9.3.15

टी.बी (क्षय रोग). के सरल उपचार : TB (tuberculosis) :simple treatment






     यक्ष्मा रोग बेहद  संक्रामक  श्वसन  पथ का रोग है इसे तपेदिक अथवा  क्षय रोग के नाम से भी जाना जाता है| यह mycobacterium tuberculosis नामक  बेक्टीरिया से उत्पन्न होने वाला रोग है| वैसे तो यह रोग  फेफड़े  पर हमला करता है  लेकिन  रक्त संचरण  के जरिये  यह रोग शरीर के अन्य अंगों  को भी अपनी  लपेट  में ले सकता है|  रोगी के निरंतर  संपर्क में रहने वाले व्यक्ति  को भी  यह रोग  आक्रान्त कर  सकता है| जिसकी  प्रतिरक्षा प्रणाली  कमजोर होती है  वह सहज ही  रोग की चपेट में आ  सकता है|


   लक्षणों की बात करें तो थकावट  इसका प्रमुख लक्षण है| खांसी बनी रहती है| बीमारी ज्यादा बढ़ जाने पर बलगन में खून के रेशे भी   आते हैं| सांस लेने में दिक्कत आने लगती है|  छोटी सांस  इसका एक लक्षण है| बुखार बना रहता है या बार बार आता रहता है| वजन कम होंने लगता है| रात को अधिक पसीना आता है|छाती ,गुर्दे और पीठ में दर्द  की अनुभूति  होती है|  टीबी  के लिए उचित  आधुनिक चिकित्सा  जरूरी है.

   मैं इस रोग में  उपयोगी पांच   उपचार दे रहा हूँ |ये सहायक उपचार हैं और रोग को  काबू में लेने के लिए  लाभदायक हैं-




१) लहसुन- में सल्फुरिक  एसिड  होता है जो  टीबी के जीवाणु को खत्म करता है| 

लहसुन का एलीसिन  तत्व टीबी के जीवाणु की ग्रोथ को  बाधित करता है| एक कप दूध में ४ कप पानी मिलाएं\ इसमें  ५ लहसुन की कुली पीसकर डालें  और  उबालें  जब तरल  चौथाई भाग शेष रहे तो आंच से उतार् लें  और ठंडा होने पर  पीलें| ऐसा दिन में तीन बार करना है|




   दूसरा उपचार यह कि  एक गिलास गरम दूध में लहसुन के रस की दस  बूँदें डालें| रात को सोते  वक्त पीएं| 








२)  केला - पौषक तात्वि, से परिपूर्ण  फल है| केला शरीर के  इम्यून सिस्टम  को  मजबूत बनाता है\ एक पका कला लें|मसलकर  इसमें एक कप नारियल पानी ,आधा कप दही और एक चम्मच शहद मिलाएं| दिन में दो बार लेना कर्त्तव्य है|
  कच्चे केले का जूस  एक गिलास  मात्रा  में  रोज सेवन करें| 








३) सहजन  की फली - सहजन की फली में  जीवाणु नाशक और  सूजन नाशक तत्व होते हैं|  टीबी के जीवाणु   से लड़ने में मदद करता है| मुट्ठी भर  सहजन के पत्ते  एक गिलास पानी में उबालें | नमक,काली मिर्च और निम्बू का रस मिलाएं|  रोज सुबह  खाली पेट सेवन करें|  सहजन की फलियाँ उबालकर लेने से फेफड़े को जीवाणु मुक्त करने में सहायता मिलती है| 





४) आंवला  अपने   सूजन विरोधी एवं  जीवाणु नाशक गुणों के लिए प्रसिद्ध  है| आंवला के पौषक तत्त्व  शरीर की प्रक्रियाओं को सुचारू चलाने की ताकत देते है|  चार या पांच आंवले  के बीज रहित कर लें  जूसर में जूस निकालें|  यह जूस सुबह खाली पेट लेना टीबी रोगी के लिए अमृत  तुल्य है\ कच्चा  आंवला या चूर्ण भी लाभदायक है|








५)  संतरा - फेफड़े पर संतरे का क्षारीय प्रभाव  लाभकारी है| यह इम्यून सिस्टम को बल देने वाला है| कफ सारक  है याने कफ को आसानी से बाहर निकालने में सहायता कारक है| एक गिलास संतरे के रस में  चुटकी भर नमक ,एक  बड़ा  चम्मच  शहद  अच्छी तरह मिलाएं\  सुबह और शाम  पीएं| 






६) तपेदिक का योग - आक का दूध १ तोला (10 ग्राम ), हल्दी बढ़िया १५ तोले(150 ग्राम ) - दोनों को एक 

साथ खूब खरल करें । खरल करते करते बारीक चूर्ण बन जायेगा । मात्रा - दो रत्ती से चार रत्ती(1/4 ग्राम से 

1/2 ग्राम तक )तक मधु (शहद) के साथ दिन में तीन-चार बार रोगी को देवें । तपेदिक के साथी ज्वर खांसी, 

फेफड़ों से कफ में रक्त (खून) आदि आना सब एक दो मास के सेवन से नष्ट हो जाते हैं और रोगी भला चंगा 

 हो जाता है|

हो जायेगा । इस औषध से वे निराश हताश रोगी भी अच्छे स्वस्थ हो जाते हैं जिन्हें डाक्टर अस्पताल से 

असाध्य कहकर निकाल देते हैं । बहुत ही अच्छी औषध है
७) प्रयोग शाला  में किए गए अध्ययनों में यह बात सामने आई कि विटामिन सी शरीर में कुछ ऐसे तत्वों के उत्पादन को सक्रिय करता है जो टीबी को खत्म करती हैं.




ये तत्व फ्री रैडिकल्स के नाम से जाने जाते हैं और यह t b  के उस स्वरूप में भी कारगर होता है जब पारंपरिक antibiotics  दवाएं भी नाकाम हो जाती हैं.विटामिन सी की  ५०० एम जी  की एक गोली दिन में तीन बार लेना चाहिये|

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