28.9.23

शतावर जडी बूटी के फायदे मर्दों और औरतों के लिए

 


 



  शतावरी एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जिसका उपयोग सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है। इसे शतावर नाम से भी जानते हैं। खासकर महिलाओं के लिए यह बहुत ही अच्छा होता है। शतावरी कई तरह के होते हैं, जिनमें हरी, सफ़ेद, बैगनी तीन रंगों की शतावरी बहुत ही लोकप्रिय है। इसकी लताएं और झाड़ियां होती हैं, जो लगातार बढ़ती जाती हैं और फैलती जाती हैं। शतावरी का जड़ या फिर पाउडर के रूप में सबसे ज्यादा उपयोग होता है। इसके जड़ और पत्तियां सबसे ज्यादा उपयोग में आते हैं। इसे शतमूली और सतमूली भी कहा जाता है।
   शतावरी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, डायटरी फाइबर, थियामिन, फोलेट, नियासिन, विटामिन के, विटामिन ई, विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, मैंगनीज, जिंक, सेलेनियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को कई बीमारियों से दूर रखने में मददगार हो सकते हैं. शतावरी के सेवन से इम्यूनिटी को मजबूत बनाया जा सकता है. बहुत से लोगों का मानना है कि ये सिर्फ महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है तो ऐसा नहीं है ये सभी के लिए गुणकारी मानी जाती है. शतावरी में पाए जाने वाले पोषक तत्व पाचन को बेहतर रखने में मददगार हो सकते हैं.

प्रेगनेंसी में मददगार

गर्भावस्था के दौरान भी शतावरी का प्रयोग किया जा सकता है। यह फोलेट से समृद्ध होती है, जो गर्भवती महिलाओं के शरीर में फोलेट की पूर्ति का काम कर सकती है। फोलेट एक जरूरी पोषक तत्व है, जो गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भ में पल रहे भ्रूण के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, कि इसके प्रतिदिन सेवन की मात्रा 5 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए

नींद  के लिए -

यदि आपको रात में नींद सही तरीके से नहीं आती तो शतावरी की जड़ का सेवन करें। इसके लिए आप इसके जड़ को किसी भी भोजन में मिलाकर पकाएं या खीर की तरह पका लें। इसमें गाय का घी भी मिला दें। इससे सारी चिंता और तनाव दूर होगी और आपको रात में गहरी नींद आएगी।

पीरियड्स के दिनों में-

पीरियड्स के दिनों में अक्सर महिलाएं दर्द, ऐंठन से परेशान रहती हैं। इसके सेवन से दर्द से छुटकारा मिलेगा। यदि आपका वजन बढ़ रहा है, तो भी यह फायदेमंद है।

मधुमेह में उपयोगी

शतावरी के स्वास्थ्य संबंधी फायदे मधुमेह में भी देखने को मिल सकते हैं। एक एंटीडायबीटिक के रूप में शतावरी का प्रयोग लंबे समय से किया जा रहा है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, यह देखा गया कि शतावरी एंटी हाइपर ग्लाइसेमिक (खून में ग्लूकोज की मात्रा को कम करने की क्रिया) क्रिया को बढ़ाने का काम कर सकता है, जिससे मधुमेह के खतरे को रोकने में मदद मिल सकती है . शतावरी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी हेल्दी होती है। शतावरी की जड़ों के चूर्ण को दूध में डालें। इसमें थोड़ा सा चीनी मिलाएं और पी जाएं। डायबिटीज कंट्रोल में रहेगा।

स्तन में दूध की कमी- 

जिन महिलाओं को स्तन में दूध की कमी होती है, उन्हें भी इसके सेवन की सलाह दी जाती है ।इसलिए डिलीवरी के तुरंत बाद महिलाओं को शतावरी पिलाई जाती है या खिलाई जाती है, इससे उनके स्तन में दूध बनता है।डिलीवरी के बाद बच्चे को स्तनपान कराते समय दूध सही ढंग से नहीं आ रहा है, तो भी शतावरी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसकी जड़ों को धूप में सुखाकर चूर्ण बना लें या फिर बाजार से खरीद लें। इस चूर्ण को दिन में तीन-चार बार लेती रहें। दूध आने की मात्रा बढ़ जाएगी।

शतावरी की तासीर ठंडी होती है। यह जलन, पेट के अल्सर और बुखार को भी कम करने में सहायक है।

पेशाब करते समय खून आए

पेशाब करते समय खून आए, तो शतावरी का सेवन करें। पेशाब में खून आना बंद हो जाएगा। वैसे, इस समस्या को नजरअंदाज करना ठीक नहीं। यदि समस्या इसके बाद भी बनी रहती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

आंखों से जुड़ी समस्या -

शतावरी के जड़ को, अगर दूध में मिलाकर पिया जाए,तो इससे आंखों से जुड़ी परेशानियों से निजात मिलता है। इसके सेवन से रतौंधी में भी काफी आराम मिलता है।

पेट से संबंधित समस्या

अगर आपको पेट से संबंधित समस्या है, तो शहद के साथ शतावरी का सेवन सुबह सुबह खाली पेट करना चाहिए। इससे दस्त जैसी समस्या से भी छुटकारा मिलता है।

एंटी एजिंग

शतावरी में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं, इसलिए इसे एंटी एजिंग में भी कारगार साबित माना जाता है।

सर्दी-ज़ुकाम में 

सर्दी-ज़ुकाम में शतावरी का सेवन लाभकारी होता है। शतावरी की जड़ होता है, वह कफ को काटता है। सूखी खांसी होने पर या फिर गला बैठ जाने पर भी इसके काढ़े का सेवन करना चाहिए।
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27.9.23

सात जडी -बूटियों से हमेशा बनाये रखें यौवन Seven herbs to stay ever young

 



आयुर्वेद में जड़ी-बूटी का विशेष महत्व है. ऐसी कई जड़ी बूटियां हैं, जो आपको न सिर्फ स्वस्थ्य रखती हैं, बल्कि ताकतवर भी बनाती हैं.
आयुर्वेद के एक जाने माने चिकित्सक के अनुसार सप्ताह के ७ दिनों के लिए ७ आयुर्वेदिक जडी बूटियाँ बेहद उपयोगी साबित होती हैं |जानते हैं कौन सी हैं वे जडी बूटियाँ.

सोमवार को 'हल्दी'

 हल्दी को आयुर्वेद में निशा और हरिद्रा कहते हैं.
यह एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है, जो अनगिनत रोगों का शानदार इलाज है.
मसालों और उबटनों में यह विशेष प्रयोग की जाती है. यह त्वचा, लिवर, रक्त से जुड़ी समस्याओं को होने से यह रोकती है.
शरीर में अर्बुद (ट्यूमर) बनने से भी यह रोकती है. करक्यूमिन नामक एल्कलॉइड हल्दी का सबसे प्रभावी औषधीय तत्व है.
यह हमें अस्थमा, साइनोसाइटिस और खांसी से बचाती है.
एजिंग की समस्या जैसे त्वचा का लटकना, रिंकल्स और पिगमेंटेशन को भी यह खत्म करती है.
यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के साथ मेटाबॉलिज्म को ठीक करने का काम करती है और शरीर में जमा फैट्स को कम करती है.

मंगलवार को पुनर्नवा 

जड़ी बूटी का नाम ही इसका महत्व बताता है कि यह औषधि शरीर को फिर से नया कर देती है.
किडनी के रोगों की यह बेजोड़ दवाई है.
पथरी को निकालने में यह बहुत मददगार है.
लिवर के सभी रोगों में बेहद असरकारक है.
एनीमिया में भी यह बहुत असरकारी है.

बुधवार को दालचीनी

दालचीनी जुकाम तथा गले की खराश दूर करती है.
जोड़ों का दर्द इससे ठीक होता है
ब्लड प्यूरिफिकेशन करने के कारण यह त्वचा के रोगों में बहुत फायदेमंद है, विशेषकर पिम्पल्स में
अपच, खट्टी डकारें, एसिडिटी और गैस जैसी पेट की समस्‍या से आराम दिलाती है
यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है, इसलिए मोटे लोगों को इसका प्रयोग ज़रूर करना चाहिए
यह कोलेस्ट्रॉल को कम करती है और ब्लॉकेज को हटाती है.
यह दिल के मरीजों के लिए लाभदायक है और आम लोगों को दिल की बीमारियों से बचाती है

गुरुवार को अश्वगंधा 

अश्वगंधा एंटीओक्सीडेंट का एक अच्छा श्रोत है.
अश्वगंधा थायराइड ग्रंथि के कार्यों को नियमित करती है, इसलिए यह थायराइड की समस्या से बचाती है
इसमें एंटी-स्ट्रेस तत्व भी होते हैं, जो तनावमुक्त करने में मदद करते हैं
अश्वगंधा कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन के उत्पादन को कम कर करता है जिससे महिलाओं में एजिंग की समस्या कम हो जाती है
इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण होता हैं, जो शरीर मे होने वाले इंफेक्शन को कम करता है.
अश्वगंधा महिलाओं में हॉर्मोंन्स के सिक्रिशन को रेगुलेट करता है

शुक्रवार को गुडूची

आयुर्वेद के ग्रंथों में इसे अमृता कहा गया है, क्योंकि यह शरीर के लिए अमृत के समान है
इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है
यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाटी है
यह ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू से बचाने में बहुत कारगर है
गिलोय एक एडाप्टोजेनिक हर्ब है, जो मानसिक दवाब और चिंता को दूर करने के लिए उपयोगी है
यह ब्लड में यूरिक एसिड को बढ़ने नहीं देती, इसलिए गाउट में बहुत लाभकारी है.

शनिवार को तुलसी

धार्मिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है
सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है
यह भी एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है, इसलिए बुढ़ापे से रक्षा करती है
यह ब्लड के पीएच को एसिडिक नहीं होने देती, जिससे ब्लॉकेज नहीं बनते, ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है.
तुलसी शरीर में ट्यूमर को बनने से रोकती है, इसलिए कैंसर से बचाव करती है
एंटीमाइक्रोबियल, एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण यह शरीर की इंफेक्शन से रक्षा करती है

रविवार को ब्राह्मी

कैसे करें सेवन
इन 7 जड़ी बूटियों का चूर्ण बनाकर आप रख सकते हैं या इसके रेडीमेड पाउडर आयुर्वेद की शॉप पर मिल जाएंगे. कई कंपनियां इन जड़ी बूटियों के कैप्सूल और टैबलेट बनाती हैं, जिन्हें मेडिकल स्टोर से आप ले सकते हैं. उन्होंने बताया कि खाली पेट आप आधा चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं, जबकि टैबलेट और कैप्सूल जो कि 500 एमजी के होते हैं, उन्हें रोज एक खा सकते हैं.



26.9.23

गठिया gout ,संधिवात ,कमरदर्द, जोड़ों के दर्द की औषधि के बारे में बताओ

 




जैसे-जैसे इंसान की जिंदगी आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे वो कई समस्याओं का भी शिकार होते चला जाता है। वहीं, आज के दौर में तो लगभग हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है। इसके पीछे कहीं न कहीं हमारा खानपान, हमारी खराब दिनचर्या और हमारा अनुशासन का पालन न करना शामिल है। न तो लोग समय पर खाना खाते हैं और न ही छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान देते हैं, जो आगे चलकर विकराल रूप ले लेती है। जैसे- जोड़ों का दर्द। सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा भी काफी संख्या में इस बीमारी से ग्रसित हैं। 

  आयुर्वेद में बहुत सी वात व्याधियों का वर्णन है | इनमे से एक आमवात है जिसे हम गठिया रोग भी कह सकते है | आमवात में पुरे शरीर की संधियों में तीव्र पीड़ा होती है साथ ही संधियों में सुजन भी रहती है | आमवात दो शब्दों से मिलकर बना है – आम + वात | आम अर्थात अधपचा अन्न या एसिड और वात से तात्पर्य दूषित वायु | जब अधपचे अन्न से बने आम के साथ दूषित वायु मिलती है तो ये संधियों में अपना आश्रय बना लेती है और आगे चल कर संधिशोथ  व्याधि का रूप ले लेती जिसे आयुर्वेद में आमवात और बोलचाल की भाषा में गठिया रोग कहते हैं.
चरक संहिता में भी आमवात विकार की अवधारणा का वर्णन मिलता है लेकिन आमवात रोग का विस्तृत वर्णन माधव निदान में मिलता है

आमवात के कारण


आयुर्वेद में विरुद्ध आहार को इसका मुख्य कारण माना है | मन्दाग्नि का मनुष्य जब स्वाद के विवश होकर स्निग्ध आहार का सेवन करता और तुरंत बाद व्याम या कोई शारीरिक श्रम करता है तो उसे आमवात होने की सम्भावना हो जाती है | रुक्ष , शीतल विषम आहार – विहार, अपोष्ण संधियों में कोई चोट, अत्यधिक् व्यायाम, रात्रि जागरण , शोक , भय , चिंता , अधारणीय वेगो को धारण करने से आदि शारीरिक और मानसिक वातवरणजन्य कारणों के कारण आमवात होता है |

आमवात के लिए कोई बाहरी कारण जिम्मेदार नहीं होता इसके लिए जिम्मेदार होता है हमारा खान-पान | विरुद्ध आहार के सेवन से शारीर में आम अर्थात यूरिक एसिड की अधिकता हो जाती है | साधारनतया हमारे शरीर में यूरिक एसिड बनता रहता है लेकिन वो मूत्र के साथ बाहर भी निकलता रहता है | जब अहितकर आहार और अनियमित दिनचर्या  के कारण यह शरीर से बाहर नहीं निकलता तो शरीर में इक्कठा होते रहता है और एक मात्रा से अधिक इक्कठा होने के बाद यह संधियों में पीड़ा देना शुरू कर देता है क्योकि यूरिक एसिड मुख्यतया संधियों में ही बनता है और इक्कठा होता है | इसलिए बढ़ा हुआ यूरिक एसिड ही आमवात का कारण बनता है |
आमवात में मुख्या तय संतुलित आहार -विहार का ध्यान रखे और यूरिक एसिड को बढ़ाने वाले भोजन का त्याग करे | अधिक से अधिक पानी पिए ताकि शरीर में बने हुए विजातीय तत्व मूत्र के साथ शारीर से बाहर निकलते रहे | संतुलित और सुपाच्य आहार के साथ वितामिन्न इ ,सी और भरपूर कैरोटिन युक्त भोजन को ग्रहण करे | अधिक वसा युक्त और तली हुई चीजो से परहेज रखे |

 आमवात की आयुर्वेदिक औषधियां -

अदरक

जोड़ों के दर्द में राहत पाने के लिए आप अदरक के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, अदरक वाली चाय पीने से भी आपको लाभ मिल सकता है। इसके अलावा आप अदरक को गर्म पानी में शहद और नींबू के साथ मिलाकर पी सकते हैं। अदरक में पाया जाने वाला एंटी इंफ्लेमेटरी कंपाउंड सूजन को कम करने में मदद करता है।

धूप लेना जरूरी

जोड़ों का दर्द मांसपेशियों और हड्डियों के कमजोर होने पर होता है। ऐसे में इससे बचने के लिए आपके लिए जरूरी है कि आप धूप ले सकते हैं, क्योंकि ये विटामिन-डी का सबसे अच्छा स्त्रोत है। ऐसा करने से आपकी हड्डियां मजबूत होने में मदद मिलेगी।

तुलसी

तुलसी में पाए जाने वाले एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी स्पास्मोडिक गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द में राहत दिलाने का काम करते हैं। आपको करना ये है कि रोजाना तीन से चार बार तुलसी की चाय का सेवन करना है। ऐसा करने से आपको जरूर लाभ मिल सकता है।

इन चीजों का कर सकते हैं सेवन

आपकी डाइट एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होनी चाहिए, जिसके लिए आप मछली, फल, जैतून का तेल, अखरोट, मेथी के दानों को पानी में भिगोकर खाएं, सब्जियां और टी का सेवन कर सकते हैं। ऐसी डाइट लेने से जोड़ों के दर्द में काफी आराम मिल सकता है।


जोड़ो के दर्द के लिए के लिए घरेलू उपाय

गर्म और ठंडा कंप्रेशन- 

 गर्म और ठंडा दोनों कंप्रेशन एक एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में काम करते हैं. गर्मी मांसपेशियों को आराम देती है. बेहतर परिणामों के लिए, आप गर्म पानी की बोतल या गर्म पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. घुटने की सूजन को कम करने के लिए आप बर्फ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. आप एक आइस क्यूब को एक कपड़े में लपेट कर प्रभावित हिस्से पर लगा सकते हैं.

हल्दी- 

 हल्दी एक जादुई मसाला है. इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं. इसमें एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. इसमें करक्यूमिन होता है जो हल्दी में पाया जाने वाला एक एंटी-इंफ्लेमेटरी रसायन है जिसमें बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. ये रूमेटाइड अर्थराइटिस को कम करने में मदद करती है. ये घुटने के दर्द के कारणों में से एक है. राहत के लिए आधा चम्मच पिसी हुई अदरक और हल्दी को एक कप पानी में 10 मिनट तक उबालें. छान लें, स्वादानुसार शहद डालें और इस चाय का सेवन दिन में दो बार कर सकते हैं.

 आमवात की औषध व्यवस्था 

गुगुल्ल प्रयोग –  सिंहनाद गुगुल्लू , योगराज गुगुल , कैशोर गुगुल , त्र्योंग्दशांग गुगुल्ल आदि |
भस्म प्रयोग –  गोदंती भस्म, वंग भस्म आदि |
रस प्रयोग –  महावातविध्वंसन रस, मल्लासिंदुर रस , समिर्पन्न्ग रस, वात्गुन्जकुश | संजीवनी वटी , रसोंनवटी, आम्वातादी वटी , चित्रकादी वटी , अग्नितुण्डी वटी आदि |
स्वेदन –  पत्रपिंड स्वेद, निर्गुन्द्यादी पत्र वाष्प |
सेक –  निर्गुन्डी , हरिद्रा और एरंडपत्र से पोटली बना कर सेक करे | 
लौह –  विदंगादी लौह, नवायस लौह , शिलाजीतत्वादी लौह, त्रिफलादी लौह |
अरिष्ट / आसव –  पुनर्नवा आसव , अम्रितारिष्ट , दशमूलारिष्ट आदि |
तेल / घृत ( स्थानिक प्रयोग ) –  एरंडस्नेह, सैन्धाव्स्नेह, प्रसारिणी तेल, सुष्ठी घृत आदि का स्थानिक प्रयोग क्वाथ प्रयोग   रस्नासप्तक , रास्नापंचक , दशमूल क्वाथ, पुनर्नवा कषाय आदि |
स्वरस – निर्गुन्डी, पुनर्नवा , रास्ना आदि का स्वरस |
चूर्ण प्रयोग –  अज्मोदादी चूर्ण, पंचकोल चूर्ण, शतपुष्पदी चूर्ण , चतुर्बिज चूर्ण |

घरेलू असरदार नुस्खे -

* अजवायन या नीम के तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा.
* पानी में एक मुट्ठी अजवायन और 1 बड़ा चम्मच नमक डालकर उबालें. उस पर जाली रखकर कपड़ा निचोड़कर तह करके गरम करें और उससे सेंक करें. दर्द दूर हो जाएगा.
* राई का लेप करने से भी हर तरह का दर्द दूर होता है.
* अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप को दर्द वाली जगह पर दें. देखते ही देखते दर्द छूमंतर हो जाएगा.
लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द छूमंतर हो जाता है, लेकिन इसे ज़्यादा देर तक लगाकर न रखें, वरना फफोले पड़ने का डर रहता है.
* कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है.
* विनेगर और जैतून के तेल को मिलाकर मालिश करें.
* कपड़े में 4-5 नींबू के टुकड़े बांधकर गरम तिल के तेल में थोड़ी देर डुबोएं. फिर उसे घुटनों पर लगाएं.
* राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.
* अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से राहत मिलेगी.
* सेंधा नमक को गुनगुने पानी में डालकर नहाएं.
* दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं. इससे जोड़ों पर मालिश करें.
* जोड़ों के दर्द में नीम के तेल की मालिश लाभदायक होती है.
* लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गर्म करके जोड़ों पर मालिश करें.
* सरसों के तेल में अजवायन और लहसुन गरम करके दर्दवाले भाग पर मालिश करें.
* अमरूद के पत्ते पीसकर दर्द वाले स्थान पर लगाएं. अमरूद के पत्ते पानी में उबालकर इस पानी से सिकाई करने से भी लाभ मिलता है.
* कांच की बॉटल में आधा लीटर तिल का तेल और 10 ग्राम कपूर मिलाकर धूप में रख दें. जब ये दोनों घुलकर एक हो जाएं, तो इस तेल से मालिश करें. जोड़ों के दर्द से आराम मिलेगा.
* लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गरम करें और इससे जोड़ों पर मालिश करें. बहुत लाभ होगा.
* दर्द से परेशान होने पर कपड़े को गरम करके जोड़ों पर सेंक कर करें. इससे बहुत आराम मिलता है.
* कनेर की पत्ती उबालकर पीस लें और मीठे तेल में मिलाकर लेप करें.
       परामर्श -
       

         संधिवात,कमरदर्द,गठिया
    साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बड़े अस्पताल के महंगे इलाज के बावजूद निराश रोगी इस औषधि से निरोग हुए हैं| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| 
    औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|

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गोखरू के औषधीय गुण ,गुर्दे के रोगों में फायदे





गोखरू एक बहुत ही गुणकारी एवं दिव्य जड़ी बूटी है | आयुर्वेद में गोखरू के पंचमूल का उपयोग करके बहुत सी प्रभावी औषधियां बनायी जाती हैं | मूत्र विकार, किडनी के रोग, शारीरिक क्षमता एवं पौरुष कामशक्ति बढाने के लिए गोखरू का उपयोग किया जाता है | गोखरू से बनने वाली कुछ प्रमुख औषधियां :-
गोक्षुरादी चूर्ण
गोखरू पाक
गोक्षुरादी क्वाथ
त्रिकंटादि क
गोखरू पाक बनाने की विधि, फायदे एवं उपयोग 
यह पौष्टिक एवं बलवर्धक औषधि है | प्रमेह, क्षय, मूत्र जनित रोग, शुक्रजनित शारीरिक कमजोरी एवं यौन शक्ति बढाने के लिए इसका सेवन करना चाहिए | आइये जानते हैं गोखरू पाक के घटक द्रव्यों के बारे में :-
गोखरू (चूर्ण किया हुवा) – 64 तोला
दूध – 256 तोला
लौंग, लौह भस्म, काली मीर्च
कपूर, सफ़ेद आक की जड़, कत्था
सफ़ेद जीरा, श्याह जीरा, हल्दी
आंवला, पीपल, नागकेशर
जायफल, जावित्री, अजवायन, खस
सोंठ, करंजफल की गिरी (सभी 1 तोला)
गो घृत – 32 तोला
चाशनी
गोखरू पाक बनाने के लिए इन सभी जड़ी बूटियों की आवश्यकता होती है |
गोक्षुर एक ताक़तवर जड़ी बूटी है एवं यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है | सर्दियों में गोखरू के लड्डू या गोखरू पाक का सेवन बहुत फायदेमंद रहता है | शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए यह बहुत ही कारगर औषधि है |
गोखरू का महीन चूर्ण बना लें |
इस चूर्ण को दूध में अच्छे से पका कर खोवा बना लें |
अब इस खोवे को गो घृत में भुन लें |
ध्यान रखें इसे धीमी आंच पर भुने |
अब अन्य सभी द्रव्यों का चूर्ण बना उन्हें मिला लें |
इस चूर्ण को चाशनी तैयार कर उसमें मिला देवें |
अब खोवा और चाशनी के मिश्रण को मिला लें |
इस तरह से उत्तम श्रेणी का गोखरू पाक तैयार हो जाता है |
अनुपान कैसे करें :-
गोखरू पाक को रोजाना 2- 3 चम्मच दूध या ठन्डे पानी के साथ सेवन करें या रोगानुसार अनुपान करें |
आइये जानते हैं गोखरू पाक के फायदे एवं उपयोग के बारे में |
अर्श एवं प्रमेह नाशक यह औषधि बहुत गुणकारी है | यह उत्तम बलवर्धक एवं पौष्टिक उत्पाद है | मूत्र विकारों में यह बहुत असरदार है | आइये जानते हैं इसके फायदे :-
अर्श रोग नाशक है |
क्षय रोग में बहुत फायदेमंद औषधि है |
मूत्र पिंड की सुजन को कम करता है |
बलवर्धक एवं पौष्टिक है |
प्रमेह रोग से उत्पन्न कमजोरी को दूर करता है |
वीर्य विकारों में इसका सेवन करने से बहुत लाभ होता है |
पौरुष यौन शक्ति बढाने के लिए इसका उपयोग करें |
गर्भाशय को सशक्त बनाता है |
गोखरू पाक शुक्र जनित दुर्बलता को दूर करता है |

किडनी स्टोन

गोखरू का सेवन करने से आप आसानी से किडनी के स्टोन से भी छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए 4 ग्राम गोखरू पाउडर में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करें। इसके बाद ऊपर से बकरी का दूध पी लें। इस उपाय के अलावा गोखुरू के पानी का सेवन करने से भी किडनी का स्टोन खत्म हो जाता है।

क्रिएटिनिन और यूरिया स्तर सुधारे –

 किडनी खराब हो जाने कारण शरीर में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण किडनी की कार्यक्षमता दर लगातार गिरती रहती है। ऐसे में क्रिएटिनिन के स्तर को कम करना बहुत जरुरी होता है। इसके लिए एलोपैथी उपचार में डायलिसिस का सहारा लिया है जबकि आयुर्वेद में आयुर्वेदिक औषधियों की मदद से ही इसके स्तर को कम किया जाता है। अगर किडनी रोगी अपने चिकित्सक की निगरानी में गोखरू के काढ़े का सेवन करें, तो जल्द ही उसका क्रिएटिनिन और यूरिया स्तर कम होने लगेगा। क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर बढ़ना किडनी खराब होने का आम संकेत है

डायबिटीज (Controls Diabetes)

शुगर की समस्या होने पर ब्लड शुगर लेवल अस्थिर हो सकता है, ऐसे में गोखरू का रोज़ाना सेवन फायदेमंद माना जाता है। इससे डायबिटीज का खतरा कम रहता है और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

एक्जिमा जैसे त्वचा रोग के लिए 

एक्‍जिमा की वजह से जब स्‍किन पर खुजली होने लगती है, ऐसे में गोखरू आपके काफी काम आ सकता है। एक्जिमा एक इंफ्लेमेटरी त्वचा की परेशानी है। गोखरू के फल में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो एक्जिमा के खतरे को कम कर सकते हैं।

पाचन शक्ति के लिए

खराब आहार से ना केवल पथरी जैसी बीमारियां होती है बल्कि यह पाचन संबंधित समस्याओं को भी बुलावा देता है। गोखरू का सेवन काढ़े के रूप में करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और खाना हज़म करना आसान हो जाता है। गोखरू का उपयोग बहुत ही फायदेमंद है।  

महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य में लाभदायक

PCOD महिलाओं में आम समस्या है। इसके उपचार के लिए वजन नियंत्रित रखना ज़रूरी होता है। गोखरू महिलाओं में पीसीओडी को ठीक करने में फायदेमंद माना जाता है। यह पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम करने में भी फायदेमंद माना जाता है। यह मेनोपॉज़ में भी लाभदायक होता है।

सूजन में राहत दिलाए –

किडनी खराब हो जाने पर शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है, जैसे – चेहरे और पैरों में। पैरों में आई सूजन के चलते रोगी को चलने-फिरने में काफी परेशानी होती है। ऐसे में अगर आप गोखरू के चूर्ण से बने काढ़े का सेवन करते हैं, तो आपको सूजन में जल्द राहत मिलेगी। किडनी खराब होने के इतर गोखरू और भी कई अन्य कारणों के चलते आने वाली सूजन में राहत दिलाता है।
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*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

*घुटनों के बीच गेप बढ़ना ग्रीस खत्म होना दर्द होने के उपचार

*प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि से मूत्रबाधा का 100%सफल इलाज

*किडनी की पथरी का अचूक हर्बल इलाज ,Kidney stone

*किडनी खराब :वृक्क अकर्मण्यता की अचूक हर्बल औषधि:Kidney Failure

*पित्ताशय की पथरी (Gallstones) का रामबाण हर्बल उपचार

*अश्वगंधा अनगिनत रोगों मे रामबाण: स्त्री-पुरुषों के गुप्त रोगों का समाधान

*गठिया,संधिवात के अनुभूत आयुर्वेदिक घरेलू उपचार // Gout, Arthritis Treatment

*स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ

*संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका के अचूक हर्बल उपचार

*गुर्दे खराब की रामबाण औषधि:Kidney failure medicine

*एलर्जी (चर्म रोग) की आयुर्वेदिक चिकित्सा.allergy

25.9.23

करंज कई बीमारियों में उपयोगी पेड़ karanj fayde






करंज (Millettia Pinnata) विशाल ,अनेक शाखाओं से युक्त छाया दार पेड़ है. इसकी ऊँचाई और चौडाई दोनों ही खूब होती हैं. इसके कारण ये घनी छाया देते हैं. ये अक्सर नदी, तालाबों के किनारे देखने को मिलते है. ये मुख्यरूप से आद्र भूमी पर पाए जाते हैं.

करंज का वृक्ष जंगलोँ मेँ होता है। इसकी छाया घनी और ठंडी होती है। करंज की फली लंबी होती है और इसमेँ लंबे व मोटे बीज होते हैँ।
करंज के विभिन्न नाम:
संस्कृत- करंज
हिन्दी- कंजा या कटजरंजा
लैटिन- पोनगेमियालेवा
अंग्रेजी- स्मघलिव्ड पोनगेमिया
गुजराती- कणझी
मराठी- करंज
बंगाली- डहरकरंज<>इस पर कांटे बहुत होते हैं. इनके बीजों का आवरण कौड़ी के समान सख्त होते हैं. कंटीले होने के कारण लोग इन्हें बाग़ और खेतों की मुंडेरों पर लगाते हैं.
इसके बीजों से तेल निकला जाता है. इसी का मुख्य प्रयोग होता है. इस का फल वात, पित्त, कफ, प्रमेह, दिमांगी रोग, को खतम करता है. इसका तेल योनीदोष, गुल्म, उदावर्त, खुजली, नेत्र रोग, घाव आदि में उपयोग होता है.

करंज के  औषधीय उपयोग:

treatment using karanj

करंज के फायदे और नुकसान ( karanj ke fayde aur nuksan ) : करंज औषधीय गुणों से भरपूर एक पौधा हैं, जो समस्त भारत में 1200 मीटर तक की ऊँचाई पर पाया जाता है। करंज पौधे का हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर होता है, जो कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में सहायक होता है।
करंज (Millettia Pinnata) विशाल ,अनेक शाखाओं से युक्त छाया दार पेड़ है. इसकी ऊँचाई और चौडाई दोनों ही खूब होती हैं. इसके कारण ये घनी छाया देते हैं. ये अक्सर नदी, तालाबों के किनारे देखने को मिलते है. ये मुख्यरूप से आद्र भूमी पर पाए जाते हैं.

करंज का वृक्ष जंगलोँ मेँ होता है। इसकी छाया घनी और ठंडी होती है। करंज की फली लंबी होती है और इसमेँ लंबे व मोटे बीज होते हैँ।
करंज के औषधीय गुणों के कारण, आयुर्वेद में करंज का इस्तेमाल कई बीमारियों के उपचार के लिए औषधि रूप में किया जाता है। इसके अलावा करंज बीजों से प्राप्त तेल का प्रयोग चर्म रोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
करंज के विभिन्न नाम:
संस्कृत- करंज
हिन्दी- कंजा या कटजरंजा
लैटिन- पोनगेमियालेवा
अंग्रेजी- स्मघलिव्ड पोनगेमिया
गुजराती- कणझी
मराठी- करंज
बंगाली- डहरकरंजइस पर कांटे बहुत होते हैं. इनके बीजों का आवरण कौड़ी के समान सख्त होते हैं. कंटीले होने के कारण लोग इन्हें बाग़ और खेतों की मुंडेरों पर लगाते हैं.
इसके बीजों से तेल निकला जाता है. इसी का मुख्य प्रयोग होता है. इस का फल वात, पित्त, कफ, प्रमेह, दिमांगी रोग, को खतम करता है. इसका तेल योनीदोष, गुल्म, उदावर्त, खुजली, नेत्र रोग, घाव आदि में उपयोग होता है.

करंज के औषधीय उपयोग:

treatment using karanj

*करंज में पाए जाने वाले औषधीय गुण, दांतों के दर्द को ठीक करने में सहायक होते है। इसके लिए आप करंज पंचांग को जलाकर भस्म बना लें और इसमें नमक मिलाकर दांतों और मसूड़ों पर रगड़े, यह दांत दर्द में आराम दिलाता है।
*कुक्कुर खांसी की समस्या को दूर करने के लिए 1-3 ग्राम करंज बीज के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटें। इसके अलावा उल्टी होने पर करंज के पत्तों से बने काढ़े का सेवन करें, यह उल्टी को रोकने में सहायक होता है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।
*करंज बीज के तेल से जोड़ों पर मालिश करने से गठिया में लाभ मिलता है। इसके अलावा आंखों के स्वास्थ्य के लिए करंज बीज के पेस्ट को दूध में पकाकर ठंडा कर लें। इसे छानकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों के रोगों में लाभ मिलता है।
*सोरायसिस के लक्षणों को कम करने के लिए भी करंज का उपयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए आप करंज के क्षार में अरंडी तेल मिलाकर लेप बनाए और इस लेप को सोरायसिस से प्रभावित हिस्सों पर लगाएं। इसके अलावा आप करंज तेल से मालिश भी कर सकते हैं, यह खुजली, सोरायसिस आदि त्वचा विकारों के लक्षणों को कम करता है।
*करंज के बीजों से बने तेल में पाए जाने वाले औषधीय गुण, गंजेपन की समस्या को दूर करने में सहायक होते है। इसके लिए आप करंज तेल से सिर की नियमित रूप से मालिश करें, यह गंजेपन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है।
*करंज की लकड़ी का सेवन करने से भोजन के प्रति अरुचि खत्म होती है और भूख बढ़ती है। इसके अलावा बार-बार पेशाब आने की समस्या को दूर करने के लिए आप करंज के फूलों से बने काढ़े का 10-15 मिली की मात्रा में सेवन करें। यह बार-बार पेशाब आने की समस्या को दूर करता है।
*बवासीर रोगियों के लिए भी करंज का उपयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए बवासीर रोगी करंज के कोमल पत्तों को पीसकर बवासीर के मस्सों में लगाएं। इससे खूनी बवासीर में लाभ होता है।
*पाचन स्वास्थ्य के लिए करंज का पानी पीना लाभकारी होता है। दरअसल करंज में पाए जाने वाले औषधीय गुण, पाचन में सुधार कर, पाचन तंत्र को स्वस्थ एवं मजबूत बनाए रखने के साथ पेट के रोगों को भी दूर करने में सहायक होते है। इसके लिए आप करंज के बीजों को फोड़कर रात को एक गिलास पानी में भिगो दें फिर सुबह खाली पेट पी लें। ऐसा नियमित करने से पेट के रोग में फायदा मिलता है।

करंज के नुकसान -

*करंज का अधिक मात्रा में सेवन मतली, उल्टी और पेट में दर्द जैसी समस्याओं का कारण बन सकता हैं।
*गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को करंज का सेवन करने से पहले डॉक्टर से राय लेनी चाहिए क्योंकि करंज का अधिक मात्रा में सेवन, गर्भपात का कारण बन सकता है।
*अगर कोई व्यक्ति किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन करता हैं, तो वह व्यक्ति करंज का सेवन करने से पहले, अपने डॉक्टर से सलाह लें।
*कुछ लोगों को करंज के सेवन से एलर्जी की समस्या हो सकती हैं इसलिए किसी भी व्यक्ति को करंज के सेवन से किसी भी प्रकार की एलर्जी होती हैं, तो वह व्यक्ति करंज का सेवन करने से बचें।
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*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

*घुटनों के बीच गेप बढ़ना ग्रीस खत्म होना दर्द होने के उपचार

*प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि से मूत्रबाधा का 100%सफल इलाज

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23.9.23

"डिप्रेशन से बाहर निकलें: नई उम्मीद, नई शुरुआत"



"डिप्रेशन से बाहर निकलें: नई उम्मीद, नई शुरुआत" विषय पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी और सुझाव यहाँ दिए जा रहे हैं -
  डिप्रेशन (अवसाद) एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, लेकिन यह उपचार योग्य है। सही जानकारी, सहायता और दृढ़ संकल्प के साथ, आप इस चुनौती से बाहर निकल सकते हैं और एक नई शुरुआत कर सकते हैं।
1. यह समझें कि आप अकेले नहीं हैं स्वीकार करें: 
पहला कदम यह स्वीकार करना है कि आपको मदद की ज़रूरत है। डिप्रेशन कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक मेडिकल स्थिति है।
बातचीत करें: 
अपने दोस्तों, परिवार या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से अपनी भावनाओं के बारे में बात करें। मन की बात साझा करने से बोझ हल्का होता है।
2. पेशेवर मदद लें (Seek Professional Help)
यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है।डॉक्टर/विशेषज्ञ:
 एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर, जैसे मनोवैज्ञानिक (Psychologist) या मनोचिकित्सक (Psychiatrist), निदान और उपचार की योजना बना सकते हैं। वे टॉक थेरेपी  या ज़रूरत पड़ने पर दवाएँ सुझा सकते हैं।
3. जीवनशैली में बदलाव लाएँ (Incorporate Lifestyle Changes)
ये बदलाव उपचार प्रक्रिया में सहायक होते हैं:
संतुलित आहार:
 पौष्टिक भोजन आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
नियमित व्यायाम: 
शारीरिक गतिविधि एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) जारी करती है और मूड को बेहतर बनाती है। शुरुआत टहलने से भी की जा सकती है।
पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद सुनिश्चित करें।
नशे से बचें: 
शराब और ड्रग्स डिप्रेशन को और खराब कर सकते हैं।
4. छोटी शुरुआत करें, धैर्य रखें (Start Small, Be Patient)छोटे लक्ष्य:
 एक बार में सब कुछ ठीक करने की कोशिश न करें। छोटे, प्रबंधनीय लक्ष्य निर्धारित करें, जैसे कि आज नहाना, थोड़ी देर टहलना या एक गिलास पानी पीना।
धैर्य रखें:
 ठीक होने में समय लगता है। उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, लेकिन निराश न हों। हर छोटा कदम आपको आगे ले जाता है।
शौक: 
उन गतिविधियों के लिए समय निकालें जिनमें आपको कभी मज़ा आता था, भले ही अभी आपका मन न हो। पेंटिंग, संगीत, बागवानी या पढ़ना।
याद रखें:
 डिप्रेशन से बाहर निकलना एक सफ़र है, मंज़िल नहीं। हर दिन एक नई उम्मीद है, एक नई शुरुआत का मौका है। आप मज़बूत हैं और आप यह कर सकते हैं।
अवसाद की स्थिति और नींद का महत्व:
अवसाद (Depression) और नींद के बीच का संबंध बहुत गहरा है। शोध बताते हैं कि ये दोनों एक-दूसरे को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
1. अवसाद और नींद का संबंधअनिद्रा (Insomnia): 
अवसाद से जूझ रहे लगभग 80% लोगों को नींद आने में कठिनाई होती है या उनकी नींद बार-बार टूटती है. 
अतिनिद्रा (Hypersomnia): 
कुछ मामलों में व्यक्ति सामान्य से बहुत अधिक सोने लगता है, जो अवसाद का एक लक्षण हो सकता है . 
चक्र (The Vicious Cycle): 
नींद की कमी अवसाद के लक्षणों को और खराब करती है, और अवसाद के कारण नींद आना मुश्किल हो जाता है . 
2. नींद का महत्व भावनात्मक नियंत्रण: 
नींद के दौरान मस्तिष्क भावनाओं को प्रोसेस करता है। अच्छी नींद मानसिक तनाव को कम करने और मूड को स्थिर रखने में मदद करती है 
मस्तिष्क की मरम्मत: 
गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क विषाक्त पदार्थों (toxins) को साफ करता है और नई कोशिकाओं का निर्माण करता है . 
निर्णय लेने की क्षमता: पर्याप्त नींद लेने से सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है, जो अवसाद से उबरने के लिए आवश्यक है . 
3. सुधार के उपायनियमित समय: 
सोने और जागने का एक ही समय तय करें।
स्क्रीन से दूरी: 
सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग बंद कर दें।
डिप्रेशन मे भोजन कैसा हो ?
डिप्रेशन (अवसाद) के दौरान सही खान-पान मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2026 के नवीनतम शोध बताते हैं कि 'गट-ब्रेन एक्सिस' (पेट और मस्तिष्क का संबंध) मानसिक स्थिति को काफी हद तक प्रभावित करता है।
डिप्रेशन में निम्नलिखित प्रकार का भोजन सहायक होता है:ओमेगा-3 फैटी एसिड: यह मस्तिष्क की सूजन को कम करता है। इसके लिए अखरोट, अलसी के बीज (Flaxseeds), चिया सीड्स और फैटी फिश (जैसे साल्मन) का सेवन करें [1]।
बी-विटामिन (विशेषकर B12 और फोलेट): मस्तिष्क के रसायनों (जैसे सेरोटोनिन) को संतुलित करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), दालें, अंडे और डेयरी उत्पाद जरूरी हैं . 
प्रोबायोटिक्स: 
स्वस्थ पेट का सीधा संबंध खुशहाल मन से है। दही, छाछ और घर का बना अचार मानसिक स्पष्टता में सुधार कर सकते हैं . 
कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट:
 साबुत अनाज (ओट्स, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस) ऊर्जा के स्तर को स्थिर रखते हैं और मूड को बेहतर बनाने वाले सेरोटोनिन के उत्पादन में मदद करते हैं . 
मैग्नीशियम युक्त भोजन: 
कद्दू के बीज, बादाम और डार्क चॉकलेट (सीमित मात्रा में) चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं . 
इनसे परहेज करें:
अधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड (बिस्कुट, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक) से बचें, क्योंकि ये ऊर्जा में अचानक गिरावट लाते हैं और मूड खराब कर सकते हैं. 
अवसाद को दूर करता है म्यूजिक थेरेपी:
म्यूजिक थेरेपी (संगीत चिकित्सा) अवसाद (Depression) के लक्षणों को कम करने में एक प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका मानी जाती है। यह न केवल मानसिक शांति देती है, बल्कि मस्तिष्क में सकारात्मक रासायनिक बदलाव भी लाती है।
अवसाद दूर करने में म्यूजिक थेरेपी के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:डोपामाइन का स्तर बढ़ाना: 
पसंदीदा संगीत सुनने से मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे 'फील-गुड' हार्मोन रिलीज होते हैं, जो मूड को बेहतर बनाने और खुशी का अनुभव कराने में मदद करते हैं।
तनाव और कोर्टिसोल में कमी: 
संगीत सुनने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन 'कोर्टिसोल' का स्तर कम होता है, जिससे चिंता (Anxiety) और बेचैनी से राहत मिलती है।
अभिव्यक्ति का माध्यम: 
कई बार अवसादग्रस्त व्यक्ति अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता। संगीत वाद्ययंत्र बजाना या गीत लिखना दबी हुई भावनाओं को बाहर निकालने का एक सुरक्षित जरिया बनता है।
बेहतर नींद: 
अवसाद में अक्सर नींद न आने (Insomnia) की समस्या होती है। सोते समय शांत और धीमा संगीत सुनने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
ऐसे ही  ही विषयों पर विडिओ देखने के लिए हमारा चैनल सबस्क्राइब कीजिए,धन्यवाद,आभार। 
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*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

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21.9.23

उड़द की दाल के के इतने फायदे जानते हैं आप?

 


    उड़द की दाल को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता हैं. दालों को प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है. दालों के सेवन से शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती.
खासतौर पर शाकाहारी लोगों के लिए दालों का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है. आपको बता दें कि दालें कई प्रकार की होती हैं. वैसे तो आप किसी भी दाल का सेवन करें, ये सभी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. लेकिन आज हम जिस दाल के बारे में बात कर रहे हैं वो है काली दाल, यानि उड़द की दाल|,  असल में उड़द की दाल में बहुत से ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए अच्छे माने जाते हैं. उड़द दाल में प्रोटीन के अलावा फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मददगार माने जाते हैं. 

 डायबिटीज के लिएः




डायबिटीज आज के समय की गंभीर समस्या में से एक हैं जिसे लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकता है. उड़द दाल में फाइबर के गुण भरपूर होते हैं जो चीनी और ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं. डायबिटीज के रोगी डाइट में उड़द दाल को शामिल कर सकते हैं. उड़द दाल के सेवन से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है.

पुरुषों के लिए भी है लाभदायक -



उड़द वीर्य वर्द्धक, हृदय को हितकारी है। यह वात, अर्श का नाश करती है। यह स्निग्ध, विपाक में मधुर, बलवर्द्धक और रुचिकारी होती है। उड़द की दाल अन्य प्रकार की दालों में अधिक बल देने वाली व पोषक होती है। अगर काली उड़द को पानी में 6 से 7 घंटे के लिये भिगो कर उसे घी में फ्राई कर के शहद के साथ नियमित सेवन किया जाए तो पुरुष की यौन शक्ति बढती है तथा सभी विकार दूर होते हैं|

कब्ज के लिएः

उड़द की दाल में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर होते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं. उड़द दाल के सेवन से पाचन, कब्ज और ऐंठन की समस्या को दूर किया जा सकता है.

जोड़ों और मांसपेशियों में होनेवाले दर्द
 
  जोड़ों और मांसपेशियों में होनेवाले दर्द और सूजन से तुरंत राहत पाने के लिए उड़द की दाल का पेस्ट दर्द वालेी जगह पर लगाने से आराम मिलता है। इसके अलावा यह किसी भी तरह की त्वचा की जलन को कम करने में, टैन और सनबर्न से छुटकारा दिलाने में भी मदद करती है। इसके अलावा उड़द दाल में उच्च मात्रा में विटामिन और खनिज होते हैं, जो आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करते हैं। उड़द की दाल आपके ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में भी मदद करती है।

दिल के लिएः



दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है उड़द की दाल. उड़द दाल को पोटेशियम का अच्छा सोर्स माना जाता है. पोटेशियम रक्त परिसंचरण में सुधार कर सकती है. ये रक्त वाहिकाओं और धमनियों में तनाव को कम करने में मदद कर सकती है. उड़द दाल   के सेवन से हार्ट को हेल्दी रखा जा सकता है.

आयरन के लिएः

उड़द की दाल में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जो आपके शरीर में एनर्जी के लेवल को बढ़ाने में मदद करता है और आपको एक्टिव रखता है। आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के बनने में मदद करता है, जो आपके शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार है। जिन गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है, उनके लिए आयरन से भरपूर उड़द की दाल का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। नियमित रूप से उड़द की दाल का सेवन करने से बॉडी में आयरन के साथ-साथ एनर्जी भी बनी रहती है।

याददाश्त होगी मजबूत

अगर आपकी याददाश्त कमजोर है तो उड़द की दाल का सेवन करें. इसके लिए आप रात को सोते समय लगभग 60 ग्राम उड़द की दाल को पानी में भिगोकर रख दें. सुबह इस दाल को पीसकर दूध और मिश्री मिलाकर पीयें. इससे याददाश्त मजबूत होती है और दिमाग की कमजोरी खत्म हो जाती है.

सिरदर्द के लिएः

सिरदर्द की समस्या को कम करने में मददगार है उड़द दाल, इसमें पाए जाने वाले मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व शरीर को हेल्दी रखने का काम कर सकते हैं.

मुंहासे ठीक करने में मददगार



उड़द की दाल से मुंहासे भी ठीक हो जाते हैं. इसके लिए आप उड़द और मसूर की बिना छिलके की दाल को सुबह दूध में भिगो दें. शाम को बारीक से बारीक पीसकर उसमें नींबू के रस की थोड़ी बूंदे और शहद की थोड़ी बूंदे डालकर अच्छी तरह मिला लें और लेप बना लें. इसके बाद आप इस लेप को इस लेप को चेहरे पर लगा लें. इसके बाद सुबह चेहरा धो लें, ऐसा करने पर मुंहासे दूर हो जाएंगे.

ब्लड सर्कूलेशन बढ़ाने में भी मददगार

उड़द की दाल ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मददगार udad dal ke fayde  है. इसमें बड़ी मात्रा में बायोऐक्टिव कंपाउंड्स होते हैं, जो हमारी बॉडी के फूड फंक्शन को इंप्रूव करते हैं. जो हमारे पाचन तंत्र को ऊर्जा देकर हमें हर समय एनर्जेटिक रखते हैं.

नकसीर की समस्या से भी राहत

उड़द की दाल का उपयोग नकसीर की समस्या से भी राहत दिलाता है. कुछ लोगों को अत्यधिक गर्मी या ठंड के कारण भी नाक से खून बहने की समस्या होती है. ऐसे में उन्हें उड़द की दाल का सेवन करना चाहिए. इसके लिए आपको उड़द के आटे का तालू पर लेप करना होगा, ऐसा करने से नाक से खून (नकसीर) आना कम होता है.

नर्वस स‍िस्टम

उड़द की दाल हमारे नर्वस स‍िस्टम को मजबूत करने के अलावा हमारे ब्रेन को हैल्दी बनाती है। नर्वस स‍िस्टम की कमजोरी, लकवा, चेहरे का लकवा समेत दूसरी और कई बीमार‍ियों को ठीक करने के लिए अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

सावधानी-




उड़द दाल के अधिक सेवन से पित्त की पथरी या गाउट भी हो सकता है। अगर आप इसका अधिक सेवन करते हैं तो यह आपके पाचन को भी प्रभावित कर सकती है। उड़द दाल का अधिक सेवन करने से कब्ज की समस्या भी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से यह समस्या है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। हर एक व्यक्ति में इसका प्रभाव अलग-अलग होता है।
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*औषधीय गुणों से भरपूर हारसिंगार(पारिजात) सायटिका ,संधिवात में रामबाण असर पौधा

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*गठिया,संधिवात के अनुभूत आयुर्वेदिक घरेलू उपचार // Gout, Arthritis Treatment

*स्त्री रोगों की मुख्य घरेलू औषधियाँ

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20.9.23

गुड़हल के औषधीय गुण और उपयोग

 



गुडहल (फूल) के गुण :-

गुडहल एक आम सा फूल है जो कि देखने में सुंदर होता है। ऐसे कई गुडहल के फूल हैं जो कि अलग-अलग रंगों में पाये जाते हैं जैसे, लाल, सफेद , गुलाबी, पीला और बैगनी आदि। यह सुंदर सा गुडहल का फूल स्वास्थ्य के खजाने से भरा पड़ा है। इसका इस्तेमाल खाने- पीने या दवाओं लिए किया जाता है। इससे कॉलेस्ट्रॉल, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और गले के संक्रमण जैसे रोगों का इलाज किया जाता है। यह विटामिन सी, कैल्शियम, वसा, फाइबर, आयरन का बढिया स्रोत है।
गुडहल के ताजे फूलों को पीसकर लगाने से बालों का रंग सुंदर हो जाता है।
मुंह के छाले में गुडहल के पते चबाने से लाभ होता है।डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।
क्या आप जानते हैं कि गुडहल की चाय भी बनती है। जी हां, गुडहल की चाय एक स्वास्थ्य हर्बल टी है। तो आइये जानते हैं गुडहल के स्वास्थ्य और औषधीय लाभ के बारे में-

गुडहल के गुण -

*जपाकुसुम के पत्ते तथा फूल भी बाल झड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब आप इन दोनों पदार्थों को मिलाकर बालों को स्वस्थ और सुन्दर बना सकते हैं। एक ताज़ा प्याज लें तथा इसे छीलें। इसके बाद इसे ग्राइंडर में डालकर इसका गूदा बनाएं। इस गूदे से पानी को निचोड़ें तथा रस को एक पात्र में रखें। इसमें जपाकुसुम के पत्तों का रस डालें तथा अच्छे से मिलाएं। इस पैक को बालों पर लगाएं और असर देखें।
* गुडहल से बनी चाय को प्रयोग सर्दी-जुखाम और बुखार आदि को ठीक करने के लिये प्रयोग की जाती है।
* गुड़हल के फूल का अर्क दिल के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना रेड वाइन और चाय।
*आंवला का प्रयोग सदियों से बालों के उपचार के लिए किया जाता रहा है। इस फल को कच्चा खाने से भी बालों को पोषण मिलता है तथा चेहरे पर चमक आती है। अगर आप आंवले के रस के साथ जपाकुसुम की पत्तियों का रस मिलाएं तो आपके बाल बिलकुल स्वस्थ हो जाएंगे तथा आपको बाल झड़ने की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी।
विज्ञानियों के मुताबिक चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल का अर्क कोलेस्ट्राल को कम करने में सहायक है। इसलिए यह  मनुष्यों पर भी कारगर होगा|


*कैंसर से राहत
गुड़हल की चाय का रोजाना सेवन करके आप कैंसर से बच सकते है। और यदि आपको कैंसर हो चुका है तो भी यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को भी धीमा कर देती है। लेकिन हां एक बात का ख्याल रहे की गुड़हल की चाय का सेवन करते समय अपनी ‘कैंसर की मेडिसिन’ नियमित रूप से लेना ना भूले|4. - डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडित व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।
*गुडहल के फूल के फायदे, आप अब जपाकुसुम की पत्तियों और फूलों के साथ जैतून का तेल मिलाकर इसे शैम्पू की तरह प्रयोग में ला सकते हैं। इस मिश्रण के लिए आपको ३ से ४ जपाकुसुम के फूल चाहिए होंगे। इस पेड़ की पत्तियों की भी एक समान पत्तियों की मात्रा लें। आप मूसल और मोर्टार की मदद से जपाकुसुम की पंखुड़ियों को मसल सकते हैं। एक बार ये हो जाने पर इस पेस्ट को महीन बनाने के लिए इसमें जैतून के तेल की कुछ बूँदें और थोड़ा पानी डालें। अब इस मास्क को बालों में इस तरह लगाएं कि बालों के जड़ों तक ये पहुँच जाए। इस पैक को १५ मिनट तक रखें और फिर धो दें।

* अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर फिर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।*लोगों को अकसर बाल झड़ने के साथ बालों के पतले होने की समस्या भी पेश आती है। बालों को पतले होने से बचाने के लिए अदरक एक बेहतरीन विकल्प है। इस हेयर पैक को बनाने के लिए अदरक की जड़ का छोटा सा भाग लें। इसे पीसें तथा इसका रस निकालें। अब जपाकुसुम के फूल से रस निकालें तथा इसे अदरक के रस के साथ मिलाएं। इस मिश्रण को बालों पर अच्छे से लगाएं जिससे एक भी बाल ना छूटें। अगर आप इसका प्रयोग रोज़ाना करें तो बालों का दोबारा उगना भी संभव है।
 *गुडहल का फूल काफी पौष्टिक होता है क्योंकि इसमें विटामिन सी, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह पौष्टिक तत्व सांस संबन्धी तकलीफों को दूर करते हैं। यहां तक की गले के दर्द को और कफ को भी हर्बल टी सही कर देती है।

gudhal ke fayde 

*स्मरण शक्ति बढ़ाये
गुड़हल की पत्तियां शरीर की एनर्जी और इम्युनिटी लेवल को बढ़ाती है। गुडहल के पत्ते या इसके फूलों को सुखाकर पीस लें। अब इसके एक चम्मच पाउडर में एक चम्मच मिर्श्री को मिलाकर पानी के साथ लेने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढ़ती है।
 गुडहल के फूलों का असर बालों को स्वस्थ्य बनाने के लिये भी होता है। इसे पानी में उबाला जाता है और फिर लगाया जाता है जिससे बालों का झड़ना रुक जाता है। यह एक आयुर्वेद उपचार है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने मेभी किया जाता है।
*अगर गुडहल को गरम पानी के साथ या फिर उबाल कर हर्बल टी के जैसे पिया जाए तो यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करेगा और बढे कोलेस्ट्रॉल को घटाएगा क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है।
* गुडहल के पत्ते तथा फूलों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर की एक चम्मच मात्रा को एक चम्मच मिश्री के साथ पानी से लेते रहने से स्मरण शक्ति तथा स्नायुविक शक्ति बढाती है।

*कोलेस्ट्रोल रखे नियंत्रित-

गुड़हल के फूल दिल की रक्षा करने के लिए बेहद ही फायदेमंद होते है। यह कॉलेस्ट्रोल, मधुमेह से सम्भंदित बीमारियाँ और रक्तचाप आदि जो की हृदय रोग का कारण बनते है इन सभी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है|

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* गुडहल के फूलों को सुखाकर बनाया गया पावडर दूध के साथ एक एक चम्मच लेते रहने से रक्त की कमी दूर होती है |
प्रकृति में ऐसी कई जड़ीबूटियां हैं जो बालों को स्वस्थ रखने में काफी अहम भूमिका निभाते हैं। इसका एक और उदाहरण जपाकुसुम और करी पत्तों का मिश्रण है। आप जपाकुसुम की पत्तियों, करी पत्तों और नारियल तेल की कुछ बूँदें मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। इसे अच्छे से इस तरह मिलाएं कि एक भी पत्ती न दिखे। एक बार महीन पेस्ट बन जाने पर इसे बालों में अच्छी तरह लगाएं और किसी भी हिस्से को न छोड़ें। क्योंकि इसमें नारियल तेल मिला हुआ है, अतः यह बालों की मसाज काफी अच्छे से करता है।
 यदि चेहरे पर बहुत मुहासे हो गए हैं तो लाल गुडहल की पत्तियों को पानी में उबाल कर पीस लें और उसमें शहद मिला कर त्वचा पर लगाए |

*किडनी और पथरी की समस्या-
गुड़हल के पत्तो से बनी चाय विदेशो में हर्बल टी के रूप में इस्तेमाल की जाती है। किडनी के रोगियों के लिए गुड़हल की चाय लाभकारी होती है| इससे किडनी की पथरी भी दूर होती है।
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