12.9.19

पिचके गाल गोल मटोल बनाने के उपाय //Make squeaky cheeks chubby


चेहरे को सुंदर बनाने में आंख, नाक, होंठ की तरह ही गोल-मटोल गाल भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैसे भी सुंदर गोल-मटोल, पिंक गाल हर किसी को बेहद पसंद होते हैं। क्योंकि गोल गाल किसी की भी सुंदरता में चार-चांद लगाने का काम करते हैं। अगर आपके गाल पिचके हुए हैं तो आप जितना मर्जी भी मेकअप कर लें आपकी खूबसूरती फीकी ही लगेगी। इसके साथ ही पिचके हुए गाल पौष्टिक तत्वों की कमी की निशानी होते हैं। इसके अलावा अगर आप पानी भी ठीक तरह से नहीं पीते तो इस वजह से भी आपके गाल पिचकने लगते हैं। गोल-मटोल गाल पाने के लिए लोग कई तरह के तरीके अपनाते हैं। मगर उससे भी कोई फायदा नहीं होता। एेसे में आज हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बताएंगे जिससे की आप अपने गालों को सुंदर गोल-मटोल बना सकते हैं।
अगर गाल उभरे हुए हों और चेहरा भरा-भरा सा हो तो हर व्यक्ति आकर्षक लगता है। यह चेहरे का एक परफेक्ट लुक माना जाता है। लेकिन आजकल आमतौर पर फूला हुआ चेहरा उन्हीं लोगों का देखने को मिलता है जो शरीर से भी मोटे होते हैं। मोटापे के कारण चेहरे पर जमी चर्बी प्राकृतिक रूप से आकर्षक नहीं लगती है। माना जाता है कि फैटी चेहरे और फूले हुए गाल वाले लोग अधिक जवान दिखायी देते हैं। शायद यही कारण है कि ज्यादातर स्त्री और पुरुष अपने चिपटे चेहरे को फैटी बनाने के लिए तरह-तरह के कास्मेटिक का इस्तेमाल करते हैं।
घर पर चेहरे को गोल मटोल (chubby) बनाने के लिए शहद एक बेहतर उपाय है। शहद चेहरे को मॉश्चराइज करता है और चेहरे की त्वचा को स्वस्थ बनाता है। शहद में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो चेहरे पर जमा विषाक्त पदार्थों को दूर कर देता है। पके हुए पपीते को पीसकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और इस पेस्ट को 10 मिनट तक चेहरे और गालों पर लगाकर रखें इसके बाद पानी से चेहरा धो लें। प्रतिदिन सुबह यह पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरा फैटी और गोल मटोल हो जाता है।
एलोवेरा
चेहरे और गालों पर एलोवेरा जेल लगाकर कुछ देर तक उंगलियों के पोरों (fingertips) से गोल-गोल मसाज करने से गालों पर उभार आता है। पूरे चेहरे पर एलोवेरा जेल लगाकर करीब 20 से 30 मिनट तक मसाज करते हें। यदि आप हफ्ते भर में अपने गालों और चेहरे को फैटी बनाना चाहती हैं तो दिन में दो से तीन बार चेहरे पर एलोवेरा जेल लगाकर मसाज करें।
ग्लिसरीन का उपयोग
फेस को प्राकृतिक रूप से टाइट रखने के लिए ग्लिसरीन का उपयोग किया जाता है। यह चेहरे को मॉश्चराइज करता है और चेहरे पर उभार लाता है। चार से पांच बूंद ग्लिसरीन में दो बूंद गुलाब जल मिलाकर इसे पूरे चेहरे पर लगाएं और उंगलियों से हल्का-हल्का मसाज करें। एक घंटे बाद चेहरे को पानी से धो लें। कुछ दिनों बाद आपके गाल फूले हुए और चेहरा फैटी दिखने लगेगा।
दूध
जो लोग प्रतिदिन दूध पीते हैं, उनकी न सिर्फ सेहत ही ठीक रहती है बल्कि उसकी त्वचा भी स्वस्थ रहती है। दूध में प्रोटीन, मिनरल और विटामिन पाया जाता है जो चेहरे को मॉश्चराइज करने का काम करता है और गाल को फैटी बनाता है। ठंडे दूध से लगभग 15 मिनट तक चेहरे पर मसाज करें और फिर पांच मिनट तक के लिए छोड़ दें। कुछ दिनों तक यह प्रक्रिया अपनाने से आपका चेहरा भरा-भरा दिखायी देने लगेगा। इसके अलावा चेहरे को गोल मटोल बनाने के लिए दो कप कम वसायुक्त दूध प्रतिदिन पीना फायदेमंद होता है।
जैतून का तेल
जैतून का तेल त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इस तेल से गालों की मसाज करने पर यह नैचुरल तरीके से मोटे होने लगते हैं। प्रतिदिन 1 चम्मच जैतून के तेल से चेहरे पर मालिश करें।
नारियल तेल से मसाज करें
गालों को अधिक मांसल बनाने में नारियल का तेल बहुत फायदेमंद होता है। नारियल के तेल में फैटी एसिड पाया जाता है जो चेहरे में आसानी से अवशोषित हो जाता है। प्रतिदिन सुबह और रात में सोने से पहले हल्के गुनगुने नारियल के तेल से चेहरा का मसाज करने से जल्द ही बेहतर परिणाम दिखायी देते हैं और महीने भर में चेहरा फैटी दिखायी देने लगता है।
गुब्‍बारे की तरह मुंह को फुलाएं
गालों को गोल-मटोल करने के लिए इनको कम से कम 1 मिनट तक गुब्बारे की तरह फुलाकर रखें। इस प्रक्रिया को दिन में 3 बार करें। रोजाना करने से कुछ ही महीनों में पिचके हुए गाल गोल-मटोल हो जाएंगे।
मेथी पेस्ट लगाएं
पोषक तत्वों से युक्त होने के कारण मेथी टाइट स्किन और फूले हुए गाल बनाने में फायदेमंद होता है। यह चेहरे की त्वचा को एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन की सप्लाई करता है और झुर्रियों को दूर करता है। एक चम्मच मेथी के दाने को रातभर पानी में भिगोंए और सुबह मेथी का पेस्ट बनाकर चेहरे और गालों पर लगा लें इसके बाद सादे पानी (plain water) से चेहरा धो लें। गालों को उभरा और आकर्षक बनाने के लिए मेथी एक अचूक घरेलू उपाय है।
एपल पेस्ट
गालों और चेहरे को फूला हुआ बनाने के लिए सेब एक आम घरेलू उपाय है। सेब में पाये जाने वाले प्राकृतिक अवयव सप्ताह भर में गालों पर उभार ला देते हैं। सेब के एक टुकड़े को अच्छी तरह से पीसकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को चेहरे और गालों पर लगाएं। आधे घंटे बाद सामान्य पानी से चेहरे को साफ कर लें। यह पेस्ट पूरे चेहरे को टाइट रखने के साथ ही उन्हें फैटी बनाने में मदद करता है।
पिचके गाल फुलाने की योग
चेहरे को फैटी और गालों को गोल मटोल बनाने के लिए फेशियल योगा एक बेहतर उपाय है। यह कोलेजन (collagen) और इलास्टिन (elastin) भी बनाने में मदद करता है जो एक स्वस्थ त्वचा और गोल मटोल गाल के लिए जरूरी होता है। एक कुर्सी पर आराम से बैठ जाएं और अपने मुंह को हल्का सा खोलें और बंद करें। इसके बाद दोबारा कोशिश करें और मुंह को खोलकर इतना फैलाएं कि बीच के सभी दांत दिखायी दें और दोनों तरफ के गाल सिकुड़ जाएं। अब बार-बार मुंह खोलने और बंद करने का अभ्यास करें। प्रतिदिन 2 मिनट तक फेशियल योगा करने से गाल उभरे हुए दिखायी देते हैं।
पर्याप्त पानी पिये
गोल मटोल और फूला हुआ गाल पाने का एक बेहतर आसान तरीका यह है कि आप प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। एक स्वस्थ शरीर और फैटी चेहरे के लिए प्रतिदिन कम से कम आठ गिलास पानी पीना बहुत जरूरी होता है। यह चेहरे और गालों को मॉश्चराइज करता है और उन्हें उभरा हुआ एवं स्वस्थ बनाता है। इसके अलावा आपको हरी पत्तेदार (green leafy) सब्जियां और फल भी पर्याप्त मात्रा में खाना चाहिए। लेकिन जो सबसे जरूरी है वह यह है कि लगातार जूस या पानी का सेवन करते रहें।
हेल्दी भोजन
प्रतिदिन हम जिस तरह का भोजन लेते हैं उनका भी हमारे स्किन पर असर पड़ता है। भोज्य पदार्थों में आवश्यक विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंटपाये जाते हैं जो शरीर का विकास तो करने में मदद करते ही हैं साथ में गालों को भी स्वस्थ बनाते हैं। प्राकृतिक रूप से गालों को फूला हुआ (fuller) बनाने के लिए आपको प्रतिदिन ओट्स, पनीर, दूध, गाजर, सेब, एवोकैडो, बादाम और हेल्दी फैट का सेवन करना चाहिए। इससे आपके गाल प्राकृतिक रूप से उभरे और फूले हुए दिखायी देंगे।

28.8.19

बच्चों के लिए फ्रूट जूस के फायदे नुकसान



वैसे तो फलों के सेवन के साथ-साथ फ्रूट जूस भी कई फायदों वाला होता है और सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है लेकिन सिर्फ फ्रेश जूस। मार्केट में बिकने वाला पैक्ड फ्रूट जूस बच्चों को बीमार बना सकता है। इन पैक्ड फ्रूट जूसेज में न तो फाइबर या कोई प्राकृतिक गुण होता और ना ही किसी तरह के पोषक तत्व। इस तरह के फ्रूट जूस बच्चों की सेहत के लिए कितने खतरनाक हैं यहां जानें.
मार्केट में बिकने वाले पैक्ड और फ्लेवर्ड फ्रूट जूस में कैडमियम, कार्बनिक, आर्सेनिक और मरकरी या लेड पाया जाता है, जो बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य पर बहुत ही बुरा असर डालता है। पैक्ड जूस में पाए जाने वाले मेटल बच्‍चों के नवर्स सिस्‍टम पर बुरा प्रभाव डालते हैं जिससे बच्‍चे के विकासशील ब्रेन को भी नुकसान पहुंचता है। ट्रेटा पैक में बंद जूस में फलों का हिस्सा सिर्फ 25 फीसदी ही होता है।

अगर कोई फलों के रस का सेवन करता है, तो यह दो से पांच साल के बच्चों के लिए 125 मिलीलीटर प्रति दिन (आधा कप) तक सीमित होना चाहिए, पांच से ऊपर के लोगों के लिए 250 मिलीलीटर प्रति दिन। लेकिन ये ताजे फलों का रस होना चाहिए।


इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP) के अनुसार, दो साल से कम उम्र के बच्चों को फ्रूट जूस नहीं देना चाहिए, चाहे ताजा हो या पैक्‍ड। क्‍योंकि वे कैलोरी और शुगर की मात्रा में अधिक होते हैं।

बाल विशेषज्ञों की एक शीर्ष इकाई ने फास्‍ट फूड, एनर्जी ड्रिंक्‍स और मीठे पेय से जुड़ी नई गाइडलाइन लेकर आई है। इसके अनुसार, दो से 18 साल की उम्र के लोगों को भी बाजार में बिकने वाले डिब्‍बाबंद फलों के रस, फलों के पेय या शुगर से बने पेय पदार्थों को पीने से रोकना चाहिए।
यहां तक कि अगर कोई फलों के रस का सेवन करता है, तो यह दो से पांच साल के बच्चों के लिए 125 मिलीलीटर प्रति दिन (आधा कप) तक सीमित होना चाहिए, पांच साल से ऊपर के लोगों के लिए 250 मिलीलीटर प्रति दिन। लेकिन ये ताजे फलों का रस होना चाहिए। वास्तव में, पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, फलों का रस सॉफ्ट ड्रिंक के रूप में हानिकारक हो सकते हैं, क्योंकि इसमें फाइबर की मात्रा कम और चीनी की मात्रा अधिक होती है। हालांकि, आपके फलों में विटामिन और खनिज होते हैं जो आपके बच्चे को अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।
IAP दिशानिर्देश यह भी उल्लेख करते हैं कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड पेय नहीं दिया जाना चाहिए। पांच से नौ साल की उम्र के स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए, चाय और कॉफी अधिकतम 100 मिलीलीटर प्रति दिन और 18 साल तक के लोगों के लिए 200 मिलीलीटर प्रति दिन तक सीमित होनी चाहिए।


सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, 9 और 14 साल की उम्र के बीच लगभग 93 फीसदी बच्चों ने कथित तौर पर पैकेज्ड फूड खाया, जबकि 68 फीसदी लोग हफ्ते में एक बार से ज्यादा शक्कर वाले पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। और लगभग 53 फीसदी लोग दिन में एक बार इनका सेवन करते हैं।
जंक फूड खाने से बच्चों में मोटापा, उच्च रक्तचाप, दंत और व्यवहार संबंधी मुद्दों का खतरा बढ़ जाता है। जर्नल इंडियन पेडियाट्रिक्स में प्रकाशित दिशानिर्देशों के अनुसार, "इन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन उच्च शरीर द्रव्यमान सूचकांक (higher body mass index) और संभवतः बच्चों और किशोरों में प्रतिकूल कार्डियो-मेटाबॉलिक परिणामों से जुड़ा हुआ है। कैफीन युक्त पेय का सेवन नींद की गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है।"



27.8.19

माइग्रेन(अधकपारी) के दर्द के आयुर्वेदिक,होम्योपैथिक उपचार


आधे सिर में होने वाले दर्द को आधा शीशी सिर दर्द , अधकपारी का दर्द या माइग्रेन का दर्द कहते हैं। माइग्रेन किसी दूसरे सिर से बिल्कुल अलग होता है। यह दर्द सिर के किसी एक भाग में काफ़ी तेज़ उठता है, जिससे रोगी का चैन से सोना-जगना मुश्किल हो जाता है। बुरी परिस्थिति में दर्द के साथ-साथ उल्टियाँ भी होती हैं। जिससे रोगी का कष्ट और बढ़ जाता है।
माइग्रेन का दर्द कुछ एक घंटों से लेकर कई दिनों तक बना रह सकता है। जब यह दर्द होता है तो सिर के नीचे की धमनी बड़ी हो जाती है, साथ ही सिर दर्द वाले हिस्से में सूजन भी आ जाती है। माइग्रेन का दर्द अनदेखा करने पर बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। रोगी को लकवा और ब्रेन हैमरेज भी हो सकता है।
माइग्रेन का दर्द आमतौर पर आधे सिर में होता है, इस कारण इसे अधकपारी भी कहा जाता है। लेकिन कई बार यह पूरे सिर को भी अपनी चपेट में ले सकता है। यह दो घंटे तक भी रह सकता है और 72 घंटे तक भी। इसके बारे में बता रही हैं इंद्रेशा समीर
एक अध्ययन के मुताबिक, माइग्रेन एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जिससे वैश्विक स्तर पर हर सातवां व्यक्ति पीड़ित है। भारत में 15 करोड़ लोग माइग्रेन की गिरफ्त में हैं। भारतीय महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा पीड़ित हैं। 24 फीसदी पुरुषों की तुलना में 76 फीसदी महिलाएं माइग्रेनग्रस्त हैं। 18 से 29 के बीच के लगभग 35 फीसदी युवा पीड़ित हैं। लगभग 30 फीसदी मरीज क्रॉनिक स्थिति वाले हैं। माइग्रेनग्रस्त लोगों में से 70 फीसदी में मानसिक तनाव, 46 फीसदी में उपवास, 52 फीसदी में यात्रा, 44 फीसदी में नींद की गडबड़ी, 13 फीसदी में मासिक धर्म की अनियमितता, 10 फीसदी में मौसम का बदलाव दर्द का कारण बनते दिखाई दिए। लगभग 34 फीसदी मरीजों में दौरे पड़ने के पीछे एक साथ कई कारण शामिल थे। बढ़ती उम्र के साथ माइग्रेन का दर्द कम होता पाया गया है।
क्यों होती है यह समस्या
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ट्राइगेमिनल नर्व में न्यूरोकेमिकल बदलाव और मस्तिष्क के रसायनों, खासतौर से सेरोटोनिन में असंतुलन की वजह से माइग्रेन पैदा होता है। सेरोटोनिन का स्तर कम होने पर न्यूरोपेप्टाइड का स्राव मस्तिष्क के बाहरी हिस्से में पहुंच कर माइग्रेन पैदा करता है। वैसे, इस रोग के वास्तविक कारणों का ठीक-ठीक पता चिकित्सा विज्ञानी अभी तक नहीं लगा सके हैं।


कुछ प्रमुख कारण

माइग्रेन का दर्द होने के सही कारणों का पता अभी तक नहीं किया जा सका है, लेकिन माइग्रेन के दौरों की पहचान करके इससे राहत दी जा सकती है।
1. कैफ़ीन का ज़्यादा सेवन करना
2. उच्च रक्तचाप
3. कई दिनों तक अधूरी नींद सोना
4. अधिक मानसिक तनाव रहना
5. मौसम बदलने का प्रभाव
6. दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग अधिक करना
7. हार्मोन असंतुलन
- हार्मोन में बदलाव माइग्रेन का कारण बन सकता है। मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था के चलते महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव देखे जाते हैं। कई बार इस बदलाव की वजह से माइग्रेन का दर्द शुरू हो सकता है। हार्मोनल बदलाव के कारण ही पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग से ज्यादा पीड़ित होती हैं।
- मौसमी बदलाव दर्द का कारण बन सकता है। ज्यादा शोर, बार-बार बढ़ने-घटने वाली तेज रोशनी व धूप में आंखें चुंधियाना, बहुत तेज गंध वगैरह से संवेदनात्मक उत्तेजना बढ़ सकती है और माइग्रेन का दर्द शुरू हो सकता है।
- ज्यादा मसालेदार भोजन, शराब का ज्यादा सेवन, धूम्रपान, चॉकलेट जैसे कुछ मीठे पदार्थ, पनीर आदि माइग्रेन के दौरे का कारण बन सकते हैं।
- एलोपैथी की कुछ दवाओं की वजह से दर्द शुरू हो सकता है। महिलाओं में बर्थ कंट्रोल पिल्स माइग्रेन पैदा कर सकते हैं।
- सोने-जागने की लगातार अनियमितता दर्द का कारण बन सकती है।
- बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम और थकान से माइग्रेन शुरू हो सकता है।
- एक अध्ययन के मुताबिक, बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन करने वाले यदि अचानक इसका सेवन बंद कर दें, तो माइग्रेन की चपेट में आ सकते हैं।
- तनाव और बेचैनी के माहौल में ज्यादा समय तक रहना पड़े, तो माइग्रेन की शुरुआत हो सकती है।
- सही समय पर भोजन न करने पर यह शुरू हो सकता है।
- पानी कम पीना दर्द का कारण हो सकता है।
- विटामिन की कमी माइग्रेन का कारण बन सकती है।
लक्षणों को पहचानें
- माइग्रेन की पहचान ऑरा से की जाती है। ऑरा दृष्टि संबंधी ऐसा लक्षण है, जिसमें रोगी को रह-रहकर आड़ी-टेढ़ी रेखाएं, रोशनी की चमकदार लकीरें और आंखों के सामने काले-काले धब्बे दिखाई देते हैं।
- सिर के एक हिस्से में फड़कता हुआ दर्द होता है।
- तेज रोशनी, गंध, आवाज के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता होती है।
- सिर दर्द के साथ बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा होती है।
- दिन भर बेवजह की उबासी रहती है।
- माइग्रेन के चलते कुछ लोगों में खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
- आंखों में तेज दर्द होता है।
- मिचली और उल्टी हो सकती है।
- आंखों के नीचे काले घेरे हो सकते हैं।
- गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।


बचकर रहें

- जीवनशैली का विश्लेषण करें और जरूरी सुधार करें। माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो पनीर, चॉकलेट, कैफीन, शराब आदि से परहेज करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और फल आहार में शामिल करें। बथुआ, अंजीर, आंवला, अनार, अमरूद, सेब आदि ज्यादा लें। आंवले के अलावा अन्य खट्टे फलों से बचें। ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-बी वाले आहार ज्यादा लें। दिन में सात-आठ गिलास पानी पिएं। ज्यादा नमक वाली चीजें कम खाएं।
- सही समय पर सोएं और नींद भरपूर लें।
- माइग्रेन में बिना डॉक्टरी सलाह के अनावश्यक दवाएं न लें।
- ज्यादा शोर वाली जगहों पर जाने से बचें।
- रोशनी की जगमगाहट और तेज धूप ऐसी स्थिति में नुकसानदेह हो सकती है।
- ज्यादा समय तक भूखे न रहें।
- जंक फूड समस्या बढ़ा सकता है, इसलिए उनसे बचकर ही रहें।
काम के घरेलू उपाय
- अदरक के कुछ टुकड़े खाएं। इससे मिचली की समस्या में भी राहत मिलती है।
- सिर दर्द वाले हिस्से में पिपरमिंट के तेल की मालिश करने से राहत मिलती है।
- दर्द हो तो बिस्तर पर लेटकर सिर को बेड से थोड़ा नीचे लटकाएं और जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ की नाक में सरसों के तेल या गाय के घी की तीन-चार बूंदें टपकाएं।
- प्राकृतिक चिकित्सकों के अनुसार, नाक से कुछ दिनों तक नियमित भाप लिया जाए, तो माइग्रेन ठीक हो सकता है।
- सिर, गर्दन और कंधों की मालिश कराएं।
- सिर, माथे और गर्दन पर तौलिया में बर्फ रखकर सिंकाई करें, आराम मिलेगा।
योग-प्राणायाम करें
माइग्रेन के रोगियों के लिए योग और प्राणायाम बड़े काम के साबित हो सकते हैं। हस्तपादासन, सेतुबंधासन, मर्जरासन, शिशु आसन पश्चिमोत्तानासन, पद्मासन, शशांकासन, हलासन, मत्स्यासन और शवासन माइग्रेन में विशेष लाभ पहुंचाते हैं। प्राणायामों में कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी करने चाहिए। इसी के साथ जलनेति भी करें। वास्तव में योग से प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है और माइग्रेन को ठीक करने में मदद मिलती है।
होम्योपैथी की मदद लें
होम्योपैथी डॉक्टरों के अनुसार, इस पद्धति से माइग्रेन पूरी तरह ठीक हो सकता है। यह लाक्षणिक चिकित्सा पद्धति है, इसलिए मरीज को अपने लक्षणों पर ठीक से ध्यान देकर डॉक्टर को बताना चाहिए। लक्षणों के आधार पर दवाएं दी जाती हैं।
यहां सबसे अच्छी होम्योपैथिक दवाओं की सूची है, जो माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं:
बेलडाडो: यह होम्योपैथिक दवा माइग्रेन के उपचार के लिए आदर्श है, जिसमें धड़कते सिरदर्द प्राथमिक सुविधा है. मरीज उसके सिर में पूर्णता की भावना का अनुभव करता है. सिरदर्द सूर्य के प्रकाश के संपर्क में बिगड़ जाती है. इस उपाय का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए भी किया जाता है, जो ठंड को पकड़ने या ठंड, नम हवा के संपर्क में होने के कारण होते हैं.
न्यूक्स वोमिका: न्यूक्ज़ वोमिका का प्रयोग माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए किया जाता है, जो गैस्ट्रिक मुद्दों के कारण होता है. इस होम्योपैथिक दवा का उपयोग करके अपच, बवासीर और कब्ज से विकसित आइग्रैन्स ठीक हो जाते हैं. यह एक प्रभावी उपाय है और जब अमीर भोजन खाने या शराब पीने के बाद सिरदर्द बिगड़ता है, तब मामलों में शीघ्र राहत प्रदान करता है.
स्पिजेलीया: यह होम्योपैथिक उपाय मुख्य रूप से माइग्रेन का सिरदर्द के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, जो सिर के बाईं ओर मौजूद होते हैं. यह बाएं तरफ माइग्रेन के रूप में जाना जाता है. सिर के बाएं लौकिक क्षेत्र, माथे, और आंखों पर सिर दर्द का अनुभव होता है. सिर के चारों ओर स्थित एक तंग बैंड की अनुभूति महसूस होती है या अनुभवी होती है.
सैन्गुनेरिया कनाडाईसिस: यह एक प्रभावी होम्योपैथिक चिकित्सा है. जिसका उपयोग सिर के दाहिनी ओर महसूस किए जाने वाले माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए किया जाता है. दर्द और धड़कता हुआ सही पक्ष पर अनुभव होता है, सिर के पीछे से शुरू होता है और दाहिनी आंखों पर व्यवस्थित होता है. इस दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के इलाज के लिए भी किया जाता है जो दिन में होते हैं और दिन के दौरान खराब होते हैं. रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में माइग्रेन के लिए यह अच्छा है.
ग्लोनाइन: यह प्रभावी होम्योपैथिक दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के इलाज के लिए किया जाता है, जो सिर में अत्यधिक भीड़ से उत्पन्न होता है. मरीज को लगता है कि उसका सिर बड़ा होकर फट जाएगा. वह अपने सिर के चारों ओर गर्मी महसूस करता है. साथ ही आंखों के फैलाने वाले इस दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के उपचार के लिए किया जाता है, जो लंबे समय तक सूरज के संपर्क में होते हैं.

आयुर्वेद में है इलाज

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेद में इसका सटीक इलाज है। जड़ी-बूटियों से इलाज तो संभव है ही, पंचकर्म के तहत शिरोधारा आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुंचा सकती है। इसमें खास जड़ी-बूटी से तैयार काढ़ा और तेल का इस्तेमाल किया जाता है। गुनगुना काढ़ा व तेल माथे के बीचोबीच डाला जाता है। 15 से 20 मिनट की प्रक्रिया से मरीज को राहत मिलती है। यह प्रक्रिया 25 से 30 दिन चलती है। इससे पहले शरीर को शुद्ध करने के लिए स्टीम बाथ समेत दूसरी प्रक्रियाएं भी की जाती हैं। शिरोधारा के साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी लेनी होती है। इससे बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। 
देसी घी
देसी घी के फायदों के बारे में तो सबने सुना ही होगा। लेकिन माइग्रेन के लिए ये एक लाजवाब औषधि हैं। माइग्रेन में रोजाना गाय के देसी घी के दो बूंदे नाक में डाले या फिर इससे दर्द वाली जगह पर लगाए। इससे कुछ ही देर में आपका माइग्रेन दूर हो जाएगां।


बंद गोभी 
बंद गोभी में काफी फाइबर पाया जाता हैं, ये पेट के साथ ही माइग्रेन के लिए काफी असरदायक है। बंद गोभी के पत्तियों को पीसकर गर्दन और कंधे पर लगाने से माइग्रेन से छुटकारा पा सकते हैं।
गाजर और खीरे के रस सलाद में गाजर और खीरा तो आप खाते ही होंगे, लेकिन आप चाहे इनसे इनसे माइग्रेन की समस्‍या से निजात पा सकते हैं। गाजर और खीरे का रस निकाले। इन्‍हें कंधे और गर्दन पर लगाएं इससे आपको आराम मिलेगा।
नींबू का छिलका सेहत और सौंदर्य में नींबू को काफी कारगर माना जाता है, नींबू के छिलके को पीसकर इसका लेप तैयार कर लें। इस लेप को माथे पर लगाएं। दर्द से तुरंत राहत मिलेगी।
कपूर
कपूर में एंटी बैक्‍टीरियल, एंटी फंक्‍शनल जैसे मेडिकल गुण होते है जो कि स्किन से संबंधित कई समस्‍या को दूर करता है। कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करने से माइग्रेन के कारण होने वाले दर्द में राहत मिलती है।
डॉक्टर की मदद लें
तकलीफ ज्यादा हो, बार-बार हो, तो डॉक्टर की सलाह लेकर जरूरी जांचें करानी चाहिए।
- आनुवंशिक वजहें हों, तो स्नायविक जांच के साथ मरीज का पारिवारिक इतिहास देखा जा सकता है।
- रक्त की जांच में रक्त कोशिकाओं से संबंधित समस्याओं को देखा जाता है।
- मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग करके ट्यूमर, स्ट्रोक, मस्तिष्क में रक्तस्राव, संक्रमण तथा मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की स्थिति की जांच की जाती है।
- कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी या सीटी स्कैन से ट्यूमर, संक्रमण, मस्तिष्कीय क्षति या रक्तस्राव तथा अन्य कई और समस्याओं को देखा जा सकता है।



24.8.19

पार्किंसंस रोग के कारण ,लक्षण ,उपचार


हाथ पैर में कम्पन (Parkinson’s Desease) एक दिमाग की बिमारी है. यह लम्बे समय तक दिमाग में पलती है. यह रोग अपना असर बहुत धीरे धीरे दिखाता है. रोगी को पता भी नहीं चल पाता की कब उसे इस रोग ने जकड़ लिया है. रोग के लक्षण जब काफी अधिक हो जाते है. तब एहसास होता है कि शायद कोई प्रॉब्लम है. इस रोग के लग जाने पर रोगी के हाथ पैर कंपकंपाने लगते है.
पार्किंसंस रोग नर्वस सिस्टम से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें हाथों की हथेलियों में लगातार और तेज कंपन होता है। इस बीमारी की शुरूआत में केवल एक हथेली में कंपन होता है लेकिन धीरे-धीरे यह दूसरी हथेली को भी प्रभावित करने लगती है। पार्किंसन्स रोग होने पर हथेली अक्सर झुकी रहती है और हथेलियों में कंपन होता रहता है। शुरूआती स्टेज में इस बीमारी का जल्दी पता नहीं चल पाता है। इसके अलावा काम करते या टहलते समय भी हाथों की क्रिया में कोई खास परिवर्तन नहीं दिखता है।
जैसे-जैसे समय बीतता है पार्किंसंस रोग के लक्षण और खतरनाक होने लगते हैं। आमतौर पार्किंसन्स रोग को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन कुछ दवाओं के जरिए इस बीमारी के लक्षणों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।


पार्किंसंस रोग के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। इसके शुरूआती लक्षण इतने मामूली होते हैं कि जल्दी इसपर किसी का ध्यान नहीं जाता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को शुरू में सिर्फ एक हाथ में कंपन होता है लेकिन बाद में दूसरे हाथ में भी वैसा ही कंपन होने लगता है।

यह बीमारी आमतौर पर हाथ या उंगलियों में कंपन से शुरू होती है। आप अपने हाथ के अंगूठे को तर्जनी उंगली पर रगड़कर इसे महसूस कर सकते हैं। इस बीमारी का एक संकेत यह भी है कि आपके हाथों में हमेशा बेचैनी सी महसूस होगी।
पार्किंसंस रोग होने पर हाथों की गति कम हो जाती है और हाथ कम हिलते-डुलते हैं जिसे ब्रैडीकाइनेसिया कहते हैं। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति को हाथ से खाना खाने में भी परेशानी होती है। इसके अलावा टहलते समय कदमों की गति धीमी हो जाती है और पीड़ित व्यक्ति को कुर्सी से उठने में दिक्कत होती है।
यदि रोगी व्यक्ति लिखने का काम करता है तो उसके लिखे अक्षर टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं. रोगी को हाथ से चीजों को पकड़ने तथा उठाने में परेशानी महसूस होती है. इस रोग से पीड़ित रोगी के जीभ, जबड़े तथा कभी कभी आंखे भी कंपकंपाने लगती है. कुछ मरीज़ों में यह ‍कम्पन शुरु में कम रहता है. बाद में ज्यादा देर रहने लगता है.
पार्किंसंस रोग होने पर शरीर के किसी भी हिस्से की मांसपेशियां कठोर हो सकती हैं। इससे आपको हिलने डुलने में परेशानी और दर्द का अनुभव होगा।

पार्किंसन्स रोग होने पर आपको उठने-बैठने में अधिक तकलीफ होती है और आपकी बैठने की मुद्रा भी बदल जाती है। इसके अलावा बार-बार पलकें झपकना, मुस्कुराना और चलते समय हाथों को झटकने जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं।
इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को बोलने में भी परेशानी होती है। मरीज जल्दी-जल्दी बोलता है या बोलने से पहले संकोच करता है। व्यक्ति की आवाज भी कर्कश हो सकती है जो सुनने में असामान्य सी लगेगी। आपको लिखने में भी दिक्कत होगी और आपको अपना लिखा छोटा दिखेगा।
व्यक्ति में पार्किंसंस रोग होने पर दिमाग की कुछ तंत्रिका कोशिकाएं या न्यूरॉन धीरे-धीरे टूट जाती हैं या मृत हो जाती हैं। न्यूरॉन के टूटने पर यह दिमाग में एक रासायनिक संकेत पैदा करता है जो डोपामिन कहलाता है। जब डोपामिन का लेवल घटने लगता है तो मस्तिष्क असामान्य तरीके से काम करने लगता है जिससे हमें पार्किंसंस रोग होने का संकेत मिलता है। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से पर्किंसन रोग होता है
शोधकर्ताओं ने पार्किंसन्स रोग होने के पीछे जेनेटिक म्यूटेशन को जिम्मेदार माना है। इसका मतलब यह है कि अगर आपके घर का कोई सदस्य पार्किंसन्स रोग से पीड़ित है तो आपको भी यह बीमारी होने की संभावना बनी रहती है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर मामले में पार्किंसंस रोग के पीछे जीन ही कारण हो।
दूषित पर्यावरण और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से भी पार्किंसंस रोग होने की संभावना होती है। हालांकि इससे कम ही लोग प्रभावित होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि पार्किंसन्स बीमारी होने मरीज के दिमाग में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं लेकिन यह पता नहीं चल पाया है कि ये बदलाव किस वजह से होते हैं।
पार्किंसन्स रोग एक खास आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। जिन लोगों में पर्किंसन रोग पाया जाता है उनमें ज्यादातर लोगों की उम्र साठ वर्ष या इससे ज्यादा होती है।
पुरूषों में 
यह पार्किंसंस बीमारी महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों में यह पार्किंसंस बीमारी होने का खतरा डेढ़ से दो गुना अधिक होती है।
अगर परिवार में किसी व्यक्ति को पार्किंसंस रोग हो तो अन्य सदस्यों को भी यह बीमारी होने का डर बना रहता है। पहले हाथ सुन्न होने के लक्षण दिखते हैं फिर हाथों में तेज कंपन शुरू हो जाता है।
सिर में घाव लगने या दूषित वातावरण में मौजूद हानिकारक पदार्थों और कीटनाशकों और जड़ी-बूटियों के प्रभाव से भी यह बीमारी हो जाती है।
पार्किंसन्स रोग से पीड़ित व्यक्ति को सोचने समझने और याद रखने में परेशानी होती है। यह लक्षण काफी देरी से दिखता है। इस तरह की समस्या को ठीक करने में दवाएं भी ज्यादा कारगर नहीं होती है।


डिप्रेशन

पार्किंसन्स रोग होने पर व्यक्ति को अधिक डिप्रेशन होता है। इस स्थिति में डिप्रेशन
का इलाज कराने से पार्किंसन्स की बीमारी से आसानी से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा कुछ भावनात्मक बदलाव भी होते हैं जैसे अचानक से आप डर, चिंता और आत्मविश्वास में कमी महसूस होने लगती है। डॉक्टर ऐसे मरीज को कुछ दवाएं देकर पार्किंसन्स रोग के लक्षणों को कम करते हैं।
पेशाब करने में परेशानी
 पार्किंसन्स रोग से पीड़ित व्यक्ति को थोड़ी देर तक भी पेशाब रोककर रखने में परेशानी होती है। इसके अलावा उसे पेशाब करने में भी दिक्कत होती है। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है जिससे उसे कब्ज की भी समस्या हो जाती है।


नींद की समस्या

 पार्किंसन्स की बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को नींद की समस्या हो जाती है। रात में बार-बार मरीज की नींद खुल जाती है। वह सुबह जल्दी उठ जाता है और पूरे दिन उसे नींद नहीं आती है। इसके अलावा इस रोग से पीड़ित व्यक्ति नींद में बार-बार अपनी पलकें सिकोड़ता और फैलाता है जैसे वह कोई सपना देख रहा हो। दवाओं के जरिए इस समस्या को ठीक किया जा सकता है।
पार्किंसंस रोग में होती है भोजन निगलने में परेशानी
पार्किंसन्स रोग से पीड़ित मरीज को भोजन निगलने में भी परेशानी होती है। भोजन निगलने में परेशानी होने की वजह से लार मुंह में जमा हो जाता है और फिर मुंह से बाहर टपकने लगता है।
पार्किंसंस रोग से बचाव
अभी तक पार्किंसन्स रोग होने की सही वजह नहीं पता चल पायी है। यह लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। लेकिन रिसर्च में पाया गया है कि कॉफी में मौजूद कैफीन और चाय तथा कोला पार्किंसन्स की बीमारी के खतरे को बढ़ने से रोकते हैं। इसके अलावा ग्रीन टी भी पर्किंसन की बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करती है। कुछ रिसर्च यह भी दावा करते हैं कि एरोबिक एक्सरसाइज से पर्किंसन बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है।
हाथ पैर में कम्पन (Parkinson’s Disease) का घरेलू उपचार
*इस रोग में 4-5 दिनों तक पानी में नीबू पीना तथा नारियल का पानी पीना चाहिए.
*फलों तथा सब्जियों का रस पीना चाहिये. लगभग 10 दिनों तक बिना पका हुआ भोजन लेना चाहिए.
*सोयाबीन या तिल को दूध में मिलाकर या फिर बकरी का दूध पीने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है.
हरी पत्तेदार सब्जियों का सलाद खाना चाहिए.
*विटामिन E की मात्रा अधिक वाले भोजन का अधिक सेवन करना चाहिए.
* विटामिन B :
शरीर में विटामिन Bकी कमी होने के कारण आपको हाथों पैरों में कम्पन और आपके दिमाग द्वारा किये जाने वाले कार्यो में बाधा उत्त्पन्न हो सकती है, इसीलिए आपको हरी सब्जियों, फलों, दालें, बीन्स, अंडा आदि का सेवन करने से विटामिन और अन्य मिनरल्स की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको हाथों पैरों में होने वाली कम्पन की समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है।
* चाय :
कुछ चाय जैसे chamomile, laung और lavandula आदि पीने से आपके दिमाग में शान्ति बनती है और दिमाग की तंत्रिकाओं को आराम मिलता है इसके फलसवरूप मानसिक तनाव में कमी आती है। यदि आपको मानसिक तनाव और टेंशन के कारण हाथ कांपने की शिकायत है तो आज से ही इन चाय का सेवन करना शुरू कर दीजिये।
* जटामांसी :
हाथ-पैर कांपने पर या किसी दूसरे अंग के अपने आप हिलने पर जटामांसी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करना चाहिए।
*कॉफी, चाय, नशीले पदार्थ, नमक, चीनी, डिब्बा बंद पदार्थ नहीं खाने चाहिए.
*हर रोज व्यायाम करने से यह रोग जल्दी ठीक हो जाता है.
*विचारों को हमेशा सकरात्मक रखना चाहिए तथा हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए.
* तगार :
तगार की जड़ भी हाथों और पैरों में होने वाली कम्पन की समस्या से आपको आराम दिलाने में मदद करती है, क्योंकि इसमें आपको मांसपेशियों, दिमाग को शांत और अनिंद्रा की समस्या को दूर करने के गुण होते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दिन में दो से तीन बार इसकी चाय बना कर इसका सेवन करें, आपको आराम महसूस होगा।
* लहसुन :
शरीर का कम्पन दूर करने के लिए बायविडंग एवं लहसुन के रस को पकाकर सेवन करने से रोगी को लाभ मिलता है। लहसुन के रस से शरीर पर मालिश करने से रोगी का कंपन दूर होता है। 4 जावा (कली) लहसुन छिलका हटाकर पीस लें। इसे गाय के दूध में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कम्पन के रोगी का रोग ठीक हो जाता है।
* ध्यान व योगा :
इस समस्या से बचने के आसान उपचार है की आप नियमित सुबह उठ कर ध्यान व योगा करें, ऐसा करने से आपके दिमाग को रिलैक्स रहने में मदद मिलती है, साथ ही मानसिक तनाव व् अनिंद्रा की समस्या से भी राहत मिलती है, और आपको शाम के समय भी पार्क आदि में वॉक या जॉगिंग के लिए जरूर जाना चाहिए।
* निर्गुण्डी :
निर्गुण्डी की ताजी जड़ एवं हरे पत्तों का रस निकाल कर उसमें पाव भाग तिल का तेल मिलाकर गर्म करके सुबह-शाम 1-1 चम्मच पीने से तथा मालिश करते रहने से कंपवात, संधियों का दर्द एवं वायु का दर्द मिटता है। स्वर्णमालती की 1 गोली अथवा 1 ग्राम कौंच का पाउडर दूध के साथ लेने से लाभ होता है।

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दाँत मजबूत बनाने के कारगर उपाय


मजबूत दांत पाचन, स्पीच और आपको स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका स्वस्थ और मजबूत रहना बहुत ही जरूरी है। आज हम जानेंगे कि अपनी मुस्कान को भी तरोताजा रखने के लिए अपने दांतों की सफाई और मजबूती का ख्याल कैसे रखा जाए।
दांत हमारे शरीर का एक अभिन्‍न और अनिवार्य हिस्‍सा हैं। इसलिए दांतों को मजबूत करने के उपाय, तरीके और नुस्‍खे आपको पता होना चाहिए। दांतों का स्‍वस्‍थ होना आपके चेहरे की सुंदरता को भी परिभाषित करता है। कल्‍पना करें कि यदि आपके दांत न हों तो आप कैसा महसूस करेंगे। आप अपनी इच्‍छानुसार भोजन का सेवन नहीं कर पायेंगे साथ ही आपका चेहरा बुजुर्गों की तरह दिखाई देगा। हालांकि यह मात्र एक कल्‍पना है। लेकिन यदि आपके दांत स्‍वस्‍थ और मजबूत नहीं होगें तो ऐसी स्थिति आने में समय नहीं लगेगा। आपको घबराने की आवश्‍यकता नहीं है क्‍योंकि दांतों को मजबूत करने के उपाय भी मौजूद हैं। आप अपनी जीवनशैली में कुछ परिवर्तन करके और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन कर दांतों को मजबूत बना सकते हैं।
अक्‍सर हम देखते हैं कि छोटे बच्‍चों और बुजुर्गों के दांतों में दर्द बना रहता है। हालांकि कमजोर दांत के लक्षण किसी भी उम्र में दिखाई दे सकते हैं। कमजोर दांत के लक्षण में ढीले दांत, खाने के दौरान दर्द या असुविधा, दांतों के आसपास मसूड़ों की सूजन या लालिमा, मसूड़ों से खून आना आदि शामिल हैं। स्‍वाभाविक रूप से दांतों को मजबूत करने के उपाय और तरीके अपनाकर आप भी अपने दांतों को स्‍वस्‍थ रख सकते हैं।
आपके दांत आपके स्‍वस्‍थ रहने का एक प्रमुख साधन है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि बिना दांतों के आप उचित आहार का सेवन नहीं कर सकते हैं। जिससे आपको पर्याप्‍त पोषक तत्‍व प्राप्‍त होते हैं। यदि आपके दांत कमजोर हैं या उनमें किसी प्रकार की समस्‍या है तो आपको तुरंत ही दांतों को मबजूत बनाने के उपाय अपनाना चाहिए। इसके लिए आप कुछ औषधीय जड़ी-बूटीयों, खाद्य पदार्थों और अच्‍छी आदतों को शामिल कर सकते हैं। आइए विस्‍तार से जाने दांतों को मजबूत करने के उपाय क्‍या हैं।



कैल्शियम है जरूरी

कैल्शियम, विटामिन डी और फास्फोरस बच्चों और वयस्कों में स्वस्थ दांतों और मसूड़ों के गठन और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| आपकी हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में कैल्शियम बहुत मदद करता है। इसलिए अपने आहार कैल्शियम को शामिल कीजिए। इसके अलावा दांतो को मजबूत रखने के लिए ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल करें जिसमें फ्लोराइड मौजूद हों।
खूब पानी पिएं
दांतों को मजबूत बनाने के सबसे प्रभावी उपाय में पर्याप्‍त पानी पीना भी शामिल है। पानी पीना आपके दांतों में मौजूद भोजन के अवशेष और बैक्‍टीरिया आदि को साफ करने का काम करता है। इसके अलावा पानी पीना एसिडिटीके लक्षणों को भी बेअसर करता है जो दांतों के सुरक्षा आवरण को नुकसान पहुंचाते हैं। आप भी अपने दांतों को मजबूत बनाने के लिए भोजन के बाद कुल्‍ला करने की आदत बनाएं। जिससे भोजन के बाद मुंह में बचे हुए भोजन के टुकड़ों को बाहर किया जा सके। जिससे दांतों की सड़न और अन्‍य समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। आप भी अपने दांतों को मजबूत बनाने के लिए बहुत सारा पानी पीना सुनिश्चित करें।
लहसुन
लहसुन भी शरीर और दांतों के लिए अच्छा माना गया है। लहसुन एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। इसमें एलिसिन नामक तत्व होते हैं, जो एंटीफंगल, एंटीवायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। यह खराब बैक्टीरिया को नियंत्रित करता है, जो कैविटी और मसूड़े के रोग की समस्याओं का कारण बनते हैं।
काली मिर्च और हल्‍दी
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि कालीमिर्च और हल्‍दी को मसाले के रूप में भी उपयोग किया जाता है जो कि वास्‍तव में जड़ी बूटीयां हैं। इनका उपयोग करने से मसूड़ों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। जिसके कारण आप अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं। इसके लिए आप कालीमिर्च और हल्‍दी के पाउडर का पेस्‍ट बनाएं और इससे अपने दांतों और मसूड़ों की हल्‍की मालिश करें। इसके बाद आप लगभग 30 मिनिट तक कुछ भी ना खाएं और न ही कुछ पिएं। ऐसा करने से आपको मसूड़ों की सूजन से राहत मिलेगी साथ ही हल्‍दी और कालीमिर्च के पोषक तत्‍व आपके दांतों को मजबूत करेंगे।
नमक
आप अपने आहार में नमक का नियमित सेवन करते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि नमक का उपयोग आपके दांतों को मजबूत बना सकता है। आप अपने दांतों को स्‍ट्रोग बनाने के लिए भी नमक का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप सरसों के तेल में थोड़ा सा नमक लें और इससे अपने दांतों की मालिश करें। ऐसा करने से आपके मसूड़े स्‍वस्‍थ रहेंगे। जिससे स्‍वाभाविक रूप से दांतों को मजबूत बनाया जा सकता है।


मालिश करें

दांतों को सेहतमंद बनाने के लिए केवल ब्रश करना ही काफी नहीं है। इन्हें मजबूत और सफेद बनाने के लिए दांतों की मालिश करना भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए नींबू बहुत ही फायदेमंद है। आप नींबू के रस से दिन में दो बार दांतों की मालिश करें ,जिससे दांत चमक उंठेगे। आप चाहे तो सरसों के तेल में थोड़ा-सा नमक मिलाकर भी दांतों और मसूढ़ों की मालिश कर सकते हैं जिससे दांत मजबूत बनेंगे।पुदीने का तेल
पुदीने का तेल आपके दांतों को मजबूत करने का सबसे अच्‍छा तरीका हो सकता है। यह मसूड़ों के दर्द और सूजन को दूर करने में मदद करता है। यदि आपके दांत कमजोर हैं और हिल रहे हैं तब भी आप पुदीने के तेल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। दांतों के दर्द से राहत पानी के लिए आप पुदीने के तेल से मसूड़ों की मालिश करें। पुदीने में मौजूद दर्द नाशक और सूजन विरोधी गुण मसूड़ों को आराम दिलाने और दांतों को मजबूत करने में सहायक होते हैं।
नीम
दांतों को मजबूत करने के लिए एक और आयुर्वेदिक उपाय नीम है। नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो दांतों को स्वस्थ रखने और मसूड़ों को मजबूत करने में मदद करता है। एक अध्‍ययन के अनुसार दांतों के पारंपरिक उपचार के लिए नीम के पत्‍तों का उपयोग किया जा सकता है। अध्‍ययन के अनुसार नीम, आम या क्‍लोरहेक्सिडाइन (chlorhexidine) युक्‍त माउथवॉश का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। क्‍योंकि इनमें कई प्रकार के एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते हैं। यदि आप दांतों को मजबूत करना चाहते हैं तो नियमित रूप से 3 स्‍प्‍ताह तक दिन में दो बार नीम से बने माउथवॉस का उपयोग करें। यह आपके दांतों को मजबूत करने के साथ ही मसूड़ों को भी स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होता है।
आंवला
आंवला में विटामिन सी की अच्‍छी मात्रा होती है। सभी लोग यह जानते भी हैं कि आंवले का सेवन दांतों के लिए अच्‍छा होता है। लेकिन अधिकांश लोग जानने के बाद भी इसे अनदेखा कर देते हैं। आंवले में मौजूद विटामिन सी दांतों और मसूड़ो से जुड़ी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर करने और इन्‍हें मजबूत बनाने में मदद करता है। आप आंवले का सेवन करने के साथ ही आंवले के रस से दिन में कई बार कुल्‍ला कर सकते हैं। ऐसा करना भी आपके दांतों के लिए फायदेमंद होता है।
लौंग तेल
प्राचीन समय से ही दांत के दर्द को कम करने और दांतों को मजबूत बनाने के उपाय में लौंग के तेल का उपयोग किया जा रहा है। मसूड़ों में सूजन और दर्द होने की स्थिति में लौंग तेल बहुत ही प्रभावी होता है। लौंग में विभिन्‍न प्रकार के एंटीऑक्‍सीडेंट, एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। जो दांतों को कमजोर करने वाले बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। अपने दांतों को मजबूत करने के लिए आप नियमित रूप से दिन में दो लौंग के तेल से दांतों और मसूड़ों की मालिश कर सकते हैं। लौंग का तेल दांत मजबूत करने का घरेलू नुस्‍खा है जो कि बहुत ही प्रभावी होता है।


मुलैठी

मुलैठी एक औषधीय जड़ी बूटी है जो आपके दांतों को मजबूत करने का तरीका हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि मुलैठी में लिकोरीसीडिन और लिकोरीसोफ्लैवन ए मौजूद होता है। ये घटक दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्‍टीरिया के विकास को रोकने और उन्‍हें नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। इसलिए आप अपने दांतों को मजबूत और स्‍वस्‍थ बनाने के लिए मुलैठी युक्‍त टूथ पेस्‍ट का उपयोग कर सकते हैं।
दही का उपयोग
प्राकृतिक रूप से प्रोबायोटिक्‍स प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा तरीका ताजे दही का सेवन करना है। प्रोबायोटिक्‍स हमारे शरीर के अच्‍छे बैक्‍टीरिया होते हैं। दही का सेवन करने से आप अपने शरीर में अच्‍छे बैक्‍टीरिया की संख्‍या को बढ़ाकर खराब बैक्‍टीरिया की संख्‍या को संतुलित कर सकते हैं। दांतों का कमजोर होना और अन्‍य दांतों से संबंधी समस्‍याएं इन खराब बैक्‍टीरिया की अधिक मात्रा के कारण होती हैं। इसलिए दांतों को मजबूत करने के लिए दही का सेवन अच्‍छा होता है। इसके अलावा नियमित रूप से दही का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।
खट्टे फलों से बचें
खट्टे फल स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन अधिक मात्रा में इनका सेवन करना आपके दांतों के लिए हानिकारक हो सकता है। नींबू जैसे अन्‍य खट्टे फलों में अम्‍ल की अधिक मात्रा होती है जो दांतों के सुरक्षा कवच या तामचीनी (enamel) को नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे आपके दांत कमजोर और क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इसलिए अधिक मात्रा में इस प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।

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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार




23.8.19

पायरिया रोग के आयुर्वेदिक उपचार -डॉ॰आलोक

अगर आप खाना खाने के बाद दांतों की साफाई ठीक ढंग से नहीं करते हैं तो आपको पायरिया जैसी घातक बीमारी होने की संभावना हो सकती है। मुंह से गंदी बदबू आना, दांतों में दर्द और मसूड़ों में सूजन और खून आना पायरिया के लक्षण हो सकते हैं। अगर पायरिया को रोका ना गया तो इस बीमारी की वजह से आपके पूरे दांत गिर सकते हैं।पेरियोडोंटाइटिस को पायरिया के नाम से भी जाना जाता है। पायरिया के घरेलू उपाय आपको दांतों या मसूड़ों की सूजन से बचा सकते हैं। पायरिया मसूड़ों की बीमारी का उन्‍नत चरण है जिसमें मसूड़े और हड्डियां जो दांतों को सहारा देते हैं वे संक्रमित हो जाते हैं और उनमें सूजन आ जाती है। आमतौर पर मसूड़ों में सूजन का प्रमुख कारण बैक्‍टीरिया होता है। जिनके प्रभाव से प्रतिरक्षा शक्ति में कमी आ जाती है। मसूड़ों से लगातार खून आना पायरिया होने के शुरुआती लक्षणों में से एक है। आइये जानें पायरिया के लिए घरेलू उपचार क्या हैं।
पायरिया रोग के लक्षण में मुंह की बदबू, मसूड़ों में सूजन, मुंह के छाले, मसूड़ों और दांतों के बीच अंतर आदि प्रमुख हैं। लेकिन पायरिया के घरेलू उपाय अपनाकर आप इन समस्‍याओं से छुटकारा पा सकते हैं। आज बाजार में पायरिया का इलाज करने के लिए कई तरह के मंजन भी उपलब्ध हैं। लेकिन आज हम घर पर ही पायरिया का घरेलू इलाज करने के तरीके और फायदे जानेंगे।
पायरिया आपके लिए एक गंभीर समस्‍या हो सकती है यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए। पायरिया का इलाज करने के लिए कुछ घरेलू नुस्‍खे भी बहुत ही प्रभावी होते हैं जिनका असर कुछ विशेष दवाओं के समान ही होता है। अच्‍छी बात यह है कि इन घरेलू नुस्‍खों को अपनाने से किसी प्रकार के गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं।
पायरिया एक गंभीर समस्‍या है जो न केवल आपके दांतों को बल्कि आपके संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं के लिए पायरिया इसलिए जिम्‍मेदार है क्‍योंकि यह एक संक्रामक बीमारी है। जिसके कारण पायरिया के हानिकारक जीवाणु लार और थूक के साथ मिलकर पेट में पहुंच जाते हैं जो अन्‍य प्रकार के शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कारण : 1 पायरिया की शुरुआत, दांतों की ठीक से देखभाल न करने, अनियमित ढंग से जब-तब कुछ-न-कुछ खाते रहने के कारण तथा भोजन के ठीक से न पचने के कारण होता है।
2 लि‍वर की खराबी के कारण रक्त में अम्लता बढ़ जाती है। दूषित अम्लीय रक्त के कारण दांत पायरिया से प्रभावित हो जाते हैं।
3 मांसाहार तथा अन्य गरिष्ठ भोज्य पदार्थों का सेवन, पान, गुटखा, तम्बाकू आदि पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन, नाक के बजाए मुंह श्वास लेने का अभ्यास, भोजन को ठीक से चबाकर न खाना, अजीर्ण, कब्ज आदि पायरिया होने के प्रमुख कारण हैं।



घरेलू इलाज नमक

पायरिया केपायरिया रोग के आयुर्वेदिक उपचार  इलाज के लिए नमक एक बेहतरीन उपाय है। नमक में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पेरियोडोंटाइटिस (periodontitis) के संक्रामक बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम कर सकते हैं। इसके अलावा नमक का उपयोग करने पर यह पायरिया के लक्षण जैसे सूजन, दर्द और रक्‍तस्राव आदि को भी रोकने में सहायक होते हैं।
पायरिया का उपचार करने के लिए आप 1 गिलास गुनगुने पानी में 2 छोटे चम्‍मच नमक मिलाएं। इस घोल को मुंह में लगभग 1 मिनिट तक रखें और कुल्‍ला करें। ऐसा आप दिन में 2-3 बार करें। ऐसा करने से आपको कुछ ही दिनों में आराम मिल सकता है।
विकल्‍प के रूप में आप नमक का पेस्‍ट बनाने के लिए 2 बूंद सरसों का तेल मिलाएं। इस मिश्रण को दांतों में ब्रश करने के बाद मसूड़ों में लगाएं और 5-10 मिनिट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से अच्‍छी तरह कुल्‍ला करें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक सुबह इस उपाय को अपनाने से पायरिया के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक दवा हल्‍दी
पायरिया का घरेलू उपचार करने के लिए हल्‍दी का उपयोग किया जा सकता है। हल्‍दी में कक्‍र्यूमिन (curcumin) नामक एक सक्रिय घटक होता है जो कि जीवाणुरोधी और एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों से भरपूर होता है। संक्रमित या सूजन वाले मसूड़ों में हल्‍दी का उपयोग करने से बैक्‍टीरिया को आसानी से नष्‍ट किया जा सकता है। इसके अलावा हल्‍दी का उपयोग मसूड़ों की सूजन और दर्द को भी कम करने में सहायक होती है। मसूड़ों में हल्‍दी से मालिश करने के लिए नरम टूथ ब्रश का उपयोग करें। पायरिया के लिए मंजन के रूप में कुछ सप्‍ताह तक नियमित रूप से हल्‍दी का उपयोग करना चाहिए।
विकल्‍प के रूप में पायरिया के इलाज के लिए हल्‍दी और गर्म पानी से बने पेस्‍ट का भी उपयोग किया जा सकता है। पेस्‍ट बनाने के लिए आप हल्‍दी और गर्म पानी के साथ ही विटामिन ई का भी उपयोग कर सकते हैं। इस मिश्रण को रात में सोने से पहले अपने मसूड़ों में लगाएं। अगली सुबह गर्म पानी से कुल्‍ला करें और अपने दांतों को साफ करें। नियिमत रूप से कुछ सप्ताह तक उपयोग करने पर हल्‍दी पायरिया के लक्षणों को दूर कर सकती है।
लौंग तेल
मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परेशानीयों को दूर करने में लौंग के तेल का उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है। पायरिया के लक्षणों को कम करने के लिए आप भी लौंग के तेल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप लौंग का तेल लें और रूई की मदद से प्रभावित दांतों और मसूड़ों में इस तेल से हल्‍की मालिश करें। फिर रूई को वहीं कुछ देर के लिए छोड़ दें। मुंह में अधिक थूक बनने पर कुछ कुछ देर में थूकते रहें। नियमित रूप से इस विधि को दिन में 2 बार करना आपके लिए फायदेमंद होता है।
पायरिया को जड़ से मिटाने का उपाय नीम
नीम का उपयोग पायरिया से छुटकारा पाने में सहायक होता है। नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो मसूड़ों को हानिकारक बैक्‍टीरिया के प्रभाव से बचाते हैं। इसके अलावा नियमित रूप से नीम की पत्तियों का उपयोग करने पर मुंह की बदबू जैसी समस्‍याओं से भी बचा जा सकता है। पायरिया का उपचार करने के लिए आप नीम की पत्तियों का रस निकालें और इसे मसूड़ों पर लगाएं। लगभग 5 मिनिट के बाद गुनगुने पानी से कुल्‍ला करें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक प्रतिदिन 2 बार नीम के रस का उपयोग करने पर आपको पायरिया से निजात मिल सकती है। इसके अलावा आप अपने दांतों को साफ करने के लिए नीम की दांतुन का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
घरेलू उपचार अमरूद
अमरूद का उपयोग पायरिया को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका हो सकता है। अमरूद में विटामिन सी की अच्‍छी मात्रा होती है जिसके कारण यह पीरियोडोंटाइटिस के लिए एक अच्‍छा उपाय माना जाता है। अमरूद एक एंटी-प्‍लाक (anti-plaque) एजेंट के रूप में काम करता है। साथ ही अमरूद में एंटी-इंफ्लामेटरी और एनाल्‍जेसिक गुण भी होते हैं जो मसूड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप अपने दैनिक आहार में अमरूद को शामिल कर सकते हैं।
विकल्‍प के रूप में आप अमरूद की कोमल पत्तियों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अमरूद की ताजी और कोमल पत्तियों को तोड़ें और इन्‍हें धो लें। फिर इन पत्तियों को अच्‍छी तरह से चबाएं और इसके रस को कुछ देर तक मुंह में रखने के बाद थूक दें। ऐसा करने से मसड़ों से होने वाले रक्‍तस्राव और मवाद आदि से राहत मिलती है।
घरेलू उपाय ऑयल पुलिंग
आयुर्वेद के अनुसार ऑयल पुलिंग करने और मसूड़ों की हल्‍की मालिश करने से मौजूद बैक्‍टीरिया को दूर किया जा सकता है। ये बैक्‍टीरिया पायरिया के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। पेरियोडोंटाइटिस के इलाज के लिए ऑयल पुलिंग के असरदार घरेलू नुस्‍खा है। इसके लिए आप अपने मुंह में कार्बनिक, अपरिष्‍कृत नारियल तेल या तिल के तेल को मुंह में लें और मुंह में चारो ओर घुमाएं। इस तेल को 15 से 20 मिनिट तक मुंह में रखने के बाद थूक दें। इस तेल को थूकने के बाद गर्म पानी से कुल्‍ला करें। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए आप सुबह ब्रश करने से पहले ऑयल पुलिंग का उपयोग करें।
काली मिर्च
आयुर्वेद के अनुसार काली मिर्च पायरिया की समस्‍या दूर करने में प्रभावी होती है। इसके औषधीय गुण दांतों और मसूड़ों पर पट्टिका और टैटार (plaque and tartar) से छुटकारा दिलाने और बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा काली मिर्च का प्रयोग मसूड़ों को स्‍वस्‍थ बनाने में भी सहायक होते हैं।
पायरिया का इलाज करने के लिए आप काली मिर्च को पीसकर पाउडर बना लें। इसके बाद नमक और काली मिर्च पाउडर की बराबर मात्रा लें और मंजन की तरह मसूड़ों पर इस पाउडर को लगाएं। इस मिश्रण से दिन में 2 से 3 बार हल्‍की मालिश या मंजन करें। ऐसा करने से आपको पायरिया की समस्या के उपचार में गति मिल सकती है।
आंवला
आंवला भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आप भी पायरिया को जड़ से मिटाने के लिए आंवला का उपयोग कर सकते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि पायरिया से ग्रसित दांतों पर आंवला पाउडर का उपयोग करने से दांतों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा आप विकल्‍प के रूप में आंवला के जूस का भी उपयोग कर सकते हैं। आंवले के रस का मॉउथवॉश के रूप में उपयोग करके पायरिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
ग्रीन टी
आप सौंदर्य लाभ और उम्र बढ़ने संबंधी लक्षणों को कम करने के लिए ग्रीन टी का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन दांतों में पायरिया की दवा के रूप में भी ग्रीन टी बहुत ही प्रभावी होती है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से पायरिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा ग्रीन टी का सेवन करने से दांतों पर मसूड़ों की पकड़ को भी मजबूत किया जा सकता है। जिससे रक्‍तस्राव जैसी समस्‍याओं को रोका जा सकता है। आप भी अपने मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने और पायरिया का उपचार करने के लिए ग्रीन टी का सेवन कर सकते हैं।
तुलसी
तुलसी का उपयोग औषधीय जड़ी बूटी के रूप में सदियों से किया जा रहा है। मसूड़ों से होने वाले रक्‍तस्राव को रोकने के लिए तुलसी सबसे अच्‍छा उपाय है। तुलसी में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जिसके कारण मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। तुलसी के पत्‍तों का उपयोग करने पर मसूड़ों और दांतों के दर्द, मवाद जैसी दांत संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर किया जा सकता है।
तुलसी के पत्‍तों का पेस्‍ट बनाने के लिए आप तुलसी की कुछ पत्तियां लें और सरसों के तेल के साथ पीसकर पेस्‍ट बना लें। इसके लिए आप तुलसी की सूखी पत्तियों का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस मिश्रण को धीरे-धीरे पायरिया प्रभावित दांतों में लगाएं और नरम ब्रश से हल्‍की मालिश करें। इसके अलावा आप तुलसी के पत्‍तों से बनी चाय का भी सेवन कर सकते हैं। इस तरह से पायरिया से बचने के घरेलू उपाय के रूप में आप तुलसी के पत्‍ते और तुलसी की चायका उपयोग कर सकते हैं।


सावधानी और उपाय 

पायरिया के इलाज के लिए आप पालक और गाजर के रस की बराबर मात्रा लें और मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सेवन करें।
विटामिन सी युक्‍त खाद्य पदार्थों का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन करें।
आवश्‍यक हो तो डॉक्टर की अनुमति से विटामिन डी वाले पूरक आहारों का सेवन करें।
अधिक मीठे और चीनी युक्‍त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें।
भोजन करने के बाद रेशेदार फलों और उत्‍पादों जैसे मूली, गाजर, अमरूद, सेब आदि का सेवन करें।
रात के भोजन के बार विशेष रूप से अपने दांतों को ब्रश करें।
दांतों की प्रतिदिन नियमित रूप से अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भोजन करने के बाद मध्यमा अंगुली से अच्छे मंजन द्वारा दांतों को साफ करें। नीम या बबूल की दातौन खूब चबाकर उससे ब्रश बनाकर दांत साफ करने चाहिए।
सरसों के तेल में नमक मिलाकर अंगुली से दांतों को इस प्रकार मलें कि मसूढ़ों की अच्‍छी तरह मालिश हो जाए।
शौच या लघुशंका के समय दांतों को अच्छी तरह से भींचकर बैठें। ऐसा करने से दांत सदैव स्वस्थ रहते हैं।
पालक, गाजर और गेहूं के जवारे का रस नित्य प्रति पिएं। यह अपने आप में स्वत: औ‍षधि का कार्य करता है।अजीर्ण और कब्ज न हो- यह ध्यान रखते हुए हल्का सुपाच्य भोजन लें। रात को सोते समय हर्रे खाकर गरम दूध पीयें। सुबह 2 ग्राम सूखे आंवले का चूर्ण पानी के साथ लें। मिर्च-मसाला, चाय-कॉफी का प्रयोग न करें।रात को सोते समय 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण जल के साथ तथा दिन में 2 बार अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन करें।
भोजन के बाद दांतों में फंसे रह गए अन्न के कण को नीम आदि की दंतखोदनी द्वारा निकाल लें।
जटामांसी 10 ग्राम, नीला थोथा 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, अजवाइन 2 ग्राम, अदरक सूखी 5 ग्राम, कपूर 1 ग्राम, सेंधा नमक 5 ग्राम तथा गेरू 10 ग्राम- इन वस्तुओं का समान मात्रा में महीन चूर्ण बनाकर रख लें। इससे दिन में 3 बार अंगुली से रगड़-रगड़कर देर तक अच्छी तरह से मंजन करें। यह मंजन पायरिया की अनुभूत औषधि है।
जामुन की छाल के काढ़े से दिन में कई बार कुल्ले करें।
नीम का तेल मसूढ़ों पर अंगुली से लगाकर कुछ मिनट रहने दें, फिर पानी से दांत साफ कर लें। सुबह-शाम पानी में नींबू का रस निचोड़कर पिएं।
फिटकरी को भूनकर पीस लें। इसका मंजन पायरिया में लाभप्रद है। फिटकरी के पानी का कुल्ला करें।



पुरुष बांझपन के आयुर्वेदिक उपचार -डॉ.आलोक


महिला नि: संतानता के अलावा नि:संतानता के जो कारण सामने आये है उसमे पुरुषों की सहभागिता एक तिहाई से भी अधिक है | समय के साथ पुरुष नि: संतानता को लोग स्वीकार भी करने लगे हैं |
गर्भधारण में असमर्थता का कारण पुरुष का होना उसे परेशान कर देता है। वह अपनी समस्या को बताने में सहज नहीं होते है साथ ही यह भी समझते है कि कोई इलाज नहीं है लेकिन पुरुष बांझपन के कई रूप हैं जिनका इलाज किया जा सकता है।

बांझपन हर 6 जोड़ों में से लगभग 1 को प्रभावित करता है. एक जोड़े को एक बांझपन इलाज किया जा सकता है जो एक वर्ष के दौरान गर्भधारण करने में असमर्थ रहे हैं. जब समस्या पुरुष साथी के साथ होती है, तो इसे पुरुष बांझपन के रूप में जाना जाता है. पुरुष बांझपन कारक सभी बांझपन के मामलों में लगभग 30% योगदान करते हैं और पुरुष बांझपन अकेले सभी बांझपन मामलों के लगभग पांचवें हिस्से के लिए खाते हैं.


पुरुषों में बांझपन के चार मुख्य कारण हैं:
एक हाइपोथैलेमिक या पिट्यूटरी डिसऑर्डर (1-2%)
गोनाड विकार (30-40%)
शुक्राणु परिवहन विकार (10-20%)
अज्ञात कारण (40-50%)

एक्सरसाइज करना सेहत और शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है इसमें कोई शक नहीं है, बल्कि कई सेहत समस्याओं से एक्सरसाइज आपको बचा सकती है। लेकिन कुछ मामलों में इसके नुकसान भी हो सकते हैं। जी हां, अत्यधिक एक्सरसाइज करना या स्टीरॉयड का सेवन आपकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। खास तौर से पुरुषों में यह प्रजनन क्षमता में कमी लाने के लिए भी जिम्मेदार हो सकता है।
पुरुष बांझपन उपचार की आयुर्वेदिक औषधि की जानकारी पुरुषों को यौन समस्या से बचा सकती है। बांझपन का नाम सुनते ही अक्‍सर लोगों का ध्‍यान महिला बांझपन की तरफ जाता है। जबकि ऐसा नहीं है बांझपन न केवल महिलाओं में नहीं बल्कि पुरुषों में भी होता है। लगभग 10 प्रतिशत दंपत्ति चिकित्‍सीय रूप से बांझ होते हैं। 40 प्रतिशत से अधिक पुरुष बांझपन का शिकार होते हैं जिनमें शुक्राणुओं का उचित विकास नहीं हो पता है। पुरुष बांझपन शारीरिक कमजोरी, पोषक तत्‍वों की कमी, शुक्राणु उत्‍पादक अंगों या वृषणों की चोट आदि के कारण हो सकती है। इसके अलावा कुछ स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं, संक्रमण और यौन संचारित रोग भी पुरुष बांझपन का कारण होते हैं। हालांकि ये समस्‍याएं स्‍थाई नहीं हैं। पुरुष बांझपन का उपचार औषधीय दवाओं और जड़ी बूटी से किया जा सकता है।
शारीरिक कमजोरी के के कारण पुरुषों में बांझपन की समस्‍या हो सकती है। हालांकि यह समस्‍या स्‍थाई नहीं हैं। लेकिन समय पर इसका इलाज नहीं किये जाने पर पुरुष बांझपन के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। आइए जाने पुरुष बांझपन के लक्षण क्‍या हो सकते हैं।
* इरेक्‍शन बनाए रखने में समस्‍या
किसी भी व्‍यक्ति को यौन संबंध बनाने के दौरान लिंग में पर्याप्‍त कड़ापन न रख पाना भी बांझपन के लक्षणों में शामिल है। क्‍योंकि यह स्थिति भी शरीर में मौजूद हार्मोन पर निर्भर करती है।


यौन इच्‍छा में बदलाव

किसी पुरुष की प्रजनन क्षमता उसके हार्मोन स्‍वास्‍थ्‍य पर निर्भर करती है। शरीर में यौन कमजोरी अक्‍सर हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है। यदि पुरुषों के शरीर सेक्‍स हार्मोन में कमी होती है तो यह पुरुष बांझपन के लक्षण हो सकते हैं।
* अंडकोष में दर्द या सूजन
ऐसे बहुत से कारण हैं जिनके कारण अंडकोष में दर्द या सूजन हो सकती है। लेकिन अंडकोष की सूजन पुरुष बांझपन का प्रमुख कारण हो सकती है।
* स्‍खलन के दौरान समस्‍याएं
पुरुषों को सेक्‍स करने और स्‍खलन के दौरान यदि किसी प्रकार की समस्‍या जैसे दर्द या जलन आदि की समस्‍या भी बांझपन को दर्शाती है। ऐसी स्थिति में पुरुषों को अपने डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाहिए।
* अंडकोष का छोटा होना
पुरुषों के शरीर में वृषण एक ऐसा अंग है जहां शुक्राणु होते हैं। इसलिए किसी भी पुरुष के स्‍वस्‍थ यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए वृषण का स्‍वस्‍थ होना अतिआवश्‍यक है। छोटे या दृढ़ अंडकोष किसी पुरुष में बांझपन के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
पुरुष बंध्यत्व के आयुर्वेदिक उपचार 

जिनसेंग
पुरुषों में बांझपन होने के दो प्रमुख कारण शुक्राणुओं की संख्‍या में कमी और कम गतिशीलता होती है। शुक्राणुओं की कम गतिशीलता का मतलब शुक्राणुओं का अंडाशय में अंडे तक पहुंचने में असमर्थता। पुरुष बांझपन की आयुर्वेदिक दवा के रूप में जिनसेंग का उपयोग किया जा सकता है। जिनसेंग में इन दोनों प्रकार की समस्‍याओं को दूर कर सकता है। पुरुषों के यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने के लिए जिनसेंग प्रभावी औषधीयों में से एक है। यह सेक्‍स ड्राइव बढ़ाने, यौन प्रदर्शन सुधारने, स्‍तंभन दोष को दूर करने और शुक्राणुओं की संख्‍या और गतिशीलता को उत्‍तेजित करने में सहायक होता है। पुरुषों के बांझपन संबंधी लक्षणों को कम करने के लिए जिनसेंग की दो किस्‍मों जिनमें एशियाइ और अमरिकी जिनसेंग का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
जिनसेंग का सेवन सेक्स ड्राइव बढ़ाएं, प्रदर्शन सुधारे, स्तंभन दोष दूर करे, स्पर्म काउंट बढ़ाना, शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार, स्खलित शुक्राणुओं को संरक्षित करना आदि शामिल हैं।
यौन शक्ति बढ़ाये ट्राइबुलस
आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों का कहना है कि एक स्‍वस्‍थ आहार और नियमित व्‍यायाम शरीर को हेल्‍दी रखने के साथ यौन स्‍वास्‍थ्‍य को भी बढ़ावा देता है। इन उपायों के साथ ट्राइबुलस (Tribulus) का सेवन करने से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्‍या और गतिशीलता में वृद्धि होती है। कुछ अध्‍ययनों से पता चलता है कि इस जड़ी बूटी के अर्क का सेवन पुरुषों को स्‍तंभन दोष और अन्‍य यौन समस्‍याओं से बचा सकता है। इसके अलावा ट्राइबुलस (Tribulus) जड़ी बूटी के लाभ पुरुषों और महिलाओं की कामेच्‍छा में वृद्धि करने भी सहायक होती है। पुरुषों के लिए इस जड़ी बूटी के अन्‍य लाभ में टेस्‍टोस्‍टेरोन के उत्‍पादन में वृद्धि भी शामिल हैं। इसे कभी-कभी प्राकृतिक रूप से कामोत्तेजक उत्पादों में मिलाया जाता है, जिसका इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है।


शिलाजीत

बहुत से लोग यौन कमजोरी को दूर करने के लिए शिलाजीत का सेवन करने की सलाह देते हैं। शिलाजीत एक चिपचिपा राल की तरह दिखाई देने वाला पदार्थ है। यह हिमालय के पहाड़ों में चट्टानों के बीच में से निकाला जाता है। शिलाजीत को यौन कमजोरी दूर करने वाली ज्ञात अन्‍य सभी औषधियों से अधिक प्रभावी माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शिलाजीत में 85 से अधिक आयनिक खनिज, विटामिन और फुलविक एसिड (fulvic acid) होते हैं। ये सभी घटक जीनिटोरिनरी सिस्‍टम (genitourinary system) के समग्र कार्य में सुधार करते हैं। इसके अलावा शिलाजीत का नियमित सेवन एनीमिया और अन्‍य यौन समस्‍याओं को रोकने में मदद करता है। यह पुरुष बांझपन के लक्षणों को कम करने की सबसे अच्‍छी आयुर्वेदिक औषधी में से एक है।
अश्वगंधा
अश्वगंधा एक अनुकूलनीय और ऊर्जा बढ़ाने वाली जड़ी बूटी है जो पुरुषों की सहनशक्ति को बढ़ाने में सहायक होती है। नियमित रूप से सेवन करने पर यह पुरुषों के यौन प्रदर्शन और प्रजनन क्षमता में भी सुधार करती है। अश्वगंधा एंडोक्राइन सिस्‍टम का समर्थन करता है और इसके बेहतर कामकाज को बेहतर बनाए रखती है। सेवन करने के दौरान अश्वगंधा पुरुषों के शरीर में हार्मोनल संतुलन को भी बढ़ता है। जिससे पुरुषों में कामेच्‍छा को बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही यह शुक्राणुओं की संख्‍या और गुणवत्‍ता में भी सुधार करता है। यदि आप भी अपने यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाना चाहते हैं तो अश्वगंधा का औषधीय उपयोग कर सकते हैं।
यौन कमजोरी और पुरुष बांझपन को दूर करने के लिए औषधीय जड़ी बूटीयां बहुत ही प्रभावी होती हैं। लेकिन इनके अलावा भी आप कुछ घरेलू उपचार और जीवनशैली में परिवर्तन कर यौन कमजोरी को दूर कर सकते हैं। आइए जाने पुरुष बांझपन दूर करने के घरेलू उपाय क्‍या हैं।
तनाव कम करें
पुरुषों के लिए अत्‍याधिक तनाव और थकान बांझपन का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में पुरुषों को तनाव प्रबंधन और जीवनशैली में कुछ परिवर्तन करने चाहिए। जिससे उनके समग्र स्‍वास्‍थ्‍य सहित यौन स्वास्‍थ्‍य को भी लाभ मिल सकता है। आप तनाव कम करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करें। इसके अलावा सुबह के समय जल्‍दी उठें, नियमित रूप से व्‍यायाम करें और अधिक मात्रा में मादक पदार्थों का सेवन करने से बचें। तनाव और चिंता को दूर कर आप अपने यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बना सकते हैं।
सावधानी-
जिन पुरुषों को प्रजनन संबंधी समस्‍याएं होती हैं उन्‍हें जामुन, नींम और विटेक्स बेरी (vitex berry) जैसे खाद्य पदार्थ और जड़ी बूटीयों का सेवन करने से बचना चाहिए। एक पशु अध्‍ययन के अनुसार इचिनेशिया, जिन्‍कगो और सेंट जॉन पौधों में ऐसे रसायन होते हैं जो शुक्राणुओं की गर्भाशय में अंडे तक पहुंचने की क्षमता को कम करते हैं। हालांकि यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि ऐसे ही परिणाम पुरुषों के लिए भी हैं या नहीं। लेकिन सावधानी के लिए बांझपन के उपचार के दौरान इन जड़ी बूटीयों का सेवन करने से बचना चाहिए।

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल अमृत औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि 

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार





22.8.19

टमाटर खाने के कमाल के स्वास्थ्य लाभ -डॉ.आलोक


टमाटर में संतृप्त वसा, कोलेस्ट्रॉल, कैलोरी और सोडियम स्वाभाविक रूप से कम होता है। टमाटर थियमिन, नियासिन, विटामिन बी -6, मैग्नीशियम, फास्फोरस और तांबा, भी प्रदान करता है, जो सभी अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। उन सबके ऊपर एक चम्‍मच टमाटर आपको देगा 2 ग्राम फाइबर, जो दिन भर में जितना फाइबर चाहिये उसका 7 प्रतिशत होगा। जो टमाटर में अपेक्षाकृत उच्च पानी भी होता है, जो उन्हें गरिष्ठ भोजन बनाता है।
सामान्यत: टमाटर सहित अधिक सब्जियां और फल खाने से उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, स्ट्रोक, और हृदय रोग से सुरक्षा मिलती है।
भारत में टमाटर का ज्यादातर व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। हालाँकि टमाटर का स्वाद अम्लीय (खट्टा) होता है, लेकिन यह शरीर में क्षारीय (खारी) प्रतिक्रियाओं को जन्म देता है। लाल-लाल टमाटर देखने में सुन्दर और खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होते हैं। शायद आप अभी तक टमाटर के फायदे नहीं जानते होगें लेकिन आज आप जानेगे टमाटर के फायदे और नुकसान के बारें में
इसके खट्टे स्वाद का कारण यह है कि इसमें साइट्रिक एसिड और मैलिक एसिड का पाया जाना है जिसके कारण यह एंटासिड के रूप में काम करता है। टमाटर में विटामिन ‘ए’ काफी मात्रा में पाया जाता है। यह आँखों के लिये बहुत लाभकारी है भारत में इसकी अधिक मात्रा मे खेती होती है इसलिए इसके उपलब्धता में कोई कठिनाई नहीं होती और हर जगह आसानी से मिल जाता है।
टमाटर को लाल रंग देने वाला तत्व लाइकोपीन, जो सेहत के लिए फायदों से भरा है, कच्चे टमाटर से अधिक पकने के बाद अधिक प्रभावी होता है। टमाटर त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी है। यह झुर्रियों को कम करता है और रोम छिद्रों को बड़ा करता है।


टमाटर के फायदे

मजबूत हड्डिया के लिए
टमाटर हड्डियो को मजबूत बनाता हैं. टमाटर में विटामिन K और कैल्शियम पाए जाते हैं जो की हड्डियो को मजबूत बनाने के साथ ही इनके रिपेयर करने में बहुत अच्छे होते हैं. टमाटर में विटामिन सी भी बहुत मात्रा में पाया जाता है और लाइकोपीन नामक एंटी-ऑक्सिडेंट ऑस्टियोपोरोसिस हड्डी की कमजोरी दूर करने का प्रभावी तरीका है।
कैंसर से बचाव
टमाटर प्राक्रतिक तरीके से कैंसर से लड़ता हैं. प्रॉस्टेट कैंसर, गला का कैंसर, पेट, स्तन कैंसर, कोलन और भी कई तरह के कैंसर के ख़तरे को कम कर देता हैं. टमाटर में मौज़ूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं. इसके लिए टमाटर में पाए जाने वाला लाइकोपिन जिम्बेदार होता है
हेल्दी स्किन के लिए
टमाटर का सेवन आपकी त्वचा को सुन्दर बना देता हैं. गाजर में पाए जाने वाला बीटा-केरोटीन इसमे भी बहुत मात्रा में पाया जाता हैं यह स्किन की झुर्रियो और लाइन्स को ख़त्म करने में मदद करता हैं.
इसके आलावा मुहासे या चेहरे पर दाग होने पर टमाटर के गुदे का इस्तेमाल कर इनसे छुटकारा पाया जा सकता है|
दृष्टि-
टमाटर आपकी दृष्टि में सुधार कर सकता है। टमाटर जो विटामिन ए प्रदान करता है, वो दृष्टि में सुधार और रतौंधी को रोकने में मदद कर सकता है। हाल के शोध से पता चला है कि, टमाटर लेने से धब्बेदार अध: विकृति, एक गंभीर और अपरिवर्तनीय आंख की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।
ब्लड शुगर को कम करने के लिए
टमाटर आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता हैं टमाटर में बहुत कम मात्रा में कार्बोहायड्रेट पाया जाता है जिससे उरिन में ग्लूकोस की मात्रा सही रहती है टमाटर खाने से गुर्दे और ब्लड प्रेशर भी सही रहते है ये दोनों सबसे जादा मधुमेह से प्रभावित होते है इसलिए मुधुमेह रोगियों को अपने आहार में इसे जरुर शामिल करना चाहिए अगर आप मधुमेह के साथ वजन कम करना चाहते है तो यह आपके लिए एक अच्छा तरीका हो सकता है
बालो के लिए
टमाटर खाने से आपके बाल शाइनी और हेल्दी बनते हैं. टमाटर में पाया जाने वाले विटामिन बालो को मजबूत और चमकदार बनाते हैं. बालो के लिए इसमें आयरन और विटामिन a पाया जाता है जो वालो को मजबूत करने के साथ वालो का गिरना भी कम करते है टमाटर उनमे जान डालकर नया जीवन प्रदान करता है आप अपने वालो से रुसी को दूर करने के लिए भी टमाटर का उपयोग कर सकते है
इसके लिए आपको बस शेम्पू के बाद टमाटर के रस को अपने वालो पर 5 मिनिट के लिए लगाना है और फिर पानी से धो लेना है एसा आप हफ्ते में दो बार कर सकते है इससे आपके बालो में से रुसी गायब हो जाएगी, इसका उपयोग नियमिन न करें वरना ये आपके वालो को सूखा और बेजान बना सकता है|


पुराना दर्द-

टमाटर पुराने दर्द को कम कर सकता है। अगर आप उन लाखों लोगों में से एक हैं, जिनको हल्का और मध्यम पुराना दर्द रहता है (गठिया या पीठ दर्द ), तो टमाटर दर्द को खत्म कर सकता है। टमाटर में उच्च बायोफ्लेवोनाइड और कैरोटीन होता है, जो प्रज्वलनरोधी कारक के रूप में जाना जाता है।
वजन घटाना -टमाटर आपको आपका वजन कम करने में मदद कर सकता है। अगर आप एक समझदार आहार और व्यायाम की योजना पर हैं, तो अपने रोजमर्रा के भोजन में बहुत सारा टमाटर शामिल करें। ये एक अच्छा नाश्ता बनाएंगे और सलाद, कैसरोल, सैंडविच और अन्य भोजन को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। क्‍योंकि टमाटर में ढेर सारा पानी और फाइबर होता है, इसीलिये वजन नियंत्रण करने वाले इसे 'फिलिंग फूड' कहते हैं, वह खाना जो जल्‍दी पेट भरते हैं, वो भी बिना कैलोरी या फैट बढ़ाये।|
उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए –
उच्च रक्तचाप का मुख्य कारण पोटेशियम की कमी होती है इसलिए टमाटर का सेवन हाई बी पी के लये लाभदायक होता है क्योकि इसमें पोटेशियम उच्च मात्रा में पाया जाता है यदि आप सोडियम का अधिक उपयोग करते है तो आपको उसे बेलेंस करने के लिए पोटेशियम भी लेना पड़ेगा इसके लिए आप टमाटर का एक कप जूस पिए यह आपकी देनिक आवश्यकता का 11% पोटेशियम को पूरा कर देगा अब तो आप समझ ही गए होगें की ह्रदय के रोगों में टमाटर का सेवन करना कितना लाभदायक हो सकता है
प्रेग्नेन्सी में
प्रेग्नेन्सी में टमाटर का सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता हैं. इसमे भरपूर मात्रा में विटामिन सी होता हैं. जो गर्भवती महिला के लिए बहुत ही ज़रूरी हैं. गर्भावस्था में स्त्रियों को टमाटर का दो सौ ग्राम रस रोजाना पीना चाहिए, इससे प्रेग्नेन्सी में खून की कमी दूर की जा सकती है|


बच्चों के विकास के लिए

बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए टमाटर बहुत ही फायदेमंद होता हैं. अगर पेट में कीड़े पैदा हो जाए तो सुबह खाली पेट टमाटर में काली मिर्च मिला कर खाने से फायदा होता हैं. अगर बच्चे को सूखा रोग हो जाए तो उसे रोजाना 1 ग्लास टमाटर का जूस पिलाने से बीमारी में आराम मिलता हैं.|
टमाटर खाने के तरीके
सलाद के रूप में टमाटर का सेवन: टमाटर को खाने के बहुत से तरीके हैं जिसमे से सलाद सबसे आसान तरीका है। ध्यान रहे जब भी आप सलाद या फिर ऐसे ही कच्चा टमाटर खाते हैं तो इसका ऊपर का छिलका ना हटायें, क्योकि इसकी उपरी त्वचा मै ही इसके सबसे ज्यादा तत्व पाए जाते हैं।
जूस के रूप में टमाटर का सेवन: आप अपने दिन की शुरुवात काला नमक सहित ताजा टमाटर के जूस को पीकर कर सकते हैं इससे आपके शरीर मे फुर्ती बानी रहेगी, लेकिन याद रहे कि टमाटर का जूस आप खाली पेट न लें।
टमाटर का सूप: 
आप टमाटर को हल्का सा उबाल कर उसे पीस लें और उसमे काली मिर्च डाल के उसका सूप बनाकर पियें यह बहुत ही स्वादिस्ट लगता है। और पोषक तत्वों से भरपूर होता है
सब्जी में टमाटर का उपयोग: आप सब्जी का स्वाद बढ़ाने के लिए उसमे टमाटर का उपयोग भी कर सकते हैं। और इसका उपयोग आप घर पर ही टमाटर की चटनी व सॉस बनाकर कर सकते है।


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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



नींबू के स्वास्थ्य लाभ -डॉ.आलोक


नींबू का उपयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में घरेलू उपाय के तौर पर सदियों से किया जाता रहा है। ताजगी से भरा यह नींबू, खाने का स्वाद बढ़ाने, शर्बत एवं सौंदर्य बढाने के लिए तो फायदेमंद है ही, स्वास्थ्य के लिए भी इसके लाभ किसी से कम नहीं है।
 इसके रस का इस्तेमाल जायकेदार व्यंजनों से लेकर कई तरह की रिफ्रेशिंग ड्रिंक्स बनाने के लिए किया जाता है। नींबू के फायदों को लेकर कई वैज्ञानिक शोध भी हो चुके हैं। इस लेख में हमारे साथ जानिए कि आपके स्वास्थ्य के लिए नींबू कितना फायदेमंद है और विभिन्न बीमारियों के लिए इसका इस्तेमाल किस प्रकार किया जा सकता है।
वजन घटाने के लिए
अगर आप मोटापे से परेशान हैं और वजन घटाने के लिए प्राकृतिक उपाय की तलाश में है, तो नींबू आपकी मदद कर सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, नींबू में मौजूद पॉलीफेनॉल्स बढ़ते मोटापे को नियंत्रित कर सकते हैं । शरीर में अतिरिक्त फैट के जमाव को रोकने के लिए ये पॉलीफेनॉल्स कारगर माने गए हैं।
एक अन्य अध्ययन में पाया गया है कि एक डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में नींबू शरीर से फैट को कम करने में मदद करता है। साथ ही हृदय रोग के जोखिम को भी कम करता है । इसके अलावा, नींबू को विटामिन-सी का भी अच्छा स्रोत माना गया है। वजन घटाने के लिए विटामिन-सी सबसे खास तत्व माना जाता है|


कैंसर

आपको जानकर हैरानी कि नींबू कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी रोकथाम का काम करता है। एक अध्ययन के अनुसार, नींबू जैसे सिट्रस फलों का सेवन करने से अग्नाशय के कैंसर (Pancreatic Cancer) से बचा जा सकता है । एक अन्य अध्ययन के अनुसार, नींबू में मौजूद फ्लेवोनोइड्स एंटीकैंसर के रूप में काम करते हैं
किडनी स्टोन
किडनी स्टोन को हटाने के लिए भी नींबू के फायदे देखे गए हैं। किडनी स्टोन (पथरी) एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें अपशिष्ट पदार्थ किडनी में जमने लगते है और ठोस होकर क्रिस्टल के रूप में विकसित हो जाते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड किडनी स्टोन को बनने से रोकता है । सिट्रिक एसिड किडनी स्टोन को तोड़ने और पेशाब के रास्ते पथरी को बाहर निकालने में मदद करता है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना आधा कप नींबू का रस पानी के साथ मिलाकर पीने से किडनी स्टोन के जोखिम से बचा सकता है|एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दो बार नित्य एक महीना पीने से पथरी पिघलकर निकल जाती है।
*बवासीर (पाइल्स) में रक्त आता हो तो नींबू की फांक में सेंधा नमक भरकर चूसने से रक्तस्राव बंद हो जाता है। हृदय स्वास्थ्य
आपको जानकर हैरानी होगी कि नींबू का रस हृदय को स्वस्थ रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। जैसा कि हमने बताया कि नींबू विटामिन-सी बड़ा स्रोत है और विटामिन-सी कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है । कुछ वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि विटामिन-सी रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम भी करता है, जो हृदय के लिए लाभकारी हो सकता है ।
नींबू जैसे सिट्रिक फल फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होते हैं, जो एथेरोस्क्लेरोसिस के उपचार में मदद करते हैं। एथेरोस्क्लेरोसिस एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें धमनी की दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों का निर्माण होने लगता है


बुखार

बुखार होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण प्रमुख हैं । यहां आपकी मदद नींबू कर सकता है। नींबू विटामिन-सी से समृद्ध होता है और इससे बैक्टीरिया व वायरस के कारण होने वाले संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है|
* एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी मिलाकर, घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है व बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
श्वसन स्वास्थ्य
श्वसन स्वास्थ्य के लिए भी नींबू के फायदे देखे जा सकते हैं। जैसा कि हमने बताया कि नींबू विटामिन-सी का बड़ा स्रोत है और विटामिन-सी निमोनिया जैसी गुर्दे की बीमारी पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है । एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार विटामिन-सी सर्दी और अपर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन (वायरल संक्रमण जो नाक, गले और वायुमार्ग को प्रभावित करता है) को भी ठीक करने का काम कर सकता है
पाचन स्वास्थ्य
नींबू के गुण पाचन स्वास्थ्य के लिए भी हैं। सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से पाचन में मदद मिलती है और कब्ज जैसी समस्या से निजात मिलती है। नींबू में मौजूद अम्लता (Acidity) हाइड्रोक्लोरिक एसिड के उत्पादन को उत्तेजित करती है, जिससे पाचन में सुधार आता है। नींबू अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण और शरीर को हाइड्रेट करने में मदद भी करता है, जिससे पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलने में मदद मिलती है|
लीवर
लीवर के लिए भी नींबू के फायदे देखे जा सकते हैं। नींबू एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध होता है, जो लीवर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का काम करता है। एक वैज्ञानिक शोध में एल्कहोल से प्रभावित लीवर पर नींबू की सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया देखी गई है|


मुंहासों के लिए

यहां भी नींबू में विटामिन-सी की अहम भूमिका देखी जा सकती है। विटामिन-सी एंटीइंफ्लेमेटरी गुण से समृद्ध होता है, जो मुंहासों और रोसासिया (त्वचा का लाल होना और पस से भरे दानें) जैसी त्वचा संबंधी परेशानियों को दूर कर सकता है 
*नींबू ज्ञान तंतुओं की उत्तेजना को शांत करता है। इससे हृदय की अधिक धड़कन सामान्य हो जाती है। उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है।
दांतों और मसूड़ों का दर्द
दांतों और मसूड़ों के दर्द के लिए भी नींबू के फायदे देखे गए हैं। यहां पर भी नींबू में मौजूद विटामिन-सी की भूमिका देखी जा सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार विटामिन-सी व्यस्कों में दांत निकालने के बाद होने वाले दर्द में निजात दिलाने में मदद कर सकता है|
*आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खांसी, श्वास व जुकाम में लाभ होता है। एनीमिया
एनिमिया एक गंभीर रक्त विकार है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से होता है। लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में आयरन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसकी पूर्ति नींबू के सेवन से की जा सकती है। नींबू एक सिट्रिस फल है, जो आयरन से भरपूर होता है |
रोग प्रतिरोधक क्षमता
नींबू का एक और महत्वपूर्ण काम है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना। इस गुण के लिए नींबू में मौजूद विटामिन-सी की तारीफ की जा सकती है। विटामिन-सी एक कारगर इम्यून बूस्टर के रूप में जाना जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शरीर को रोगों से लड़ने के लिए मजबूत बनाता है|
*रोजाना भोजन में नींबू का सेवन करने से विटामिन सी प्राप्त होता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही हर प्रकार के रोगों से आपको दूर रखने में मदद करता है।
त्वचा के रोग
त्वचा संबंधी गंभीर परेशानियों के लिए भी नींबू के गुण देखे गए हैं। एक्जिमा एक गंभीर त्वचा संबंधी बीमारी है, जिससे निजात पाने के लिए आप नींबू का उपचार कर सकते हैं। नींबू में विटामिन-ई गुण होता है, जो एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध होता है। यह एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों से निजात दिलाने में मदद कर सकता है


*गर्म पानी में नींबू निचोड़कर शहद के साथ पीने से न केवल पाचन शक्ति बढ़ती है, बल्कि मोटापा भी कम होता है। इसके अलावा यह भूख बढ़ाने और गैस से राहत दिलाने में भी लाभकारी है।

बालों के लिए
बालों के लिए भी नींबू के फायदे बहुत हैं। विटामिन-सी से समृद्ध नींबू बालों की झड़ने की समस्या से निजात दिलाने का काम करता है। इसके अलावा, नींबू आयरन व विटामिन-बी12 से भी समृद्ध होता है, जो बालों को समय से पहले सफेद होने से बचाता है 
*नींबू को दो भागों में काटकर उसे तवे पर रखकर सेंक लें। अब इस सिके भाग पर सेंधा नमक डालकर चूसें। इससे पित्त की दिक्कत खत्म होती है।
झुर्रियों के लिए
झुर्रियों को कम करने के लिए नींबू कारगर हो सकता है। नींबू में मौजूद विटामिन-सी की यहां सुरक्षात्मक भूमिका देखी जा सकती है। विटामिन-सी एक कारगर एंटीऑक्सीडेंट है और झुर्रियों को हटाकर एजिंग के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, विटामिन-सी कोलेजन को बढ़ाता है और सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा भी करता है|

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की अमृत औषधि 

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