिए परामर्श दिया हो ऐसे में उन रोगियों के लिए एक  असरदार प्रयोग है जो इस रोग से छुटकारा दिला सकता है|

* नीम और पीपल की छाल का काढ़ा :-

3 गिलास पानी में 10 ग्राम नीम की छाल और 10 ग्राम पीपल की छाल लेकर आधा रहने तक उबाल कर काढ़ा बना ले इस काढ़े को 3-4 भाग में बांटकर दिन में सेवन करते रहे इस प्रयोग से मात्र 7 दिन में क्रिएटिनिन का स्तर व्यवस्थित हो सकता है या वांछित लेवल तक आ सकता है
*खून मे क्रिएटीनिन की नियमित जांच करवाते रहें| जरूरत पड़ने पर डायलिसिस करवाना चाहिए||योग्य चिकित्सक से संपर्क बनाए रखें|



विशिष्ट परामर्श-

किडनी फेल रोगी के बढे हुए क्रिएटनिन के लेविल को नीचे लाने और गुर्दे की क्षमता  बढ़ाने  में हर्बल औषधि सर्वाधिक सफल होती हैं| इस हेतु वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है| दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित यह औषधि कितनी आश्चर्यजनक रूप से फलदायी है ,इसकी कुछ केस रिपोर्ट पाठकों की सेवा मे प्रस्तुत कर रहा हूँ -







इस औषधि के चमत्कारिक प्रभाव की   केस रिपोर्ट प्रस्तुत है-

रोगी का नाम -     राजेन्द्र द्विवेदी  
पता-मुन्नालाल मिल्स स्टोर ,नगर निगम के सामने वेंकेट रोड रीवा मध्यप्रदेश 
इलाज से पूर्व की जांच रिपोर्ट -
जांच रिपोर्ट  दिनांक- 2/9/2017 
ब्लड यूरिया-   181.9/ mg/dl
S.Creatinine -  10.9mg/dl






हर्बल औषधि प्रारंभ करने के 12 दिन बाद 
जांच रिपोर्ट  दिनांक - 14/9/2017 
ब्लड यूरिया -     31mg/dl
S.Creatinine  1.6mg/dl








जांच रिपोर्ट -
 दिनांक -22/9/2017
 हेमोग्लोबिन-  12.4 ग्राम 
blood urea - 30 mg/dl 

सीरम क्रिएटिनिन- 1.0 mg/dl
Conclusion- All  investigations normal 




 केस रिपोर्ट 2-

रोगी का नाम - Awdhesh 

निवासी - कानपुर 

ईलाज से पूर्व की रिपोर्ट






दिनांक - 26/4/2016

Urea- 55.14   mg/dl

creatinine-13.5   mg/dl 


यह हर्बल औषधि प्रयोग करने के 23 दिन बाद 17/5/2016 की सोनोग्राफी  रिपोर्ट  यूरिया और क्रेयटिनिन  नार्मल -




creatinine 1.34 
mg/dl

urea 22  mg/dl














आर्थराइटिस (संधिवात) की घरेलू ,हर्बल चिकित्सा

 आर्थराइटिस का दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति को न केवल चलने–फिरने बल्कि घुटनों को मोड़ने में भी बहुत परेशानी होती है। घुटनों में दर्द होने के साथ–साथ दर्द के स्थान पर सूजन भी आ जाती है। इस दर्द से राहत दिलाने में आपका सबसे बड़ा हमदर्द होता है आहार और घरेलू नुस्खे। आइए जाने कैसे अर्थराइटिस में घरेलू नुस्खे सबसे सुरक्षित उपचार हैं।
कभी–कभी दर्द के कारण बुखार भी हो जाता है और यहां तक कि जोड़ों का आकार भी टेढ़ा हो जाता है। कुछ लोग तो अस्पतालों के चक्कर काटकाट कर इतने थक जाते हैं कि वो इस बीमारी के साथ जीने को स्वीकार कर लेते हैं।
ठंड के मौसम में गठिया के मरीज़ों को अधिक परेशानी होती है इसलिए उन्हें ठंड से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। इस बीमारी में चिकित्सक आहार पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं क्योंकि आप जो भी खाते हैं वो सीधा आपके स्वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है।

बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

• अपने आहार में 25 प्रतिशत फल व सब्जि़यों को शामिल करें और ध्यान रखें कि आपको कब्ज़ ना हो।
• फलों में सन्तरे, मौसमी, केले, सेब, नाश्पाती, नारियल, तरबूज़ और खरबूज़ आपके लिए अच्छे हो सकते हैं।
• सब्जि़यों में मूली, गाज़र, मेथी, खीरा, ककड़ी आपके आदि लें।
• चोकरयुक्त आटे का प्रयोग करें क्योंकि इसमें फाइबर अधिक मात्रा में होता है ।

दर्द से राहत पहुंचाने वाले घरेलू नुस्खे:

वात रोग (संधिवात)होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

• वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। इसके लिए रोगी व्यक्ति को एक टब में गरम पानी लेकर उसमें आधा चम्मच नमक डाल लेना चाहिए। इसके बाद जब टब का पानी गुनगुना हो जाए तब रोगी को टब के पास एक कुर्सी लगाकर बैठ जाना चाहिए। इसके बाद रोगी व्यक्ति को अपने पैरों को गरम पानी के टब में डालना चाहिए और सिर पर एक तौलिये को पानी में गीला करके रखना चाहिए। रोगी व्यक्ति को अपनी गर्दन के चारों ओर कंबल लपेटना चाहिए। इस प्रकार से इलाज करते समय रोगी व्यक्ति को बीच-बीच में पानी पीना चाहिए तथा सिर पर ठंडा पानी डालना चाहिए। इस प्रकार से प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी को कम से कम 20 मिनट में ही शरीर से पसीना निकलने लगता है जिसके फलस्वरूप दूषित द्रव्य शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वात रोग ठीक होने लगता है।
वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए 2 बर्तन लें। एक बर्तन में ठंडा पानी लें तथा दूसरे में गरम पानी लें और दोनों में 1-1 तौलिया डाल दें। 5 मिनट बाद तौलिये को निचोड़कर गर्म सिंकाई करें। इसके बाद ठंडे तौलिये से सिंकाई करें। इस उपचार क्रिया को कम से कम रोजाना 3 बार दोहराने से यह रोग ठीक होने लगता है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए। इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए। इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।
• 5 से 10 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर सुबह पानी के साथ लें।
• 4 से 5 लहसुन की कलियों को एक पाव दूध में डालकर उबालकर पीयें।
लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करने से भी दर्द से राहत मिलती है।
• लाल तेल से मालिश करना भी आरामदायक होता है।
• गर्म दूध में हल्दी मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीयें।
• सोने से पहले दर्द से प्रभावित क्षेत्र पर गर्म सिरके से मालिश करें।
• कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।
• कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।
• रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए। इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।
• शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।
• रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।
• वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान लेना चाहिए। फिर इसके बाद इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।
• जोड़ों के दर्द से बचने के लिए सबसे अच्छा। योगासन है गोमुखआसन।
अर्थराइटिस जैसी बीमारी लम्बे समय तक रहती है इसलिए मरीज़ को दवाओं से ज्यादा बचाव और सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए। आज फीजि़योथेरेपी से लेकर नैचुरोपैथी तक में अर्थराइटिस के बहुत से समाधान निकाले गये हैं, लेकिन घरेलू नुस्खे और सावधानियां सबसे सुरक्षित उपचार हैं।


विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|   बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 








12.2.19

पित्त पथरी(Gall stones) के घरेलू ,हर्बल उपचार


गाल ब्लाडर में पथरी (gallstones) बनना एक भयंकर पीडादायक रोग है। इसे ही पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताषय में दो तरह की पथरी बनती है।
प्रथम कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी।
दूसरी पिग्मेन्ट से बननेवाली पथरी।
ध्यान देने योग्य है कि लगभग८०% पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती हैं।वैसे तो यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में लगभग दूगनी हुआ करती है।पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गाल ब्लाडर में होता है।यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है,तो पथरी निर्माण के लिये उपयुक्त स्थिति बन जाती है।


गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि


पथरी रोग में मुख्य रूप से पेट के दायें हिस्से में तेज या साधारण दर्द होता है।भोजन के बाद पेट फ़ूलना,अजीर्ण होना,दर्द और उल्टी होना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
प्रेग्नेन्सी,मोटापा,मधुमेह,,अधिक बैठे रेहने की जीवन शैली, तेल घी अधिकता वाले भोजन,और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ जाती है।
दो या अधिक बच्चों की माताओं में भी इस रोग की प्रबलता देखी जाती है।
  अब मैं कुछ आसान घरेलू नुस्खे प्रस्तुत कर रहा हूं जिनका उपयोग करने से इस भंयकर रोग से होने वाली पीडा में राहत मिल जाती है और निर्दिष्ट अवधि तक इलाज जारी रखने पर ३ से ४ एम एम तक की पित्त पथरी से मुक्ति मिल जाती है।


सोरायसिस(छाल रोग) के आयुर्वेदिक उपचार 

१) गाजर और ककडी का रस प्रत्येक १०० मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीयें। अत्यन्त लाभ दायक उपचार है।
२) नींबू का रस ५० मिलिलिटर की मात्रा में सुबह खाली पेट पीयें। यह उपाय एक सप्ताह तक जारी रखना उचित है।
३) सूरजमुखी या ओलिव आईल ३० मिलि खाली पेट पीयें।इसके तत्काल बाद में १२० मिलि अन्गूर का रस या निम्बू का रस पीयें। इसे कुछ हफ़्तों तक जारी रखने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।

४) नाशपती का फ़ल खूब खाएं। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्व से पित्ताषय के रोग दूर होते हैं।

रोग व क्‍लेश दूर करने के आसान मंत्र

५) विटामिन सी याने एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बनता है।यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। ३-४ गोली नित्य लें।
2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पथरी की समस्‍या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।।
६) पित्त पथरी रोगी भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जीयां और फ़ल शामिल करें। ये कोलेस्ट्रोल रहित पदार्थ है।


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७) तली-गली,मसालेदार चीजों का परहेज जरुरी है।
8) शराब,चाय,काफ़ी एवं शकरयुक्त पेय हानिकारक है।
९) एक बार में ज्यादा भोजन न करें। ज्यादा भोजन से अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रोल निर्माण होगा जो हांनिकारक है।
१०) आयुर्वेद में उल्लेखित कतिपय औषधियां इस रोग में लाभदायक साबित हो सकती हैं।कुटकी चूर्ण,त्रिकटु चूर्ण,आरोग्य वर्धनी वटी,फ़लत्रिकादि चूर्ण,जैतुन का तैल ,नींबू का रस आदि औषधियां व्यवहार में लाई जाती हैं।


शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

११) सर्जरी में पित्त पथरी नहीं निकाली जाती है बल्कि पूरे पित्ताशय को ही काटकर निकाल दिया जाता है जिसके दुष्परिणाम रोगी को जीवन भर भुगतने पड़ते हैं| अत: जहां तक हो सके औषधि से चिकित्सा करना श्रेष्ठ है|
१२) पुदीने में टेरपेन नामक प्राकृतिक तत्‍व होता है, जो पित्त से पथरी को घुलाने के लिए जाना जाता है। यह पित्त प्रवाह और अन्य पाचक रस को उत्तेजित करता है, इसलिए यह पाचन में भी सहायक होता है। पित्त की पथरी के लिए घरेलू उपाय के रूप में पुदीने की चाय का इस्‍तेमाल करें।


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 सिर्फ हर्बल औषधि  ही पित्ताशय की पथरी  मे एक कारगर  विकल्प है| वैध्य श्री दामोदर की हर्बल औषधि से न केवल गाल स्टोन  से निजात मिलती है ,पथरी के भयंकर कष्ट ,पेट मे गेस ,जी मिचलाना आदि उपद्रवों से भी  इलाज के शुरू के दिनों मे ही राहत मिल जाती है|गाल स्टोन रोगी आपरेशन से बच जाता है| वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क किया जा सकता है|







15.1.19

हृदय रोगियों के लिए उपकारी है पोटेशियम युक्त आहार

                                        


उच्च-पोटेशियम वाले खाद्य पदार्थ किसी भी संतुलित आहार का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। खनिज आपके शरीर के द्रव स्तर, मांसपेशियों के कार्य में सहायक और अपशिष्ट को हटाने में मदद करता है और आपके तंत्रिका तंत्र को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है। रिसर्च से पता चलता है कि उच्च रक्तचाप वाले लोगों में पोटेशियम युक्‍त फूड रक्तचाप और स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकता है। यहां हम आपको ऐसे ही कुछ पोटैशियम युक्‍त फूड के बारे में बता रहे हैं जिनका सेवन करना आपके लिए पूरी तरह से सुरक्षित है और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद भी है।
पोटैशियम युक्‍त  आहार 

आलू 

आलू में केले से ज्यादा पोटैशियम होता है। हैरान रह गए न आप? जी हां! एक मीडियम साइज के उबले हुए आलू में 941 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। ये दैनिक जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत है। लेकिन इसके लिए आलू को उबलने के बाद थोड़ा थंडा हो जाने दीजिए। आलू में मौजूद स्टार्च गठिया रोग में भी फायदेमंद होता है। आलू के अलावा शकरकंद में भी भरपूर पोटैशियम होता है।

पालक

पालक गुणों की खान है और इसमें ढेर सारे मिनरल्स औैर विटामिन्स होते हैं। पालक में पोटैशियम की मात्रा भी भरपूर होती है। एक कप पालक में लगभग 540 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। इसके अलावा पालक आयरन और फाइबर का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए इसके सेवन से शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। एनीमिया में पालक के सेवन से लाभ मिलता है।

चुकंदर

चुकंदर में शरीर को फायदा पहुंचाने वाले ढेर सारे तत्व होते हैं। चुकंदर में पोटैशियम भी भरपूर पाया जाता है। एक कप चुकंदर में लगभग 518 मिलीग्राम पोटैशियम होता है जो आपकी दैनिक जरूरत का लगभग 11 प्रतिशत है। चुकंदर में आयरन भी भरपूर होता है इसलिए ये ब्लड में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाता है और एनीमिया जैसे खून की कमी वाली बीमारियों से बचाता है। 




केला 

यदि आपने किसी पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ के बारे में सुना है, तो आप शायद जानते होंगे कि केले एक अच्छा स्रोत हैं, जिसमें लगभग 400 मिलीग्राम से अधिक पोटेशियम होता है। केले एक हेल्‍दी और एनर्जी स्नैक हैं। यह विटामिन बी 6 में उच्च होता है और फाइबर और विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है।

शकरकंद

शकरकंद में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है। एक सामान्‍य आकार की शकरकंद में 694 मिलीग्राम तक पोटेशियम होता है। यह हमारी रोजमर्रा की जरूरत का 15 फीसदी होता है। इसके साथ ही इसमें कैलोरी की मात्रा भी कम होती है। एक शकरकंद में केवल 131 कैलोरी होती हैं। यानी शकरकंद का सेवन हमारी सेहत पर दोतरफा सकारात्‍मक प्रभाव डालता है। इतना ही नहीं शकरकंद में बीटा कोरटेन और विटामिन ए भी भरपूर मात्रा में होता है। इन खूबियों के कारण आप इसे सुपरफूड भी कह सकते हैं। 

संतरे का जूस

संतरे का जूस नाश्‍ते में बेहद फायदेमंद होता है। संतरे को विटामिन सी से भरपूर माना जाता है। लेकिन, इसके साथ ही इसमें भरपूर मात्रा में पोटेशियम भी होता है। इसकी सबसे अच्‍छा बात यह है कि इसे बनाना भी बेहद आसान है। और साथ ही अगर आपको संतरे को यूं ही खाना चाहें तो भी कोई दिक्‍कत नहीं। 

पत्‍तेदार सब्जियां 

यह पत्‍तेदार सब्जी न केवल विटामिन ए और विटामिन 'के' से भरपूर होती है, बल्कि साथ ही इसमें पोटेशियम भी काफी मात्रा में होता है। इसके महज आधे कप में 655 मिलीग्राम पोटेशियम होता है। इसका सेवन करने से पोषण संबंधी आपकी काफी आवश्‍यकतायें पूरी हो सकती हैं। यह सुपरफूड वीटा कोर‍टेन और विटामिन ए से भी भरपूर होता है।

खजूर

अपनी गर्म तासीर के लिए खजूर सर्दियों का खास ड्राई फूट होता है। मूल रूप से मध्‍य एशिया का खजूर स्‍वाद में तो लाजवाब होता ही है साथ ही इसके कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी होते हैं। आधा कप खजूर में 584 मिलीग्राम पोटेशियम होता है। खजूर को आप दूध के साथ भी खा सकते हैं। 

टमाटर

टमाटर सलाद से लेकर सब्‍जी तक में इस्‍तेमाल किया जाता है। लाल टमाटर भारत के सतरंगी भोजन का अहम हिस्‍सा है। चौथाई कप टमाटर पेस्‍ट में 2.8 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। यह हमारी रोजमर्रा की जरूरत का पांचवां हिस्‍सा होता है। इसके साथ ही इसमें 664 मिलीग्राम पोटेशियम, 34 मिलीग्राम लिकोपिन और 54 कैलोरी होती हैं। अपनी इन खूबियों के कारण इसे सुपरफूड भी कहा जा सकता है। 

दही

दही में कई पोषक तत्‍व होते हैं। इसमें कैल्श्यिम भी भरपूर मात्रा में होता है, जो हमारी हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। लेकिन, शायद आपको यह न पता हो कि दही में पोटेशियम भी प्रचुर मात्रा में होता है। करीब 220 ग्राम नॉन-फैट दही में 579 मिलीग्राम तक पोटेशियम होता है।

किडनी निष्क्रियता की हर्बल औषधि

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9.12.18

सूर्य स्नान करने की विधि और फायदे

                                                         
अग्नि तत्व जीवन का उत्पादक होता है। गर्मी के बिना कोई जीव या पौधा न तो उत्पन्न हो सकता है और न ही विकसित। चैतन्यता जहां कहीं भी दिखाई देती है, उसका मूल कारण गर्माहट ही है। गर्माहट के समाप्त होते ही क्रियाशीलता समाप्त हो जाती है। अगर शरीर की गर्मी का अंत हो जाये तो जीवन का अंत ही समझा जाता है। अग्नि तत्व को सर्वोपरि समझते हुए आदि वेद ऋग्वेद में सर्वप्रथम मंत्र अक्षर 'अग्नि' ही आया है। सूर्य अग्नि तत्व का मूर्तिमान स्वरूप है, इसीलिए सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है। हम प्रत्यक्ष देखते हैं कि जिन पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं को धूप पर्याप्त मात्र में मिलती है, वे स्वस्थ व निरोग रहते हैं। उसके विपरीत जहां सूर्य की जितनी कमी होती है, वहां उतनी ही अस्वस्थता रहती है। एक कहावत है-जहां धूप नहीं जाती, वहां डॉक्टर जाते हैं, अर्थात प्रकाश रहित स्थानों में बीमारियों का निवास हो जाता है। भारतीय तत्ववेत्ता अति प्राचीन काल से सूर्य के गुणों से परिचित हैं, इसीलिए उन्होंने सूर्य की उपासना की अनेक विधि-व्यवस्थायें प्रचलित कर रखी हैं। अब पाश्चात्य भौतिक विज्ञान द्वारा भी सूर्य के अद्भुत गुणों से परिचित होते जा रहे हैं।
 सूर्य की सप्त किरणों में 'अल्ट्रा वायलेट' और 'अल्फा वायलेट' किरणें उपस्थित रहती हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त लाभप्रद होती हैं। आजकल इन किरणों को मशीनों के माध्यम से कृत्रिम रूप में भी पैदा किया जाने लगा है परंतु जितना लाभ सूर्य से आने वाली किरणों द्वारा होता है, उतना मशीन द्वारा कृत्रिम किरणों से नहीं होता। यूरोप एवं अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी अब सूर्य किरणों द्वारा उपचार विधियों का चलन जोरों पर हो गया है। वहां अनेक ऐसे औषधालय हैं जो मात्र सूर्य शक्ति से बिना किसी अन्य औषधियों के प्रयोग किए जटिल रोगों की चिकित्सा सफलतापूर्वक कर रहे हैं।
'क्रोमोपैथी' नामक एक स्वतंत्र चिकित्सा पद्धति का ही आविष्कार हो चुका है, जिसमें रंगीन कांच की सहायता से सूर्य की वांछित किरणों को आवश्यकता के अनुसार रोगी तक पहुंचाया जाता है। रोग के कीटाणुओं का नाश करने की जितनी क्षमता धूप में है, उतनी और किसी वस्तु में नहीं होती। क्षय के कीड़े जो बड़ी मुश्किल से नष्ट होते हैं, सूर्य के सम्मुख रखने से कुछ ही मिनटों में नष्ट हो जाते हैं। वेटिव, लुक्स, जानसन, रोलियर, लुईस, रेडोक, टाइरल आदि अनेक उच्च कोटि के सुप्रसिद्ध चिकित्सकों ने अपने महत्त्वपूर्ण ग्रंथों में सूर्य किरणों की सुविस्तृत महिमा का वर्णन किया है और बताया है कि 'सूर्य से बढ़कर अन्य किसी औषधि में रोग निवारक शक्ति है ही नहीं।
सूर्य किरणों से निरोग और रोगी सभी को समान रूप से फायदा होता है, इसलिए नित्य नियमित रूप से अगर 'सूर्य स्नान किया जाय तो स्वास्थ्य सुधार में आश्चर्यजनक रूप से सहायता मिल सकती है। 

सूर्य स्नान की विधि:- नियमित रूप से सूर्य स्नान करते रहने से हर अवस्था के तथा हर रोग से ग्रस्त स्त्री-पुरूष तथा बच्चे स्वास्थ्य को प्राप्त कर सकते है। सूर्य की किरणें शरीर में भीतर तक प्रवेश कर जाती है और रोग के कीटाणुओं को नष्ट कर देती है। पसीने द्वारा शरीर में स्थित विकारों को बाहर निकालकर अपनी पोषक शक्ति से क्षत विक्षत एवं रूग्ण अंगों को बल प्रदान करना सूर्य-किरणों का प्रमुख कार्य होता है।
टूटी हुई हड्डियों को जोडऩे, घावों को भरने तक से सूर्य-स्नान से लाभ पहुंचता है। यूं तो सूर्य-स्नान किसी भी ऋतु में किया जा सकता है, परंतु इसके लिए शीत-ऋतु अत्यन्त लाभकारी मानी जाती है। सूर्य-स्नान के लिए प्रात: काल का समय सबसे अच्छा माना जाता है। दूसरे दर्जे का समय संध्याकाल का होता है।
इसके लिए हल्की किरणें ही उत्तम होती है। तेज धूप में बैठने से अनेक त्वचा रोग हो सकते हैं। सूर्य-स्नान को आरंभ में आधे घंटे से ही शुरू करना चाहिए। फिर धीरे-धीरे इसे बढ़ाते हुए एक डेढ़ घंटे तक ले जाना चाहिए।
 सूर्य-स्नान करते समय मात्र तौलिया पहनकर ही धूप में बैठना चाहिए। समस्त शरीर नंगा रहने पर सूर्य की किरणों को शरीर सोखता है। अगर एकांत व सुरक्षित स्थान हो तो तौलिया को भी हटाया जा सकता है। सूर्य-स्नान करते समय सिर को तौलिया या हरे पत्तों से ढक लेना चाहिए।
   केला एवं कमल जैसा शीतल प्रकृति वाला पत्ता मिल जाए तो अति उत्तम होता है। नीम के पत्तों का गुच्छा बनाकर भी सिर पर रखा जा सकता है। जितनी देर सूर्य-स्नान करें, उतने समय को चार भागों में बांटकर अर्थात् पेट का भाग, पीठ का भाग, दाई करवट तथा बाईं करवट को सूर्य की किरणों के सामने बारी-बारी से रखना चाहिए जिससे हर अंग में समान रूप से धूप लग जाये। धूप सेवन करने के बाद ताजे पानी में भिगोकर निचोड़े हुए मोटे तौलिए से शरीर के हर अंग को रगडऩा चाहिए जिससे गर्मी के कारण रोमकूपों द्वारा भीतर से निकाला हुआ विकार शरीर से ही चिपका न रह जाये।
  धूप का सेवन खाली पेट ही करना चाहिए। धूप सेवन के कम से कम दो घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक कुछ नहीं खाना चाहिए। सूर्य का स्थान ऐसा होना चाहिए जहां पर जोर से हवा के झोंके न आते हों। धूप सेवन के बाद स्वभावत: शरीर हल्का एवं फुर्तीला हो जाता है परंतु अगर ऐसा न हो तो देह और भारी मालूम पडऩे लगती है।
अगर ऐसी बात हो तो कुछ देर और धूप स्नान करना चाहिए। अगर स्थिति और ऋतु अनुकूल हो तो सूर्य स्नान के बाद ताजे जल से स्नान कर लेना चाहिए। जिस दिन बादल हों या तेज हवा चल रही हो, उस दिन सूर्य स्नान नहीं करना चाहिए।


किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि

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सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार





5.12.18

नाक, कान, गला के रोगों से निजात पाने के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपाय



ईएनटी (ईयर, नोज एंड थ्रोट) का संक्रमण किसी भी को हो सकता है। फिर चाहे वह बच्‍चा हो या बड़ा। आमतौर पर इस संक्रमण के लक्षण में ही दिखाई देते हैं। इस बीमारी के कुछ लक्षण हैं - गाल में दर्द के साथ नाक से गाढा बलगम निकलना, नाक बहना, सिरदर्द, बुखार और कुछ भी निगलने में परेशानी कान में इंफेक्‍शन होने से हमेशा तरल पदार्थ बाहर निकलता रहता है। सुनने में परेशानी होती है और संक्रमण की वजह से दर्द और सूजन भी हो जाती है।

ईएनटी के संक्रमण से बचने के उपाय –

इस संक्रमण की शुरूआत जुकाम से होती है। इसलिए जुकाम को शुरूआती स्‍तर पर ही पहचान लीजिए। इससे बचने के लिए जुकाम की शुरुआत में ही भाप लीजिए। जिससे संक्रमण नहीं होगा। और संक्रमित बलगम बाहर निकल जाएगा।
ईएनटी के संक्रमण से बचने के लिए तैराकी करते वक्‍त विशेष ध्‍यान देना चाहिए। तैराकी के दौरान कान को और आंख को संक्रमण से बचाने के लिए कान में ईयर प्‍लग और चश्‍मा लगाकर ही तैराकी कीजिए।
अगर गले में खराश हो तो हल्‍के गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा कीजिए। इससे खराश में फायदा होता है। साथ ही गले का संक्रमण नहीं। दिन में कम से कम तीन से चार बार गरारा कीजिए। गरारा करने से रक्‍त संचार भी अच्‍छा होता है।
अगर आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है तो लोगों के संपर्क में आने से बचने की कोशिश कीजिए। भीड़-भाड़ वाले इलाके में जाने से परहेज कीजिए। जिससे आपको संक्रमण न हो।
यदि जुकाम से ज्‍यादा परेशान हैं तो हवाई यात्रा नहीं करनी चाहिए। हवाई यात्रा करने से संक्रमण बढ कर साइनस का रूप ले सकता है और कान को भी प्रभावित कर सकता है।
मादक पदार्थों का सेवन करने से बचें। धूम्रपान और शराब पीने से साइनस का संक्रमण बढ जाता है।
फलों और सब्जियों का ज्‍यादा मात्रा में सेवन करें। डेयरी उत्‍पाद का सेवन कम कीजिए।

कान दर्द

कारण

कान के अन्दर मैल फूल जाने, घाव हो जाने, कान में सूजन होने या संक्रमण के कारण कान में दर्द होता हैं। गले या नाक में संक्रमण होने पर समय रहते चिकित्सा न की जाए, तो उससे भी कान में संक्रमण हो सकता हैं।

लक्षण

कान का सूजना, कान से मल निकलना, कानों में रूक – रूक कर दर्द होना आदि।

घरेलू चिकित्सा

तुलसी के पत्तों का रस निकलकर गुनगुना कर लें और दो – तीन बूँद सुबह – शाम डालें।

नींबू का रस गुनगुना करके 2 – 3 बूँद सुबह – शाम कान में डालें।
प्याज का रस निकालकर गुनगुना करके 2 – 3 बूँद सुबह – शाम कान में डालें।
बकरी का दूध उबाल कर ठंडा कर लें। जब गुनगुना रह जाएं, तो इसमें सेंधानमक मिलाकर 2 – 3 बूँद दोनों कानों में टपकाएं।
मूली के पत्तों को कूटकर उसका रस निकालें। रस की एक तिहाई मात्रा के बराबर तिल के तेल के साथ आग पर पकाएं। जब केवल तेल ही बचा रह जाए, तो उतार कर छान लें। कान में 2 -3 बूँद डालें।
कपूर व घी समान मात्रा में लेकर पकाएं। पकने पर उतार कर ठंडा कर लें व 2 – 3 बूँद कानों में डालें।
आक के पत्तों का रस, सरसों का या तिल का तेल तथा गोमूत्र या बकरी का मूत्र बराबर मात्रा में लेकर थोड़ा गर्म करें और कान में 2 – 3 बूँद डालें।
लहसुन की दो कलियाँ छीलकर सरसों के तेल में डाकार धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन जलकर काला हो जाए, तो उसे उतार कर ठंडा करें व छान कर 2 – 3 बूँद कान में डालें।
अदरक का रस, सेंधानमक, सरसों का तेल व शहद बराबर मात्रा में लेकर गर्म करें और गुनगुना होने पर 2 – 3 बूँद कान में डालें।
आक की पकी हुई पीली पत्ती में घी लगाकर आग पर गर्म करें। इसे निचोड़कर रस निकालें व दो – तीन बूँद कानों में डालें।
आम की पत्तियों का रस निकालकर गुनगुना करें व 2 – 3 बूँद कान में डालें।

आयुर्वेदिक औषधियां

महत्पंचमूल सिद्ध तेल, सुरसादि पक्व तेल का प्रयोग किया जा सकता हैं। रामबाण रस, लक्ष्मीविलास रस व संजीवनी वटी का प्रयोग खाने के लिए करें।




कान बहना


कारण

जुकाम, खांसी या गले के संक्रमण की चिकित्सा न की जाए, तो कान में भी संक्रमण हो जाता हैं। छोटे बच्चे जिनका गला खराब हो या खांसी हो, जब कान में मुंह लगाकर धीरे से कोई बात करते हैं, तो सांस के साथ रोग के जीवाणु कान में पहुँच जाते है। कान में फोड़ा – फुंसी हो, पानी, रूई या अन्य कोई बाहरी वस्तु कान मे रह जाए, तो भी कान में संक्रमण हो सकता हैं।

लक्षण

रोगी के कान से बदबूदार स्राव या मवाद बाहर निकलती हैं।

घरेलू चिकित्सा

लहसुन की दो कलियाँ व नीम की दस कोपलें तेल में गर्म करें। दो – दो बूँद दिन में तीन – चार बार डालें।
150 ग्राम सरसों का तेल किसी साफ़ बर्तन में डालकर गर्म करें और गर्म होने पर 10 ग्राम मोम दाल दें। जब मोम पिघल जाए तो आग पर से उतार लें और इसमें 10 ग्राम पिसी हुई फिटकरी मिला दें। 3 – 4 बूँद दवा सुबह – शाम कान में डालें।
2 पीली कौड़ी का भस्म 200 मिली ग्राम व दस ग्राम गुनगुने तेल में डालें। छानकर 2 – 3 बूँद कान में डालें।
नींबू के रस में थोड़ा सा सज्जीखार मिलाकर 2 – 3 बूँद कान में टपकाएं। आग से उतार कर ठंडा करें व छानकर रख लें। 2 – 3 बूँद कान में डालें।
10 ग्राम रत्नजोत को 100 ग्राम सरसों के तेल में जलाएं। ठंडा होने पर छानकर रखें और 2 – 3 बूँद कान में डालें।
धतूरे की पत्तियों का रस निकालकर थोड़ा गुनगुना करें व 2 – 3 बूँद कान में डालें।
नीम की पत्तियों का रस 2 – 3 बूँद कान में डालें।
तुलसी की पत्तियों का रस 2 – 3 बूँद कान में डालें।
आधा चमच्च अजवायन को सरसों या तिल के तेल में गर्म करें। फिर आंच से उतार लें। गुनगुना रह जाने पर 2 – 3 बूँद डालें।

आयुर्वेदिक औषधियां

आरग्वधादि क्वाथ से कान को धोएं। पंचवकल क्वाथ या पंचकषाय क्वाथ का प्रयोग भी किया जा सकता हैं। समुद्रफेन चूर्ण का प्रयोग भी लाभदायक होता है।



नासास्रोत शोथ


कारण

चेहरे की हड्डियों में स्थित गुहाएं (रिक्त स्थान) जोकि नाक से सम्बद्ध हैं, साइनस कहलाती हैं। ये स्लेश्म्कला से ढकी रहती हैं एवं चार प्रकार की होती हैं और जिस हड्डी में स्थित हैं, उनके अनुसार इनका नामकरण किया गया हैं। जुकाम या इन्फ्लुएंजा के उपद्रव के रूप में या संक्रमण के कारण इनमें सूजन आ जाने को साइनुसाइटिस या नासास्रोत शोथ कहते हैं।

लक्षण

किसी साइनस में शोथ होने पर एक ओर नासिका से स्राव होता हैं, साथ ही वेदना की शिकायत भी रहती हैं। जिस साइनस में शोथ हो, उसी के अनुसार वेदना की प्रतीति भी माथे व चेहरे के विभिन्न भागों में होती हैं।

घरेलू चिकित्सा
रोगी को पसीना आने वाली दवा दें, ताकि शोथ के कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद नासागुह के छिद्र खुल जाएं। इसके लिए रोगी को अदरक, लौंग, काली मिर्च, बनफशा की चाय पिलाएं।
एक ग्राम काली मिर्च को आधा चमच्च देसी घी में गर्म करें। ठंडा होने पर ह्वान लें व दो – तीन बूँद नाक के दोनों छिद्रों में तीन बार डालें।
अदरक या सफेदे के पत्ते पानी में उबालकर भाप लें।
5 ग्राम अदरक घी में भूनकर सुबह – शाम लें।
5 ग्राम अदरक को पाव भर दूध में उबालें। यह दूध नाक के नासाछिद्रों में भर कर रखें।
जलनेति – 1 लीटर पानी को नमक डाल कर उबालें। गुनगुना रहने पर टोंटीयुक्त लोटे में भरकर बाएँ नाक से पानी लेकर दाएं से निकालें।फिर दाएं से लेकर बाएँ से निकालें। अंत मैं बारी – बारी से दोनों नाकों से पानी लेकर मुंह से निकालें।

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