Showing posts with label सायटिका रोग के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार. Show all posts
Showing posts with label सायटिका रोग के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार. Show all posts

23.7.19

सायटिका रोग के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार // Ayurvedic treatment of sciatica disease


कमर और पैरों में अक्सर होने वाले तेज दर्द को साइटिका कहते हैं। साइटिक नामक तंत्रिका(नर्व) पर दबाव के कारण इस मर्ज का नाम साइटिका पड़ा है। साइटिक तंत्रिका हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में से गुजरने वाली प्रमुख तंत्रिका है। यह शरीर की सबसे बड़ी और चौड़ी तंत्रिका है। यह कमर के निचले हिस्से से निकलती है और कूल्हे से होकर घुटने के नीचे तक जाती है। यह तंत्रिका नीचे पैर में कई मांसपेशियों को नियंत्रित करती है और पैरों की त्वचा को संवेदना (सेंसेशन) देती है। साइटिका कोई बीमारी नहीं बल्कि साइटिक तंत्रिका से जुड़ी एक अन्य समस्या का लक्षण है। अगर हम अपनी जीवनशैली में सही पोस्चर्स को शामिल कर लें तो, सियाटिका की समस्या से काफी हद तक बचाव कर सकते हैं।
क्या हैं इसके लक्षण
कमर के निचले हिस्से से लेकर कूल्हे और घुटने के पीछे की तरफ पैर तक खिंचाव महसूस होना और झनझनाहट होना।
कूल्हे से लेकर पैर तक लगातार दर्द का बना रहना, जो बैठने और खड़े होने पर ज्यादा होता है और लेटने पर कम होता है।
पैरों, अंगूठे एवं उंगलियों में सुन्नपन और कमजोरी महसूस होना।
साइटिका अधिकतर उन लोगों में जल्दी होता है, जो एक जगह पर बैठकर लंबे समय तक काम करते हैं। जैसे कि आजकल कंप्यूटर आईटी जॉब्स और सिटिंग्स जॉब्स वालों को इसका सामना करना पड़ रहा है। शारीरिक व्यायाम की कमी भी इसको बढ़ावा देती है।


क्यों होता है साइटिका का दर्द

इस दर्द का लम्बर हर्नियेटेड डिस्क एक प्रमुख कारण है। हर्नियेटेड डिस्क की समस्या में में रीढ़ की हड्डी की डिस्क के अंदर दबाव बढ़ने से यह बाहर लीक कर जाती है और नर्व रूट को लगातार दबाती रहती है।
उम्र के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी में बदलाव आना। इन बदलावों की वजह से हमारे तंत्रिका तंत्र पर काफी प्रभाव पड़ता है।
रीढ़ की नलिका (स्पाइनल कैनाल) का पतला होना।
यह समस्या अक्सर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में होती है।
फिजियोथेरेपी से संभव है इलाज
रीढ़ की हड्डी का मैनुअल मैनीपुलेशन।
कमर और पूरे टांग की मांसपेशियों के खींचने और उनकी ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम।
हैमस्ट्रिंग स्ट्रेचिंग जिसमें सीधा खड़ा होकर अपने पैर के अंगूठों को छूने का प्रयास करें।
कमर की आगे और पीछे झुकाने वाली मांसपेशिओं के व्यायाम।
काइनेसिओ टैपिंग के अंतर्गत मांसपेशियों को एक टेप के साथ जोड़ दिया जाता है, जिससे मांसपेशियों की काम करने की क्षमता बढ़ जाती है।
पोस्चर ट्रेनिंग। सही तरीके से खड़े होने और बैठने का तरीका सिखाया जाता है।
इलेक्ट्रोथेरेपी मशीनों का इस्तेमाल भी काफी फायदेमंद होता है जिसमें नई तकनीक वाली मशीन जैसे माइक्रोवेब डायथर्मी और कॉम्बिनेशन थेरेपी, क्लास 3 और क्लास 4 लेजर का इस्तेमाल होता है, जिससे सूजन और दर्द को कम करने में बहुत मदद मिलती है। कुछ मरीजों में मशीनों के साथ-साथ एक्सरसाइज थेरेपी से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
स्पाइनल डी-कंप्रेशन थेरेपी जिसमें रीढ़ की हड्डी के दबाव को मशीन द्वारा खींचकर कम किया जाता है।
वैकल्पिक इलाज यानी एर्गोनॉमिक पोस्चर परामर्श। जैसे ऑफिस में काम करने सही तरीका (पोस्चर) सिखाया जाता है। कॉग्नेटिव व्यवहार चिकित्सा जिसमें मरीज को दिमागी तौर पर दर्द से लड़ने और इसे बर्दाश्त करने का तरीका सिखाया जाता है


आयुर्वेदिक प्रयोग:

सायटिका का भयानक दर्द खत्म हो जाएगा वो भी सिर्फ दो हफ्तों में
सायटिका एक बीमारी है जिसमें रोगी को भयानक दर्द होता है। इसका मुख्य कारण सायटिक नर्व है। यह वो नर्व है जो रीढ़ के निम्न भाग से निकलकर घुटने के पीछे की ओर से पैर की तरफ जाती है। शरीर को अधिक समय तक एक ही स्थिति में रखने से यह दर्द बढ़ जाता है यह पेन बहुत असहनीय होता है। अक्सर यह समस्या उन लोगों में होती है जो बहुत समय तक बैठ कर काम करते हैं या बहुत अधिक चलते रहने से, अत्यधिक साइकिल, मोटर साइकिल अथवा स्कूटर चलाने से सायटिक नर्व पर दबाव पड़ता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि अचानक हड्डियों पर जोर पड़ जाने से भी इस प्रकार का दर्द होता है। इस प्रकार का दर्द अक्सर 40 से 50 वर्ष की उम्र में होता है और यह बीमारी बरसात या ठंड के मौसम में ज्यादा तकलीफ देती है। अगर आप भी सायटिका पेन से परेशान है तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे आयुर्वेदिक प्रयोग जिनसे सायटिका पेन जल्द ही ठीक हो जाएगा।
साइटिका में परहेज और आहार लेने योग्य आहार
मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पाद, मछली, मांस, समुद्री भोजन, सेब, खुबानी, भूरे रंग के चावल, बीन्स आदि शामिल हैं।
विटामिन बी 12 से भरपूर भोजन जैसे जिगर, कस्तूरी, भेड़, और पनीर आपके सियाटिक तंत्रिका दर्द के उपचार में फ़ायदेमंद हो सकते हैं।
ओमेगा -3 फैटी एसिड से समृद्ध खाद्य पदार्थ शामिल करें, जिसमें सामन, सार्डिन, हेरिंग, और मैकेरल आदि शामिल हैं।
विटामिन ए, जैसे दूध, पनीर और दही, गाजर, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां, नारंजी रंग का फल जैसे आम और खुबानी, दृढ़ नकली मक्खन, अंडे, मैकेरल और अन्य तेलीय मछली
विटामिन सी फल में विशेष रूप से नींबू, सामान्य और मीठे आलू, गोभी, पालक, ब्रोकोली, टमाटर, और हरे और पीले रंग सब्जियों में पाया जाता है।
पर्याप्त पोटाशियम कटिस्नायुशूल के प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण है क्यू की ये मांसपेशियों को मज़बूती प्रदान करता है और न्यूरोट्रांसमिशन में मदद करता है। पोटाशियम प्रचुर आहार में सफेद सेम, गहरे हरे साग, आलू, खुबानी, एवोकाडो, मशरूम, मछली (सामन) और केले शामिल हैं।
इनसे परहेज करे
सभी परिष्कृत (रिफाइंड) आटा और शर्करा से बनी चीज़ें जो तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुंचाती हैं।
गाय के दूध और उससे बानी चीज़ें, तला हुआ सासेज और प्रसंस्कृत या जंक फूड खाने से परहेज़ करें।
साइटिका के योग और व्यायाम
स्ट्रेच वाले व्यायाम।
घुटने से छाती तक स्ट्रेच।
साइटिक नस को गति देने वाला स्ट्रेच।
पीठ का विस्तार।
खड़े होकर जांघ की स्ट्रेच।
लाइंग डीप ग्लुटिअल स्ट्रेच।
आयुर्वेदिक प्रयोग-
मीठी सुरंजान 20 ग्राम + सनाय 20 ग्राम + सौंफ़ 20 ग्राम + शोधित गंधक 20 ग्राम + मेदा लकड़ी 20 ग्राम + छोटी हरड़ 20 ग्राम + सेंधा नमक 20 ग्राम इन सभी को लेकर मजबूत हाथों से घोंट लें व दिन में तीन बार तीन-तीन ग्राम गर्म जल से लीजिए।
- लौहभस्म 20 ग्राम + रस सिंदूर 20 ग्राम + विषतिंदुक बटी 10 ग्राम + त्रिकटु चूर्ण 20 ग्राम, इन सबको अदरक के रस के साथ घोंट कर 250 मिलीग्राम के वजन की गोलियां बना लीजिए और दो-दो गोली दिन में तीन बार गर्म जल से लीजिए।
- एरण्ड के बीज की पोटली बनाकर उस से सेंक करें। दर्द से जल्द ही राहत मिलेगी।
- 50 पत्ते परिजात या हरसिंगार के व 50 पत्ते निर्गुण्डी के पत्ते लाकर एक लीटर पानी में उबालें। जब यह पानी 750 मिली हो जाए तो इसमें एक ग्राम केसर मिलाकर एक बॉटल में भर लें। यह पानी सुबह शाम पौन कप मात्रा में पीएं। साथ ही दो-दो गोली वातविध्वंसक वटी की भी लें।


साइटिका के घरेलू उपाय (उपचार)

बर्फ़ पैक, या साधारण तौलिया में जमे हुए मटर का पैकेज लपेटा हुआ, कटिस्नायुशूल में तुरंत राहत पहुँचाने में अद्भुत मदद कर सकता है। दर्द पूरी तरह से समाप्त हो जाने तक, पैक को सीधे प्रभावित क्षेत्र पर 20 मिनट के लिए, हर दो घंटे पर लगाए।
बर्फ़ पैक तुरंत राहत पाने का एक सिद्ध तरीका है, लेकिन सियाटिक तंत्रिका शरीर के बहुत भीतर स्थित है, इसलिए पैक का असर काफ़ी भीतर तक नहीं जा सकता जहां सूजन है। बर्फ़ पैक के ठीक बाद गरम पैक लगाए या उससे भी बेहतर है के एक गर्म स्नान ले। तापमान को बदल कर, आप संचलन और लिम्फ प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। इससे भीतर के सूजन में कमी आएगी और इलाज में सहायता होगी। बेहतर परिणाम के लिए, अपने स्नान में कुछ सेँधा नमक या ज्वलनशीलता विरोधी जड़ी बूटियों या आवश्यक तेलों का इस्तेमाल करें।
गहन मालिश या ट्रिगर-बिदुं उपचारों ने पैर और पैर की उंगलियों में सुन्नता, दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन के उपचार में बड़ी सफलता दिखाई है। जड़ी बूटी युक्त तेल और आवश्यक तेल भी आपको अच्छे परिणाम दे सकते हैं।
आख़िर में, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। ऐसा करने से, यह आपकी नसों और शरीर को पर्याप्त समय मिलेगा आराम करने, ठीक होने में और संतुलन करने के लिए। अतिरिक्त नींद और आराम से आपके तंत्रिकाओं को फिर से बनने और मजबूत होने में मदद मिलेगी।
क़ब्ज से सावधान रहें।
पुरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट) बढ़ने से मूत्र - बाधा का अचूक इलाज 

*किडनी फेल(गुर्दे खराब ) रोग की जानकारी और उपचार*

गठिया ,घुटनों का दर्द,कमर दर्द ,सायटिका के अचूक उपचार 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

पित्त पथरी (gallstone) की अचूक औषधि 


विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज़ के बावजूद निराश रोगी इस औषधि से आरोग्य हुए हैं|  त्वरित असर औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|