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3.1.17

शूगर (मधुमेह ,डायबीटीज़) रोगी का आहार और उपचार://Diabetes patient's diet and treatment



डायबिटीज ब्‍लड में शुगर का स्‍तर बढ़ने से होने वाली बीमारी है, भारत ही नहीं पूरी दुनिया में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसके लिए सबसे अधिक जिम्‍मेदार अस्‍वस्‍थ लाइफस्‍टाइल है, इसलिए डायबिटीज को समझना बहुत जरूरी है, डायबिटीज को समझकर आप इसका पता जल्‍दी चल सकता है। मधुमेह के शुरुआती लक्षण, डायबिटीज और लाइफस्‍टाइल, डायबिटीज के प्रकार, टाइप1 और टाइप2 डायबिटीज, बच्‍चों में डायबिटीज, बच्‍चों में डायबिटीज के लक्षण, ब्लड शुगर और सावधानियां, मधुमेह में ब्‍लड शुगर पर नियंत्रण, डायबिटीज से नींद पर प्रभाव, टाइप1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ में अंतर, डायबिटीज़ के अतिरिक्त प्रभाव, डायबिटीज में खान-पान, किशोरावस्‍था और मधुमेह, मधुमेह से थकान, इंसुलिन का प्रयोग, इंसुलिन का कार्य, आदि के बारे में समझकर आप असानी से मधुमेह की स्थिति को का अंदाजा लगा सकते हैं। 

गुर्दे की पथरी कितनी भी बड़ी हो ,अचूक हर्बल औषधि

  मधुमेह के रोगियों के लिए अपने भोजन पर नियंत्रण रखना अत्यंत आश्यक है। कई बार इन्सुलिन लेने वाले मधुमेह के रोगियों को जो भोजन तालिका चिकित्सा द्वारा बतायी जाती है उसमें चाय एवं काफी का भी उल्लेख होता है। उन्हें सिर्फ क्रीम और शर्करा न लेने के लिए कहा जाता है। चाय और काफी का प्रयोग मधुमेह से ग्रस्त किसी भी व्यक्ति के लिए न करना ही श्रेयस्कर है, चाहे वह इन्सुलिन पर निर्भर हो अथवा नहीं। ये पदार्थ अच्छे स्वास्थ के निर्माण में सहायक नहीं होते हैं। ऐसे रोगियों को कई बार चिकित्सकों द्वारा डबलरोटी, अचार, अंडे आदि लेने की सलाह भी दी जाती है पर हमें यह ध्यान रखना चाहिए की ये पदार्थ मधुमेह के रोगी के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते हैं।

*प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र रुकावट की अचूक  औषधि*

मधुमेह से ग्रस्त रोगियों को किसी भी वस्तु से अधिक ताजी, हरी सब्जियों की आवश्यकता होती है । प्रत्येक भोजन के साथ सलाद प्रचुर मात्रा में लिया जाना चाहिए । जब हम आधिक मात्रा में फल एवं सब्जियां लेते हैं तो शरीर में अधिक पानी पहूंचता है । यह गुर्दों एवं मूत्र उत्सर्जन तंत्र के लिए आवश्यक है । मधुमेह की स्थिति में हमें अपने गुर्दों एवं मूत्र उत्सर्जन तंत्र को अच्छी हालत में रखना चाहिए क्योंकी यह रोग गुर्दों पर एक प्रकार का तनाव डालता है । मधुमेह के रोगियों को मिठाई, चाय. काफी, मादक द्रव्यों तथा ध्रूमपान आदि को तुरंत बंद कर देने का प्रयास करना चाहिए । चर्बी और शर्करा दोनों में कमी आने से आश्चर्य और उत्साहवर्धक परिणाम सामने आते हैं ।
आहार संतुलित हो जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा आदि प्रदान करने वाले तत्व आवश्यक मात्रा में हों ।शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, खनिज लवण तथा फाइबर आदि पर्याप्त मात्रा में होना
मधुमेह की जटिलताएँ उत्पन्न होने पर उनका नियमन किया जाना जरूरी है|

शीघ्र पतन? घबराएँ नहीं ,करें ये उपचार 

रोगी का आहार विविधता पूर्ण हो ताकि वह अच्छी तरह से ग्रहण किया जा सके । आहार नियंत्रण के नाम पर कड़वी चीजें खाते- खाते कई बार रोगियों को इससे अरूचि हो जाती है  , अत: आहार निर्धारण में रोगियों की रुचि का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक हैं ।
मधुमेह समृद्धता का रोग है । अति भोजन तथा मोटापे के कारण मधुमेह के प्रत्येक चार में से तीन रोगियों का वजन अधिक होता है । इसलिए ऐसे रोगियों को केवल चीनी एवं परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट ही नहीं बल्कि अति प्रोटीन एवं चिकनाई से भी बचना चाहिए ।
मधुमेह के रोगी का सर्वोत्तम आहार प्राकृतिक खाद्य, अंकुरित, अन्नकण, फल एवं हरी सब्जी है । यह क्षारीय आहार है । पूर्ण अन्न, कूटू एवं हरी सोया, मेथी अत्यंत लाभप्रद हैं । फलों में संतरा जामुन, अनानास, आवंला, सेब तथा पपीता आदि लिए जा सकते हैं । मट्ठा विशेष रूप से उपयोगी है ।

पिपली  के गुण प्रयोग लाभ 

आहार में कम से कम 90 प्रतिशत अपक्वाहार होना ही चाहिए । अपक्वाहार से अग्नाशय ग्रन्थि उद्दीप्त होकर इन्सुलिन उत्पन्न करती है ।  एक बार में अधिक भोजन करने की अपेक्षा चार बार थोड़ा-थोड़ा खाना उचित  है । मधुमेह में प्रोटीन एवं चिकनाई का चयापचय मंद होने से अम्लता बढती है । अत: क्षारीय भोजन उपयुर्क्त है । लहसून से रक्त शर्करा घटती है । 
मधुमेह के रोगियों को अजवाइन, सोया, मेथी तथा गाजर की पत्ती का रस दिया जा सकता है । खट्टे फल, लौकी, खीरा, एवं ककड़ी अग्नाशय ग्रंथि को उन्नत करते हैं । प्याज एवं लहसून का रस उपयोगी है अत: इनका रस अन्य सब्जीयों के रस में मिलाना चाहिए ।