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24.3.18

जोड़ो के दर्द के लिए आयुर्वेदिक तेल बनाने की विधि // Method of making Ayurvedic oil for joint pain

                                    

जोड़ों -घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न ,एक टांग मे दर्द
( साइटिका / रिंगन बाय / गृध्रसी ) – गर्दन का दर्द ( सरवाईकाल स्पोंदिलाइटिस ) आदि की हानि रहित सुरक्षित चिकित्सा
कोई भी आयुर्वेदिक तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है । एक बार आप इसे जरूर बनाए
* 250 ग्राम तेल ( सरसों या तिल का )

* 50 ग्राम कायफल 
    कायफल यह एक पेड़ की छाल है जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है | ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है |इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए |जितना महीन / बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा |


* बनाने की विधि :- एक लोहे / पीतल / एल्यूमिनियम की कड़ाही मे तेल गरम करें – आग धीमी रखें
जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ
जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे
एक कपड़े मे से तेल छान ले |जब तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें |
इस तेल को एक बोतल मे रख ले | कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा | उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले |
* इसे अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे !
इस तेल की मालिश से जोड़ों के हर  प्रकार के दर्द नष्ट होते  हैं |


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विशिष्ट परामर्श-  


संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|   बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|