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16.8.19

चिया के बीज के कमाल के स्वास्थ्य लाभ



आपने शायद चिया बीज के बारे में नहीं सुना होगा लेकिन इसके बहुत सारे स्वास्थ्य के लिए फायदे है। इस बीज में कई ऐसे पौष्टिक तत्व होते है जो हेल्थ के लिए बहुत जरुरी है। चिया बीज को आप भोजन के साथ इस्तेमाल कर सकते है। यह शरीर के लिए एक बहुत ही गुणकारी ओषधि है।
चिया बीज सबसे ज्यादा मेक्सिको देश में पाया जाता है। यह बीज ना सिर्फ हमारे शरीर की शक्ति को बढाता है बल्कि इसके कई ऐसे फायदे है जो आपको हैरान कर देंगे। स्वास्थ्य जगत में चिया बीज पोषक तत्वों के शानदार स्रोत के रूप में उभर रहा है। कुछ लोग इसे पोष्टिक आहार के रूप में अपना रहे है ।

इसमें कोई शक नहीं की यह एक अच्छा आहार साबित हो सकता है। इसमें ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स , खनिज तथा कई विटामिन आदि पाए गए है। यह मिंट फैमिली की एक फूल वाली प्रजाति है जिसकी उत्पत्ति मेक्सिको और ग्वाटेमाला से हुई है। विदेशों में इसका उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है।
चिया सीड्स में प्रोटीन , फाइबर , कैल्शियम ,फास्फोरस , मैग्नेशियम प्रचुर मात्रा में होते है। इसके अलावा इसमें मैगनीज , ज़िंक , पोटेशियम , विटामिन B 1 , विटामिन B 2 , विटामिन B 3 भी पर्याप्त मात्रा में होते है। यह पचने में हल्का होता है तथा किसी भी प्रकार की डिश में इसका उपयोग किया जा सकता है।


चिया सीड और तुलसी के बीज 

चिया बीज के बारे में अक्सर एक बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी लोगों को हो जाती है। कुछ लोग सब्जा या तकमरिया Takmariya को ही Chia Seeds समझ लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। सब्जा या तकमरिया तुलसी प्रजाति के पौधे से मिलने वाले बीज हैं । इन्हे तुकमलंगा  के नाम से भी जाना जाता है।
सब्जा बीज शरबत , फालूदा शेक , मिल्क शेक आदि में मिलाकर खाये जाते हैं। इनका अपना कोई स्वाद नहीं होता लेकिन शेक आदि को टेक्सचर देते है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते है।
तुकमलंगा बीज और चिया बीज दोनों एकदम अलग चीजें है। इनके गुण भी अलग है। दरअसल ये दोनों दिखने में कुछ कुछ एक समान होते है इसीलिए संशय पैदा हो जाता है।
सब्जा तुलसी के बीज या तकमरिया ये है :–
चिया सीड के फायदे 
ओमेगा -3 फैटी एसिड
ओमेगा -3 फैटी एसिड ह्रदय रोग के लिए , अर्थराइटिस तथा कोलेस्ट्रॉल के लिए बहुत लाभदायक होता है। Chia Seeds में प्रचुर मात्रा में ओमेगा -3 फैटी एसिड होते है अतः चिया सीड ह्रदय रोग से बचाव के लिए उपयोगी हो सकते है ।
हड्डियाँ और दाँत
चिया सीड में भरपूर कैल्शियम होता है। हड्डियों तथा दाँतो की मजबूती कैल्शियम पर ही टिकी होती है। इसके अतिरिक्त Chia Seeds में बोरोन नामक तत्व भी होता है जो हड्डियों के लिए आवश्यक होता है।
बोरोन के कारण ही कैल्शियम , मैग्नेशियम , फास्फोरस आदि खनिज अवशोषित होकर मांसपेशियों तथा हड्डियों के उपयोग में आते है। इस प्रकार चिया सीड से हड्डियों , दाँत और मांसपेशियों को ताकत मिलती है।
वजन हो कम –
वजन कम करने में भी चिया बीज काफी लाभदायक सिद्ध होता है. इसका सेवन करने से बढ़ते वजन को रोका जा सकात है. दरअसल इसके अंदर फाइबर मौजूद होता है और फाइबर युक्त खाना खाने से भूख अधिक नहीं लगती है और पेट हमेशा भरा-भरा सा लगता है। जिसके चलते जो लोग अधिक खाना खाते हैं उनके ऑवरइंटंग से बज जाते हैं और उनका वजन नहीं बढ़ता है. कई सारे अध्ययनों में चिया बीज से जुड़ी ये बाद सही भी सिद्ध हो चुकी है. चिया बीज पर किए गए अध्ययन के अनुसार जो लोग सुबह के समय चिया बीज खाया करते हैं उनको अधिक भूख नहीं लगती है. साथ में इसे खाने से शरीर में मौजूद फैट की मात्रा भी कम होने लगती है.
दिल के लिए है वरदान है चिया बीज
आजकल के बदलते समय और खराब जीवनशैली तथा खान-पान की वजह से कई लोग दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे है। ऐसे में चिया बीज खून में कोलेस्ट्रोल को दूर करता है और साथ में ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है जिससे हार्ट स्टोक का खतरा कम हो जाता है।
इस बीज में लिनोलिक एसिड की मात्रा बहुत अधिक होती है जो की एक फैटी एसिड है। यह फैटी एसिड विटामीन, फाइट घुलनशील, विटामीन A, D, E और K को सोक लेता है। इस बीज में अच्छे फैट की इतनी अच्छी मात्रा होती है की यह दिल की बीमारियों में बहुत लाभकारी होता है।
त्वचा के लिए
कई शोध में पाया गया है की चिया बीज में भरपूर मात्रा में एंटी-ओक्सिडेंट होते है और आप भी अच्छे से जानते है की एंटी-ओक्सिडेंट हमारी त्वचा के लिए कितना फायदेमंद है। चिया बीज के सेवन से चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियां खत्म होती है और त्वचा के दुसरे विकार खत्म होते है।


एंटीऑक्सीडेंट
चिया सीड में बहुत से एंटीऑक्सीडेंट होते है जो हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते है। फ्री रेडिकल्स के कारण कैंसर जैसी बीमारी होने की संभावना होती है तथा इनका त्वचा पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। Chia Seeds के उपयोग से इन परेशानियों से बचाव हो सकता है।


मांसपेशियों को मजबूती देता है

चिया बीज में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है और प्रोटीन हमारी मांसपेशियों को मजबूती देता है। इसलिए टी जिम से आने वाले लोग प्रोटीन शेक लेते है ताकि उनकी मांसपेशियां मजबूत रहें। यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी कम करता है जिससे शुगर के मरीजों को भी लाभ मिलता है।
इसमें कई तरह के एंटी-ओक्सिडेंट गुण होते है जिसकी वजह से यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें पानी की भी अच्छी मात्रा होती है जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती। इसमें लेप्टिन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देता है और भूख कम करने वाले हार्मोन को बढ़ा देता है।
हाइड्रेशन
कुछ लोगों के शरीर में गर्मी के कारण या किसी और कारण से पानी की कमी जल्दी हो जाती है। इस वजह से कब्ज आदि हो जाती है। खिलाडियों को तथा बच्चों को यह ज्यादा होता है। Chia Seeds से इस समस्या का समाधान हो सकता है।
चिया सीड के पानी सोखने की अद्भुत शक्ति के कारण हाइड्रेशन बनाये रखने में इसका उपयोग किया जा सकता है। चिया सीड को अच्छे से पानी भिगोकर खाने से हाइड्रेशन बना रहता है।
कब्ज
चिया सीड को भिगोने से जेल बनता है। यह आँतों को साफ करने में तथा विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने में मददगार होता है। आँतो के साफ रहने से कई प्रकार की परेशानियो से निजात मिल सकती है। कब्ज मिटने से बवासीर में आराम मिलता है। भूख खुलकर लगती है। भारीपन नहीं लगता।
प्रेगनेंसी में बहुत फयदेमन्द है चिया बीज
प्रेगनेंसी का दौर महिलाओं के लिए एक चुनोती भरा दौर होता है और ऐसे समय में उन्हें पौष्टिक आहार की बहुत जरूरत होती है। चिया बीज में प्रचुर मात्रा में पौष्टिक तत्व होते है जो की शरीर के लिए बहुत लाभदायक होते है। अगर गर्भवती महिलाएं चिया बीज का सेवन करें तो उसके शिशु का विकास भी अच्छे से होगा। इसमें कई मल्टीविटामीन होते है जो की शरीर को बहुत पोषण देता है।
डायबिटीज़
चिया सीड से रक्त में इन्सुलिन की मात्रा नियमित होती है। यह कार्बोहाइड्रेट को शक्कर में बदलने की गति कम कर देता है। इससे रक्त में अत्यधिक इन्सुलिन की मात्रा को कम कर देता है। इस प्रकार डायबिटीज में यह लाभदायक होता है।


शारीरिक ऊर्जा को बढाता है

चिया बीज शरीर के मेटाबालिज्म में सुधार लाता है और बेकार की चर्बी को कम करता है। जिसके कारण आपको एक स्वस्थ और सुंदर शरीर मिलता है और आपके काम करने की स्पीड भी बढती है। यह मोटापे को कम करके आपकी शारीरिक ऊर्जा को बढाता है।
मांसपेशियों को मजबूती देता है
चिया बीज में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है और प्रोटीन हमारी मांसपेशियों को मजबूती देता है। इसलिए टी जिम से आने वाले लोग प्रोटीन शेक लेते है ताकि उनकी मांसपेशियां मजबूत रहें। यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी कम करता है जिससे शुगर के मरीजों को भी लाभ मिलता है।
इसमें कई तरह के एंटी-ओक्सिडेंट गुण होते है जिसकी वजह से यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें पानी की भी अच्छी मात्रा होती है जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती। इसमें लेप्टिन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देता है और भूख कम करने वाले हार्मोन को बढ़ा देता है। 
ब्रेस्ट और सवाईकल कैंसर को रोकने में मदद करता है
चिया बीज में ALA नाम का एक ओमेगा एसिड होता है जो की ब्रेस्ट और सवाईकल कैंसर को रोकने में मदद करता है, क्योंकि यह कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोक देता है। एक शोध में यह बात भी सामने आई है की यह स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।
सोक कर खाएं :- 
अगर आप चिया बीज को भिगोकर खायेंगे तो आपको यह ज्यादा अच्छा लगेगा और ज्यादा पोषण शरीर को मिलेगा। चिया बीज को आप 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक भिगोकर रखें। याद रखें की बीज पूरी तरह से पानी-पानी ना हो और उसे दबाने पर जेल के जैसा दिखना चाहिए। चिया बीज की एक ख़ास बात यह है की यह अपने से 12 गुना ज्यादा पानी सोंक कर रख सकता है जिससे शरीर में निर्जलीकरण की समस्या नहीं होती।
सावधानी
चिया सीड में प्रचुर मात्रा में फाइबर होने के कारण अधिक मात्रा में इसके उपयोग से कुछ लोगों को परेशानी महसूस हो सकती है। विशेष कर उन लोगों को जिन्हें निगलने की समस्या होती हो या आँतों में सूजन आदि हो।
अस्थमा तथा एलर्जी आदि से ग्रस्त लोगों को भी इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। कुछ परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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23.9.17

पेट के रोगों की होम्योपैथिक चिकित्सा





उदर-विकार समय पर खाना न खाना, अधिक तली चीज़ें खाना, अत्यधिक खाना खाना अथवा भूखा रहना, मिर्च-मसालों का अधिक प्रयोग आदि उदर- विकारों को उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त हैं। प्रमुख परेशानियां, कारण और होमियोपैथिक चिकित्सा से निवारण निम्न प्रकार संभव है –

अग्निमांद्य : 
अग्निमांद्य यानी जठराग्नि कमजोर हो जाने पर प्रमुख लक्षण होते हैं – भूखन लगना, भोजन से अरुचि होना, पेट भरा-भरा सा लगना। इसे अजीर्ण, बदहजमी और पेट भरा-भरा सा कहते हैं। अग्निमांद्य होने पर गैस की शिकायत रहना, कब्ज होना, पेट फूलना और भारी रहना, तबीयत में गिरावट, स्वभाव में चिड़चिड़ाहट और मन में खिन्नता रहना आदि अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। इन व्याधियों की चिकित्सा के लिए लक्षणों के अनुसार दवा चुनकर सेवन करना फायलक्षण एवं उपचार
कार्बोवेज : 
पाचन शक्ति कमजोर हो जाए, खाना देर से हजम होता हो और पूरी तरह से पच न पाने के कारण सड़ने लगता हो, जिससे गैस बनती हो, पेट फूल जाता हो, अधोवायु निकलने पर राहत मालूम देती हो, खट्टी डकारें आती हों या खाली डकारें आएं, गैस ऊपर की तरफ चढ़ती हो, जिसका दबाव छाती पर पड़ता हो और भोजन के आधा-एक घटे बाद ही कष्ट होने लगे, तो समझें कि ये लक्षण ‘कार्बोवेज’ दवा के हैं। ऐसी स्थिति में 30 शक्ति एवं 200 शक्ति की दवा अत्यन्त फायदेमंद होती है।


गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका  के अचूक उपचार 

एण्टिमक्रूड : 
अग्निमांद्य के साथ-साथ जीभ पर दूध जैसी सफेद मैली परत चढ़ी होना, गर्मी के दिनों में उदर-विकार होने पर दस्त लग जाना, बदहजमी, भूख न लगना, एसिड एवं अचारों को खाने की प्रबल इच्छा, खट्टी डकरें, बच्चा दूध की उल्टी कर देता है, खाने के बाद पेट फूल जाना, खुली हवा में आराम मिलना आदि लक्षणों के आधार पर एण्टिमक्रूड दवा 6 एवं 30 शक्ति अत्यधिक कारगर है।देमंद है। प्रमुख दवाएं इस प्रकार हैं –
नक्सवोमिका : खाना खाने के घटे दो-घटे बाद तकलीफ होना, पेट में भारीपन, जैसे कोई पत्थर पेट में रखा हो, पेट फूलना, पेट में जलन मालूम देना, गैस के दबाव के साथ सिर में भारीपन बढ़ना, रोगी दुबले शरीर वाला, क्रोधी एवं चिड़चिड़ा स्वभाव, ठंड के प्रति अधिक सहिष्णुता, रोगी अचार, चटनी, तले पदार्थ खाना पसंद करता है और पचा भी लेता है। इसके बाद परेशानी होने लगती है। बहुत मद्यपान करने, बहुत भोग-विलास करने, बहुत ज्यादा खाने, आलसी जीवन बिताने और गरिष्ठ पदार्थों के सेवन से जिनकी पाचन शक्ति कमजोर हो गई हो एवं पाखाना जाने की इच्छा होती हो, किन्तु पाखाना बहुत कम होता हो और थोड़ी देर बाद पुनः पाखाने जाने की जरूरत होने लगती है, ऐसी स्थिति में ‘नवसवोमिका’ 30 एवं 200 शक्ति की दवा अत्यन्त फायदेमंद होती है। यह दवा प्राय:रात में सोने से पूर्व ही सेवन करनी चाहिए।
पल्सेटिला : 
प्यास बिलकुल न लगना जबकि जीभ सूखी हुई हो, भोजन के घटे-दो घंटे बाद तकलीफ होना, पेट में बोझ-सा लगना, जलन होना, सुबह उठने पर बिना कुछ खाए-पिए भी पेट भरा हुआ और भारी लगना, रोगी स्वास्थ्य में ठीक होता है, मोटा होता है, ऊष्ण प्रकृति (गर्म-तासीर) वाला होता है, शांत और मधुर स्वभाव का होता है, अधीरता के कारण बात करते-करते रो देना एवं शांत कराने पर चुप हो जाना, चटपटे, तले एवं घी से बने भारी पदार्थ हजम नहीं कर पाना, ठंडी हवा में आराम मिलना, खाने में स्वाद कम हो जाना, गर्म कमरे में एवं दर्द से विपरीत दिशा में लेटने पर परेशानी महसूस करना, ठंडी चीजों से आराम मिलना आदि लक्षणों के आधार पर 30 एवं 200 शक्ति की दवा बेहद कारगर साबित रही है।


अम्लता (एसीडिटी)
:
 पेट में अम्लता बढ़ जाए, तो पाचन-क्रिया बिगड़ जाती है, जिससे भोजन ठीक से पचने की अपेक्षा सड़ने लगता है और पेट व गले में जलन होती है, गले में खट्टा, तीखा, चटपटा पानी डकार के साथ आता है, छाती में जलन का अनुभव होता है,खट्टी व तीखी डकारें आती हैं। ये सब अम्लता के मुख्य लक्षण हैं। इसमें अपच के साथ-साथ कब्ज या दस्त होने की शिकायत बनी रहती है। कभी-कभी कड़वी और गर्म पानी के साथ उल्टी हो जाती है। लक्षणों के आधार पर प्रमुख औषधियां निम्न प्रकार है –
एसीडिटी के लक्षण एवं उपचार
अर्जेण्टम नाइट्रिकम : 
डकार आए और साथ में पेट दर्द भी हो, मीठा खाने में रुचि हो, पर मीठा खाने से कष्ट बढ़े, डकार आने से आराम मालूम देना, जी मतली करे, गैस बढ़े, पेट में जलन हो, मीठे के साथ-साथ नमकीन खाने की भी इच्छा रहती हो, गमीं से, मिठाई से, ठंडे खाने से परेशानी बढ़ना, खुली हवा में, डकार आने से आराम मिलना आदि लक्षण हो, तो 30 शक्ति की दवा उपयोगी है।
खाने के बाद जी मतली करे, गले में कड़वा खट्टा पानी डकार के साथ आए, रोगी शीत प्रकृति का हो, तो ‘नक्सवोमिका’ 30 शक्ति में लेनी चाहिए।
यदि डकार में खाए हुए अन्न का स्वाद आए, रोगी ऊष्ण प्रकृति का हो, मुंह सूखा रहे और प्यास न लगे, तो ‘पल्सेटिला’ 30 शक्ति में लेनी चाहिए।
नेट्रमफॉस :

 परेशानियां जो अत्यधिक अम्लता के कारण पैदा हो जाती हैं, पीली, चिकनी परत, जीभ के पिछले भाग पर, मुंह में घाव, जीभ की नोक पर घाव, गले की (टॉन्सिल) झिल्ली भी मोटी और चिकनी हो जाना, खाना निगलने में परेशानी महसूस करना, खट्टी डकारें, कड़वी उल्टी, हरा दस्त आदि लक्षण मिलने पर 12 × एवं 30 शक्ति की दवा अत्यन्त लाभदायक है।
चाइना : 

अम्लता के रोगी को ऐसा अनुभव हो कि पूरा पेट हवा से भरा हुआ है, डकार आने पर हलकापन और राहत अनुभव हो, डकरें खट्टी व बदबूदार हों या खाली डकारें ही आती हों, मुंह का स्वाद कड़वा रहे, मुंह में कड़वा पानी आता हो, ऐसा लगे कि खाना छाती पर ही अड़ा हुआ है, छाती में जलन होती हो, तो चाइना 30 शक्ति फायदेमंद होती है।
कब्ज (कांस्टिपेशन) :
 खाने में अनियमितता, जल्दी-जल्दी खाने, ठीक से चबा-चबाकर न खाने, भारी, तले हुए और मांसाहारी पदार्थों का सेवन करने, पाचन शक्ति कमजोर होने आदि कारणों से अधिकांश स्त्री-पुरुष कब्ज के शिकार बने रहते हैं। कब्ज होने से कई और रोग भी उत्पन्न हुआ करते हैं। जैसे-शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिससे शरीर में सुस्ती व कमजोरी आती है। गैस एवं वातरोग उत्पन्न होते हैं। स्वस्थ रहने के लिए कब्ज का न होना पहली शर्त है।
ब्रायोनिया : 

खाने के बाद कड़वी और खट्टी डकारें आएं, पेट में भारीपन हो, डकार में खाए हुए पदार्थ की गंध या स्वाद हो, अधिक प्यास, मुंह व होंठ सूखना, सुबह मतली आना, गर्म चीज खाने से कष्ट बढ़े, खाना खाते ही तबीयत बिगड़े, हिलने-डुलने से कष्ट बढ़े, ठंड एव् ठंडी हवा से आराम हो, पेट को छूने से अथवा खांसी आने पर परेशानी बढ़ जाना, दर्द वाली सतह पर लेटने, कसकर दबाने से, आराम करने से परेशानियां कम हो जाती हों, तो ब्रायोनिया 30 शक्ति की दवा फायदेमंद है।
कब्ज का लक्षण एवं उपचार
हाइड्रेस्टिस : 
अगर रोगी सिर्फ कब्ज का ही रोगी हो, तो हाइड्रेस्टिस बहुत अक्सीर दवा है। पेट खाली-खाली-सा लगे, मीठा-मीठा हलका-सा दर्द हो और कब्ज के सिवाय अन्य कोई लक्षण न हो, तो हाइड्रेस्टिस दवा के मूल अर्क (मदर टिंचर) की 5-5 बूंद 2 चम्मच पानी में सुबह खाली पेट लगातार कई दिन लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
नक्सवोमिका : 

उक्त दवा के मुख्य लक्षण ऊपर वर्णित किए जा चुके हैं। कब्ज की अवस्था में, जो लोग बैठक का काम ज्यादा करते हैं, बार-बार शौच के लिए जाते हैं, पर पेट ठीक से साफ नहीं होता, हर बार थोड़ा-थोड़ा पाखाना हो और शौच के बाद भी हाजत बनी रहे, तो नक्सवोमिका 200 शक्ति की तीन खुराकें 15 मिनट के अंतर पर रात में सोने से एक घंटा पहले ले लेनी चाहिए। दस्त के बाद पेट में मरोड़ होना भी इसका एक लक्षण है।
मैग्नेशिया म्यूर : 

यह दवा शिशुओं के लिए उपयोगी है। खास कर दांत-दाढ़ निकलते समय हो, दूध न पचता हो, उन्हें उक्त दवा 30 शक्ति की देना फायदेमंद है। इसके अलावा ‘साइलेशिया’ दवा भी अत्यंत फायदेमंद है।
अतिसार (डायेरिया) : 
उदर-विकार में जहां अपच के कारण कब्ज हो जाने से शौच नहीं आता, वहीं अपच के कारण अतिसार होने से बार-बार शौच आता है, जिसे दस्त लगना कहते हैं। कभी-कभी निर्जलन की स्थिति (डिहाइड्रेशन) बन जाती है, यानी शरीर में पानी की कमी हो जाती है, बार-बार थोड़ा-थोड़ा मल निकलता है। फिर भी पेट साफ और हलका नहीं लगता।
डायरिया का लक्षण एवं उपचार
मैग्नेशिया कार्ब :
 शिशुओं के लिए उत्तम दवा है। दूध पीता बच्चा, हरे-पीले और झागदार दस्त बार-बार करे, मल से और शरीर से खट्टी दुर्गन्ध आए, दस्त में अपना दूध निकाले, तो उक्त दवा 30 शक्ति कारगर है।
एलूमिना : 

कुछ रोगियों को टट्टी की हाजत ही नहीं होती और वे 2-3 दिन तक हाजत का अनुभव नहीं करते। शौच के लिए बैठते हैं, तब बड़ी मुश्किल से सूखी काली तथा बकरी की मेंगनी जैसी गोलियों की शक्ल में टट्टी होती है, आलू खाने से कष्ट बढ़ जाता है, मलाशय की पेशियां इतनी शिथिल हो जाती है कि स्वयं मल बाहर नहीं फेंक पातीं। यहां तक कि पतले मल को निकालने के लिए भी जोर लगाना पड़ता है। पेशाब करने में जोर लगाना पड़े, पीठ में दर्द हो, तो इन लक्षणों के आधार पर ‘एलुमिना’ 30 एवं 200 शक्ति की कुछ खुराक ही कारगर असर दिखाती है।
कैमोमिला :
 बेचैनी, चिड़चिड़ापन, बच्चा एक वस्तु मांगता है, मिलने पर लेने से मना कर देता है, जिद्दी स्वभाव, गर्म-हरा पानी जैसा बदबूदार दस्त (जैसे किसी ने पालक में अंडा फेंट दिया हो), पेशाब के रास्ते में जलन, मां के गुस्सा करने के समय बच्चे को दूध पिलाने के बाद बच्चे को दस्त होना आदि लक्षणों के आधार पर 30 शक्ति की दवा फायदेमंद रहती है।
एलोस : 
रोगी को मांस के प्रति घृणा रहती है। जूस एवं तरल पदार्थों की इच्छा बनी रहती है, किंतु पीते ही पेट फूलने लगता है। पेट में भारीपन, फूला हुआ, शौच से पूर्व एवं बाद में भी पेट दर्द, रोगी कुछ भी खाता है, फौरन पाखाने जाना पड़ता है। पाखाने में श्लेष्मायुक्त स्राव अधिक निकलता है। साथ ही गैस भी अधिक निकलती है। ऐसी स्थिति में उक्त औषधि 30 शक्ति में नियमित सेवन करानी चाहिए।


पोडोफाइलम : 
उल्टी के साथ दस्त, अधिक प्यास, पेट फूला हुआ, पेट के बल ही रोगी लेट सकता है, यकृत की जगह पर दर्द, रगड़ने पर आराम, कालरा रोग होने पर, बच्चों में सुबह के वक्त, दांत निकलने के दौरान हरा दस्त, पानीदार, बदबूदार पाखाना आदि लक्षण मिलने पर 30 शक्ति में औषधि का प्रयोग हितकारी रहता है।
कैल्केरिया कार्ब :
 जरा-सा दबाव भी (बच्चे चाक खड़िया खाते हैं) पेट पर बर्दाश्त नहीं कर पाता, पीला बदबूदार पाखाना, अधपचा खाना निकलता है, किंतु अधिक भूख लगती है, पहले पाखाना कड़ा होता है, बाद में दस्त होते हैं, 200 शक्ति में लें।
• पहले सिरदर्द, फिर दस्त – ‘एलो’, ‘पोडोफाइलम’।
• खट्टी वस्तुओं से – ‘एलो’, ‘एण्टिमकूड’।
• किसी आकस्मिक बीमारी के कारण – ‘चाइना’, ‘कार्बोवेज’।
• शराब पीने के कारण – ‘आर्सेनिक’, ‘लेकेसिस’, ‘नक्सवोमिका’।
• बुखार के कारण – ‘कैमोमिला’ ।
• नहाने के बाद – ‘एण्टिमक्रूड’।
• बियरपीने के कारण – ‘कालीबाई’, ‘सल्फर’, ‘इपिकॉक’, ‘म्यूरियाटिक एसिड’ आदि।
• गोभी खाने से – ‘ब्रायोनिया’, ‘पेट्रोलियम’।
• नाक बहने एवं फेफड़ों की गड़बड़ी के साथ – ‘सैंग्युनेरिया’।
• मौसम-परिवर्तन के साथ – ‘एकोनाइट’, ‘ब्रायोनिया’, ‘नेट्रम सल्फ’, ‘केप्सिकम’, ‘डल्कामारा’, ‘मरक्यूरियस’।
• आइसक्रीम व अन्य ठंडी वस्तुओं के कारण – ‘पल्सेटिला’, ‘एकोनाइट’, ‘आर्सेनिक’, ‘ब्रायोनिया’।
• कॉफी के कारण – ‘साइक्लामेन’, ‘थूजा’ ।
• जुकाम दब जाने से – ‘सैंग्युनेरिया’ ।
• अंडे खाने के बाद – ‘चिनिनम आर्स’।
• उत्तेजना अथवा व्यग्रता के कारण – ‘एकोनाइट’, ‘अर्जेण्टम नाइट्रिकम’, ‘जेलसीमियम’, ‘इग्नेशिया’, ‘ओपियम’, ‘फॉस्फोरिक एसिड’।
• त्वचा रोग हो जाने पर – ‘ब्रायोनिया’, ‘सल्फर’।
• चिकनी एवं तैलीय वस्तुएं खाने के बाद – ‘पल्सेटिला’।
• फल खाने के बाद – ‘आसेंनिक’, ‘ब्रायोनिया’, ‘चाइना’, ‘पोडोफाइलम’, ‘पल्सेटिला’, ‘क्रोटनटिंग’।
• पेट की गड़बड़ियों के कारण – ‘एण्टिमकूड’, ‘नक्सवोमिका’, ‘पल्सेटिला’ ।
• गर्मी के कारण – ‘एण्टिमकूड’, ‘ब्रायोनिया’, ‘कैमोमिला’, ‘सिनकोना’, ‘क्यूफिया’, ‘इपिकॉक’, ‘पीडोफाइलम’।
• अम्लता (हाइपर एसिडिटी) के कारण – ‘कैमोमिला’, ‘रयूम’, ‘रोविनिया’ ।
• अांतों की कमजोरी के कारण – ‘अर्जेण्टमनाइट’, ‘सिनकोना’, ‘सिकेल’।
• पीलिया के कारण – ‘चिओनेंथस’
• मांस खाने के कारण – ‘आर्सेनिक’, ‘क्रोटनटिंग’।
• दूध पीने के कारण – ‘एथूजा’, ‘मैगकार्ब’, ‘नक्समॉश’, ‘मैगमूर’, ‘सीपिया’।
• चलने-फिरने से – ‘ब्रायोनिया’।
• ऊपर से नीचे उतरने (सीढ़ियां उतरने) के कारण – ‘बोरैक्स’, ‘सैनीक्यूला’ ।
• गुर्दो के संक्रमण के कारण – ‘टेरेबिंथ’ ।
• प्याज खाने से – ‘थूजा’ ।
• सूअर का मांस खाने से – ‘एकोनाइट’, ‘पल्सेटिला’ ।
• मिठाई खाने के कारण – ‘अर्जेण्टम नाइट्रिकम’, ‘गेम्बोजिया’।
• तम्बाकू खाने से – ‘टेबेकम’, ‘कैमोमिला’।
• क्षयरोग के साथ दस्त – ‘आर्निका’, ‘बेप्टिशिया’, ‘सिनकोना’, ‘क्यूप्रमआस’, ‘फॉस्फोरस’ आदि।
• सन्निपात ज्वर के साथ – ‘आर्सेनिक’, ‘बेप्टिशिया’, ‘हायोसाइमस’, ‘म्यूरियाटिक एसिड’।
• आंतों में घाव हो जाने के कारण – ‘मर्ककॉर’, ‘कालीबाई’।
• पेशाब के साथ दस्त – ‘एलोस’, ‘एलूमिना’, ‘एपिस’।
• खांसने पर पाखाना निकल जाना – ‘कॉस्टिकम’।


टीके वगैरह लगने के बाद (बच्चों में) दस्त होना – ‘साइलेशिया’, ‘थूजा’ ।
• सब्जियां (तरबूज वगैरह) खाने के बाद – ‘आर्सेनिक’, ‘ब्रायोनिया’ ।
• प्रदूषित जल पीने के कारण – ‘जिंजिबर’, ‘एल्सटोनिया’, ‘कैम्फर’ ।
• बच्चों में दस्त होना – ‘एकोनाइट’, ‘एथूजा’, ‘अर्जेण्टमनाइट’, ‘आर्सेनिक’, ‘बेलाडोना’, ‘बोरैक्स’, ‘कैल्केरिया कार्ब’, ‘कैल्केरियाफॉस’, ‘कैमोमिला’, ‘कोलोसिंथ’, ‘क्रोटनटिंग’, ‘सल्फर’, ‘वेरेट्रम एल्बम’।
• बच्चों में दांत निकलने के दौरान दस्त – ‘एकोनाइट’, ‘एथूजा’, ‘बेलाडोना’, ‘कैल्केरिया आदि।
• बूढ़े व्यक्तियों को दस्त होने पर – ‘एण्टिमकूड’, ‘कार्बोवेज’, ‘सिनकोना’, ‘सल्फर’ ।
• स्त्रियों में मासिक ऋतु स्राव से पहले व बाद में दस्त – ‘अमोनब्रोम’, ‘बोविस्टा’।
• लेटे रहने पर स्त्रियों को दस्त की हाजत होना – ‘कैमोमिला’, ‘हायोसाइमस’, ‘सिकेलकॉर’।

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7.2.16

खस खस (पोस्तदाना) के स्वास्थ्य लाभ // Benefits of Poppy Seeds




 

खसखस सूक्ष्म  आकार का बीज होता है। इसे लोग पॉपी सीड के नाम से भी जानते हैं। खसखस प्यास को बुझाता है और ज्वर, सूजन और पेट की जलन से राहत दिलाता है और यह एक दर्द-निवारक भी है। लंबे समय से ही प्राचीन सभ्यता मे इसका उपयोग औषधीय लाभों के लिए किया जाता रहा है| 
अनिद्रा- खसखस नींद से जुड़ी दिक्कतों  में मदद करता है क्‍योंकि इसके सेवन से आपके अंदर  सोने के लिए मजबूत इच्छा पैदा होती हैं। अगर आप भी अनिद्रा की समस्या  से परेशान हैं, तो सोने से पहले खसखस के पेस्ट  को गर्म दूध के साथ सेवन करना समस्या  में बहुत प्रभावी साबित हो सकता है।

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श्वसन संबंधी विकार-खसखस के बीज में शांतिदायक गुण होने के कारण यह सांस की बीमारियों के इलाज में बहुत कारगर होता है। यह खांसी को कम करने में मदद करता है और अस्थमा जैसी समस्याओं के खिलाफ लंबे समय तक राहत प्रदान करता है। 



कब्ज,पोषण-खसखस के बीज ओमेगा-6 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। इसके अलावा इसमें विभिन्न फाइटोकेमिकल्स, विटामिन बी, थायमिन, कैल्शियम और मैंगनीज भी होता हैं। इसलिए खसखस को एक उच्च पोषण वाला आहार माना जाता है।



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खसखस फाइबर को बहुत अच्छा स्रोत हैं। इसमें इसके वजन से लगभग 20-30 प्रतिशत आहार फाइबर शामिल होता हैं। फाइबर स्वस्थ मल त्याग में और कब्ज की दिक्कत दूर करने में बहुत लाभकारी होती है। लगभग 200 ग्राम खसखस आपके दैनिक फाइबर की जरूरत को पूरा कर सकता हैं|

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शांतिकर 
औषधि-सूखी खसखस को प्राकृतिक शांति प्रदान करने वाली औषधि माना जाता है कारण ,इसमें थोड़ी सी मात्रा में ओपियम एल्कलॉइड्स नामक रसायन होता है। यह रसायन तंत्रिका की अतिसंवेदनशीलता, खांसी और अनिद्रा को कम करते हुए आपकी तंत्रिका तंत्र पर एक न्यूनतम प्रभाव उत्पन्न करता है।
एंटीऑक्सीडेंट-माना जाता है कि खसखस में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होने के कारण इसमें अद्भुत एंटीऑक्सीडेंट गुण होते है। ये एंटीऑक्‍सीडेंट फ्री रेडिकल के हमलों से अंगों और ऊतकों की रक्षा करते है। इसलिए इन सब खतरों से बचने के लिए हमें अपने आहार में खसखस को शामिल करना चाहिए।


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दर्द-निवारक-
खसखस में मौजूद ओपियम एल्कलॉइड्स नामक रसायन होता है, जो दर्द-निवारक के रूप में बहुत कारगर होता है। खसखस को दांत में दर्द, मांसपेशियों और नसों के दर्द को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।खसखस एक लोकप्रिय दर्द-निवारक भी है।
त्वचा की देखभाल-
आयुर्वेद में तो हमेशा से ही खसखस को त्‍वचा के लिए अच्‍छा माना जाता है। यह एक मॉइस्‍चराइजर की तरह काम करता है और त्वचा की जलन और खुजली को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद लिनोलिक नामक एसिड एक्जिमा के उपचार में भी मददगार होता है।

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4.2.16

कब्ज नाशक नुस्खे // Effective home remedies of constipation

                      

     आज की जीवनशैली और काम के बोझ में कब्ज होना कोई बड़ी बात नहीं हैं। कब्ज आज बेहद आम समस्या बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कब्ज को दूर करने के उपाय आपकी अपनी रसोई में मौजूद हैं।
    रात को सोने से पहले गुड़ खाने से सुबह के समय कब्ज की समस्या नहीं रहती। विटामिन और मिनरल्‍स से भरपूर गुड़ को गर्म करके खाने से कब्ज में बहुत आराम मिलता है। 


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आलूबुखारा खाने से आपकी पेट संबंधी सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। रोजाना 3 ग्राम आलूबुखारा खाने से     कब्ज को आसानी से दूर किया जा सकता है। दरअसल, आूलबुखारा में भारी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जिससे कब्ज को दूर करने में मदद मिलती है।
    नींबू का रस पाचन तंत्र को ठीक करता है। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त कण निकल जाते हैं। ताजा नींबू पानी सुबह पीने से कब्ज नहीं होती। चाहे तो लेमन टी भी पी सकते हैं।
कॉफी पीने से आप बिना देर किए बाथरूम तक पहुंच जाएंगे। दरअसल, कॉफी से प्रेशर जल्दी बनता है।
    रोजाना 15 मिनट टहलने से भी आप आसानी से कई समस्याओं को दूर कर सकते हैं। ज्यादा खाने के बाद यदि आपको नींद आने लगे तो आपको थोड़ा टहलना चाहिए। 


    पुदीना और अदरक दोनों की चाय बनाकर पीने से कब्ज की समस्या नहीं रहती। अदरक की चाय कब्ज से छुटकारा पाने के लिए बेहतरीन घरेलू नुस्‍खा हैं।

विशिष्ट परामर्श-






यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी निराश रोगी इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|



      


1.5.10

कब्ज जड़ से खत्म करेंगे ये घरेलू आयुर्वेदिक उपचार//How to fight constipation?



      अनुपयुक्त खान-पान के चलते कब्ज लोगों में एक सर्वाधिक प्रचलित रोग बन चुका है। यह पाचन-तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल विसर्जन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को २-३ बार होता है। कुछ लोगों को हफ़्ते में २ या ३ बार ही शौचालय जाने से काम चल जाता है।
     ज्यादा कठोर और सूखा मल जिसे बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे,यही कब्ज का लक्षण है। ऐसा मल हफ़्ते में ३ बार से भी कम होता है और यह कब्ज का दूसरा मुख्य लक्षण होता है। कब्ज रोगियों में पेट के फ़ूलने की शिकायत भी आमतौर पर मिलती है। वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज की प्रधानता पाई जाती है। कुदरती पदार्थों के इस्तेमाल करने से यह रोग जड से खत्म हो जाता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।

१) शरीर में तरल की कमी होना कब्ज का मूल कारण है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर ३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा मेहसूस होगी
लेकिन धीरे-धीरे आदत पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।

२) भोजन में रेशा की मात्रा ज्यादा रखने से स्थाई रूप से कब्ज मिटाने में मदद मिलती है। सब्जियां और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।
३) सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।
४) पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।
५) रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।


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