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18.11.19

तनाव चिंता डिप्रेशन मे उपयोगी अश्वगंधा कई रोगों मे फायदे मंद


चिंता, मानव विकास के दौरान संरक्षित की गयी एक सामान्य तनाव प्रतिक्रिया हैं। हालांकि, जब चिंता सामान्य रोजमर्रा की घटनाओं में आती हैं, तब यह एक गंभीर चिंता विकार का रूप ले सकती है। चिंता विकारों के कारण एक व्यक्ति, उनकी शारीरीक या मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर संभावित आने वाले खतरे को लेकर अशांति और चिंता की स्थिती में चला जाता हैं। चिंता विकारों के लक्षण अक्सर दीर्घकालीन होते हैं, और उसमे ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, ज्यादा चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में तनाव, अशांत नींद और चिंताओं पर काबू पाने में परेशानी, आदि शामिल हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में परंपरागत रुप से विभिन्न रोगों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किये जाने वाली अश्वगंधा एक जड़ी बूटी है। आयुर्वेदिक उपचार में इस पौधे की जड़ें, पत्तियां और फल इस्तेमाल किये जाते हैं। रोमन इसे अपने वाइन में डालते थे ऐसी कहावत हैं। इसका लैटिन नाम 'विथानिआ सोमनिफेरा' है। यह चिंता विकार, अवसाद और अन्य मानसिक विकारों के उपचार में लाभकारी होती हैं, ऐसा माना गया हैं। आयुर्वेदिक उपचारों में वर्षों से इस पौधे की जड़ों, पत्तियों और फलों को इस्तेमाल किया जा रहा हैं। अब वैज्ञानिक अध्ययन ने यह पुष्टि की है कि इसमें कई औषधीय गुण हैं। तनाव कम करें अश्‍वगंधा आधुनिक जीवन नें उच्च स्तरीय नौकरियों में बहुत ज्‍यादा तनाव का निर्माण होता हैं और 80 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि तनाव के कारण उन्‍हें जीवन में बहुत सारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें तनाव को कम और उसका प्रबंधन करने और कोर्टिसोल के स्तर को कम करने के लिए एक स्वस्थ तरीकों की जरूरत हैं। तनाव के हार्मोन के रूप में कोर्टिसोल को जाना जाता हैं। अश्वगंधा किसी भी हानिकारक दुष्प्रभावों के बिना चिंता और तनाव को कम करने का एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका हैं।    शोध के अनुसार एक अध्ययन में अश्वगंधा के अवसाद विरोधी परिणाम की तुलना, पर्चेवाली अवसाद की दवाओं से की। और दिलचस्प बात यह सामने आयी कि चिंता और अवसाद पर उसके प्रभाव आधुनिक दवाओं के लिए तुलना में बहुत ही अच्‍छे थे। यह आयुर्वेदिक दावा आधुनिक हर्बल अनुसंधान द्वारा किया गया है। अश्वगंधा पर जॉर्ज वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन एड हेल्थ साइंस और कुछ अन्य अमेरिकी परीक्षण केंद्रो में नैदानिक परीक्षणों का उपयोग करके उसकी प्रभावशीलता की जांच की गयी हैं। और उन्होने यह प्रमाणित किया है कि अश्वगंधा में किसी भी विषाक्तता या दुष्प्रभावों के बिना चिंता दूर करने वाले और अवसाद विरोधी गुण होते हैं। एक परीक्षण में, तंत्रिका रोग से पीड़ित 30 रोगियों को एक महीने के लिए प्रति दिन 40 मिलीग्राम अश्वगंधा की खुराक दी गयी। परीक्षण से पता चला कि ज्यादातर चिंता विकार के लक्षण जैसे घबड़ाहट या डर में बहुत कमी आयी। क्योंकि कई लोग अवसाद विरोधी दवा का इस्तेमाल करते हैं, दुष्प्रभावों के बिना प्राकृतिक उपचार का इस्तेमाल सकारात्मक रुप से लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता हैं। अश्वगंधा आधुनिक दुनिया के तनावों के लिए प्रतिविष हो सकती हैं। अश्वगंधा ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे किसी परिचय की जरूरत नहीं है। अनगिनत खुबियों के कारण ही, सदियों से विश्वभर में इसका उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न ग्रंथों में भी इसका उल्लेख किया गया है। आज के वैज्ञानिक युग में डॉक्टर भी मान चुके हैं कि अश्वगंधा गुणकारी औषधि है और कई रोगों के उपचार इस अकेली जड़ी-बूटी से संभव हैं। साथ ही साथ इसका इस्तेमाल शक्तिवर्धक दवा के रूप में भी किया जा सकता है। यह जड़ी-बूटी आपको बाजार में पाउडर, कैप्सूल व टैब्लेट आदि रूपों में आसानी से मिल जाएगी। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी स्ट्रेस व एंटीबैक्टीरियल जैसे तत्व और इम्यून सिस्टम को बेहतर करने व अच्छी नींद लाने वाले गुण मौजूद हैं। अगर यह कहा जाए कि इसमें हर मर्ज का इलाज छुपा है, तो गलत नहीं होगा अश्वगंधा संपूर्ण शरीर के लिए फायदेमंद है। इसके सेवन से सिर्फ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली ही बेहतर नहीं होती, बल्कि मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं और शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इसके अलावा, यह यौन व प्रजनन क्षमता को बेहतर करने में भी सक्षम है। साथ ही इसके सेवन से तनाव को भी कम किया जा सकता है। यह औषधि श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि कर शरीर को तमाम तरह के रोगों से लड़ने के लिए तैयार करती है जैसा कि हमने लेख के शुरुआत में बताया था कि अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाया जाता है, तो इस खूबी के कारण ही यह शरीर में फ्री रेडिकल्स को बनने से रोकता है। इस कारण चेहरे पर समय से पूर्व झुर्रियां पड़ने की आशंका कई गुना कम हो जाती है अश्वगंधा में एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं। इस कारण से ही यह ह्रदय से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं को दूर करने में सक्षम है। अगर आप अश्वगंधा का प्रयोग करते हैं, तो ह्रदय की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। कई वैज्ञानिक शोधों में भी पुष्टि की गई है कि अश्वगंधा में भरपूर मात्रा में हाइपोलिपिडेमिक पाया जाता है, जो रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है अनिद्रा अगर आप नींद न आने से परेशान हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन कर सकते हैं। यह हम नहीं, बल्कि 2017 में जापान की त्सुकुबा यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए एक रिसर्च में कहा गया है। इस अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा के पत्तों में ट्राइथिलीन ग्लाइकोल नामक यौगिक पाया जाता है, जो गहरी नींद में सोने में मदद करता है। इस रिसर्च के आधार पर कहा जा सकता है कि अनिद्रा के शिकार व्यक्ति को अश्वगंधा का सेवन करने से फायदा हो सकता है आजकल जिसे देखो, वही तनाव में नजर आता है। इस कारण से हम न सिर्फ समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं, बल्कि कई बीमारियों का शिकार भी बन रहे हैं। अगर आप इन सभी दुष्परिणामों से बचना चाहते हैं, तो तनाव और चिंताग्रस्त जीवन जीने का प्रयास करें। साथ ही अश्वगंधा का सेवन करें। यह आयुर्वेदिक औषधि आपके तनाव को दूर करने के लिए कारगर साबित हो सकती है। हालांकि, अभी तक वैज्ञानिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन कारणों से अश्वगंधा में एंटी-स्ट्रेस गुण है, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इसमें तनाव से राहत दिलाने के गुण हैं
यौन क्षमता में वृद्धि कई पुरुषों में यौन इच्छा कम होती है और वीर्य की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं होती। इस कारण वो संतान सुख से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में अश्वगंधा जैसी शक्तिवर्धक औषधि पुरुषों में यौन क्षमता को बेहतर करने का भी काम करती है। साथ ही वीर्य की गुणवत्ता को भी बेहतर करती है। 2010 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा का प्रयोग करने से वीर्य की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी संख्या में भी वृद्धि होती है। यह इंडियन जिनसेंग खासकर उन लोगों के लिए वरदान की तरह है, जिनकी यौन क्षमता या फिर वीर्य की गुणवत्ता कम होती है
डायबिटीज आप चाहे कैंसर की बात करें या फिर उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की, आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज संभव है। उसी तरह डायबिटीज का इलाज भी आयुर्वेद के जरिए किया जा सकता है। आयुर्वेद में उल्लेख है कि जो अश्वगंधा का सेवन करता है, उसे जल्द ही डायबिटीज से राहत मिल सकती है। इस तथ्य को बल 2009 में हुए एक अध्ययन के जरिए मिलता है। इसमें डायबिटीज ग्रस्त चूहों पर अश्वगंधा की जड़ और पत्तों का प्रयोग किया गया था। कुछ समय बाद चूहों में सकारात्मक परिवर्तन नजर आए थे। इस लिहाज से विज्ञान प्रमाणित करता है कि अश्वगंधा से डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है
थायराइड गले में मौजूद तितली के आकार की थायरायड ग्रंथि जरूरी हार्मोंस का निर्माण करती है। जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो शरीर का वजन कम या ज्यादा होने लगता है। साथ ही अन्य तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इसी अवस्था को थायराइड कहते हैं। अगर आप भी थायराइड से ग्रस्त हैं, तो आपके लिए यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि अश्वगंधा किस प्रकार आपके लिए लाभकारी है। थायराइड से ग्रस्त चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जब चूहों को नियमित रूप से अश्वगंधा की जड़ दवा के रूप में दी गई, तो उनके थायराइड हार्मोंस संतुलन होने लगे। इस आधार पर कहा जा सकता है कि थायराइड की अवस्था में डॉक्टर की सलाह पर अश्वगंधा का सेवन लाभकारी साबित हो सकता है गठिया-
यह ऐसी पीड़ादायक बीमारी है, जिसमें मरीज का चलना-फिरना और उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। ऐसा लगता है कि मानो जोड़ जम गए हैं। इसी के मद्देनजर वैज्ञानिकों ने 2014 में अश्वगंधा पर शोध किया था। उन्होंने अपने शोध के जरिए बताया कि अश्वगंधा में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। अगर अश्वगंधा की जड़ के रस का प्रयोग किया जाए, तो न सिर्फ आर्थराइटिस से जुड़े लक्षण कम होते हैं, बल्कि दर्द से भी आराम मिलता है याददाश्त में सुधार इन दिनों हर कोई मल्टीपल काम कर रहा है और तनाव से भी घिरा हुआ है। परिणामस्वरूप, मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में जानवरों पर किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि अश्वगंधा ने मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त पर सकारात्मक तरीके से असर डाला। साथ ही अश्वगंधा लेने से नींद भी अच्छी आती है, जिससे मस्तिष्क को आराम मिलता है और वह बेहतर तरीके से काम कर पता है
 एंटी एजिंग जैसा कि इस लेख के शुरुआत में बताया गया है कि अश्वगंधा में एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है। इस लिहाज से यह आपके लिए काफी लाभकारी है। एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण ही यह शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ सकता है। ये फ्री रेडिकल्स सूरज की यूवी किरणों के कारण भी हमारे शरीर में बन सकते हैं और एंटी एजिंग का कारण बन सकते हैं। वहीं, अश्वगंधा से बने फेस पैक का प्रयोग किया जाए, तो न सिर्फ समय पूर्व चेहरे पर आने वाली झुर्रियों से छुटकारा मिल सकता है, बल्कि डार्क स्पोर्ट को भी कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अश्वगंधा के प्रयोग से स्किन कैंसर से भी बचा जा सकता है सामग्री : एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर थोड़ा-सा गुलाब जल (आवश्यकतानुसार) कैसे करें प्रयोग : अश्वगंधा पाउडर और गुलाब जल को अच्छी तरह मिक्स करें, ताकि वो पेस्ट की तरह बन जाए। अब इसे साफ हाथों या फिर साफ मेकअप ब्रश से अपने चेहरे पर लगाएं। इस पेस्ट को करीब 15 मिनट लगे रहने दें और फिर पानी से धो लें। कोर्टिसोल के स्तर में कमी कोर्टिसोल एक प्रकार का हार्मोन होता है, जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। यह हार्मोन आपके शरीर को बताता है कि आपको भूख लग रही है। जब रक्त में इस हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो शरीर में फैट और स्ट्रेस का स्तर भी बढ़ने लगता है। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, कोर्टिसोल के स्तर को कम करना जरूरी है। एक शोध में पाया गया है कि अश्वगंधा के प्रयोग से कोर्टिसोल को कम किया जा सकता है 
मजबूत बाल- ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो झड़ते बालों से परेशान हैं। ऐसा बालों के जड़ से कमजोर होने पर होता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो खास अश्वगंधा आपके लिए ही है। बाल न सिर्फ पोषक तत्वों की कमी के कारण झड़ते हैं, बल्कि इसके पीछे तनाव भी एक कारण है। जैसा कि पहले भी बताया गया है कि अश्वगंधा के प्रयोग से स्कैल्प बेहतर होता है और संपूर्ण पोषण मिलता है, उसी तरह यह कोर्टिसोल के स्तर को भी कम करता है। कोर्टिसोल का स्तर कम होने से तनाव दूर होता है और उससे होने वाले दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। ऐसे में जब बालों को पूरे पोषक तत्व मिलेंगे और तनाव कम होगा, तो बालों का झड़ना भी कम हो जाएगा| 
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