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18.2.17

लाजवंती (छुई मुई ) के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण



  


  छुई मुई पौधे के घरेलु नुस्खे

छुई मुई का पौधा अपने आप में थोडा अजीब तरह का पौधा है साथ ही छुई मुई का दूसरा नाम लाजवंती भी है. इसके इन दोनों नामों के पीछे भी कारण है, जैसे ही हम इस पौधे को छूते हैं ये खुद को सिकोड़कर छोटे रूप में बदल जाता है. उस समय ऐसा प्रतीत होता है मानो ये हमसे शर्मा रहा होऔर यही कारण है कि इसका नाम लाजवंती पड़ा. छुई मुई का वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका भी है जबकि देसी नाम लजोली भी है. इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं, जो देखने में बहुत आकर्षक और सुन्दर प्रतीत होते हैं.
   लाजवंती नमी वाले स्थानों में ज्यादा पायी जाती है इसके छोटे पौधे में अनेक शाखाएं होती है। इसका वानस्पतिक नाम माईमोसा पुदिका है। संपूर्ण भारत में होने वाला यह पौधा अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। इनके पत्ते को छूने पर ये सिकुड़ कर आपस में सट जाती है। इस कारण इसी लजौली नाम से जाना जाता है इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं । लाजवंती का पौधा एक विशेष पौधा है। इसके गुलाबी फूल बहुत सुन्दर लगते हैं और पत्ते तो छूते ही मुरझा जाते हैं। इसे छुईमुई भी कहते हैं।


पेशाब की समस्यायें रखें दूर - 

यदि किसी को अधिक पेशाब आने की समस्या है तो छुई मुई के पत्तों को सबसे पहले पानी में पिस लें और एक लेप तैयार करें. अब इस लेप को नाभि के निचले हिस्से लगाएं, इससे बार बार पेशाब आने की समस्या में शीघ्र आराम मिलता है.
*लाजवंती के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। पत्तियों के रस की 4 चम्मच मात्रा दिन में एक बार लेने से भी फायदा होता है।
*लाजवंती की जड़ और पत्तों का पाउडर दूध में मिलाकर दो बार लेने से बवासीर और भगंदर रोग ठीक होता है। *पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लगाने से घाव जल्दी सुख जाता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है।
*लाजवंती की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त में जड़ों का पानी में तैयार काढ़ा भी खूनी दस्त रोकने में कारगर होता है।
*लाजवंती के पत्तों का 1 चम्मच पाउडर मक्खन के साथ मिलाकर भगंदर और बवासीर होने पर घाव पर रोज सुबह-शाम या दिन में 3 बार लगाने से ठीक हो जाता है |

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*यदि लाजवंती की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बनाया जाए और इसे डायबिटीज रोगी को दिया जाए तो डायबिटीज में काफी फायदा होता है।

*खुनी दस्त में आराम 

यदि कोई खुनी दस्त से ग्रस्त है तो छुई मुई की जड़ों का चूर्ण बना लें, 3 ग्राम चूर्ण को दही के साथ खाने से खुनी दस्त जल्दी बंद हो जाता है.
लाजवंती की जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरुषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। इसकी जड़ों और बीजों के चूर्ण की 4 ग्राम मात्रा हर रात एक गिलास दूध के साथ एक माह तक लगातार ले।

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*अगर diabetes है तो इसका 5 ग्राम पंचांग का पावडर सवेरे लें .
*पथरी किसी भी तरह की है तो , इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ .

*चर्म रोगों में राहत ( Cures Skin Diseases ) : 


आधुनिक विज्ञान ने भी ये माना है कि त्वचा संक्रमण हो जाने पर छुई मुई के रस को दिन में 3 बार त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है.

*पेशाब रुक – रुक कर आता है

या कहीं पर भी सूजन या गाँठ है तो इसके 5 ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ
लाजवंती और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस लिया जाए और तैयार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के-हल्के मालिश किया जाए तो धीरे-धीरे ढीलापन दूर होता है।
लाजवंती के बीजों के चूर्ण (3 ग्राम) को दूध के साथ मिलाकर रोजाना रात को सोने से पहले लिया जाए तो शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।

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*स्तनों का ढीलापन दूर करे ( Removes Breasts Sagginess ) :

 यदि स्त्रियों के स्तनों के ढीलेपन की समस्या है तो छुई मुई की जड़ों और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर अच्छे से मिलाकर पीस लें और पानी के साथ लेप बना लें. रोजाना दिन में दो बार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के - हल्के मालिश करें, स्तनों का ढीलापन दूर हो जायेगा.
*हड्डियों के टूटने और मांस-पेशियों के आंतरिक घावों के उपचार में लाजवंती की जड़ें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। घावों को जल्दी ठीक करने में इसकी जड़ें सक्रियता से कार्य करती हैं।

गले के रोग ( Treat Goiter ) :

 जिन्हें गोईटर की समस्या हो उनको छुई मुई की पत्तियों को पीसकर रोजाना दिन में दो बार लगाएं समस्या से तुरंत आराम मिलेगा.*स्तन में गाँठ या कैंसर की सम्भावना हो तो ,
 लाजवंती की जड़ और अश्वगंधा की जड़ घिसकर लगाएँ .

हड्डियों को मजबूती दे ( Strengthen Bones ) :

 छुई मुई हड्डियों के टूटने और मांसपेशियों के आंतरिक घावों को जल्द ही ठीक करता है.

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*अगर खांसी हो तो लाजवंती के जड़ के टुकड़ों के माला बना कर गले में पहन लो . हैरानी की बात है कि जड़ के टुकड़े त्वचा को छूते रहें ; बस इतने भर से गला ठीक हो जाता है . इसके अलावा इसकी जड़ घिसकर शहद में मिलाये . इसको चाटने से , या फिर वैसे ही इसकी जड़ चूसने से खांसी ठीक होती है . इसकी पत्तियां चबाने से भी गले में आराम आता है .

*टोंसील ( Tonsil ) : 

यदि किसी के टांसिल्स बढ़ गए हों तो छुई मुई की पत्तियों को पीसकर रोजाना दिन में दो बार लगाएं समस्या से तुरंत आराम मिलेगा.
*लाजवंती का मुख्य गुण संकोचन का है . इसलिए अगर कहीं भी मांस का ढीलापन है तो , इसकी जड़ का गाढ़ा सा काढा बनाकर वैसलीन में मिला लें और मालिश करें . anus बाहर आता है तो toilet के बाद मालिश करें .
uterus बाहर आता है तो, पत्तियां पीसकर रुई से उस स्थान को धोएँ .

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नपुंसकता दूर करे ( Removes Impotency )
:
 नपुंसकता को दूर करने के लिए तीन से चार इलायची, छुई मुई की 2 ग्राम जड़, सेमल की 3 ग्राम छाल को आपस में अच्छे सेमिलकर कुचल लिया जाये और रोजाना एक गिलास दूध में मिलाकर रात को सोने से पहले पिया जाये तो आपको हो रही नपुंसकता को दूर किया जा सकता है.
*hydrocele की समस्या हो या सूजन हो तो पत्तोयों को उबालकर सेक करें या पत्तियां पीसकर लेप करें .
हृदय या kidney बढ़ गए हैं, उन्हें shrink करना है , तो इस पौधे को पूरा सुखाकर , इसके पाँचों अंगों ((फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़) ) का 5 ग्राम 400 ग्राम पानी में उबालें . जब रह जाए एक चोथाई, तो सवेरे खाली पेट पी लें .
*यदि bleeding हो रही है piles की या periods की या फिर दस्तों की , तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ पीसकर उसे दही में मिलाकर प्रात:काल ले लें ,या इसके पांच ग्राम पंचांग का काढ़ा पीएँ.

किडनी रोगों से निवारण ( Removes Kidney Problems ) : 

किडनी में किसी तरह की समस्या होने पर आपको सबसे पहले इसका पूरा पौधा सुखाना है फिर इसके पाँचों अंगों को जोकि फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़ को 5 ग्राम की मात्रा में लेकर 400 ग्राम पानी मेंतब तक उबालें जब तक पानी ¼ ना रह जाये, अब इसे रोज सवेरे खली पेट पी लें, आपको निश्चित लाभ मिलेगा.
*Goitre की या tonsil की परेशानी हो तो , इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लेप करें .
*Uterus में कोई विकार है तो , इसके एक ग्राम बीज सवेरे खाली पेट लें
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