12.6.17

लेसिक आई सर्जरी के फायदे और नुकसान




  आंखें कुदरत की ओर से दी गई सबसे कीमती उपहार हैं। ये जितनी कीमती हैं, उतनी ही संवेदनशील भी हैं। इसलिए तो लोग आंखों का विशेष ख्याल रखते हैं और थोड़ा भी सरदर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाते हैं। पहले लोग आंखों की समस्या से निज़ात पाने के लिए चश्मा पहनते थे। लेकिन चश्मा एक बार चढ़ गया तो जिंदगी भर लगाना पड़ता है। लेकिन विकसित होती तकनीक ने आंखों के उपचार को आसान कर दिया है। आजकल डॉक्टर चश्मा लगाने वाले को लेसिक सर्जरी करने की हिदायत देते हैं और लोग लेसिक सर्जरी का फायदा भी उठा रहे हैं।
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लेसिक आई सर्जरी के फायदे और नुकसान
लेसिक आई सर्जरी से दूर होती हैं आंखों की समस्‍यायें।
अन्य सर्जरी की तुलना में लेसिक सर्जरी कम खतरनाक।
यह आसान है और मात्र 30 मिनट में ही हो जाती है।
इसे एक बार कराने के बाद दोबारा नहीं करा सकते हैं।
अन्य सर्जरी की तुलना में लेसिक सर्जरी कम खतरनाक।
यह आसान है और मात्र 30 मिनट में ही हो जाती है।
इसे एक बार कराने के बाद दोबारा नहीं करा सकते हैं।
आंखें कुदरत की ओर से दी गई सबसे कीमती उपहार हैं। ये जितनी कीमती हैं, उतनी ही संवेदनशील भी हैं। इसलिए तो लोग आंखों का विशेष ख्याल रखते हैं और थोड़ा भी सरदर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाते हैं। पहले लोग आंखों की समस्या से निज़ात पाने के लिए चश्मा पहनते थे। लेकिन चश्मा एक बार चढ़ गया तो जिंदगी भर लगाना पड़ता है। लेकिन विकसित होती तकनीक ने आंखों के उपचार को आसान कर दिया है। आजकल डॉक्टर चश्मा लगाने वाले को लेसिक सर्जरी करने की हिदायत देते हैं और लोग लेसिक सर्जरी का फायदा भी उठा रहे हैं। लेसिक सर्जरी कराने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। आइए इस लेख में लेसिक सर्जरी के फायदे और नुकसान के बारे में जानते हैं।



क्‍या है लेसिक सर्जरी

जो लोग चश्मा पहनते हैं और जिनका पावर -1 से -10 के बीच है, उन्हें तुरंत आंखों की लेसिक सर्जरी करवानी चाहिए। जांच में देख लें कि आपके कॉर्निया की थिकनेस कैसी है। जितनी अधिक थिकनेस होगी इस सर्जरी का फायदा उतना अधिक होगा। साथ ही लेसिक सर्जरी की सबसे अच्छी बात है कि ये अन्य दूसरी सर्जरी की तुलना में ज्यादा आसान और बेहतर है। यह सस्ती होती है और इसमें कॉर्निया को नुकसान पहुंचने का खतरा न के बराबर होता है। जबकि दूसरी सर्जरी में कॉर्निया पर खतरा ज्यादा रहता है।
लेसिक सर्जरी के फायदे
लेसिक सर्जरी 30 मिनट या उससे कम समय में हो जाती है। साथ ही यह सर्जरी आंखों के लिए काफी प्रभावी और कारगार मानी गई है, जिस कारण अधिकतर लोग आंखों के लिए लेसिक सर्जरी करने की हिदायत देते हैं।
92-98% लोग आंखों की समस्या से निजात पाने के लिए लेसिक सर्जरी का ही सहारा लेते हैं, क्योंकि ये आंखों की दृष्टि के लिए काफी फायदेमंद होती है और किसी भी अन्य सर्जरी की तुलना में आसान और किफायती होती है।
लेसिक सर्जरी दृष्टि से जुड़ी सभी समस्याओं और खतरों को काफी हद तक दूर कर देती है।
लेसिक सर्जरी के नुकसान
लेसिक सर्जरी आंखों के सबसे संवेदनशील हिस्से में की जाती है और इसे दोबारा नहीं किया जा सकता है।
लेसिक सर्जरी के कुछ दिनों के बाद ही लोगों को पढ़ने के लिए तो चश्मे की जरूरत पड़ती ही है।
सबसे बड़ा खतरा लेसिक सर्जरी का ये है कि, ये आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी का हिस्सा नहीं होता। मतलब की इस सर्जरी के दौरान अगर आपकी आंखों को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी न डॉक्टर की और न इंश्योरेंस विभाग की होगी।
आंखें अनमोल हैं, इसलिए इससे जुड़ी किसी भी तरह की सर्जरी कराने से पहले चिकित्‍सक की सलाह जरूर लें।
आंखें कुदरत की ओर से दी गई सबसे कीमती उपहार हैं। ये जितनी कीमती हैं, उतनी ही संवेदनशील भी हैं। इसलिए तो लोग आंखों का विशेष ख्याल रखते हैं और थोड़ा भी सरदर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाते हैं। पहले लोग आंखों की समस्या से निज़ात पाने के लिए चश्मा पहनते थे। लेकिन चश्मा एक बार चढ़ गया तो जिंदगी भर लगाना पड़ता है। लेकिन विकसित होती तकनीक ने आंखों के उपचार को आसान कर दिया है। आजकल डॉक्टर चश्मा लगाने वाले को लेसिक सर्जरी करने की हिदायत देते हैं और लोग लेसिक सर्जरी का फायदा भी उठा रहे हैं। लेसिक सर्जरी कराने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। आइए इस लेख में लेसिक सर्जरी के फायदे और नुकसान के बारे में जानते हैं।
क्‍या है लेसिक सर्जरी
जो लोग चश्मा पहनते हैं और जिनका पावर -1 से -10 के बीच है, उन्हें तुरंत आंखों की लेसिक सर्जरी करवानी चाहिए। जांच में देख लें कि आपके कॉर्निया की थिकनेस कैसी है। जितनी अधिक थिकनेस होगी इस सर्जरी का फायदा उतना अधिक होगा। साथ ही लेसिक सर्जरी की सबसे अच्छी बात है कि ये अन्य दूसरी सर्जरी की तुलना में ज्यादा आसान और बेहतर है। यह सस्ती होती है और इसमें कॉर्निया को नुकसान पहुंचने का खतरा न के बराबर होता है। जबकि दूसरी सर्जरी में कॉर्निया पर खतरा ज्यादा रहता है।
लेसिक सर्जरी के फायदे
लेसिक सर्जरी 30 मिनट या उससे कम समय में हो जाती है। साथ ही यह सर्जरी आंखों के लिए काफी प्रभावी और कारगार मानी गई है, जिस कारण अधिकतर लोग आंखों के लिए लेसिक सर्जरी करने की हिदायत देते हैं।
92-98% लोग आंखों की समस्या से निजात पाने के लिए लेसिक सर्जरी का ही सहारा लेते हैं, क्योंकि ये आंखों की दृष्टि के लिए काफी फायदेमंद होती है और किसी भी अन्य सर्जरी की तुलना में आसान और किफायती होती है।
लेसिक सर्जरी दृष्टि से जुड़ी सभी समस्याओं और खतरों को काफी हद तक दूर कर देती है।
रूर लें। आइए इस लेख में लेसिक सर्जरी के फायदे और नुकसान के बारे में जानते हैं।
लेसिक सर्जरी के नुकसान
लेसिक सर्जरी आंखों के सबसे संवेदनशील हिस्से में की जाती है और इसे दोबारा नहीं किया जा सकता है।
लेसिक सर्जरी के कुछ दिनों के बाद ही लोगों को पढ़ने के लिए तो चश्मे की जरूरत पड़ती ही है।
सबसे बड़ा खतरा लेसिक सर्जरी का ये है कि, ये आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी का हिस्सा नहीं होता। मतलब की इस सर्जरी के दौरान अगर आपकी आंखों को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी न डॉक्टर की और न इंश्योरेंस विभाग की होगी।

आंखों से चश्मा हटवाने या कांटैक्ट लेन्स से छुटकारा पाने के लिए आंखों की लेजर सर्जरी आज एक प्रभावी विकल्प है लेकिन इसे करवाने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए इससे जुड़े हर पहलू की जानकारी जरूरी है।
जानिए, लेजर आइ सर्जरी से जुड़े कुछ अहम पहलू।
लेजर सर्जरी की सही उम्र
आंखों की लेजर सर्जरी हर उम्र में नहीं हो सकती है। इसके लिए कम से कम 18 से लेकर 21 तक की उम्र का इंतेजार करना होगा।
चूंकि इससे पहले हमारी दृष्टि में बदलाव होता रहता है और हमारी दृष्टि 18 साल या कुछ मामलों में 21 साल के बाद ही स्थिर होती है, इसलिए इससे पहले लेजर सर्जरी नहीं हो सकती है।



कहां है फायदेमंद

लेजर सर्जरी के दौरान आंखों के कॉर्निया पर एक फ्लैप चढ़ाकर उसके आकार में हल्का परिवर्तन किया जाता है जिससे फोकस सही रहे।
यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जिनके साथ ये स्थितियां बहुत अधिक बिगड़ी न हों -
- पास की नजर कमजोर हो (मायोपिया)।
- दूर की नजर कमजोर हो (हाइपरोपिया)।
- धुंधला दिखाई देता हो (अस्ट‌िगमाटिज्म)।
ये रिस्क भी हैं
- लेजर सर्जरी आंखों के बहुत संवेदनशील हिस्से पर की जाती है इसलिए इसके बाद इसमें कोई सुधार नहीं हो सकता।
- जरूरी नहीं कि यह सर्जरी आपको पूरी तरह चश्मे से छुटकारा दिला दे। बहुत अधिक पावर वाले लोगों को फिर भी चश्मा लगाना पड़ सकता है।
- गर्भवती महिलाओं के लिए यह सर्जरी नहीं है।
- इसके पहले आप अपनी मेडिकल हिस्ट्री सही तरह डॉक्टर को बताएं क्योंकि ऐसी कई दवाएं हैं जिनका सेवन इस सर्जरी के पहले नहीं कर सकते हैं।
- लेजर सर्जरी करवाने से पहले कम से कम दो बार डॉक्टरी सलाह ले लें।
सर्जरी के पहले



- आंखों का परीक्षण।

- कुछ समय के लिए कांटैक्ट लेंस नहीं पहनें।
- आंखों पर कोई मेकअप न करें।
- परफ्यूम और लोशन जैसी चीजों का इस्तेमाल कुछ समय के ल‌िए न करें।
सर्जरी के दौरान
- यह सर्जरी एनेस्थीसिया के बाद ही होती है इसलिए इसमें बहुत दर्द नहीं होता है।
- एक आंख में 10 से 15 मिनट तक का वक्त लगता है।
- चूं‌कि इलाज पूरी तरह से लेजर किरणों से होता है इसलिए किसी तरह का चीरा नहीं लगता है।
सर्जरी के बाद
- सर्जरी के बाद कई बार दो से तीन दिनों तक अस्पताल में पूरा आराम करना होता है।
- इसके बाद कम से कम एक महीने तक आंखों का खास ध्यान रखना पड़ता है।
- आंखों में जलन हो तो हर्गिज न मलें।
- समय पर टेस्ट कराते रहें।
- नहाते वक्त आंखों में पानी न आने दें।
- धूप में निकलने से बचें।
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