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1.8.19

बेसन खाने के स्वास्थ्य लाभ



बेसन भारत में प्रमुख खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाता है। चना दाल के पिसे आटे को बेसन कहते हैं। लेकिन क्‍या आप बेसन खाने के फायदे और नुकसान जानते हैं। बेसन को ग्राम फ्लौर या छोले का आटा (Gram flour or chickpea flour or besan) भी कहा जाता है। बेसन ऐसा खाद्य पदार्थ है जो आमतौर सभी रसोई धरों में उपलब्‍ध होता है। बेसन का उपयोग हम विभिन्‍न प्रकार के स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजनों को बनाने के लिए करते हैं।
बेसन बाजार में बिकने वाला ऐसा उत्पाद है, जो न केवल सौंदर्यता को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। बेसन में फाइबर, आयरन, पोटेशियम, मैंगनीज, तांबा, जस्ता, फास्फोरस, मैग्नीशियम, फोलेट, विटामिन बी6 और थाइमिन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो कि मधुमेह के इलाज, मोटापा कम करने, हृदय को स्‍वस्‍थ रखने, हड्डियों को मजबूत करने, एनीमिया के उपचार और कोलेरेक्‍टल कैंसर जैसी गंभीर समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते हैं।
बेसन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
बेसन या चने की दाल का आटा बहुत ही पौष्टिक आहार है। नियमित रूप से इसका सेवन करने पर यह विभिन्‍न प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से हमारी रक्षा कर सकता है। हालांकि स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के लिए बेसन खाने के फायदे अप्रयक्ष रूप से लाभ दिलाते हैं। इसका मतलब यह है कि बेसन का उपभोग करने पर यह किसी भी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या के लिए त्‍वरित लाभकारी नहीं है। नियमित रूप से सेवन करने पर और लंबे समय के बाद ही प्रभावी होता है।


फायदे मधुमेह के लिए

हम अपने आहार में बेसन का कई प्रकार से उपयोग कर सकते हैं। बेसन खाने के फायदे रक्‍त शर्करा के स्‍तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। बेसन को बहुत ही कम ग्‍लाइसेमिक स्‍तर के लिए जाना जाता है जो उच्‍च मधुमेहवाले लोगों के लिए फायदेमंद होता है। ऐसा माना जाता है बेसन की रोटी खाने के फायदे मधुमेह रोगी के लिए बहुत अधिक होते हैं। लेकिन आप बेसन के पराठे भी खा सकते हैं। आप बेसन के कुछ आटे को भून सकते हैं और इसमें मसालों के साथ फ्राई करके उपभोग कर सकते हैं। यह आपके शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने का सबसे अच्‍छा और पौष्टिक तरीका हो सकता है।
खून बढ़ाने के लिए
चने के आटे या बेसन की रोटी के फायदे एनीमिया के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। बेसन शरीर की थकान, अधिक वजन और लोहे की कमी जैसी समस्‍याओं का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकता है। जानकारों के अनुसार नियमित रूप से बेसन की अनुशंसित मात्रा का सेवन करने से एनीमिया या खून की कमी जैसे लक्षणों को दूर किया जा सकता है। बेसन थियामिन (Thiamine) का अच्‍छा स्रोत होता है जिसके कारण यह आपको पर्याप्‍त मात्रा में ऊर्जा दिलाने में सक्षम है।
दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए
आप अपने दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए बेसन का उपयोग कर सकते हैं। बेसन में घुलनशील फाइबर होता है जो आपके हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को लंबे समय तक बनाए रखता है। इसलिए कहा जाता है कि बेसन की रोटी बेनिफिट्स फॉर हार्ट। बेसन में ऐसे बहुत से घटक होते हैं तो रक्‍त वाहिकाओं को आराम दिलाने के साथ ही आपके हृदय की कार्य क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। बहुत से हार्ट सर्जन रोगी को बेसन का सेवन करने की सलाह भी देते हैं। हृदय रोगियों के लिए बेसन खाने के फायदे उनके जीवन को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
वजन कम करने के लिए
जो लोग अपना वजन कम करने का प्रयास कर रहे हैं उन्‍हें अपने आहार में बेसन को शामिल करना चाहिए। क्‍योंकि बेसन खाने के लाभ वजन कम करने में प्रभावी पाए गए हैं। चूंकि बेसन में ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स कम होता है इसलिए इसमें कैलौरी की मात्रा भी कम होती है। यही कारण है कि बहुत से फिटनेस सलाहकार बेसन को प्रमुख आहार के रूप में खाने की सलाह देते हैं। भारत में बेसन का उपयोग सत्‍तू के रूप में भी किया जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी कम होती है जो प्रोटीन से भरपूर होता है। इसके अलावा बेसन में फाइबर भी अच्‍छी मात्रा में होता है जो अधिक वजन को नियंत्रित करने में सहायक होता है।


कमजोरी दूर करे

चने को पीसकर बेसन प्राप्‍त किया जाता है जिसमें आयरन की अच्‍छी मात्रा होती है। इस तरह से बेसन का नियमित सेवन कर शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा बेसन में फोलेट भी होता है जो शारीरिक कमजोरी (frailty) को दूर करने में प्रभावी होता है। यदि आप भी अपने शरीर को कमजोर महसूस कर रहे हैं तो अपने नियमित आहार में शामिल कर बेसन के फायदे प्राप्‍त कर सकते हैं।
गर्भावस्‍था के लिए
उन महिलाओं के लिए भी बेसन के फायदे होते हैं जो गर्भवती हैं। क्‍योंकि बेसन में फोलेट और आयरन दोनों की उच्‍च मात्रा होती है जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही आवश्‍यक हैं। गर्भावस्‍था के दौरान बेसन का सेवन करने से यह महिलाओं की कमजोरी को भी दूर करने में सहायक होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फोलेट बच्‍चे के तंत्रिका विकास में सहायक होता है। बेसन में कैल्शियम भी होता है जो गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं की हड्डियों को मजबूत रखने का अच्‍छा विकल्‍प है। इस तरह से गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के लिए बेसन खाने के फायदे होते हैं।
बेहतर नींद के लिए
क्‍या आप अनिद्रा या नींद की समस्‍या से परेशान हैं। यदि ऐसा है तो बेसन को अपने आहार में शामिल कर लाभ प्राप्‍त किया जा सकता है। अच्‍छी नींद को बढ़ावा देने में बेसन महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेसन के फायदे इसमें मौजूद 3 प्रमुख घटकों के कारण होते हैं। ये घटक हैं अमीनो एसिड, ट्रिप्टोफैन और सेरोटोनिन। ट्रिप्टोफैन आपके मस्तिष्‍क को शांत करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा सेरोटोनिन नींद को उत्‍तेजित करने में सहायक होते हैं। इसलिए ही बेसन खाने के फायदे आपकी नींद को बेहतर बनाने और आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
बेसन में अनसैचुरेटेड फैट्स मौजूद होता है जो हमारे स्वास्थ के लिए लाभकारी होता है। यह हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बनाये रखता है।विभिन्‍न स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए बेसन का उपयोग किया जाता है। बेसन के इन्‍हीं लाभों में एक रक्‍त कोलेस्‍ट्रॉल को कम करना भी शामिल है।  
स्‍तन कैंसर से बचाये
स्‍वास्‍थ्‍य लाभ दिलाने के लिए बेसन में विभिन्‍न प्रकार के औषधीय गुण होते हैं। इन्‍हीं गुणों में कैंसर रोधी गुण भी शामिल है। इसलिए बेसन के फायदे स्‍तन कैंसर जैसी गंभीर समस्‍या के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। हालांकि बेसन में कैंसर रोधी गुण आंशिक रूप से होते हैं। बेसन में सैपोनिन्‍स नामक फाइटोकेमिल होते हैं जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक होते हैं। इसके अलावा यह ट्यूमर के विकास की संभावना को भी कम करते हैं। नियमित रूप से महिलाओं द्वारा बेसन का सेवन करने से यह ऑस्टियोपोरोसिस से रक्षा करता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में स्‍तन कैंसर को रोकने वाले हार्मोन को उत्‍तेजित करने में भी बेसन के पोषक तत्‍व अहम भूमिका निभाते हैं।
आंत को सुरक्षित रखता है
यह बात सभी जानते है कि आंत की बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। अगर वक्त रहते इसका इलाज ना किया जाए तो यह बीमारी जानलेवा बन सकती है। आंत में दिक्कत होने की वजह से खाए हुए खाने का ना पचना और खाते ही उल्टी हो जाना आंत की बीमारी के अहम लक्ष्ण है। आंत से जुड़ी इस बीमारी से बचने के लिए आप कुछ घरेलू उपचार भी कर सकते है। इस घरेलू उपचार में सबसे पहला नाम आता है, चने के आटे की बनी रोटियों का। जी हां, आप गेहूं की रोटी के बजाय चने की रोटियां खा सकते है। यह रोटियां आंत की बीमारी के लिए फायदेमंद होता है। चने के आटे में पोष्टिक आहार होता है जो आंत की बीमारी से आपके आंत को सुरक्षित रखता है और आंत जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में मददगार होता है।


बेनिफिट्स फॉर ब्रेन

बेसन में फोलेट नामक एक महत्‍वपूर्ण विटामिन होता है। यह आपके मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने और मस्तिष्‍क की कार्य क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। नियमित रूप से बेसन का सेवन करने से शरीर को आवश्‍यक मात्रा में फोलेट और अन्‍य पोषक तत्‍वों की प्राप्ति होती है। इस तरह से बेसन मस्तिष्‍क कार्य क्षमता को उत्‍तेजित करने में सक्षम होता है। आप भी अपने और परिजनों के मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए अपने आहार में बेसन को शामिल कर सकते हैं।
रक्‍तचाप कम करे
जानकारों का मानना है कि बेसन का सेवन करने के फायदे रक्‍तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि बेसन में मैग्‍नीशियम की अच्‍छी मात्रा होती है। यह आपके रक्‍तचाप को नियंत्रित करने और बहुत सी हृदय संबंधी समस्‍याओं को रोकने में प्रभावी होता है। जो लोग हृदय रोग से ग्रसित हैं उन्‍हें नियमित रूप से बेसन का सेवन करना चाहिए क्‍योंक‍ि बेसन के गुण हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देते हैं।
सूजन को कम करे
एक अध्‍ययन के अनुसार बेसन में सूजन रोधी गुण होते हैं। इसलिए बेसन का इस्‍तेमाल सूजन को कम करने के लिए किया जा सकता है। बेसन में सेलेनियम, पोटेशियम, विटामिन ए और और विटामिन बी भी होते हैं। ये सभी घटक सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में प्रभावी होते हैं। यदि आप भी सूजन संबंधी समस्‍याओं से परेशान हैं तो सबसे पहले डॉक्‍टर से संपर्क करें साथ ही विकल्‍प के रूप से बेसन का सेवन कर सकते हैं।
डाक्टर भी मानते है इस आटे को फायदेमंद :
यह सिर्फ हम ही नहीं बल्कि कई विशेषज्ञ और डाक्टर भी यहीं मानते है कि चने के आटे से बनी रोटियां सचमुच फायदेमंद होती है। यह जरूरी नहीं है कि जो इंसान किसी बीमारी से जुझ रहा हो, वही इसका सेवन करें बल्कि हर कोई इसका सेवन कर सकता है। यह सभी के लिए फायदेमंद है। बड़े से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी इसका सेवन कर सकता है। इस आटे से बनी रोटियां नुकसान नहीं करती बल्कि काफी लाभदायक होती है।
सावधानी-
बेसन का ज़्यादा सेवन करने से नींद आती है, और थकावट भी महसूस होती है।
बेसन के अधिक उपयोग से दस्त, पेट में गैस बनने की समस्या हो सकती है।
इससे एसिडिटी भी हो सकती है।
जिन लोगो को किडनी स्टोन्स की परेशानी है, उन्हें बेसन का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
बहुत से लोगों को चने के बेसन या चने से बने उत्‍पादों का सेवन करने से पाचन संबंधी समस्‍याएं हो सकती हैं। जिनमें पेट की ऐंठन, दस्‍त, आंतों की गैस आदि समस्‍या हो सकती है। इसके अलावा अधिक मात्रा में बेसन का सेवन करने से दस्‍त, कब्‍ज और पेट दर्द आदि भी हो सकता है।बहुत से लोग बेसन और चने के प्रति संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों को बेसन का सेवन करने से बचना चाहिए।यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। साथ ही स्‍वास्‍थ्‍य लाभ लेने के लिए बेसन का उपभोग करना चाहते हैं तो पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लें।

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29.7.19

बाजरा खाने के स्वास्थ्य लाभ // Health benefits of eating millet bread



बाजरा हमारे पूर्वजों द्वारा उपयोग किये जाने वाले सबसे पुराने खाद्य पदार्थों में से एक है जिसे गेंहूं के आटे के साथ नियमित आहार में शामिल किया जाता था। इस खाद्य पदार्थ में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर सामग्री (fiber content) होती हैं जो हमारे अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य और पाचन के लिए आवश्‍यक होती है।
बाजरा के फायदे और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ बहुत अधिक होने के कारण कई स्‍वास्‍थ्‍य सलाहकारों द्वारा बाजरा के उपभोग की सलाह दी जाती है। बाजरा बहुत महंगा नहीं होता है इस कारण इसे सभी लोग आसानी से इस्‍तेमाल कर सकते हैं। बाजरा के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में अस्‍थमा को रोकना, खराब कोलेस्‍ट्रोल को कम करना, शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को साफ करना, मधुमेह को कम करना, दिल से संबंधित स्‍वास्‍थ्‍य और कैंसर के खतरे को कम करना आदि शामिल है। साथ ही यह एनीमिया को रोकने और शरीर के ऊतकों की मरम्‍मत करने में मदद करता है। यह ग्‍लूटेन मुक्‍त (gluten-free ) खाद्य पदार्थ का सबसे अच्‍छा विकल्‍प है।
बाजरे की रोटी खाने के फायदे –
आमतौर पर हर घर में गेंहू की रोटी ही बनती है और पूरा परिवार बड़े ही चाव से इस रोटी को खाता है.लेकिन अगर आप अपने बढ़ते वजन को कम करना चाहते हैं और वो भी रोटी खाना बंद किए बगैर. तो ये मुमकिन है.लेकिन इसके लिए आपको गेंहू के बजाय बाजरे की रोटी खाने की आदत डालनी होगी. क्योंकि गेंहू की रोटी के मुकाबले बाजरे की रोटी जल्दी वजन घटाने में मददगार साबित होता है.बाजरे की रोटी वजन घटाने के साथ ही पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाता है और कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है.


 डायबिटीज और कैंसर से बचाव

बाजरे की रोटी कैंसर और डायबिटीज के खतरे को कम करता है. कई अध्ययनों में कहा गया है कि बाजरा कैंसर से बचाव में मददगार होता है. इसके साथ ही बाजरे की रोटी के नियमित सेवन से डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाता है.कई बीमारियों का कारण मधुमेह (diabetes) होता है, पिछले कुछ वर्षो में मधुमेह आम बीमारी का रूप ले चुका है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग बाजरा को अपने आहार में शामिल करते हैं उन्‍हें डायिबिटीज होने का खतरा बहुत ही कम होता है। बाजरा में मैग्‍नीशियम बहुत ही अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को इंसुलिन (insulin) का अच्‍छी तरह से उपयोग करने में मदद करता है और मधुमेह के प्रभाव को कम करता है। बाजरा का नियमित सेवन कर आप अपने शरीर में बढ़ते शुगर की मात्रा को नियंत्रित कर सकते हैं।
रक्‍तचाप को कम करने में
मैग्‍नीशियम की अच्‍छी मात्रा बाजरा मे होती है जो मांसपेशियों (muscles) को आराम देता है।
बाजरा का नियमित सेवन करने से रक्‍तचाप को कम करने में मदद मिलती है साथ ही यह अस्‍थमा की गंभीरता और माइग्रेन के आवृत्ति (frequency) को भी कम करता है।
वजन कम करने में मददगार
फाइबर की अच्‍छी मात्रा होने के कारण बाजरा को वजन कम (weight loss) करने वाले आहारों की सूची में शामिल किया जाता है। बाजरा का सेवन करने से आपको ऊर्जा मिलती है और यह लंबे समय तक आपकी भूख नियंत्रित करता है। इसके अलावा बाजरा में कोलेस्‍ट्रोल को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता (insulin sensitivity) बढ़ाने की क्षमता के कारण यह आपके वजन को कम करने में मदद करता है।अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो बाजरे की रोटी खाना आपके लिए फायदेमंद होगा.
मिलती है भरपूर एनर्जी
गेंहू की रोटी के मुकाबले बाजरा शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है. वजन घटाने के अलावा बाजरा खाने से शरीर को भरपूर एनर्जी मिलती है. बाजरे को ऊर्जा का एक बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है.


घावों को ठीक करने के लिए

आप अपने घावों का उपचार करने के लिए बाजरा और पानी के मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं। बाजरा कोलेजन की वृद्धि करने के लिए जाना जाता है जो घाव का उपचार करने में मदद करता है। एक अध्‍ययन से पता चलता है कि कुछ दिन तक नियमित रूप से बाजरा (millet) का उपयोग करने से चूहों के घाव को जल्‍दी ठीक करने में सफलता मिली है।
 पाचन शक्ति होती है मजबूत
बाजरे की रोटी में भरपूर मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के साथ ही पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाते हैं. इसके अलावा बाजरे की रोटी खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती है.
हड्डीयों को स्‍वस्‍थ्‍य रखे
दूध के मुकाबले बाजरा में कैल्शिम की मात्रा अधिक होती है जो आपके शरीर की हड्डियों के निर्माण (bone-building) में बहुत ही सहायक होता है। कैल्शियम के बिना आपकी हड्डीयां भंगुर और कमजोर (brittle and weak) हो सकती हैं। चूंकि आपका शरीर कैल्शियम नहीं बना सकता है, इसलिए यह महत्‍वपूर्ण है कि आप इस तरह के खनिज पदार्थों की पूर्ति अपने आहार के माध्‍यम से करें। बाजरा में मैग्‍नीशियम भी अच्‍छी मात्रा में होता है जो आपकी हड्डियों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करता है। इसके अलावा कुछ अध्‍ययनों से पता चलता है कि मैग्‍नीशियम फ्रैक्‍चर और ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) के खतरे को कम करने में आपकी मदद करता है।
 दिल को रखता है सेहतमंद
नियमित रुप से बाजरा खाने से दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है. बाजरे की रोटी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा बाजरा मैग्नीशियम और पोटैशियम का भी अच्छा स्रोत माना जाता है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है.
कोलेस्‍ट्रोल कम करे 
फाइबर कई बीमारियों के लिए एक फायदेमंद तत्‍व है जो हमारे शरीर मे कोलेस्‍ट्रोल को नियंत्रित करने और धमनियों को अवरुद्ध (clogging the arteries) होने से रोकने का सबसे अच्‍छा तरीका है। बाजरा में उपस्थित फाइबर शरीर की सफाई करने और खराब कोलेस्‍ट्रोल (LDL cholesterol) से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। यह आपके शरीर को विभिन्‍न बीमारीयों से बचाने का काम भी करता है। कोलेस्‍ट्रोल को कम करने के लिए बाजरा का सेवन फायदेमंद होता है।


रोके एनीमिया

महिलाओं के लिए एनीमिया (Anemia) रोग बहुत ही घातक होता है और यह उनकी मृत्‍यू का कारण भी बन सकता है। बाजरा का सेवन कर एनीमिया के प्रभाव को कम किया जा सकता है। बाजारा मे मौजूद फौलिक एसिड (folic acid), फोलेट और आयरन लाल रक्‍तकोशिकाओं के निर्माण के महत्‍वपूर्ण घटक होते हैं और हीमोग्‍लोबिन को पर्याप्‍त स्‍तर पर बनाए रखने में मदद करते हैं। बाजरा में तांबा भी अच्‍छी मात्रा में होता है जो खून में लाल रक्‍त कोशिकाओं (red blood cells) को बढ़ाने में मदद करता है।
बाजरा के गुण गैल्‍स्‍टोन रोकने में 
कुछ अध्‍ययन बताते हैं कि पित्‍ताशय की पथरी (Gallstones) के गठन को रोकने में अघुलनशील फाइबर बहुत ही उपयोगी होता है। ऐसे बहुत से मामले हैं जो यह बताते हैं कि बाजरा और अन्‍य फाइबर से युक्‍त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से गैल्‍स्‍टोन का खतरा कम होता है। फाइबर की उचित मात्रा में सेवन करने से आंतों के पारगमन समय मे कमी आती है जिसके कारण यह पित्‍त एसिड (bile acid) के स्राव को भी कम करता है जो गैल्‍स्‍टोन को बनने से रोकने में मदद करता है।
सावधानी -
कम मात्रा में बाजरा का सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता है
लेकिन यदि इसका ज्‍यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो यह बहुत सी परेशानियों का कारण बन सकता है। जो इस प्रकार है :
बाजरा में गोइट्रोजन (goitrogen) होता है जो थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन को उत्तेजित करता है।
इसका अधिक मात्रा में सेवन थायरॉयड की समस्‍या का कारण बन सकता है।
अधिक मात्रा में बाजरा का सेवन करने से आपकी त्‍वचा रूखी हो सकती है।
बाजरे का अधिक उपयोग घेंघा (Goitre), चिंता, तनाव और सोचने की क्षमता मे कमी का कारण बन सकता है।
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18.7.19

करी पत्ता (मीठी नीम) के अनुपम स्वास्थ्य लाभ


मीठी नीम को कई जगह कड़ी पत्ते के नाम से भी जाना जाता है। भारत के कई राज्यों में इसका इस्तेमाल खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। ज्यादातर इसका इस्तेमाल साउथ की मशहूर डिश डोसा-सांबर में किया जाता है लेकिन हम आपको बता दें कि कड़ी पत्ता यानी मीठी नीम सिर्फ खाने के स्वाद दोगुना ही नहीं करती बल्कि स्वास्थ के लिए फायदेमंद भी होती है। इससे लीवर से जुड़ी बीमारियां, मघुमेह जैसे रोग भी दूर हो जाते है। इस बात से शायद बहुत कम लोग अवगत होंगे कि इससे वजन भी घटाया जा सकता है।
मीठी नीम या कड़ी पत्ता भारत में अपनी सुगंध और अनोखे स्वाद के कारण लोकप्रिय हैं। करी पत्ते या मीठे नीम के पत्तों का उपयोग विभिन्न भारतीय व्यंजनों में किया जाता है। वे आपके व्यंजनों में सुगंध और स्वाद जोड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं। मीठी नीम खाने के फायदे और स्वास्थ्य लाभ काफी अधिक हैं। यह पाचन तंत्र को ठीक रखती हैं, दस्त को रोकने में मदद करती हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करती हैं। आइये मीठी नीम के फायदे और नुकसान को विस्तार से जानते हैं।
करी पत्ते कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के साथ भोजन को प्राकृतिक रूप से स्वादिष्ट बनाने का मसाला एजेंट हैं। यह पत्ता हर डिश में एक विशेष स्वाद जोड़ता है। कढ़ी पकोड़े में करी पत्ते एक आवश्यक सामग्री है जो देश के कई हिस्सों में काफी लोकप्रिय है। करी पत्ते अपने विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट गुणों और डायरिया (दस्त) को नियंत्रित करने की क्षमता और कई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं को दूर करने के लिए जाने जाते है। इसके अलावा करी पत्ते को कई व्यंजनों में जोड़ा जा सकता है। वजन कम करने के लिए भी करी पत्ते का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विटामिन ए, बी, सी और बी-2 से भरपूर होते हैं।
करी पत्ते को आयरन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि इसमें कैंसर से लड़ने वाले गुण होते हैं और यह लिवर की रक्षा करने के लिए भी जाना जाता है। यह संक्रमण से लड़ते हैं और जीवन शक्ति के साथ आपके बालों और त्वचा को निखार सकते हैं।


मीठी नीम के पोषक तत्व

मीठी नीम भारतीय खाना पकाने का एक अनिवार्य हिस्सा हैं जहाँ सभी व्यंजन मसाला या गार्निशिंग के लिए इसका उपयोग किया जाता है। करी पत्ते तांबा, खनिज, कैल्शियम, फॉस्फोरस, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम और लोहा जैसे आवश्यक पोषक तत्वों में बहुत समृद्ध हैं। इसके अलावा इसमें कई प्रकार के विटामिन और अमीनो एसिड भी होते हैं। इच्छित उपयोग के आधार पर पत्तियों को सुखाया या तला जा सकता है, और मीठी नीम के पत्ते के ताजे रूप में भी उपयोग बहुत लोकप्रिय है।
मीठी नीम का उपयोग
एक मजबूत विशिष्ट गंध और तीखे स्वाद के अलावा, करी पत्ते विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन बी 2, कैल्शियम और आयरन का एक समृद्ध स्रोत हैं। पेचिश, दस्त, मधुमेह, मॉर्निंग सिकनेस
(morning sickness) और मतली (nausea) के उपचार में भोजन के पत्तों में करी पत्ते को शामिल करना। करी पत्ते विषाक्त पदार्थों और शरीर की वसा को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं।
वजन कम करने में
करी पत्ते वजन घटाने में सहायता कर सकते हैं। यह आपको आश्चर्यजनक लग सकता है पर यह सच है। इसमें पाया जाने वाला कार्बोल अल्कलॉइड वजन बढ़ने से रोकने में आपकी मदद कर करता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इस प्रकार वजन कम करने के लिए करी पत्ते का सेवन किया जा सकता है। इसके सेवन के लिए आप अपने भोजन में ताजा या सूखे करी पत्ते जोड़ सकते हैं। आप अपने सलाद में भी इसे शामिल कर सकते हैं। अपने स्वस्थ आहार के साथ करी पत्ते का सेवन करें और वजन कम करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।आपको बता दें कि कड़ी पत्तों का सेवन करने से शरीर में जमा फैट धीरे धीरे खत्म हो जाता है। शरीर में मौजूदा चर्बी भी आसानी से कम हो जाएगी। इसके आप इन पत्तियों को उबाल लें और फिर इसके पानी को रोज सुबह सेवन करें


पाचन में करें सुधार-

कड़ी पत्तों का नाम भले ही मीठी नीम है लेकिन ये खानें में थोड़े कड़वे लगते है लेकिन अगर आप अपनी पाचन क्रिया में सुधार लाना चाहते है तो इसका खाने का साथ सेवन करें। अपनी डाइट में शामिल करने से आपका तनाव भी दूर हो जाएगा।
तनाव कम करने के लिए
करी पत्ते का आवश्यक तेल तनाव को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद कर सकता है। फूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित एक शोध ने संकेत दिया है कि करी पत्ते एंटीऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्रोत होते हैं। इसमें उपस्थित विटामिन A, विटामिन B, विटामिन C, और विटामिन E जैसे विभिन्न विटामिन तनाव को कम करने में मदद करते है। इसलिए मीठी नीम अवसाद और चिंता से लड़ने के लिए भी जाना जाती है।
बालों के लिए
करी पत्ते बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करते हैं। करी पत्ते बालों के रोम को उत्तेजित करते हैं और सामान्य बाल वर्णक के साथ स्वस्थ किस्में के विकास को बढ़ावा देते हैं। करी पत्ते का उपयोग बालों के झड़ने और बालों के समय से पहले झड़ने से निपटने के लिए किया जा सकता है। करी पत्ता का रस रूसी और परतदार स्कैल्प से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है। इसके लिए तेल के साथ मीठी नीम के सूखे पत्तों का पाउडर मिला कर आपके बालों में लगाया जा सकता है। सफ़ेद बालों के लिए करी पत्ते का पेस्ट भी लगाया जा सकता है।
कब्ज और दस्त का इलाज
करी पत्ते का उपयोग पेट की खराबी के इलाज के लिए किया जा सकता है। शोध से पता चलता है कि करी पत्तों में मौजूद कार्बाज़ोल एल्कलॉइड्स (carbazole alkaloids) में एंटी-डायरियल (anti-diarrheal) गुण होते हैं। लैब चूहों पर किए गए प्रयोगों से पता चला है कि करी पत्ते से कार्बोजल के अर्क ने अरंडी के तेल से प्रेरित दस्त को काफी नियंत्रित करता है। आप सूखे करी पत्ते को पीसकर छाछ में मिला इसका सेवन कर सकते हैं। दस्त, कब्ज और पेचिश जैसी स्थितियों से छुटकारा पाने के लिए इसे खाली पेट में पिएं।
करी पत्ते के फायदे मधुमेह में
मीठी नीम या करी पत्ते रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावी ढंग से कम करते हैं। वे अग्न्याशय के इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं और मुक्त कणों से होने वाले नुकसान को रोकते हैं। इसमें तांबा, लोहा, जस्ताऔर लोहे जैसे खनिजों के कारण होता है जो करी पत्ते इस कार्य को करते हैं। इस प्रकार मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए करी पत्ता सहायक हो सकता है।जो लोग मधुमेंह रोग से पीड़ित है उनके लिए ये बेहद फायदेमंद होता है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए रोज सुबह उठकर 3 महीने तक इसका लगातार सेवन करें। इसका सेवन करने से सिर्फ आपकी बीमारी ही छूमंतर नहीं होगी बल्कि डायबिटीज के दौरान जमा हुए मोटापे को भी कम करेगा। कड़ी पत्तों का सेवन आप पाउडर के रूप में कर सकते है या फिर इसको उबाल कर इसका पानी भी पी सकते हैं|


मितली से राहत

गर्भावस्था की पहली तिमाही में सुबह की बीमारी और मितली से राहत पाने के लिए महिलाएं करी पत्ते का विकल्प चुन सकती हैं। करी पत्ते पाचन को बढ़ाने और मतली, सुबह की बीमारी और उल्टी से राहत देने में मदद करते हैं।
बैक्टीरिया को खत्म करे
हमारे शरीर में अधिकांश बीमारी संक्रमणों के कारण कारण होती है। इस तरह के संक्रमणों के लिए करी पत्तों का उपयोग एक प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जा सकता है। करी पत्ते कार्बोराज अल्कलॉइड से भरे होते हैं जो जीवाणुरोधी, कैंसर रोधी और एंटी इन्फ्लामेट्री गुणों वाले यौगिक हैं। करी पत्ते में लिनालूल (Linalool) यौगिक भी होता है। यह यौगिक करी पत्ते को उनकी खुशबू देता है। इस यौगिक में बैक्टीरिया-मारने के गुण होते हैं। यह शरीर से हानिकारक मुक्त कणों को खत्म करने में भी मदद करता है।
याददाश्त में सुधार करे
अपने आहार में करी पत्ते को शामिल करने से आपकी याददाश्त पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है। यह अल्जाइमरजैसे ख़राब स्मृति विकारों से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है।
अच्छी आँखों की रोशनी के लिए
ऐसा माना जाता है कि करी पत्ते का आंखों की रोशनी पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। करी पत्ते में उच्च मात्रा में विटामिन A होता है, जो आंखों की रोशनी के लिए अच्छा है। ये मोतियाबिंद की शुरुआत को रोकते हैं। विटामिन A में कैरोटीनॉयड होता है जो कॉर्निया और आंख की सतह की रक्षा करता है। विटामिन ए की कमी से रतौंधी और यहां तक कि कुछ मामलों में दृष्टि की हानि भी हो सकती है।
घाव, जलन और त्वचा का फटना
करी पत्ते के पेस्ट को लगाने से घाव, चकत्ते, फोड़े और हल्के जलने पर रोगनिवारक प्रभाव पड़ता है। इन पत्तियों का पेस्ट किसी भी प्रकार के हानिकारक संक्रमण को रोकने और खत्म करने में मदद करता है। ताजा पेस्ट बनाने के लिए आप पत्तों के पीस कर इसमें थोड़ा सा पानी मिला सकते हैं। फिर इसे सीधे फोड़े पर, त्वचा की जलन, खरोंच और त्वचा के फटने पर लगा सकते हैं। अच्छे परिणामों के लिए पेस्ट को रात भर के लिए लगा कर छोड़ दें। करी पत्तों में उपस्थित कार्बाज़ोल एल्कालॉइड यौगिक घाव भरने की प्रक्रिया को गति देता है। करी पत्ता त्वचा की सूजन, फोड़े और जलने पर एक समान प्रभाव पड़ता है।
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10.7.19

हरी सब्‍जी खाने के स्वास्थ्य लाभ


हरी सब्जियां खाने के कई फायदे हैं, हरी सब्जियां खाने के लाभ शायद ही किसी को पता न हों क्‍योंकि हरी सब्जियां खाने के फायदे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए किसी औषधी से कम नहीं होते हैं। हरी सब्‍जी खाने से क्‍या लाभ होते है, हरी सब्जियों के पोषक तत्‍व आदि की पूरी जानकारी लोगों को नहीं होती है। बस उन्‍हें यह पता होता है कि हरी सब्‍जी खाना उनके शरीर को स्‍वस्‍थ रखता है। हमारे शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए हरी सब्जियां का सेवन जरूरी है, हरी सब्जियां स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गंभीर से गंभीर बीमारियों को दूर करने में सहायक होती हैं। हरी सब्‍जी खाने का फायदा कैंसर, हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल घटाने, मोटापा कम करने, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य जैसी समस्‍याओं को दूर करने में होते हैं।
हरी सब्‍जी खाने के फायदे न केवल स्‍वास्‍थ्‍य बल्कि बालों और त्‍वचा सौंदर्य के लिए भी होते हैं। आज इस आर्टिकल में हम हरी सब्जियां खाने के फायदे जानेगें। आइए जाने हरी सब्जियां किस प्रकार हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद होती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां खाने के फायदे और हमें हरी सब्जियां क्यों खानी चाहिए?
हरी सब्‍जी खाने के फायदे हृदय के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए –
हरी सब्‍जीयों का नियमित रूप से सेवन करना हृदय स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही अच्‍छा होता है। हरी और गहरे रंग की पत्‍तेदार सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैंथिन (Lutein and Zeaxanthin) होते हैं। ये घटक हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। यदि आप भी हृदय संबंधी समस्‍याओं से परेशान हैं तो अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को विशेष रूप से शामिल करें।
सब्जियों के पोषक तत्‍व –
हम सभी जानते है कि अलग-अलग रंगों की सब्‍जी और फलों को अपने नियमित आहार में शामिल करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है। ल‍ेकिन अपने आहार में विशेष रूप से हरी सब्जियों को शामिल करना अधिक लाभकारी होता है। क्‍योंकि सभी प्रकार की हरी सब्जियों में विटामिन, प्रोटीन, खनिज पदार्थ, फाइबर आदि की उच्‍च मात्रा होती है। ग्रीन सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैंथिन (Lutein and Zeaxanthin) जैसे घटक भी होते हैं। इसके अलावा इन सब्जियों में वसा आदि ना के बराबर होते हैं जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है। हरी सब्जियां कार्बोहाइड्रेट की भी अच्‍छी स्रोत मानी जाती हैं जो हमे ऊर्जा प्राप्‍त करने में सहायक होता है।
हरी सब्जियां खाने के लाभ कैंसर से बचने के लिए –
पोषक तत्‍वों की भरपूर मात्रा होने के साथ ही हरी सब्जियों में एंटीऑक्‍सीडेंट की उच्च मात्रा होती है। ये एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्‍हें नष्‍ट करने में सहायक होते हैं। यदि आप भविष्‍य में कैंसर जैसी गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचना चाहते हैं तो अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को शामिल करें। नियमित रूप से हरी सब्जियों का सेवन स्‍तन और फेफड़े संबंधी कैंसर की रोकथाम करने में सहायक होते हैं।



टाइप २ डायबिटीज के मरीजों के लिए सहायक
अगर कोई टाइप २ डायबिटीज से ग्रसित है, तो उसके लिए हरी सब्जियां काफी फायदेमंद होती हैं क्योंकि इनमें मैग्नीशियम तो है ही, साथ में कार्बोहायड्रेट कम होता है।
हरी सब्जियों के गुण खनिज पदार्थ की कमी दूर करे
स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं अक्‍सर शरीर में विटामिन और खनिज पदार्थों की कमी के कारण होती हैं। लेकिन यदि आप हरी सब्जियों को अपने आहार में शामिल करते हैं तो इस प्रकार की समस्‍याओं से बचा जा सकता है। आप अपने शरीर में खनिज पदार्थों की कमी को दूर करने के लिए सभी प्रकार की हरी सब्जियों को अपने साप्‍ताहिक आहार का हिस्‍सा बना सकते हैं। क्‍योंकि हरी पत्‍तेदार सब्जियों में मैग्‍नीशियम, पोटेशियम, आयरन, फॉस्‍फोरस और कैल्शियम जैसे अन्‍य घटक होते हैं। मैग्‍नीशियम मांसपेशियों के स्वास्‍थ्‍य को बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
हरी सब्जियों का उपयोग प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाये –
सभी प्रकार की हरी सब्जियों में प्रमुख घटक के रूप में एंटीऑक्‍सीडेंट उच्‍च मात्रा में होते हैं। ये एंटीऑक्‍सीडेंट हमारे शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाने में सहायक होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट के अलावा हरी सब्जियों में विटामिन ए भी होता है जो शरीर के प्राकृतिक बचाव और त्‍वचा स्‍वास्‍थ्य के लिए लाभकारी होता है। हरी सब्जियों में विटामिन C और K भी अच्‍छी मात्रा में होते हैं जो हड्डियों के घनत्‍व और विकास दोनों में सहायक होते हैं। इस तरह से आप अपने शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों को अपने नियमित आहार में शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जियां रखें आपकी हड्डियों को मजबूत
क्योंकि हरी सब्जियों में विटामिन के होता है, यह आपकी हड्डियों को भी मजबूत और स्वस्थ रखती हैं।
हरी सब्जियों के गुण चयापचय को बढ़ाये –
शरीर का स्‍वस्‍थ रहना आपके स्‍वस्‍थ्‍य चयापचय पर निर्भर करता है। हरी पत्‍तेदार सब्जियों में आयरन और फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा हरी सब्जियों में ऐसे अन्‍य खनिज पदार्थ और घटक भी उच्‍च मात्रा में होते हैं जो हमारे चयापचय में सुधार करते हैं। इसके अलावा हरी सब्जियों में मौजूद आयरन विशेष रूप से हमारे शरीर में रक्‍त या लाल रक्‍त कोशिकाओं के उत्‍पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। यदि आप भी अपने शरीर स्‍वस्‍थ्‍य रखना चाहते हैं तो अपने नियमित आहार में हारी सब्जियों को प्रमुख खाद्य पदार्थ के रूप में शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जी के लाभ पाचन के लिए –


पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए हरी सब्जियां बहुत ही फायदेमंद होती हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि हरी सब्जियों में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। हरी सब्जियों को फाइबर का सबसे अच्‍छा प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। नियमित रूप से सेवन करने के दौरान हरी सब्जियों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखता है। इसके अलावा यह उस दर को धीमा करता है जिस पर आपका शरीर चीनी को अवशोषित करता है। इसके अलावा नियमित रूप से आहार के रूप में हरी सब्जियों का सेवन रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी नियंत्रित करता है।
ग्रीन वेजिटेबल्स के फायदे आंखों के लिए –
हरी सब्जियां आंखों के लिए फायदेमंद होती हैं। क्‍योंकि लगभग सभी प्रकार के पोषक तत्‍व, खनिज, विटामिन आदि की पर्याप्‍त मात्रा इनमें मौजूद रहती है। हम पहले ही जान चुके हैं कि अधिकांश हरी सब्जियों में ल्‍यूटिन और जेक्‍सैन्थिन (Lutein and zeaxanthin) की अच्‍छी मात्रा होती है। नियमित रूप से हरी सब्जियों का सेवन करना आपकी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने का एक बेहतर विकल्‍प है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि हरी सब्जियों में एंटीऑक्‍सीडेंट, विटामिन ए और विटामिन सी की अच्‍छी मात्रा होती है। विटामिन ए आंखों के लिए बहुत ही आवश्‍यक घटक है। इसके अलावा विटामिन सी और अन्‍य एंटीऑक्‍सीडेंट हमारी आंखों को फ्री रेल्किल्‍स के प्रभाव से बचाने में सहायक होते हैं। इस तरह से आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए दैनिक आहार में नियमित रूप से हरी सब्जियों को शामिल कर सकते हैं।
हरी सब्जियों के औषधीय गुण वजन कम करे –
हरी सब्‍जी खाने के लाभ आपकी भूख को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए बहुत से लोग वजन घटाने के उपाय के रूप में हरी सब्जियों का अधिक सेवन करने की सलाह देते हैं। हरी सब्जियों में मौजूद फाइबर की उच्‍च मात्रा पाचन प्रक्रिया को धीमा करती है जिससे आपको लंबे समय तक समान रूप से ऊर्जा की प्राप्ति होती रहती है। इसके अलावा फाइबर आपको लंबे समय तक पूर्णता का अनुभव कराता है जिससे आपको बार-बार भूख लगने या खाने की समस्‍या से छुटकारा मिल सकता है। हम सभी जानते हैं कि बार-बार भोजन करना या अधिक भोजन करना भी वजन बढ़ने का प्रमुख कारण होता है। इस तरह से आप अपनी भूख को नियंत्रित कर अपने बढ़ते वजन को रोक सकते हैं। हालांकि यदि आप वजन कम करने वाले अन्‍य उपाय अपना रहे हैं तब ऐसी स्थिति में हरी सब्जियों का सेवन आपको अतिरिक्‍त लाभ दिला सकता है।


हरी सब्‍जी खाने के लाभ तनाव दूर करे –
अधिक तनाव कई प्रकार की स्‍वास्थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। यदि आप तनाव प्रबंधन के प्रयास कर रहे हैं तो इसमें हरी सब्जियों के सेवन को भी शामिल करें। क्‍योंकि हरी सब्‍जी खाने के फायदे आपके तनाव को दूर करने और मूड में बदलाव करने में सहायक होते हैं। हरी पत्‍तेदार सब्जियों में फोलेट की उच्च मात्रा होती है। शरीर में फोलेट की उचित मात्रा सेरोटोनिन उत्‍पादन में योगदान देता है। जिससे आपके तनाव को कम करने में मदद मिलती है। यदि आप नियमित व्‍यायाम के साथ हरी सब्जियों को अपने दैनिक आहार में शामिल करते हैं तो आपको अतिरिक्‍त लाभ प्राप्‍त हो सकता है।
हरी सब्‍जी खाने के फायदे त्‍वचा के लिए –
त्‍वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा और संवेदनशील अंग है। अक्‍सर हम अपनी त्वचा संबंधी समस्‍याओं और सुंदरता बढ़ाने के लिए रासायनिक उत्‍पादों का उपयोग करते हैं। लेकिन आप अपनी त्वचा को स्‍वस्‍थ और सुंदर बनाने के लिए हरी सब्जियों का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। हम यह नहीं कहते कि आप सौंदर्य उत्‍पादों का उपयोग न करें। लेकिन अपने नियमित आहार में हरी सब्जियों को शामिल करें। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इनमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्‍टीरिया और फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी त्वचा को प्राकृतिक सुरक्षा दिलाने के लिए और त्‍वचा को सूर्य की क्षति से बचाने के लिए हरी सब्जियों के सेवन को बढ़ा सकते हैं। हरी सब्जियों में मौजूद विटामिन सी, फोलिक एसिड और बीटा-कैरोटीन आपकी क्षतिग्रस्‍त त्‍वचा कोशिकाओं की मरम्‍मत करने में सहायक होते हैं।
हरी सब्जियों के लाभ हाइड्रेट रखें –
आप अपने शरीर में पानी की कमी को दूर करने के लिए भी हरी सब्जियों का नियमित सेवन कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इन सब्जियों में पहले से ही पानी की भरपूर मात्रा होती है इसके अलावा इनमें फाइबर की मौजूदगी भी पानी की उचित मात्रा को बनाए रखने में सहायक होता है। हाइड्रेट रहने से आपकी त्वचा और बालों संबंधी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।
हरी सब्‍जी का उपयोग रक्‍तचाप के लिए –
नियमित रूप से हरी सब्‍जी और फलों का सेवन करने के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप रोगी के लिए होते हैं। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में पोटेशियम की उच्च मात्रा होती है। पोटेशियम शरीर में न केवल सोडियम के स्‍तर को संतुलित करता है बल्कि रक्‍त वाहिकाओं को भी स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होता है। जिससे शरीर में स्‍वस्‍थ रक्‍त परिसंचरण को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा पोटेशियम रक्‍त प्रवाह में अवरूद्ध बनने वाले कोलेस्‍ट्रॉल को भी दूर करता है। इसलिए उच्‍च रक्‍तचाप रोगी को नियमित रूप से अपने आहार में हरी सब्जियों और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए।
हरी सब्‍जी खाने से फायदा बालों के लिए –
आज अधिकांश लोग चाहे महिला हो या पुरुष बालों संबंधी समस्‍याओं से बहुत ही परेशान रहते हैं। जिसके कारण वे कई प्रकार के रासायनिक उत्पादों का उपयोग करते हैं जो उनके बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जबकि बालों सबंधी समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा और प्राकृतिक तरीका हरी सब्जियों का नियमित सेवन है। हरी सब्जियों में विट‍ामिन A, विटामिन C, कैल्शियम और आयरन जैसे घटक अच्‍छी मात्रा में होते हैं। ये घटक सीबम उत्‍पादन में मदद करते हैं। सीबम मोम जैसा पदार्थ है जो सिर की ऊपरी त्‍वचा या स्‍कैल्‍प में जमा होता है। हमारे बालों के लिए सीबम बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके अलावा कैल्शियम और आयरन बालों की जड़ों को मजबूत करने और उन्‍हें कमजोर होकर गिरने से रोकते हैं। इस तरह से आप अपने बालों को झड़ने से बचाने के लिए हरी सब्जियों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।



हरी पत्तीदार सब्जियाँ प्रतिदिन वयस्क महिलाओं के लिए 100 ग्राम, वयस्क पुरुषों के लिए 40 ग्राम, स्कूल न जान वाले बालकों के लिए (4-6 वर्ष) 50 ग्राम और 10 वर्ष से अधिक उम्र वाले बालक-बालिकाओं के लिए 50 ग्राम प्रतिदिन आवश्यक है।
सावधानी -

ऐसा माना जाता है कि हरी पत्तीदार सब्जियों के सेवन से बच्चों में अतिसार हो सकता है। इसलिए अधिकांश माताएं अपने बच्चों को इस पोषक तत्व को देने से परहेज करती हैं। कई बैक्टीरिया, कीटाणु, कीट एवं अनचाही वस्तु हरी पत्तीदार सब्जियों को पानी एवं मिट्टी के द्वारा दूषित कर देते हैं और ठीक तरह से सफाई न किये जाने पर ये सब्जियां अतिसार का कारण बन सकती हैं। इसलिए सभी हरी पत्तीदार सब्जियों को दूषित होने से रोकने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पानी से धोना चाहिए ताकि अतिसार से बचा जा सके।
हरी पत्तीदार सब्जियों को अच्छी तरह से मिलाकर, पका कर एवं छान कर ही बच्चों को परोसना चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों के पोषण को बनाये रखने के लिए उन्हें अधिक पकाने से परहेज करना चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों को पकाने के बाद उनसे निकलनेवाले पानी को फेंकना नहीं चाहिए। हरी पत्तीदार सब्जियों को पकाने में इस्तेमाल किये जानेवाले बर्तन को हमेशा ढ़ंक कर ही रखना चाहिए। पत्तों को सूर्य की रोशनी में न सूखायें, क्योंकि इससे केरोटिन नष्ट हो जाता है। साथ ही पत्तों को अधिक न भूनें फाइबर की उच्च मात्रा होने के कारण अधिक मात्रा में इन सब्जियों का सेवन करने से पेट संबंधी समस्‍याएं जैसे दस्‍त, अपच, बदहजमी और उल्‍टी आदि हो सकती हैं।
कुछ लोग कुछ विशेष प्रकार की सब्जियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों को कुछ प्रकार की सब्जियों का सेवन करने से एलर्जी आदि की समस्‍या हो सकती है। ऐसे लोगों को उन सब्जियों का सेवन करने से बचना चाहिए।
हमेशा ताजी सब्जियों का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि हरी सब्जियां जल्‍दी ही खराब हो जाती हैं इन सब्जियों का सेवन करने से आपको कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।
उपयोग करने से पहले सभी प्रकार की सब्‍जीयों को अच्‍छी तरह से धो लेना चाहिए। क्‍योंकि इन सब्जियों में कीटनाशक का उपयोग किया जाता है जो आपके स्वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
हरी सब्जियों का सेवन करने के दौरान यदि किसी प्रकार की स्वास्‍थ्‍य समसया होती है तो आपको तुरंत ही डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।
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