18.7.19

करी पत्ता (मीठी नीम) के अनुपम स्वास्थ्य लाभ


मीठी नीम को कई जगह कड़ी पत्ते के नाम से भी जाना जाता है। भारत के कई राज्यों में इसका इस्तेमाल खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। ज्यादातर इसका इस्तेमाल साउथ की मशहूर डिश डोसा-सांबर में किया जाता है लेकिन हम आपको बता दें कि कड़ी पत्ता यानी मीठी नीम सिर्फ खाने के स्वाद दोगुना ही नहीं करती बल्कि स्वास्थ के लिए फायदेमंद भी होती है। इससे लीवर से जुड़ी बीमारियां, मघुमेह जैसे रोग भी दूर हो जाते है। इस बात से शायद बहुत कम लोग अवगत होंगे कि इससे वजन भी घटाया जा सकता है।
मीठी नीम या कड़ी पत्ता भारत में अपनी सुगंध और अनोखे स्वाद के कारण लोकप्रिय हैं। करी पत्ते या मीठे नीम के पत्तों का उपयोग विभिन्न भारतीय व्यंजनों में किया जाता है। वे आपके व्यंजनों में सुगंध और स्वाद जोड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं। मीठी नीम खाने के फायदे और स्वास्थ्य लाभ काफी अधिक हैं। यह पाचन तंत्र को ठीक रखती हैं, दस्त को रोकने में मदद करती हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करती हैं। आइये मीठी नीम के फायदे और नुकसान को विस्तार से जानते हैं।
करी पत्ते कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के साथ भोजन को प्राकृतिक रूप से स्वादिष्ट बनाने का मसाला एजेंट हैं। यह पत्ता हर डिश में एक विशेष स्वाद जोड़ता है। कढ़ी पकोड़े में करी पत्ते एक आवश्यक सामग्री है जो देश के कई हिस्सों में काफी लोकप्रिय है। करी पत्ते अपने विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट गुणों और डायरिया (दस्त) को नियंत्रित करने की क्षमता और कई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को दूर करने के लिए जाने जाते है। इसके अलावा करी पत्ते को कई व्यंजनों में जोड़ा जा सकता है। वजन कम करने के लिए भी करी पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विटामिन ए, बी, सी और बी-2 से भरपूर होते हैं।
करी पत्ते को आयरन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि इसमें कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं और यह लिवर की रक्षा करने के लिए भी जाना जाता है। यह संक्रमण से लड़ते हैं और जीवन शक्ति के साथ आपके बालों और त्वचा को निखार सकते हैं।


मीठी नीम के पोषक तत्व

मीठी नीम भारतीय खाना पकाने का एक अनिवार्य हिस्सा हैं जहाँ सभी व्यंजन मसाला या गार्निशिंग के लिए इसका उपयोग किया जाता है। करी पत्ते तांबा, खनिज, कैल्शियम, फॉस्फोरस, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम और लोहा जैसे आवश्यक पोषक तत्वों में बहुत समृद्ध हैं। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के विटामिन और अमीनो एसिड भी होते हैं। इच्छित उपयोग के आधार पर पत्तियों को सुखाया या तला जा सकता है, और मीठी नीम के पत्ते के ताजे रूप में भी उपयोग बहुत लोकप्रिय है।
मीठी नीम का उपयोग
एक मजबूत विशिष्ट गंध और तीखे स्वाद के अलावा, करी पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन बी 2, कैल्शियम और आयरन का एक समृद्ध स्रोत हैं। पेचिश, दस्त, मधुमेह, मॉर्निंग सिकनेस
(morning sickness) और मतली (nausea) के उपचार में भोजन के पत्तों में करी पत्ते को शामिल करना। करी पत्ते विषाक्त पदार्थों और शरीर की वसा को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं।
वजन कम करने में
करी पत्ते वजन घटाने में सहायता कर सकते हैं। यह आपको आश्चर्यजनक लग सकता है पर यह सच है। इसमें पाया जाने वाला कार्बोल अल्कलॉइड वजन बढ़ने से रोकने में आपकी मदद कर करता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस प्रकार वजन कम करने के लिए करी पत्ते का सेवन किया जा सकता है। इसके सेवन के लिए आप अपने भोजन में ताजा या सूखे करी पत्ते जोड़ सकते हैं। आप अपने सलाद में भी इसे शामिल कर सकते हैं। अपने स्वस्थ आहार के साथ करी पत्ते का सेवन करें और वजन कम करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।आपको बता दें कि कड़ी पत्तों का सेवन करने से शरीर में जमा फैट धीरे धीरे खत्म हो जाता है। शरीर में मौजूदा चर्बी भी आसानी से कम हो जाएगी। इसके आप इन पत्तियों को उबाल लें और फिर इसके पानी को रोज सुबह सेवन करें


पाचन में करें सुधार-

कड़ी पत्तों का नाम भले ही मीठी नीम है लेकिन ये खानें में थोड़े कड़वे लगते है लेकिन अगर आप अपनी पाचन क्रिया में सुधार लाना चाहते है तो इसका खाने का साथ सेवन करें। अपनी डाइट में शामिल करने से आपका तनाव भी दूर हो जाएगा।
तनाव कम करने के लिए
करी पत्ते का आवश्यक तेल तनाव को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद कर सकता है। फूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित एक शोध ने संकेत दिया है कि करी पत्ते एंटीऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्रोत होते हैं। इसमें उपस्थित विटामिन A, विटामिन B, विटामिन C, और विटामिन E जैसे विभिन्न विटामिन तनाव को कम करने में मदद करते है। इसलिए मीठी नीम अवसाद और चिंता से लड़ने के लिए भी जाना जाती है।
बालों के लिए
करी पत्ते बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करते हैं। करी पत्ते बालों के रोम को उत्तेजित करते हैं और सामान्य बाल वर्णक के साथ स्वस्थ किस्में के विकास को बढ़ावा देते हैं। करी पत्ते का उपयोग बालों के झड़ने और बालों के समय से पहले झड़ने से निपटने के लिए किया जा सकता है। करी पत्ता का रस रूसी और परतदार स्कैल्प से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है। इसके लिए तेल के साथ मीठी नीम के सूखे पत्तों का पाउडर मिला कर आपके बालों में लगाया जा सकता है। सफ़ेद बालों के लिए करी पत्ते का पेस्ट भी लगाया जा सकता है।
कब्ज और दस्त का इलाज
करी पत्ते का उपयोग पेट की खराबी के इलाज के लिए किया जा सकता है। शोध से पता चलता है कि करी पत्तों में मौजूद कार्बाज़ोल एल्कलॉइड्स (carbazole alkaloids) में एंटी-डायरियल (anti-diarrheal) गुण होते हैं। लैब चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चला है कि करी पत्ते से कार्बोजल के अर्क ने अरंडी के तेल से प्रेरित दस्त को काफी नियंत्रित करता है। आप सूखे करी पत्ते को पीसकर छाछ में मिला इसका सेवन कर सकते हैं। दस्त, कब्ज और पेचिश जैसी स्थितियों से छुटकारा पाने के लिए इसे खाली पेट में पिएं।
करी पत्ते के फायदे मधुमेह में
मीठी नीम या करी पत्ते रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करते हैं। वे अग्न्याशय के इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं और मुक्त कणों से होने वाले नुकसान को रोकते हैं। इसमें तांबा, लोहा, जस्ताऔर लोहे जैसे खनिजों के कारण होता है जो करी पत्ते इस कार्य को करते हैं। इस प्रकार मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए करी पत्ता सहायक हो सकता है।जो लोग मधुमेंह रोग से पीड़ित है उनके लिए ये बेहद फायदेमंद होता है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए रोज सुबह उठकर 3 महीने तक इसका लगातार सेवन करें। इसका सेवन करने से सिर्फ आपकी बीमारी ही छूमंतर नहीं होगी बल्कि डायबिटीज के दौरान जमा हुए मोटापे को भी कम करेगा। कड़ी पत्तों का सेवन आप पाउडर के रूप में कर सकते है या फिर इसको उबाल कर इसका पानी भी पी सकते हैं|


मितली से राहत

गर्भावस्था की पहली तिमाही में सुबह की बीमारी और मितली से राहत पाने के लिए महिलाएं करी पत्ते का विकल्प चुन सकती हैं। करी पत्ते पाचन को बढ़ाने और मतली, सुबह की बीमारी और उल्टी से राहत देने में मदद करते हैं।
बैक्टीरिया को खत्म करे
हमारे शरीर में अधिकांश बीमारी संक्रमणों के कारण कारण होती है। इस तरह के संक्रमणों के लिए करी पत्तों का उपयोग एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जा सकता है। करी पत्ते कार्बोराज अल्कलॉइड से भरे होते हैं जो जीवाणुरोधी, कैंसर रोधी और एंटी इन्फ्लामेट्री गुणों वाले यौगिक हैं। करी पत्ते में लिनालूल (Linalool) यौगिक भी होता है। यह यौगिक करी पत्ते को उनकी खुशबू देता है। इस यौगिक में बैक्टीरिया-मारने के गुण होते हैं। यह शरीर से हानिकारक मुक्त कणों को खत्म करने में भी मदद करता है।
याददाश्त में सुधार करे
अपने आहार में करी पत्ते को शामिल करने से आपकी याददाश्त पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है। यह अल्जाइमरजैसे ख़राब स्मृति विकारों से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है।
अच्छी आँखों की रोशनी के लिए
ऐसा माना जाता है कि करी पत्ते का आंखों की रोशनी पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। करी पत्ते में उच्च मात्रा में विटामिन A होता है, जो आंखों की रोशनी के लिए अच्छा है। ये मोतियाबिंद की शुरुआत को रोकते हैं। विटामिन A में कैरोटीनॉयड होता है जो कॉर्निया और आंख की सतह की रक्षा करता है। विटामिन ए की कमी से रतौंधी और यहां तक कि कुछ मामलों में दृष्टि की हानि भी हो सकती है।
घाव, जलन और त्वचा का फटना
करी पत्ते के पेस्ट को लगाने से घाव, चकत्ते, फोड़े और हल्के जलने पर रोगनिवारक प्रभाव पड़ता है। इन पत्तियों का पेस्ट किसी भी प्रकार के हानिकारक संक्रमण को रोकने और खत्म करने में मदद करता है। ताजा पेस्ट बनाने के लिए आप पत्तों के पीस कर इसमें थोड़ा सा पानी मिला सकते हैं। फिर इसे सीधे फोड़े पर, त्वचा की जलन, खरोंच और त्वचा के फटने पर लगा सकते हैं। अच्छे परिणामों के लिए पेस्ट को रात भर के लिए लगा कर छोड़ दें। करी पत्तों में उपस्थित कार्बाज़ोल एल्कालॉइड यौगिक घाव भरने की प्रक्रिया को गति देता है। करी पत्ता त्वचा की सूजन, फोड़े और जलने पर एक समान प्रभाव पड़ता है।




15.7.19

घर पर प्रोटीन शेक बनाने की विधि


अगर आप बॉडी बनाने की सोच रहे है अगर आप लोग बहुत मेहनत करने के बाद भी आपकी बॉडी नहीं बन पा रही है या आप लोग बहुत व्यायाम करने के बाद भी आपकी बॉडी नहीं बन पा रही है तो सबसे पहले आप प्रोटीन शेक का सेवन करना शुरू करे क्योकि आप चाहे जितनी व्यायाम कर ले जब तक आपका डाइट प्लान में बदलाव नहीं करोगे तब तक आपकी बॉडी बनना बहुत मुश्किल हो सकता है आजकल के बॉडी बनाने के लिये कई प्रकार के मल्टीविटामिन टेबलेट - कैप्सूल - तेल - शेक आदि का उपयोग करते है लेकिन बाजार मे उपलब्द इन चीजों में भारी मिलावट देखने को मिलती है जिसका नतीजा हमारे शरीर में कई प्रकार के इन्फ़ेक्सन हो जाते है जैसे - आपके शरीर में सूजन होना - शरीर में दाग या चेहरे पर पिम्पल्स होना - टेबलेट या कैप्सूल लेते समय उल्टी या चक्कर आना आदि कारण हो सकते है
क्‍या आप मसल्स बनाने के और मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए प्रोटीन शेक बनाने का तरीका खोज रहें हैं। प्रोटीन शेक शब्‍द सुनते ही बाजार में मिलने वाले प्रोटीन प्रोडक्‍ट की तरफ आपका ध्‍यान चला जाता है। लेकिन प्रोटीन शेक बनाने का तरीका बहुत ही आसान है जिसे आप अपने घर में ही तैयार कर सकते हैं। इस लेख में आपको होममेड प्रोटीन शेक बनाने की विधि बताते हैं-
एक उत्‍कृष्‍ट शेक पानी या दूध के साथ कुछ प्रोटीन पाउडर को मिलाकर तैयार किया जाता है। लेकिन प्रोटीन-पैक तरल पदार्थ की बढ़ती लोकप्रियता के कारण अब इनके बहुत से विकल्‍प उपलब्‍ध हैं। अधिकांश लोग जो जिम जाते हैं वे प्रोटीन पाउडर का उपभोग करते हैं। पौष्टिक ड्राई फूड से तैयार प्रोटीन शेक आमतौर पर अधिक स्‍वादिष्‍ट होते हैं। लेकिन यदि इन्‍हें ताजे फलों और चॉकलेट आदि मिलाकर बनाया जाता है तो इनमें चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है। जो भी हो प्रोटीन शेक आपके दुबले शरीर का वजन बढ़ाने और मजबूत करने में सहायक होते हैं।
आप अपने शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए कई प्रकार के आहारों का सेवन करते हैं। इसी तरह से आप इन सभी आहारों की पूर्ति करने और शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रोटीन शेक का उपभोग कर सकते हैं। यह आपकी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने के साथ ही आपकी ऊर्जा में भी वृद्धि कर सकता है। इसके लिए आप बाजार से कुछ प्रोटीन शेक खरीद सकते हैं। लेकिन ये सभी लोगों के लिए संभव नहीं हैं। क्‍योंकि एक तो यह महंगे होते हैं साथ ही इनमें कुछ रासायनिक प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए आप अपने घर में ही कुछ प्रोटीन शेक बना सकते हैं जो आपके फायदेमंद होते हैं साथ ही इनके कोई दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं।
बादाम, नारियल प्रोटीन शेक
आपके शरीर के लिए प्रोटीन का एक अच्‍छा विकल्‍प बादाम हो सकता है। क्‍योंकि बादाम में प्रोटीन की अच्‍छी मात्रा होती है। बादाम प्रोटीन शेक बनाने के लिए लगभग 20 बादाम का उपयोग किया जा सकता है। कयोंकि 20 बादाम में लगभग 5 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके अलावा दूध भी प्रोटीन का अच्‍छा स्रोत माना जाता है। बादाम, नारियल प्रोटीन शेक बनाने के लिए आपको निम्‍न सामग्री की आवश्‍यकता होती है :
20 बादाम, ½ कप सूखे नारियल, 2 ½ कप पानी, 1 चम्‍मच दालचीनी पाउडर, 1 चम्‍मच शहद, 2 चम्‍मच पिसा हुआ अलसी पाउडर, 2 कप दूध ।
बादाम, नारियल प्रोटीन शेक बनाने की विधि: 
बादाम और नारियल को रात में पानी में भिगो दें। सुबह इन्‍हें पानी से निकालें और अच्‍छी तरह से पीसें। इस मिश्रण को दूध में मिलाएं। इन्‍हें अच्‍छी तरह से हिलाकर मिलाने के बाद इसमें दालचीनी पाउडर, अलसी पाउडर और शहद मिलाएं। आपका प्रोटीन शेक तैयार है।
काजू चॉकलेट प्रोटीन शेक
सर्वश्रेष्‍ठ प्रोटीन व्‍यंजनों में काजू चॉकलेट प्रोटीन शेक का प्रमुख स्‍थान है। क्‍योंकि इस प्रोटीन शेक का सेवन करने पर 16.35 ग्राम प्रोटीन प्राप्‍त किया जा सकता है। इस प्रोटीन शेक का उपयोग आप सुबह के नाश्‍ता के रूप में भी कर सकते हैं। चूंकि इसमें काजू होता है इसलिए इससे अधिक मात्रा में कैलोरी प्राप्‍त की जा सकती है। काजू चॉकलेट प्रोटीन शेक इस प्रकार बनाया जाता है।
इसे बनाने के लिए 1 केला, 1 कप पूर्ण वसा वाला दूध, 2-3 काजू, 2 चम्‍मच नारियल पाउडर, 2 चम्‍मच चॉकलेट की आवश्‍यकता होती है।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: आप इन सभी अवयवों को ब्‍लेंडर की सहायता से मिलाएं। आपको 1 गाढ़ा तरल पेय प्राप्त होगा। आप इस पेय पदार्थ को गिलास में लें और आनंद उठाये। आपका प्रोटीन शेक तैयार है।
ब्‍लूबेरी और केला प्रोटीन शेक
शरीर को अतिरिक्‍त ऊर्जा दिलाने के लिए अक्‍सर केला खाने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इसमे प्रोटीन की सबसे अधिक मात्रा होती है। इसके अलावा ब्‍लूबेरी एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन सी से भरा होता है। आप इस ऊर्जावान प्रोटीन शेक को बनाने के लिए निम्‍न सामग्री का उपयोग कर सकते हैं :
1 कप ब्‍लूबेरी, 1 केला, 2 चम्‍मच बादाम मक्‍खन, 1 कप दही।
इस प्रोटीन शेक को बनाने के लिए मिक्‍सी की सहायता से इन सभी अवयवों को अच्‍छी तरह से पीस लें। आप इसे कुछ पतला करने के लिए दूध भी मिला सकते हैं यदि आवश्‍यकता है तो। आप इस शेक को किसी गिलास में खाली करें। आपके सेवन के लिए प्रोटीन शेक तैयार है। यह न केवल आपकी मांसपेशियों को ताकत देगा बल्कि व्‍यायाम के बाद आपको ऊर्जा भी दिलायेगा।
चॉकलेट प्रोटीन शेक
यह प्रोटीन शेक चॉकलेट प्रेमियों के लिए बहुत ही अच्‍छा होता है। इसका स्‍वाद मीठा होता है (लेकिन ध्‍यान दें कि ज्‍यादा मीठा प्रोटीन शेक का सेवन न करें)। इसके अलावा यह सुगंधित और त्‍वरित मूड बूस्‍टर होता है। इस प्रोटीन शेक का सेवन करने पर आप 23.6 ग्राम प्रोटीन प्राप्‍त कर सकते हैं। इसे तैयार करने क लिए आपको चाहिए :
1 कटा हुआ सेब, 1 बड़ा चम्‍मच बादाम मक्‍खन, 1 बड़ा चम्‍मच चॉकलेट, 1 बड़ा चम्‍मच नारियल पाउडर, 1 कप दूध, ½ कप दही, 2 खजूर आदि।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: कटे हुए सेब, खजूर, दूध, दही, नारियल पाउडर और बादाम मक्‍खन को ब्‍लेंडर में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को किसी गिलास में खाली करें और इसमें चॉकलेट डालकर मिलाये। आपका चॉकलेट प्रोटीन शेक तैयार है। आप इसका उपभोग कर सकते हैं।
सत्‍तू का घरेलू प्रोटीन शेक
भुने हुए चने के आटे को सत्‍तू कहते हैं। इसे भारत में बहुत ही पसंद किया जाता है साथ ही यह ऊर्जा प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा साधन हो सकता है। इसे गरीब आदमी का भोजन के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन यह पर्याप्‍त मात्रा में प्रोटीन उपलब्‍ध करा सकता है। आप इस प्रोटीन शेक को घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए :
4 चम्‍मच सत्‍तू पाउडर, आधा नींबू का रस, 2 चम्‍मच कटा हुआ धनिया, 1/2 चम्‍मच भुना हुआ जीरा पाउडर, स्‍वाद अनुसार नमक और 1 कप पानी।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: इसे बनाने के लिए सत्‍तू, भुना हुआ जीरा पाउडर और कटा हुआ धनियां मिलाएं। इसे हिलाते हुए धीरे-धीरे पानी मिलाएं। ध्‍यान रखें कि इसमे किसी किसी प्रकार की गांठ न बचे। अब इस गाढ़े पेस्‍ट में 1 गिलास पानी डालें और नींबू के रस को निचोड़ें। आपका प्रोटीन शेक तैयार है। आप इसे हिलाते हुए पी सकते हैं। यह आपको उच्‍च ऊर्जा दिलाने में मदद कर सकता है।
कोकोनट घरेलू प्रोटीन शेक
बादाम और नारियल दो ऐसे उत्‍पाद हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। इनको 1 कप दूध के साथ मिलाकर सेवन किया जा सकता है। यह बहुत ही स्‍वादिष्‍ट और पोष्टिक होते हैं।
इस प्रोटीन शेक को बनाने के लिए आपको 10 बादाम, 1 कप दूध या बादाम दूध, 1 चम्‍मच नारियल पाउडर, 1 चम्मच वेनिला का रस, ¼ काजू दूध, 2 खजूर आदि की आवश्‍यकता होती है।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: बादाम, नारियल, दूध और खजूर को ब्‍लेंडर की सहायता से मिलाएं। इसे एक गिलास में खाली करें और इसमें काजू दूध, कोको पाउडर, और वेनिला रस को मिलाये। आपके सेवन के लिए कोकोनट प्रोटीन शेक तैयार है।
मटर प्रोटीन शेक
आप जानते हैं कि मटर हमारे लिए कितना फायदेमंद होता है। यह डेयरी मुक्‍त प्रोटीन उपलब्‍ध कराता है। आप इसके साथ ब्‍लूबेरी या स्‍ट्रॉबेरी का उपयोग कर सकते हैं। इस प्रोटीन शेक बनाने के लिए आपको :
1 ½ चम्‍मच मटर , 1 कप बादाम दूध, ½ कप स्‍ट्रॉबेरी, जायफल पाउडर 1 चुटकी और थोड़ा सा गुड चाहिए।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: आप इन सभी को अच्‍छी तरह मिलाने के लिए ब्‍लेंडर की मदद ले सकते हैं। अच्‍छी तरह से ब्‍लेंड करने के बाद आप इसे किसी गिलास में खाली करें और इसमें कुछ बर्फ के क्‍यूब्‍स डालें। आपका मटर प्रोटीन शेक तैयार है।
मूंगफली और केला प्रोटीन शेक
यह एक ऐसा प्रोटीन शेक है जो आपको लगभग 43.5 ग्राम प्रोटीन उपलब्‍ध करा सकता है। आप व्‍यायाम के बाद शरीर की थकावट को दूर करने और ऊर्जा प्रापत करने के लिए इस प्रोटीन शेक का उपभोग कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए निम्‍न खाद्यों की आवश्‍यकता होती है :
2 मध्‍यम आकार के केले, 2 चम्‍मच मूंगफली का मक्‍खन, 2 कप दही, 100 मिलीलीटर पूर्ण वसा वाला दूध, 1 बड़ा चम्‍मच चिया बीज और नारियल पाउडर।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: प्रोटीन शेक बनाने के लिए एक ब्‍लेंडर में केला, दही, दूध और मूंगफली मक्‍खन को मिलाये। ब्‍लेंडर में मिश्रण को अच्‍छी तरह से मिलाने के बाद इसमें ऊपर से चिया बीज और नारियल पाउडर को छिड़कें। आपका प्रोटीन शेक तैयार है। आप इसका आनंद उठा सकते हैं यह बहुत ही स्‍वादिष्‍ट और पौष्टिक भी होता है।
मसल्स बनाने के आम-बादाम दूध प्रोटीन शेक
यह प्रोटीन शेक कितना स्‍वादिष्‍ट हो सकता है यह बताने की आवश्‍यकता नहीं है। यह एक ऐसा प्रोटीन पेय है जो आपको व्‍यायाम के बाद ऊर्जा दिलाने में मदद कर सकता है। क्‍योंकि आम मे कार्बोस की अच्‍छी मात्रा होती है। ये हमें ऊर्जा दिलाने में सहायक होते हैं। इस प्रोटीन शेक को बनाने के लिए आपको चाहिए :
1 कप कटा हुआ पका आम, 1 कप बादाम दूध, 1 बड़ा चम्‍मच चिया बीज, ½ कप ठंडा दही।
प्रोटीन शेक बनाने का तरीका: कटे हुए आम, बादाम दूध और ठंडे दही को ब्‍लेंडर की सहायता से मिलाएं। इस मिश्रण को 1 गिलास में खाली करें और पीने से पहले चिया बीज ऊपर से डालें। आपका मैगों प्रोटीन शेक तैयार हैं।

11.7.19

सहजन(मोरिंगा) की पत्तियों के पावडर के स्वास्थ्य लाभ


सहजन लम्बी फलियों वाली एक सब्जी का पेड़ है, जोकि भारत और दुनिया भर में उगाया जाता है. विज्ञान ने प्रमाणित किया है कि इस पेड़ का हर अंग स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. सहजन को अंग्रेजी में Moringa (मोरिंगा) या Drumstick tree कहते हैं. ज्यादातर भारतीय सहजन की फली को सब्जी व अन्य भोजन बनाने में करते हैं.
मोरिंगा या सहजन एक प्रकार की खाद्य सब्‍जी है जो विशेष रूप से दक्षिण भारतीय भोजन में बहुत ही लोकप्रिय है। सहजन के आयुर्वेदिक गुण होने के कारण इसे सुपर फूड के रूप में उपभोग किया जाता है। मोरिंगा पाउडर के फायदे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। हालांकि मोरिंगा पेड़ के पत्‍ते, फूल, फल और छाल आदि सभी का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। 
सहजन की सूखी पत्तियों के 100 ग्राम पाउडर में दूध से 17 गुना अधिक कैल्शियम और पालक से 25 गुना अधिक आयरन होता है. इसमें गाजर से 10 गुना अधिक बीटा-कैरोटीन होता है, जोकि आँखों, स्किन और रोगप्रतिरोधक तंत्र के लिए बहुत लाभदायक है. सहजन में केले से 3 गुना अधिक पोटैशियम और संतरे से 7 गुना अधिक विटामिन C होता है.
यह पत्तियाँ प्रोटीन का भी बेहतरीन स्रोत हैं. एक कप ताजी पत्तियों में 2 ग्राम प्रोटीन होता है. यह प्रोटीन किसी भी प्रकार से मांसाहारी स्रोतों से मिले प्रोटीन से कम नहीं है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक एमिनो एसिड्स पाए जाते हैं.

सहजन का पाउडर मारिंगा ओलेइफेरा (Moringa oleifera) पेड़ से बनाया जाता है। यह पेड़ अब तक के ज्ञात पेड़ों में सबसे अधिक पौष्टिक और औषधीय गुणों वाला है। इस पेड़ के अधिकांश औषधीय गुण इसकी पत्तियों में केंद्रित हैं। मोरिंगा पाउडर सहजन के पेड़ की पत्तियों से बनाया जाता है। सहजन के पत्‍तों का पाउडर गहरे हरे रंग का होता है जिसमें सहजन की पर्याप्‍त गंध होती है। सहजन का पाउडर बनाने के लिए इसकी पत्तियों को कम तापमान में छाये में सुखाया जाता है। जिससे पौधे के ऊतकों को एक महीन चूर्ण में बदला जा सके। इसके बाद इस पाउडर की अशुद्धियों को दूर कर इन्‍हें कैप्‍सूल आदि बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि एक बार पैक करने के बाद, यह पाउडर कई महीनों तक ताजा रहता है, विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट, क्लोरोफिल और पूर्ण अमीनो-एसिड के पोषण मूल्य को बरकरार रखता है। आइए जाने सहजन में मौजूद पोषक तत्‍व क्‍या हैं।
सहजन पाउडर के पोषक तत्‍व
सहजन के पोषक तत्‍व और औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग आयुर्वेद में प्रमुख रूप से किया जाता है। सहजन के पाउडर में विभिन्‍न प्रकार के विटामिन, खनिज पदार्थ, एंटीऑक्‍सीडेंट, क्‍लोरोफिल और पूर्ण अमीनो-एसिड की अच्‍छी मात्रा होती है। मोरिंगा पाउडर में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और विटामिन की भरपूर मात्रा पायी जाती है।
सहजन की सूखी पत्तियों के पाउडर को ताजी पत्तियों की अपेक्षा बहुत अधिक पसंद किया जाता है। शुद्ध और जैविक होने के कारण सहजन के पाउडर का सेवन करने से कोई गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं।


सहजन पेड़ के उपयोगी भाग

सहजन पेड़ के फल का खाद्य सब्‍जी के रूप में सबसे अधिक उपयोग होता है। हालांकि इस पेड़ के औषधीय गुण सबसे अधिक इसकी पत्तियों में होते हैं। सामान्‍य रूप से सहजन के पेड़ के लगभग सभी हिस्‍सों में औषधीय गुण होते हैं जिनका उपयोग आप कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। सहजन पेड़ के उपयोगी भाग में जड़, छाल, सहजन के फल, सहजन के बीज, सहजन की पत्तियां, फूल और पेड़ के अर्क आदि हैं जिनका औषधीय उपयोग होता है।
सहजन पाउडर के फायदे और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
इस सुपर फूड के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ बहुत अधिक होते हैं। हालांकि यह खाद्य रूप में बहुत ही लोकप्रिय है लेकिन इससे प्राप्त स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की की जानकारी लोगों को बहुत कम है। सहजन के पाउडर में लगभग 20 प्रकार के अमीनो-एसिड, 46 एंटीऑक्‍सीडेंट, 36 एंटीइंफ्लामेटरी यौगिक और 90 से अधिक पोषक तत्‍व होते हैं। जिसके कारण यह सबसे अच्‍छा पोषण पूरक में से एक माना जाता है। सहजन के पाउडर में आयरन, कैल्शियम, और विटामिन A, B, B1, B2, B3, B6, C, E के साथ ही मैक्रो खनिज (macro minerals), ट्रेस खनिज और फाइटोन्‍यूट्रिएंट (trace minerals and phytonutrients) जैसे खनिजों की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा यह उच्‍च गुणवत्‍ता वाले प्रोटीन और फाइबर में भी समृद्ध होते हैं।
सहजन पाउडर के फायदे मधुमेह के लिए –
डायबिटीज रोगी के लिए सहजन का पाउडर बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ रक्‍त में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को सामान्‍य रखने में सहायक होते हैं। मधुमेह के लक्षणों को कम करने के लिए रोगी को सहजन से बने कैप्‍सूल या सहजन पाउडर का नियमित सेवन करना चाहिए। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह उच्‍च रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में प्रभावी होता है। यदि आप भी मधुमेह रोगी हैं तो सहजन के पाउडर से बने पेय को अपने दैनिक आहार में शामिल करें।
*सहजन के फूलों की चाय (Moringa flower tea) न्यूट्रीशनल गुणों से भरपूर होती है. यह चाय यूरिन इन्फेक्शन, सर्दी-जुकाम ठीक करती है. सहजन के फूल सलाद के रूप में भी खाए जाते हैं. सहजन के इतने फायदे हैं कि गिनती कम पड़ जाये. सहजन अनिद्रा, अस्थमा, हाइपरटेंशन, Rheumatoid आर्थराइटिस, एनीमिया, आंत का अल्सर भी ठीक करता है और घाव जल्दी भरता है. दिमागी स्वास्थ्य के लिए सहजन लाजवाब है. सहजन डिप्रेशन, बेचैनी, थकान, भूलने की बीमारी ठीक करता है.
सहजन पाउडर खाने के फायदे रक्‍तचाप के लिए
नियमित रूप से सहजन पाउडर खाने के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप रोगी के लिए अच्‍छे होते हैं। क्‍योंकि यह उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों को कम करने और नींद संबंधी समस्‍या को दूर करने में प्रभावी माना जाता है। सहजन के पाउडर में मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ रक्‍तचाप को नियंत्रित करने और उच्‍च रक्‍तचाप को निम्‍न स्‍तर पर संतुलित करने में सहायक होते हैं। यदि आप भी उच्‍च रक्‍तचाप रोगी हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के पाउडर को शामिल कर लक्षणों को कम कर सकते हैं।
सहजन चूर्ण के फायदे पाचन के लिए
पाचन और आंत संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए सहजन का पाउडर बहुत ही प्रभावी होता है। मोरिंगा पाउउर में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो आपके पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा सहजन की पत्तियों में पेट साफ करने वाले रेचक (laxative) प्रभाव भी होते हैं। जिसके कारण यह पेट में मौजूद विषाक्‍तता को आसानी से दूर कर सकते हैं। सहजन का चूर्ण खाने के फायदे विशेष रूप से कब्‍ज रोगी के लिए होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पेट के अल्‍सर और अन्‍य पेट संबंधी संक्रमण का प्रभावी रूप से इलाज करते हैं। यदि आप भी अपने पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखना और पेट संबंधी संक्रमण से बचना चाहते हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के चूर्ण को शामिल करें।


मोरिंगा पाउडर खाने के लाभ वजन कम करे

जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए सहजन पाउडर अच्‍छा विकल्‍प है। सहजन पाउडर के औषधीय गुण वजन कम करने में सहायक होते हैं। मोरिंगा पाउडर में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो आपके पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखता है साथ ही यह आपकी भूख को भी नियंत्रित करता है। जिससे आपको बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो जाती है। इसक अलावा सहजन की पत्तियों में क्‍लोरोजेनिक एसिड नामक एक एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त वसा को बर्न करने में सहायक होता है। साथ ही यह रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में भी प्रभावी होता है। यदि आप भी अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो अन्‍य उपायो के साथ ही सहजन के पाउडर का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।
मोरिंगा पाउडर के लाभ कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से सहजन के पाउडर का सेवन करना शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देता है। यह एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल के सतर को कम करने और रक्त के थक्‍कों के गठन को भी प्रभावी रूप से कम कर सकता है। शरीर में उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा आपकी कई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। आप भी अपने शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए मोरिंगा पाउडर के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
मोरिंगा पाउडर का उपयोग विषाक्‍तता दूर करे
सहजन के पाउडर में डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। जिसके कारण इसका उपयोग सामान्‍य रूप से पानी को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। आप अपने शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को दूर करने के लिए भी सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा मोरिंगा पाउडर में कौयगुलांट (coagulant) गुण भी होते हैं जो संक्रामक बैक्‍टीरिया और रोगाणुओं को दूर करने में प्रभावी होते हैं। आप भी अपने शरीर को संक्रामक प्रभाव से बचाने और विषाक्‍तता को दूर करने के लिए सहजन के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।
सहजन पाउडर के लाभ लीवर के लिए –
सहजन के फूल और पत्तियों में पॉलीफेनोल की उच्‍च मात्रा होती है जो ऑक्‍सीकरण, विषाक्‍तता और क्षति के खिलाफ लीवर की रक्षा करते हैं। सहजन के गुण जिगर की क्षति और फाइब्रोसिस को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा इसके अन्‍य पोषक तत्‍व एंजाइम को सामान्‍य स्‍तर में बनाए रखने में सहायक होते हैं जिससे ऑक्‍सीडेटिव तनाव कम होता है और यकृत में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। यदि आप भी अपने लीवर को स्‍वस्‍थ रखना चाहते हैं तो नियमित आहार में सहजन पाउडर को शामिल कर सकते हैं। यह लीवर को स्‍वस्‍थ रखने और लीवर संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
गर्भावस्‍था में फायदेमंद सहजन पाउडर – 
स्‍तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं के लिए सहजन पाउडर बहुत ही उपयोगी होता है। क्योंकि इस स्थिति में महिलाओं को अतिरिक्‍त पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। इस दौरान गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को नियमित रूप से सहजन के पाउडर का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि यह उनके शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी को दूर करता है।
सहजन पाउडर के गुण स्‍टैमिना बढ़ाये
विटामिन, खनिज पदार्थ, एंटीऑक्‍सीडेंट और फाइटोन्‍यूट्रिएंट की उच्‍च मात्रा में होती है। जिसके कारण सहजन पाउडर आपकी ऊर्जा और सहनशक्ति को बढ़ाने के साथ ही एकाग्रता (concentration) को बढ़ाने में सहायक होता है। आप अपने बच्‍चों की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए सहजन के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सहजन का पाउडर एथलीट और व्‍यायाम करने वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद होता है। क्‍योंकि यह परिश्रम के दौरान खोई हुई ऊर्जा को फिर से दिलाने में सहायक होता है। यदि आप भी शारीरिक कमजोरी और थकान का अनुभव करते हैं तो सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल करें। यह आपकी एनर्जी बढ़ाने में सहायक होता है।
सहजन पाउडर के लाभ मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
आप अपने मस्तिष्‍क स्‍वासथ्‍य को बढ़ावा देने के लिए मोरिंगा पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य और संज्ञानात्‍मक कार्य को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा यदि किसी व्‍यक्ति को अल्‍जाइमर के शुरुआती लक्षण होते हैं तब यह उनके लिए बहुत ही प्रभावी औषधी मानी जाती है। इसमें मौजूद विटामिन ई और सी ऑक्‍सीकरण को रोकते हैं जो मस्तिष्‍क को नुकसान पहुंचा सकता है। इस तरह से आप अपने मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ रखने के लिए भी सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल अनिद्रा दूर करे
मोरिंगा पाउडर अनिद्रा या नींद की कमी संबंधी समस्‍याओं का घरेलू उपचार माना जाता है। सहजन के पाउडर में अमीनो एसिड ट्रिप्‍टोफैन (tryptophan) होता है। यह घटक न्‍यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन और मेलाटोनिन (serotonin and melatonin) हार्मोन के उत्‍पादन को बढ़ाता है। ये घटक नींद चक्र को नियंत्रित करते हैं। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण सहजन पाउडर शरीर को स्‍वस्‍थ और अच्‍छा महसूस कराने वाले हार्मोन को भी उत्‍तेजित करते हैं। जिससे मूड को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि आप भी नींद की कमी और इसके अन्‍य लक्षणों से परेशान हैं तो सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल करें।
सहजन पाउडर से करें अवसाद का इलाज –
मानसिक तनाव और अवसाद के लक्षणों को कम करने की क्षमता सहजन के पाउडर में होती है। यदि आप भी इसी प्रकार की समस्‍या से परेशान हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के पाउडर को शामिल कर सकते हैं। नियमित रूप से कुछ दिनों तक सहजन के पाउडर का सेवन करना आपको इस प्रकार की समस्‍या से छुटकारा दिला सकता है।
सहजन पाउडर के लाभ घाव उपचार में –
आप अपनी त्‍वचा में मौजूद मुंहासों या अन्‍य घावों का इलाज करने के लिए सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सहजन में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण घावों का उपचार करने और उन्‍हें संक्रमण से बचाने में प्रभावी होते हैं। यदि आप भी किसी कट, चोट या घाव से ग्रस्‍त हैं तो सहजन के पाउडर के उपयोग करें
मोरिंगा पाउडर के फायदे ग्‍लोइंग स्किन के लिए
आप अपने चेहरे की त्‍वचा को गोरा और चमकदार बनाने के लिए सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सहजन पाउडर का उपयोग फेस पैक के रूप में भी किया जा सकता है। इसके लिए आप मुलतानी मिट्टी या चंदन पाउडर के साथ सहजन पाउडर को मिलाएं और एक पेस्‍ट तैयार करें। नियमित रूप से हर दूसरे दिन इस फेस पैक का उपयोग करने से त्‍वचा को चमकदार और गोरा बनाया जा सकता है। आप भी अपने चेहरे को गोरा बनाने के घरेलू उपाय में सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सहजन पाउडर का उपयोग एंटी-एजिंग के लिए
सहजन का पाउडर विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन और बायोफ्लेवोनॉइड्स की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके सा‍थ ही इसमें बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट भी होते हैं। जो कि त्‍वचा को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। इन्‍हीं फ्री रेडिकल्‍स के कारण त्‍वचा कोशिकाओं को नुकसान होता है जो झुर्रियों और अन्‍य उम्र बढ़ने संबंधी समस्‍याओं का कारण होते हैं। आप भी समय से पहले आने वाले बुढ़ापे के संकेतों को दूर करने के लिए सहजन के पाउडर का मौखिक और बाहृ रूप से उपयोग कर सकते हैं।


सहजन पाउडर के फायदे बाल झड़ने से रोके

यदि आप बालों के झड़ने संबंधी समस्‍या से परेशान हैं तो सहजन के पाउडर का प्रयोग करें। यह आपके बालों को झड़ने से रोकने में मददगार होता है। मोरिंगा पाउडर में मौजूद कुछ विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड बालों के लिए केरेटिन (keratin) प्रोटीन का निर्माण करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा सहजन पाउडर में मेथियो‍नीन (Methionine) अमीनो एसिड भी होता है जो आपके बालों को सल्‍फर की कमी से बचाता है। जिससे आप अपने बालों को झड़ने से रोक सकते हैं।
सहजन पाउडर का उपयोग कैसे करें 
औषधीय गुणों से भरपूर सहजन का पाउडर हमें कई स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य लाभ दिलाता है। आप अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार सहजन के पाउडर का उपयोग कई प्रकार से कर सकते हैं। जैसे आप अपनी स्‍मूदी में मोरिंगा पाउडर को मिला सकते हैं। इसके अलावा आप सहजन के पाउडर की चाय का भी सेवन कर सकते हैं। अध्‍ययनों के अनुसार सहजन की पत्‍तीयों का पाउडर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित माना जाता है। आप भी अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए मोरिंगा पाउडर का सेवन कर सकते हैं
सहजन पाउडर का स्‍वाद
सहजन के पाउडर में एक हल्‍का स्‍वाद होता है। इसलिए चाय के रूप में सेवन करने पर यह हल्‍की मोरिसा चाय या ग्रीन टी के समान स्‍वाद देती है। यह पोषक तत्‍वों को बढ़ावा देने के लिए भोजन या पेय पदार्थों के रूप में उपयोग की जा सकती है।
सहजन का चूर्ण बनाने की विधि
घर पर मोरिंगा या सहजन की पत्तियों पाउडर बनाना काफी आसान है लेकिन इसे छांटने और साफ करने में कुछ समय लगता है और फिर फूड प्रोसेसर में पीसने से पहले पत्तियों को सुखा लिया जाता हैं। मोरिंगा या ड्रमस्टिक औषधीय पेड़ है जो अपने पौष्टिक गुणों के लिए जाना जाता है, पेड़ का हर भाग खाद्य और औषधीय है।
मोरिंगा पाउडर कैसे बनाये
मोरिंगा की ताजा पत्तियां प्राप्त करें। डंठल के साथ पत्तियों को उठायें, सभी डंठल को एक साथ पकड़ें और पानी के एक बड़े टब में कम से कम 3-4 बार साफ करें।
लगभग 4-5 घंटों में पत्तियां मुरझा जाती हैं और डंठल से आसानी से अलग हो सकते हैं और उन्हें एक साथ पकड़कर नीचे की ओर खींच सकते हैं। आप चाहें तो शाम को पत्तियों को तोड़ सकते हैं और उन्हें धोने (रिन्सिंग) के बाद रात भर के लिए छोड़ सकते हैं।
पत्तियों के अलग होने के बाद, उन्हें एक छिद्रित सतह में फैलाएं, बांस के टोकरी इसके लिए भी आश्चर्यजनक रूप से काम करते हैं। मेरे पास स्टील की जाली से बनी कुछ ट्रे हैं, पुराने ज़माने के कोलंडर भी काम करते हैं। पत्तियों से सभी डंठल निकालें ताकि पाउडर चिकना हो।
इसे पतले गहरे कपड़े से ढँक दें और कड़ी धूप में सूखा लें (भारतीय गर्मियों में ऐसी चीजों के लिए बहुत अच्छा है) जब तक कि पत्तियाँ कुरकुरी न हो जाएँ। तेज गर्मियों में पत्तियों को कुरकुरा बनाने में सिर्फ एक दिन लगता है लेकिन बाद में आपको 2 दिन से अधिक लग सकते। शाम को पत्तियों को घर के अंदर ले आयें और उनका कुरकुरापन खोने से पहले तुरंत पाउडर बना लें। यह पाउडर को वास्तव में बारीक करने में मदद करता है। आप किसी भी रेशेदार अवशेष को हटाने के लिए इसे छलनी कर सकते हैं।
तुरंत एक साफ एयर टाइट ढक्कन के साथ एक साफ और सूखे जार में स्थानांतरण करें। इस तरह से बनाए गए मोरिंगा पाउडर कमरे के तापमान पर कम से कम 6 महीने तक ठीक तरह से स्टोर रहते हैं। शेल्फ लाइफ को लम्बा करने के लिए आप इसे रेफ्रिजरेट में रख सकते हैं।


याद रखें कि अगर आप इसे रोजाना इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको प्रति व्यक्ति प्रति दिन बस आधा चम्मच (1/2 tsp) या 2/3 tsp का ही सेवन करना चाहिए।
चूंकि मोरिंगा या सहजन की पत्तियों को सुखाया जा सकता है और भंडारण के लिए पीसा जा सकता है, इसे चाय के लिए उपयोग किया जाता है, एक विटामिन पूरक के रूप में या आसानी से पोषण तत्वों (vitamin supplement) को प्राप्त करने के लिए व्यंजनों में मिलाया जाता है, आपको आश्चर्य होगा कि आप इसे क्यों नहीं खा रहे हैं। क्योंकि मोरिंगा कमाल का पेड़ है!
सहजन पाउडर के नुकसान
अध्‍ययनों ने इस बात की पुष्टि की है कि सहजन का पाउडर मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन फिर भी मोरिंगा पाउडर के कुछ संभावित नुकसान हो सकते हैं।
सहजन के बीजों का अधिक मात्रा में सेवन न करें। क्‍योंकि यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।
सहजन के पाउडर में पेट साफ करने वाले गुण होते हैं। इसलिए अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। अन्‍यथा यह पाचन समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
मधुमेह रोगीयों को बहुत ही कम या संतुलित मात्रा में सहजन पाउडर का उपभोग करना चाहिए। क्‍योंकि यह रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में सहायक होता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह रक्‍त शर्करा के स्तर को बहुत ही निम्‍न स्‍तर पर ले जा सकता है जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है।
मोरिंगा की परिपक्व पत्तियां कुछ लोगों में पेट खराब कर सकती हैं इसलिए इसका ध्यान रखें और जब आप पहली बार इसका उपयोग करें तो बहुत कम मात्रा में इसका उपयोग करें। इसे बच्चों को खिलाते समय सावधानी बरतें।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सहजन पाउडर का सेवन करने से पहले आपको अपने डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाहिए।




10.7.19

हरी सब्‍जी खाने के स्वास्थ्य लाभ


हरी सब्जियां खाने के कई फायदे हैं, हरी सब्जियां खाने के लाभ शायद ही किसी को पता न हों क्‍योंकि हरी सब्जियां खाने के फायदे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए किसी औषधी से कम नहीं होते हैं। हरी सब्‍जी खाने से क्‍या लाभ होते है, हरी सब्जियों के पोषक तत्‍व आदि की पूरी जानकारी लोगों को नहीं होती है। बस उन्‍हें यह पता होता है कि हरी सब्‍जी खाना उनके शरीर को स्‍वस्‍थ रखता है। हमारे शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए हरी सब्जियां का सेवन जरूरी है, हरी सब्जियां स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गंभीर से गंभीर बीमारियों को दूर करने में सहायक होती हैं। हरी सब्‍जी खाने का फायदा कैंसर, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल घटाने, मोटापा कम करने, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य जैसी समस्‍याओं को दूर करने में होते हैं।
हरी सब्‍जी खाने के फायदे न केवल स्‍वास्‍थ्‍य बल्कि बालों और त्‍वचा सौंदर्य के लिए भी होते हैं। आज इस आर्टिकल में हम हरी सब्जियां खाने के फायदे जानेगें। आइए जाने हरी सब्जियां किस प्रकार हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां खाने के फायदे और हमें हरी सब्जियां क्यों खानी चाहिए?
हरी सब्‍जी खाने के फायदे हृदय के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए –
हरी सब्‍जीयों का नियमित रूप से सेवन करना हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही अच्‍छा होता है। हरी और गहरे रंग की पत्‍तेदार सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैंथिन (Lutein and Zeaxanthin) होते हैं। ये घटक हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। यदि आप भी हृदय संबंधी समस्‍याओं से परेशान हैं तो अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को विशेष रूप से शामिल करें।
सब्जियों के पोषक तत्‍व –
हम सभी जानते है कि अलग-अलग रंगों की सब्‍जी और फलों को अपने नियमित आहार में शामिल करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है। ल‍ेकिन अपने आहार में विशेष रूप से हरी सब्जियों को शामिल करना अधिक लाभकारी होता है। क्‍योंकि सभी प्रकार की हरी सब्जियों में विटामिन, प्रोटीन, खनिज पदार्थ, फाइबर आदि की उच्‍च मात्रा होती है। ग्रीन सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैंथिन (Lutein and Zeaxanthin) जैसे घटक भी होते हैं। इसके अलावा इन सब्जियों में वसा आदि ना के बराबर होते हैं जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है। हरी सब्जियां कार्बोहाइड्रेट की भी अच्‍छी स्रोत मानी जाती हैं जो हमे ऊर्जा प्राप्‍त करने में सहायक होता है।
हरी सब्जियां खाने के लाभ कैंसर से बचने के लिए –
पोषक तत्‍वों की भरपूर मात्रा होने के साथ ही हरी सब्जियों में एंटीऑक्‍सीडेंट की उच्च मात्रा होती है। ये एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्‍हें नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। यदि आप भविष्‍य में कैंसर जैसी गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचना चाहते हैं तो अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को शामिल करें। नियमित रूप से हरी सब्जियों का सेवन स्‍तन और फेफड़े संबंधी कैंसर की रोकथाम करने में सहायक होते हैं।



टाइप २ डायबिटीज के मरीजों के लिए सहायक
अगर कोई टाइप २ डायबिटीज से ग्रसित है, तो उसके लिए हरी सब्जियां काफी फायदेमंद होती हैं क्योंकि इनमें मैग्नीशियम तो है ही, साथ में कार्बोहायड्रेट कम होता है।
हरी सब्जियों के गुण खनिज पदार्थ की कमी दूर करे
स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं अक्‍सर शरीर में विटामिन और खनिज पदार्थों की कमी के कारण होती हैं। लेकिन यदि आप हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करते हैं तो इस प्रकार की समस्‍याओं से बचा जा सकता है। आप अपने शरीर में खनिज पदार्थों की कमी को दूर करने के लिए सभी प्रकार की हरी सब्जियों को अपने साप्‍ताहिक आहार का हिस्‍सा बना सकते हैं। क्‍योंकि हरी पत्‍तेदार सब्जियों में मैग्‍नीशियम, पोटेशियम, आयरन, फॉस्‍फोरस और कैल्शियम जैसे अन्‍य घटक होते हैं। मैग्‍नीशियम मांसपेशियों के स्वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
हरी सब्जियों का उपयोग प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाये –
सभी प्रकार की हरी सब्जियों में प्रमुख घटक के रूप में एंटीऑक्‍सीडेंट उच्‍च मात्रा में होते हैं। ये एंटीऑक्‍सीडेंट हमारे शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाने में सहायक होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट के अलावा हरी सब्जियों में विटामिन ए भी होता है जो शरीर के प्राकृतिक बचाव और त्‍वचा स्‍वास्‍थ्य के लिए लाभकारी होता है। हरी सब्जियों में विटामिन C और K भी अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो हड्डियों के घनत्‍व और विकास दोनों में सहायक होते हैं। इस तरह से आप अपने शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों को अपने नियमित आहार में शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जियां रखें आपकी हड्डियों को मजबूत
क्योंकि हरी सब्जियों में विटामिन के होता है, यह आपकी हड्डियों को भी मजबूत और स्वस्थ रखती हैं।
हरी सब्जियों के गुण चयापचय को बढ़ाये –
शरीर का स्‍वस्‍थ रहना आपके स्‍वस्‍थ्‍य चयापचय पर निर्भर करता है। हरी पत्‍तेदार सब्जियों में आयरन और फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा हरी सब्जियों में ऐसे अन्‍य खनिज पदार्थ और घटक भी उच्‍च मात्रा में होते हैं जो हमारे चयापचय में सुधार करते हैं। इसके अलावा हरी सब्जियों में मौजूद आयरन विशेष रूप से हमारे शरीर में रक्‍त या लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। यदि आप भी अपने शरीर स्‍वस्‍थ्‍य रखना चाहते हैं तो अपने नियमित आहार में हारी सब्जियों को प्रमुख खाद्य पदार्थ के रूप में शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जी के लाभ पाचन के लिए –


पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए हरी सब्जियां बहुत ही फायदेमंद होती हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि हरी सब्जियों में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। हरी सब्जियों को फाइबर का सबसे अच्‍छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से सेवन करने के दौरान हरी सब्जियों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखता है। इसके अलावा यह उस दर को धीमा करता है जिस पर आपका शरीर चीनी को अवशोषित करता है। इसके अलावा नियमित रूप से आहार के रूप में हरी सब्जियों का सेवन रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी नियंत्रित करता है।
ग्रीन वेजिटेबल्स के फायदे आंखों के लिए –
हरी सब्जियां आंखों के लिए फायदेमंद होती हैं। क्‍योंकि लगभग सभी प्रकार के पोषक तत्‍व, खनिज, विटामिन आदि की पर्याप्‍त मात्रा इनमें मौजूद रहती है। हम पहले ही जान चुके हैं कि अधिकांश हरी सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैन्थिन (Lutein and zeaxanthin) की अच्‍छी मात्रा होती है। नियमित रूप से हरी सब्जियों का सेवन करना आपकी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने का एक बेहतर विकल्‍प है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि हरी सब्जियों में एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन ए और विटामिन सी की अच्‍छी मात्रा होती है। विटामिन ए आंखों के लिए बहुत ही आवश्‍यक घटक है। इसके अलावा विटामिन सी और अन्‍य एंटीऑक्‍सीडेंट हमारी आंखों को फ्री रेल्किल्‍स के प्रभाव से बचाने में सहायक होते हैं। इस तरह से आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दैनिक आहार में नियमित रूप से हरी सब्जियों को शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जियों के औषधीय गुण वजन कम करे –
हरी सब्‍जी खाने के लाभ आपकी भूख को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए बहुत से लोग वजन घटाने के उपाय के रूप में हरी सब्जियों का अधिक सेवन करने की सलाह देते हैं। हरी सब्जियों में मौजूद फाइबर की उच्‍च मात्रा पाचन प्रक्रिया को धीमा करती है जिससे आपको लंबे समय तक समान रूप से ऊर्जा की प्राप्ति होती रहती है। इसके अलावा फाइबर आपको लंबे समय तक पूर्णता का अनुभव कराता है जिससे आपको बार-बार भूख लगने या खाने की समस्‍या से छुटकारा मिल सकता है। हम सभी जानते हैं कि बार-बार भोजन करना या अधिक भोजन करना भी वजन बढ़ने का प्रमुख कारण होता है। इस तरह से आप अपनी भूख को नियंत्रित कर अपने बढ़ते वजन को रोक सकते हैं। हालांकि यदि आप वजन कम करने वाले अन्‍य उपाय अपना रहे हैं तब ऐसी स्थिति में हरी सब्जियों का सेवन आपको अतिरिक्‍त लाभ दिला सकता है।


हरी सब्‍जी खाने के लाभ तनाव दूर करे –
अधिक तनाव कई प्रकार की स्‍वास्थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। यदि आप तनाव प्रबंधन के प्रयास कर रहे हैं तो इसमें हरी सब्जियों के सेवन को भी शामिल करें। क्‍योंकि हरी सब्‍जी खाने के फायदे आपके तनाव को दूर करने और मूड में बदलाव करने में सहायक होते हैं। हरी पत्‍तेदार सब्जियों में फोलेट की उच्च मात्रा होती है। शरीर में फोलेट की उचित मात्रा सेरोटोनिन उत्‍पादन में योगदान देता है। जिससे आपके तनाव को कम करने में मदद मिलती है। यदि आप नियमित व्‍यायाम के साथ हरी सब्जियों को अपने दैनिक आहार में शामिल करते हैं तो आपको अतिरिक्‍त लाभ प्राप्‍त हो सकता है।
हरी सब्‍जी खाने के फायदे त्‍वचा के लिए –
त्‍वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा और संवेदनशील अंग है। अक्‍सर हम अपनी त्वचा संबंधी समस्‍याओं और सुंदरता बढ़ाने के लिए रासायनिक उत्‍पादों का उपयोग करते हैं। लेकिन आप अपनी त्वचा को स्‍वस्‍थ और सुंदर बनाने के लिए हरी सब्जियों का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हम यह नहीं कहते कि आप सौंदर्य उत्‍पादों का उपयोग न करें। लेकिन अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को शामिल करें। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इनमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्‍टीरिया और फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी त्वचा को प्राकृतिक सुरक्षा दिलाने के लिए और त्‍वचा को सूर्य की क्षति से बचाने के लिए हरी सब्जियों के सेवन को बढ़ा सकते हैं। हरी सब्जियों में मौजूद विटामिन सी, फोलिक एसिड और बीटा-कैरोटीन आपकी क्षतिग्रस्‍त त्‍वचा कोशिकाओं की मरम्‍मत करने में सहायक होते हैं।
हरी सब्जियों के लाभ हाइड्रेट रखें –
आप अपने शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए भी हरी सब्जियों का नियमित सेवन कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इन सब्जियों में पहले से ही पानी की भरपूर मात्रा होती है इसके अलावा इनमें फाइबर की मौजूदगी भी पानी की उचित मात्रा को बनाए रखने में सहायक होता है। हाइड्रेट रहने से आपकी त्वचा और बालों संबंधी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।
हरी सब्‍जी का उपयोग रक्‍तचाप के लिए –
नियमित रूप से हरी सब्‍जी और फलों का सेवन करने के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप रोगी के लिए होते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पोटेशियम की उच्च मात्रा होती है। पोटेशियम शरीर में न केवल सोडियम के स्‍तर को संतुलित करता है बल्कि रक्‍त वाहिकाओं को भी स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होता है। जिससे शरीर में स्‍वस्‍थ रक्‍त परिसंचरण को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा पोटेशियम रक्‍त प्रवाह में अवरूद्ध बनने वाले कोलेस्‍ट्रॉल को भी दूर करता है। इसलिए उच्‍च रक्‍तचाप रोगी को नियमित रूप से अपने आहार में हरी सब्जियों और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए।
हरी सब्‍जी खाने से फायदा बालों के लिए –
आज अधिकांश लोग चाहे महिला हो या पुरुष बालों संबंधी समस्‍याओं से बहुत ही परेशान रहते हैं। जिसके कारण वे कई प्रकार के रासायनिक उत्पादों का उपयोग करते हैं जो उनके बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जबकि बालों सबंधी समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा और प्राकृतिक तरीका हरी सब्जियों का नियमित सेवन है। हरी सब्जियों में विट‍ामिन A, विटामिन C, कैल्शियम और आयरन जैसे घटक अच्‍छी मात्रा में होते हैं। ये घटक सीबम उत्‍पादन में मदद करते हैं। सीबम मोम जैसा पदार्थ है जो सिर की ऊपरी त्‍वचा या स्‍कैल्‍प में जमा होता है। हमारे बालों के लिए सीबम बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके अलावा कैल्शियम और आयरन बालों की जड़ों को मजबूत करने और उन्‍हें कमजोर होकर गिरने से रोकते हैं। इस तरह से आप अपने बालों को झड़ने से बचाने के लिए हरी सब्जियों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।



हरी पत्तीदार सब्जियाँ प्रतिदिन वयस्क महिलाओं के लिए 100 ग्राम, वयस्क पुरुषों के लिए 40 ग्राम, स्कूल न जान वाले बालकों के लिए (4-6 वर्ष) 50 ग्राम और 10 वर्ष से अधिक उम्र वाले बालक-बालिकाओं के लिए 50 ग्राम प्रतिदिन आवश्यक है।
सावधानी -

ऐसा माना जाता है कि हरी पत्तीदार सब्जियों के सेवन से बच्चों में अतिसार हो सकता है। इसलिए अधिकांश माताएं अपने बच्चों को इस पोषक तत्व को देने से परहेज करती हैं। कई बैक्टीरिया, कीटाणु, कीट एवं अनचाही वस्तु हरी पत्तीदार सब्जियों को पानी एवं मिट्टी के द्वारा दूषित कर देते हैं और ठीक तरह से सफाई न किये जाने पर ये सब्जियां अतिसार का कारण बन सकती हैं। इसलिए सभी हरी पत्तीदार सब्जियों को दूषित होने से रोकने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पानी से धोना चाहिए ताकि अतिसार से बचा जा सके।
हरी पत्तीदार सब्जियों को अच्छी तरह से मिलाकर, पका कर एवं छान कर ही बच्चों को परोसना चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों के पोषण को बनाये रखने के लिए उन्हें अधिक पकाने से परहेज करना चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों को पकाने के बाद उनसे निकलनेवाले पानी को फेंकना नहीं चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों को पकाने में इस्तेमाल किये जानेवाले बर्तन को हमेशा ढ़ंक कर ही रखना चाहिए। पत्तों को सूर्य की रोशनी में न सूखायें, क्योंकि इससे केरोटिन नष्ट हो जाता है। साथ ही पत्तों को अधिक न भूनें फाइबर की उच्च मात्रा होने के कारण अधिक मात्रा में इन सब्जियों का सेवन करने से पेट संबंधी समस्‍याएं जैसे दस्‍त, अपच, बदहजमी और उल्‍टी आदि हो सकती हैं।
कुछ लोग कुछ विशेष प्रकार की सब्जियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों को कुछ प्रकार की सब्जियों का सेवन करने से एलर्जी आदि की समस्‍या हो सकती है। ऐसे लोगों को उन सब्जियों का सेवन करने से बचना चाहिए।
हमेशा ताजी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि हरी सब्जियां जल्‍दी ही खराब हो जाती हैं इन सब्जियों का सेवन करने से आपको कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।
उपयोग करने से पहले सभी प्रकार की सब्‍जीयों को अच्‍छी तरह से धो लेना चाहिए। क्‍योंकि इन सब्जियों में कीटनाशक का उपयोग किया जाता है जो आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
हरी सब्जियों का सेवन करने के दौरान यदि किसी प्रकार की स्वास्‍थ्‍य समसया होती है तो आपको तुरंत ही डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।





पैर के छाले के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय


नए चप्पल और जूते पहनने या फिर पैर के अत्यधिक नमी के संपर्क में आने से कई बार पैरों में छाले हो जाते हैं। यह छाले शुरुआत में छोटे होते हैं लेकिन यदि इनका इलाज नहीं किया गया तो यह बड़े हो जाते हैं। इसलिए आज हम छाले दूर करने के घरेलू उपचार के बारे में जानेंगे।
पैरों के छालों को घरेलू उपायों की मदद से ठीक कर सकते हैं। तलवों के फफोले या पैर के छाले एक दर्दनाक समस्‍या है जिसमें पैर के छोटे से हिस्‍से में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। पैर में छाले बुलबुले की तरह होते हैं जो कि कई अलग-अलग कारण से होते हैं। पैरों में छाले पड़ने का प्रमुख कारण त्‍वचा का जल जाना या नए स्‍लीपर या जूते पहनने से अधिक घर्षण होना है। पैर के छाले कवक या बैक्‍टीरिया के साथ संक्रमण, किसी कीड़े के काटने या अन्‍य प्रभावों के कारण अधिक गंभीर हो सकते हैं। हालांकि पैर में छालों को ठीक करने के घरेलू उपाय भी होते हैं। आप पैरों के छालों का इलाज किसी डॉक्‍टर के माध्‍यम से करा सकते हैं। लेकिन पैरों के छालों के घरेलू इलाज भी संभव हैं। पैर के छालों का इलाज घर पर किया जा सकता है। आज इस आर्टिकल में आप पैरों के छालों का घरलू उपचार कैसे कर सकते हैं यह जानकारी प्राप्‍त करेगें।
पैरों में छाले होने का कारण
पैर में छाले होने का प्रमुख कारण अधिक घर्षण हो सकता है। दिन में कई घंटों तक लगातार पैदल चलना या लगातार बहुत समय तक खड़े रहने से पैर की एड़ी, तलवे और उंगलियों में दबाव पड़ता है। आप दिन में जितना अधिक पैदल चलेगें यह पैर के फफोले के लिए उतना अधिक गंभीर हो सकता है। स्‍वाभाविक है कि आज अधिकांश लोग बहुत अधिक समय तक न ही खड़े हो सकते हैं और न ही पैदल चलते हैं। फिर भी उन्‍हें पैर के छालों का सामना करना पड़ता है। पैरों में छाले आने का एक और कारण टाइट या गाढ़े जूते पहनना है जिससे पैर की त्‍वचा में घर्षण अधिक होता है। जो कि पैर के छाले या फफोले उत्‍पन्‍न हो सकते हैं। इसके अलावा अधिक नमी या पसीना भी पैर के छालों का कारण बन सकता है। पैरों में छाले आने अन्‍य कारण इस प्रकार हैं।
पैरों में छाले का निदान
अधिक घर्षण के कारण होने वाले पैर के छाले का इलाज आमतौर पर घरेलू उपचार से किया जाता है। पैर के छाले के घरेलू उपाय कुछ ही दिनों में इन्‍हें ठीक कर सकते हैं। लेकिन कई बार पैर के छालों का घरेलू इलाज प्रभावी नहीं हो पाता है और छाले की स्थिति खराब होने लगती है। ऐसी स्थिति में आपको किसी चिकित्‍सक की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा यदि पैर के छाले बहुत ही दर्द करते हैं तब भी आपको डॉक्‍टरी इलाज लेने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि कई बार पैर के छालों का दर्द बुखार, मतली या अन्‍य प्रकार की स्वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। आपका डॉक्‍टर फफोले से तरल पदार्थ को बाहर निकाल सकता है। यदि उसे संक्रमण की शंका होती है तो वो आपको संक्रमण रोधी दवाओं की सलाह भी दे सकता है।
पैर के छाले दूर करने के घरेलू उपाय
कई बार ऐसा होता है जब पैरों में छाले पड़ जाते हैं और जल्‍दी ठीक नहीं होते हैं। पैर के छाले बहुत ही दर्दनाक होते हैं जो आपके व्‍यक्तिगत जीवन में परेशानी का कारण बन सकते हैं। हालांकि पैर में छाले होने पर बहुत से लोग तुरंत ही डॉक्‍टर के पास नहीं जाते हैं। वे पैर के छाले का इलाज घरेलू उपचार के माध्‍यम से करते हैं। ये घरेलू उपचार पैरों के छाले की दवा जितने प्रभावी होते हैं। अच्‍छी बात यह है कि पैर में छाले के घरेलू उपचार करने पर कोई गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। यदि आपको पैर के छाले हैं तो तुरंत ही इसका इलाज करना चाहिए। अन्‍यथा ये गंभीर स्थिति में परिवर्तित हो सकते हैं। आइए विस्‍तार से जाने पैर के छालों के घरेलू इलाज और उपाय क्‍या हैं।


पैरों के छालों का उपाय अरंडी का तेल
पैरों के छाले को ठीक करने के लिए अरंडी का तेल (Castor Oil) उपयोगी औषधि है। सामान्‍य रूप से अरंडी के तेल का उपयोग बालों में वृद्धि करने के लिए किया जाता है। लेकिन पैरों के छालों के घरेलू उपाय के रूप में भी अंरडी का तेल प्रभावी माना जाता है। पैरों में छाले पड़ने के लक्षण जलन, खुजली और लालिमा आदि भी हो सकते हैं। आप इन सभी लक्षणों को कम करने के लिए फफोलों पर अंडी के तेल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। पैर के छाले का इलाज करने के लिए आप रात में सोने से पहले इसे पैर के छाले में लगाएं और सो जाएं। निश्चित रूप से अगली सुबह आपको पैर के छाले में राहत महसूस होगी।
इसके अलावा आप पैर के छाले का इलाज करने के लिए अंरडी के तेल और सेब के‍ सिरका के मिश्रण का भी उपयोग कर सकते हैं। इस मिश्रण को दिन में 2 से 3 बार उपयोग करना चाहिए।
पैर के छालों का घरेलू उपचार नमक
नमक में हीलिंग (healing) या उपचार गुण होते हैं जो पैर के छाले के कारण होने वाले दर्द को कम करते हैं। पैरों के छाले की दवा के रूप में आप नमक और बर्फ के पानी का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए आप एक कटोरी में 1 चम्‍मच खाने वाला नमक लें और इसमें बर्फ के कुछ टुकड़े मिलाएं। जब बर्फ और नमक पूरी तरह से घुल जाए तब इस पानी में एक सूती कपड़ा गीला करें। इस गीले कपड़े को पैर के फफोले पर लगभग 15 मिनिट तक रखें। यह सूजन और दर्द को कम करने में सहायक होता है। जिससे फफोले में मौजूद तरल पदार्थ निकल जाता है और फफोले का आकार कम हो जाता है।
पैर के फफोले का इलाज एलोवेरा


एलोवेरा एक औषधी है जो त्‍वचा के लिए निश्चित रूप से किसी दवा से कम नहीं है। आप पैर के छाले का इलाज करने के लिए एलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं। एलोवेरा में एंटी-इंफेलेमेंट्री और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि पैर के छाले को ठीक करने में मदद करते है। एलोवेरा में शीतलन और उपचार (cooling and healing) गुण होते हैं। जो पैरों के छाले प्रभावित क्षेत्र के तापमान या गर्मी को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा पैर के छालों में एलोवेरा का इस्‍तेमाल छाले की सूजन और दर्द को भी कम करता है।
पैर के छाले का घरेलू इलाज करने के लिए आप पैर के छाले में एलोवेरा जेल लगाएं और सूखने दें। हालांकि एलोवेरा का उपयोग करने के दौरान आपको कुछ खुजली या जलन का अनुभव हो सकता है। जब एलोवेरा जेल पूरी तरह से सूख जाए तब आप इसे गर्म पानी से धो लें। पैर के छाले से जल्‍दी छुटकारा पाने के लिए आप एलोवेरा जेल का दिन में दो बार उपयोग करें। ऐसा करने से आपको जल्‍दी ही पैर के छालों से राहत मिल सकती है।
पैरों के छालों का इलाज सेब का सिरका
पैर के छालों का घरेलू उपचार करने के लिए सेब के सिरका का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। सेब का सिरका फफोले की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि सिरका में जीवाणुरोधी और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं जो पैरों के छाले को ठीक करता है और दर्द को कम करने में सहायक हैं। इसके अलावा सेब का सि‍रका पैर के फफोले को संक्रमण ग्रसित होने से भी बचाता है। पैर के छाले का इलाज करने के लिए आप 1 कटोरी में सेब का सिरका लें और इसमें रूई या कपास को भिगोएं। इस भीगी हुई रूई को आप फफोले के ऊपर रखें या इससे थपथपाएं। यह पैर के छाले का दर्द कम करने के साथ ही उपचार प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायक होता है।
विकल्‍प के रूप में आप प्‍याज का पेस्‍ट और सेब के सिरका सरिका को मिलाकर भी पैर के छाले में रख सकते हैं। मिश्रण के सूखने के बाद आप गर्म पानी से इसे धो लें। ऐसा करना भी पैर के छालों के उपचार में मदद करता है।
पैर के छाले दूर करने का घरेलू नुस्‍खा टूथपेस्‍ट
दांतों को साफ करने के लिए टूथपेस्‍ट का उपयोग किया जाता है। लेकिन पैर के छाले दूर करने के घरेलू नुस्‍खे में भी टूथपेस्‍ट बहुत ही प्रभावी माना जाता है। बहुत से लोग मुंहासे, घाव आदि को ठीक करने के लिए भी टूथपेस्‍ट इस्‍तेमाल करते हैं। आप अपने पैरों के छालों को भी ठीक करने के लिए टूथ पेस्‍ट का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप अपने द्वारा उपयोग किये जाने वाले सफेद टूथ पेस्‍ट की थोड़ी सी मात्रा को पैरों के छालों पर लगाएं। दिन में 2 से 3 बार उपयोग करने पर यह पैर के छालों की सूजन या फूलन को ठीक कर सकता है।
पैर में छाले के उपाय ग्रीन टी



पैर के छालों का उपचार करने के लिए ग्रीन टी बहुत ही प्रभावी तरीका है। ग्रीन टी में एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं। जो पैर के छाले के ठीक होने की प्रक्रिया को गति देने में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्‍सीडेंट छाले के दर्द को कम करने में और सूजन को रोकने में मदद करते हैं। पैर के फफोले का इलाज करने के लिए गर्म पानी में 1 ग्रीन टी बैग को डुबोएं और इस पानी में थोड़ा सा बेकिंग सोड़ा मिलाएं। इसके बाद टी बैग को ठंडा होने दें और फिर फफोले के ऊपर रखें। बेकिंग सोड़ा में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो संक्रमण को रोकने में प्रभावी होते हैं। इस विधि को दिन में 2 से 3 बार दोहराने में आपको पैर के छाले में आराम मिल सकता है।
पैर के छालों की दवा पैट्रोलियम जेली
पैट्रोलियम जेली केवल कटे, फटे होठों या त्‍वचा के लिए अच्‍छी होती है। लेकिन यह आपके पैरों के छाले का भी इलाज करने में प्रभावी होती है। यदि आप पैर के छालों से परेशान हैं तो रात में सोने से पहले अपने पैरों के छाले में पैट्रोलियम जेली लगाएं। यह छाले के दर्द को कम करने और त्‍वचा में प्राकृतिक नमी बनाए रखने में सहायक होती है। छालों में पैटोलियम जेली का उपयोग करने से पहले अपने पैरों को गुनगुने पानी में 15 से 20 मिनिट तक अपने पैरों को भिगोएं। इसके बाद अपने पैरों को अच्‍छी तरह से सुखाएं और फिर पैट्रोलियम जैली को लगाएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों में आपको पैरों के छाले से राहत मिल सकती है।




29.6.19

गेहूं के जवारे के रस के चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ

                                             
गेहूं की पौध को गेहूं का ज्‍वारा कहते हैं । यानी गेहूं के बीच जब जमीन में रोपित किए जाते हैं तो 7 से 8 दिन में जो पौध बनकर तैयार होती है वो गेहूं का ज्‍वारा कहलाती है । इसे अंगेजी में Wheat Grass कहते हैं । इसके फायदे अनेक हैं, आयुर्वेद में इसके रस को संजीवनी बूटी कहा गया है । आजकल ये आयुर्वेदिक औषधि के रूप में आसानी से उपलब्‍ध है ।
सेहत के रखवाले हरी दूब और गेहूं के जवारे गेहूं के जवारों के रस को अमृत रस कहा जाता है, इसका उपयोग विकसित देशों में क्यों बढ़ता जा रहा है, पढ़ें ….. दूब घास प्रकृति में एक ऐसी वनस्पति है जो संसार के किसी भी कोने में, किसी भी जलवायु में उपलब्ध है। यूं तो इस घास को सदा से ही पूजनीय माना जाता रहा है अधिक गौर करने वाली बात यह है कि इसका उपयोग मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। इसमें कुछ ऐसे मुख्य पोषक तत्व हैं जो प्रकृति ने कूट-कूट कर भर दिये हैं। इसमें मौजूद सभी पोषक तत्वों का पता वैज्ञानिक नहीं लगा पाए हैं, फिर भी कुछ तत्व जिनके बारे में पता है, इस प्रकार हैं: बीटा केरोटीन, फोलिक एसिड, क्लोरोफिल, लौह तत्व, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एंटी आॅक्सीडेंट, विटामिन बी काॅम्पलेक्स, विटामिन के आदि। बीटा कैरोटीन: शरीर में बीटा कैरोटीन विटामिन ‘ए’ में परिवर्तित हो जाता है। सभी जानते हैं कि विटामिन ‘ए’ हमारी त्वचा एवं आंखों की रोशनी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। फोलिक एसिड: फोलिक एसिड हमारे शरीर में लाल रक्त कणों को परिपक्व करने के लिए एवं रक्त में होमोसिस्टीन नामक रसायन की मात्रा कम करने के लिए जरूरी है। होमोसिस्टीन की रक्त में मात्रा ज्यादा होने से न केवल रक्तचाप बढ़ जाता है अपितु हृदय रोग की भी संभावना बढ़ जाती है। क्लोरोफिल: यह मानव रक्त से बहुत मिलता-जुलता है। इसमें और मानव रक्त में केवल एक फर्क होता है, वह है क्लोरोफिल के केंद्र में मैग्नीशियम कण होता है तो हीम रिंग में लौह कण। शरीर को क्लोरोफिल को रक्त में बदलने के लिए केवल एक रासायनिक क्रिया करनी पड़ती है, मैग्नीशियम कण को निकालकर उसकी जगह लौह कण को डालना होता है और निकाले हुए मैग्नीशियम को शरीर की हड्डियों की मजबूती तथा रक्तचाप(ब्लडप्रेशर) को नियमित (सामान्य) करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है।

क्लोरोफिल केवल रक्त ही नहीं बनाता अपितु यह एक अति प्रभावी ऐन्टीबायोटिक के रूप में भी कार्य करता है। इससे शरीर कीटाणुओं के संक्रमण से बचा रहता है। गेहूं के जवारों में मौजूद केल्शियम शरीर की हड्डियों एवं दांतों की मजबूती एवं स्वास्थ्य हेतु सामान्य रासायनिक क्रिया के लिए अति लाभप्रद है। इनमें मौजूद मेग्नीशियम रक्तचाप को सामान्य करने के लिए अति आवश्यक है। फ्री रेडिकल: ये अत्यंत क्रियाशील इलेक्ट्राॅन होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं में रासायनिक क्रियाओं के उपरांत उत्पन्न होते हैं। चूंकि ये इलेक्ट्राॅन असंतृप्त होते हैं, अपने को संतृप्त करने के लिए ये कोशिकाभित्ति से इलेक्ट्राॅन लेकर संतृप्त हो जाते हैं, परंतु कोशिकाभित्ति में असंतृप्त इलेक्ट्राॅन छोड़ जाते हैं। यही असंतृप्त इलेक्ट्राॅन फिर इलेक्ट्राॅन लेकर संतृप्त हो जाते हैं और इस प्रकार से बार बार नये असंतृप्त इलेक्ट्राॅन/फ्री रेडिकल उत्पन्न होते हैं और नष्ट होते रहते हैं। अगर इन फ्री रेडिकलों को संतृप्त करने के लिए समुि चत मात्रा म ंे एन्टी आॅक्सीडटंे नहीं मिलते तो कोशिकाभित्ति क्षतिग्रस्त हो जाती है। यही क्रिया बार-बार होते रहने से कोशिका समूह क्षतिग्रस्त हो जाता है और मनुष्य एक या अनेक रोगों का शिकार हो जाता है। यही एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है आजकल की लाइफस्टाइल बीमारियों मधुमेह, हृदय रोग, रक्तचाप, गठिया, गुर्दे और आंखों के काले या सफेद मोतिया रोग इत्यादि का। गेहूं के जवारे इन्हीं फ्री रेडिकलों को नष्ट करने में शरीर की हर संभव सहायता करते हैं। आज अगर प्रकृति में सभी शाकाहारी जानवरों के आहार पर गौर करें तो पाएंगे कि दूब घास उन्हें आहार से होने वाले सभी रोगों से मुक्त रखती है। कुत्ता एक मांसाहारी जानवर होते हुए भी जब बीमार होता है तो प्रकृतिवश भोजन छोड़कर केवल दूब घास खाकर कुछ दिनों में अपने आप को ठीक कर लेता है। मनुष्य साठ की आयु पर पहुंचते ही काम से रिटायर कर दिया जाता है। इसका कारण उसकी बुद्धि तथा याददाश्त कम होना माना जाता है परंतु हथिनी जिसकी आयु मनुष्य के ही बराबर आंकी गयी है, उसकी न तो याददाश्त कम होती है, न ही उसे सफेद या काला मोतिया होता है और न ही उसे 3900-6000 किलोग्राम भार के बावजूद आथ्र्राइटिस (गठिया) रोग होता है। अल्सरेटिव कोलाइटिस: अल्सरेटिव कोलाइटिस ;न्सबमतंजपअम ब्वसपजपेद्ध के रोगी द्वारा जवारों का नियमित प्रयोग करने से दवाओं की मात्रा कम करने के साथ-साथ रोग के लक्षणों में भी कमी आई।

यह बात जानने योग्य है कि इन रोगियों में इस बीमारी से आंत के कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। जवारों से उसका खतरा भी कम हो जाता है। सभी कैंसर रोगों में इन जवारों का उपयोग बहुत लाभकारी है। जवारे तैयार करने की विधि: लगभग 100 ग्राम अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं को साफ पानी से धोकर, फिर भिगोकर 8 से 10 घंटे रख दें। तत्पश्चात इन्हें 1 फुट ग् 1 फुट की क्यारियों या गमलों में बो दें। यह काम रोजाना सात दिनों तक करें। सातवें दिन पहले गमले/क्यारी मे   गेहूं या  जौ के जवारे करीब 8-9 इंच तक लंबे हो जाएंगे। अब उन्हें मिट्टी से ऊपर-ऊपर काट लें, मिक्सी में डालकर साथ में कोई फल जैसे केला, अनानास या टमाटर डालकर मिक्सी को चला लें । फिर इस हरे रस को चाय की छन्नी से छान कर कांच के गिलास में डालकर आधे घंटे के अंदर सेवन करें। आधे घंटे के पश्चात जवारों के रस से मिलने वाले पोषक तत्वों में कमी आ सकती है। जवारों को काटने के बाद जड़ांे को मिट्टी से उखाड़ कर फेंक दें और नई मिट्टी डालकर नये गेहूं बो दें। काटने के बाद जो जवारे दोबारा उग आते हैं उनसे शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता है। मसूड़ों की सूजन हो एवं खून आता हो तो जवारों को चबा चबा कर खाने से यह रोग केवल एक महीने में ही काफूर हो जाता है। लू लगने पर: लू लगने पर भी जवारों के रस का सेवन बहुत लाभ पहुचाता है। किसे गेहूं के जवारे न दें: बच्चों को एवं उन लोगों को जिन्हें दस्त हो रहे हों, मितली हो रही हो और आमाशय में तेजाब बनता हो। जिन लोगों को गेहूं से एलर्जी हो, वे जौ के जवारे इस्तेमाल कर सकते हैं। गेहूं के जवारों, दूब घास आदि के नियमित प्रयोग से अन्य फायदे शरीर की प्रतिरोध क्षमता बढ़ जाती है। हिमोग्लोबिन द्वारा आॅक्सीजन ले जाए जाने की मात्रा बढ़ जाती है। जिन लोगों का रात की पार्टी में शराब या नशे के पदार्थों के सेवन से सुबह सिर भारी रहता है, उनको भला चंगा करने के लिए 1 कप जवारों का सेवन कुछ घंटे में जादू का सा असर करता है। कब्ज को दूर करते हैं और कब्ज के कारण होने वाले रोगों जैसे बवासीर, एनल फिशर एवं हर्नियां से बचाते हैं। बढ़े हुए रक्तचाप को कम करते हैं। कैंसर के रोगी का कैंसर प्रसार कम करने में सहायता मिलती है। साथ ही कैंसर उपचार हेतु दवाओं के दुष्प्रभाव भी बहुत हद तक कम होते हंै। ऐनीमिया (अल्परक्तता) के रोगी का हिमोग्लोबिन बढ़ जाता है। थेलेसिमिया नामक बीमारी में बिना खून की बोतल चढ़ाए, हिमोग्लोबीन बढ़ जाता है। भूरे/सफेद हो गए बाल पुनः काले होने लगते हैं। गठिया (ओस्टियोआथ्र्राइटिस) के रोगी बढ़ते ही जा रहे हैं।

वे इन घास/जवारों से अप्रत्याशित लाभ पाते हैं। अगर इसके सेवन के साथ-साथ वे संतुलित, जीवित आहार करें, फास्ट फूड से बचें तथा नियमित योगाभ्यास करें तो बहुत लाभ होगा। लेखक के कुछ अनुभव बेहोश व्यक्ति का होश में आना: यह व्यक्ति उच्च रक्तचाप के कारण दिमाग की रक्त धमनी से रक्त निकलने से बेहोश हो गया था। पूरा बेहोश होने के कारण उसके पोषण हेतु राईल्स नली डालकर घर भेज दिया गया था। उसे दो सप्ताह तक पानी और दूब घास के सेवन से होश आ गया और उसके बाद जीवित शाकाहारी आहार से अब पूर्णतः ठीक है। मधुमेह: रोगी को 1989 से मधुमेह है। अब उन्हें पिछले 4-5 वर्ष से घुटनों में दर्द भी रहना शुरु हो गया था। कारण बताया गया कि ओस्टियोआथ्र्राइटिस हो गया है। रोजमर्रा के घर के कार्य करने में भी परेशानी महसूस होती थी। मेरे कहने पर उन्होंने गेहूं के जवारों को उगाया और जब ये जवारे 8-9 इंच लंबे हो गये तब उन्हें काट कर पीना शुरु किया। साथ में उन्हें पैरों की उंगलियां में सुन्नपन और पिंडलियों में दर्द रहने लगा था। उन्होंने न्यूरोबियोन के 10 इन्जेक्शन लगवाए पर कोई आराम नहीं हुआ। तब उन्होंने गेहूं के जवारे 20 दिन लिये। फिर अगले महीने 20 दिन इन जवारों का रस लिया। बाद में घर में व्यस्तता के कारण जवारों का रस पीना छोड़ दिया। उन्होंने इन्हीं दिनांे अलसी के कच्चे बीज भी 15-20 ग्राम रोज खाने शुरु कर दिये। अब मधुमेह काबू में रहता है, घुटने के दर्द में बहुत आराम हुआ और जो उंगलियां सुन्न पड़ गई थी उनमें, साथ ही पिंडलियों के दर्द में भी बहुत आराम आ गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि उन्हें जो एक प्रकार का अवसाद रहने लगा था, लगभग खत्म हो गया है। मोटापा: आज से करीब 7 महीने पहले जब एक सज्जन मेरे पास आए तो उनका वजन 114 किग्रा. था। उन्होंने मेरे कहने पर पका हुआ भोजन बंद कर अंकुरित अनाज, दाल, फल, सलाद एवं दूब घास खाना शुरु कर दिया। शुरु के पहले माह ये सब भोजन खाने में बहुत कष्ट होता था, अपने आपको बहुत काबू में रखना पड़ता था, परंतु जैसे ही पहला महीना गुज़रा उनका वजन 4 कि.ग्रा. कम हो गया। अब उन्हें कच्चे, अपक्व भोजन एवं दूब घास के सेवन में बहुत आनंद आने लगा। दूसरे माह में करीब 7 कि.ग्रावजन कम हो गया। शरीर में इतनी ताकत बढ़ गयी कि जहां 50 कदम चलने से ही सांस फूलने लगता था, रक्तचाप बढ़ा रहता था, अब दोनों में आराम आ गया। अब भी प्रति माह 2 कि. ग्रा. वजन नियमित रूप से कम होता जा रहा है। उनके पूरे परिवार ने अंकुरित कच्चे अनाज एवं फल, सलाद आदि को नियमित भोजन बना लिया है। वेरिकोज़ वेन्ज से उत्पन्न घाव: एक रोगी को रक्त धमनियों के रोग वेरिकोज़ वेन्ज के कारण न भरने वाला घाव बन गया था। तीन महीने घास के रस को पीने तथा जवारे के रस की पट्टी से हमेशा के लिए ठीक हो गया। एक सज्जन को कोई 10-12 वर्ष से सोरियासिस ;च्ेवतपंेपेद्ध नामक चर्म रोग था। उन्होंने मेरे आग्रह पर गेहूं के जवारे खाना तथा जवारों का लेप शुरु कर दिया। पहले महीने में त्वचा के चकत्तांे से खून आना तथा खुजली बंद हो गई। दूसरे माह में ये सभी सूखने शुरु हो गये, साथ ही चकत्तों की परिधि की त्वचा मुलायम होनी शुरु हो गई। इन्होंने प्रेडनीसोलोन नामक दवा खानी बंद कर दी। 4 महीनों में इनकी त्वचा सामान्य हो गयी। चेहरे पर झाइयां हो जाती हों या आंखों के नीचे काले गड्ढे पड़ जाते हों तो इन दोनों ही चर्म रोगों में जवारों का रस पीने के साथ-साथ लेप करने से 3 महीने में अप्रत्याशित लाभ मिलता है। बुखार: एक बच्चा जिसे बार-बार हर महीने बुखार हो जाता था, कई बार एक्सरे कराने एवं रक्त की जांच कराने पर कुछ दोष पता नहीं चलता था। दूब घास के रस को तीन महीने पीने के बाद कभी बुखार नहीं हुआ। जुकाम एवं साइनस: एक रोगी को प्रतिदिन छींक आती रहती थी, जुकाम रहता था तथा साइनस का शिकार हो गया था। जवारों के 6 माह तक नियमित सेवन से रोग खत्म हो गया। इन्फेक्शन से गले की आवाज बैठ ;स्ंतलदहपजपेद्ध गई हो तो भी जवारों का रस या दूब के रस के सेवन से पांच दिनों में पूरा आराम मिलता है। माइग्रेन (आधे सिर का दर्द): माइग्रेन ;डपहतंपदमद्ध के कुछ रोगियों को पहले ही दिन में तीन बार जवारों का रस पीने से 50 प्रतिशत तक लाभ हो जाता है। शारीरिक कमजोरी: एक साहब को रक्तचाप बढ़ जाने से रक्तस्राव होकर अधरंग हो गया था। दवाइयां खाने से अधरंग और रक्तचाप पर तो काबू आ गया परंतु उनका वजन काफी कम हो गया और बहुत शारीरिक कमजोरी हो गई। उन्होंने शिमला में किसी सज्जन की सलाह पर गेहूं के जवारे लेने शुरु कर दिए। 3 माह के अंदर पूरा कायाकल्प हो गया। कमजोरी का नामोनिशान नहीं रहा।जवारे का रस के बनाने की विधि
आप सात बांस की टोकरी  मे अथवा गमलों  मे  मिट्टी भरकर उन मे प्रति दिन बारी-बारी से कुछ उत्तम गेहूँ के दाने बो दीजिए और छाया   मे अथवा कमरे या बरामदे मे रखकर यदाकदा थोड़ा-थोड़ा पानी डालते जाइये, धूप न लगे तो अच्छा है। तीन-चार दिन बाद गेहूँ उग आयेंगे और आठ-दस दिन के बाद 6-8 इंच के हो जायेंगे। तब आप उसमें से पहले दिन के बोए हुए 30-40 पेड़ जड़ सहित उखाड़कर जड़ को काटकर फेंक दीजिए और बचे हुए डंठल और पत्तियों को धोकर साफ सिल पर थोड़े पानी के साथ पीसकर छानकर आधे गिलास के लगभग रस तैयार कीजिए ।
वह ताजा रस रोगी को रोज सवेरे पिला दीजिये। इसी प्रकार शाम को भी ताजा रस तैयार करके पिलाइये आप देखेंगे कि भयंकर रोग दस बीस दिन के बाद भागने लगेगे और दो-तीन महीने मंे वह मरणप्रायः प्राणी एकदम रोग मुक्त होकर पहले के समान हट्टा-कट्ठा स्वस्थ मनुष्य हो जायेगा। रस छानने में जो फूजला निकले उसे भी नमक वगैरह डालकर भोजन के साथ रोगी को खिलाएं तो बहुत अच्छा है। रस निकालने के झंझट से बचना चाहें तो आप उन पौधों को चाकू से महीन-महीन काटकर भोजन के साथ सलाद की तरह भी सेवन कर सकते हैं परन्तु उसके साथ कोई फल न खाइये। आप देखेंगे कि इस ईश्वरप्रदत्त अमृत के सामने सब दवाइयां बेकार हो जायेगी।




गेहूँ के पौधे 6-8 इंच से ज्यादा बड़े न होने पायें, तभी उन्हें काम मे  लिया जाय। इसी कारण गमले में या चीड़ के बक्स रखकर बारी-बारी आपको गेहूँ के दाने बोने पड़ेंगे। जैसे-जैसे गमले खाली होते जाएं वैसे-वैसे उनमें गेहूँ बोते चले जाइये। इस प्रकार यह जवारा घर में प्रायः बारहों मास उगाया जा सकता है।
सावधानियाँ

 रस निकाल कर ज्यादा देर नहीं रखना चाहिए।
रस ताजा ही सेवन कर लेना चाहिए। घण्टा दो घण्टा रख छोड़ने से उसकी शक्ति घट जाती है और तीन-चार घण्टे बाद तो वह बिल्कुल व्यर्थ हो जाता है।
ग्रीन ग्रास एक-दो दिन हिफाजत से रक्खी जाएं तो विशेष हानि नहीं पहुँचती है।
रस लेने के पूर्व व बाद मे  एक घण्टे तक कोई अन्य आहार न लें
गमलों में रासायनिक खाद नहीं डाले।
रस में अदरक अथवा खाने के पान मिला सकते हैं इससे उसके स्वाद तथा गुण में वृद्धि हो जाती है।
रस में नींबू अथवा नमक नहीं मिलाना चाहिए।
रस धीरे-धीरे पीना चाहिए।
इसका सेवन करते समय सादा भोजन ही लेना चाहिए। तली हुई वस्तुएं नहीं खानी चाहिए।
तीन घण्टे मे जवारे के रस के पोषक गुण समाप्त हो जाते हैं। शुरु मे कइयों को उल्टी होंगी और दस्त लगेंगे तथा सर्दी मालूम पड़ेगी। यह सब रोग होने की निशानी है। सर्दीं, उल्टी या दस्त होने से शरीर में एकत्रित मल बाहर निकल जायेगा, इससे घबराने की जरुरत नहीं है।
स्वामी रामदेव ने इस रस के साथ नीम गिलोय व तुलसी के 20 पत्तों का रस मिलाने की बात कहीं है।






28.6.19

पालक खाने के स्वास्थ्य लाभ



पालक हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है यह हमारी त्वचा की देखभाल करती है इसके अलावा यह बेहतर दृष्टि, स्वस्थ रक्तचाप, मजबूत मांसपेशियों, उम्र से संबंधित धब्बेदार अध: पतन (AMD), मोतियाबिंद, एथेरोस्लेरोसिस, दिल का दौरा, न्यूरोलॉजिकल लाभ, ऑस्टियोपोरोसिस, विरोधी अल्सरेटिव और कैंसर विरोधी लाभ, स्वस्थ भ्रूण विकास, और शिशुओं के लिएविकास में वृद्धि आदि इसके सम्मलित लाभ है।
आमतौर पर पालक को केवल हिमोग्‍लोबिन बढ़ाने वाली स‍ब्‍जी माना जाता हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसमें इसके अलावा भी बहुत से गुण विद्यमान है। पालक में कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, फाइबर और खनिज लवण होता हैं। साथ ही पालक में विभिन्न खनिज लवण जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन तथा विटामिन ए, बी, सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं।
खून की कमी दूर करें
पालक में आयरन की मात्रा बहुत अधिक होती है और इसमें मौजूद आयरन शरीर आसानी से सोख लेता है। इसलिए पालक खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। खून की कमी से पीड़ित व्यक्तियों को पालक खाने से काफी फायदा पहुंचता है।
रक्तचाप को बनाए रखता है Maintains blood pressure
पालक में पोटेशियम की बहुत ही उच्च मात्रा और सोडियम की मात्रा कम होती है। पालक का एक बहुत अधिक खतरा है मिनरलों की यह संरचना उच्च रक्तचाप वाले रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि पोटेशियम रक्तचाप कम करती है और सोडियम रक्तचाप बढ़ाता है।
पालक में उपस्थित फोलेट उच्च रक्तचाप की कम करने में योगदान देता है और उचित रक्त प्रवाह बनाए रखने के साथ-साथ रक्त वाहिकाओं को आराम देता है। कार्डियोवास्कुलर सिस्टम की मदद से आप तनाव को कम कर सकते हैं और इष्टतम कार्य क्षमता के लिए शरीर के अंग सिस्टम में ऑक्सीजन बढ़ा सकते हैं।


शरीर को बनाये मजबूत
पालक में मौजूद फ्लेवोनोइड्स एंटीआक्सीडेंट का काम करता हैं। यह तत्‍व रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने के अलावा हृदय संबंधी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार होता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन और विटामिन सी क्षय होने से बचाता है। सलाद में इसके सेवन से पाचनतंत्र मजबूत होता है और यह भूख बढ़ाने में सहायक होता है।
तंत्रिका संबंधी लाभ Neurological benefits
पोटेशियम, फोलेट और विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट आदि पालक के कई घटक है ये लोगों को न्यूरोलॉजिकल परेशानी में लाभ प्रदान करता है जो इसे नियमित रूप से उपभोग करते हैं। न्यूरोलॉजी के अनुसार, उनकी अल्जाइमर की बीमारी के कारण फोलेट कम हो जाती है।
इसलिए पालक उन लोगों के लिए बहुत अच्छा होते है जो तंत्रिका या संज्ञानात्मक गिरावट के उच्च जोखिम वाले लोग हैं। पोटेशियम भी मस्तिष्क स्वास्थ्य का एक अभिन्न अंग है और यह मस्तिष्क और बढ़ी हुयी अनुभूति, एकाग्रता और तंत्रिका गतिविधि में रक्त के प्रवाह में वृद्धि करता है।
मसल्‍स में मजबूती
अगर आप अपनी बाहों को गठीला और मसल्‍स को मजबूत बनाने चाहते हैं तो अपने आहार में पालक को जरूर शामिल करें। स्वीडन के कारोलिंस्का संस्थान के शोधकर्ताओं के अनुसार, पालक में मौजूद अजैविक नाइट्रेट मांसपेशियां को मजबूत बनाते हैं।



मोतियाबिंद के खतरे को रोकता है Prevents Cataract
पालक में मौजूद ल्यूटिन और ज़ेक्सैंटीन दोनों मजबूत एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं, इस प्रकार यह हमारी आंखों को UV किरणों के कठोर प्रभाव से बचाता है जिससे मोतियाबिंद हो सकता है। ये मुक्त कणों के प्रभाव को भी कम करते हैं, जो मोतियाबिंद और अन्य नेत्र संबंधित बीमारियों का एक प्रमुख कारण हो सकता है।
गर्भवती के लिए फायदेमंद
गर्भवती महिलाओं में अकसर फोलिक एसिड की कमी हो जाती है, इसकी कमी को दूर करने के लिए पालका का सेवन लाभदायक होता है। साथ ही पालक में पाया जाने वाला कैल्शियम बढ़ते बच्चों, बूढ़े व्यक्तियों और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पालक खाने से स्तनपान करानेवाली माताओ के स्तनों में अधिक दूध बनता है।
गर्मी से राहत
गर्मी में होने वाले नजले, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह लाभप्रद होता है। साथ ही पित्त को शांत करता है और गर्मी के कारण होने वाले पीलिया और खांसी में भी बहुत लाभदायक होता है।
रूखापन दूर करें
पालक त्‍वचा को रूखा होने से बचाता है। साथ ही चेहरे के कील मुहांसे मिटाने और त्‍वचा को स्‍वस्‍थ रखने में मददगार होता है। पालक का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे से झाइयां दूर हो जाती है। या पालक व गाजर के रस में थोड़ा सा नीबू कस रस को मिलाकर पीने से चेहरा सुंदर और कांतिमय होता है।
गैस्ट्रिक अलसर को कम करता है Helps in Gastric ulcer
यह पाया गया है कि पालक और कुछ अन्य सब्जियों में भी पेट की श्लेष्मा झिल्ली(Mucous membrane) की रक्षा करने की क्षमता होती है, जिससे गैस्ट्रिक अल्सर की को रोका जा सकता है।
इसके अलावा, पालक में पाया जाने वाला ग्ल्य्कोग्ल्य्सरोलिपिड (glycoglycerolipids), पाचन तंत्र के अन्दर की ताकत को बढ़ाता है, जिससे शरीर के उस हिस्से में किसी भी प्रकार की अवांछित सूजन नहीं आती है।
हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखता है Keeps bones strong
पालक विटामिन का एक अच्छा स्रोत है, जो हड्डी मैट्रिक्स में कैल्शियम को बनाए रखने का कार्य करता है, यह हड्डियों के लिए एक मिनरल है। इसके अलावा, मैंगनीज, तांबे, मैग्नीशियम, जस्ता और फास्फोरस जैसी अन्य मिनरलों से भी मजबूत हड्डियों के निर्माण में मदद मिलती है।
मोतियाबिंद के खतरे में लाभ
पालक का सेवन करने से हृदय रोग में भी फायदा होता है। इसके लिए आधा चम्‍मच चौलाई का रस, एक चम्‍मच पालक का रस और एक चम्‍मच नींबू का रस तीनों को मिलाकर सुबह नियमित रूप से सेवन करने से हृदय रोगी को लाभ होने लगेगा।
आंखों के लिये लाभकारी
पालक आंखो के लिए काफी अच्छी होती है। इसके सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ती हैं। ऐसे लोग जो रतौंधी से परेशान है और उन्‍हें हल्के प्रकाश में स्पष्ट दिखाई नहीं देता उनके लिए पालक किसी चमत्‍कार से कम नहीं होता है। ऐसे लोगों को गाजर व टमाटर के रस में बराबर मात्रा में पालक का जूस मिलाकर लेना चाहिए।
पाचन तंत्र के रोग
आधा गिलास कच्‍चे पालक का रस सुबह उठकर नियमित रूप से पीने से कुछ ही दिनों में कब्‍ज की समस्‍या दूर हो जाती है। आंतों के रोगों में पालक की सब्‍जी खाने से लाभ मिलता है। साथ ही पालक के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से पथरी पिघल जाती है और यूरीन के रास्‍ते इसके कण बाहर निकल जाते हैं।
बालों के लिए उपयोगी
पालक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ही नहीं बल्कि बालों के लिए भी बहत अच्छा होता है। जो लोग बाल गिरने की समस्‍या से परेशान हैं उन्हें पालक को अपने नियमित आहार में शामिल करना चाहिए। क्‍योकि पालक शरीर में आयरन की कमी को पूरा करके बालों को गिरने से रोकता है।
त्‍वचा की समस्‍या में लाभकारी
पालक झाइयां और झुर्रियों को दूर करने में भी आपकी मदद करता हैं। इसके लिए पालक और नीबू के रस में कुछ बूंदे ग्लिसरीन की मिलाकर सोते समय त्‍वचा पर लगाने से लाभ होता है। या फिर पालक का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे से झाइयां दूर हो जाती है। त्वचा पर फोड़े व फुन्सी हो जाने पर पालक के पत्तों को पानी में उबालकर धोने से शीघ्र ठीक हो जाते हैं।
आर्थराइटिस में फायदेमंद
शरीर के जोड़ों में होने वाली बीमारी जैसे आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस की भी संभावना को भी घटाता है। साथ ही जोड़ों के दर्द को दूर करने में भी सहायक होता है। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए पालक, टमाटर और खीरा आदि सब्जियों को सेवन करना चाहिए या इनका सलाद बनाकर खाना चाहिए।
मोटापा कम करें
पालक के रस में गाजर का रस मिलाकर पीने से चर्बी कम होने लगती है या फिर पालक के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है।





27.6.19

लालमिर्च खाने के फायदे और नुकसान



लाल मिर्च लगभग हर घर की रसोई में पाया जाता है और भोजन एवं व्यंजनों में इसका प्रयोग किया जाता है। यह एक तरह से मसाले का कार्य करता है और भोजन के स्वाद को बढ़ा देता है। लाल मिर्च को पोषक तत्वों का पावर हाउस कहा जाता है। यह भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ ही औषधिक गुणों से भी युक्त होती है। इसमें कई तरह के केमिकल कंपाउंड मौजूद होते हैं जो शरीर के विभिन्न विकारों को दूर करने में सहायक होते हैं। लाल मिर्च कॉपर, मैग्नेशियम, आरयल, मैगनीज और पोटैशियम जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत है। साथ ही इसमें विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन k भी पाए जाते है।
रेड चिली/लाल मिर्च सोलेनेसी कुल का सदस्या है और कैप्सिकम नामक पौधे का एक फल है। माना जाता है कि लाल मिर्च मैक्सिको की उपज है इसके बाद यह भारत में आयी। लाल मिर्च में कैप्सीकिन एक सक्रिय क्षार पाया जाता है जिसके कारण यह स्वाद में तीखा होता है। यह कच्चा, सूखा और पाउडर आदि रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। लाल मिर्च मसालेदार स्वाद वाला होता है और इसमें उच्च मात्रा में विटामिन सी और कैरोटीन पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, विटामिन बी सहित एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं।
लाल मिर्च लाल रक्त कोशिकाएं बनाने में सहायक
शरीर में आयरन की कमी के कारण एनीमिया और थकान की समस्या होती है। लाल मिर्च में कॉपर और आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो नई रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है। लाल मिर्च में फॉलिक एसिड भी पाया जाता है जो शरीर में लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करता है और खून की कमी को दूर करता है।
लाल मिर्च हृदय रोगों से बचाने में फायदेमंदशरीर में विभिन्न क्रियाओं के संचालन में पोटैशियम नामक खनिज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लाल मिर्च में पोटैशियम काफी मात्रा में पाया जाता है जो इन कार्यों में सहायक होता है। फोलेट के साथ पर्याप्त पोटैशियम लेने से हृदय रोगों का खतरा कम हो जाता है। लाल मिर्च में राइबोफ्लैविन और नियासिन भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। नियासिन व्यक्ति के शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और हृदय से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करता है।


लाल मिर्च फायदेमंद दर्द से राहत दिलाने में
ऑस्टियोआर्थराइटिस और डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण होने वाले दर्द को दूर करने में लाल मिर्च बहुत सहायक होता है। यह संवेदी रिसेप्टर को असंवेदनशील बनता है और एंटीइंफ्लैमेटरी गुण होने के कारण सूजन को कम करने में भी सहायता करता है। भोजन में लाल मिर्च का प्रयोग करने से एथरोस्क्लेरोसिस (atherosclerosis) से बचाव होता है।
लाल मिर्च पाउडर के फायदे आंत की बीमारियों में
एंटीबैक्टीरियल एवं एंटी फंगल गुणों से युक्त होने के कारण लाल मिर्च का उपयोग खाद्य संरक्षक  के रूप में किया जाता है। लाल मिर्च में मौजूद कैप्सेकिन एच पाइलोरी  नामक बैक्टीरिया को नष्ट करता है और आंत में सूजन होने की समस्या से बचाता है। इसलिए आंत्र रोगों  से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
लाल मिरची के फायदे स्वस्थ आंखों के लिए
एक रिसर्च में पाया गया है कि प्रतिदिन एक चम्मच लाल मिर्च का सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती हैं। लाल मिर्च में विटामिन ए पाया जाता है जो आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में मदद करता है और रात में आंखों से न दिखने की समस्या को भी दूर करता है।
लाल मिर्च खाने के फायदे लंबी उम्र के लिए
विभिन्न अध्ययनों में यह पाया गया है कि 30 साल की उम्र के बाद प्रतिदिन कम से कम 5 से 6 बार भोजन में लाल मिर्च का प्रयोग करने से व्यक्ति की आयु लंबी होती है। जो लोग प्रतिदिन लाल मिर्च का सेवन नहीं करते हैं उनकी अपेक्षा प्रतिदिन लाल मिर्च का सेवन करने वाले लोगों में मृत्युदर कम पायी जाती है क्योंकि यह खून में आईजीएफ-1 नामक एंटी एजिंग हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है।


लाल मिर्च के गुण कैंसर से बचाने
एक अध्ययन में पाया गया है कि लाल मिर्च ल्यूकेमिया  और कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने में मदद करता है। हल्दी की तरह करी बनाते समय इसमें लाल मिर्च का प्रयोग करने से यह ट्यूमर एवं कैंसर को बढ़ने से रोकता है। इसके अलावा यह स्तन कैंसर  को भी बढ़ने से रोकने में मदद करता है।
 वजन घटाने में फायदेमंद
मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। नियमित रूप से भोजन में लाल मिर्च या लाल मिर्च पावडर का प्रयोग करने से अधिक भोजन करने की इच्छा घटती है और मेटाबोलिज्म बढ़ता है। लाल मिर्च का सेवन करने के बाद शरीर में गर्मी आती है जिससे एनर्जी बढ़ती है  और अतिरिक्त कैलोरी घटती है। इसलिए शरीर का वजन घटाने के लिए लाल मिर्च बहुत फायदेमंद है।


लाल मिर्च खाने के नुकसान
रेड चिली/लाल मिर्च में कैप्सैकिन होता है जो अधिक मसालेदार प्रकृति का होता है।
लाल मिर्च का सेवन करने से मुंह, जीभ और गले में जलन की समस्या हो सकती है।
लाल मिर्च में पाया जाने वाला कैप्सैकिन मुख गुहा(oral cavity), गले और पेट के संपर्क में आने से सूजन और जलन पैदा कर सकता है।
यदि हाथ में लाल मिर्च लगा हो तो उस हाथ से आंखों को नहीं छूना चाहिए अन्यथा आंखों में जलन  हो सकती है और आंखें लाल हो सकती हैं।
लाल मिर्च में एफ्लैटोक्सिन नामक रसायन यौगिक पाया जाता है जिसके कारण पेट, लिवर और कोलन कैंसर की समस्या हो सकती है।