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21.8.19

गैस छोड़ना या पादना के स्वास्थ्य लाभ


गैस छोड़ना या पादना (Farting) यह एक प्राकृतिक क्रिया है। अधिक तला-भुना खाने और जीवनशैली के कारण पेट में गैस हो जाती है। यह गैस दो रास्‍तों से बाहर निकलती है। मुंह से बाहर निकलने को डकार कहते हैं और वहीं गुदा मार्ग से निकलने पर पाद (Farting)कहते हैं। यदि आप बहुत से लोगों के बीच बैठें है और इस बीच आप पेट की गैस यानि पाद छोड़ते हैं, तो यह कई बार आपको बेहद शर्मिंदगी महसूस करवाता है। लेकिन इसमें शर्मिंदगी की कोई बात नहीं, बल्कि यह आपके पाचनतंत्र के स्वस्थ होने का संकेत है।
क्‍या आप यह जानते हैं, गैस छोड़ना (Farting) पेट ही नहीं आपके पूरे शरीर के लिए जरूरी है। यह भोजन पचाने का एक आवश्यक और सामान्य हिस्सा है, जैसे आपके पेट के लिए खाना जरूरी है, वैसे ही पेट के फूलने और पेट में जमा गैस से राहत पाने के लिए गैस छोड़ना या पादना (Farting)जरूरी है। हर किसी को अपने पाचन स्वास्थ्य के लिए ऐसा करना पड़ता है, यदि आप गैस नहीं छोड़ते, तो यह काफी चिंता का विषय भी हो सकता है। क्‍योंकि एक व्‍यक्ति एक दिन में कम से कम 5-6 और ज्‍यादा से ज्‍यादा 14 बार गैस छोड़ता है। जरूरी नहीं कि हर बार पाद छोड़ने में आवाज या दुर्गंध आये। आइए हम आपको बताते हैं कि गैस छोड़ना क्‍यों जरूरी है और इसके आपके लिए क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं। 



पेट फूलने की समस्‍या दूर

कई बार अधिक या तला-भुना खाने की वजह से आपके पेट में गैस बन जाती है। ऐसे में आप काफी फूला हुआ महसूस करते हैं। लंबे समय तक गैस को रोक कर रखने की वजह से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है। लेकिन ऐसे में अगर आप पाद यानि गैस पास करते हैं, तो इससे आपके पेट की सूजन कम होती है और आपका पाचन तंत्र सही तरीके से काम करने लगता है। पाद छोड़ने से ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है और आप काफी आरामदायक महसूस करते हैं।
पाद की गंध फायदेमंद
सुनने में अजीब और अटपटा जरूर लगता है लेकिन यह सही है। गैस छोड़ते यानि बदबूदार पाद व पाद की गंध आपको बीमारियों से बचाने में मददगार है। जी हां अध्‍ययन बताते हैं, कि जब आप गैस छोड़ते हैं, तो उससे एक यौगिक हाईड्रोजन सल्फाइड नामक गैस पास होती है, जो यदि ज्यादा मात्रा में होती है, तो टॉक्सिक हो सकती है लेकिन कम मात्रा कोशिकाओं को नष्ट व हानि पहुंचने से रोकथाम करती है। इसके अलावा पाद की गंध आपके हृदय स्‍वास्‍थ्‍य और स्ट्रोक के खतरे को भी कम करती है।
स्‍वस्‍थ व हैप्‍पी बैक्टीरिया
यदि आप पाद छोड़ते हैं, तो यह आपके स्‍वस्‍थ पाचन तंत्र का संकेत है। क्‍योंकि स्लिमर, स्वस्थ लोग अक्सर अधिक पाद छोड़ते हैं। एनपीआर के अनुसार, ऐसा इसलिए होता है कि ऐसे खाद्य पदार्थ, जो आपके माइक्रोबायोम (पेट में होने वाले तमाम जीवाणु, कीटाणु और प्रोटोज़ोआ का हमारी सेहत से गहरा ताल्लुक़ है) और अधिक कुशल पाचन को प्रोत्साहित करते हैं, फूलगोभी, गोभी और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसे खाद्य पदार्थ हैं। ये पत्तेदार साग- सब्जियां आपके आंत बैक्टीरिया को प्रोत्‍साहित करते हैं। जिसका अर्थ है बेहतर पाचन, और अधिक गैस का उत्पादन।


एलर्जी से बचाए और राहत दिलाए

गैस का पास होने से राहत के साथ-साथ आपका मूड सही रहता है और यह शरीर में खाद्य एलर्जी की उपस्थिति को निर्धारण कर सकता है। सोलियाक डीजिज और लैक्टोज इन्टॉलरेंस जैसी एलर्जी पेट की समस्या को बढ़ाती है। यदि आप ऐसे भोजन का सेवन करते हैं तो आपको एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए गैस पास करना लाभकारी हो सकता है।
कोलन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
वीमेन हेल्थ मैग्‍नीज के अनुसार, गैस को रोकने से कोलन पर दबाव पड़ता है, ऐसे में पाचन संबंधी समस्‍याएं और यदि आप ज्‍यादा समय तक गैस को रोक कर रखते हैं, तो यह आपके कोलन स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित कर सकता है। इससे हैमोरोइड्स में सूजन का खतरा हो सकता है इसलिए गैस छोड़ना व्‍यक्ति के लिए बहुत जरूरी है
आमतौर पर एक व्यक्ति दिन में 5-15 बार गैस छोड़ता है.लेकिन कुछ लोगों के लिए सामान्य-सी बात दूसरों के लिए अलग या चिंता की बात बन सकती है.
खाना-पीना सुधारने की ज़रूरत?
गैस से बचना है तो डाइट को एडजस्ट करने की ज़रूरत है.
अगर आपका शरीर लैक्टोस को पसंद नहीं करता तो डॉक्टर आपको दूध-आधारित सामान कम खाने की सलाह दे सकता है. लैक्टोस सप्लीमेंट इस्तेमाल करने से एंज़ाइम डेयरी उत्पादों को आसानी से पचाने का ज़रिया दे सकते हैं.
गैस को घटाना चाहते हैं तो कार्बोनेटेड बेवरेज भी कम करना होगा.
लेकिन ऐसे हालात होने पर अचानक फ़ाइबर की मात्रा न बढ़ाएं क्योंकि इससे गैस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं.
लेकिन बदबूदार फ़ार्ट से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
कम-कम खाया जाए और खाना चबाकर खाया जाए, तो अच्छा है.


इसके अलावा व्यायाम करना ज़रूरी है, क्योंकि उसकी मदद से खाना पचाना आसान होता है. जब आप जल्दी-जल्दी खाते हैं तो ज़्यादा हवा शरीर में जाती है. चहलकदमी करते हुए खाना भी इसलिए मना किया जाता है.
ज़्यादा चुइंगम खाने से भी ये दिक्कत पेश आ सकती है. जो लोग दिन भर चुइंगम चबाते रहते हैं, वो ज़्यादा हवा खींचते हैं, जिससे शरीर में गैस ज़्यादा बनती है.
ऐसा खाना खाने से बचें जो ज़्यादा गैस पैदा करते हैं. इसके लिए कुछ ख़ास कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं, इनमें फ़्रुक्टोज़, लैक्टोज़, इनसॉल्यूबर फ़ाइबर और स्टार्च शामिल हैं. ये सभी चीज़ें आंत में जाती हैं और बाद में खाना पचाने में समस्याएं पैदा करती हैं.
सोडा, बीयर और दूसरे कार्बोनेटेड बेवरेज भी शरीर में गैस बनाने का काम करते हैं. इनमें जो बुलबुले उठते हैं, वो शरीर में जाकर फ़ार्ट में बदल सकते हैं. इनमें से कुछ हवा डाइजेस्टिव ट्रैक्ट तक पहुंच जाती है और रेक्टम के ज़रिए बाहर निकल जाती है. इनके स्थान पर पानी, चाय, वाइन या जूस पिया जा सकता है.
हमारे पाचन तंत्र में ऐसे स्वास्थ्यवर्धक बैक्टीरिया होते हैं जो खाना पचाने का काम करते हैं. लेकिन इनमें से कुछ हाइड्रोजन गैस को ज़्यादा असरदार तरीके से ख़त्म करते हैं. प्रोबायोटिक फ़ूड ऐसे ही बैक्टीरिया पाए जाते हैं.
सिगरेट ज़्यादा पीने वालों को भी गैस की दिक्कत होती है. इसके अलावा जब मल ज़्यादा वक़्त तक मलाशय में रहता है तो उसका सड़ना तय है और तब गैस ज़्यादा बनती है. यही वजह है कि पेट ख़राब होने पर मल आम दिनों से ज़्यादा दुर्गंध लिए होते हैं.


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