कुटज (इन्द्रजौ) : औषधीय गुण और उपयोग
कुटज जिसे संस्कृत में कुटज, हिन्दी में कूड़ा या कुरैया, बंगला में कुरजी, मराठी में कुड़ा, गुजराती में कुड़ी, तमिल में वेप्पलाई, तेलुगु में कछोडाइस तथा लैटिन में Holarrhena antidysenterica कहा जाता है, एक अत्यंत उपयोगी औषधीय पौधा है। इसे सामान्यतः इन्द्रजौ भी कहा जाता है।
यह पौधा 5 से 10 फुट ऊँचा होता है। इसके पत्ते बादाम के पत्तों की तरह लंबे और चिकने होते हैं। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में इसके पत्तों का विशेष उपयोग होता है। यहाँ इसके फूलों की सब्जी बनाई जाती है और फलियों का साग व अचार भी तैयार किया जाता है। फलियों के भीतर जौ जैसे बीज निकलते हैं जिन्हें इन्द्रजौ कहा जाता है।
कुटज के फूल कड़वे होते हैं और इनसे भी पकवान बनाए जाते हैं। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं –
कृष्ण कुटज (काली जाति)
श्वेत कुटज (सफेद जाति)
कुटज का पेड़ मध्यम आकार का होता है। इसकी छाल कत्थई या पीली आभा लिए कोमल होती है। पत्ते 6–12 इंच लंबे और 1–1.5 इंच चौड़े होते हैं। फूल सफेद रंग के, चमेली जैसे सुगंधयुक्त होते हैं। फलियाँ 8–16 इंच लंबी होती हैं जिनमें कत्थई रंग के बीज रूई से ढके रहते हैं।
यह पौधा हिमालय, बंगाल, असम, उड़ीसा, दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में पाया जाता है। आयुर्वेद में इसे अतिसार, पेचिश, ज्वर, बवासीर और अनेक रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
🌱 कुटज के औषधीय प्रयोग
जलोदर
इन्द्रजौ की जड़ को पानी के साथ पीसकर 14–21 दिन तक नियमित सेवन करने से जलोदर में लाभ होता है।
पीलिया
पीलिया में इसका रस लगातार तीन दिन लेने से अच्छा परिणाम मिलता है।
पुराना ज्वर व बच्चों में दस्त
इन्द्रजौ और गिलोय की छाल का काढ़ा लाभकारी है। छाल को रातभर पानी में भिगोकर सुबह सेवन करने से पुराना ज्वर दूर होता है।
पेट में एंठन
गर्म किए हुए बीजों को पानी में भिगोकर लेने से एंठन में आराम मिलता है।
बवासीर
इन्द्रजौ को जामुन के साथ मिलाकर गोलियाँ बनाकर रात को सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
हैजा
इन्द्रजौ की जड़ और एरंड की जड़ को छाछ में घिसकर हींग मिलाकर लेने से हैजा में आराम मिलता है।
पथरी
इन्द्रजौ और नौसादर का चूर्ण दूध या चावल के पानी में लेने से पथरी गलकर बाहर निकल जाती है।
फोड़े‑फुंसियां
इन्द्रजौ की छाल और सेंधानमक को गाय के मूत्र में पीसकर लेप करने से लाभ होता है।
मुंह के छाले
इन्द्रजौ और काला जीरा का चूर्ण छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
दस्त व पेचिश
इन्द्रजौ का चूर्ण ठंडे पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से अतिसार समाप्त हो जाता है।
अग्निमान्द्य
इन्द्रजौ का चूर्ण 2 ग्राम लेने से पेट दर्द और मंदाग्नि दूर होती है।
कान से पीव बहना
इन्द्रजौ की छाल का चूर्ण कान में डालने से लाभ होता है।
वातशूल व वातज्वर
इन्द्रजौ का काढ़ा हींग के साथ लेने से वातशूल और वातज्वर में लाभ होता है।
पित्तज्वर
इन्द्रजौ, पित्तपापड़ा, धनिया, नीम की छाल आदि का काढ़ा पीने से पित्तज्वर दूर होता है।
पेट के कीड़े
इन्द्रजौ का चूर्ण सुबह‑शाम लेने से कीड़े नष्ट होकर बाहर निकल जाते हैं।
गर्भनिरोधक प्रयोग
इन्द्रजौ, सुवा सुपारी, कबाबचीनी और सौंठ का मिश्रण मासिक धर्म के बाद लेने से गर्भधारण नहीं होता।
डायबिटीज
इन्द्रजौ, बादाम और भुने चने का मिश्रण शुगर रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है और कमजोरी दूर करता है।
🌿 निष्कर्ष
कुटज एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। इसके बीज, छाल, पत्ते और फूल सभी आयुर्वेद में प्रयोग किए जाते हैं। यह विशेष रूप से दस्त, पेचिश, ज्वर, बवासीर, पथरी और डायबिटीज में लाभकारी है। उचित मात्रा और चिकित्सकीय परामर्श के साथ इसका प्रयोग रोगों को दूर करने में सहायक है।
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