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26.2.16

बढ़े हुए थायरायड के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार // Increased thyroid home remedies


थायराइड क्‍या है?


थायराइड शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड है जो तितली के आकार का होता है एवं गले में स्थित है। इसमें से थायराइड हार्मोन का स्राव होता है जो हमारे मेटाबालिज्म की दर को संतुलित करता है। थायराइड ग्लैंड्स शरीर से आयोडीन लेकर इन्हें बनाते हैं। यह हार्मोन मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए जरूरी होती हैं। थायराइड हार्मोन का स्राव जब असंतुलित हो जाता है तो शरीर की समस्त भीतरी कार्यप्रणालियां अव्यवस्थित हो जाती हैं। थायराइड दो प्रकार का होता है, पहला हाइपोथायराइड एवं दूसरा हायपरथायराइड।

थायराइडिज्म में यह ग्रंथि ज्यादा प्रभावी होती है और थायराइड हार्मोन (थायरॉक्सिन) ज्यादा पैदा करती है.थायरायड भी डायबिटीज की तरह मुश्किल से काबू आने वाली बीमारी है | थायराइड हार्मोन पैदा करने वाली एक ग्रंथि है जो गर्दन के पीछे होती है. थायराइड ग्रंथि थायराइड हार्मोन पैदा करती है. यह हारमोन शरीर की हर कोशिका, हर अंग और हर ऊतक पर प्रभाव डालता है. हार्मोन ग्रंथि शरीर का तापमान, शरीर का वजन, हार्ट रेट, पाचन क्रिया,ऊर्जा सबको नियंत्रित करती है. हालांकि यह बहुत छोटी होती है लेकिन इसका बेहतर कार्य हमारे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. थायराइड रोग मे या तो थायराइड हार्मोन अधिक बनता है जिसे हाइपर-थायराइडिज्म कहा जाता है या कम हो जाता है जिसे हाइपो-थायराइडिज्म कहा जाता है|


हाइपोथायराइड -


इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता जिससे शरीर में आवश्यकतानुसार टी.थ्री व टी. फोर हार्मोन नहीं पहुंच पाता है। इस स्थिति में वजन में अचानक वृद्धि हो जाती है। सुस्ती महसूस होती है। रोजाना की गतिविधियों में रूचि कम हो जाती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। पैरों में सूजन व ऐंठन की शिकायत होती है। चलने में दिक्कत होती है। ठंड बहुत महसूस होती है। कब्ज होने लगती है। चेहरा व आंखें सूज जाती हैं। मासिक चक्र अनियमित हो जाता है। त्वचा सूखी व बाल बेजान होकर झड़ने लगते हैं। हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। रोगी तनाव व अवसाद से घिर जाते हैं और बात-बात में भावुक हो जाते हैं। आवाज रूखी व भारी हो जाती है। यह रोग 30 से 60 वर्ष की महिलाओं को होता है।

क्या हैं नुकसान

महिलाएं थायराइड की सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। स्थिति यह है कि हर दस थायराइड मरीजों में से आठ महिलाएं ही होती हैं। उनका वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है। इससे तनाव, अवसाद, नींद ठीक से न आना, कोलेस्ट्रॉल, आस्टियोपोरोसिस, बांझपन, पीरियड का टाइम पर न आना, दिल की धड़कन बढ़ना जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।


जांच व उपचार
थायराइड के दोनों प्रकार में ब्लड टैस्ट किया जाता है। ब्लड में टी. थ्री, टी. फोर एवं टी. एस. एच. लेवल में सक्रिय हार्मोंस का लेवल जांचा जाता है। टैस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार डाक्टर ट्रीटमेंट करते हैं। अधिकतर रोगियों को उम्र भर दवा खानी पड़ती है, किंतु पहले चरण में उपचार करा लेने से ज्यादा परेशानियां नहीं आतीं। मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। ऐसी चीजें न खाएं जिससे थायराइड से पैदा होने वाली परेशानियां और बढ़ जाएं। इन चीजों से
परहेज करें-


1) रेड मीट :

रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट बहुत होता है। इससे वेट तेजी से बढ़ता है। थाइराइड वालों का वजन तो वैसे ही बहुत तेजी से बढ़ता है। इसलिए इसे त्याग दें|| इसके अलावा रेड मीट खाने से थाइराइड वालों को बदन में जलन की शिकायत होने लगती है।

2) एल्कोहल: 

एल्कोहल यानी शराब़, बीयर वगैरा शरीर में एनर्जी के लेवल को प्रभावित करता है। इससे थाइराइड की समस्या वाले लोगों की नींद में दिक्कत की शिकायत और बढ़ जाती है। इसके अलावा इससे ओस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है।

3) आयोडीन वाला खाना :

चूंकि थायराइड ग्लैंड्स हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायराइड हार्मोन पैदा करते हैं, इसलिए हाइपोथायराइड है तो आयोडीन की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों से जीवनभर दूरी बनाए रखें। सी फूड और आयोडीन वाले नमक का उपयोग वर्जित है|

4) वनस्पति घी: 

वनस्पति घी को हाइड्रोजन में से गुजार कर बनाया जाता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को खत्म करते हैं और बुरे को बढ़ावा देते हैं। बढ़े थाइराइड से जो परेशानियां पैदा होती हैं, ये उन्हें और बढ़ा देते हैं। ध्यान रहे इस घी का इस्तेमाल खाने-पीने की दुकानों में जमकर होता है। इसलिए बाहर का फ्राइड खाना न ही खाएं।

7) एलर्जिक फूड न लें :-

हाइपर- थायराइडिज्म के कारण कई नाजुक बीमारियां होती हैं. यह ऑटो-इम्यून डिजीज है और खाने से होने वाली एलर्जी से इस प्रकार की बीमारियों के लक्षण बढ़ सकते हैं. इसलिए इस तरह के खाने से परहेज करें जिससे आपको एलर्जी है. साधारण तौर पर एलर्जी लैक्टोज सहन नहीं होना दूध, मूंगफली एलर्जी, गेहूं एलर्जी आदि है, एलर्जिक रिएक्शन उस भोजन पर ज्यादा आश्रित होने से होती है.डेयरी उत्पाद : हाइपर-थायराइडिज्म के कुछ लोगों में लैक्टोज सहन नहीं होता और दूध जैसे उत्पाद पचाने में समस्या होती है. यदि आपको दूध उत्पाद जैसे मक्खन, आइसक्रीम, दही आदि से अपच, सूजन, थकान आदि होती है तो इनसे परहेज करें.|

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20.3.12

थाईरायड ग्रथि के रोग:हाईपर थायराई्डिस्म या हाईपो थाईराईडिस्म// Thyroid gland disease: Hyper thyroidism or hypo thyroidism



        स्वस्थ शरीर  में थाईराईड ग्रंथि टी३ और टी४ हारमोन  स्रवित करती है जो शरीर के विभिन्न  क्रिया-कलापों  को प्रभावित करते हैं। ये हारमोन शरीर की चयापचय क्रिया को प्रभावित  कर  रोगी के वजन ,रोगी को गर्मी,सर्दी कितनी लगती है और हमारे शरीर में कितनी केलरी दहन होती है इन सभी  बातों को नियंत्रित करने की क्षमता संपन्न होते हैं।      हाईपर थायराईडिस्म रोग  में थाईराईड ग्रंथि बढ जाती है।ग्रंथि से अधिक मात्रा में हार्मोन्स का स्राव होने लगता है। ये हार्मोन्स हृदय  की गति बढा देते हैं ,इतना ही नहीं ये हार्मोन्स शरीर् के अन्य अंगों को भी प्रभावित उनकी क्रियाशीलता में अभिवृद्धि  कर देते हैं।

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   पुरुषों की बनिस्बत स्त्रियों में यह रोग ज्यादा पाया जाता है।रजोनिवृति के समय, मानसिक तनाव,गर्भावस्था के समय और यौवनारंभ के समय यह रोग अधिक प्रभावशाली हो जाता है।
      रोग लक्षण:-
       इस रोग से पीड़ित रोगी का वजन कम होने लगता है, शरीर में अधिक कमजोरी मेहसूस होने लगती है, गर्मी सहन नहीं होती है, शरीर से अधिक पसीना आने लगता है, अंगुलियों में  कंपकपी होने लगती है तथा घबराहट होने लगती है। इस रोग के कारण रोगी का हृदय बढ़ जाता है, रोगी व्यक्ति को पेशाब बार-बार आने लगता है, याददाश्त कमजोर होने लगती है, भूख नहीं लगती है तथा उच्च रक्तचाप का रोग हो जाता है।

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इस रोग के कारण रोगी के बाल भी झड़ने लगते है। इस रोग की गिरफ़्त में आने पर  स्त्रियों के मासिकधर्म में गड़बड़ी होने लगती है।अन्य लक्षण इस  प्रकार हैं-
घबराहट,बैचेनी
नींद न आना,निद्राल्पता
श्वास में कठिनाई
आंतों की अधिक क्रियाशीलता.
ज्यादा थकावट मेहसूस होना

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हृदय की चाल बढ जाना.
हाथों में कंपन्न होना
स्त्रियों में मासिक धर्म की मात्रा कम होना या मासिक धर्म बंद हो जाना.
पर्याप्त खाना खाने के बावजूद शरीर का वजन गिरते जाना।

मांसपेशियों  में कमजोरी मेहसूस होना
त्वचा का गर्म और आर्द्र रहना
हायपो थायराईडिस्म  याने थायराइड का सिकुड़ना-
इस रोग  में थायराईड ग्रन्थि के द्वारा कम हारमोन बनने लगती है।

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थायराइड के सिकुड़ने का लक्षण:-
           रोगी व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है तथा उसे सर्दी लगने लगती है। रोगी को कब्ज  की शिकायत रहने लगती है।रोगी के बाल की चमक  खत्म होकर रुखे-सूखे हो जाते हैं।  रोगी की कमर में दर्द, नब्ज की गति धीमी हो जाना, जोड़ो में अकड़न तथा चेहरे पर सूजन हो जाना आदि लक्षण प्रकट हो जाते हैं।

थायराईड ग्रंथि  के रोगों के होने का कारण:-
     १)  थायराईड के  रोग अधिकतर शरीर में आयोडीन की कमी के कारण होते हैं।
२) यह रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो अधिकतर पका हुआ भोजन करते हैं तथा प्राकृतिक भोजन बिल्कुल नहीं करते हैं। प्राकृतिक भोजन करने से शरीर में आवश्यकतानुसार आयोडीन मिल जाता है लेकिन पके हुए खाने में आयोडीन नष्ट हो जाता है।
३) मानसिक, भावनात्मक तनाव, गलत तरीके से खान-पान  की वजह से भी रोग उत्पन्न होता है।

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थायराईड रोगों का प्राकृतिक और घरेलू पदार्थों से   उपचार:-

१)  थायराईड रोगों का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक फलों का रस (नारियल पानी, पत्तागोभी, अनानास, संतरा, सेब, गाजर, चकुन्दर, तथा अंगूर का रस) पीना चाहिए तथा इसके बाद 3 दिन तक फल तथा तिल को दूध में डालकर पीना चाहिए। इसके बाद रोगी को सामान्य भोजन करना चाहिए जिसमें हरी सब्जियां, फल तथा सलाद और अंकुरित दाल अधिक मात्रा में हो। इस प्रकार से कुछ दिनों तक उपचार करने से   रोग ठीक हो जाता है।
२)  इस रोग से पीड़ित रोगी को कम से कम एक  वर्ष तक फल, सलाद, तथा अंकुरित भोजन का सेवन करना चाहिए।
3)  सिंघाड़ा, मखाना तथा कमलगट्टे का सेवन करना भी लाभदायक होता है।


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४)  घेंघा रोग को ठीक करने के लिए रोगी को 2 दिन के लिए उपवास रखना चाहिए और उपवास के समय में केवल फलों का रस पीना चाहिए। रोगी को एनिमा क्रिया करके पेट को साफ करना चाहिए। इसके बाद प्रतिदिन उदरस्नान तथा मेहनस्नान करना चाहिए।
५) थायराइड रोगों से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजें, मैदा, चीनी, चाय, कॉफी, शराब, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
६) एक कप पालक के रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर फिर चुटकी भर जीरे का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात के समय में सोने से पहले सेवन करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।

७) कंठ के पास गांठों पर भापस्नान देकर दिन में 3 बार मिट्टी की पट्टी बांधनी चाहिए और रात के समय में गांठों पर हरे रंग की बोतल का सूर्यतप्त तेल लगाना चाहिए।
८)  इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को उन चीजों का भोजन में अधिक प्रयोग करना चाहिए जिसमें आयोडीन की अधिक मात्रा हो।
९)  एक  गिलास पानी में 2 चम्मच साबुत धनिये को रात के समय में भिगोकर रख दें तथा सुबह के समय में इसे मसलकर उबाल लें। फिर जब पानी चौथाई भाग रह जाये तो खाली पेट इसे पी लें तथा गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से थायराइड रोग ठीक हो जाता है।
१०) थायराईड रोगों को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को अपने पेट पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए और इसके बाद कटिस्नान करना चाहिए। इस प्राकृतिक चिकित्सा से रोग निवारण में आशातीत सफ़लता मिलती है।

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 ११)  इस रोग से पीड़ित रोगी को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए ताकि थकावट न आ सकें और रोगी व्यक्ति को पूरी नींद लेनी चाहिए। मानसिक, शारीरिक परेशानी तथा भावनात्मक तनाव यदि रोगी व्यक्ति को है तो उसे दूर करना चाहिए और फिर प्राकृतिक चिकित्सा से अपना उपचार कराना चाहिए।

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