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17.8.19

शतावरी का चूर्ण पुरुषों के लिए भी कायाकल्प करने वाला है-डॉ॰आलोक



शतावरी आयुर्वेद गुणों से भरपूर महा औषधि ।
शतावरी एक चमत्कारी औषधि है जिसका उपयोग कई रोगों के इलाज में किया जाता है। शतावरी की खूबसूरत लता के रूप में घरों और बंगलों में भी लगाई जाती है। यह पौधा झाड़ीनुमा होता है, जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं। इसके पत्ते हरे रंग के धागे जैसे सोया सब्जी की तरह खूबसूरत, उठल में शेर के नखों की तरह मुड़े हुए मजबूत कांटे, जड़ों में सैकड़ों की संख्या में हरी भूरी जड़ें जो इसका प्रमुख गुणकारी अंग शतावरी है मिलती है। इन जड़ों को ही ऊपर का पतला छिलका उतार सुखा कर औषधि रूप में प्रयोग करते हैं।
आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार , शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है । इसे शुक्रजनन, शीतल , मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है । महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक ( चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है । आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं।शतावरी आजमाएं और सेक्स लाइफ को स्पाइसी बनाएं। शतावरी एक प्रचीन जड़ी बूटी है। शतावरी चूर्ण के फायदे महिलाओं और पुरुषों के लिए होते हैं। लेकिन आज हम शतावरी चूर्ण के फायदे केवल पुरुषों के लिए क्‍या हैं यह जानेगें। पुरुषों के लिए शतावरी चूर्ण का उपयोग सदियों से प्रजनन समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा रहा है। शतावरी चूर्ण के लाभ पुरुषों के शरीर में हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में सहायक होते हैं। ऐसा माना जाता है कि शतावरी चूर्ण में यौन उत्‍तेजक और यौन क्षमता बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसके अलावा भी शतावरी चूर्ण का इस्‍तेमाल कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है। पुरुषों के लिए शतावरी चूर्ण के लाभ वीर्य बढ़ाने, मधुमेह को रोकने, हृदय को स्‍वस्‍थ रखने, तनाव को कम करने आदि में होते है।



भारत, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और चीन जैसे देशों में उत्पन्न होने वाली, शतावरी को अक्सर यौन शक्ति को बढ़ाने और बनाए रखने की सिद्ध क्षमता के कारण महान आयुर्वेदिक औषधी के रूप में जाना जाता है। अक्सर महिलाओं पर इसके जबरदस्त प्रभाव के लिए सराहना मिली है, लेकिन पुरुषों के लिए शतावरी भी बेहद फायदेमंद है।

शतावरी जड़ी बूटी के पाउडर को ही शतावरी चूर्ण के नाम से जाना जाता है। शतावरी को सौ रोगों की दवा कहा जाता है। शतावरी का वैज्ञानिक नाम एस्‍पैरगस रेसमोसस  है। शतावरी को महिलाओं के लिए चमत्‍कारिक जड़ी बूटी कहा जाता है। ल‍ेकिन यह जड़ी बूटी पुरुषों के लिए भी बहुत ही लाभकारी होती है। नियमित रूप से उपभोग करने के दौरान यह पुरुषों की शारीरिक क्षमता को बढ़ाने और कई प्रकार की गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को कम करने में सहायक होती है।
शतावरी का उपयोग सदियों से पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। जब नियमित रूप से शतावरी को लिया जाता है, तो यह जड़ी बूटी यौन उत्तेजना और इरेक्शन को बढ़ाती है। कई तरह के यौन रोग से पीड़ित होने का दावा करने वाले कई पुरुषों ने दैनिक आधार पर शतावरी लेते समय लगातार सकारात्मक प्रभाव की सूचना दी है।
इस शक्तिशाली जड़ी बूटी को आहार में शामिल करने पर नपुंसकता के मामलों में काफी कमी आई है और यौन स्वास्थ्य और स्टेमिना में वृद्धि हुई है। परंपरागत रूप से, शक्तिशाली जड़ी बूटी को सत्व (Sattva) की सकारात्मकता और उपचार शक्ति बढ़ाने के लिए जाना जाता है। जब इस क्षेत्र में संतुलन बहाल किया जाता है, तो भागीदारों के बीच प्यार महसूस होता है।
शतावरी लेने वाले पुरुषों में यौन अंगों को मजबूत करने और प्रजनन प्रणाली में सूजन को कम करने की जड़ी-बूटी की वजह से यौन ऊर्जा में वृद्धि देखी जाती है। शरीर पर इसके सकारात्मक प्रभाव पुरुषों में यौन क्षमता को बढ़ा सकते हैं जो पहले भी अपने पार्टनर के साथ अच्छा यौन प्रदर्शन करने पर जोर देते थे। शतावरी लेने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए भी दिखाया गया, शतावरी स्वाभाविक रूप से कामेच्छा में सुधार, जीवन शक्ति और पुरुषों द्वारा अनुभव की गई कामुक संवेदना को बढ़ाने के लिए काम करती है। बढ़ती उत्तेजना के अलावा, शतावरी को शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी दिखाया गया है जो प्रजनन प्रयासों में सहायता कर सकता है।
जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए शतावरी चूर्ण का सेवन करना एक प्रभावी घरेलू उपाय है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि शतावरी के चूर्ण में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर होते हैं। फाइबर की अच्‍छी मात्रा पाचन तंत्र को मजबूत करने के साथ ही आपके चयापचय को बढ़ाता है। इसके अलावा शतावरी चूर्ण का सेवन आपको अनावश्‍यक भूख से भी बचाता है। बार-बार भोजन करना भी मोटापे का प्रमुख कारण होता है। शतवारी के चूर्ण में वसा और कैलोरी दोनों की बहुत ही कम मात्रा में होते हैं। जो वजन कम करने में सहायक होते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल शतावरी चूर्ण का सेवन करने मात्र से आप अपना वजन कम कर सकते हैं। लेकिन नियमित व्‍यायाम और वजन कम करने वाले अन्‍य उपायों के साथ शतावरी चूर्ण का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
शतावरी जड़ी बूटी महिला और पुरुषों के लिए बहुत ही लाभकारी होती है। शतावरी चूर्ण के फायदे उन पुरुषों के लिए भी होते हैं जो मधुमेह रोगी हैं। मधुमेह और रक्‍तचाप संबंधी समस्‍याएं गुर्दे की क्षति का कारण बन सकती हैं। भारत में हुए एक पशू अध्‍ययन के अनुसार पता चलता है कि शातवरी का सेवन करने से किड़नी की क्षति को रोका जा सकता है। इसके अलावा नियमित रूप से शतावरी का सेवन करने पर शरीर में रक्‍त शर्करा और कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तरको भी निय‍ंत्रित किया जा सकता है। इस तरह से मधुमेह रोगी नियमित रूप से शतावरी चूर्ण का सेवन कर मधुमेह के लक्षणों को कम कर सकते हैं।
पाचन के लिए
शतावरी चूर्ण पुरुषों के लिए बहुत ही आवश्‍यक और फायदेमंद उत्‍पाद है। शतावरी के चूर्ण में बहुत से पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ उच्‍च मात्रा में होते हैं। शतावरी में आइसोफ्लेवोन्‍स, म्‍सूसिलेज और अल्‍कालॉइड होते हैं जो पाचन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा शतावरी का नियमित सेवन करने से इसके शीतलन प्रभाव पेट की परेशानियों को कम करने में सहायक होते हैं। इसमें मौजूद फाइबर की उच्‍च मात्रा पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखने के साथ ही चयापचय को भी बढ़ाने में सहायक होते हैं। यदि आप भी पाचन संबंधी समस्‍या से परेशान हैं तो शतावरी चूर्ण का सेवन करें। लेकिन यदि आप अन्‍य किसी गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या से भी ग्रसित हैं तो शतावरी चूर्ण का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से अनुमति लेना आवश्‍यक है।


पुरुषों को संक्रमण से बचाए

शतावरी के चुर्ण में प्राकृतिक एंटीबायोटिक होते हैं। जिसके कारण नियमित रूप से शतावरी चूर्ण का सेवन करने के फायदे संक्रमण के कारण होने वाली स्वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को रोकने में प्रभावी होते हैं। नियमित रूप से शतावरी चूर्ण का सेवन करने से दस्‍त, हैजा, पेचिश और स्‍टैफिओलोकस (Staphyoloccus) जैसी गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है। इसके अलावा शतावरी चूर्ण के औषधीय गुण प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में भी सहायक होते हैं। जिससे कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाया जा सकता है। ये फ्री रेडिकल्‍स शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं जिससे कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती है।
शतावरी के लाभ अल्‍सर में
कई अध्‍ययनों से पता चलता है कि शतावरी चूर्ण का उपयोग करने से पुरुषों को अल्‍सर जैसी समस्‍याओं से छुटकारा मिल सकता है। अल्‍सर एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट की सुरक्षात्‍मक परत टूट जाती है जिससे पेट के अंदूरी हिस्‍से एसिड के प्रभाव से क्षतिग्रस्‍त हो जाते हैं। इस प्रकार की स्थिति में शतावरी चूर्ण का सेवन करना पुरुषों के लिए फायदेमंद होता हे। 2006 में हुए एक पशु अध्‍ययन के अनुसार वैज्ञानिकों ने चूहों को शतावरी का नियमित सेवन कराया। जिसके परिणामस्‍वरूप हाइड्रोक्‍लोरिक एसिड का कम उत्‍पादन पाया गया। जिससे एैस्ट्रिक अल्‍सर के इलाज में मदद मिलती है। यदि आप या आपके आस-पास कोई व्‍यक्ति पेट के अल्‍सर से परेशान है तो उन्हें शतावरी चूर्ण का सेवन कराया जाना चाहिए।
बुखार दूर करे
प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत करने और वायरल संक्रमण को दूर करने की क्षमता शतावरी पाउडर में होती है। पुरुषों के लिए शतावरी चूर्ण के लाभ बुखार के लक्षणों को कम करने में भी सहायक होते हैं। नियमित रूप से सेवन करने के दौरान शतावरी का चूर्ण शरीर की सूजन और दर्द को नियंत्रित करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। शरीर में अधिक सूजन ऑटोइम्‍यून (autoimmune) विकारों का कारण बन सकता है। इसलिए शरीर से विषाक्‍तता को दूर करने के लिए शतावरी चूर्ण को अपने दैनिक आहार में शामिल करना फायदेमंद होता है। आप भी बार-बार आने वाली बुखार और अन्‍य वायरल संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए शतावरी चूर्ण का सेवन कर सकते हैं।
दर्द कम करे
शतावरी चूर्ण में पीड़ानाशक (analgesic) गुण होते हैं। जिसके कारण शारीरिक दर्द को कम करने के लिए शतावारी चूर्ण का सेवन फायदेमंद माना जाता है। शतावरी के चूर्ण में सैपोनिन, ट्राइटरपीन और अल्‍कालॉइड आदि की अच्‍छी मात्रा होती है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि शतावरी के ये दर्द निवारक गुण पुरुषों में तेज दर्द के लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसलिए अब यदि आपको सिर का दर्द हो तो इसके उपचार के लिए दर्दनाशक गोलियों का सेवन करने के बजाये शतावरी चूर्ण का सेवन करें। आप अपने दैनिक आहार में 3 से 6 मिलीग्राम को शामिल सिर दर्द जैसी समस्‍याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
तनाव को कम करे
जिन लोगों को अत्‍याधिक तनाव या अवसाद होता है उनके लिए शतावरी चूर्ण की दवा से कम नहीं है। अधिक मात्रा में तनाव होना न केवल आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है बल्कि यह शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक है। शतावारी चूर्ण का सेवन करने से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती मिलती है जिससे शरीर पर तनाव के हानिकारक प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा एस्‍पैरगस चूर्ण का सेवन करने से पुरुषों को अपना मूड बनाने में भी सहायक होती है जिससे तनाव को कम किया जा सकता है। यदि आप अधिक काम, शारीरिक थकान या अन्‍य कारणों से तनाव ग्रस्‍त हैं तो शतावरी चूर्ण का सेवन करें। यह तनाव को कम करने का सबसे अच्‍छा घरेलू उपाय है।
मूत्र संक्रमण के लिए
मूत्र विकार संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए भी शतावरी चूर्ण बहुत ही प्रभावी होता है। यदि आप युरिन संक्रमण (urinary tract infection,UTI) से ग्रसित हैं तो नियमित रूप से शतावरी चूर्ण का सेवन करें। शतावरी को एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में जाना जाता है। जो शरीर में पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है। जिससे मूत्र पथ में मौजूद संक्रामक बैक्‍टीरिया को पेशाब के द्वारा बाहर निकालने में मदद मिलती है। मूत्र वर्धक होने के कारण शतावरी चूर्ण के फायदे किड़नी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी अच्‍छे होते हैं। नियमित उपभोग करने के दौरान यह शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त नमक को भी पेशाब के साथ बाहर करने में सहायक होता है। इस तरह से मूत्र पथ संक्रमण रोगी के लिए भी शतावरी चूर्ण के फायदे होते हैं।
यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए
महिलाओं के लिए शतावरी चूर्ण के फायदे सभी जानते हैं। नियमित रूप से सेवन करने पर यह महिलाओं की प्रजनन प्रणाली को स्‍वस्‍थ रखती है। लेकिन शतावरी के फायदे पुरुषों के यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी लाभदायक होते हैं। औषधीय रूप से शतावरी चूर्ण का सेवन करने पर पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। शतावरी में ऐसे पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ मौजूद होते हैं जो शुक्राणुओं की संख्‍या और गुणवत्‍ता दोनों को बढ़ाते हैं। साथ ही कामोद्दीपक गुणों के कारण यह कामेच्‍छा में भी वृद्धि कर सकता है। यदि आपको भी सूजन और यौन कमजोरी जैसी कोई समस्‍या है तो अपने नियमित आहर में शतावरी चूर्ण को शामिल करें।


शतावरी चूर्ण कैसे बनाएं

पारंपरिक रूप से भारत में शतावरी की जड़ का उपयोग किया जाता है। बहुत से लोग शतावरी की ताजी जड़ों का उपयोग करते हैं जो वास्‍तव में अधिक फायदेमंद होती है। लेकिन उपलब्‍धता की कमी के कारण हर किसी व्‍यक्ति को हमेशा ताजी शतावरी की जड़े प्राप्‍त नहीं होती हैं। इसलिए शतावरी का चूर्ण एक अच्‍छा विकल्‍प होता है। आइए जाने शतावरी चूर्ण कैसे तैयार किया जा सकता है।
आप सबसे पहले शतावरी की ताजी जड़ों को लें और इन्‍हें अच्‍छी तरह से धो कर साफ कर लें। इसके बाद आप शतावरी को धूप में सूखने के लिए छोड़ दें। आप चाहें तो इसे छाये में भी सुखा सकते हैं। 3-4 दिनों के बाद जब शतावरी की जड़े पूरी तरह से सूख जाएं तब आप इन्हें कुचल लें और छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। इसके बाद इन टुकड़ों को किसी ब्‍लेंडर की मदद से पीसकर पाउडर तैयार करें। इस तरह से आप अपने घर में ही शतावरी चूर्ण तैयार कर सकते हैं। यदि आपको शतावरी की ताजी जड़ ना मिले तो आप बाजार से भी शतावरी चूर्ण को खरीद सकते हैं।
शतावरी चूर्ण का उपयोग कैसे करें
 
शतावरी चूर्ण का सेवन करने की कोई विशेष विधि नहीं है। आप अपनी सुविधा के अनुसार इसे कई प्रकार से सेवन कर सकते हैं। हालांकि जिन लोगों को शतावरी का चूर्ण प्राप्‍त नहीं हो पाता है वे शतावरी आधारित गोलियां और कैप्‍सूल आदि का भी सेवन कर सकते हैं। सामान्‍य रूप से आप शतावरी चूर्ण को दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आप 1 छोटा चम्‍मच शतावरी चूर्ण को 1 गिलास गर्म दूध के साथ मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें।
शतावरी चूर्ण का सेवन कैसे करें –
बहुत से लोगों के मन में यह आता है कि शतावरी चूर्ण का सेवन किस समय करना फायदेमंद है। साथ ही शतावरी चूर्ण का सेवन भोजन से पहले करना चाहिए।
शतावरी चूर्ण का सेवन भोजन के बाद किया जा सकाता है। इसके साथ ही शतावरी चूर्ण का सेवन करने के दौरान इस बात का ध्‍यान रखें कि खाली पेट इसका सेवन न करें। आप सुबह के नाश्‍ते के बाद गर्म दूध में शतावरी चूर्ण का सेवन कर सकते हैं।
शतावरी चूर्ण की खुराक –
सामान्‍य रूप से शतावरी पाउडर का सेवन करने की अनुशंसित मात्रा 3 से 9 ग्राम प्रतिदिन है। आप नियमित रूप से दिन में 2 बार गर्म दूध के साथ शतावरी चूर्ण का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा आप शतावरी चूर्ण को शहद और पानी के साथ भी ले सकते हैं।
जो लोग शतावरी चूर्ण का सेवन करना शुरु कर रहे हैं उन्हें प्रतिदन ¼ से ½ चम्‍मच पाउडर का सेवन करना चाहिए।
जो लोग नियमित रूप से कुछ समय पहले से शतावरी चूर्ण का सेवन कर रहे हैं उनके लिए अनुशंसित मात्रा 2 चम्‍मच प्रतिदिन है।

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