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14.9.18

क्रोध से कैसे निपटें?

                                         


     आप इस बात से परेशान हैं कि क्रोध आपको नियंत्रित करता है न कि आप क्रोध को नियंत्रित कर पाते हैं? आप क्रोध को नियंत्रित करने का कोई उपाय खोज रहे हैं? अगर ऐसा तो ध्यान को आजमाएँ.
क्रोध आपको नियंत्रित करता है. न कि आप क्रोध को, इसको लेकर आप व्यथित हैं , पर इसका हल है। लेकिन पहले आइये क्रोध और इसके प्रभावों को और जानते है ।
क्रोध क्या है? |गुस्सा क्या है?
       क्रोध "एक सामान्य और ज्यादातर स्वास्थ्यप्रद मानवीय भावना'' की तरह परिभाषित किया जाता है। क्रोध के उबार के बाद यदि आप इसे भुला पाते हैं तो यह ठीक है । हालाँकि जब हम क्रोध को नियंत्रित नहीं कर पाते है तो जीवन के हर पहलू की समस्या को दावत दे देते हैं चाहे वो शारीरिक हो, मानसिक हो, भावनात्मक हो या फिर सामाजिक।
क्रोध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों है?
        क्रोध हमारी किसी परिस्थिति में मूलभूत प्रतिक्रिया ‘’सामना करे या भागे’’ को शुरू करता है। दिल की धड़कन में तेजी, रक्तचाप में वृद्धि और तनाव में वृद्धि, ये क्रोध के प्रारंभिक परिणाम हैं। सांस की गति भी बढ़ जाती है। जब क्रोध जीवन में आवर्ती और अनियंत्रित हो जाता है तो समय के साथ हमारे उपापचय में परिवर्तन आ जाता है जो न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करता है अपितु जीवन की सम्पूर्ण गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।
अनियंत्रित क्रोध के कई बुरे प्रभाव है जैसे:
हृदयाघात
पक्षाघात 
रोग प्रतिकारक क्षमता में कमी
त्वचा के रोग 
अनिद्रा
उच्च रक्तचाप 
पाचन संबंधी समस्याएं
चिंता और अवसाद
सिरदर्द 
नकारात्मक भावनाये |



क्रोध प्रबंधन | क्रोध पर नियंत्रण |

हम चाहे जितनी बार स्वयं को यह समझाए कि क्रोध करना अच्छा नहीं है फिर भी जब ये भावना उठती है हम इसे संभाल नहीं पाते हैं । हमें सिर्फ इतना बताया गया है कि क्रोध नहीं करना चाहिए पर यह नहीं कि यदि क्रोध आये तो क्या करें ।
    आपने यह ध्यान दिया होगा कि हम चाहे जितना खुद को समझाए कि क्रोध करना ठीक नहीं है पर जब क्रोध आता है तो हम इसे नियंत्रित करने में खुद को असमर्थ पाते हैं। पूरे बचपन में हम यही सीखते रहे कि क्रोध नहीं करना चाहिए लेकिन यह प्रश्न कि ''क्रोध को नियंत्रित कैसे करे'' ज्यों का त्यों बना हुआ है । जब यह भावनाओं का गुबार फूटता है, तब हम क्या करें ?
चलिए क्रोध के मूल कारणों को समझते हैं और कुछ सुझाव कि इसे कैसे संभालें
क्रोध को समझे
जब हम अपने आस पास गलतियां देखते हैं हम उसे स्वीकार करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं । उदहारण के लिए जब कोई गलती करता है हमारा क्रोध एक लहर की तरह उठता है और शांत होता है लेकिन हमें हिलाकर या फिर कभी कभी पश्चाताप में छोड़कर जाता है।
   जब हम क्रोध में होते हैं, हम सजग नहीं होते हैं । समझने के लिए पहली बात है कि क्रोध हुई गलती को बदल नहीं सकता है । और जो समझने की बात है कि जब तक हम परिस्थिति को यथावत स्वीकारते नहीं है तब तक हम उसे सजगता के साथ सुधार भी नहीं सकते हैं ।
    यह कहना करने से कहीं आसान है क्योंकि मन और भावनाओं का सीधा सामना करना कभी भी आसान नहीं हैं .अतः हमें अपनी मदद के लिए कुछ तकनीकों की मदद चाहिए होगी । आइये उन तकनीकों को सीखकर अपने क्रोध और तनाव को संभाले और अपने स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करें ।
शरीर और मन में बेचैनी के साथ काम करके अपने गुस्से को काबू में करें
गुस्से पर काबू पाने के लिए ७ युक्तियाँ 
जैसा आप खाते हैं वैसे आप होते हैं (जैसा अन्न वैसा मन)
विश्राम की शक्ति को अनुभव करें |
योग आसन लाभकारी हैं |
मन को अपना मित्र बनाएँ |
हर समय का प्रतिकारक |
२० मिनट की अंतर्यात्रा |
क्या आपने हमम्म गुनगुनाया है?
खाने पर ध्यान दे | जैसा आप खाते हैं वैसे आप होते हैं ( जैसा अन्न वैसा मन)आपने ध्यान दिया होगा कि किसी किसी दिन आप बहुत शांत व विश्राम की अवस्था में होते हैं और किसी दिन बेहद असहज। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारा आहार हमारे मन व भावनाओं को बहुत प्रभावित करता है। कुछ तरह का भोजन मन व शरीर में असहजता व बेचैनी लाता है इस तरह के भोजन से दूर रहने से आपको क्रोध पर नियंत्रण में मदद मिलेगी जैसे माँसाहार, अधिक मसाले वाला व तेलयुक्त आहार इनमें प्रमुख हैं।
विश्राम करें
अगर आप रात में सोए नहीं हैं l तो सुबह कैसा महसूस करेंगे? आप आसानी से क्रोधित हो सकते हैं। शरीर की थकावट व बेचैनी मन में झुंझलाहट व व्यग्रता लाती है। प्रतिदिन ६-८ घंटे सोना बहुत ही महत्वपूर्ण है। ये आपके शरीर व मन का विश्राम निश्चित करता है। और आपके बेचैन होने की संभावना कम होती है
मन को अपना मित्र बनाएँ
भास्त्रिका व नाड़ी शोधन प्राणायाम मन की बेचैनी को कम करने में मदद करते हैं। जब मन शांत व स्थिर होता है, आपके झुंझलाने या क्रोधित होने की संभावना कम हो जाती है।
योग आसन लाभकारी हैं
१०-१५ मिनट के योग आसन शरीर की असहजता निकालने में मदद करते हैं। सूर्य नमस्कार के कुछ आवर्तन राउंड्स) एक अच्छी शुरुआत हो सकते हैं। किसी भी शारीरिक व्यायाम से योग आसन का लाभ है कि योग आसान सांस के साथ लयबद्ध होते हैं और शरीर के आवश्यक खिंचाव के साथ ऊर्जा का स्तर भी बढ़ाते हैं।
प्रियम खन्ना बताते हैं "किसी किसी दिन जब मैं बहुत तनाव में होता हूँ, मैं अपने शरीर में एक अकड़न महसूस करता हूँ। ये मुझे बहुत असहज व बेचैन कर देता है। और मुझे क्रोध जल्दी आ जाता है। योग शरीर से अकड़न निकल देता है। और परिणामस्वरूप मन शांत व प्रसन्न हो जाता है।"
ध्यान
योग, प्राणायाम का नियमित अभ्यास और आहार पर ध्यान असहजता को शांत करता है। पर मन को शांत व संतुलित अवस्था में लगातार कैसे रखे l नियमित ध्यान इसका उत्तर है l बस २० मिनट का प्रतिदिन का ध्यान दिनभर के लिए पर्याप्त है।
हर समय का प्रतिकारक
कुछ गहरी साँसें लेना व छोड़ना आपके क्रोध को तत्काल शांत करता है। जिस क्षण आप क्रोध में हैं, आँखे बंद करें और कुछ गहरी साँसें लें और देखे कि मन की अवस्था में बदलाव आ जाता है। सांस तनाव को दूर करती है और मन को शांत होने में मदद होती है।
क्या आपने हमम्म गुनगुनाया है?
सुरभि शर्मा बताती हैं " ध्यान मुझे शांत और क्रोध से दूर रखता हैl"
ये क्रोध का दूसरा प्रतिकारक है। हमम्म प्रक्रिया एक से दो मिनट लेती है लेकिन आपको तुरंत शांत कर देती है।
जीवन में किसी न किसी कारण से क्रोध हो जाता है। आपने कभी क्रोध के बारे में गंभीरता से सोचा है? क्रोध क्या है? क्रोध क्यों आता है और उसके परिणाम क्या हैं? आपसी संबंध में अक्सर एक-दूसरे पर क्रोध हो जाता है? 

क्रोध से कैसे छुटकारा पाएँ?
जो हमें सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं, उन्हीं के साथ हम अपने संबंध बिगाड़ देते हैं। हम अपने बच्चों को सहारा, सहूलियत और सुरक्षित वातावरण देना चाहते हैं, लेकिन हमारा गुस्सा ही बच्चों को डरा देता है।
क्रोधी स्वभाववाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? जब मशीन ज़्यादा गरम हो जाएँ, तब थोड़ी देर के लिए उसे बंद कर देना चाहिए। तब वह ठंडी हो जाएगी। लेकिन आप उससे कुछ छेड़छाड़ करोगे तो जल जाओगे।
रिश्तों में होनेवाली समस्याओं का हल पाने के लिए पढ़िए।
इसके अलावा, ज्ञानविधि में भाग लेकर अपने सच्चे आत्मस्वरूप को जानें। यह वास्तव में क्रोध से मुक्त बनने के लिए मदद करता है।

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