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30.10.18

ईसीपी (एक्सटर्नल काउंटर पल्स) से भी हार्ट ब्लॉकेज का इलाज संभव और कारगर

                                  
हार्ट में ब्लॉकेज को हटाने की बजाय हृदय की क्षमता बढ़ाने का ट्रीटमेंट होने लगा है। इसमें ना एंजियोप्लास्टी और ना ही बायपास सर्जरी की जाती है। ईसीपी (एक्सटर्नल काउंटर पल्स) में अधिकतम 35 दिन के ट्रीटमेंट से हृदय के सारे बायपास रूट खोले जाते हैं। अब तक प्रचलित एंजियोप्लास्टी और बायपास की बजाय ईसीपी से भी इलाज होने लगा है। इसमें ब्लॉकेज 80 फीसदी होने का इंतजार नहीं किया जाता है।
साओल के संस्थापक व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बिमल छाजेड़ बताते हैं कि थोड़े ब्लॉकेज में ही हृदय की क्षमता बढ़ाने का काम शुरू किया जाता है। इसमें प्राकृतिक तरीके से रक्त सप्लाई की मात्रा घटा-बढ़ाकर हृदय की क्षमता बढ़ाई जाती है। खिलाड़ियों के हृदय जितनी हार्ट की कैपेसिटी की जाती है। इसमें अधिकतम 30-35 दिन की सिटिंग में हृदय के सारे बायपास रूट खोल दिए जाते हैं।
वो सबकुछ जो नैचुरल बायपास में होता है
छोटी धमनियां करते हैं सक्रिय :

हृदय की कोई बड़ी धमनी के ब्लॉकेज होने पर छोटी-छोटी कई धमनियां उसका काम संभालती है। बड़ी धमनी के ब्लॉकेज पर इन छोटी धमनियों को खोला जाता है। हृदय के रक्त प्रवाह को सामान्य रखा जाता है। इसे नैचुरल बायपास कहते हैं।

रक्त स्टोरेज को पहुंचाते है दिल तक : इसमें मशीन से हाथ व पैरों में के उन भागों पर पट्टे बांधें जाते हैं जहां रक्त का स्टोरेज ज्यादा है। जब-जब सामान्य प्रक्रिया से रक्त हृदय तक पहुंचता है तब मशीन से दबाव बनाकर सामान्य से अधिक रक्त हृदय तक पहुंचाया जाता हैं। इससे हृदय की धमनियों की क्षमता बढ़ने लगती है।
नार्मल हार्ट अटैक
कारण -हृदय तक रक्त पहुंचाने का काम कोराेनरी आर्टरीज करती हैं। इसकी भीतरी सतह पर वसा के छोटे-छोटे कण एक साथ जमा होने से इसे संकरी कर देते हैं। इससे हृदय तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंचता और हार्ट अटैक की आशंका रहती है।
सलाह - कॉलेस्ट्रॉल मेंटेन रखने के लिए नियमित वर्कआउट जरूरी है। हर दिन कम से कम 30 मिनट वर्क आउट करना चाहिए। इसके लिए वॉकिंग, जॉगिंग, गार्डनिंग, स्विमिंग और साइकिलिंग कर सकते हैं।


3 तरह के कॉलेस्ट्रॉल जिनसे होता है हृदयाघात

1. एचडीएल : यह गुड कोलेस्ट्रोल है, जिसकी मात्रा 60 एमजीडीएल होनी चाहिए। शहर में इस कोलेस्ट्रोल के कम केस हैं।
2. एलडीएल : यह बेड कोलेस्ट्रोल है, जिसकी सामान्य रेंज 100 एमजीडीएल से कम होती है। पश्चिमी देशों में ज्यादा होता है।
3. ट्राईग्लिसराइड : इसकी मात्रा शरीर में 150 एमजीडीएल से कम होनी चाहिए। शहर में इसी के सबसे ज्यादा केस।
यहां है तकनीक
ईसीपी यूएसए के 200 हॉस्पिटल में है। चाइना में 10 हजार से ज्यादा सेंटरों पर इससे इलाज होता है। भारत में एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट, मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट आदि में इस मशीन से बीते दो-तीन साल से इलाज होने लगा है।
बदलती जीवनशैली से हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में 15 तो शहरों में 30 फीसदी लोग हृदय के किसी न किसी रोग से ग्रसित हैं। पिछले एक दशक में 4 गुना हृदय रोग बढ़ा है। इसमें भी युवाओं व महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
महिलाओं में 60 फीसदी हृ़दयाघात के मामलों में चेस्ट पैन महसूस ही नहीं होता है। महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले हृदय घात दबे पांव आता है। समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने से 80 फीसदी मामलों में खतरा टाला जा सकता है।


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