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23.8.19

पायरिया रोग के आयुर्वेदिक उपचार -डॉ॰आलोक

अगर आप खाना खाने के बाद दांतों की साफाई ठीक ढंग से नहीं करते हैं तो आपको पायरिया जैसी घातक बीमारी होने की संभावना हो सकती है। मुंह से गंदी बदबू आना, दांतों में दर्द और मसूड़ों में सूजन और खून आना पायरिया के लक्षण हो सकते हैं। अगर पायरिया को रोका ना गया तो इस बीमारी की वजह से आपके पूरे दांत गिर सकते हैं।पेरियोडोंटाइटिस को पायरिया के नाम से भी जाना जाता है। पायरिया के घरेलू उपाय आपको दांतों या मसूड़ों की सूजन से बचा सकते हैं। पायरिया मसूड़ों की बीमारी का उन्‍नत चरण है जिसमें मसूड़े और हड्डियां जो दांतों को सहारा देते हैं वे संक्रमित हो जाते हैं और उनमें सूजन आ जाती है। आमतौर पर मसूड़ों में सूजन का प्रमुख कारण बैक्‍टीरिया होता है। जिनके प्रभाव से प्रतिरक्षा शक्ति में कमी आ जाती है। मसूड़ों से लगातार खून आना पायरिया होने के शुरुआती लक्षणों में से एक है। आइये जानें पायरिया के लिए घरेलू उपचार क्या हैं।
पायरिया रोग के लक्षण में मुंह की बदबू, मसूड़ों में सूजन, मुंह के छाले, मसूड़ों और दांतों के बीच अंतर आदि प्रमुख हैं। लेकिन पायरिया के घरेलू उपाय अपनाकर आप इन समस्‍याओं से छुटकारा पा सकते हैं। आज बाजार में पायरिया का इलाज करने के लिए कई तरह के मंजन भी उपलब्ध हैं। लेकिन आज हम घर पर ही पायरिया का घरेलू इलाज करने के तरीके और फायदे जानेंगे।
पायरिया आपके लिए एक गंभीर समस्‍या हो सकती है यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए। पायरिया का इलाज करने के लिए कुछ घरेलू नुस्‍खे भी बहुत ही प्रभावी होते हैं जिनका असर कुछ विशेष दवाओं के समान ही होता है। अच्‍छी बात यह है कि इन घरेलू नुस्‍खों को अपनाने से किसी प्रकार के गंभीर दुष्‍प्रभाव नहीं होते हैं।
पायरिया एक गंभीर समस्‍या है जो न केवल आपके दांतों को बल्कि आपके संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी हानिकारक हो सकती है। स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं के लिए पायरिया इसलिए जिम्‍मेदार है क्‍योंकि यह एक संक्रामक बीमारी है। जिसके कारण पायरिया के हानिकारक जीवाणु लार और थूक के साथ मिलकर पेट में पहुंच जाते हैं जो अन्‍य प्रकार के शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कारण : 1 पायरिया की शुरुआत, दांतों की ठीक से देखभाल न करने, अनियमित ढंग से जब-तब कुछ-न-कुछ खाते रहने के कारण तथा भोजन के ठीक से न पचने के कारण होता है।
2 लि‍वर की खराबी के कारण रक्त में अम्लता बढ़ जाती है। दूषित अम्लीय रक्त के कारण दांत पायरिया से प्रभावित हो जाते हैं।
3 मांसाहार तथा अन्य गरिष्ठ भोज्य पदार्थों का सेवन, पान, गुटखा, तम्बाकू आदि पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन, नाक के बजाए मुंह श्वास लेने का अभ्यास, भोजन को ठीक से चबाकर न खाना, अजीर्ण, कब्ज आदि पायरिया होने के प्रमुख कारण हैं।



घरेलू इलाज नमक

पायरिया केपायरिया रोग के आयुर्वेदिक उपचार  इलाज के लिए नमक एक बेहतरीन उपाय है। नमक में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पेरियोडोंटाइटिस (periodontitis) के संक्रामक बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम कर सकते हैं। इसके अलावा नमक का उपयोग करने पर यह पायरिया के लक्षण जैसे सूजन, दर्द और रक्‍तस्राव आदि को भी रोकने में सहायक होते हैं।
पायरिया का उपचार करने के लिए आप 1 गिलास गुनगुने पानी में 2 छोटे चम्‍मच नमक मिलाएं। इस घोल को मुंह में लगभग 1 मिनिट तक रखें और कुल्‍ला करें। ऐसा आप दिन में 2-3 बार करें। ऐसा करने से आपको कुछ ही दिनों में आराम मिल सकता है।
विकल्‍प के रूप में आप नमक का पेस्‍ट बनाने के लिए 2 बूंद सरसों का तेल मिलाएं। इस मिश्रण को दांतों में ब्रश करने के बाद मसूड़ों में लगाएं और 5-10 मिनिट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से अच्‍छी तरह कुल्‍ला करें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक सुबह इस उपाय को अपनाने से पायरिया के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक दवा हल्‍दी
पायरिया का घरेलू उपचार करने के लिए हल्‍दी का उपयोग किया जा सकता है। हल्‍दी में कक्‍र्यूमिन (curcumin) नामक एक सक्रिय घटक होता है जो कि जीवाणुरोधी और एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों से भरपूर होता है। संक्रमित या सूजन वाले मसूड़ों में हल्‍दी का उपयोग करने से बैक्‍टीरिया को आसानी से नष्‍ट किया जा सकता है। इसके अलावा हल्‍दी का उपयोग मसूड़ों की सूजन और दर्द को भी कम करने में सहायक होती है। मसूड़ों में हल्‍दी से मालिश करने के लिए नरम टूथ ब्रश का उपयोग करें। पायरिया के लिए मंजन के रूप में कुछ सप्‍ताह तक नियमित रूप से हल्‍दी का उपयोग करना चाहिए।
विकल्‍प के रूप में पायरिया के इलाज के लिए हल्‍दी और गर्म पानी से बने पेस्‍ट का भी उपयोग किया जा सकता है। पेस्‍ट बनाने के लिए आप हल्‍दी और गर्म पानी के साथ ही विटामिन ई का भी उपयोग कर सकते हैं। इस मिश्रण को रात में सोने से पहले अपने मसूड़ों में लगाएं। अगली सुबह गर्म पानी से कुल्‍ला करें और अपने दांतों को साफ करें। नियिमत रूप से कुछ सप्ताह तक उपयोग करने पर हल्‍दी पायरिया के लक्षणों को दूर कर सकती है।
लौंग तेल
मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परेशानीयों को दूर करने में लौंग के तेल का उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है। पायरिया के लक्षणों को कम करने के लिए आप भी लौंग के तेल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप लौंग का तेल लें और रूई की मदद से प्रभावित दांतों और मसूड़ों में इस तेल से हल्‍की मालिश करें। फिर रूई को वहीं कुछ देर के लिए छोड़ दें। मुंह में अधिक थूक बनने पर कुछ कुछ देर में थूकते रहें। नियमित रूप से इस विधि को दिन में 2 बार करना आपके लिए फायदेमंद होता है।
पायरिया को जड़ से मिटाने का उपाय नीम
नीम का उपयोग पायरिया से छुटकारा पाने में सहायक होता है। नीम में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जो मसूड़ों को हानिकारक बैक्‍टीरिया के प्रभाव से बचाते हैं। इसके अलावा नियमित रूप से नीम की पत्तियों का उपयोग करने पर मुंह की बदबू जैसी समस्‍याओं से भी बचा जा सकता है। पायरिया का उपचार करने के लिए आप नीम की पत्तियों का रस निकालें और इसे मसूड़ों पर लगाएं। लगभग 5 मिनिट के बाद गुनगुने पानी से कुल्‍ला करें। नियमित रूप से कुछ दिनों तक प्रतिदिन 2 बार नीम के रस का उपयोग करने पर आपको पायरिया से निजात मिल सकती है। इसके अलावा आप अपने दांतों को साफ करने के लिए नीम की दांतुन का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।


घरेलू उपचार अमरूद

अमरूद का उपयोग पायरिया को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका हो सकता है। अमरूद में विटामिन सी की अच्‍छी मात्रा होती है जिसके कारण यह पीरियोडोंटाइटिस के लिए एक अच्‍छा उपाय माना जाता है। अमरूद एक एंटी-प्‍लाक (anti-plaque) एजेंट के रूप में काम करता है। साथ ही अमरूद में एंटी-इंफ्लामेटरी और एनाल्‍जेसिक गुण भी होते हैं जो मसूड़ों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप अपने दैनिक आहार में अमरूद को शामिल कर सकते हैं।
विकल्‍प के रूप में आप अमरूद की कोमल पत्तियों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अमरूद की ताजी और कोमल पत्तियों को तोड़ें और इन्‍हें धो लें। फिर इन पत्तियों को अच्‍छी तरह से चबाएं और इसके रस को कुछ देर तक मुंह में रखने के बाद थूक दें। ऐसा करने से मसड़ों से होने वाले रक्‍तस्राव और मवाद आदि से राहत मिलती है।
घरेलू उपाय ऑयल पुलिंग
आयुर्वेद के अनुसार ऑयल पुलिंग करने और मसूड़ों की हल्‍की मालिश करने से मौजूद बैक्‍टीरिया को दूर किया जा सकता है। ये बैक्‍टीरिया पायरिया के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। पेरियोडोंटाइटिस के इलाज के लिए ऑयल पुलिंग के असरदार घरेलू नुस्‍खा है। इसके लिए आप अपने मुंह में कार्बनिक, अपरिष्‍कृत नारियल तेल या तिल के तेल को मुंह में लें और मुंह में चारो ओर घुमाएं। इस तेल को 15 से 20 मिनिट तक मुंह में रखने के बाद थूक दें। इस तेल को थूकने के बाद गर्म पानी से कुल्‍ला करें। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए आप सुबह ब्रश करने से पहले ऑयल पुलिंग का उपयोग करें।
काली मिर्च
आयुर्वेद के अनुसार काली मिर्च पायरिया की समस्‍या दूर करने में प्रभावी होती है। इसके औषधीय गुण दांतों और मसूड़ों पर पट्टिका और टैटार (plaque and tartar) से छुटकारा दिलाने और बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अलावा काली मिर्च का प्रयोग मसूड़ों को स्‍वस्‍थ बनाने में भी सहायक होते हैं।
पायरिया का इलाज करने के लिए आप काली मिर्च को पीसकर पाउडर बना लें। इसके बाद नमक और काली मिर्च पाउडर की बराबर मात्रा लें और मंजन की तरह मसूड़ों पर इस पाउडर को लगाएं। इस मिश्रण से दिन में 2 से 3 बार हल्‍की मालिश या मंजन करें। ऐसा करने से आपको पायरिया की समस्या के उपचार में गति मिल सकती है।
आंवला
आंवला भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आप भी पायरिया को जड़ से मिटाने के लिए आंवला का उपयोग कर सकते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि पायरिया से ग्रसित दांतों पर आंवला पाउडर का उपयोग करने से दांतों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा आप विकल्‍प के रूप में आंवला के जूस का भी उपयोग कर सकते हैं। आंवले के रस का मॉउथवॉश के रूप में उपयोग करके पायरिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
ग्रीन टी
आप सौंदर्य लाभ और उम्र बढ़ने संबंधी लक्षणों को कम करने के लिए ग्रीन टी का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन दांतों में पायरिया की दवा के रूप में भी ग्रीन टी बहुत ही प्रभावी होती है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से पायरिया के लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा ग्रीन टी का सेवन करने से दांतों पर मसूड़ों की पकड़ को भी मजबूत किया जा सकता है। जिससे रक्‍तस्राव जैसी समस्‍याओं को रोका जा सकता है। आप भी अपने मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने और पायरिया का उपचार करने के लिए ग्रीन टी का सेवन कर सकते हैं।


तुलसी

तुलसी का उपयोग औषधीय जड़ी बूटी के रूप में सदियों से किया जा रहा है। मसूड़ों से होने वाले रक्‍तस्राव को रोकने के लिए तुलसी सबसे अच्‍छा उपाय है। तुलसी में जीवाणुरोधी गुण होते हैं जिसके कारण मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्‍टीरिया के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। तुलसी के पत्‍तों का उपयोग करने पर मसूड़ों और दांतों के दर्द, मवाद जैसी दांत संबंधी समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर किया जा सकता है।
तुलसी के पत्‍तों का पेस्‍ट बनाने के लिए आप तुलसी की कुछ पत्तियां लें और सरसों के तेल के साथ पीसकर पेस्‍ट बना लें। इसके लिए आप तुलसी की सूखी पत्तियों का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इस मिश्रण को धीरे-धीरे पायरिया प्रभावित दांतों में लगाएं और नरम ब्रश से हल्‍की मालिश करें। इसके अलावा आप तुलसी के पत्‍तों से बनी चाय का भी सेवन कर सकते हैं। इस तरह से पायरिया से बचने के घरेलू उपाय के रूप में आप तुलसी के पत्‍ते और तुलसी की चायका उपयोग कर सकते हैं।
सावधानी और उपाय 
पायरिया के इलाज के लिए आप पालक और गाजर के रस की बराबर मात्रा लें और मौखिक स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सेवन करें।
विटामिन सी युक्‍त खाद्य पदार्थों का पर्याप्‍त मात्रा में सेवन करें।
आवश्‍यक हो तो डॉक्टर की अनुमति से विटामिन डी वाले पूरक आहारों का सेवन करें।
अधिक मीठे और चीनी युक्‍त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें।
भोजन करने के बाद रेशेदार फलों और उत्‍पादों जैसे मूली, गाजर, अमरूद, सेब आदि का सेवन करें।
रात के भोजन के बार विशेष रूप से अपने दांतों को ब्रश करें।
दांतों की प्रतिदिन नियमित रूप से अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भोजन करने के बाद मध्यमा अंगुली से अच्छे मंजन द्वारा दांतों को साफ करें। नीम या बबूल की दातौन खूब चबाकर उससे ब्रश बनाकर दांत साफ करने चाहिए।
सरसों के तेल में नमक मिलाकर अंगुली से दांतों को इस प्रकार मलें कि मसूढ़ों की अच्‍छी तरह मालिश हो जाए।
शौच या लघुशंका के समय दांतों को अच्छी तरह से भींचकर बैठें। ऐसा करने से दांत सदैव स्वस्थ रहते हैं।
पालक, गाजर और गेहूं के जवारे का रस नित्य प्रति पिएं। यह अपने आप में स्वत: औ‍षधि का कार्य करता है।अजीर्ण और कब्ज न हो- यह ध्यान रखते हुए हल्का सुपाच्य भोजन लें। रात को सोते समय हर्रे खाकर गरम दूध पीयें। सुबह 2 ग्राम सूखे आंवले का चूर्ण पानी के साथ लें। मिर्च-मसाला, चाय-कॉफी का प्रयोग न करें।रात को सोते समय 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण जल के साथ तथा दिन में 2 बार अविपत्तिकर चूर्ण का सेवन करें।
भोजन के बाद दांतों में फंसे रह गए अन्न के कण को नीम आदि की दंतखोदनी द्वारा निकाल लें।
जटामांसी 10 ग्राम, नीला थोथा 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, अजवाइन 2 ग्राम, अदरक सूखी 5 ग्राम, कपूर 1 ग्राम, सेंधा नमक 5 ग्राम तथा गेरू 10 ग्राम- इन वस्तुओं का समान मात्रा में महीन चूर्ण बनाकर रख लें। इससे दिन में 3 बार अंगुली से रगड़-रगड़कर देर तक अच्छी तरह से मंजन करें। यह मंजन पायरिया की अनुभूत औषधि है।
जामुन की छाल के काढ़े से दिन में कई बार कुल्ले करें।
नीम का तेल मसूढ़ों पर अंगुली से लगाकर कुछ मिनट रहने दें, फिर पानी से दांत साफ कर लें। सुबह-शाम पानी में नींबू का रस निचोड़कर पिएं।
फिटकरी को भूनकर पीस लें। इसका मंजन पायरिया में लाभप्रद है। फिटकरी के पानी का कुल्ला करें।


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आर्थराइटिस(संधिवात)के घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार