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8.3.17

उच्च रक्तचाप (High blood pressure) के कारण, लक्षण और उपचार





   आज पूरी दुनियाँ मे उच्च रक्त चाप यानि की hypertension एक गंभीर समस्या बनी हुई है। आम भाषा में हम इसे High Blood Pressure (BP) कहते है। यह एक जानलेवा बीमारी है। High Blood Pressure एक शांत ज्वालामुखी की तरह है जिसमे बाहर से कोई लक्षण या खतरा नहीं दिखाई नहीं देता पर जब यह ज्वालामुखी फटता है तो हमारे शरीर पर लकवा और हार्ट अटैक जैसे गम्भीर परिणाम हो सकते है। पहले यह माना जाता था की यह समस्या उम्रदराज लोगो की समस्या है लेकिन बदलते माहौल मे hypertension की समस्या बच्चो और युवाओ मे भी फैलती जा रही है।
क्यों होता है ब्लड प्रेशर
   चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, भय आदि मानसिक विकार। अनियमित खानपान। कई बार आवश्यकता से अधिक खाना। मैदा से बने खाद्य पदार्थ, चीनी, मसाले, तेल, घी, अचार, मिठाइयां, मांस, चाय, सिगरेट व शराब आदि का सेवन।
    रक्त चाप बढने से तेज सिर दर्द,थकावट,टांगों में दर्द ,उल्टी होने की शिकायत और चिडचिडापन होने के लक्छण मालूम पडते हैं। यह रोग जीवन शैली और खान-पान की आदतों से जुडा होने के कारण केवल दवाओं से इस रोग को समूल नष्ट करना संभव नहीं है। जीवन चर्या एवं खान-पान में अपेक्षित बदलाव कर इस रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया सकता है।Hypertension का ज़्यादातर लोगो में कोई खास लक्षण नहीं होते है। कुछ लोगो में ज्यादा Blood Pressure बढ़ जाने पर सरदर्द होना, ज़्यादा तनाव, सीने में दर्द या भारीपन, सांस लेने में परेशानी, अचानक घबराहट, समझने या बोलने में कठिनाई, चहरे, बांह या पैरो में अचानक सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना या धुंदला दिखाई देना जैसे लक्षण दिखाई देते है
   हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। जैसे- दिमाग, आंख, दिल, गुर्दा और शरीर की धमनियां। अगर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आपको हार्ट-अटैक, नस फटने और किडनी फेल होने की ज्यादा संभावना होती है। हाई ब्लड प्रेशर के रोगी को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। नियमित व्यायाम रक्त-संचार को स्थिर करता है और हार्ट-अटैक की संभावना को कम करता है।


हाई ब्लड प्रेशर के मुख्य कारण--

१) मोटापा
२) तनाव(टेंशन)
३) महिलाओं में हार्मोन परिवर्तन
४) ज्यादा नमक उपयोग करना
अब यहां ऐसे सरल घरेलू उपचारों की चर्चा की जायेगी जिनके सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने से बिना गोली केप्सुल लिये इस भयंकर बीमारी पर पूर्णत: नियंत्रण पाया जा सकता है-
१) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोगी को नमक का प्रयोग बिल्कुल कम कर देना चाहिये। नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है।
२) उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है।
सोडियम, सोडियम क्लोराइड) कम खाएं या खाने से बचें | आपको अपनी डाइट में निश्चित रूप से नमक की कम मात्रा की ज़रूरत होती है | सोडियम मांसपेशियों और नर्व (nerves) में इलेक्ट्रिक प्रोसेस (electric process) का नियमन करने में मदद करता है लेकिन इसकी अधिक मात्रा लेने से अतिरिक्त तरल इकठ्ठा होने लगता है जिससे आपके रक्त का तरल आयतन बढ़ जाता है | जब आपके रक्त का आयतन अधिक हो जाता है तब इस अतिरिक्त आयतन या वॉल्यूम को पूरे शरीर में गति कराने के लिए ह्रदय को पंप करने में कठिनाई होती है | इस कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है | याद रखें, यह सिर्फ नमक नहीं है जिसे आप अपने भोजन में पकाते समय या खाते समय डालते हैं बल्कि यह सोडियम की मात्रा भी है जो आपके ख़रीदे गये तैयार भोजन में पायी जाती है | कई तैयार, पैकेज्ड भोज्य पदार्थों में सोडियम बेंजोएट (sodium benzoate) एक परिरक्षक (preservative) के रूप में पाया जाता है | आपको “लेबल पर ध्यान देने वाला” और “कम नमक/सोडियम” या ‘बिना नमक वाले” भोज्य पदार्थ खरीदने वाला व्यक्ति बनना चाहिए और बिना नमक का भोजन पकाना चाहिए | परन्तु, ऐसे प्रोडक्ट्स से सावधान रहें जो सोडियम के स्थान पर पोटैशियम को लेकर प्रोडक्ट में “कम सोडियम” होने का दावा करते हैं क्योंकि ये और अधिक हानिकारक हो सकते हैं |
उच्च रक्त चाप के घरेलू उपचार -
*नमक और अन्य योजकों के साथ साधारण प्रसंस्कृत (processed) खाद्य पदार्थों, तैयार, डिब्बाबंद और बोतलबंद भोज्य पदार्थों जैसे मीट, अचार, ऑलिव, सूप, मिर्च, सॉसेज, बेकरी प्रोडक्ट्स और मोनो सोडियमग्लूटामेट (monosodium glutamate) या एमएसजी और पानी मिला हुआ मीट (जिसमे सोडियम की उच्च मात्रा पाई जाती है) लेने से बचें: मसालों से भी बचें जैसे तैयार मस्टर्ड या सरसों का सॉस, चिली सॉस, सोया सॉस, केचप, और अन्य सौसेस | प्रतिदिन 2 ग्राम (2000 मिलीग्राम) के कम सोडियम गृहण करने की कोशिश करें |
इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है।लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू वस्तु है।यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।
*एक बडा चम्मच आंवला का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह -शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।

* जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गरम पानी में काली मिर्च पावडर एक चम्मच घोलकर २-२ घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही मुकाम पर लाने का बढिया उपचार है।
* तरबूज का मगज और पोस्त दाना दोनों बराबर मात्रा में लेकर पीसकर मिला लें। एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट पानी से लें।३-४ हफ़्ते तक या जरूरत मुताबिक लेते रहें।
* बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा निंबू निचोडकर २-२ घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।
* तुलसी की १० पती और नीम की ३ पत्ती पानी के साथ खाली पेट ७ दिवस तक लें।
कई शोधों में यह माना जा चुका है कि ब्लड प्रेशर सर्दियों में अधिक होता है जबकि गर्मियों में कम। ऐसे में इस मौसम की कड़कती ठंड में हाई बीपी के मरीजों को दिल के दौरे या स्ट्रोक की समस्या सबसे अधिक होने की आशंका होती है।
*अदरक:-
प्याज और लहसून की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैलसियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।


*लालमिर्च:-

धमनियों के सख्त होने के कारण या उनमे प्लेक जमा होने की वजह से रक्त वाहिकाएं और नसें संकरी हो जाती हैं जिससे कि रक्त प्रवाह में रुकावटें पैदा होती हैं। लेकिन लाल मिर्च से नसें और रक्त वाहिकाएं चौड़ी हो जाती हैं, फलस्वरूप रक्त प्रवाह सहज हो जाता है और रक्तचाप नीचे आ जाता है।
*उच्च रक्तचाप के रोगी को सबसे पहले अनुलोम-विलोम का अभ्यास करना चाहिए। उसके बाद सुखासन ( आराम की मुद्रा ) में बैठकर जीभ को बाहर निकालकर नलीनुमा बनाइए और मुंह से सांस को आराम से अंदर खींचिए। सांस अंदर खीचने के बाद जीभ अंदर करके मुंह बंद करें और फिर नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें। शुरूआत में यह क्रिया 5 बार कीजिए उसके बाद इसे बढाकर 50-60 कर दीजिए।
*अधिकतर चिकित्सा विशेषज्ञ “कम सोडियम वाली डाइट” लेने कि सलाह देते हैं जिसमे सोडियम की मात्रा प्रतिदिन 1100 से 1500 मिलीग्राम के बीच हो | अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार वास्तव में मनुष्य का शरीर प्रतिदिन 200 मिलीग्राम से कम सोडियम खाने पर भी अपना काम सुचारू रूप से कर सकता है |
*अच्छे स्वाद के लिए कई ब्रांड्स बिना नमक के मसाले बनाते हैं जिनमे मसालों और हर्ब्स के पाउडर और ठोस संयोजन आते हैं | साथ ही, नकली नमक वाले प्रोडक्ट्स सिर्फ कम या “लाइट” साल्ट वाले प्रोडक्ट्स नहीं हैं बल्कि ये “नमक के विकल्प” होते हैं (जैसे पोटैशियम पर आधारित पोटैशियम क्लोराइड) और इनका “सोडियम युक्त नमक से भिन्न” स्वाद के रूप में संयम से उपयोग किया जाना चाहिए |

*चावल:-(भूरा) उपयोग में लावें। इसमें नमक ,कोलेस्टरोल,और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है। इसमें पाये जाने वाले केल्शियम से नाडी मंडल की भी सुरक्षा हो जाती है।
मध्यम और बिना चर्बी वाला आहार खाएं और उत्तेजकों से बचें: 

कैफीन, ज्यादा मात्रा में चॉकलेट, चीनी, सफ़ेद कार्ब्स (carbs) (हालाँकि ब्रेड, पेस्ट्रीज और केक्स की तरह पास्ता तुरंत शर्करा में परिवर्तित नहीं होता), कैंडी, चीनीयुक्त पेय और आहर में उपस्थित अतिरिक्त फैट से बचें | बहुर अधिक मांस, दूध के उत्पाद और अंडे खाने की अपेक्षा शाकाहारी आहार अधिक लेने की कोशिश करें |कैफीन (caffeine) का उपयोग कम करें: कॉफ़ी और अन्य कैफीनयुक्त पेय पदार्थों को लेना बंद करने से ब्लड प्रेशर कम हो जायेगा | लेकिन सिर्फ एक या दो कप कॉफ़ी आपके ब्लड प्रेशर को “अस्वस्थ स्टेज के पहले स्तर” पर पहुंचा सकती है | अगर कोई व्यक्ति पहले से ही हाइपरटेंशन की पहली स्टेज में हो तो कॉफी सामान्यतः और गंभीर परेशानियाँ उत्पन्न कर सकती है क्योंकि कैफीन एक तंत्रिका तंत्र उत्तेजक (nervous system stimulant) है | इस प्रकार, उत्तेजित तंत्रिकाओं के कारण ह्रदय तेज़ी से स्पंदन करता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है | अगर आप ऐसे व्यक्ति हैं जो बहुत ज्यादा कॉफ़ी पीते हैं (प्रतिदिन 4 कैफीन युक्त पेय से अधिक) तो आपको खुद को कॉफ़ी को छोड़ने के बाद होने वाले लक्षणों जैसे सिरदर्द से बचाने की ज़रूरत हो सकती है |
आनुवंशिकता(heredity)-
 आनुवंशिकता Hypertension का मुख्य कारण है। अगर किसी परिवार मे उच्च रक्त चाप की समस्या होती है तो उनकी अगली पीड़ी भी इस समस्या से ग्रस्त हो जाती है। यह व्यक्तियों के जींस का एक पीड़ी से दूसरी पीड़ी मे स्थानान्तर होने की वजह से होता है
मोटापा(obesity)- शोध एवं अनुसंधानो से स्पष्ट हो चुका है की मोटापा उच्च रक्त चाप का बहुत बढ़ा कारण है। एक मोटे व्यक्ति मे उच्च रक्त चाप का खतरा एक समान्य व्यक्ति की तुलना मे बहुत बढ़ जाता है।
व्यायाम की कमी- खेल-कूद, व्यायाम, एवं शारीरिक क्रियाओ मे भाग न लेने से भी उच्च रक्त चाप का खतरा बढ़ जाता है।

आयु- 
जैसे जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है रक्त वाहिकाओ मे दिवारे कमजोर होती जाती है जिससे उच्च रक्त चाप की समस्या पैदा हो जाती है।
विभिन्न बीमारियां- 
हृदयघात, हृदय की बीमारियाँ, गुर्दो का फ़ेल होना, रक्त वाहिकाओ का कमजोर होना आदि बीमारियो के कारण उच्च रक्त चाप हो जाता है।
अंग संचालन
इसे सूक्ष्म व्यायाम भी कहा जाता है जिसका बहुत महत्व है। इस क्रिया का पूरी तरह से अभ्यास कर लेने के बाद ही योगासन करना चाहिए। अंग संचालन के अंतर्गत आंख, गर्दन, कंधे, हाथ-पैर, घुटने, एडी-पंजे, कूल्हों आदि अंगों की एक्सरसाइज की जाती है। जैसे कि पैरों की अंगुलियों को मोडना-खोलना, पंजे को आगे-पीछे करना, गोल-गोल घुमाना, कलाई मोडना, कंधों को घुमाना, गर्दन को क्लॉकवाइज-एंटीक्लाअकवाइज घुमाना और मुटि्ठयों को कसकर बांधना-खोलना आदि किया जाता है। इस क्रिया को सीखकर प्रतिदिन 10-10 बार रोज करें।
फाइबर (fiber) बढ़ाएं:
 फाइबर आपके सिस्टम को साफ़ करते हैं और पाचन को नियमित करके ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं | कई फलों, नट्स और फलियों जैसे बीन्स और मटर में समग्र अनाज के उत्पादों के समान फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है |
कुछ प्राकृतिक उपचारों का प्रयोग करें: 
अपने डॉक्टर से जाँच कराएँ कि आपके लिए इलाज़ के लिए प्राकृतिक औषधियां एक सुरक्षित विकल्प हो सकती हैं | कई प्राकृतिक उपचार
* वैज्ञानिक प्रमाणों के द्वारा दर्शाते हैं कि उनसे उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर कम किया जा सकता है |
*ब्लड प्रेशर कम करें के लिए सबसे अच्छे सप्लीमेंट हैं- कोएंजाइम Q10, ओमेगा-3, मछली का तेल, लहसुन, कर्कुमिन (curcumin जो हल्दी से मिलता है), अदरक, कैयेंन (cayenne), नागफनी, मैग्नीशियम और क्रोमियम (chromium) |
*दिन में तीन बार एक छोटी चम्मच सेव का सिरका (apple cider vinegar) लें | इसे एक कप पानी डालकर पतला करें | यह तुरंत और प्रभावी रूप से काम करता हैं |
*दिन में एक बार एक लहसुन की टेबलेट या लहसुन की एक कच्ची कली खाएं |
*
उच्च रक्त चाप से बचने के लिए भोजन का बहुत महत्व है अगर उचित भोजन लिया जाए तो इससे बचा जा सकता है। भोजन मे नमक की मात्रा कम हो। पोटैशियम को उचित मात्रा मे लेने से उच्च रक्त चाप का स्तर अच्छा हो जाता है। इसके अलावा आहार मे फल जैसे केला, संतरा, नाशपाती, टमाटर, सूखे मटर, बादाम और आलू अवश्य शामिल करे क्योकि इनमे पोटैशियम की मात्रा अधिक होती है। चिकनाई या fat वाला खाना कम मात्रा मे खाये|
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धूम्रपान करने से ऐथिरोस्केलेरोसिस, मधुमेह, दिल का दौरा और मस्तिष्क आघात होने की सँभावना ज़्यादा होती है। इसलिए धूम्रपान और हाई ब्लड प्रेशर एक-दूसरे के बहुत बड़े दुश्मन हैं और अगर ये दोनों मिल जाएँ तो कई तरह के हृदय रोग हो सकते हैं। हालाँकि सबूतों से बिलकुल उल्टा साबित हुआ है मगर कॉफी, चाय और कोला में रहनेवाले कैफिन से, साथ में मन और शरीर के तनाव से भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों को पता चला है कि हद-से-ज़्यादा और लंबे समय से शराब पीने और बहुत ज़्यादा आलसीपन से भी ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
*ओमेगा-3 से संपन्न भोज्य पदार्थ खाएं जैसे पोटैशियम: टमाटर/टमाटर का जूस, आलू, बीन्स, प्याज, संतरे, फल और सूखे मेवे: सप्ताह में दो बार या इससे ज्यादा मछली का उपभोग करें | मछली में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है और कई प्रकार की मछलियों में जैसे सालमन (salmon), मैकरील (mackerel) और हेरिंग (herring) भी ओमेगा-3 फैटी एसिड के उच्च स्तर से युक्त होती हैं जिनमे ट्राइग्लिसराइड नामक अपेक्षाकृत कम वसा होता है और पूरे ह्रदय के स्वस्थ को बढाती हैं |
वज़न कम करें: 
अधिक वज़न होने के कारण आपके ह्रदय को हर समय अधिक कठिनाई से काम करना पड़ता है और इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। मान लें, अगर आपका वज़न 9 किलोग्राम तक अतिरिक्त रूप से बढ़ जाएँ तो यह उसी प्रकार होगा जैसे आप लगभग 9 किलोग्राम का सामान उठाये हुए हों | जब आपका यह अतिरिक्त वज़न उठाये हो तब अपनी कॉलोनी के चारों ओर रोज़ टहलें | जल्दी ही, आपका ह्रदय तेज़ी से और कठिनाई से धड़कना शुरू कर देगा, आपकी सांस फूलने लगेगी और आप बहुत थकान अनुभव करने लगेंगे | अंततः, एक समय पर ऐसा बिंदु आयेगा जब आप सामान को नीचे रखने के लिए और इंतज़ार नहीं कर पाएंगे |
*सोचें कि पूरे समय यह अतिरिक्त वज़न को वहन करना आपके शरीर के लिए कितना मुश्किल भरा होता है! दुर्भाग्यवश, हममे से कई लोग 9 किलोग्राम से भी ज्यादा वज़न का वहन करते रहते हैं | इस अतिरिक्त वज़न को कम करने से आपके ह्रदय को धड़कने में मुश्किल नहीं होगी और आपका ब्लड प्रेशर कम हो जायेगा |
*तनाव कम करने के लिए अपने शरीर को आराम दें: कई लोगों को तनाव होने पर अस्थायी रूप से ब्लडप्रेशर बढ़ता है | अगर आपको अधिक वज़न या फैमिली हिस्ट्री की वज़ह से हाई ब्लडप्रेशर है तो तनाव होने पर यह और अधिक बढ़ जाता है क्योंकि एड्रेनल ग्लैंड (adrenal gland) स्ट्रेस हार्मोन निकालती हैं जिसके कारण आपका कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम अधिक काम करने के लिए प्रवृत्त होता है |
*अगर आप चिरकारी तनाव से जूझ रहे हैं जिसमे प्रतिदिन तनाव के हार्मोन उत्पन्न होते हैं तो आपका कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (cardiovascular system) स्वाभाविक रूप से एक ऐसी स्थिति में आ जायेगा जहाँ उसे अधिक काम करना पड़ेगा | अधिकतर ऐसा होने के कारण स्ट्रेस हार्मोन (stress hormone) “लड़ो या भागो” की तैयारी के रूप में आपकी नाडी, श्वसन और ह्रदय गति को बढ़ा देते हैं | आपके शरीर को लगता है कि आपको लड़ने या भागने की ज़रूरत आ पड़ी है इसलिए स्वाभाविक रूप से आपका शरीर इनमें से किसी एक स्थिति के लिए तैयार होता है | लम्बे समय तक रहने वाले तनाव के बाद सोचिये की आपका ह्रदय किस प्रकार काम करता है | इसलिए कुछ विश्राम या शिथिलीकरण की तकनीकें आजमायें:
*सोने जाने से पहले एक लम्बे तनाव भरे दिन के तनाव कम करने के लिए लम्बी दूरी तक टहलने की कोशिश करें | प्रतिदिन तनाव कम करने के थोड़ा लिए समय निकालें |
*एक गर्म पानी के बाथटब में 15 मिनट के लिए बैठें या गर्म पानी का शावर लें जो वास्तव में कई घंटो के लिए ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है: सोने से ठीक पहले गर्म पानी से नहाने से शरीर को पूरी रात या घंटों तक ब्लड प्रेशर कम रखने में मदद मिल सकती है |व्यायाम: लगभग 3 किलोमीटर प्रति घंटे की मध्यम गति से कम से *कम 20 से 30 मिनट तक प्रतिदिन टहलें | कई अध्ययनों के बाद यह पाया गया कि टहलने की क्रिया से हाइपरटेंशन पर सप्रेशन इफ़ेक्ट (suppression effect) पड़ता है |अगर आप बाहर जाकर नहीं टहल सकते तो एक ट्रेडमिल खरीदकर उपयोग कर सकते हैं | इसके लाभ हैं; आप बाहर बारिश होने या बर्फ गिरने पर भी इसका उपयोग कर सकते हैं | आप अपने घर के कपड़ों में भी टहल सकते हैं और पड़ोसियों की नज़रों से भी बाख सकते हैं! लेकिन खुद से ये वादा करें कि आप प्रतिदिन 30 मिनट तक बिना इस नियम को तोड़े टहलेंगे |

लो ब्लड प्रेशर के उपचार -
लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैरना जैसी कसरतें फायदेमंद साबित होती हैं। इन सबके अलावा सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति तनाव और काम की अधिकता से बचें।
प्रोटीन, विटामिन बी और सी लो ब्लड प्रेशर को ठीक रखने में मददगार साबित होते हैं। ये पोषक तत्व एड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोनों के स्राव में वृद्धि कर लो ब्लड प्रेशर को तेजी से सामान्य करते हैं।
लो ब्लड प्रेशर को दूर करने के लिए ताजे फलों का सेवन करें। दिन में करीब तीन से चार बार जूस का सेवन करना फायदेमंद रहेगा। जितना संभव हो सके, लो ब्लड प्रेशर के मरीज दूध का सेवन करें। लो ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में चुकंदर का जूस काफी कारगर होता है। जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या है उन्हें रोजाना दो बार चुकंदर का जूस पीना चाहिए। हफ्ते भर में आप अपने ब्लड प्रेशर में सुधार पाएंगे।
*50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। यदि देशी चने न मिल पाएं तो सिर्फ किशमिश ही लें। इस विधि से कुछ ही सप्ताह में ब्लेड प्रेशर सामान्य हो सकता है। 

*रात को बादाम की 3-4 गिरी पानी में भिगों दें और सुबह उनका छिलका उतारकर कर 15 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर बादाम-गिरी को खाने से लो ब्लड प्रेशर नष्ट होता है। प्रतिदिन आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन लो ब्लेड प्रेशर में बहुत उपयोगी होता है।
     इस आर्टिकल में दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक ,कमेन्ट और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और अच्छे लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|
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2.1.17

आलू के नायाब फायदे//Benefits of potato


    आलू पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। इसका मुख्य पौष्टिक तत्व स्टार्च होता है। इसमें कुछ मात्रा उच्च जैविक मान वाले प्रोटीन की भी होती है। आलू क्षारीय होता है, इसलिए यह शरीर में क्षारों की मात्रा बढ़ाने या उसे बरकरार रखने में बहुत सहायक होता है। यह शरीर में ऐसीडोसिस भी नहीं होने देता। आलू में सोडा, पोटाश और विटामिन 'ए' तथा 'डी' भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।   आलू का सबसे अधिक महत्वपूर्ण पौष्टिक तत्व विटामिन सी है। योरप में जब से आलू का प्रयोग व्यापक होता गया है, तब से स्कर्वी नामक रोग की घटनाएँ बहुत कम देखने में आती हैं।

    आलू के पौष्टिक तत्वों का लाभ लेने के लिए इसे हमेशा छिलके समेत पकाना चाहिए क्योंकि आलू का सबसे अधिक पौष्टिक भाग छिलके के एकदम नीचे होता है, जो प्रोटीन और खनिज से भरपूर होता है। आलू को उबाला, भूना या अन्य सब्जियों के साथ पकाया जाता है, इसलिए इसके पौष्टिक तत्व आसानी से हजम हो जाते हैं।
शरीर उन्हें दो से तीन घंटों में आसानी से सोख लेता है। आलू का रस निकालने के लिए जूसर का प्रयोग किया जा सकता है|
* उच्च रक्तचाप के रोगी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है।
* आलू को पीसकर त्वचा पर मलें। रंग गोरा हो जाएगा।
* कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है।
* आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं। आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं।
रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है।
* कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है। नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ । * शरीर पर कहीं जल गया हो, तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो, त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।
* भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है।
* चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाएँ। इससे गठिया ठीक हो जाता है।
* गठिया में केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं।
* आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है, सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है।













20.12.16

सीताफल के बेमिसाल फायदे, आप जरूर जानना चाहेंगे.



   आज के जमाने  में बाल सफेद होना, झडऩा या गंजापन एक आम बीमारी बन चुका है। इस समस्या से दुनिया में अधिकतर लोग पीड़ित हैं।
सीता फल के सेवन से बहुत सारे फायदे होते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं सीताफल के सेवन से होने वाले लाभो के बारे में जिनको आप इस फल के सेवन से प्राप्त कर सकते है |
औषधि की तरह काम करता है ये सीताफल |

गंजेपन से छुटकारा पाने के लिए -



सीताफल के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीसकर लगाने से सिर के उड़े हुए बाल भी फिर से उग आते हैं।

उच्च रक्तचाप की समस्या में सीताफल -
सीताफल घबराहट दूर कर हार्टबीट को सही करता है। कमजोर हृदय या उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए इसका सेवन बहुत ही लाभदायक है।
पेचिश के लिए सीताफल -
कच्चा सीताफल खाने से अतिसार और पेचिश में फायदा मिलता है। कच्चे सीताफल को काटकर सुखा दें और पीसकर रोगी को खिलाएं। इसके कुछ दिन के सेवन से ही डायरिया बिलकुल सही हो जाएगा।
सीताफल एक बड़ा ही स्वादिष्ट फल है जिसकी खूबियों के बारे में आयुर्वेद में भी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि सीता ने वनवास के समय श्रीराम को यह भेंट स्वरूव दिया  था। तभी से इस फल का नाम सीताफल पड़ा।
सीताफल सिर्फ फल नहीं, बल्कि एक दवा भी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो लोग शरीर से दुबले पतले होते हैं उन्हें सीताफल का सेवन जरूर करना चाहिए। सीताफल खाने से शरीर की दुर्बलता तो दूर होती ही है साथ ही पुरुषत्व को बढ़ाने में भी यह रामबाण की तरह काम करता है।

हर प्रकार की खांसी और कफ की समस्या के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार

मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए-
सीताफल खाने से शरीर की दुर्बलता, थकान दूर होकर मांस-पेशियां मजबूत होती है।
*आयुर्वेद के अनुसार सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है। कफ एवं वीर्यवर्धक, फल पित्तशामक, उल्टी रोकने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, तृषाशामक,, वात दोष शामक ,मांस एवं रक्त वर्धक ओर हृदय के लिए लाभदायी है।
दुर्बलता को दूर करने के लिए -



सीताफल दवा का काम भी करता है। इस फल को खाने से दुर्बलता दूर हो जाती है और यह पुरुषत्व  को बढ़ाने में रामबाण है
अल्सर के लिए सीताफल-
सीताफल एक मीठा फल है जिसमें कैलोरी काफी मात्रा में होती है। यह फल आसानी से पचने वाला होने समेत पाचक और अल्सर तथा एसिडटी में लाभकारी है।
फोड़ो और फुंसी के सीताफल -
सीताफल के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से वो ठीक हो जाते हैं।
सिर को जुओं से मुक्त करने के लिए सीताफल- 
सीताफल के बीजों को बारीक पीस कर रात को सिर में लगा लें और किसी मोटे कपड़े से सिर को अच्छी तरह बांध कर सो जाएं। इससे जुएं मर जाती हैं।







21.8.16

ब्राम्ही के फायदे ,उपयोग ,उपचार //Health benefits of hydrocotyle asiatica


 ब्राह्मी (वानस्पतिक नाम :Bacapa monnieri) का एक औषधीय पौधा है जो भूमि पर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने और पत्तियाँ मुलामय, गूदेदार और फूल सफेद होते है। यह पौधा नम स्‍थानों में पाया जाता है, तथा मुख्‍यत: भारत ही इसकी उपज भूमि है। इसे भारत वर्ष में विभिन्‍न नामों से जाना जाता है जैसे हिन्‍दी में सफेद चमनी, संस्‍कृत में सौम्‍यलता, मलयालम में वर्ण, नीरब्राम्‍ही, मराठी में घोल, गुजराती में जल ब्राह्मी, जल नेवरी आदि तथा इसका वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है।

Brahmi का पौधा हिमालय की तराई में हरिद्वार से लेकर बद्रीनारायण के मार्ग में अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो बहुत उत्तम किस्म का होता है। ब्राह्मी पौधे का तना जमीन पर फैलता जाता है। जिसकी गांठों से जड़, पत्तियां, फूल और बाद में फल भी लगते हैं। इसकी पत्तियां स्वाद में कड़वी और काले चिन्हों से मिली हुई होती है। ब्राह्मी के फूल छोटे, सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं। ब्राह्मी के फलों का आकार गोल लम्बाई लिए हुए तथा आगे से नुकीलेदार होता है जिसमें से पीले और छोटे बीज निकलते हैं। ब्राह्मी की जड़ें छोटी और धागे की तरह पतली होती है। इसमें गर्मी के मौसम में फूल लगते हैं। जहां नदी, नाले और नहरों की बहुलता होगी, वहां इसे अध्कि मात्रा में उपलब्ध् किया जा सकता है। जडी-बूटी की पहचान न होने के कारण लोग कभी-कभी मण्डूकपर्णी को भी ब्राह्मी समझ बैठते है। जबकि उसके गुण र्ध्म बिल्कुल पृथक है। इसकी पत्तियाँ एक इंच अथवा इंच के चौथाई भाग तक चौडी गोलाकार होती है। फलों का रंग नीला अथवा हल्का गुलाबी होता है। पफलों की आकृति गोल और अग्रभाग नुकीला रहता है। गर्मी के दिनों में फल और बाद में पफलित होती है। औषध्यि दृष्टि से पूरा पंचाग ;जड, तना, पत्ती, फल और पफलद्ध ही प्रयुक्त होता है।

Brahmi के पत्ते पतले, पुष्प सफेद अथवा नीले और स्वाद में कडवापन होता है। जबकि मण्डूकपर्णी के फूल लाल तीखा स्वाद होता है और सूखने के बाद उसकी औषधीय विशेषताएँ प्रायः नष्ट हो जाती है। ब्राह्मी को सुखाकर भी पाउडर के रूप में उतना ही उपयोगी माना जाता रहा है। एक वर्ष की अवधि तक इसका पूर्ण प्रयोग किया जा सकता है।
यह पूर्ण रूपेण औषधीय पौधा है। यह औषधि नाडि़यों के लिये पौष्टिक होती है। कब्‍ज को दूर करती है। इसके पत्‍ते के रस को पेट्रोल के साथ मिलाकर लगाने से गठिया दूर करती है। ब्राह्मी में रक्‍त शुद्ध करने के गुण भी पाये जाते है। यह हृदय के लिये भी पौष्टिक होता है।
*मिर्गी (अपस्मार) होने पर :-14 से 28 मिलीलीटर ब्राह्मी की जड़ का रस या 3 से 6ग्राम चूर्ण को दिन में3 बार 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ लेने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
*धातु क्षय (वीर्य का नष्ट होना) :-15 ब्राह्मी के पत्तों को दिन में 3 बार सेवन करने से वीर्य के रोग का नष्ट होना कम हो जाता है।
*आंखों की बीमारी में :-3 से 6 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों को घी में भूनकर सेंधानमक के साथ दिन में 3 बार लेने से आंखों के रोग में लाभ होता है।
*आंखों का कमजोर होना :-3 से 6 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों का चूर्ण भोजन के साथ लेने से आंखों की कमजोरी दूर हो जाती है।
*स्मरण शक्ति वर्द्धक :
 10 मिलीलीटर सूखी ब्राह्मी का रस, 1 बादाम की गिरी, 3 ग्राम कालीमिर्च को पानी से पीसकर 3-3 ग्राम की टिकिया बना लें। इस टिकिया को रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को देने से दिमाग को ताकत मिलती है।
*3 ग्राम ब्राह्मी, 3 ग्राम शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादाम गिरी, 3 ग्राम छोटी इलायची के बीज को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को थोड़े-से पानी में पीसकर, छानकर मिश्री मिलाकर पीने से खांसी, पित्त बुखार और पुराने पागलपन में लाभ मिलता है।



*ब्राह्मी के ताजे रस और बराबर घी को मिलाकर शुद्ध घी में 5 ग्राम की खुराक में सेवन करने से दिमाग को ताकत प्रदान होती है।”
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नींद को कम करने के लिए :-*ब्राह्मी के 3 ग्राम चूर्ण को गाय के आधा किलो कच्चे दूध में घोंटकर छान लें। इसे 1 सप्ताह तक सेवन करने से लाभ पहुंचता है।
*5-10 मिलीलीटर ताजी ब्राह्मी के रस को 100-150 ग्राम कच्चे दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है।”
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पागलपन (उन्माद) में :-*6 मिलीलीटर ब्राह्मी का रस, 2 ग्राम कूठ का चूर्ण और 6 ग्राम शहद को मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पुराना उन्माद कम हो जाता है। 3 ग्राम ब्राह्मी, 2 पीस कालीमिर्च, 3 ग्राम बादाम की गिरी, 3-3 ग्राम मगज के बीज तथा सफेद मिश्री को25 गाम पानी में घोंटकर छान लें, इसे सुबह और शाम रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।
*3 ग्राम ब्राह्मी के थोड़े से दाने कालीमिर्च के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसे दिन में3 से 4 बार पिलाने से भूलने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
*ब्राह्मी के रस में कूठ के चूर्ण और शहद को मिलाकर चाटने से पागलपन का रोग ठीक हो जाता है।
*ब्राह्मी की पत्तियों का रस तथा बालवच, कूठ, शंखपुष्पी का मिश्रण बनाकर गाय के पुराने घी के साथ सेवन करने से पागलपन का रोग दूर हो जाता है।”
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बालों के लिए : –100 ग्राम ब्राह्मी की जड़, 100 ग्राम मुनक्का और 50 ग्राम शंखपुष्पी को चौगुने पानी में मिलाकर रस निकाल लें। इस रस का सेवन करने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।
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पेशाब करने में कष्ट होना (मूत्रकृच्छ) :-ब्राह्मी के 2 चम्मच रस में, 1 चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेशाब करने की रुकावट दूर हो जाती है।
जलन :-
5 ग्राम ब्राह्मी के साथ धनिया मिलाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह पीसकर,छानकर मिश्री के साथ मिलाकर पीने से जलन शांत हो जाती है।
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उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) :-ब्राह्मी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में आधे चम्म्च शहद के साथ लेने से उच्च रक्तचाप ठीक हो जाता है।
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कब्ज (Constipation):- ब्राह्मी में पाये जाने वाले औषधीय गुण कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से ब्राह्मी का सेवन करने से पुरानी से पुरानी कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है। इसके अलावा ब्राह्मी में कई रक्तशोधक गुण भी होते हैं, जो पेट से संबंधित समस्या से बचाव करते हैं।
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अनिद्रा (Insomnia):- जो व्यक्ति को अनिद्रा की समस्या से परेशान हैं, उन्हें ब्राह्मी इस्तेमाल करना चाहिए। रोजाना सोने से एक घंटा पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच ब्राह्मी चूर्ण मिलाकर पीने से व्यक्ति तनावमुक्त होता है और नींद अच्छी आती है।
*इसके सेवन से शरीर की शक्ति का क्षरण तो रूकता ही है पर मस्तिष्क की क्षमता में अप्रत्याशित अभिवृद्धि होने लगती है। Brahmi के घटक स्नायुकोषों का परिपोषण तो करते ही है साथ ही स्फूर्ति प्रदान करने का प्रयोग भी पूरा होता है। विद्युतीय स्फुरणों से स्नायु कोषों की उत्तेजना कम होती और मिर्गी रोग स्वतः ही भागने लगता है।बोलने में हकलाने और अध्कि बोलने से स्वर भंग होने में ब्राह्मी का सेवन ही लाभकारी सिद्ध होता है।
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उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure):- ब्राह्मी में मौजूद औषधीय गुण रक्तचाप को संतुलित रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति उच्च रक्तचाप की वजह से परेशान है तो उसे ब्राह्मी की ताजी पत्तियों का रस शहद में मिलाकर पीना चाहिए। ऐसा करने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
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निद्राचारित या नींद में चलना :-ब्राह्मी, बच और शंखपुष्पी इनको बराबर मात्रा में लेकर ब्राह्मी के रस को 12 घंटे छाया में सुखाकर और 12 घंटे धूप में रखकर पूरी तरह से सुखाकर इसका चूर्ण तैयार कर लें। लगभग 480 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम सुबह और शाम को समान मात्रा में घी और शहद के साथ मिलाकर नींद में चलने वाले रोगी को देने से उसका स्नायु तंत्र मजबूत हो जाता है। इसका सेवन करने से नींद में चलने का रोग दूर हो जाता है।
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वीर्य रोग : -ब्रह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदंडी तथा कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य रोग दूर होकर शुद्ध होता है।
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अवसाद उदासीनता सुस्ती :-लगभग 10 ग्राम ब्राह्मी (जलनीम) का रस या लगभग480 से 960मिलीग्राम चूर्ण को लेने से उदासीनता, अवसाद या सुस्ती दूर हो जाती है।
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बुद्धिवैकल्प, बुद्धि का विकास कम होना : -ब्राह्मी, घोरबच (बच), शंखपुष्पी को बराबर मात्रा में लेकर ब्राह्मी रस में तीन भावनायें (उबाल) देकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और रोजाना 1 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम को असमान मात्रा में घी और शहदके साथ मिलाकर काफी दिनों तक चटाने से बुद्धि का विकास हो जाता है।
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मूत्ररोग :-4 मिलीलीटर ब्राह्मी के रस को शहद के साथ चाटने से मूत्ररोग में लाभ होता है।
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दिल की धड़कन :-20 मिलीलीटर ताजी ब्राह्मी का रस और 5 ग्राम शहद को मिलाकर रोजाना सेवन करने से दिल की कमजोरी दूर होकर तेज धड़कन भी सामान्य हो जाती है।
*गुल्यवायु हिस्टीरिया :-
10-10 ग्राम ब्राह्मी और वचा को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सुबह और शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में त्रिफला के जल से खाने पर हिस्टीरिया के रोग में बहुत लाभ होता है।
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खांसी और बुखार (Cold and Fever):- ब्राह्मी, शंखपुष्पी, बादाम, छोटी या सफ़ेद इलायची चूर्ण एक समान मात्रा में लेकर पानी में घोलकर छान लें। इस पानी में मिश्री मिलाकर रोजाना सुबह- शाम आधा- आधा गिलास पीएं। इससे खांसी, जुकाम, बुखार आदि से राहत मिलती है।
*महर्षि चरक ने Brahmi को मानसिक दुर्बलता के कारण उत्पन्न रोगों की रामबाण औषधि घोषित किया है। मनोबल की कमी से ही तो मिरगी रोग की उत्पत्ति होती है। सुश्रुत संहिता में भी कुछ इसी तरह के तथ्यों का उल्लेख है। मानसिक विकृति के कारण ही तो नाडी दौर्बल्य, उन्माद, अप्रसार एवं स्मरण शक्ति के लोप होने लगता है। इसलिए तो ब्राह्मी को एक प्रकार का नर्वटॉनिक भी माना गया है। Brahmi के सूखे चूर्ण को मानसिक तनाव और घबराहट मिटती और अवसाद की प्रवृत्ति समाप्त होती है।



बालों की समस्या (Hair Problem):- यदि आप बालों से जुड़ी किसी समस्या से परेशान है तो पंचांग चूर्ण (ब्राह्मी के पांच भागों का चूर्ण) का एक चम्मच की मात्रा में रोजाना सेवन करने से बालों का झड़ना, रूसी, कमजोर बाल आदि परेशानी दूर होती हैं।
मिर्गी (अपस्मार) : -
*ब्राह्मी का रस शहद के साथ मिलाकर खाने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
*मिर्गी के रोग में ब्राह्मी (जलनीम) से निकाले गये घी का सेवन करने से लाभ होता है।
ब्राह्मी, कोहली, शंखपुष्पी, सांठी, तुलसी और शहद को मिलाकर मिर्गी के रोगी को पिलाने से मिर्गी से छुटकारा मिल जाता है।”
ब्राह्मी का तीन ग्राम चूर्ण गौ दुग्ध् के साथ प्रतिदिन लेने से बीस-पच्चीस पत्तों को गाय के दूध् में उबालकर हर रोज लेने से अनिद्रा रोग सदा के लिए भाग खडा होता है।
*मिरगी के दौरों में आध चम्मच ब्राह्मी स्वरस मधु के साथ लेने से रोग से राहत मिलती है। स्वरस के स्थान पर चूर्ण का भी सेवन किया जा सकता है।
कभी-कभी शरीर कुष्ट तथा अन्यान्य प्रकार के क्षय रोगों का शिकार बन दुर्बलता के शिकंजे में कसता चला जाता है। ऐसी स्थिति में तेल की तरह ब्राह्मी का लेपन भी कापफी आराम दायक होता है।
*खाँसी तथा क्षय रोग में भी ब्राह्मी का लेपन से रोगोपचार की प्रक्रिया सफल होती है।
आंत भारी तो मॉथ भारी यानी पेट की कब्ज से रक्त विकार उत्पन्न होते और हृदयघात जैसी दुर्बलता सामने आती है।
*ब्राह्मी स्वरस में काली मिर्च मिलाकर खाने से पाचन संस्थान मजबूत होता तथा *विभिन्न प्रकार के विष और ज्वर में शीघ्र लाभ पहुँचता है।
प्रारम्भ में शरीर और मन को शक्ति और स्फर्ति प्रदान करने वाला यह टॉनिक अब आत्मबल बढाने में भी बडा सहायक सिद्व हो रहा है।
*स्मरण शक्ति के कमजोर तथा मंदबुद्वि होने पर इसका स्वरस और चूर्ण जल अथवा मिश्री के साथ लेने का विधन है।
*इसकी मालिश करने से भी मस्तिष्क की खुश्की मिटती और मेध संवर्धन का सदुद्देश्य पूरा होता है।
*मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए तो उसका प्रयोग ठण्डाई में भी करते है।
*हृदय की समस्या (Heart Disease):-
ब्राह्मी में ब्राहमीन एल्केलाइड (Brahmin Alkaloid) गुण मौजूद होता है, जो हृदय यानि दिल के लिए फायदेमंद साबित होता है। यदि ब्राह्मी का नियमित रुप से सेवन किया जाए तो सारी उम्र हृदय यानि दिल से जुड़ी बीमारी नहीं हो सकती।
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मिर्गी के दौरे (Epilepsy Disease):- मिर्गी की बीमारी होने पर रोगी को ब्राह्मी की जड़ का रस या या ब्राह्मी चूर्ण का सेवन दिन में 3 दूध के साथ करवाएं। ऐसा करने से रोगी को लाभ मिलेगा और मिर्गी के दौरे आना बंद हो जाएंगे।
खसरा : -
ब्राह्मी के रस में शहद मिलाकर पिलाने से खसरा की बीमारी समाप्त होती है।
*बलगम :-
बालकों के सांस और बलगम में ब्राह्मी को थोड़ा-सा गर्म करके छाती पर लेप करने से लाभ होता है।
*पीनस :-
मण्डूकपर्णी की जड़ को नाक से लेने से पीनस (पुराना जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
*दांतों के दर्द: -
दांतों में तेज दर्द होने पर एक कप पानी को हल्का गर्म करें। फिर उस पानी में 1 चम्मच ब्राह्मी डालकर रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे दांतों के दर्द में आराम मिलता है।
*हकलाना, तुतलाना :
-ब्राह्मी घी 6 से 10 ग्राम रोजाना सुबह-शाम मिश्री के साथ खाने से तुतलाना (हकलाना) ठीक हो जाता है।
*कमजोरी :-
40 मिलीलीटर केवांच की जड़ का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से स्नायु की कमजोरी मिट जाती है। इसके जड़ का रस अगर 10-20 मिलीलीटर सुबह-शाम लिया जाए तो भी कमजोरी में लाभ होता है।
    


*एड्स : -ब्राह्मी नामक बूटी का रस 5 से 10 मिलीलीटर अथवा चूर्ण 2 ग्राम से 5 ग्राम सुबह शाम देने से एड्स में लाभ होता है क्योंकि यह गांठों को खत्म करता है और शरीर के अंदर गलने को रोकता है। निर्धारित मात्रा से अधिक लेने से चक्कर आदि आ सकतेहैं।
*दांत दर्द (Tooth Ache):-
ब्राह्मी का इस्तेमाल, दांत दर्द जैसी परेशानी में भी किया जाता है। आधा गिलास पानी में आधा चम्मच ब्राह्मी डालकर गर्म करके रख लें। इस पानी से रोजाना दिन में दो बार कुल्ला करें। ऐसा करने से दांतों के दर्द से छुटकारा मिलता है।
*एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant):-
ब्राह्मी का उपयोग बौद्धिक विकास बढ़ाने के लिए प्राचीनकाल से किया जा रहा है। ब्राह्मी में कई एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं इसलिए ब्राह्मी रस या इसके 7 पत्तों का रोजाना सेवन करना चाहिए।
*ब्राह्मी क्वाथ को पिलाने के पीछे एक ही उद्देश्य रहा कि आत्मबल अर्थात ब्रह्मवर्चस की प्राप्ति होती है । हमारी दृष्टि में Brahmi का एक रासायनिक घटक हर्सेपोनिन सीधे पीनियल ग्रन्धि को प्रभावित करके सिरॉटानिन नामक स्नायु रसायन का उत्सर्जन करता है जो साध्ना की सपफलता का रहस्य भी यही है और आत्म बल सम्पन्न सपफल जीवन जीने की रीति-नीति भी। स्मृति, मेध और प्रतिभा के प्रमापन के लिए प्रयोगशाला भी बनाई थी जिसमें साध्ना काल में अनेकानेक तरह के उत्साहवर्धक परिणाम भी मिले।
*एकाग्रता बढ़ाए
(Increase Concentration):- एकाग्रता की कमी के कारण अक्सर बच्चों का ध्यान पढ़ाई से दूर भागता है। ऐसे में दूध के साथ ब्राह्मी चूर्ण का रोजाना सेवन करने से बच्चों में एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है, जिसके फलस्वरूप बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगता है।
*कार्यक्षमता बढ़ाए
(Increase Efficiency):- ब्राह्मी का सबसे ज्यादा प्रभाव मुख्य रूप से मस्तिष्क पर होता है। यह मस्तिष्क के लिए एक चमत्कारी औषधि है, मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करती है। लगातार काम करने से थकावट हो जाने पर कार्यक्षमता अक्सर कम हो जाती है। इससे बचने के लिए ब्राह्मी रस या ब्राह्मी चूर्ण का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से मानसिक तनाव, थकावट या सुस्ती कम होती है और कार्य क्षमता बढ़ती है।
ब्राह्मी की ताजा अवस्था का प्रयोग तो सर्वोत्तम है। कहीं उपलब्ध नहीं हो तो सुखाकर पाउडर के स्वरूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।
मात्रा : 1 से 3 चम्मच ब्राह्मी के पत्तों का रस, ताजी हरी पत्तियां 10 तक सुखाया हुआ बारीक चूर्ण 1 से 2ग्राम तक, पंचांग (फूल, फल, तना, जड़ और पत्ती) चूर्ण 3 से 5 ग्राम तक और जड़ के चूर्ण का सेवन आधे से 2 ग्राम तक करना चाहिए।