28.11.19

जानिए हल्दी के फायदे और नुकसान




भारतीय व्यंजनों में सबसे महत्पूर्ण मसाला और इस पृथ्वी पर सबसे अच्छी जड़ी बूटी यदि कोई मानी जाती है तो वह शायद हल्दी ही है। विज्ञान में हल्दी (Turmeric) पर ही सबसे ज्यादा अध्ययन किये गए हैं। हल्दी मिलती है कुरकुमा नाम के पौधे से जोकि भारत और कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में मिलता है। इस पौधे की जड़ को सुखाकर और पीसकर हल्दी मिलती है।यह तो सभी जानते हैं कि विवाह समारोह जैसे शुभ कार्यों में टरमरिक यानी हल्दी का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। वहीं, चोट लगने पर या बीमार होने पर हमारी मां सबसे पहले हल्दी वाला दूध पिलाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि मामूली-सी हल्दी विभिन्न कार्यों में कैसे लाभकारी साबित हो जाती है। इस लेख में हम हल्दी के औषधीय गुण व उससे जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां लेकर आए हैं, जो आपके काम आएंगी। हम वैज्ञानिक तौर पर हल्दी के फायदे साबित करने का प्रयास करेंगे। साथ ही हल्दी के नुकसान भी बताएंगे। यह तो हर कोई जानता है कि सब्जी या दाल बनाते समय हल्दी का प्रयोग करने से भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही यह सेहत के लिए भी अच्छी है। यही कारण है कि इसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि माना गया है। इसका महत्व कितना है, इसका पता इसी बात से चलता है कि अब तक इस पर कई वैज्ञानिक शोध हो चुके हैं। कई फायदों के साथ-साथ विभिन्न भाषाओं में इसके नाम भी अलग-अलग हैं। हिंदी में इसे हल्दी कहते हैं, तो तेलुगु में पसुपु, तमिल व मलयालम में मंजल, कन्नड़ में अरिसिना व अंग्रेजी में टरमरिक कहते हैं। वहीं, इसका वैज्ञानिक नाम करकुमा लौंगा (हल्दी के पेड़ का नाम) है। मुख्य रूप से इसकी खेती भारत व दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में होती है। करकुमा लौंगा पौधे की सूखी जड़ को पीसकर हल्दी पाउडर का निर्माण किया जाता है।

हल्दी क्यों अच्छी है कई वैज्ञानिक शोधों में टरमरिक यानी हल्दी के फायदों की पुष्टि की गई है। ऑक्सफोर्ड एकेडमिक में प्रकाशित हुए एक अध्ययन के अनुसार, हल्दी में करक्यूमिन नामक फिनोलिक यौगिक होता है, जो पैंक्रियास कैंसर को ठीक करने में सक्षम है। वहीं, एक अन्य अध्ययन के अनुसार इस आयुर्वेदिक औषधि में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो डायबिटीज को पनपने से रोक सकते हैं । इस आर्टिकल में हल्दी व उसके मुख्य तत्व करक्यूमिन के बारे में विस्तार से बताया गया है। आंकड़ों की बात करें, तो करीब 28 ग्राम हल्दी में 26 प्रतिशत मैग्नीशियम व 16 प्रतिशत आयरन होता है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जरूरी है। हल्दी को फाइबर, पोटैशियम, विटामिन-बी6, विटामिन-सी, एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट का मुख्य स्रोत माना गया है । टरमरिक का सेवन करने से वसा को पचाना आसान हो जाता है। साथ ही गैस व बदहजमी जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है। इसके अलावा, हल्दी के प्रयोग से सोरायसिस, कील-मुंहासे व एग्जिमा जैसी समस्याओं को भी हल किया जा सकता है। शरीर में कहीं भी आई सूजन को ठीक करने में हल्दी का कोई मुकाबला नहीं है। साथ ही मस्तिष्क से जुड़ी अल्जाइमर जैसी बीमारी को भी हल्दी के प्रयोग से ठीक किया जा सकता है।
हल्दी के फायदे – जैसा कि आप जान चुके हैं हल्दी में करक्यूमिन नामक अहम यौगिक होता है, जो अर्थराइटिस व कैंसर जैसी कई समस्याओं से हमें बचाता है। हल्दी के औषधीय गुण हमारे लिए कई प्रकार फायदेमंद हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं :


लिवर को करती है डिटॉक्सीफाई हल्दी के औषधीय गुण के रूप में आप इसका इस्तेमाल शरीर को डिटॉक्सीफाई करने के लिए कर सकते हैं। मेरीलैंड मेडिकल सेंटर यूनिवर्सिटी के अनुसार, करक्यूमिन गाल ब्लैडर यानी पित्त मूत्राशय में बाइल (पित्त) के उत्पादन को बढ़ाता है। लिवर इस बाइल का प्रयोग विषैले जीवाणुओं को बाहर निकालने में करता है। इसके अलावा, बाइल के कारण लिवर में जरूरी सेल्स का निर्माण भी होता है, जो हानिकारक तत्वों को खत्म करने का काम करते हैं। करक्यूमिन की डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया इतनी प्रभावशाली है कि इसका इस्तेमाल मरकरी के संपर्क में आए व्यक्ति का इलाज करने तक में किया जा सकता है वैज्ञानिकों के अनुसार, करक्यूमिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता है । इससे डायबिटीज से आराम मिल सकता है। एक अन्य शोध के तहत, डाबिटीज के मरीज को करीब नौ महीने तक करक्यूमिन को दवा के रूप में दिया गया। इससे मरीज में सकारात्मक परिणाम नजर आए । इन अध्ययनों के आधार पर वैज्ञानिकों ने माना कि हल्दी के सेवन से टाइप-1 डायबिटीज से ग्रस्त मरीज का इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकता है। डायबिटीज से ग्रस्त चूहों पर हुए अध्ययन में भी पाया गया कि करक्यूमिन सप्लीमेंट्स के प्रयोग से ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम किया जा सकता है। शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस का स्तर बढ़ने से ह्रदय संबंधी रोग भी हो सकते हैं । इस लिहाज से हल्दी खाने के फायदे में डायबिटीज को ठीक करना भी है।
वजन नियंत्रण व मेटाबॉलिज्म यह तो आप सभी जानते हैं कि मोटापा कई बीमारियों की जड़ है। इसके कारण न सिर्फ आपकी हड्डियां कमजोर होती हैं, बल्कि शरीर में कई जगह सूजन भी आ जाती है। इससे डायबिटीज व ह्रदय रोग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं, हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी व अन्य गुण होते हैं, जो इन समस्याओं से आपको राहत दिला सकते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर सकती है। इन दो परिस्थितियों में भी वजन बढ़ने लगता है। हल्दी के गुण में वजन को नियंत्रित करना भी है। जब आपका वजन बढ़ता है, तो फैट टिशू फैल जाते हैं और नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण होता है। ऐसे में करक्यूमिन इन नई रक्त वाहिकाओं को बनने से रोकता है, जिससे वजन कम हो सकता है। फिलहाल, यह शोध अभी तक सिर्फ चूहों पर किया गया है। यह मनुष्यों के लिए कितना कारगर है, उस पर रिसर्च किया जाना बाकी है। एक कोरियन स्टडी के अनुसार, हल्दी मेटाबॉलिज्म प्रणाली को बेहतर करती है और नए फैट को बनने से रोकती है। इसके अलावा, हल्दी कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी नियंत्रित करती है, जिससे वजन का बढ़ना रुक सकता है। प्रोटीन से भी शरीर का वजन बढ़ता है, ऐसे में हल्दी अधिक प्रोटीन के निर्माण में बाधा पहुंचाती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हल्दी वजन कम करने और मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से बचाने में हमारी मदद करती है । यहां स्पष्ट कर दें कि हल्दी फैट सेल्स को तो कम करती है, लेकिन भूख को किसी तरह से प्रभावित नहीं करती है। इसलिए, हल्दी का प्रयोग पूरी तरह से सुरक्षित है । हल्दी शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखती है, जिससे मेटाबॉलिज्म में सुधार हो सकता है। मोटापे के लिए कुछ हद तक लिपिड मेटाबॉलिज्म भी जिम्मेदार होता है, जिसे हल्दी का सेवन कर संतुलित किया जा सकता है ।
कैंसर से लड़ती है हल्दी; हल्दी में एंटीकैंसर गुण भी पाए जाते हैं। कई वैज्ञानिक शोधों में भी माना गया है कि कैंसर की रोकधाम में हल्दी का प्रयोग किया जा सकता है । शोध के दौरान पाया गया कि कुछ कैंसर ग्रस्त मरीजों को हल्दी देने से उनके ट्यूमर का आकार छोटा हो गया था। इतना ही नहीं कैंसर को खत्म करने में सक्षम इम्यून सिस्टम में मौजूद केमिकल भी एक्टिव हो जाते हैं। एक चाइनीज अध्ययन के अनुसार, करक्यूमिन ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करने में भी कारगर है । इसलिए, कैंसर की रोकथाम के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।
एंटीइंफ्लेमेटरी जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन प्रमुख यौगिक है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। यह शरीर में आई किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकता है। अर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार, गठिया के इलाज में करक्यूमिन का प्रयोग किया जा सकता है। यह प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर करता है, जिससे जड़ों में आई सूजन कम हो सकती है । यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हल्दी प्राकृतिक रूप से सूजन का मुकाबला करती है।
एंटीऑक्सीडेंट हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाया जाता है, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को साफ करने, पेरोक्सीडेशन को रोकने और आयरन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है। हल्दी पाउडर के साथ-साथ इसके तेल में भी एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं । वहीं, चूहों पर की गई एक स्टडी के अनुसार, हल्दी डायबिटीज के कारण होने वाले ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को रोकने में सक्षम है । एक अन्य अध्ययन में दावा किया गया है कि करक्यूमिन में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट गुण मनुष्यों की स्मरण शक्ति को बढ़ा सकता है ।
प्राकृतिक दर्द निवारक भारत में सदियों से हल्दी को प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। चोट लगने पर हल्दी को लेप के रूप में लगाया जाता है। वहीं, दूध में हल्दी मिक्स करके पीने से न सिर्फ दर्द कम होता है, बल्कि यह एंटीसेप्टिक का काम भी करता है। हल्दी किसी भी दर्द निवारक दवा से ज्यादा कारगर है। इसके अलावा, हल्दी में पाए जाने वाले यौगिक करक्यूमिन से तैयार किए गए उत्पाद हड्डियों व मांसपेशियों में होने वाले दर्द से राहत दिला सकते हैं। साथ ही हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो किसी भी तरह के दर्द व सूजन से राहत दिला सकते हैं। यही कारण है कि गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को हल्दी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है (25)। इस प्रकार प्राकृतिक दर्द निवारक दवा के रूप में हल्दी का उपयोग किया जा सकता है।

मस्तिष्क का स्वास्थ्य आप यह जानकर हैरानी होगी कि हल्दी मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मस्तिष्क में जरूरी सेल्स के निर्माण में मदद करता है। हल्दी में कुछ अन्य बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं, जो मस्तिष्क में मौजूद न्यूरल स्टीम सेल का करीब 80 प्रतिशत तक विकास कर सकते हैं। हल्दी में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मस्तिष्क को सुरक्षा प्रदान करते हैं। हल्दी में करक्यूमिन के अलावा टरमरोन नामक जरूरी घटक भी होता है। यह मस्तिष्क में कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाता है और उनकी मरम्मत भी करता है। साथ ही अल्जाइमर में याददाश्त को कमजोर होने से बचाता है। इस लिहाज से यह अल्जाइमर जैसी बीमारी में कारगर घरेलू उपचार है। इतना ही नहीं हल्दी के सेवन से मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इसके अलावा, अल्जाइमर के बढ़ने की गति धीमी हो जाती है और बाद में यह रोग धीरे-धीरे कम होने लगता है । इस तरह हल्दी के लाभ में मस्तिष्क को स्वस्थ रखना भी है।
डाइजेशन पेट में गैस कभी भी और किसी को भी हो सकती है। कई बार यह गैस गंभीर रूप ले लेती है, जिस कारण गेस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का सामना करना पड़ सकता है। इसका इलाज एंटीइंफ्लेमेरी व एंटीऑक्सीडेंट के जरिए किया जा सकता है और हल्दी में ये दोनों ही गुण पाए जाते हैं। हल्दी भोजन नलिका में एसिड के कारण होने वाली संवदेनशीलता को भी कम कर सकती है। कई प्रीक्लिनिकल ट्रायल में यह साबित हो चुका है कि हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को नुकसान होने से बचाते हैं। इसके अलावा, हल्दी बदहजमी के लक्षणों को भी ठीक कर सकती है। साथ ही अल्सरेटिव कोलाइटिस से पीड़ित मरीजों की स्थिति में सुधार हो सकता है। हल्दी के लाभ में बेहतर डाइजेशन भी शामिल है।
अर्थराइटिस जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि हल्दी किसी भी तरह की सूजन को कम कर सकती है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटीइंफ्लेमेटरी व एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। इसके प्रयोग से अर्थराइटिस के कारण जोड़ों में आई सूजन व दर्द से राहत मिलती है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर देते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं । इसलिए, हल्दी के उपयोग में अर्थराइटिस को ठीक करना भी शामिल है।
प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हल्दी के गुण में इसका प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करना भी शामिल है। हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो प्रतिरोधक प्रणाली को बेहतर कर सकते हैं। वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि करक्यूमिन ह्रदय रोग व मोटापे का कारण बनने वाले सेल्स को बनने से रोकता है। साथ ही यह प्रतिरोधक प्रणाली को एक्टिव कर टीबी का कारण बनने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है। हल्दी में करक्यूमिनोइड्स नामक यौगिक भी होता है, जो टी व बी सेल्स (श्वेत रक्त कोशिकाएं) जैसे विभिन्न इम्यून सेल्स की कार्यप्रणाली को बेहतर करता है। इससे प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है
 रोग में लाभदायक-
हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण ह्रदय को विभिन्न रोगों से बचाए रखते हैं, खासकर जो डायबिटीज से ग्रस्त हैं। हल्दी का मुख्य यौगिक करक्यूमिन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है। इससे ह्रदय को स्वथ्य बनाए रखने में मदद मिलती है । मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी ने भी अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि करक्यूमिन धमनियों में रक्त के थक्के बनने नहीं देता, जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। इससे ह्रदय अच्छी तरह काम कर पाता है यूनिवर्सिटी ऑफ इंडोनेशिया ने भी अपनी स्टडी में करक्यूमिन के फायदे को वर्णित किया है। उन्होंने पाया कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम से पीड़ित मरीज को करक्यूमिन देने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा । इसलिए, कहा जा सकता है कि हल्दी के गुण में ह्रदय को स्वस्थ रखना भी शामिल है।
मासिक धर्म में दर्द से राहत-
कई महिलाओं को मासिक धर्म के समय अधिक दर्द व पेट में ऐंठन का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए आप हल्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ईरान में हुए एक शोध के अनुसार, करक्यूमिन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकता है। भारत व चीन में प्राचीन काल से इसका उपयोग मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए किया जा रहा है । इस दौरान हल्दी वाला दूध या फिर हल्दी और अदरक की चाय पीने से फायदा हो सकता है। हल्दी खाने के फायदे में मासिक धर्म में होने वाले दर्द से राहत पाना भी है।
प्राकृतिक एंटीसेप्टिक-
हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो ई. कोली, स्टैफीलोकोकक्स ऑरियस और साल्मोनेला टाइफी जैसे कई तरह के बैक्टीरिया से बचाते हैं । एक अन्य अध्ययन में साबित किया गया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिनोइड्स आठ तरह के बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ सकता है। इतना ही नहीं, यह कई तरह के फंगस और वायरस से भी बचाता है । इसके अलावा, हल्दी दांत दर्द में भी इलाज कर सकती है।
त्वचा के लिए हल्दी के फायदे –
कील-मुंहासों के लिए -हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या को ठीक कर सकते हैं। यहां तक कि कील-मुंहासों का इलाज भी हल्दी से किया जा सकता है। यही कारण है कि भारत में सदियों से शादी से पहले दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है। यह दाग-धब्बों को हल्का कर त्वचा को जवां और निखरा हुआ बनाती है। हल्दी कील-मुंहासों के कारण चेहरे पर आई सूजन व लाल निशानों को कम कर सकती है । इस प्रकार कील-मुंहासों के लिए हल्दी का उपयोग किया जा सकता है। सामग्री : एक से दो चम्मच हल्दी पाउडर आधा नींबू बनाने की विधि : नींबू के रस में हल्दी पाउडर को मिक्स करके अच्छी तरह पेस्ट बना लें। फिर इसे चेहरे पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए सूखने दें। जब यह सूख जाए, तो पानी से इसे धो लें। कब-कब लगाएं : आप इसे हर दूसरे दिन लगा सकते हैं।

झुर्रियां -हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म करने का काम करते हैं। कुछ हद तक ये फ्री रेडिकल्स चेहर पर झुर्रियों का कारण बनते हैं । अगर आप हल्दी को योगर्ट के साथ इस्तेमाल करते हैं, तो झुर्रियों से आपको जल्द फायदा हो सकता है। झुर्रियों के लिए हल्दी का प्रयोग कैसे करना है, हम यहां उसकी विधि बता रहे हैं : सामग्री : ¼ चम्मच हल्दी पाउडर एक चम्मच योगर्ट बनाने की विधि : हल्दी और योगर्ट को एक बाउल में डालकर मिक्स कर लें। फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए सूखने दें। इसके बाद पानी से चेहरे को धो लें। कब-कब लगाएं : करीब एक महीन तक हफ्ते में दो से तीन बार इस पेस्ट को लगाएं।
सोरायसिस त्वचा संबंधी विकारों का उपचार करने में हल्दी कारगर घरेलू उपचार है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीसेप्टिक व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सोरायसिस जैसी समस्या को भी ठीक कर सकते हैं। सोरायसिस में त्वचा पर पपड़ी जमने लगती है। इसके अलावा, हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जिस कारण यह सोरायसिस के कारण त्वचा पर हुए जख्मों को जल्द भर सकती है। साथ ही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है । प्रक्रिया नंबर-1 सामग्री : एक चम्मच हल्दी पाउडर चार कप पानी शहद/नींबू (स्वादानुसार) बनाने की विधि : हल्दी पाउडर को पानी में मिक्स करके करीब 10 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। जब पानी सामान्य हो जाए, तो उसमें जरूरत के अनुसार शहद या नींबू डालकर चाय की तरह पिएं। कब-कब करें : आप ऐसा रोज कर सकते हैं। प्रक्रिया नंबर-2 सामग्री : तीन-चार चम्मच हल्दी पाउडर हल्दी से दुगना पानी बनाने की विधि : हल्दी पाउडर व पानी को एकसाथ फ्राई पैन में डालकर धीमी आंच पर तब तक उबालें, जब तक कि गाढ़ा पेस्ट न बन जाए। फिर जब पेस्ट ठंडा हो जाए, तो उसे स्टोर करके रख लें और जरूरत पड़ने पर लगाएं। कब-कब लगाएं : आप यह पेस्ट रोजाना प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं। फटी एड़ियों के लिए हल्दी में एंटीबैक्टीरियल व एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिस कारण ये फंगल इंफेक्शन पर प्रभावी तरीके से काम कर सकती है। इसलिए, आप फटी एड़ियों की समस्या के लिए हल्दी का प्रयोग कर सकते हैं। सामग्री : तीन चम्मच हल्दी पाउडर नारियल तेल की कुछ बूंदें बनाने की विधि : हल्दी पाउडर और नारियल तेल को मिक्स करके पेस्ट बना लें। अब इसे फटी एड़ियों पर लगाकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें। 
हल्दी के नुकसान – आपके लिए हल्दी के नुकसान यानी साइड इफेक्टस जानना भी जरूरी है, क्योंकि किसी भी चीज का सेवन जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक करने पर नुकसान भी हो सकता है। साथ ही कुछ चिकित्सीय परिस्थितियों में भी हल्दी न खाने की सलाह दी जाती है। अगर आपको किडनी स्टोन की समस्या है, तो हल्दी वाले दूध का सेवन न करें। इससे आपकी समस्या और बढ़ सकती है, क्योंकि हल्दी में दो प्रतिशत ऑक्सालेट होता है गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को हल्दी का सेवन करना चाहिए या नहीं, इस बारे में स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है। इसलिए, आप इसका सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर कर लें। जो मरीज पीलिया से ग्रस्त हैं, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। हल्दी की तासीर गर्म होती है, इसलिए अधिक सेवन करने से पेट में गर्मी, जी-मिचलाना, उल्टी आना व दस्त लगना आदि समस्याएं हो सकती हैं। हल्दी का सेवन अधिक करने से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। हल्दी रक्त के थक्कों को धीमा कर सकती है, जिससे रक्तस्राव की समस्या बढ़ जाती है। हल्दी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को असंतुलित कर सकती है, जिससे शुक्राणुओं की संख्या में कमी हो सकती है। अगर कोई कीमोथेरेपी करवा रहा है, तो उसे भी हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए। इस प्रकार हल्दी के फायदे और नुकसान दोनों हैं। इन तमाम फायदों को जानने के बाद हम कह सकते हैं कि हल्दी गुणों का खजाना है। इसके प्रयोग से कई तरह की समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। आप इसे सीमित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल करें और स्वास्थ्य लाभ उठाएं। ध्यान रहे कि हल्दी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका असर धीरे-धीरे होता है। इसलिए, आप संयम के साथ इसका सेवन करें और अच्छे परिणाम का इंतजार करें|








जोड़ों ,हड्डियों के दर्द के कारण व घरेलू हर्बल उपचार





मौसम के बदलाव, उम्र के बढ़ने, अनियंत्रित जीवनशैली व कई अन्य कारणों से लोगों को अक्सर शरीर में सूजन, जोड़ों का दर्द आदि की शिकायत होती रहती है। सूजन और जोड़ों का दर्द एक तरह का इन्फ्लेमेशन कहलाता है जो बहुत लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो बेहद घातक भी हो सकता है। दरअसल शरीर में लंबे दौर तक चलने वाले इन्फ्लेमेशन से कैंसर होने के दावे तक आधुनिक विज्ञान ने किए हैं।
जोड़ों का दर्द शरीर के किसी भी हिसे में हो सकता है .काफी समय बैठे रहने से, सफर करने से या उम्र बढ़ने से हमारे घुटने अकड़ जाते है या दर्द करने लग जाते है. जिसे हम जोड़ो का दर्द या Joint Pain कहते है. जोड़ों का दर्द दो प्रकार का हो सकता है Osteo और Rheumatoid . कभी कभी घुटनों के दर्द की वजह से पूरा पैर दर्द करने लग जाता है. जोड़ों का दर्द हमे पैरों के घुटनों, गुहनियों, गदर्न, बाजुओं और कूल्‍हों में हो सकता है.
जोड़ों की कड़ी लचीली हड्डी में कुछ अज्ञात कारणों से ऊतकों के निष्क्रिय होने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है, जिसके कारण जोड़ों की साइनोवियल झिल्ली में सूजन आ जाती है। यह लगातार बढ़ती जाती है, जिस कारण जोड़ों की सामान्य संरचना छिन्न-भिन्न हो जाती है और एक्स-रे कराए जाने पर जोड़ों की संरचना में विषमता पाई जाती है।
यदि जोड़ों के भीतर पाये जाने वाले ‘साइनोवियल द्रव्य’ की सूक्ष्मदर्शी द्वारा जांच करवाई जाए, तो उसमें ‘मोनोसोडियम यूरेट’ नामक रसायन के कण पाए जाते हैं, जो जोड़ों पर जमा होने लगते हैं और सामान्य क्रियाओं में बाधक बनते हैं। इस अवस्था को गठिया कहते हैं। इसकी शुरुआत प्राय: हाथों एवं पैरों की उंगलियों के जोड़ों से होती है। दुनिया के लगभग सभी देशों में यह बीमारी पाई जाती है। लगभग 2.5% आबादी इस रोग से पीड़ित है। वैसे तो यह बचपन से नब्बे साल तक कभी भी प्रारम्भ हो सकता है, किन्तु40 से 60 वर्ष की उम्र में अधिक होता है। यह स्त्रियों में अधिक होता है.

जोड़ों का दर्द के लक्षण

1. जोड़ों में दर्द एवं अकड़ाव रहता है।
2. जोड़ों में सूजन आ जाती है।
3. जोड़ों को चलाना-फिराना मुश्किल हो जाता है।
4. हाथों की पकड़ने की ताकत (ग्रिप) क्षीण हो जाती है।
5. जोड़ों के साथ ही मांसपेशियों में कमजोरी आने लगती है।
6. लेटने के बाद उठने पर जोड़ों में जकड़न महसूस होती है।
7. सुबह उठने पर लगभग आधे घटे तक जकड़न बनी रहती है।
8. इसकी शुरुआत कभी-कभी अचानक होती है। यह प्राय: धीरे-धीरे प्रारम्भ होता है।

जोड़ों के दर्द के कारण :–

* हड्डियों में मिनरल यानि की खनिज की कमी होना
* अर्थराइटिस
* बर्साइटिस
* कार्टिलेज का घिस जाना
* खून का कैंसर होना (Blood Cancer )
* उम्र बढ़ने के कारण
* हडियों में मिनरल की कमी



के लक्षण

1. यह आनुवंशिक रोग है (10% रोगियों में)।
2. 30-40 वर्ष की उम्र के बाद में यह रोग शुरू होता है।
3. इसकी शुरुआत अव्यवस्थित होती है और चोट लगने, बुखार, व्रत रखने, ऑपरेशन के बाद अथवा खान-पान की गड़बड़ियों के कारण कभी भी यह रोग प्रारम्भ हो सकता है और बहुत तेजी से विकसित होता है।
4. कलाई, कुहनी, घुटना एवं एंकिल (पैर को टांग से जोड़ने वाला जोड़) एवं हाथ-पैरों की उंगलियों के जोड़ों में इसकी शुरुआत होती है।
5. स्नायु एवं मांसपेशियां (संबंधित जोड़ों की) भी प्रभावित होने लगती हैं।
6. शुरुआत किसी एक जोड़ से (प्राय: पैर के अंगूठे अथवा एंकिल जोड़ से) होती है और शीघ्र ही अन्य जोड़ों में भी बीमारी के लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं।
7. 101 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार रहता है।
8. प्रभावित जोड़ में सूजन आ जाती है और दर्द रहने लगता है।
9. छूने मात्र से ही तीव्र-दर्द रहने लगता है। कभी-कभी तो मरीज प्रभावित जोड़ बिस्तर के कपड़ों तक से छू जाने पर दर्द महसूस करता है।
10. घुटने आदि जोड़ों में द्रव्य इकट्ठा होने लगता है।
11. पुरानी गठियाजनित जोड़ों में अकड़ाव, दर्द, सूजन, जोड़ों को घुमाना-फिराना मुश्किल हो जाता है।
12. साइनोवियल झिल्ली मोटी हो जाती है।
का रोकथाम एवं बचाव
(गठिया एवं जोड़ों की सूजन, दोनों ही स्थितियों में) –
1. रोग की अवस्था में (तीव्रता में) बिस्तर पर आराम आवश्यक है।
2. गठिया रोग होने पर प्यूरीनयुक्त भोजन,जैसे ग्रंथियुक्त विशेष प्रकार का मांस नहीं खाना चाहिए।
3. वजन कम नहीं होने देना चाहिए।
4. पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए, ताकि गुर्दो में पथरी न बने।
5. अलग से सूक्ष्म मात्रा में सोडियम बाईकार्बोनेट लेना, गुर्दो में पथरी की सम्भावना को रोकता है, किन्तु अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अधिकता होने पर (सोडियम की) उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी विकार आदि उत्पन्न हो सकते हैं।
6. शारीरिक चोटों से जोड़ों को बचाना चाहिए, अन्यथा सूजन और बढ़ जाएगी।
7. जोड़ों के व्यायाम (फिजियो थेरेपी) मांसपेशियों, स्नायुओं एवं जोड़ों की ताकत बढ़ाने एवं इनके सही संचालन में अत्यंत मददगार होते हैं।

गठिया का रोकथाम एवं बचाव

(गठिया एवं जोड़ों की सूजन, दोनों ही स्थितियों में) –
1. रोग की अवस्था में (तीव्रता में) बिस्तर पर आराम आवश्यक है।
2. गठिया रोग होने पर प्यूरीनयुक्त भोजन,जैसे ग्रंथियुक्त विशेष प्रकार का मांस नहीं खाना चाहिए।
3. वजन कम नहीं होने देना चाहिए।
4. पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए, ताकि गुर्दो में पथरी न बने।
5. अलग से सूक्ष्म मात्रा में सोडियम बाईकार्बोनेट लेना, गुर्दो में पथरी की सम्भावना को रोकता है, किन्तु अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि अधिकता होने पर (सोडियम की) उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी विकार आदि उत्पन्न हो सकते हैं।
6. शारीरिक चोटों से जोड़ों को बचाना चाहिए, अन्यथा सूजन और बढ़ जाएगी।
7. जोड़ों के व्यायाम (फिजियो थेरेपी) मांसपेशियों, स्नायुओं एवं जोड़ों की ताकत बढ़ाने एवं इनके सही संचालन में अत्यंत मददगार होते हैं।

जोड़ों के दर्द के आयुर्वेदिक व औषधीय उपचार इस प्रकार है।

*कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से बदन के जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
*काले तिल और पुराने गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर खाएं। ऊपर से बकरी का दूध पीएं 
बड़ी इलायची तेजपात, दालचीनी, शतावर, गंगेरन, पुनर्नवा, असगंध, पीपर, रास्ना, सोंठ, *गोखरू इन सबको गिलोय के रस में घोटकर गोली बनाकर, बकरी के दूध के साथ दो-दो गोली सुबह सबेरे खाने से गठिया रोग में आराम मिलता है।
*मजीठ हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, बच, नीम की छाल, दारू हल्दी, गिलोय, का काढ़ा पीएं।
*लहसुन को दूध में उबालकर, खीर बनाकर खाने से गठिया रोग में आराम होता है।
शहद में अदरक का रस मिला कर पीने से जोड़ों के दर्द में आराम होता है।
*सौठ, अखरोट और काले तिल एक, दो, चार के अनुपात में पीस कर सुबह-शाम गरम पानी से दस से पंद्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
जोड़ों के दर्द के रोगी को भोजन से पहले आलू का रस दो-तीन चम्मच पीने से लाभ होता है। इससे यूरिक एसिड की मात्रा कम होने लगती है।
*जोड़ों के दर्द के रोगी को चुकंदर और सेव का सेवन करते रहना चाहिए। इससे यूरिक अम्ल की मात्रा नियंत्रण में रहती है।
*सौंठ और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर रोगी को सुबह-शाम चाय की तरह सेवन करना चाहिए।
*अश्वगंधा चूर्ण तीन ग्राम एक गिलास दूध में उबालकर पियें। कुछ दिनों तक लगातार यह प्रयोग करने से लाभ होता है।
*लहसुन की 10 कलियों को 100 ग्राम पानी एवं 100 ग्राम दूध में मिलाकर पकायें। पानी जल जाने पर लहसुन खाकर दूध पीने से दर्द में लाभ होता है।
*250 मि.ली. दूध एवं उतने ही पानी में दो लहसुन की कलियाँ, 1-1 चम्मच सोंठ और हरड़ तथा 1-1 दालचीनी और छोटी इलायची डालकर पकायें। पानी जल जाने पर वही दूध पीयें।


*नागकेसर के तेल से मालिश करने से आराम होता है।
*प्याज को सरसों के तेल में पका लें। इस तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
*मेंहदी के पत्तो को पीसकर जोड़ों पर बांधने से आराम होता है।
*इस रोग का उपचार करने में तुलसी बड़ी कारगर भूमिका निभाती है क्योंकि तुलसी में वात विकार को मिटाने का प्राकृतिक गुण होता है। तुलसी का तेल बनाकर दर्द वाली जगह लगाने से तुरंत आराम मिलता है।

*ज्यादा तकलीफ होने पर नमक मिले गरम पानी का टकोर व हल्के गुनगुने सरसों के तेल की मालिश करें।
*मोटापे पर नियंत्रण रखें। नियमित सूक्ष्म व्यायाम व योगाभ्यास करें।
*भोजन में खट्टे फलों का प्रयोग न करें।
*बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रात: खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो – दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।
*जोड़ों के दर्द के समय या बाद में गर्म पानी के टब में कसरत करें या गर्म पानी के शॉवर के नीचे बैठें। आपको निश्चित ही राहत मिलेगी।
*दर्द घटाने के बाम, क्रीम आदि बार-बार इस्तेमाल न करें। इनके द्वारा पैदा हुई गर्मी से राहत तो मिलती है, पर धीरे-धीरे ये नुकसान पहुंचाते हैं।
*जोड़ों के दर्द के लिए चमत्कारिक दवा, तेल या मालिश वगैरह के दावे बहुत किए जाते हैं। इनको इस्तेमाल करने से पहले एक बार परख लें।
*एरंडी के तेल को गर्म करो और उसमे लहसुन की कलियाँ जला दो । ये तेल लगाने से जोड़ों का दर्द दूर होता है
*2 ग्राम दालचीनी पावडर और एक चम्मच शहद, एक कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से तुरंत असर होता है|

किडनी फेल (गुर्दे खराब) की हर्बल औषधि 

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ्ने से मूत्र बाधा की हर्बल औषधि 

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

विशिष्ट परामर्श-  
 
संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है|  औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 





26.11.19

प्रेडनिसोलोन दवा का कैसे उपयोग करें ?


प्रेडनिसोलोन क्या है?
प्रेडनिसोलोन एक ग्लुकोकोर्टिकोइड दवा है जिसमें प्रिडनिसोलोन मुख्य घटक के रूप में पाया जाता है| यह मुख्य रूप से एलर्जी, सूजन और प्रतिरक्षा संबंधी विकारों के लिए प्रयोग होता है|
प्रेडनिसोलोन का उपयोग
इसका उपयोग कई विकारों को ठीक करने के लिए किया जाता है जिनमें निम्न हो सकते हैं
लुपस, सोरायसिस और एलर्जी की स्थिति।
संधिशोथ; किशोर पुरानी गठिया, पॉलीमेल्जिया संधिशोथ
ड्यूकेन मांसपेशी डिस्ट्रॉफी (एक प्रगतिशील बीमारी जिसमें मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करती हैं)
अस्थमा, गंभीर अतिसंवेदनशीलता प्रतिक्रियाएं
प्रत्यारोपण सर्जरी (प्रतिरक्षा दमन के लिए)
पेम्फिगस, बुलस पेम्फिगोइड (प्रतिरक्षा-मध्यस्थ त्वचा रोग)
रक्त विकार जैसे ऑटोम्यून्यून हेमोलाइटिक एनीमिया, इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक purpura
तीव्र और लिम्फैटिक ल्यूकेमिया, घातक लिम्फोमा, एकाधिक माइलोमा
प्रेडनिसोलोन कैसे काम करता है
प्रेडनिसोलोन सूजन के शुरुआत से लेकर पुरानी सूजन के विकास के लिए एक प्रभावी अवरोधक है।
प्रेडनिसोलोन मोनोन्यूक्लियर कोशिकाओं (सूजन कोशिकाओं की विशेषता) के प्रसार और इन कोशिकाओं द्वारा सूजन पैदा करने वाले उत्पादों या पदार्थों की रिहाई को रोकता है – जिससे प्रतिरक्षा-दमनकारी क्रियाएं होती हैं।
प्रेडनिसोलोन कैसे लें
इस दवा की खुराक और इसे लेने का समय डॉक्टर द्वारा तय किया जाना चाहिए।
इसकी खुराक आयु, चिकित्सा की स्थिति और चिकित्सा के प्रति प्रतिक्रिया पर आधारित है।
प्रेडनिसोलोन गोलियों और सिरप के रूप में मिलता है।
इन गोलियों को सुबह के समय लेना चाहिए या जब तक डॉक्टर द्वारा सलाह ना दी जाए|
इन्हें रोजाना एक ही समय पर लेना चाहिए।
सिरप का उपयोग करने से पहले सिरप की बोतल को अच्छी तरह से हिला लें और सही खुराक लेने के लिए हमेशा मापने वाले चम्मच का उपयोग करें।
प्रेडनिसोलोन इंजेक्शन के रूप में भी मिलता है जिसे एक पेशेवर स्वास्थ्यकर्मी के द्वारा ही लगवाना चाहिए|
प्रेडनिसोलोन की सामान्य खुराक
इसकी खुराक आपकी हालत पर निर्भर होती है| वयस्कों के लिए इसकी खुराक रोजाना 20 से 40 मि.ग्रा. से 80 मि.ग्रा. तक है जिसे कम करके प्रतिदिन 5 से 20 मि.ग्रा. किया जा सकता है।
प्रेडनिसोलोन से कब बचें?
आपको निम्न स्थितियों में प्रेडनिसोलोन का उपयोग नहीं करना चाहिए:
यदि इसके किसी से एलर्जी हो
रक्तचाप बढने पर
थ्रोम्बोम्बोलिक विकार
मधुमेह मेलिटस
ऑस्टियोपोरोसिस,
स्क्लेरोडर्मा,
मियासथीनिया ग्रेविस,
जिगर, गुर्दे, दिल, आंतों, एड्रेनल या थायराइड रोग।
हेपेटाइटिस-बी
हरपीस, आंख का संक्रमण, चिकनपॉक्स, शिंगल या खसरा।
मोतियाबिंद, आंख का रोग
भावनात्मक समस्याएं, अवसाद या मानसिक बीमारी के अन्य प्रकार
फेच्रोमोसाइटोमा (गुर्दे के पास एक छोटी ग्रंथि में ट्यूमर)
अल्सर

आपके पैरों, फेफड़ों या आंखों में खून का थक्का
यदि आप किसी भी सर्जरी या दांतों की सर्जरी से गुजर रहे हैं तो डॉक्टर को सूचित करें|
यदि आपको टीकाकरण की आवश्यकता है तो अपने डॉक्टर को सूचित करें।
मांसपेशियों की समस्याओं वाले मरीजों या पूर्व में प्रीनीसोलोन टैबलेट (या एक समान दवा) ले रहर हों तो डॉक्टर को सूचित करें|
प्रेडनिसोलोन के दुष्प्रभाव?
कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के अचानक विघटन से एक स्टेरॉयड “विदड्राल सिंड्रोम” हो सकता है। इस सिंड्रोम की वजह से भूख, मतली, उल्टी, थकावट, सिरदर्द, बुखार, जोड़ों में दर्द, त्वचा का झड़ना, मांसपेशियों में दर्द या वजन घटना हो सकता है|
प्रेडनिसोलोन का लंबे समय तक प्रयोग करने से कुशिंग सिंड्रोम हो सकता है। इसके लक्षणों में रक्तचाप में वृद्धि, शरीर के चारों ओर मोटापे में वृद्धि और अंगों की पतली, त्वचा पर बैंगनी पट्टियां, चेहरे की गोलियां, मांसपेशियों की कमजोरी, पतली नाजुक त्वचा के साथ आसान और लगातार चोट लगाना आदि हैं|
इसके इलावा गर्दन के पिछले हिस्से पर वसा जमना, मुँहासे, मासिक धर्म चक्र में परेशानी, शरीर पर बाल और मनोवैज्ञानिक असामान्यताओं में वृद्धि होना भी है|
प्रेडनिसोलोन रक्त ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा सकता है, पहले से मौजूद मधुमेह को बिगाड़ सकता है और मधुमेह विरोधी दवाओं के प्रभाव को भी कम कर सकता है। इसलिए नियमित अंतराल पर खून में ग्लूकोज की जांच करते रहना चाहिए|



शरीर में होने वाले संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है जैसे वायरल, बैक्टीरिया, फंगल, प्रोटोज़ोन या हेल्मिंथिक आदि| यह संक्रमण के प्रतिरोध को कम करके मौजूदा संक्रमणों को खराब कर सकता है।

प्रेडनिसोलोन रक्तचाप को बढ़कर शरीर में नमक और पानी के प्रतिधारण को बढ़ा सकता है और शरीर से पोटेशियम और कैल्शियम के निकलने का कारण बन सकता है।
इससे गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं जैसे अक्रामकता, अवसाद, भावनात्मक विकार, अनिद्रा, मनोदशा बदलना, नींद के विकार आदि|
प्रेडनिसोलोन हड्डी के गठन और दोबारा जुड़ने दोनों को ही को कम कर सकते हैं|
प्रेडनिसोलोन आंखों की बीमारियों का कारण भी बन सकता है जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, बैक्टीरिया, कवक या वायरस के कारण आंख का संक्रमण इत्यादि|
त्वचा पर गंभीर चकत्ते प्रेडनिसोलोन का एक अन्य दुष्प्रभाव है।
प्रेडनिसोलोन को लम्बे समय तक उपयोग करने से बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें|
अंगों पर प्रभाव
जिगर – जिगर के गंभीर रोगों वाले मरीजों में खुराक के समायोजन की जरूरत होती है।
गुर्दा – इसमें खुराक के समायोजन की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि किसी प्रकार के अवांछित लक्षण पाए जाते हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
एलर्जी प्रतिक्रियाएं
यदि किसी भी सामग्री से एलर्जी हो तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें| इससे होने वाली एलर्जी प्रतिक्रियाओं में त्वचा पर गंभीर चकत्ते, सांस की तकलीफ और खुजली इत्यादि हैं|
दवा इंटरैक्शन के बारे में सावधानी
इंटरैक्शन करने वाली सभी दवाओं को यहां सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता इसलिए प्रेडनिसोलोन निम्न दवाओं और उत्पादों के साथ प्रभाव डाल सकता हैं:
एस्पिरिन और अन्य नॉनस्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) जैसे इबुप्रोफेन और नाप्रोक्सेन,
गर्भनिरोधक गोली
एंटीएसिड्स- एंटीएसिड्स के साथ इसे लेने के बीच में कम से कम 2 घंटे का अंतराल छोड़ दें।
क्लैरिथ्रोमाइसिन, रिफाबूटिन, रिफाम्पिसिन, एम्फोटेरिसिन, केटोकोनाज़ोल, टेट्रासाइक्लिन, फ्लुकोनाज़ोल
इंसुलिन सहित मधुमेह के लिए दवाएं,
फ़िनाइटोइन
थायराइड की दवा
वेरापामिल
उच्च रक्तचाप या मूत्रवर्धक दवाएं
मिर्गी का इलाज करने वाली दवाएं जैसे कि कार्बामाज़ेपाइन, फेनोबार्बिटल, बार्बिटेरेट्स, फेनीटोइन, प्राइमिडोन, फेनिलबूटज़ोन
मेथोट्रेक्सेट (गठिया के लिए, क्रोन रोग, छालरोग)
मिफेप्रिस्टोन (गर्भपात के लिए उपयोग किया जाता है)
सिक्लोपोरिन (अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति को रोकने के लिए)
एंटीकोगुलेंट दवाएं (खून पतला करने वाली के लिए प्रयोग किया जाता है)
एमिनोग्लुटाइथिमाइड, एसीटाज़ोलोमाइड, कार्बोक्सोलोन या सैलिसिलेट्स
रेटिनोइड्स (त्वचा की स्थितियों के लिए)
कार्बिमाज़ोल (हाइपरथायरायडिज्म के लिए)
थियोफाइललाइन (अस्थमा के लिए)

अपने द्वारा उपयोग की जाने वाली सभी दवाओं और उत्पादों की सूचना चिकित्सक को दें| जिन हर्बल उत्पादों का आप उपयोग कर रहे हैं उनके बारे में भी डॉक्टर को सूचित करें| बिना अपने डॉक्टर की मंजूरी के दवा संशोधित न करें|
प्रभाव या परिणाम
इससे ठीक होने के लिए लिया गया समय चिकित्सा की स्थिति पर निर्भर करता है।
लक्षणों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए अपने डॉक्टर द्वारा तय की गयी खुराक को पूरा लें|
अपने डॉक्टर से सलाह किए बिना दवा लेना बंद ना करें|
सामान्य प्रश्न


क्या प्रेडनिसोलोन नशे की लत है?

नहीं। लेकिन इन दवाइयों पर निर्भरता से बचना चाहिए।
क्या शराब के साथ प्रेडनिसोलोन ले सकते हैं?
प्रेडनिसोलोन लेने के दौरान अल्कोहल लेने से बचना चाहिए।
क्या किसी विशेष खाद्य पदार्थ से बचना चाहिए?
प्रेडनिसोलोन लेने के दौरान अंगूर या अंगूर का रस ना लें|
क्या गर्भवती होने पर प्रेडनिसोलोन ले सकते हैं?
यदि आप गर्भवती हैं या गर्भवती होने की योजना बना रही हैं तो अपने डॉक्टर को इस बारे में बताएं| गर्भावस्था के दौरान प्रेडनिसोलोन को लंबे समय तक लेने से भ्रूण का विकास मंद हो सकता है। प्रेडनिसोलोन को केवल तभी लेना चाहिए जब मां और बच्चे को हानि ना हो।
क्या बच्चे को स्तनपान करने के दौरान प्रेडनिसोलोन ले सकते हैं?
50 मि.ग्रा. प्रतिदिन तक की खुराक शिशु पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती| यदि आप अपने बच्चे को स्तनपान करा रही हैं तो अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इस दवा का उपयोग करें|
क्या प्रेडनिसोलोन लेने के बाद ड्राइव कर सकते हैं?
यदि आप निम्न में से कुछ भी अनुभव हो तो इस दवा को लेकर ना तो वाहन चलाएं और ना ही भारी मशीनरी चलायें:
आलस्य
सरदर्द
चक्कर आना
रक्तचाप में वृद्धि
यदि प्रेडनिसोलोन अधिक मात्र में लें तो क्या होता है?
यदि आपने प्रेडनिसोलोन अधिक मात्रा में ली है तो तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें।
यदि एक्सपायरी हो चुकी प्रेडनिसोलोन लें तो क्या होता है?
एक्सपायरी हो चुकी एक खुराक लेने से कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं हो सकता लेकिन दवा की शक्ति कम हो सकती है इसलिए आपको हमेशा एक्सपायरी दवा की जांच करें और कभी भी उपयोग ना करें|
यदि प्रेडनिसोलोन की खुराक लेनी याद ना रहे तो क्या होता है?
प्रभावी रूप से काम करने के लिए हर समय आपके शरीर में दवा की एक निश्चित मात्रा का होना जरूरी है| इसलिए जैसे ही आपको याद आये हमेशा अपनी भूली हुई खुराक लें| यदि दूसरी खुराक का पहले से ही समय हो गया हो तो दुगुनी खुराक ना लें|
प्रेडनिसोलोन का भंडारण
इसे कमरे के तापमान पर सीधे प्रकाश और गर्मी से 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखें।
इस दवा को फ्रिज में न रखें|
बोतल खोलने के 1 महीने के बाद तक प्रेडनिसोलोन ओरल सस्पेंशन को खुला न छोड़ें।
प्रेडनिसोलोन लेते समय टिप्स

प्रेडनिसोलोन संक्रामक रोगों को विकसित करने के लिए आपकी संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है| इसलिए संक्रामक बीमारियों से पीड़ित लोगों को इससे दूर रहना चाहिए।
प्रेडनिसोलोन का उपयोग अचानक या डॉक्टर की सलाह के बिना कभी नहीं रोकना चाहिए।
प्रेडनिसोलोन का उपयोग करने के दौरान अतिरिक्त पूरक खुराक लेना जरूरी है जैसे तनाव के समय, शल्य चिकित्सा या संक्रमण के दौरान
लंबी समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉयड थेरेपी लेने वाले मरीजों को नियमित रूप से नियमित अंतराल पर प्रयोगशाला अध्ययन (2 घंटे के पोस्टप्रैन्डियल ब्लड ग्लूकोज और सीरम पोटेशियम सहित), रक्तचाप, वजन, और छाती का एक्स-रे इत्यादि करवाने चाहिए।


का लंबे समय तक उपयोग हड्डी के खनिज घनत्व को कम करता है और आंखों पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसलिए नियमित रूप से हड्डी के खनिज घनत्व की परीक्षा और नियमित आंखों की परीक्षा करवाते रहना चाहिए।

बाल रोगियों के विकास पर नजर रखें|
प्रेडनिसोलोन का लंबे समय तक उपयोग करने के दौरान हमेशा हाइपोथालेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल (एचपीए) एक्सिस सप्रेशन, कुशिंग सिंड्रोम की भी निगरानी करें।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 



खस खस, पोस्तदाने, अफीम के बीज के गुण व औषधीय उपयोग




भारतीय व्यंजनों में कई प्रकार के गुणकारी खाद्य पदार्थ शामिल हैं। ये न सिर्फ पेट भरने का काम करते हैं, बल्कि इनका प्रयोग चिकित्सीय समस्याओं के इलाज में भी किया जाता है। खसखस भी ऐसा ही खाद्य पदार्थ है, जो पकवानों का जायका बढ़ाने के अलावा अपने औषधीय गुणों के लिए भी लोकप्रिय है।
खसखस का इस्तेमाल सब्जी की ग्रेवी और सर्दी के दिनों में स्वादिष्ट हलवा बनाने के लिए किया जाता है। यह स्वाद औरसेहत से भरपूर है, इसलिए स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के लिए भी इसे दवा के रूप में प्रयोग करते हैं।
आज के समय हर रोज नई-नई बीमारियां सुनने को मिल रही है। गलत खान-पान के कारण हर दूसरा इंसान किसी न किसी बीमारी से ग्रसित है। आज के समय में हैल्दी रहने के लिए स्वस्थ आहार और कुछ घरेलू उपाय बहुत जरूरी है। क्यों न डाइट में कोई ऐसी चीज ली जाएं जिसे खाने के बाद कई बीमारियों से बचा जा सकें। अगर आप दूध के साथ खसखस लेते हैं तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। खसखस में ओमेगा-3 और ओमेगा-6, फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, थायमिन, कैल्शियम और मैंगनीज आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को हैल्दी रखने में मदद करते हैं।
खसखस के फायदे
शरीर के लिए खसखस के बहुत फायदे हैं। इसका इस्तेमाल कब्ज जैसी समस्या से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है। छोटे-छोटे बीजों वाला यह खाद्य पदार्थ कैलोरी, प्रोटीन, फैट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम व फोलेट जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है । इसका इस्तेमाल आंतरिक स्वास्थ्य से लेकर त्वचा और बालों के लिए भी किया जा सकता है।


दर्द निवारक

खसखस को दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओपियम एल्कलॉइड्स सभी प्रकार के दर्द को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खास तौर से इसका प्रयोग मांसपेशियों के दर्द में किया जाता है। खसखस का तेल भी बाजार में उपलब्ध होता है, जिसका प्रयोग दर्द वाले स्थान पर किया जाता है।
*खसखस फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत है, जिसका प्रयोग करने से कब्ज की समस्या नहीं होती। इसके अलावा यह बेहतर पाचन में भी मदद करता है और शरीर को उर्जा देने के लिए भी बहुत लाभदायक होता है
सांस संबंधी तकलीफ
सांस संबंधी तकलीफ होने पर भी खसखस काफी फायदेमंद होता है। इसके साथ ही यह खांसी को कम कर सांस संबंधी समस्याओं में लंबे समय तक आराम दिलाने में भी मदद करता है।
नींद न आने की समस्या
अगर आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं, तो सोने से पहले खसखस का गर्म दूध पीना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। यह आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करेगा।
त्वचा के लिए
खसखस त्वचा को नमी प्रदान करने में भी सहायक होता है। यह त्‍वचा की जलन व खुजली को कम करने के साथ ही एक्जिमा जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है।त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए खसखस का इस्तेमाल दूध में पीसकर फेसपैक के रूप में किया जाता है। यह त्वचा को नमी प्रदान करने के साथ ही प्राकृतिक चमक लाता है, और चेहरा दमक जाता है।
*ओमेगा-6 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर से भरपूर होने के साथ ही खसखस में फाइटोकेमिकल्स, विटामिन बी, थायमिन, कैल्शियम और मैंगनीज भी पाया जाता है, जो पोषण के लिहाज से बहुत फायदेमंद है।
मानसिक तनाव
खसखस मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ त्वचा पर होने वाली झुर्रियों को भी कम करने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपको जवां बनाए रखने में मदद करते है।
महिला की प्रजनन क्षमता में सुधार
खसखस के लाभ यहीं समाप्त नहीं होते, इसके प्रयोग से महिला की प्रजनन क्षमता में सुधार हो सकता है। नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में शोधकर्ताओं के अनुसार पॉपी सिड्स के तेल से फैलोपियन ट्यूब को फ्लश करने से फर्टिलिटी में मदद मिल सकती है। फैलोपियन ट्यूब वो मार्ग होता है, जिससे अंडे अंडाशय से गर्भाशय तक जाते हैं।
गुर्दे की पथरी में
गुर्दे की पथरी में इलाज के तौर पर भी खसखस को सेवन किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओक्सलेट्स, शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैल्शियम का अवशोषण कर गुर्दे में पथरी बनने से रोकता है।


हड्डी स्वास्थ्य

हड्डियों के लिए भी पॉपी सिड्स के फायदे बहुत हैं। खसखस कैल्शियम, जिंक और कॉपर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। ये दोनों तत्व हड्डियों को मजबूत करने और इनके विकास में मदद करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, कैल्शियम सप्लीमेंट के साथ कॉपर और जिंक मिलकर रीढ़ की हड्डी के नुकसान को रोकने में प्रभावी भूमिका अदा कर सकते हैं |
हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम और फास्फोरस दोनों की सही मात्रा की आवश्यकता होती है। खसखस फास्फोरस से समृद्ध होता है, जो कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों को लाभ पहुंचाता है
थायराइड में लाभदायक
खसखस में सेलेनियम होता है, जो थायराइड फंक्शन को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे हाइपो और हाइपर थायराइड के लक्षण समाप्त हो सकते हैं
दृष्टि में सुधार
खसखस जिंक का अच्छा स्रोत है। एक अध्ययन के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ-साथ होने वाले मैक्यूलर डीजेनेरेशन (नेत्र रोग) के जोखिम को जिंक कम कर सकता है। इसके अलावा, खसखस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं|
पाचन में सहायक
पेट संबंधी परेशानियों के लिए खसखस का उपयोग किया जा सकता है। यह खाद्य पदार्थ फाइबर जैसे खास पोषक तत्व से समृद्ध होता है, जो पेट से जुड़ी परेशानियों जैसे कब्ज व गैस आदि से छुटकारा दिलाने का काम करता है । इसके अलावा, फाइबर कोलन कैंसर से भी रोकथाम करने का काम कर सकता है । नियमित रूप से किया गया इसका सेवन पेट स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करेगा।
मस्तिष्क स्वास्थ्य
मस्तिष्क के विकास के लिए भी खसखस के फायदे बहुत हैं। यह कैल्शियम, आयरन व कॉपर जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है , जो दिमागी क्षमता बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। इसमें मौजूद कैल्शियम न्यूरोनल फंक्शन को संतुलित करने के साथ-साथ याददाश्त को भी बढ़ाने का काम करता है । मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आप खसखस को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
कैंसर से रोकथाम
एक रिपोर्ट के अनुसार खसखस कार्सिनोजेन-डिटॉक्सिफाइंग एंजाइम की गतिविधि को 78 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, जिसे ग्लूटाथिओन-एस-ट्रांसफरेज (जीएसटी) कहा जाता है। खसखस की यह गतिविधि कैंसर से रोकथाम का कार्य कर सकती है|
एक रिपोर्ट के अनुसार खसखस को कैंसर की पारंपरिक दवा के रूप में भी जाना गया है। रिपोर्ट बताती है कि खसखस को त्वचा, पेट, गर्भाशय व योनि के कैंसर जैसी स्थितियों के लिए कारगर दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है |


मुंह में छाले

मुंह में छाले किसी भी व्यक्ति को परेशान कर सकते हैं। ये छाले कष्टदायक होते हैं, जो जीभ व होंठ आदि को निशाना बनाते हैं। इससे प्रभावित व्यक्ति को खाने, दांत साफ करने में और बात करने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। खसखस एंटीबैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है (4), इसलिए यह मुंह के छालों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, मुंह के छालों पर खसखस के बेहतर प्रभाव पर अभी और अध्ययन की आवश्यकता है।
*इसके अलावा कई तरह की छोटी-छोटी समस्याओं जैसे अधि‍क प्यास लगना, बुखार, सूजन या पेट में होने वाली जलन से राहत पाने के लिए खसखस का प्रयोग किया जाता है। यह पेट में बढ़ने वाली गर्मी को भी शांत करने में सहायक है।
कब्ज
कब्ज जैसी पेट संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए भी खसखस का सेवन किया जा सकता है। खसखस फाइबर से समृद्ध होता और फाइबर पाचन तंत्र के लिए सबसे सहायक पोषक तत्व माना जाता है। फाइबर स्टूल को मुलायम बना मल त्याग में मदद करता है |
बालों का विकास
बालों के विकास में भी खसखस आपकी मदद कर सकता है। खसखस, विटामिन-ई से समृद्ध होता है, जो बाल झड़ने की समस्या से निजात दिला बालों के विकास में मदद करता है । बालोंं के लिए आप पॉपी सिड्स हेयर पैक बना सकते हैं। नीचे जानिए किस प्रकार बनाएं बालों के लिए खसखस का हेयर पैक :
कैसे करें इस्तेमाल :
कप का एक चौथाई नारियल दूध लें और उसमें एक छोटा चम्मच प्याज का पेस्ट मिला दें।
इसमें दो चम्मच खसखस डालें और कुछ घंटे भिगोकर रखें।
अब इस मिश्रण को अच्छी तरह ब्लेंड कर लें।
पेस्ट को स्कैल्प और बालों पर एक घंटे के लिए लगाएं और बाद में शैंपू से धो लें।
बालों के विकास के लिए आप हफ्ते में दो-तीन बार इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं।
खसखस का उपयोग 
भारत के विभिन्न राज्यों में खसखस ​​का उपयोग व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। खसखस का उपयोग करने से पहले बीजों को अच्छी तरह देख लें, ताकि उसमें कोई कंकड़ न रह जाए। बीजों को कम से कम दो घंटे पानी या दूध में भिगोना चाहिए। इसके बाद उन्हें सूखने के लिए छोड़ दें।
आप निम्नलिखित तरीकों से खसखस को व्यंजन में शामिल कर सकते हैं :
अन्य मसालों के साथ ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए भीगे हुए खसखस का उपयोग किया जा सकता है।
टोस्टेड खसखस ​​का उपयोग ब्रेड, रोल्स, सब्जियों और सलाद की गार्निशिंग करने के लिए किया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में सफेद खसखस (पोस्तो) ​​का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है, जैसे आलू पोस्तो व पोस्तो बोड़ा आदि। आलू पोस्तो के लिए सफेद खसखस को पीसकर इस्तेमाल में लाया जाता है।
महाराष्ट्र में खसखस ​​का उपयोग एक विशेष प्रकार की मिठाई अनारकला बनाने के लिए किया जाता है।
आंध्र प्रदेश में सफेद खसखस ​​के पेस्ट का उपयोग एक मसाले के रूप में चिकन, मांस और सब्जियों को बनाने के लिए किया जाता है।
इसके अलावा, खसखस ​​का इस्तेमाल पेस्ट्री बनाने के लिए भी किया जाता है।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

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गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि




25.11.19

आयुर्वेदिक चूर्ण का विवरण और फायदे


हिंग्वाष्टक चूर्ण पेट की वायु को साफ करता है तथा अग्निवर्द्धक व पाचक है। अजीर्ण, मरोड़, ऐंठन, पेट में गुड़गुड़ाहट, पेट का फूलना, पेट का दर्द, भूख न लगना, वायु रुकना, दस्त साफ न होना अपच के दस्त आदि में पेट के रोग नष्ट होते हैं तथा पाचन शक्ति ठीक काम करती है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।
व्योषादि चूर्ण श्वास, खांसी, जुकाम, नजला, पीनस में लाभदायक तथा आवाज साफ करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सायंकाल गुनगुने पानी से।
शतावरी चूर्ण धातु क्षीणता, स्वप्न दोष व वीर्यविकार में, रस रक्त आदि सात धातुओं की वृद्धि होती है। शक्ति वर्द्धक, पौष्टिक, बाजीकर तथा वीर्य वर्द्धक है। मात्रा 5 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।
स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण (सुख विरेचन चूर्ण) :  हल्का दस्तावर है। बिना कतलीफ के पेट साफ करता है। खून साफ करता है तथा नियमित व्यवहार से बवासीर में लाभकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम रात्रि सोते समय गर्म जल अथवा दूध से।
सारस्वत चूर्ण :  दिमाग के दोषों को दूर करता है। बुद्धि व स्मृति बढ़ाता है। अनिद्रा या कम निद्रा में लाभदायक। विद्यार्थियों एवं दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम। मात्रा 1 से 3 ग्राम प्रातः -सायं मधु या या दूध से। सितोपलादि चूर्ण पुराना बुखार, भूख न लगना, श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, अरुचि जीभ की शून्यता, हाथ-पैर की जलन, नाक व मुंह से खून आना, क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा। मात्रा 1 से 3 गोली सुबह-शाम शहद से |
अग्निमुख चूर्ण (निर्लवण) : उदावर्त, अजीर्ण, उदर रोग, शूल, गुल्म व श्वास में लाभप्रद। अग्निदीपक तथा पाचक। मात्रा 3 ग्राम प्रातः-सायं उष्ण जल से। 
अजमोदादि चूर्ण :  जोड़ों का दुःखना, सूजन, अतिसार, आमवात, कमर, पीठ का दर्द व वात व्याधि नाशक व अग्निदीपक। मात्रा 3 से 5 ग्राम प्रातः-सायं गर्म जल से अथवा रास्नादि काढ़े से।
त्रिकटु चूर्ण खांसी, कफ, वायु, शूल नाशक, व अग्निदीपक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम प्रातः-सायंकाल शहद से।
सैंधवादि चूर्ण : अग्निवर्द्धक, दीपन व पाचन। मात्रा 2 से 3 ग्राम प्रातः व सायंकाल पानी अथवा छाछ से। 


(महा) चूर्ण :
  सब तरह का बुखार, इकतरा, दुजारी, तिजारी, मलेरिया, जीर्ण ज्वर, यकृत व प्लीहा के दोष से उत्पन्न होने वाले जीर्ण ज्वर, धातुगत ज्वर आदि में विशेष लाभकारी। कलेजे की जलन, प्यास, खांसी तथा पीठ, कमर, जांघ व पसवाडे के दर्द को दूर करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ। 
सुलेमानी नमक चूर्ण भूख बढ़ाता है और खाना हजम होता है। पेट का दर्द, जी मिचलाना, खट्टी डकार का आना, दस्त साफ न आना आदि अनेक प्रकार के रोग नष्ट करता है। पेट की वायु शुद्ध करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।
त्रिफला चूर्ण : कब्ज, पांडू, कामला, सूजन, रक्त विकार, नेत्रविकार आदि रोगों को दूर करता है तथा रसायन है। पुरानी कब्जियत दूर करता है। इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। मात्रा 1 से 3 ग्राम घी व शहद से तथा कब्जियत के लिए 5 से 10 ग्राम रात्रि को जल के साथ। 
श्रृंग्यादि चूर्ण :  बालकों के श्वास, खांसी, अतिसार, ज्वर में। मात्रा 2 से 4 रत्ती प्रातः-सायंकाल शहद से।
माजून मुलैयन हाजमा करके दस्त साफ लाने के लिए प्रसिद्ध माजून है। बवासीर के मरीजों के लिए श्रेष्ठ दस्तावर दवा। मात्रा रात को सोते समय 10 ग्राम माजून दूध के साथ।

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24.11.19

गुर्दे (किडनी) की पथरी के आयुर्वेदिक हर्बल रामबाण उपचार


किडनी,,युरेटर या ब्ला्डर, में पथरी निर्माण होना एक भयंकर पीडादायक रोग है। मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक पदार्थों से मूत्र अन्गों में पथरी बनती है,जैसे युरिक एसिड,फ़स्फ़ोरस केल्शियम और ओ़क्झेलिक एसिड। जिन पदार्थों से पथरी निर्माण होती है उनमें केल्शियम ओक्झेलेट प्रमुख है। लगभग ९० प्रतिशत पथरी का निर्माण केल्शियम ओक्झेलेट से होताहै। गुर्दे की पथरी( kidney stone) का दर्द आमतौर पर बहुत भयंकर होता है। रोगी तडफ़ उठता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होताहै। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फ़िर युरिन ब्लाडर में आती है। पेशाब होने में कष्ट होता है,उल्टी मितली,पसीना होना और फ़िर ठड मेहसूस होना ,ये पथरी के समान्य लक्षण हैं।नुकीली पथरी से खरोंच लगने पर पेशाब में खून भी आता है।इस रोग में पेशाब थोड़ी मात्रा में कष्ट के साथ बार-बार आता है| रोग के निदान के लिये सोनोग्राफ़ी करवाना चाहिये।वैसे तो विशिष्ठ हर्बल औषधियों से ३० एम एम तक की पथरी निकल जाती है लेकिन ४-५ एम एम तक की पथरी घरेलू नुस्खों के प्रयोग से समाप्त हो सकती हैं। मैं ऐसे ही कुछ सरल नुस्खे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।

१) गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार ..तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच एक चम्मच शहद में मिलाकर जल्दी सबेरे लें। ऐसा ५-६ माह तक करने से छोटी पथरी निकल जाती है।
 २) मूली के पत्तों का रस २०० एम एल दिन में २ बार लेने से पथरी रोग नष्ट होता है।
 ३) दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।
 ४) नींबू के रस में स्टोन को घोलने की शक्ति होती है। एक नींबू का रस दिन में १-२ बार मामूली गरम जल में लेना चाहिये।
 ५) पानी में शरीर के विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। गरमी में ४-५ लिटर और सर्द मौसम में ३-४ लिटर जल पीने की आदत बनावें।
* ६) दो तीन सेवफ़ल रोज खाने से पथरी रोग में लाभ मिलता है।
 ७) तरबूज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है । जब तक उपलब्ध रहे रोज तरबूज खाएं। तरबूज में पुरुषों के लिये वियाग्रा गोली के समान काम- शक्ति वर्धक असर भी पाया गया है।
 ८) कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। २० ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहिले पीयें।
 ९) शोध में पाया गया है कि विटमिन बी६ याने पायरीडोक्सीन के प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है और नई पथरी बनने पर भी रोक लगती है। १०० से १५० एम जी की खुराक कई महीनों तक लेने से पथरी रोग का स्थायी समाधान होता है। गोखरू के औषधीय गुण और प्रयोग
 १०. अंगूर में पोटेशियम और पानी की अधिकता होने से गुर्दे के रोगों लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसमें अल्बुमिन और सोडियम कम होता है जो गुर्दे के लिये उत्तम है।
11.  गाजर और मूली के बीज १०-१० ग्राम,गोखरू २० ग्राम,जवाखार और हजरूल यहूद ५-५ ग्राम लेकर पावडर बनालें और ४-४ ग्राम की पुडिया बनालें। एक खुराक प्रत: ६ बजे दूसरी ८ बजे और तीसरी शाम ४ बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। बहुत कारगर उपचार है|
 १२) पथरी को गलाने के लिये चौलाई की सब्जी गुणकारी है। उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं।दिन में ३-४ बार यह उपक्रम करें। वर्षा ऋतु के रोग और आयुर्वेदिक घरेलू उपचार



 १३) बथुआ की सब्जी आधा किलो लें। इसे ८०० मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपडे या चाय की छलनी में छान लें। बथुआ की सब्जी भी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिलालें। काली मिर्च आधा चम्मच और थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर पीयें। दिन में ३-४ बार प्रयोग करते रहने से गुर्दे के विकार नष्ट होते हैं और पथरी निकल जाती है।
 १४) प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब ७० ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।
 १५) सूखे आंवले बारीक पीसलें। यह चूर्ण कटी हुई मूली पर लगाकर भली प्रकार चबाकर खाने से कुछ ही हफ़्तों में पथरी निकलने के प्रमाण मिले हैं।
 १६) स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें। बढ़ी हुई तिल्ली प्लीहा के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार
 १७) मिश्री,सौंफ,सूखा धनिया सभी ५०-५० ग्राम की मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए २४ घंटे बाद छानकर सौंफ, धनिया पीसकर यह पेस्ट पुन; तरल मिश्रण में घोलकर पीते रहने से मूत्र पथरी निकल जाती है|
 १८) जवाखार: गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है। जवाखार और चीनी 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।
 १९) पालक: 100 मिलीलीटर नारियल का पानी लेकर, उसमें 10 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से 14 दिनों में पथरी खत्म हो जाती है। पालक के साग का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पथरी में लाभ मिलता है।
 २०) गोक्षुर: गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है। *सिर्फ आपरेशन नहीं ,प्रोस्टेट वृद्धि की 100% अचूक हर्बल औषधि
* २१) फिटकरी: भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।
 २२) कमलीशोरा: कमलीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।
 २३) आलू: एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है। लो ब्लड प्रेशर होने पर तुरंत करें ये पाँच उपाय
 २४) तुलसी: 20 ग्राम तुलसी के सूखे पत्ते, 20 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम सेंधानमक लेकर पॉउड़र बनाकर रख लें। यह 3 ग्राम चूर्ण गुनगुने पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से गुर्दे का तेज दर्द दूर होता है। २५) पके हुए प्याज का रस पीना पथरी निकालने के लिए बेहद लाभ प्रद उपाय है| दो मध्यम आकार के प्याज लेंकर भली प्रकार छीलें | एक गिलास जल में डालकर मध्यम आंच पर पकाएं| अब इस मिश्रण को मिक्सर में डालकर चलाएं | इस रस को छानकर पियें| ७ दिन तक यह उपचार करने से पथरी के टुकड़े निकल जाते हैं| 

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

विशिष्ट परामर्श- 



 वैध्य श्री दामोदर 9826795656 की जड़ी बूटी - निर्मित औषधि से 30 एम एम तक के आकार की बड़ी पथरी भी आसानी से नष्ट हो जाती है| पथरी का भयंकर दर्द , गुर्दे की सूजन,पेशाब मे दिक्कत,जलन को तुरंत समाप्त करने मे यह औषधि रामबाण की तरह असरदार है|जो पथरी का दर्द महंगे इंजेक्शन से भी काबू मे नहीं आता ,इस औषधि की कुछ ही खुराक लेने से आराम लग जाता है| आपरेशन की जरूरत ही नहीं पड़ती|औषधि मनी बेक गारंटी युक्त है|



हाथ पैर सुन्न पड़ने की बीमारी की आयुर्वेदिक चिकित्सा


                                                         

 अक्सर देखने और सुनने को मिलता है कि अचानक एक हाथ या पैर सुन्न पड़ जाता है। काफी देर मूवमेंट करने के बाद हाथ या पैर नॉर्मल होता है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो धीरे-धीरे यह परेशानी रोजाना होने लगती है। हालांकि यह बीमारी गंभीर नहीं है। अगर सही वक्त पर इलाज मिलता है और मरीज तय समय पर दवाओं का सेवन करता है तो उसे इससे छुटकारा मिल सकता है। वैसे इस बीमारी को कॉर्पल टर्नल सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है।
  एक ही हाथ से लगातार काम करने से यह परेशानी हो सकती है। यह कारण ज्यादातर लोगों में देखने को मिलता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को तीन गुना ज्यादा इस बीमारी की संभावना रहती है। कंप्यूटर पर कार्य करने वाले, कारपेंटर, ग्रॉसरी-चेकर, मजदूर, मीट पैक करने वाले, संगीतकार, मकैनिक इसका शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा मधुमेह व थायराइड की वजह से भी यह परेशानी हो सकती है।

लक्षण-
-हाथों और अंगुलियों में झुनझुनाहट या सुन्न पड़ना विशेषकर अंगूठे, बीजक व मध्य अंगलियों में।
-कलाई, हथेली और बाजुओं में दर्द।
-दिन की तुलना में रात के दौरान अधिक दर्द व सुन्न पड़ जाना। यह दर्द बहुत बुरी तरह से हो सकता है। आप अपने हाथ को आराम दिलाने के लिए रगड़ या हिला सकते हैं।
-जब आप अपने हाथ या कलाई का अधिक इस्तेमाल करते हों तो अधिक दर्द हो सकता है।
-कोई भी वस्तु उठाते समय अधिक परेशानी होना।
-अंगूठे में कमजोरी महसूस करना।

उपचार

डॉक्टर्स के मुताबिक, यदि कार्पल टर्नल सिंड्रोम किसी प्रकार की चिकित्सकीय समस्या से होता है तो डॉक्टर सबसे पहले उस दिक्कत को ठीक करते हैं। फिर वह कलाई को आराम दिलाने को कहेगें या आप कैसे अपने हाथ का इस्तेमाल करते हों, उसे बदलने के लिए कहेगें। कलाई में स्पलिंट (आधी कमर के नीचे बांधी जाने वाली पट्टी) को भी बांध सकते हैं। स्पलिंट पहनने के बाद आप अपनी कलाई को हिला-डुला भी नहीं पाएंगे लेकिन सामान्य क्रियाएं जरूर कर सकते हैं। आप अपनी कलाई पर बर्फ रखकर उससे मालिश कर सकते है और साथ ही कुछ खिंचाव वाले व्यायाम भी इससे निजात दिलाने में आपकी मदद कर कर सकते हैं।
कार्पल टर्नल सिंड्रोम में राहत दिलाने वाले कुछ टिप्स...
-जब आप लेटे हुए हो तो अपनी बाजुओं को तकिए पर रखकर खींचे।
-विभिन्न यंत्रों के इस्तेमाल द्वारा अपने हाथों का नए ढंग से इस्तेमाल करना सीखें।
-दूसरे हाथ का भी अधिक इस्तेमाल करें।
-ज्यादा देर तक अपनी कलाई को नीचे झुका कर न रखें।

गरम पानी का सेंक 

सबसे पहले प्रभावित जगह पर गरम पानी की बोतल का सेंक रखें। इससे वहां की ब्‍लड सप्‍पलाई बढ़ जाएगी। इससे मासपेशियां और नसें रिलैक्‍स होंगी। एक साफ कपड़े को गरम पानी में 5 मिनट के लिये भिगोएं और फिर उससे प्रभावित जगह को सेंके। आप चाहें तो गरम पानी से स्‍नान भी कर सकती हैं।. 

हल्‍दी

हल्‍दी में ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं। साथ ही यह सूजन, दर्द और परेशानी को भी कम करती है। एक गिलास दूध में 1 चम्‍मच हल्‍दी मिक्‍स कर के हल्‍की आंच पर पकाएं।  इसे पीने से काफी राहत मिलेगी। आप हल्‍दी और पानी के पेस्‍ट से प्रभावित स्‍थान की मसाज भी कर सकते हैं।
दालचीनी में कैमिकल और न्‍यूट्रियंट्स होते हैं जो हाथ और पैरों में ब्‍लड फ्लो को बढ़ाते हैं। एक्‍सपर्ट बताते हैं रोजाना 2-4 ग्राम दालचीनी पावडर को लेने से ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। इसको लेने का अच्‍छा तरीका है कि एक गिलास गरम पानी में 1 चम्‍मच दालचीनी पावडर मिलाएं और दिन में एक बार पियें। दूसरा तरीका है कि 1 चम्‍मच दालचीनी और शहद मिला कर सुबह कुछ दिनों तक सेवन करें।

प्रभावित हिस्‍से को ऊपर उठाएं

हाथ और पैरों के खराब ब्‍लड सर्कुलेशन से ऐसा होता है। इसलिये उस प्रभावित हिस्‍से को ऊपर की ओर उठाइये जिससे वह नार्मल हो सके। इससे सुन्‍न वाला हिस्‍सा ठीक हो जाएगा। आप अपने प्रभावित हिस्‍से को तकिये पर ऊंचा कर के भी लेट सकते हैं।
खूब खाएं Vitamin B फूड
अगर हाथ पैरों में जन्‍नाहट होती है तो अपने आहार में ढेर सारे विटामिन बी, बी6 और बी12 को शामिल करें। इनके कमी से हाथ, पैरों, बाजुओं और उंगलियों में सुन्‍नता पैदा हो जाती है। आपको अपने आहार में अंडे, अवाकाडो, मीट, केला, बींस, मछली, ओटमील, दूध, चीज़, दही, मेवे, बीज और फल शामिल करने चाहिये। आप चाहें तो vitamin B-complex supplement भी दिन में दो बार खा सकते हैं।

मसाज 

जब भी हाथ पैर सन्‍न हो जाएं तब उन्‍हें मसाज देना शुरु कर दें। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। गरम जैतून तेल, नारियल तेल या सरसों के तेल से मसाज करें।

व्‍यायाम

व्‍यायाम करने से शरीर में ब्‍लड र्स्‍कुलेशन होता है और वहां पर ऑक्‍सीजन की मात्रा बढ़ती है। रोजाना हाथ और पैरों का 15 मिनट व्‍यायाम करना चाहिये। इसके अलावा हफ्ते में 5 दिन के लिये 30 मिनट एरोबिक्‍स करें, जिससे आप हमेशा स्‍वस्‍थ बने रहें।

पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

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पुदीना है औषधीय गुणों से भरपूर पौधा




पुदीना (Mint) ,एक लोकप्रिय औषधि, खाने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं जिनमें उचित पाचन, वजन घटाने, अवसाद, थकान और सिरदर्द, अस्थमा, स्मृति हानि, और त्वचा की देखभाल संबंधी समस्याओं से राहत शामिल है। पुदीने को एक बेहतरीन माउथ फ्रेश्नर के रूप में भी जाना जाता है। पुदीने की दो दर्जन से अधिक प्रजातियां और सैकड़ों प्रकार की किस्मे पायी जाती है। यह एक औषधिय पौधा है जिसका उपयोग सैकड़ों वर्षों में इसके उल्लेखनीय औषधीय गुणों के लिए किया गया है। बाज़ार में आपको अनेक ऐसे उत्पाद देखने के लिए मिल जाएंगे जिनमें पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है। इनमे टुथ पेस्ट, च्विंगम, माउथ फ्रेष्नेर्स, कैंडी और इनहेलर्स जैसे कई उत्पाद शामिल है।
पोदीने की उपयोगिता:
1.शराब के अंदर पुदीने की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, धब्बे, झांई सब मिट जाते हैं और चेहरा चमक उठता है।
2. पुदीना के रस को शहद के साथ पन्द्रह दिनों तक सेवन करने से पीलिया में लाभ होगा। पोदीने की चटनी नित्य रोटी के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।
*८.५0 ग्राम पोदीने को पीसकर उसमें स्वाद के अनुसार सेंधानमक, हरा धनिया और कालीमिर्च को डालकर चटनी के रूप में सेवन करने से निम्न रक्तचाप में लाभ होता है।
3. हरे पोदीने को पीसकर कम से कम २0 मिनट तक चेहरे पर लगाने से चेहरे की गर्मी समाप्त हो जाती है।
4.गठिया के रोगी को पोदीने का काढ़ा बनाकर पीने से पेशाब खुलकर आता है और गठिया रोग में आराम मिलता है।
5. पोदीने का रस कृमि (कीड़े) और वायु विकारों (रोगों) को नष्ट करने वाला होता है। पोदीने के ५ मिलीलीटर रस में नींबू का 5 मिलीलीटर रस और 7-8 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से उदर (पेट) के रोग दूर हो जाते हैं।
२.२ चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और २ चम्मच शहद को मिलाकर सेवन करने से पेट के रोग दूर होते हैं।
३.100 मिलीलीटर पुदीना का रस गर्म करके, ९ ग्राम शहद और लगभग ६ ग्राम नमक को मिलाकर पीने से उल्टी होकर पेट की बीमारी ठीक हो जाती है।
6. हरा धनिया, पोदीना, कालीमिर्च, अंगूर या अनार की चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर खाने से अरुचि (भूख का न लगना) समाप्त होती है और पाचन क्रिया तेज होने से भूख भी अधिक लगती है।
५.५-५ ग्राम पोदीना, लोहबान और अजवायन का रस, ५ ग्राम कपूर और ५ ग्राम हींग को २५ ग्राम शहद में मिलाकर एक साफ शीशी में भरकर रख लें, फिर पान के पत्ते में चूना-कत्था लगाकर शीशी में से ४ बूंदे इस पत्ते में डालकर खाने से गले का दर्द दूर होता है।
7.पेट दर्द :
*२ चम्मच पोदीने के पत्तों का सूखा चूर्ण और 1 चम्मच मिश्री या चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
*सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर २ चम्मच की फंकी लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
५-५ मिलीलीटर पोदीना का रस, अदरक का रस और 1 ग्राम सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर हो जाता है।
*५ मिलीलीटर पोदीने का रस और ५ मिलीलीटर अदरक के रस को मिलाकर, उसमें थोड़ा-सा सेंधानमक डालकर सेवन करने से उदर शूल (पेट में दर्द) समाप्त हो जाता है।
*पोदीना के ७ पत्ते और छोटी इलायची का 1 दाना पानी के पत्ते में लगाकर खाने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ करता है।
*पोदीना के पत्तों का शर्बत पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है। 4 ग्राम पुदीने में आधा-आधा चम्मच सौंफ और अजवायन, थोड़ा-सा कालानमक और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग हींग को मिलाकर बारीक मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें, इस बने चूर्ण को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट में होने वाले दर्द में लाभ होता है।
*3 ग्राम पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक आदि को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
*पोदीना, सौंफ, सोंठ और गुलकंद को अच्छी तरह पीसकर पानी में उबालकर दिन में 3 बार रोजाना खुराक के रूप में पीने से पेट के दर्द और कब्ज की शिकायत दूर होती है।
*2 चम्मच सूखे पुदीने को काले नमक के साथ सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
सूखा पोदीना और चीनी को बराबर मात्रा में पीसकर रख लें, फिर २ चम्मच को फंकी के रूप में गर्म पानी के साथ पीने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
8. पोदीना १० ग्राम और २0 ग्राम गुड़ को 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर पीने से बार-बार पित्ती निकलना ठीक हो जाती है। पोदीने को पानी के साथ काढ़ा बनाकर थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर खाने से पित्त में बहुत ही लाभ होता है।
9. पेट की गैस :
*४ चम्मच पोदीने के रस में 1 नींबू का रस और २ चम्मच शहद मिलाकर पीने से गैस के रोग में आराम आता है।
*सुबह 1 गिलास पानी में २५ मिलीलीटर पोदीना का रस और 30 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस समाप्त हो जाती है।
*६० ग्राम पोदीना, 10 ग्राम अदरक और ८ ग्राम अजवायन को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबाल आने पर इसमें आधा कप दूध और स्वाद के अनुसार गुड़ मिलाकर पीएं। चौथाई कप पोदीने का रस आघा कप पानी में आधा नींबू निचोड़कर ७ बार उलट-उलट कर पीने से भी गैस से होने वाला पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है।
*पोदीने की ताजी पत्ती, छुहारा, कालीमिर्च, सेंधानमक, हींग, कालीद्राक्ष (मुनक्का) और जीरा इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़कर खाने से भोजन के प्रति रुचि उत्पन्न होती है, स्वाद आता है, गैस दूर होकर भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है और मुंह का फीकापन दूर होता है।
*20 मिलीलीटर पोदीने का रस, 10 ग्राम शहद और ५ मिलीलीटर नींबू के रस को मिलाकर खाने से पेट के वायु विकार (गैस) समाप्त हो जाते हैं।
*पुदीने की पत्तियों का २ चम्मच रस, आधा नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है।
10. पोदीने का रस रोगी को पिलाने से आंतों के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
बिच्छू के काटने पर पोदीने का लेप करने और पानी में पीसकर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।पोदीने का रस पीने से या उसके पत्ते खाने से बिच्छू के डंक मारने से होने वाला कष्ट दूर होता है।
11.लू का लगना:
लगभग २० पोदीने की पत्तियां, लगभग 3 ग्राम सफेद जीरा और २ लौंग मिलाकर इन सबको पीसकर जल में घोलकर, छानकर रोगी को पिलाने से लू से होने वाली बेचैनी खत्म हो जाती है।
*लगभग १५० मिलीलीटर पोदीने के रस को इतने ही ग्राम पानी के साथ पीने से लू से होने वाले खतरों से बचा जा सकता है।
*सूखा पोदीना, खस तथा बड़ी इलायची लगभग ५०-५०ग्राम की बराबर मात्रा में लेकर कूट लें और इसका चूर्ण बना लें, फिर इसे एक लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को ठंडा करके लगभग १०० मिलीलीटर की मात्रा में पीने से लू ठीक हो जाती है।
*घबराहट व बैचेनी में पोदीने का रस लाभदायक होता है।
13. .पुदीने के रस में नींबू का रस मिलाकर, पानी में डालकर पिलाने से यकृत वृद्धि मिट जाती है।
14. जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से प्रजनन में दर्द नहीं होता है।
कफ (बलगम) होने पर चौथाई कप पोदीने का रस इतने ही गर्म पानी में मिलाकर रोज 3 बार पीने से कफ में लाभ होता है।
२ चम्मच पुदीने की चटनी शक्कर में मिलाकर भोजन के साथ खाने से मूत्र रोग में लाभ होता है।
15. पोदीने की पत्तियों को थोड़े-थोड़े समय के बाद चबाते रहने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। पोदीने की १५-२०हरी पत्तियों को १ गिलास पानी में अच्छी तरह उबालकर उस पानी से गरारे करने से भी मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है।
16. पोदीने के पत्तों को पीसकर किसी जहरीले कीड़े के द्वारा काटे हुए अंग (भाग) पर लगाएं और पत्तों का रस २-२ चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार रोगी को पिलाने से आराम मिलता है।
17. पोदीने की पत्तियों को पीसकर गाढ़े लेप को सोने से पहले चेहरे पर अच्छी तरह से मल लें। सुबह चेहरा गर्म पानी से धो लें। इस लेप को रोजाना लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे, झांइयां और फुंसियां दूर हो जाती हैं और चेहरे पर निखार आ जाता है।
18. .बेहोश व्यक्ति को पुदीना की खुशबू सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है। पोदीने के पत्तों को मसलकर सुंघाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
19.  कप पानी में पुदीने की चटनी बनाकर, थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के कारण पेट में होने वाली जलन को शांत होती है।
20. ग्राम पोदीने के रस में हींग, जीरा, कालीमिर्च और थोड़ा सा नमक डालकर गर्म करके पीने से पेट के दर्द और अरुचि (भोजन की इच्छा न होना) रोग ठीक हो जाते हैं।
21. पोदीने की पत्तियों और कालीमिर्च को मिलाकर गर्म-गर्म चाय रोगी को पिलाने से सर्दी-खांसी, जुकाम, दमा और बुखार में आराम मिलता है।
22.आधा कप पोदीने का रस दिन में २ बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक पिलाते रहने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
23. ४-६ मुनक्का के साथ १० पोदीने की पत्तियां सुबह-शाम खाने के बाद नियमित रूप से चबाते रहने से बदहजमी में आराम मिलेगा।
24. पुदीना के पत्तों का अधिक मात्रा में बार-बार सेवन करने से माहवारी शुरू हो जाती है। इसे चाहे जिस रूप में सेवन किया जाए या इसके पत्तों को पीस-घोलकर या मिश्री मिलाकर शर्बत के रूप में सेवन करना चाहिए।
25. पुदीने की चटनी कुछ दिनों तक लगातार खाने से मासिक-धर्म नियमित हो जाता है।
26. कान के अंदर अगर बहुत ही बारीक कीड़ा चला जाये तो कान में पुदीने का रस डालने से कान का कीड़ा समाप्त हो जाता है।कान में दर्द हो तो पोदीना का रस डालें या हरी मकोय का रस कान में डालना चाहिए।
27. पुदीना का रस लगभग ३० मिलीलीटर प्रत्येक ६ घंटे पर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से जी का मिचलाना बंद हो जाता है।
28. पुदीना को पानी से पीसकर घोल बनाकर दिन में 3 से ४ बार कुल्ला करने से मुंह से दुर्गंध व अन्य रोग भी ठीक होते हैं।
29.हिचकी:
पोदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल (खोपरे) के साथ चबाकर खाने से हिचकी दूर होती है।
*पोदीने के पत्ते या नींबू को चूसने या पोदीने के पत्तों को शक्कर (चीनी) में मिलाकर चबाने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।
*पुदीना के सूखे और हरे पत्ते को शक्कर के साथ चबाने से हिचकी नहीं आती है।
*२ मिलीलीटर हरे पुदीने के रस में २ ग्राम चीनी मिलाकर चबाने से हिचकी मिट जाती है।
*पुदीने के पत्ते को मिश्री के साथ खाने से हिचकी मिट जाती है।
*पुदीना के रस को हिचकी में पीने से लाभ होता है।
*हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसें। पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर हर दो घंटे में चबाने से हिचकी में फायदा होता है।
*1 चम्मच पुदीने का रस, 1 चम्मच नींबू का रस और 1 चम्मच शक्कर आदि तीनों को एक साथ मिलाकर पीने से हिचकी नहीं आती है।
30. पोदीना १० या २० ग्राम को २०० मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।
31. सिर पर हरे पोदीने का रस निकालकर लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है।
32.हैजा:
पोदीने का रस पीने से हैजा, खांसी, वमन (उल्टी) और अतिसार (दस्त) के रोग में लाभ होता है। इससे पेट में से गैस और कीड़े भी समाप्त हो जाते हैं।
*हैजा होने पर पोदीना, प्याज और नींबू का रस मिलाकर रोगी को देने से लाभ मिलता है।
*किसी व्यक्ति को हैजा होने पर उस व्यक्ति को प्याज का रस पिलाने से हैजे के रोग में आराम आता है।
२५ पुदीने की पत्तियां, ५ कालीमिर्च, काला-नमक २ चुटकी, २ भुनी हुई इलायची, 1 चोई इमली पकी। इन सब चीजों में पानी डालकर चटनी बना लें। इस चटनी को बार बार रोगी को चाटने के लिए दें।
*पोदीना की ३० पत्तियां, कालीमिर्च के दाने 3 नग, कालानमक 1 ग्राम, भुनी हुई २ छोटी इलायची, कच्ची अथवा पकी इमली 1 ग्राम इन सबको पानी के साथ पीसकर चटनी-सी बना लें। यह चटनी हैजे के रोगी को चटाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त तथा प्यास आदि विकार दूर हो जाते हैं।
*10-10 मिलीलीटर पोदीने, प्याज और नींबू का रस मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोगी को पिलाने से हैजे के रोग में बहुत लाभ होता है। इससे वमन (उल्टी) भी जल्दी बंद हो जाती है।
33. पोदीना, तुलसी, कालीमिर्च और अदरक का काढ़ा पीने से वायु रोग (वात रोग) दूर होता है और भूख भी बहुत लगती है।
34. पुदीने को पीसकर प्राप्त रस को 1 चम्मच की मात्रा में लेकर 1 कप पानी में डालकर पीने से दस्त कम हो जाते हैं.

बिदारीकन्द के औषधीय उपयोग 

35. हरा पोदीना, सूखा धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर चबायें और लार को नीचे टपकायें। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
36. पोदीने को सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसे स्त्री को संभोग (सहवास) करने से पहले लगभग 10 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ पिलाने से स्त्री का गर्भ नहीं ठहरता हैं। ध्यान रहे कि जब गर्भाधान अपेक्षित हो तो इस चूर्ण का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
37.वमन (उल्टी):
४ पोदीने के पत्ते और २ आम के पत्तों को लेकर 1 कप पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब उबलता हुआ पानी आधा बाकी रह जाए तो उस पानी में मिश्री डालकर काढ़े की तरह पीने से उल्टी ठीक हो जाती है।
*६ मिलीलीटर पोदीने का रस और लगभग लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक मिलाकर पीस लें इसे ताजे पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
*अगर पेट के खराब होने की वजह से छाती भारी-भारी लग रही हो और बेचैनी के कारण उल्टी हो रही हो तो 1 चम्मच पुदीने के रस को पानी के साथ पिलाने से लाभ होता है।
*२-२ ग्राम पोदीना, छोटी पीपल और छोटी इलायची को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
*10 बूंद पुदीने के रस को पानी में मिलाकर उसमें शक्कर डालकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
*पुदीना के पत्तों का शर्बत दिन में कई बार पीने से उल्टी और जी मिचलाना (उबकाई) आदि रोग दूर होते हैं।
*पोदीने का रस और नींबू के रस को बराबर मात्रा में दिन में 1 चम्मच की मात्रा में ३-४ बार रोगी को पिलाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
*पोदीना को नींबू के साथ देने से उल्टी आना बंद हो जाती है। आधा कप पोदीना का रस २-२ घण्टे के अंतराल में पिलाते रहने से लाभ उल्टी, दस्त और हैजा में मिलता है।
38. पोदीना और इमली को पीसकर उसमें सेंधानमक या शहद मिलाकर खाने से खट्टी डकारे और उल्टी आना शांत हो जाती है।
39.चौथाई कप पोदीना का रस इतने ही पानी में मिलाकर रोजाना 3 बार पीने से खांसी, जुकाम, कफ-दमा व मंदाग्नि में लाभ होता है।
40. .जुकाम:
पोदीना, कालीमिर्च के पांच दाने और नमक इच्छानुसार डालकर चाय की भांति उबालकर रोजाना तीन बार पीने से जुकाम, खांसी और मामूली ज्वर में लाभ मिलता है।
पोदीने के रस की बूंदों को नाक में डालने से पीनस (जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
पोदीने की चाय बनाकर उसके अंदर थोड़ा-सा नमक डालकर पीने से खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है।
पोदीने के रस की 1-2 बूंदे नाक में डालने से पीनस (जुकाम) रोग नष्ट हो जाता है।
41..चोट लग जाने से रक्त जमा हो जाने (गुठली-सी बन जाने पर) पुदीना का अर्क (रस) पीने से गुठली पिघल जाती है।पोदीने का रस पिलाने से जमा हुआ खून टूटकर बिखर जाता है।सूखा पोदीना पीसकर फंकी लेने से खून का जमाव बिखर जाता है।
*२० हरे पुदीना की पत्तियां, ५ ग्राम जीरा और थोड़ी-सी हींग, कालीमिर्च के 10 दाने, चुटकीभर नमक को मिलाकर चटनी बनाकर 1 गिलास पानी में उबालें जब पानी आधा गिलास शेष रह जाए, तो छानकर पीने से अपच में लाभ होता है।
*पुदीने के पत्तों को पीसकर पोटली बनाकर जख्म पर बांधने से घाव के कीड़े मर जाते हैं।
42. पोदीने के रस को मुल्तानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे की झांइयां समाप्त हो जाती हैं और चेहरे की चमक बढ जाती है।
*दाद:शरीर के किसी भाग में दाद होने पर उस भाग पर पोदीने के रस को 1 दिन में २-३बार दाद पर लगाने से लाभ मिलता है।
43. .बुखार-
पुदीना और तुलसी का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आने वाला बुखार रुक जाता है।
पोदीने और अदरक को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें, फिर इसे छानकर दिन में २ बार पीने से बुखार ठीक हो जाता है। प्रतिश्याय (जुकाम) में भी इससे बहुत लाभ होता है।
पुदीना के पत्तों और मिश्री को मिलाकर शर्बत बनाकर बार-बार पीने से कफ के साथ-साथ बुखार में आराम मिलता है।
44. चेहरे की त्वचा अधिक तैलीय होने पर रोजाना पोदीने का रस रूई के साथ चेहरे पर लगाने से त्वचा का तैलीयपन कम होता है और चेहरे का सौंदर्य भी बढ़ता है।
45. पुदीने में विटामिन-ई पाया जाता है, जो शरीर की शिथिलता (कमजोरी) और वृद्धावस्था (बुढ़ापे) को आने से रोकता है। इसके सेवन करने से नसे भी मजबूत होती हैं।
46. पुदीना चबाकर खाने से दांतों के बीच छिपे भोजन के कण दूर होते हैं और मुंह की सफाई भी हो जाती है।
47. .अफारा (गैस का बनना):
पोदीना के ५ मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर सेवन कराने से आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।
पोदीने का रस ५० मिलीलीटर, मिश्री ५ ग्राम और २ ग्राम यवक्षार मिलाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) दूर हो जाता है।
पोदीने के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से अफारा में लाभ होता है।
48.पोदीना का ताजा रस शहद के साथ सेवन करने से आंतों की खराबी और पेट के रोग मिटते हैं। आंतों की बीमारी से पीड़ित रोगियों के लिए पोदीने के ताजे रस का सेवन करना बहुत ही लाभकारी है।
49. पोदीना और अदरक का रस या काढ़ा पीने से शीतज्वर मिट जाता है। इससे पसीना निकल आता है और हर प्रकार का ज्वर मिट जाता हैं। गैस और जुकाम के रोग में भी यह काढ़ा बहुत लाभ पहुंचाता है।
50. पोदीना, राम तुलसी (छोटे और हरे पत्तों वाली तुलसी) और श्याम तुलसी (काले पत्तों वाली तुलसी) का रस निकालकर उसमें थोड़ा-सा शक्कर (चीनी) मिलाकर सेवन करने से टायफाइड (मोतीझारा) के रोग में लाभ होता है।
51.पोदीना का ताजा रस शहद के साथ मिलाकर हर 1 घंटे के बाद देने से न्युमोनिया (त्रिदोषज्वर-वात, पित्त और कफ) से होने वाले अनेक विकारों (बीमारियों) की रोकथाम करता है और बुखार को समाप्त करता है।
52. पुदीना (Mint) एंटीऑक्सिडेंट्स और फ़िटेन्यूयरिक्स से भरपूर है और पेट के लिए अद्भुत तरीके से काम करता हैं। पुदीने में मौजूद मेथेनोल पाचन के लिए जरूरी एंजाईम्स को भोजन पचाने में मदद करता है। पुदीना (Mint) पेट की चिकनी मांसपेशियों को आराम पहुंचाता हैं और अपच और ऐंठन की संभावना को कम करता हैं। इसके अलावा पेट की अम्लता को कम करने और पेट की जलन को समाप्त करने के लिए भी पुदीने(Mint) का इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिक स्वास्थय लाभ के लिए ग्रीन-टी में कुछ पुदीने(Mint) की पत्तिया डाल कर इस्तेमाल करें।

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