Showing posts with label सफ़ेद दाग. Show all posts
Showing posts with label सफ़ेद दाग. Show all posts

23.2.16

बथुआ सब्जी के लाभ // Benefits of Bathua Vegetable








 बथुआ दो प्रकार का होता है जिसके पत्ते बड़े व लाल रंग के होते हैं। उसे गोड वास्तूक और जो बथुआ जौ के खेत में पैदा होता है। उसे शाक कहते हैं। इस प्रकार बथुआ छोटा, बड़ा, लाल व हरे पत्ते होने के भेद से दो प्रकार का होता है।
इसके पत्ते मोटे, चिकने, हरे रंग के होते हैं। बडे़ बथुए के पत्ते बड़े होते हैं और पुष्ट होने पर लाल रंग के हो जाते हैं। बथुए के पौधे गेहूं तथा जौ के खेतों में अपने आप उग जाते हैं। इसके फूल हरे होते हैं। इसमें काले रंग के बीज निकलते हैं। बथुआ एक मशहूर साग है। इसमें लोहा, पारा, सोना और क्षार पाया जाता है। यह पथरी होने से बचाता है। अमाशय को बलवान बनाता है। अगर गर्मी से बढ़े हुए लीवर को ठीक करना है तो बथुए का प्रयोग करें। बथुए का साग जितना ज्यादा खाया जाये उतना ही फायदेमंद और लाभदायक है। बथुआ के साग में कम से कम मसाला और नमक डालकर या नमक न ही मिलायें और खाया जाये तो फायदेमंद होता है। यदि स्वादिष्ट बनाने की जरूरत पड़े तो सेंधा नमक मिलायें और गाय या भैंस के घी में छौंका लगायें। बथुआ का उबाला हुआ पानी अच्छा लगता है और दही में बनाया हुआ रायता भी स्वादिष्ट होता है। किसी भी तरह बथुआ को रोज खाना चाहिए। बथुआ के पराठे भी बनाये जाते हैं जो ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं तथा इसको उड़द की दाल में बनाकर भी खाया जाता है। बथुआ वीर्यवर्धक है।

गुण : बथुआ जल्दी हजम होता है, यह खून पैदा करता है। इससे गर्म स्वभाव वालों को अत्यंत फायदा होता है। यह प्यास को शांत करता है। इसके पत्तों का रस गांठों को तोड़ता है, यह प्यास लाता है, सूजनों को पचाता है और पथरी को गलाता है। छोटे-बड़े तीनों बथुवा क्षार से भरे होते हैं यह वात, पित्त, कफ (बलगम) तीनों दोशों को शांत करता है, आंखों को अत्यंत हित करने वाले मधुर, दस्तावर और रुचि को बढ़ाने वाले हैं। शूलनाशक, मलमूत्रशोधक, आवाज को उत्तम और साफ करने वाले, स्निग्ध पाक में भारी और सभी प्रकार के रोगों को शांत करने वाले हैं। चिल्ली यानी लाल बथुआ गुणों में इन दोनों से अच्छा है। लाल बथुआ गुणों में बथुए के सभी गुणों के समान है। बथुवा, कफ (बलगम) और पित्त को खत्म करता है। प्रमेह को दबाता है, पेशाब और सुजाक के रोग में बहुत ही फायदेमंद है।
बालों का ओरिजनल कलर बनाए रखने में बथुआ आंवले से कम गुणकारी नहीं है। सच पूछिए तो इसमें विटामिन और खनिज तत्वों की मात्रा आंवले से ज्यादा होती है। इसमें आयरन, फास्फोरस और विटामिन ए व डी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
बथुआ कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डाक्टरों के मुताबिक बथुआ को खाने में किसी न किसी रूप में शामिल जरूर करना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। इससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी कम हो जाता है। गैस, पेट में दर्द और कब्ज की समस्या भी दूर हो जाती है।

कच्चे बथुआ के एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर प्रतिदिन लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
गुर्दा, मूत्राशय और पेशाब के रोगों में बथुआ का रस पीने से काफी लाभ मिलता है।
बथुआ को उबाल कर इसके रस में नींबू, नमक और जीरा मिलाकर पीने से पेशाब में जलन और दर्द नहीं होता।
सिर में अगर जुएं हों तो बथुआ को उबालकर इसके पानी से सिर धोएं। जुएं मर जाएंगे और सिर भी साफ हो जाएगा।
सफेद दाग, दाद, खुजली फोड़े और चर्म रोगों में बथुआ को प्रतिदिन उबालकर इसका रस पीना चाहिए।
बथुआ का रस मलेरिया, बुखार और कालाजार संक्रामक रोगों में भी फायदेमंद होता है।
कब्ज के रोगियों को तो इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। कुछ हफ्तों तक नियमित रूप से खाने से कब्ज की समस्या समाप्त हो जाती है।
बथुआ को साग के तौर पर खाना पसंद न हो तो इसका रायता बनाकर खाएं।
पथरी होने पर एक गिलास कच्चे बथुआ के रस में शक्कर को मिलाकर रोज पिएं। पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।
सर्दी के मौसम में आसानी से उपलब्ध बथुए के साग को भोजन में अवश्य सम्मिलित करना चाहिए| बथुए के पतों का साग पराठे, रायता बनाकर या साधारण रूप में प्रयोग किया जाता है। कब्ज़ में बथुआ अत्यंत गुणकारी है| अतः जो कब्ज़ से अक्सर परेशान रहते है, उन्हें बथुए के साग का सेवन अवश्य करना चाहिए पेट में वायु हो गोला और इससे उत्पन्न सिरदर्द में भी यह आरामदायक है| आँखों में लाली हो या सूजन बथुए के साग के सेवन से लाभ होता है। इसके अलावा चरम रोग, यकृत विकार में भी बथुए के साग के सेवन से लाभ होता है। बथुआ रक्त को शुद्ध कर उसमे वृद्धि करता है। बुखार और उष्णता में इसका उपयोग बहुत ही कारगर होता है। यह आयरन और कैल्सियम का अजस्त्र भंडार है। औरतों को आयरनो तथा रक्त बढाने वाले खाद्य पदार्थ की ज्यादा जरूरत होती है। अतः उन्हें इसके साग का सेवन विशेष रूप से करना चाहिए। खनिज लवणों की प्रचुरता से यह हरा साग-सब्जियां, शरीर की जीवन शक्ति को बढाने मे खास लाभकारी होता है। इसकी पतियों का रस ठंढी तासीर युक्त होने के कारण बुखार, फेफड़ों एवं आँतों की सूजन में भी फायदेमंद है। बथुए के रस को बच्चों को पिलाने से उनका मानसिक विकास होता है|
बथुए का 100 ग्राम रस निकालकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते है|
रस में थोडा-नमक मिलाकार पीने से पेट के कीड़े मर जाते है| रस में थोडा सा नमक मिलाकर इससे 7 दिन तक सेवन करना चाहिये।

Uric acid बढ़ा हुआ हो, arthritis की समस्या हो , कहीं पर सूजन हो लीवर की समस्या हो , आँतों में infections या सूजन हो तो इसका साग बहुत लाभकारी है . पीलिया होने पर बथुआ +गिलोय का रस 25-30 ml तक ले सकते हैं .
50 ग्राम बथुए को एक ग्लास पानी में उबाल-मसल-छानकर पीने से स्त्रियों के मानसिक धर्म की गडबड़ी दूर होती है।

बथुए का औषधीय महत्व  : बथुए का सेवन अनेक प्रकार के रोगों के निवारण के लिए भी किया जाता है|

 रक्ताल्पता :-शरीर में रक्त की कमी पर बथुए का साग कुछ दिनों तक करने अथवा इसे आटे के साथ गूनकर रोटी बनाकर खाने से रक्त की वृद्धि होती है |
त्वचा रोग :-रक्त को दूषित हो जाने से त्वचा पर चकते हो जाते है, फोड़े, फुंसी निकल आती है। ऐसे में बथुए के साग के रक्त में मुल्तानी का लेप बनाकर लगाने से आराम मिलता है। साथ में बथुए का साग बनाकर या रस के रूप में सेवन करना चाहिये इससे रक्त की शुद्धि होती है और त्वचा रोगों से छुटकारा मिलता है|


फोड़ा :-बथुए की पतियों को सोंठ व नमक के साथ पीसकर फोड़े पर बांधने से फोड़ा पककर फुट जाएगा या बैठ जायेगा|
पीलिया :-कुछ दिनों तक बथुए का साग खाने या सूप बनाकर पीने से पीलिया ठीक हो जाता है|
पीड़ारहित प्रसव :-बथुआ के 10 ग्राम बीजों को कूटकर 500 मिलीलीटर पानी में मिलाकर उबाले, जब आधा पानी रह जाए तो उतारकर छानकर पियें, डेलिवरी से 20 दिन के पहले से इसका प्रयोग करना चाहिए। इसमें बच्चा बिना ओपेरेसन के पैदा हो रहे है और प्रसव पीड़ा भी कम हो जाती है।
*Delivery के बाद infections न हों और uterus की गंदगी पूर्णतया निकल जाए ; इसके लिए 20-25 ग्राम बथुआ और 3-4 ग्राम अजवायन को ओटा कर पिलायें. या फिर बथुए के 10 ग्राम बीज +मेथी के बीज +गुड मिलाकर काढ़ा बनायें और 10-15 दिन तक पिलायें .उदर कृमी :-इसके सेवन से पेट के कृमी स्वत मर जाती है|
*जुआं और लीख :-बथुए की पतियों को उबालकर उस उबले हुए पानी से सिर धोने से सिर के सारे जुएँ ख़त्म हो जाते है

अनियमित मासिक धर्म - 50 ग्राम बथुआ को एक ग्लास पानी में उबाल-छानकर नियमित कुछ दिनों तक पीने से तथा उसकी सब्जी बनाकर खाने से बथुआ की सब्जी हमेसा कूकर में बिना मिर्च मसाला के बनाकर खाना चाहिये।

१. बालो को बनाये सेहत मंद 

२. दातो की समस्या दूर करता है
३. कब्ज को दूर करता है
४. बदता है पाचन शक्ति
५. नष्ट करता है पेट के रोग
६. बवासीर की समस्या से दिलाये निजात

बथुआ के स्वास्थ्य लाभ -
(1) यकृत को बढ़ने (लीवर एनलार्जमेंट )से बचाता है बथुआ .इसकी तासीर ठंडी और तर होती है .आमाशय को ताकत देता है और पथरी के बनने को रोकता है बथुवा ।
(2) शरीर  को निरोगी बनाता है बथुआ .इसके स्वादिष्ट रायता तथा साग का नित्य सेवन करें .जहां तक हो मसालों का कमसे कम प्रयोग करें .नमक यदि डालना ही है तो सैंधा नमक ही काम में लें ।< (3) घुटने में दर्द है तो ज्यादा पानी में बथुआ उबालकर इसे छान लें .इसके पानी से दर्द वाले घुटने की सिंकाई करें .बथुए का साग अधिकाधिक खाएं.इस प्रकार चंद हफ़्तों में ही घुटने के दर्द से राहत मिलेगी । (4) चेहरे की झुर्रियों को कम करने के लिए बथुए के पानी से (बथुआ उबालकर पानी छानने के बाद )चेहरा धौएँ,चेहरा चिकना और सुथरा दिखेगा ,धीरे -धीरे नित्य सेवन से झुर्रियां भी कम होंगी .
5 ) बथुए को हमेशा एक लिमिट में खाना चाहिये क्‍योंकि इसमें ऑक्‍जेलिक एसिड का लेवल बहुत ज्यादा  होता है। अधिक मात्रा मे खाने से डायरिया भी हो सकता है। इसके अलावा आयुर्वेद में प्रेगनेंट औरतों को यह सलाह दी गई है कि वे बथुए का सेवन ना करें नहीं तो गर्भपात होने की संभावना रहती है।
6) Periods रुके हुए हों और दर्द होता हो तो इसके 15-20 ग्राम बीजों का काढ़ा सौंठ मिलाकर दिन में दो तीन बार लें .
    इस लेख के माध्यम से दी गयी जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक,comment  और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है|