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11.7.19

सहजन(मोरिंगा) की पत्तियों के पावडर के स्वास्थ्य लाभ


सहजन लम्बी फलियों वाली एक सब्जी का पेड़ है, जोकि भारत और दुनिया भर में उगाया जाता है. विज्ञान ने प्रमाणित किया है कि इस पेड़ का हर अंग स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. सहजन को अंग्रेजी में Moringa (मोरिंगा) या Drumstick tree कहते हैं. ज्यादातर भारतीय सहजन की फली को सब्जी व अन्य भोजन बनाने में करते हैं.
मोरिंगा या सहजन एक प्रकार की खाद्य सब्‍जी है जो विशेष रूप से दक्षिण भारतीय भोजन में बहुत ही लोकप्रिय है। सहजन के आयुर्वेदिक गुण होने के कारण इसे सुपर फूड के रूप में उपभोग किया जाता है। मोरिंगा पाउडर के फायदे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। हालांकि मोरिंगा पेड़ के पत्‍ते, फूल, फल और छाल आदि सभी का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। 
सहजन की सूखी पत्तियों के 100 ग्राम पाउडर में दूध से 17 गुना अधिक कैल्शियम और पालक से 25 गुना अधिक आयरन होता है. इसमें गाजर से 10 गुना अधिक बीटा-कैरोटीन होता है, जोकि आँखों, स्किन और रोगप्रतिरोधक तंत्र के लिए बहुत लाभदायक है. सहजन में केले से 3 गुना अधिक पोटैशियम और संतरे से 7 गुना अधिक विटामिन C होता है.
यह पत्तियाँ प्रोटीन का भी बेहतरीन स्रोत हैं. एक कप ताजी पत्तियों में 2 ग्राम प्रोटीन होता है. यह प्रोटीन किसी भी प्रकार से मांसाहारी स्रोतों से मिले प्रोटीन से कम नहीं है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक एमिनो एसिड्स पाए जाते हैं.

सहजन का पाउडर मारिंगा ओलेइफेरा (Moringa oleifera) पेड़ से बनाया जाता है। यह पेड़ अब तक के ज्ञात पेड़ों में सबसे अधिक पौष्टिक और औषधीय गुणों वाला है। इस पेड़ के अधिकांश औषधीय गुण इसकी पत्तियों में केंद्रित हैं। मोरिंगा पाउडर सहजन के पेड़ की पत्तियों से बनाया जाता है। सहजन के पत्‍तों का पाउडर गहरे हरे रंग का होता है जिसमें सहजन की पर्याप्‍त गंध होती है। सहजन का पाउडर बनाने के लिए इसकी पत्तियों को कम तापमान में छाये में सुखाया जाता है। जिससे पौधे के ऊतकों को एक महीन चूर्ण में बदला जा सके। इसके बाद इस पाउडर की अशुद्धियों को दूर कर इन्‍हें कैप्‍सूल आदि बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि एक बार पैक करने के बाद, यह पाउडर कई महीनों तक ताजा रहता है, विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट, क्लोरोफिल और पूर्ण अमीनो-एसिड के पोषण मूल्य को बरकरार रखता है। आइए जाने सहजन में मौजूद पोषक तत्‍व क्‍या हैं।
सहजन पाउडर के पोषक तत्‍व
सहजन के पोषक तत्‍व और औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग आयुर्वेद में प्रमुख रूप से किया जाता है। सहजन के पाउडर में विभिन्‍न प्रकार के विटामिन, खनिज पदार्थ, एंटीऑक्‍सीडेंट, क्‍लोरोफिल और पूर्ण अमीनो-एसिड की अच्‍छी मात्रा होती है। मोरिंगा पाउडर में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन और विटामिन की भरपूर मात्रा पायी जाती है।
सहजन की सूखी पत्तियों के पाउडर को ताजी पत्तियों की अपेक्षा बहुत अधिक पसंद किया जाता है। शुद्ध और जैविक होने के कारण सहजन के पाउडर का सेवन करने से कोई गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं।


सहजन पेड़ के उपयोगी भाग

सहजन पेड़ के फल का खाद्य सब्‍जी के रूप में सबसे अधिक उपयोग होता है। हालांकि इस पेड़ के औषधीय गुण सबसे अधिक इसकी पत्तियों में होते हैं। सामान्‍य रूप से सहजन के पेड़ के लगभग सभी हिस्‍सों में औषधीय गुण होते हैं जिनका उपयोग आप कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं। सहजन पेड़ के उपयोगी भाग में जड़, छाल, सहजन के फल, सहजन के बीज, सहजन की पत्तियां, फूल और पेड़ के अर्क आदि हैं जिनका औषधीय उपयोग होता है।
सहजन पाउडर के फायदे और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
इस सुपर फूड के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ बहुत अधिक होते हैं। हालांकि यह खाद्य रूप में बहुत ही लोकप्रिय है लेकिन इससे प्राप्त स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की की जानकारी लोगों को बहुत कम है। सहजन के पाउडर में लगभग 20 प्रकार के अमीनो-एसिड, 46 एंटीऑक्‍सीडेंट, 36 एंटीइंफ्लामेटरी यौगिक और 90 से अधिक पोषक तत्‍व होते हैं। जिसके कारण यह सबसे अच्‍छा पोषण पूरक में से एक माना जाता है। सहजन के पाउडर में आयरन, कैल्शियम, और विटामिन A, B, B1, B2, B3, B6, C, E के साथ ही मैक्रो खनिज (macro minerals), ट्रेस खनिज और फाइटोन्‍यूट्रिएंट (trace minerals and phytonutrients) जैसे खनिजों की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा यह उच्‍च गुणवत्‍ता वाले प्रोटीन और फाइबर में भी समृद्ध होते हैं।
सहजन पाउडर के फायदे मधुमेह के लिए –
डायबिटीज रोगी के लिए सहजन का पाउडर बहुत ही फायदेमंद होता है। इसके मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ रक्‍त में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को सामान्‍य रखने में सहायक होते हैं। मधुमेह के लक्षणों को कम करने के लिए रोगी को सहजन से बने कैप्‍सूल या सहजन पाउडर का नियमित सेवन करना चाहिए। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह उच्‍च रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में प्रभावी होता है। यदि आप भी मधुमेह रोगी हैं तो सहजन के पाउडर से बने पेय को अपने दैनिक आहार में शामिल करें।
*सहजन के फूलों की चाय (Moringa flower tea) न्यूट्रीशनल गुणों से भरपूर होती है. यह चाय यूरिन इन्फेक्शन, सर्दी-जुकाम ठीक करती है. सहजन के फूल सलाद के रूप में भी खाए जाते हैं. सहजन के इतने फायदे हैं कि गिनती कम पड़ जाये. सहजन अनिद्रा, अस्थमा, हाइपरटेंशन, Rheumatoid आर्थराइटिस, एनीमिया, आंत का अल्सर भी ठीक करता है और घाव जल्दी भरता है. दिमागी स्वास्थ्य के लिए सहजन लाजवाब है. सहजन डिप्रेशन, बेचैनी, थकान, भूलने की बीमारी ठीक करता है.
सहजन पाउडर खाने के फायदे रक्‍तचाप के लिए
नियमित रूप से सहजन पाउडर खाने के फायदे उच्‍च रक्‍तचाप रोगी के लिए अच्‍छे होते हैं। क्‍योंकि यह उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों को कम करने और नींद संबंधी समस्‍या को दूर करने में प्रभावी माना जाता है। सहजन के पाउडर में मौजूद पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ रक्‍तचाप को नियंत्रित करने और उच्‍च रक्‍तचाप को निम्‍न स्‍तर पर संतुलित करने में सहायक होते हैं। यदि आप भी उच्‍च रक्‍तचाप रोगी हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के पाउडर को शामिल कर लक्षणों को कम कर सकते हैं।
सहजन चूर्ण के फायदे पाचन के लिए
पाचन और आंत संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए सहजन का पाउडर बहुत ही प्रभावी होता है। मोरिंगा पाउउर में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो आपके पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा सहजन की पत्तियों में पेट साफ करने वाले रेचक (laxative) प्रभाव भी होते हैं। जिसके कारण यह पेट में मौजूद विषाक्‍तता को आसानी से दूर कर सकते हैं। सहजन का चूर्ण खाने के फायदे विशेष रूप से कब्‍ज रोगी के लिए होते हैं। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पेट के अल्‍सर और अन्‍य पेट संबंधी संक्रमण का प्रभावी रूप से इलाज करते हैं। यदि आप भी अपने पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखना और पेट संबंधी संक्रमण से बचना चाहते हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के चूर्ण को शामिल करें।


मोरिंगा पाउडर खाने के लाभ वजन कम करे

जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए सहजन पाउडर अच्‍छा विकल्‍प है। सहजन पाउडर के औषधीय गुण वजन कम करने में सहायक होते हैं। मोरिंगा पाउडर में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है जो आपके पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखता है साथ ही यह आपकी भूख को भी नियंत्रित करता है। जिससे आपको बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो जाती है। इसक अलावा सहजन की पत्तियों में क्‍लोरोजेनिक एसिड नामक एक एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त वसा को बर्न करने में सहायक होता है। साथ ही यह रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में भी प्रभावी होता है। यदि आप भी अपने वजन को कम करना चाहते हैं तो अन्‍य उपायो के साथ ही सहजन के पाउडर का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।
मोरिंगा पाउडर के लाभ कोलेस्‍ट्रॉल कम करे
अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से सहजन के पाउडर का सेवन करना शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देता है। यह एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल के सतर को कम करने और रक्त के थक्‍कों के गठन को भी प्रभावी रूप से कम कर सकता है। शरीर में उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा आपकी कई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का कारण बन सकता है। आप भी अपने शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए मोरिंगा पाउडर के लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।
मोरिंगा पाउडर का उपयोग विषाक्‍तता दूर करे
सहजन के पाउडर में डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। जिसके कारण इसका उपयोग सामान्‍य रूप से पानी को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। आप अपने शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को दूर करने के लिए भी सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा मोरिंगा पाउडर में कौयगुलांट (coagulant) गुण भी होते हैं जो संक्रामक बैक्‍टीरिया और रोगाणुओं को दूर करने में प्रभावी होते हैं। आप भी अपने शरीर को संक्रामक प्रभाव से बचाने और विषाक्‍तता को दूर करने के लिए सहजन के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं।
सहजन पाउडर के लाभ लीवर के लिए –
सहजन के फूल और पत्तियों में पॉलीफेनोल की उच्‍च मात्रा होती है जो ऑक्‍सीकरण, विषाक्‍तता और क्षति के खिलाफ लीवर की रक्षा करते हैं। सहजन के गुण जिगर की क्षति और फाइब्रोसिस को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा इसके अन्‍य पोषक तत्‍व एंजाइम को सामान्‍य स्‍तर में बनाए रखने में सहायक होते हैं जिससे ऑक्‍सीडेटिव तनाव कम होता है और यकृत में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। यदि आप भी अपने लीवर को स्‍वस्‍थ रखना चाहते हैं तो नियमित आहार में सहजन पाउडर को शामिल कर सकते हैं। यह लीवर को स्‍वस्‍थ रखने और लीवर संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
गर्भावस्‍था में फायदेमंद सहजन पाउडर – 
स्‍तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं के लिए सहजन पाउडर बहुत ही उपयोगी होता है। क्योंकि इस स्थिति में महिलाओं को अतिरिक्‍त पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। इस दौरान गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को नियमित रूप से सहजन के पाउडर का सेवन करना चाहिए। क्‍योंकि यह उनके शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी को दूर करता है।
सहजन पाउडर के गुण स्‍टैमिना बढ़ाये
विटामिन, खनिज पदार्थ, एंटीऑक्‍सीडेंट और फाइटोन्‍यूट्रिएंट की उच्‍च मात्रा में होती है। जिसके कारण सहजन पाउडर आपकी ऊर्जा और सहनशक्ति को बढ़ाने के साथ ही एकाग्रता (concentration) को बढ़ाने में सहायक होता है। आप अपने बच्‍चों की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए सहजन के पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा सहजन का पाउडर एथलीट और व्‍यायाम करने वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद होता है। क्‍योंकि यह परिश्रम के दौरान खोई हुई ऊर्जा को फिर से दिलाने में सहायक होता है। यदि आप भी शारीरिक कमजोरी और थकान का अनुभव करते हैं तो सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल करें। यह आपकी एनर्जी बढ़ाने में सहायक होता है।
सहजन पाउडर के लाभ मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
आप अपने मस्तिष्‍क स्‍वासथ्‍य को बढ़ावा देने के लिए मोरिंगा पाउडर का उपयोग कर सकते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य और संज्ञानात्‍मक कार्य को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा यदि किसी व्‍यक्ति को अल्‍जाइमर के शुरुआती लक्षण होते हैं तब यह उनके लिए बहुत ही प्रभावी औषधी मानी जाती है। इसमें मौजूद विटामिन ई और सी ऑक्‍सीकरण को रोकते हैं जो मस्तिष्‍क को नुकसान पहुंचा सकता है। इस तरह से आप अपने मस्तिष्‍क को स्‍वस्‍थ रखने के लिए भी सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल अनिद्रा दूर करे
मोरिंगा पाउडर अनिद्रा या नींद की कमी संबंधी समस्‍याओं का घरेलू उपचार माना जाता है। सहजन के पाउडर में अमीनो एसिड ट्रिप्‍टोफैन (tryptophan) होता है। यह घटक न्‍यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन और मेलाटोनिन (serotonin and melatonin) हार्मोन के उत्‍पादन को बढ़ाता है। ये घटक नींद चक्र को नियंत्रित करते हैं। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण सहजन पाउडर शरीर को स्‍वस्‍थ और अच्‍छा महसूस कराने वाले हार्मोन को भी उत्‍तेजित करते हैं। जिससे मूड को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। यदि आप भी नींद की कमी और इसके अन्‍य लक्षणों से परेशान हैं तो सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल करें।
सहजन पाउडर से करें अवसाद का इलाज –
मानसिक तनाव और अवसाद के लक्षणों को कम करने की क्षमता सहजन के पाउडर में होती है। यदि आप भी इसी प्रकार की समस्‍या से परेशान हैं तो अपने दैनिक आहार में सहजन के पाउडर को शामिल कर सकते हैं। नियमित रूप से कुछ दिनों तक सहजन के पाउडर का सेवन करना आपको इस प्रकार की समस्‍या से छुटकारा दिला सकता है।
सहजन पाउडर के लाभ घाव उपचार में –
आप अपनी त्‍वचा में मौजूद मुंहासों या अन्‍य घावों का इलाज करने के लिए सहजन के पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सहजन में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण घावों का उपचार करने और उन्‍हें संक्रमण से बचाने में प्रभावी होते हैं। यदि आप भी किसी कट, चोट या घाव से ग्रस्‍त हैं तो सहजन के पाउडर के उपयोग करें
मोरिंगा पाउडर के फायदे ग्‍लोइंग स्किन के लिए
आप अपने चेहरे की त्‍वचा को गोरा और चमकदार बनाने के लिए सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सहजन पाउडर का उपयोग फेस पैक के रूप में भी किया जा सकता है। इसके लिए आप मुलतानी मिट्टी या चंदन पाउडर के साथ सहजन पाउडर को मिलाएं और एक पेस्‍ट तैयार करें। नियमित रूप से हर दूसरे दिन इस फेस पैक का उपयोग करने से त्‍वचा को चमकदार और गोरा बनाया जा सकता है। आप भी अपने चेहरे को गोरा बनाने के घरेलू उपाय में सहजन पाउडर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सहजन पाउडर का उपयोग एंटी-एजिंग के लिए
सहजन का पाउडर विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन और बायोफ्लेवोनॉइड्स की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके सा‍थ ही इसमें बहुत से एंटीऑक्‍सीडेंट भी होते हैं। जो कि त्‍वचा को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। इन्‍हीं फ्री रेडिकल्‍स के कारण त्‍वचा कोशिकाओं को नुकसान होता है जो झुर्रियों और अन्‍य उम्र बढ़ने संबंधी समस्‍याओं का कारण होते हैं। आप भी समय से पहले आने वाले बुढ़ापे के संकेतों को दूर करने के लिए सहजन के पाउडर का मौखिक और बाहृ रूप से उपयोग कर सकते हैं।


सहजन पाउडर के फायदे बाल झड़ने से रोके

यदि आप बालों के झड़ने संबंधी समस्‍या से परेशान हैं तो सहजन के पाउडर का प्रयोग करें। यह आपके बालों को झड़ने से रोकने में मददगार होता है। मोरिंगा पाउडर में मौजूद कुछ विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड बालों के लिए केरेटिन (keratin) प्रोटीन का निर्माण करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा सहजन पाउडर में मेथियो‍नीन (Methionine) अमीनो एसिड भी होता है जो आपके बालों को सल्‍फर की कमी से बचाता है। जिससे आप अपने बालों को झड़ने से रोक सकते हैं।
सहजन पाउडर का उपयोग कैसे करें 
औषधीय गुणों से भरपूर सहजन का पाउडर हमें कई स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य लाभ दिलाता है। आप अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार सहजन के पाउडर का उपयोग कई प्रकार से कर सकते हैं। जैसे आप अपनी स्‍मूदी में मोरिंगा पाउडर को मिला सकते हैं। इसके अलावा आप सहजन के पाउडर की चाय का भी सेवन कर सकते हैं। अध्‍ययनों के अनुसार सहजन की पत्‍तीयों का पाउडर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित माना जाता है। आप भी अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए मोरिंगा पाउडर का सेवन कर सकते हैं
सहजन पाउडर का स्‍वाद
सहजन के पाउडर में एक हल्‍का स्‍वाद होता है। इसलिए चाय के रूप में सेवन करने पर यह हल्‍की मोरिसा चाय या ग्रीन टी के समान स्‍वाद देती है। यह पोषक तत्‍वों को बढ़ावा देने के लिए भोजन या पेय पदार्थों के रूप में उपयोग की जा सकती है।
सहजन का चूर्ण बनाने की विधि
घर पर मोरिंगा या सहजन की पत्तियों पाउडर बनाना काफी आसान है लेकिन इसे छांटने और साफ करने में कुछ समय लगता है और फिर फूड प्रोसेसर में पीसने से पहले पत्तियों को सुखा लिया जाता हैं। मोरिंगा या ड्रमस्टिक औषधीय पेड़ है जो अपने पौष्टिक गुणों के लिए जाना जाता है, पेड़ का हर भाग खाद्य और औषधीय है।
मोरिंगा पाउडर कैसे बनाये
मोरिंगा की ताजा पत्तियां प्राप्त करें। डंठल के साथ पत्तियों को उठायें, सभी डंठल को एक साथ पकड़ें और पानी के एक बड़े टब में कम से कम 3-4 बार साफ करें।
लगभग 4-5 घंटों में पत्तियां मुरझा जाती हैं और डंठल से आसानी से अलग हो सकते हैं और उन्हें एक साथ पकड़कर नीचे की ओर खींच सकते हैं। आप चाहें तो शाम को पत्तियों को तोड़ सकते हैं और उन्हें धोने (रिन्सिंग) के बाद रात भर के लिए छोड़ सकते हैं।
पत्तियों के अलग होने के बाद, उन्हें एक छिद्रित सतह में फैलाएं, बांस के टोकरी इसके लिए भी आश्चर्यजनक रूप से काम करते हैं। मेरे पास स्टील की जाली से बनी कुछ ट्रे हैं, पुराने ज़माने के कोलंडर भी काम करते हैं। पत्तियों से सभी डंठल निकालें ताकि पाउडर चिकना हो।
इसे पतले गहरे कपड़े से ढँक दें और कड़ी धूप में सूखा लें (भारतीय गर्मियों में ऐसी चीजों के लिए बहुत अच्छा है) जब तक कि पत्तियाँ कुरकुरी न हो जाएँ। तेज गर्मियों में पत्तियों को कुरकुरा बनाने में सिर्फ एक दिन लगता है लेकिन बाद में आपको 2 दिन से अधिक लग सकते। शाम को पत्तियों को घर के अंदर ले आयें और उनका कुरकुरापन खोने से पहले तुरंत पाउडर बना लें। यह पाउडर को वास्तव में बारीक करने में मदद करता है। आप किसी भी रेशेदार अवशेष को हटाने के लिए इसे छलनी कर सकते हैं।
तुरंत एक साफ एयर टाइट ढक्कन के साथ एक साफ और सूखे जार में स्थानांतरण करें। इस तरह से बनाए गए मोरिंगा पाउडर कमरे के तापमान पर कम से कम 6 महीने तक ठीक तरह से स्टोर रहते हैं। शेल्फ लाइफ को लम्बा करने के लिए आप इसे रेफ्रिजरेट में रख सकते हैं।


याद रखें कि अगर आप इसे रोजाना इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको प्रति व्यक्ति प्रति दिन बस आधा चम्मच (1/2 tsp) या 2/3 tsp का ही सेवन करना चाहिए।
चूंकि मोरिंगा या सहजन की पत्तियों को सुखाया जा सकता है और भंडारण के लिए पीसा जा सकता है, इसे चाय के लिए उपयोग किया जाता है, एक विटामिन पूरक के रूप में या आसानी से पोषण तत्वों (vitamin supplement) को प्राप्त करने के लिए व्यंजनों में मिलाया जाता है, आपको आश्चर्य होगा कि आप इसे क्यों नहीं खा रहे हैं। क्योंकि मोरिंगा कमाल का पेड़ है!
सहजन पाउडर के नुकसान
अध्‍ययनों ने इस बात की पुष्टि की है कि सहजन का पाउडर मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन फिर भी मोरिंगा पाउडर के कुछ संभावित नुकसान हो सकते हैं।
सहजन के बीजों का अधिक मात्रा में सेवन न करें। क्‍योंकि यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।
सहजन के पाउडर में पेट साफ करने वाले गुण होते हैं। इसलिए अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। अन्‍यथा यह पाचन समस्‍याओं को बढ़ा सकता है।
मधुमेह रोगीयों को बहुत ही कम या संतुलित मात्रा में सहजन पाउडर का उपभोग करना चाहिए। क्‍योंकि यह रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में सहायक होता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर यह रक्‍त शर्करा के स्तर को बहुत ही निम्‍न स्‍तर पर ले जा सकता है जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है।
मोरिंगा की परिपक्व पत्तियां कुछ लोगों में पेट खराब कर सकती हैं इसलिए इसका ध्यान रखें और जब आप पहली बार इसका उपयोग करें तो बहुत कम मात्रा में इसका उपयोग करें। इसे बच्चों को खिलाते समय सावधानी बरतें।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सहजन पाउडर का सेवन करने से पहले आपको अपने डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाहिए।
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19.2.17

जामुन के औषधीय गुण , फायदे ,प्रयोग



    


   जामुन (वैज्ञानिक नाम : Syzygium cumini) एक सदाबहार वृक्ष है जिसके फल बैंगनी रंग के होते हैं (लगभग एक से दो सेमी. व्यास के) | यह वृक्ष भारत एवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं इण्डोनेशिया आदि में पाया जाता है।
   इसे विभिन्न घरेलू नामों जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है। अम्लीय प्रकृति के कारण सामान्यत: इसे नमक के साथ खाया जता है।
   जामुन का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है। एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी देता है। इस फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोह का बड़ा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन होता है। इसमें विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम और फाइबर होते हैं।काले काले स्वादिष्ट और मीठे जामुन खाने का आनंद शायद सभी ने लिया है। इसका एक अलग हल्का तोरा स्वाद ( astringent flavour ) सभी को पसंद आता है। इसको खाने के बाद जीभ के रंग बैंगनी हो जाता है। जून के महीने में और बारिश का मौसम शुरू होने पर ये खूब मिलते है। जामुन पूरे भारत में बड़े चाव से खाया जाता है। और अब तो विदेशी भी इसके कायल हो गए है। जामुन के जूस का चलन विश्व भर में बढ़ता जा रहा है। ये लीवर के रोगों में बहुत फायदेमंद होता है। अपने स्वाद और औषधीय गुणों के कारण जामुन का एक अलग ही महत्त्व है।



दमा( श्वास रोग) के असरदार उपचार



*सेंधा नमक के साथ इसका सेवन भूख बढ़ाता है और पाचन क्रिया को तेज करता है बरसात के दिनों में हमारी पाचन संस्था कमजोर पड़ जाती है कारण हमारा मानना है कि बरसात यानि बस तली चीजें खाना कचौडी,पकोडे,समोसे इत्यादि जिसके कारण शूगर वालों का शूगर और बढ़ जाता है तथा पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है।
* आयुर्वेद के अनुसार जामुन की गुठली का चूर्ण मधुमेह में हितकर माना गया है, एक बार में 200 ग्राम से अधिक मात्रा में इस फल का सेवन नहीं करना चाहिए। खाली पेट जामुन खाने से पेट में दर्द और गैस बनने की शिकायतें संभव हैं जामुन ही नहीं जामुन के पत्ते खाने से भी मधुमेह रोगियों को लाभ मिलता है। यहां तक की इसकी गुठली का चूर्ण बनाकर खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।

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*यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। पाचन शक्ति मजबूत करता है। इसलिए अगर आप इस मौसम में मौसम की मार से बचना चाहते हैं तो रोज जामुन खाएं। जामुन के मौसम में जामुन अवश्य खायें कारण साल के बाकी के दिनों में आसानी से उपलब्ध नहीं होता,यदि होता भी है तो जो बात मौसमी फलों में होती है वह बेमौसम में नहीं होती सो जहां तक हो सके हर मौसम के फलों का लुत्फ(मज़ा)उसके मौसम में ही उठाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है। 
*जामुन सामान्यतया अप्रैल से जुलाई माह तक सर्वत्र उपलब्ध रहते हैं। इसका न केवल फल, इसके वृक्ष की छाल, पत्ते और जामुन की गुठली अपने औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व रखते हैं। यह शीतल, एंटीबायोटिक, रुचिकर, पाचक, पित्त-कफ तथा रक्त विकारनाशक भी है। इसमें आयरन (लौह तत्व), विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होने से यह हृदय रोग, लीवर, अल्सर, मधुमेह,वीर्य दोष, खाँसी, कफ (दमा), रक्त विकार, वमन, पीलिया, कब्ज, उदररोग, पित्त, वायु विकार,अतिसार, दाँत और मसूढ़ों के रोगों में विशेष लाभकारी है। 
*जामुन खाने के तत्काल बाद दूध नहीं पीना चाहिए। पका जामुन खाने से पथरी रोग में आराम मिलता है। पेट भरकर नित्य जामुन खाये तो इससे यकृत के रोगों में लाभ होगा। मौसम जाने के बाद इसकी गुठली को सुखाकर पीसकर रखलें इसका पावडर इस्तेमाल करें वही फल वाला फायदा देगा. 

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

*जामुन के औषधीय उपयोग
 पथरी जामुन का पका हुआ फल पथरी के रोगियों के लिए एक अच्छी रोग निवारक दवा है। यदि पथरी बन भी गई तो इसकी गुठली के चूर्ण का प्रयोग दही के साथ करने से लाभ मिलता है। यदि पथरी बन भी गई तो इसकी गुठली के चूर्ण का प्रयोग दही के साथ करने से लाभ मिलता है। 
लीवर 
जामुन का लगातार सेवन करने से यकृत (लीवर) की क्रिया में काफी सुधार होता कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें मुँह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएँ वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक भूखे पेट जामुन का सेवन करें 
मुँहासे -
जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर में थोड़ा-सा गाय का दूध मिलाकर मुँहासों पर रात को लगा लें, सुबह ठंडे पानी से मुँह धो लें। कुछ ही दिनों में मुँहासे मिट जाएँगे 

पित्त पथरी (gallstone)  की अचूक औषधि 

मधुमेह 
* मधुमेह के रोगियों के लिए भी जामुन अत्यधिक गुणकारी फल है मधुमेह के रोगियों को नित्य जामुन खाना चाहियें जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर को फाँकने से मधुमेह में लाभ होता है 
दस्त लगने पर 
जामुन के रस में सेंधा नमक मिलाकर इसका शर्बत बना कर पीना चाहियें। इसमें दस्त बाँधने की विशेष शक्ति है खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं।२० ग्राम जामुन की गुठली पानी में पीसकर आधा कप पानी में घोलकर सुबह-शाम दो बार पिलाने से खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं
 मंदाग्नि(एसिडिटी) 
से बचने के लिए जामुन को काला नमक तथा भूने हुए जीरे के चूर्ण को लगाकर खाना चाहिए। जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर कम से कम दिन में तीन बार पानी के साथ मिलाकर पीने से अपच दूर हो जाता है जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर एवं पानी के साथ मिश्रित कर प्रतिदिन सेवन करने से रक्त साफ होताहै। जामुन के वृक्ष की छाल को पीसकर एवं बकरी के दूध के साथ मिलाकर देने से डायरिया(दस्त का भयंकर रूप) के रोगी को तुरंत आराम मिलता है। 

छोटे वक्ष को उन्नत और सूडोल बनाएँ

पेचिश में
जामुन की गुठली के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दिन में दो से तीन बार लेने से काफी लाभ होता है अच्छी आवाज बरकरार रखने के लिए जामुन की गुठली के काढ़े से कुल्ला करना चाहिए जामुन की गुठली का चूर्ण आधा-आधा चम्मच दो बार पानी के साथ लगातार कुछ दिनों तक देने से बच्चों द्वारा बिस्तर गीला करने की आदत छूट जाती है*अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है।
*कीमोथेरेपी और रेडिएशन में जामुन लाभकारी होता है।
*हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और अर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है।
*जामुन का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं।

जामुन कब नहीं खाना चाहिए
* उल्टी होती हो या जी घबराता हो तो जामुन नहीं खाने चाहिए।
* शरीर में कहीं सूजन आई हुई है तो जामुन ना खाएँ।
* ऑपरेशन से पहले और बाद में कुछ समय जामुन नहीं खाने चाहिए।
* जामुन अधिक मात्रा में नहीं खाने चाहिए।
* जामुन में वातज गुण होते है अतः इसे खाली पेट नहीं खाना चाहिए।

रोग व क्‍लेश दूर करने के आसान मंत्र

* गर्भावस्था के दौरान जामुन ना खाये।
* व्रत के समय और उपवास के समय जामुन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

   किडनी फेल (गुर्दे खराब) की अमृत औषधि 


प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,पथरी की 100% सफल हर्बल औषधि

आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार


    




7.4.16

डायबीटीज़ रोग की जानकारी // Diabetes Disease Information







डायबिटीज पूरी दुनिया के लिए एक चुनौती बनती जा रही है. पिछले 30 सालों में विश्वभर में डायबिटीज के मरीज दुगने हो गए हैं और जिस तेजी से ये बीमारी फैल रही है आशंका है कि 2035 में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 60 करोड़ तक पहुंच जाएगी. .
भारत में तेजी से डायबिटीज फैला रहा है पांव
विश्व में सबसे ज्यादा डायबिटीज मरीजों की संख्या चीन में है इसके बाद दूसरे नंबर पर भारत है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो जिस तेजी से डायबिटीज के मरीज भारत बढ़ रहे हैं, अगले 4 से 5 सालों में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा. आंकड़ें बताते हैं कि भारत में इस समय डायबिटीज के मरीजों की संख्या 6 करोड़ से ज्यादा है. यही नहीं, डायबिटीज की वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोंक, अंधापन, किडनी फेल के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं.


बच्चे भी डायबिटीज के शिकार
भारत में बच्चों में डायबिटीज का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. इसके पीछे बड़ी वजह मोटापा, जंक फूड का बढ़ता क्रेज है. साथ ही कम उम्र में सिगरेट, शराब का सेवन बच्चों को डायबिटीज का शिकार बना रहा है. इन सबके बीच सरकार का दावा है कि वो इस बीमारी से बचाव और जागरुकता पर पूरा जोर लगा रही है.
सरकार को जागने की जरूरत
गौरतलब है कि सरकार की ओर से साल 2013 से अब तक नेशनल स्क्रीनिंग ऑफ नन कम्यूनिकेबल डिजीज में डायबिटीज के मरीजों को शामिल किया. इस दौरान 5.9 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई और इनमें से 6.5 फीसदी को डायबिटीज थी. इसमें ग्रामीण इलाकों के लोगों में 3.5 फीसदी और शहरी लोगों में 5.9 फीसदी डायबिटीज पाई गई. सबसे ज्यादा चेन्नई, अहमदाबाद, मुंबई और सिक्किम में 9 फीसदी लोग इसके शिकार थे.
*नेशनल हैल्थ की गैर-संक्रामक रोग निवारण योजना की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मेरठ में हर दूसरे मरीज पर शुगर का खतरा है। शुगर की बीमारी ने उच्च रक्तचाप को भी पीछे छोड़ दिया है। प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी रिपोर्ट से यह तथ्य साबित हुआ है। गत वर्ष जुलाई से मार्च 15 तक 4527 मरीजों की जांच एवं काउंसिलिंग से बेहद खतरनाक संकेत सामने आये हैं, 2026 मरीजों यानी 45 फीसदी में शुगर पाई गई। उच्च रक्तचाप से ज्यादा हृदयरोगी मिले हैं, जबकि कैंसर की जांच तक शुरु नहीं हो सकी। तमाम मरीजों में कार्डियोवस्कुलर बीमारी एवं स्ट्रोक का भी खतरा मिला है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. साधना सिंह के अनुसार महिलाओं में शुगर तेजी से बढ़ रही है ऐसी महिलाओं में प्रसव के दौरान विशेष खतरा होता है। मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर उन्हें शुगर, हृदयरोग एवं स्ट्रोक की ओर ले जा रहे हैं।
मधुमेह को रोकता है मलाई वाला दूध 
लंदन। मलाई रहित दूध को सेहत के लिए बेहतर मानने की धारणा को वैज्ञानिकों ने गलत पाया है। उन्होंने शोध में पाया कि मलाईरहित दूध के मुकाबले मलाईयुक्त दूध स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो सकता है। यह डायबिटीज के खतरे को भी काफी कम कर सकता है। अब तक माना जाता रहा है कि मलाईरहित दूध वजन कम रखने और डायबिटीज के खतरे को दूर रखने में सहायक होता है, पर शोधकर्ताओं ने पाया कि पूरी मलाई वाले दूध का सेवन करने वालों का वजन मलाईरहित दूध पीने वालों के मुकाबले सामान्य तौर पर कम रहता है।
उन्होंने यह भी पाया कि मलाईयुक्त दूध पीने वालों में डायबिटीज होने का खतरा भी 46 प्रतिशत कम रहता है। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि कई दशकों से आहार सम्बंधी दिशा-निर्देशों में कम वसा वाले डेयरी उत्पादों की सलाह दी जाती रही है, जबकि पूर्ण वसा वाले दूध से बचने की सलाह भी दी जाती रही है। ये दिशा-निर्देश हड्डियों के स्वास्थ्य व दिल के रोगों को ध्यान में रखकर दिये जाते रहे हैं। लेकिन न तो कम वसायुक्त और न ही पूर्ण वसा वाले दूध का दिल की पारम्परिक बीमारी के खतरों से जुड़े कारणों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव देखा गया है।