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27.8.19

माइग्रेन(अधकपारी) के दर्द के आयुर्वेदिक,होम्योपैथिक उपचार


आधे सिर में होने वाले दर्द को आधा शीशी सिर दर्द , अधकपारी का दर्द या माइग्रेन का दर्द कहते हैं। माइग्रेन किसी दूसरे सिर से बिल्कुल अलग होता है। यह दर्द सिर के किसी एक भाग में काफ़ी तेज़ उठता है, जिससे रोगी का चैन से सोना-जगना मुश्किल हो जाता है। बुरी परिस्थिति में दर्द के साथ-साथ उल्टियाँ भी होती हैं। जिससे रोगी का कष्ट और बढ़ जाता है।
माइग्रेन का दर्द कुछ एक घंटों से लेकर कई दिनों तक बना रह सकता है। जब यह दर्द होता है तो सिर के नीचे की धमनी बड़ी हो जाती है, साथ ही सिर दर्द वाले हिस्से में सूजन भी आ जाती है। माइग्रेन का दर्द अनदेखा करने पर बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। रोगी को लकवा और ब्रेन हैमरेज भी हो सकता है।
माइग्रेन का दर्द आमतौर पर आधे सिर में होता है, इस कारण इसे अधकपारी भी कहा जाता है। लेकिन कई बार यह पूरे सिर को भी अपनी चपेट में ले सकता है। यह दो घंटे तक भी रह सकता है और 72 घंटे तक भी। इसके बारे में बता रही हैं इंद्रेशा समीर
एक अध्ययन के मुताबिक, माइग्रेन एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जिससे वैश्विक स्तर पर हर सातवां व्यक्ति पीड़ित है। भारत में 15 करोड़ लोग माइग्रेन की गिरफ्त में हैं। भारतीय महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा पीड़ित हैं। 24 फीसदी पुरुषों की तुलना में 76 फीसदी महिलाएं माइग्रेनग्रस्त हैं। 18 से 29 के बीच के लगभग 35 फीसदी युवा पीड़ित हैं। लगभग 30 फीसदी मरीज क्रॉनिक स्थिति वाले हैं। माइग्रेनग्रस्त लोगों में से 70 फीसदी में मानसिक तनाव, 46 फीसदी में उपवास, 52 फीसदी में यात्रा, 44 फीसदी में नींद की गडबड़ी, 13 फीसदी में मासिक धर्म की अनियमितता, 10 फीसदी में मौसम का बदलाव दर्द का कारण बनते दिखाई दिए। लगभग 34 फीसदी मरीजों में दौरे पड़ने के पीछे एक साथ कई कारण शामिल थे। बढ़ती उम्र के साथ माइग्रेन का दर्द कम होता पाया गया है।
क्यों होती है यह समस्या
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ट्राइगेमिनल नर्व में न्यूरोकेमिकल बदलाव और मस्तिष्क के रसायनों, खासतौर से सेरोटोनिन में असंतुलन की वजह से माइग्रेन पैदा होता है। सेरोटोनिन का स्तर कम होने पर न्यूरोपेप्टाइड का स्राव मस्तिष्क के बाहरी हिस्से में पहुंच कर माइग्रेन पैदा करता है। वैसे, इस रोग के वास्तविक कारणों का ठीक-ठीक पता चिकित्सा विज्ञानी अभी तक नहीं लगा सके हैं।


कुछ प्रमुख कारण

माइग्रेन का दर्द होने के सही कारणों का पता अभी तक नहीं किया जा सका है, लेकिन माइग्रेन के दौरों की पहचान करके इससे राहत दी जा सकती है।
1. कैफ़ीन का ज़्यादा सेवन करना
2. उच्च रक्तचाप
3. कई दिनों तक अधूरी नींद सोना
4. अधिक मानसिक तनाव रहना
5. मौसम बदलने का प्रभाव
6. दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग अधिक करना
7. हार्मोन असंतुलन
- हार्मोन में बदलाव माइग्रेन का कारण बन सकता है। मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति और गर्भावस्था के चलते महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव देखे जाते हैं। कई बार इस बदलाव की वजह से माइग्रेन का दर्द शुरू हो सकता है। हार्मोनल बदलाव के कारण ही पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग से ज्यादा पीड़ित होती हैं।
- मौसमी बदलाव दर्द का कारण बन सकता है। ज्यादा शोर, बार-बार बढ़ने-घटने वाली तेज रोशनी व धूप में आंखें चुंधियाना, बहुत तेज गंध वगैरह से संवेदनात्मक उत्तेजना बढ़ सकती है और माइग्रेन का दर्द शुरू हो सकता है।
- ज्यादा मसालेदार भोजन, शराब का ज्यादा सेवन, धूम्रपान, चॉकलेट जैसे कुछ मीठे पदार्थ, पनीर आदि माइग्रेन के दौरे का कारण बन सकते हैं।
- एलोपैथी की कुछ दवाओं की वजह से दर्द शुरू हो सकता है। महिलाओं में बर्थ कंट्रोल पिल्स माइग्रेन पैदा कर सकते हैं।
- सोने-जागने की लगातार अनियमितता दर्द का कारण बन सकती है।
- बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम और थकान से माइग्रेन शुरू हो सकता है।
- एक अध्ययन के मुताबिक, बहुत ज्यादा कैफीन का सेवन करने वाले यदि अचानक इसका सेवन बंद कर दें, तो माइग्रेन की चपेट में आ सकते हैं।
- तनाव और बेचैनी के माहौल में ज्यादा समय तक रहना पड़े, तो माइग्रेन की शुरुआत हो सकती है।
- सही समय पर भोजन न करने पर यह शुरू हो सकता है।
- पानी कम पीना दर्द का कारण हो सकता है।
- विटामिन की कमी माइग्रेन का कारण बन सकती है।
लक्षणों को पहचानें
- माइग्रेन की पहचान ऑरा से की जाती है। ऑरा दृष्टि संबंधी ऐसा लक्षण है, जिसमें रोगी को रह-रहकर आड़ी-टेढ़ी रेखाएं, रोशनी की चमकदार लकीरें और आंखों के सामने काले-काले धब्बे दिखाई देते हैं।
- सिर के एक हिस्से में फड़कता हुआ दर्द होता है।
- तेज रोशनी, गंध, आवाज के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता होती है।
- सिर दर्द के साथ बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा होती है।
- दिन भर बेवजह की उबासी रहती है।
- माइग्रेन के चलते कुछ लोगों में खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
- आंखों में तेज दर्द होता है।
- मिचली और उल्टी हो सकती है।
- आंखों के नीचे काले घेरे हो सकते हैं।
- गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।


बचकर रहें

- जीवनशैली का विश्लेषण करें और जरूरी सुधार करें। माइग्रेन से पीड़ित हैं, तो पनीर, चॉकलेट, कैफीन, शराब आदि से परहेज करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और फल आहार में शामिल करें। बथुआ, अंजीर, आंवला, अनार, अमरूद, सेब आदि ज्यादा लें। आंवले के अलावा अन्य खट्टे फलों से बचें। ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन-बी वाले आहार ज्यादा लें। दिन में सात-आठ गिलास पानी पिएं। ज्यादा नमक वाली चीजें कम खाएं।
- सही समय पर सोएं और नींद भरपूर लें।
- माइग्रेन में बिना डॉक्टरी सलाह के अनावश्यक दवाएं न लें।
- ज्यादा शोर वाली जगहों पर जाने से बचें।
- रोशनी की जगमगाहट और तेज धूप ऐसी स्थिति में नुकसानदेह हो सकती है।
- ज्यादा समय तक भूखे न रहें।
- जंक फूड समस्या बढ़ा सकता है, इसलिए उनसे बचकर ही रहें।
काम के घरेलू उपाय
- अदरक के कुछ टुकड़े खाएं। इससे मिचली की समस्या में भी राहत मिलती है।
- सिर दर्द वाले हिस्से में पिपरमिंट के तेल की मालिश करने से राहत मिलती है।
- दर्द हो तो बिस्तर पर लेटकर सिर को बेड से थोड़ा नीचे लटकाएं और जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ की नाक में सरसों के तेल या गाय के घी की तीन-चार बूंदें टपकाएं।
- प्राकृतिक चिकित्सकों के अनुसार, नाक से कुछ दिनों तक नियमित भाप लिया जाए, तो माइग्रेन ठीक हो सकता है।
- सिर, गर्दन और कंधों की मालिश कराएं।
- सिर, माथे और गर्दन पर तौलिया में बर्फ रखकर सिंकाई करें, आराम मिलेगा।
योग-प्राणायाम करें
माइग्रेन के रोगियों के लिए योग और प्राणायाम बड़े काम के साबित हो सकते हैं। हस्तपादासन, सेतुबंधासन, मर्जरासन, शिशु आसन पश्चिमोत्तानासन, पद्मासन, शशांकासन, हलासन, मत्स्यासन और शवासन माइग्रेन में विशेष लाभ पहुंचाते हैं। प्राणायामों में कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी करने चाहिए। इसी के साथ जलनेति भी करें। वास्तव में योग से प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है और माइग्रेन को ठीक करने में मदद मिलती है।
होम्योपैथी की मदद लें
होम्योपैथी डॉक्टरों के अनुसार, इस पद्धति से माइग्रेन पूरी तरह ठीक हो सकता है। यह लाक्षणिक चिकित्सा पद्धति है, इसलिए मरीज को अपने लक्षणों पर ठीक से ध्यान देकर डॉक्टर को बताना चाहिए। लक्षणों के आधार पर दवाएं दी जाती हैं।
यहां सबसे अच्छी होम्योपैथिक दवाओं की सूची है, जो माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए उपयोग की जाती हैं:
बेलडाडो: यह होम्योपैथिक दवा माइग्रेन के उपचार के लिए आदर्श है, जिसमें धड़कते सिरदर्द प्राथमिक सुविधा है. मरीज उसके सिर में पूर्णता की भावना का अनुभव करता है. सिरदर्द सूर्य के प्रकाश के संपर्क में बिगड़ जाती है. इस उपाय का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए भी किया जाता है, जो ठंड को पकड़ने या ठंड, नम हवा के संपर्क में होने के कारण होते हैं.
न्यूक्स वोमिका: न्यूक्ज़ वोमिका का प्रयोग माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए किया जाता है, जो गैस्ट्रिक मुद्दों के कारण होता है. इस होम्योपैथिक दवा का उपयोग करके अपच, बवासीर और कब्ज से विकसित आइग्रैन्स ठीक हो जाते हैं. यह एक प्रभावी उपाय है और जब अमीर भोजन खाने या शराब पीने के बाद सिरदर्द बिगड़ता है, तब मामलों में शीघ्र राहत प्रदान करता है.
स्पिजेलीया: यह होम्योपैथिक उपाय मुख्य रूप से माइग्रेन का सिरदर्द के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, जो सिर के बाईं ओर मौजूद होते हैं. यह बाएं तरफ माइग्रेन के रूप में जाना जाता है. सिर के बाएं लौकिक क्षेत्र, माथे, और आंखों पर सिर दर्द का अनुभव होता है. सिर के चारों ओर स्थित एक तंग बैंड की अनुभूति महसूस होती है या अनुभवी होती है.
सैन्गुनेरिया कनाडाईसिस: यह एक प्रभावी होम्योपैथिक चिकित्सा है. जिसका उपयोग सिर के दाहिनी ओर महसूस किए जाने वाले माइग्रेन के सिरदर्द के इलाज के लिए किया जाता है. दर्द और धड़कता हुआ सही पक्ष पर अनुभव होता है, सिर के पीछे से शुरू होता है और दाहिनी आंखों पर व्यवस्थित होता है. इस दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के इलाज के लिए भी किया जाता है जो दिन में होते हैं और दिन के दौरान खराब होते हैं. रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में माइग्रेन के लिए यह अच्छा है.
ग्लोनाइन: यह प्रभावी होम्योपैथिक दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के इलाज के लिए किया जाता है, जो सिर में अत्यधिक भीड़ से उत्पन्न होता है. मरीज को लगता है कि उसका सिर बड़ा होकर फट जाएगा. वह अपने सिर के चारों ओर गर्मी महसूस करता है. साथ ही आंखों के फैलाने वाले इस दवा का उपयोग माइग्रेन के सिरदर्दों के उपचार के लिए किया जाता है, जो लंबे समय तक सूरज के संपर्क में होते हैं.

आयुर्वेद में है इलाज

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेद में इसका सटीक इलाज है। जड़ी-बूटियों से इलाज तो संभव है ही, पंचकर्म के तहत शिरोधारा आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुंचा सकती है। इसमें खास जड़ी-बूटी से तैयार काढ़ा और तेल का इस्तेमाल किया जाता है। गुनगुना काढ़ा व तेल माथे के बीचोबीच डाला जाता है। 15 से 20 मिनट की प्रक्रिया से मरीज को राहत मिलती है। यह प्रक्रिया 25 से 30 दिन चलती है। इससे पहले शरीर को शुद्ध करने के लिए स्टीम बाथ समेत दूसरी प्रक्रियाएं भी की जाती हैं। शिरोधारा के साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी लेनी होती है। इससे बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है। 
देसी घी
देसी घी के फायदों के बारे में तो सबने सुना ही होगा। लेकिन माइग्रेन के लिए ये एक लाजवाब औषधि हैं। माइग्रेन में रोजाना गाय के देसी घी के दो बूंदे नाक में डाले या फिर इससे दर्द वाली जगह पर लगाए। इससे कुछ ही देर में आपका माइग्रेन दूर हो जाएगां।


बंद गोभी 
बंद गोभी में काफी फाइबर पाया जाता हैं, ये पेट के साथ ही माइग्रेन के लिए काफी असरदायक है। बंद गोभी के पत्तियों को पीसकर गर्दन और कंधे पर लगाने से माइग्रेन से छुटकारा पा सकते हैं।
गाजर और खीरे के रस सलाद में गाजर और खीरा तो आप खाते ही होंगे, लेकिन आप चाहे इनसे इनसे माइग्रेन की समस्‍या से निजात पा सकते हैं। गाजर और खीरे का रस निकाले। इन्‍हें कंधे और गर्दन पर लगाएं इससे आपको आराम मिलेगा।
नींबू का छिलका सेहत और सौंदर्य में नींबू को काफी कारगर माना जाता है, नींबू के छिलके को पीसकर इसका लेप तैयार कर लें। इस लेप को माथे पर लगाएं। दर्द से तुरंत राहत मिलेगी।
कपूर
कपूर में एंटी बैक्‍टीरियल, एंटी फंक्‍शनल जैसे मेडिकल गुण होते है जो कि स्किन से संबंधित कई समस्‍या को दूर करता है। कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करने से माइग्रेन के कारण होने वाले दर्द में राहत मिलती है।
डॉक्टर की मदद लें
तकलीफ ज्यादा हो, बार-बार हो, तो डॉक्टर की सलाह लेकर जरूरी जांचें करानी चाहिए।
- आनुवंशिक वजहें हों, तो स्नायविक जांच के साथ मरीज का पारिवारिक इतिहास देखा जा सकता है।
- रक्त की जांच में रक्त कोशिकाओं से संबंधित समस्याओं को देखा जाता है।
- मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग करके ट्यूमर, स्ट्रोक, मस्तिष्क में रक्तस्राव, संक्रमण तथा मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की स्थिति की जांच की जाती है।
- कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी या सीटी स्कैन से ट्यूमर, संक्रमण, मस्तिष्कीय क्षति या रक्तस्राव तथा अन्य कई और समस्याओं को देखा जा सकता है।

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