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18.11.19

शीत पित्त (पित्ती उछलना) के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



  इसे साधारण भाषा में पित्ती उछलना कहते हैं| इसमें रोगी के शरीर में खुजली मचती रहती है, दर्द होता है तथा व्याकुलता बढ जाती है| कभी- कभी ठंडी हवा लगने या दूषित वातावरण में जाने के कारण भी यह रोग हो जाता है| शीतपित्त पेट की गड़बड़ी तथा खून में गरमी बढ़ जाने के कारण होता है| वैसे साधारणतया यह रोग पाचन क्रिया की खराबी, शरीर को ठंड के बाद गरमी लगने, पित्त न निकलने, अजीर्ण, कब्ज, भोजन ठीक से न पचने, गैस और डकारें बनने तथा एलोपैथी की दवाएं अधिक मात्रा में सेवन करने से भी हो जाता है| कई बार अधिक क्रोध, चिन्ता, भय, बर्रै या मधुमक्खी के डंक मारने, जरायु रोग (स्त्रियों को), खटमल या किसी जहरीले कीड़े के काटने से भी इसकी उत्पत्ति हो जाती है|

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पित्त बढ़ जाने के कारण हाथ, पैर, पेट, गरदन, मुंह, जांघ आदि पर लाल-लाल चकत्ते या ददोरे पड़ जाते हैं| उस स्थान का मांस उभर आता है| जलन और खुजली होती है| कान, होंठ तथा माथे पर सूजन आ जाती है| कभी-कभी बुखार की भी शिकायत हो जाती है|
* पित्ती उछलने के सरल उपचार - 
1) सबसे पहले रात को दो से चार चम्मच एक एरण्ड का तेल दूध में पीकर सुबह दस्तों के द्वारा पेट साफ कर लें| फिर छोटी इलायची के दाने 5 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम और पीपल 10 ग्राम – सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना लें| इसमें से आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन सुबह मक्खन या शहद के साथ चाटें| 
2) एप्पल साइडर सिरका पित्ती के लिए एक और अच्छा उपाय है। इसके एंटी-हिस्टामिन गुण सूजन को जल्‍द दूर करने में मदद करता और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को विनियमित करता है। इसके अलावा यह समग्र त्वचा के स्वास्थ्य को ठीक करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुनगुने पानी से भरे एक बाथटब के गर्म पानी में सेब सिरके के दो कप मिलाये। फिर इस पानी में प्रभावित हिस्‍से को 15 से 20 मिनट के लिए भिगो दें। इसके अलावा आप सेब के सिरके और समान मात्रा में पानी को मिलाकर प्रभावित त्वचा को दिन में दो या तीन बार धोने के लिए प्रयोग करें। 

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3) ६ ग्राम पुदीना लेकर इस पुदीने को अच्छी तरह पीसकर पानी में मिलाकर इस पानी को छान ले और इसमें १२ ग्राम चीनी मिलाकर रोज़ सुबह - शाम पीने से पित्ती का बार - बार का उछलना शांत हो जाता है। २०० ग्राम पानी और १० ग्राम पुदीना व २० ग्राम गुड़ ,इन दोनों को पानी में मिलाकर उबाल ले इस उबले पानी को किसी कपड़े से छानकर पीने से पित्ती ३ दिन में ही आराम हो जाएगी । 4) पित्ती रोगियों को हल्दी , मिश्री और शहद इन तीनों को मिलाकर रात को खाने से पित्ती की शिकायत दूर हो जाती है । और खाने के बाद रोगी को हवा नही लगनी चाहिए । बेसन के लड्डू बनाकर या बाजार से खरीद कर इसमें काली मिर्च मिलाकर खाने से पित्ती की बीमारी दूर हो जाती है । 
5)पित्ती की बीमारी को जड़ से नष्ट करने के लिए रोगी गेहूँ के आटा दो चम्मच , एक चम्मच हल्दी और थोड़ा सा घी मिलाकर इसका हलुआ तैयार कर ले । इस तैयार हलुए को ठंडा करने के बाद खाए और इसके बाद गर्म दूध पी ले ।

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6)पित्ती दूर करने के और भी कई उपाय है जैसे:- थोड़ी - थोड़ी मात्र में गुड और अजवाइन मिलाकर इसका चूर्ण बना ले और इसकी ६ - ६ ग्राम की गोलियाँ तैयार कर ले । रोजाना एक- एक गोली शाम को पानी से खाने से आशातीत लाभ मिलता है । देसी घी में थोड़ा- सा सेंधा नमक डालकर रोग वाले स्थान पर मसलने से पित्ती ठीक हो जाती है ।
 7) पित्ती वाले रोगी के शरीर में गेरू पीसकर मलें तथा गेरू के परांठे या पुए खिलाएं| गाय के घी में दो चुटकी गेरू मिलाकर खिलाने से भी लाभ होता है | 
8) शीतपित्त में चिरौंजी का सेवन करें|
9) इस रोग को ठीक करने का एक सरल उपाय है हल्दी जो हर घर में उपलब्ध है । हल्दी को पीसकर या बाजारसे हल्दी का पाउडर खरीद कर यह पाउडर पानी में मिलाकर इसका पेस्ट तैयार कर ले । इस पेस्ट को दो छोटे चम्मच रोगी को एक दिन में सुबह दोपहर शाम खिलाने से पित्ती के रोगियों को काफी आराम मिलता है । इस बीमारी में रोगी को लाल गेरू या गैरिक का तेल उपयोग करने से भी लाभ मिलता है । 10) 2 ग्राम नागकेसर को शहद में मिलाकर चाटें| 
11) एक चम्मच हल्दी, एक चम्मच गेरू तथा दो चम्मच शक्कर सबको सूजी में मिलाकर हलवा बनाकर खाएं| 12) एक चम्मच त्रिफला चूर्ण शहद में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें|
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13) आंवले के चूर्ण में गुड़ मिलाकर खाने से गरमी के कारण उछली पित्ती ठीक हो जाती है| 
14) 5 ग्राम सोंठ तथा 5 ग्राम गेरू दोनों को शहद में मिलाकर चाटें|
 15) नीम की चार निबौलियों का गूदा शहद में मिलाकर सेवन करें| 
16) एक चम्मच अदरक का रस तथा शहद इस रोग में काफी लाभकारी है| 17) आधा चम्मच हल्दी तवे पर भूनकर उसे दूध या शहद के साथ लें|
 18) पित्ती उछलने पर घी में हींग को मिलाकर ददोरों पर मलें| 
19) पानी में नीबू निचोड़कर स्नान करने से भी काफी लाभ होता है| 
20) नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें| 
21) सरसों के तेल में अदरक का रस मिलाकर मालिश करें|
22) 10 ग्राम गुड़ में एक चम्मच अजवायन तथा 10 दाने पीपरमेंट मिलाकर सेवन करें|
23) यदि पित्ती गरमी से उत्पन्न हुई हो तो शरीर पर चंदन का तेल मलें| 
24)आधा चम्मच गिलोय के चूर्ण में आधा चम्मच चंदन का बुरादा मिलाकर शहद के साथ सेवन करें|'

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25) पानी में पिसी हुई फिटकिरी मिलाकर स्नान करें| नागर बेल के पत्तों के रस में फिटकिरी मिलाकर शरीर पर लगाएं| 
 26) थोड़े से मेथी के दाने, एक चम्मच हल्दी तथा चार-पांच पिसी हुई कालीमिर्च सबको मिश्री में मिलाकर चूर्ण बना लें| सुबह आधा चम्मच चूर्ण शहद या दूध के साथ सेवन करें| 
27) पित्ती के रोग के लिए नीम के पत्तियों का उपयोग बहुत ही लाभदायक होता है । नीम के पत्तियों को थोड़ीसी मात्रा में लेकर इन पत्तों को चबाये ये पत्ते तब तक चबाते रहे जब तक ये नीम के पत्ते कड़वे ना लग जाये । यह उपचार ३ से ४ दिन तक करने से पित्ती की शिकायत दूर हो जाती है । 
28) बकायन की छाल को धूप में सुखाकर पीस डालें| फिर 2 रत्ती इस चूर्ण को शहद के साथ लें| 
29) भोजन के बाद 6 माशा हरिद्राखण्ड को दूध के साथ सेवन करें|

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क्या खाएं  क्या न खाएं - * साग-सब्जी, मौसमी फल तथा रेशेदार सब्जियों का सेवन करें| गरम पदार्थ, गरम मेवे, गरम फल तथा गरम मसालों का प्रयोग न करें|  साग- सब्जी तथा दालों में नाम मात्र नमक डालें| खटाई, तेल, घी आदि का प्रयोग कम करें|  पित्त को कुपित करने वाली चीजें, जैसे-सिगरेट, शराब तथा कब्ज पैदा करने वाले गरिष्ठ पदार्थ बिलकुल न खाएं|  पुराने चावल, जौ, मूंग की दाल, चना आदि लाभकारी हैं| प्याज, लहसुन, अंडा, मांस, मछली आदि शीतपित्त में नुकसान पहुंचाते हैं, अत: इनका भी सेवन न करें|  जाड़ों में गुनगुना तथा गरमियों में ताजे जल का प्रयोग करें| इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों को खट्टे पदार्थो जैसे दही आदि का प्रयोग नही करना चाहिए । रोगी को कड़वे पदार्थ या कड़वी सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए |
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