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23.5.26

“गठिया रोग (आमवात) का आयुर्वेदिक इलाज: कारण, लक्षण और घरेलू उपाय:Gout,Arthritis

 


जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जोड़ों का दर्द और गठिया रोग भी आम होता जा रहा है। आज युवा और बुजुर्ग दोनों ही इस समस्या से जूझ रहे हैं। अनियमित खान-पान, खराब दिनचर्या, तनाव और विरुद्ध आहार इन समस्याओं की मुख्य वजह बन रहे हैं। आयुर्वेद में इसे आमवात कहते हैं, जिसे आम भाषा में गठिया रोग या संधिवात भी कहा जाता है।

अभी पढ़ें और जानें गठिया से छुटकारा पाने के असरदार आयुर्वेदिक उपाय!

आमवात क्या है? (आयुर्वेदिक परिभाषा)

आमवात दो शब्दों से मिलकर बना है — आम + वात

  • आम का अर्थ है अपक्व (अधपचा) अन्न या विषाक्त पदार्थ जो शरीर में जमा हो जाता है (आधुनिक भाषा में यूरिक एसिड या टॉक्सिन्स)।
  • वात दूषित वायु या वात दोष को कहते हैं।

जब अधपचा भोजन (आम) दूषित वात के साथ मिल जाता है, तो यह शरीर की संधियों (जोड़ों) में जमा होकर तीव्र दर्द, सूजन, अकड़न और जकड़न पैदा करता है। चरक संहिता में आमवात का उल्लेख है, लेकिन इसका विस्तृत वर्णन माधव निदान में मिलता है।

आमवात के प्रमुख लक्षण

  • जोड़ों में तेज दर्द और सूजन
  • सुबह उठते ही जोड़ों में अकड़न (Morning stiffness)
  • थकान, आलस्य और हल्का बुखार
  • स्पर्श करने पर भी दर्द
  • कुछ मामलों में हृदय क्षेत्र में भारीपन

आमवात के मुख्य कारण

आयुर्वेद के अनुसार यह मुख्य रूप से विरुद्ध आहार और मंदाग्नि (कमजोर पाचन) के कारण होता है।

  • स्वाद के चक्कर में स्निग्ध, भारी या ठंडा-गर्म मिश्रित भोजन खाना
  • खाने के तुरंत बाद व्यायाम या शारीरिक श्रम करना
  • रुक्ष, शीतल, विषम आहार-विहार
  • रात जागना, अत्यधिक चिंता, शोक या भय
  • मल-मूत्र आदि अधारणीय वेगों को रोकना
  • अनियमित दिनचर्या जिससे यूरिक एसिड शरीर में जमा होता रहता है

आधुनिक दृष्टि से भी यही बात साबित होती है — खराब खान-पान और lifestyle से यूरिक एसिड बढ़ता है, जो मुख्यतः जोड़ों में जमा होकर दर्द पैदा करता है।

आमवात की संप्राप्ति (रोग प्रक्रिया)

आचार्य माधवकर ने आमवात को चार प्रकारों में बांटा है:

  1. वातप्रधान आमवात
  2. पित्तप्रधान आमवात
  3. कफप्रधान आमवात
  4. सन्निपातज आमवात

इसमें मुख्य दोष वात और कफ होते हैं, जबकि दूषित धातुएँ रस, रक्त, मांस, स्नायु और अस्थि होती हैं। रोग का अधिष्ठान मुख्यतः जोड़ों की संधि क्षेत्र है।

गठिया रोग में क्या करें? – आयुर्वेदिक उपचार सिद्धांत

सबसे पहले आहार-विहार सुधारें:

  • यूरिक एसिड बढ़ाने वाले भोजन (रेड मीट, शराब, फास्ट फूड, अधिक दाल-चना) का त्याग करें।
  • अधिक पानी पिएं ताकि विषाक्त पदार्थ मूत्र के साथ बाहर निकल सकें।
  • विटामिन C, E और कैरोटिन युक्त फल-सब्जियां लें।
  • तली-भुनी और अधिक वसायुक्त चीजों से परहेज रखें।
  • नियमित हल्का व्यायाम और धूप लें (विटामिन-D के लिए)।

प्रभावी घरेलू उपाय (Home Remedies for Gathiya)

  1. अदरक: अदरक की चाय, या अदरक+हल्दी+शहद वाला गर्म पानी पिएं। इसमें प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
  2. हल्दी: आधा चम्मच हल्दी + आधा चम्मच अदरक पाउडर को पानी में उबालकर शहद के साथ दिन में दो बार पिएं। करक्यूमिन सूजन कम करता है।
  3. तुलसी: तुलसी की चाय रोज 3-4 बार पिएं — एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक।
  4. गर्म-ठंडा कंप्रेशन: गर्म पानी की बोतल या बर्फ से सेंक करें। गर्मी मांसपेशियों को आराम देती है, ठंडक सूजन घटाती है।
  5. अजवायन, लहसुन और तिल का तेल: इनसे मालिश करें। अजवायन को पानी में उबालकर भाप लें या सेंक करें।
  6. नीम का तेल या अमरूद के पत्तों का लेप भी राहत देता है।
  7. सेंधा नमक से गुनगुने पानी में नहाएं।

आमवात की आयुर्वेदिक औषधियां (Herbal Medicines)

आयुर्वेद में गठिया के लिए कई प्रभावी औषधियां हैं:

  • गुग्गुल योग: सिंहनाद गुग्गुल, योगराज गुग्गुल, कैशोर गुग्गुल, त्रयोदशांग गुग्गुल
  • रस औषधियां: महावातविध्वंसन रस, मल्लासिंदूर रस आदि
  • क्वाथ: रास्नासप्तक क्वाथ, दशमूल क्वाथ, पुनर्नवा कषाय
  • तेल/घृत: प्रसारिणी तेल, एरंड तेल, सैन्धव तेल (स्थानिक मालिश के लिए)
  • अन्य: पुनर्नवा आसव, अमृतारिष्ट, चूर्ण जैसे अजमोदादी चूर्ण आदि

स्वेदन (पत्रपिंड स्वेद, निर्गुंडी वाष्प) और पोटली सेक (निर्गुंडी, हल्दी, एरंडपत्र) भी बहुत लाभकारी हैं।

विशेष सलाह

संधिवात, गठिया, कमर दर्द, साइटिका या घुटनों के पुराने दर्द में जड़ी-बूटियों से बनी शुद्ध हर्बल औषधि सबसे प्रभावी साबित होती है। यह रोग को जड़ से खत्म करने में मदद करती है और बिस्तर पकड़े पुराने मरीजों को भी दर्द-मुक्त गतिशीलता देती है।

औषधि परामर्श के लिए संपर्क करें: वैद्य श्री दामोदर — 98267-95656

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12.8.19

मखाना सूखा मेवा है गुणों का खजाना,makhana ke fayde


मखाना एक हल्का-फुल्का स्नैक्स है जिसे हम सूखे मेवों में शामिल करते हैं। अगर इसे नियमित तौर पर सही तरीके से अपनी डाइट में शामिल किया जाए, तो इसके अगगिनत सेहत लाभ पाए जा सकते हैं।
ड्रायफ्रूट्स हर सीजन में खूब खाएं जाते हैं। ये पोषक तत्‍वों से भरे होते हैं जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। वैसे तो सारे सूखे मूवे गुणों से भरपूर होते है लेक‍िन हल्के-फुल्के से द‍िखने वाले मखाने खाने के भारी भरकम फायदे जानने के बाद आप इसे डाइट में शामिल कर लेंगे। अगर आप जल्द से जल्द मधुमेह को खत्म करना चाहते है और सेहत के अन्य लाभ पाना चाहते हैं, तो सुबह खाली पेट चार मखाने खाएं। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें।

जोड़ों का दर्द दूर

मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इनका सेवन जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।


मधुमेह के मरीजों के ल‍िए है अमृत

अगर आप जल्द से जल्द मधुमेह को खत्म करना चाहते है और सेहत के अन्य लाभ पाना चाहते हैं, तो सुबह खाली पेट चार मखाने खाएं। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें। 1 आप मखाने के चार दानों का सेवन करके शुगर से हमेशा के लिए निजात पा सकते है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। फिर धीरे-धीरे शुगर रोग भी खत्म हो जाता है।

पाचन में सुधार

मखाना एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आसानी से पच जाता है। इसके अलावा फूल मखाने में एस्‍ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मददगार है

तनाव कम -

मखाने के सेवन से तनाव दूर होता है और अनिद्रा की समस्या भी दूर रहती है। रात को सोने से पहले दूध के साथ मखानों का सेवन करें और खुद फर्क महसूस करें।

दिल के लिए फायदेमंद

मखाना केवल शुगर के मरीज के लिए ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदेमंद है। इनके सेवन से दिल स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है।


किडनी को मजबूत

फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करता है। किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड को बेहतर रखने के लिए खानों का नियमित सेवन करें।

प्रेगनेंसी के दौरान

प्रेगनेंसी के दौरान अगर गर्भवती महिला मखाने का सेवन करे तो वो काफी फायदेमंद होता है|मखाना में कैल्शियम और आयरन पाया जाता है. ये गर्भ में पल रहे शिशु के लिए लाभकारी होते हैं. गर्भवती महिला एक कप मखाना का सेवन रोज़ करें.
*अगर सही मात्रा और सही समय पर इन्हें डायट में शामिल किया जाए तो वजन घटाने में लाभकारी हो सकते हैं.
* मखाना में सोडियम की मात्रा कम होती है. वहीं दूसरी ओर इनमें पोटैशियम और मैग्नीशियम काफी ज्यादा होता है जो उच्च रक्तचाप की समस्या को खत्म करता है.
*कैल्शियम की मात्रा पाई जाने के कारण ये हड्डियों और दांतों के लिए लाभकारी होते हैं.
  1. पायरिया के घरेलू इलाज
  2. चेहरे के तिल और मस्से इलाज
  3. लाल मिर्च के औषधीय गुण
  4. लाल प्याज से थायराईड का इलाज
  5. जमालगोटा के औषधीय प्रयोग
  6. एसिडिटी के घरेलू उपचार
  7. नींबू व जीरा से वजन घटाएँ
  8. सांस फूलने के उपचार
  9. कत्था के चिकित्सा लाभ
  10. गांठ गलाने के उपचार
  11. चौलाई ,चंदलोई,खाटीभाजी सब्जी के स्वास्थ्य लाभ
  12. मसूड़ों के सूजन के घरेलू उपचार
  13. अनार खाने के स्वास्थ्य लाभ
  14. इसबगोल के औषधीय उपयोग
  15. अश्वगंधा के फायदे
  16. लकवा की चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि वृहत वात चिंतामणि रस
  17. मर्द को लंबी रेस का घोडा बनाने के अद्भुत नुस्खे
  18. सदाबहार पौधे के चिकित्सा लाभ
  19. कान बहने की समस्या के उपचार
  20. पेट की सूजन गेस्ट्राईटिस के घरेलू उपचार
  21. पैर के तलवों में जलन को दूर करने के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार
  22. लकवा (पक्षाघात) के आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे
  23. डेंगूबुखार के आयुर्वेदिक नुस्खे
  24. काला नमक और सेंधा नमक मे अंतर और फायदे
  25. कालमेघ जड़ी बूटी लीवर रोगों की महोषधि
  26. हर्निया, आंत उतरना ,आंत्रवृद्धि के आयुर्वेदिक उपचार
  27. पाइल्स (बवासीर) के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे
  28. चिकनगुनिया के घरेलू उपचार
  29. चिरायता के चिकित्सा -लाभ
  30. ज्यादा पसीना होने के के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार
  31. पायरिया रोग के आयुर्वेदिक उपचार
  32. व्हीटग्रास (गेहूं के जवारे) के रस और पाउडर के फायदे
  33. घुटनों के दर्द को दूर करने के रामबाण उपाय
  34. चेहरे के तिल और मस्से हटाने के उपचार
  35. अस्थमा के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलू नुस्खे
  36. वृक्क अकर्मण्यता(kidney Failure) की रामबाण हर्बल औषधि
  37. शहद के इतने सारे फायदे नहीं जानते होंगे आप!
  38. वजन कम करने के उपचार
  39. केले के स्वास्थ्य लाभ
  40. लीवर रोगों की महौषधि भुई आंवला के फायदे
  41. हरड़ के गुण व फायदे
  42. कान मे मेल जमने से बहरापन होने पर करें ये उपचार
  43. पेट की खराबी के घरेलू उपचार
  44. शिवलिंगी बीज के चिकित्सा उपयोग
  45. दालचीनी के फायदे
  46. बवासीर के खास नुखे
  47. भूलने की बीमारी के उपचार
  48. आम खाने के स्वास्थ्य लाभ
  49. सोरायसीस के उपचार
  50. गुर्दे की सूजन के घरेलू उपचार


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