18.3.16

सिंघाड़े के स्वास्थ्य लाभ : benefits of water chestnut






सिंघाडे को ट्रापा बिसपीनोसा भी कहा जाता है। यह त्रिकोने आकार का फल होता है । यह स्वास्थ के लिए पौष्टिक और विटामिन युक्त फल है। सिंघाडे का प्रयोग कच्चा और पका कर दोनों ही रूपों में किया जाता है। साथ ही सिंघाड़े का आटे का प्रयोग भी किया जाता है। सिंघाडे में विटामिन ए, बी और सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह खनिज लवण और कार्बोहाइड्रेट युक्त भी होता है। अब जानते हैं क्या हैं सिंघाड़े में छिपे हुए आयुर्वेदिक गुण जो आपके स्वास्थ को लाभ पहुंचा सकते हैं।

*दिल के आकार से मिलता-जुलता लाल और हरे रंग का सिंघाड़ा पानी में पैदा होता है. यह एक मौसमी फल है और इसमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इन दिनों कई तरह की बीमारियों से बचाने में कारगर होते हैं. सिंघाड़े का इस्तेमाल कई तरह किया जाता है. कुछ लोग इसे कच्चा खाना ही पसंद करते हैं और कुछ उबालकर. कई जगहों पर इसे सब्जी के तौर पर भी प्रयोग में लाया जाता है|
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*पानी में उगने वाला सिंघाड़ा सेहत के लिए पौष्टिकता से भरपूर होता है। इतना ही नहीं, यह कई बीमारियों में भी फायदेमंद साबित होता है।

*पानी में पैदा होने वाला तिकोने आकार का फल है सिंघाड़ा। इसके सिर पर सींग की तरह दो कांटे होते हैं, जो छिलके के साथ होते हैं। तालाबों तथा रुके हुए पानी में पैदा होने वाले सिंघाड़े के फूल अगस्त में आ जाते हैं, जो सितम्बर-अक्तूबर में फल का रूप ले लेते हैं। छिलका हटाकर जो बीज पाते हैं, वही कहलाता है सिंघाड़ा। इस जलीय फल को कच्चा खाने में बड़ा मजा आता है। सिंघाड़ा अपने पोषक तत्वों, कुरकुरेपन और अनूठे स्वाद की वजह से खूब पसंद किया जाता है।

*सिंघाड़ा शरीर को ठंडक प्रदान करने का काम करता है. यह प्यास को बुझाने में भी कारगर होता है. दस्त होने पर इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है|





*फलाहार में होता है शामिल-
व्रत-उपवास में सिंघाड़े को फलाहार में शामिल किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर और पीसकर बनाए गए आटे का सेवन किया जाता है। असल में एक फल होने के कारण इसे अनाज न मान कर फलाहार का दर्जा दिया गया है। यूं तो सिंघाड़े को कच्चा ही खाया जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे हल्का उबालकर नमक के साथ खाते हैं। सिंघाड़े से साग-सब्जी और बर्फी, हलवा जैसे मिष्ठान भी बनते हैं, जो अनोखा स्वाद लिए होते हैं।

*इनमें डीटॉक्सि‍फाइंग गुण पाया जाता है. ऐसे में अगर किसी को पीलिया है तो सिंघाड़े का इस्तेमाल उसके लिए बहुत फायदेमंद होगा. यह शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी कारगर है|.

*सिंघाड़े का इस्तेमाल रोजाना की डाइट में किया जा सकता है. इनमें उच्च मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं और कम कैलोरी होने के कारण भी यह स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है.|

*सिंघाड़े की बेल को पीसकर उसका पेस्ट, शरीर में जलन वाले स्थान पर लगाने से जलन कम हो जाती है। और लाभ मिलता है।
*यदि मांसपेशियां कमजोर हैं या शरीर में दुर्बलता हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें एैसा करने से शरीर की दुर्बलता और कमजोरी दूर होती है।

*जिन महिलाओं को मूत्र संबंधी रोग है वें सिंघाड़े का आटा ठंडे पानी में लें।

*सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है। इसलिए सिंघाड़े का नियमित सेवन करना चाहिए।

*गले से सबंधी बीमारियों के लिए सिंघाड़ा बहुत ही लाभदायक है। गला खराब होने पर या गला बैठने पर आप सिंघाड़े के आटे में दूध मिलाकर पीयें इससे जल्दी ही लाभ मिलेगा। गले में टांसिल होने पर सिंघाड़ा का सेवन करना न भूलें।

*पौष्टिकता से भरपूर-

सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी व सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स, रायबोफ्लेबिन जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़े में भैंस के दूध की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने तो अमृत तुल्य बताते हुए इसे ताकतवर और पौष्टिक तत्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव हो सकता है। बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह काफी गुणकारी है।
*ऊर्जा का अच्छा स्रोत
सिंघाड़े में कार्बोहाइड्रेट काफी मात्र में होता है। 100 ग्राम सिंघाडे में 115 कैलोरी होती हैं, जो कम भूख में पर्याप्त भोजन का काम करता है।

*थायरॉयड और घेंघा रोग में लाभदायक-

सिंघाड़े में मौजूद आयोडीन, मैग्नीज जैसे मिनरल्स घेंघा रोग की रोकथाम में अहम भूमिका निभाते हैं।
*सिंघाड़े में आयोडीन और मैगनीज जैसे कई प्रमुख मिनरल्स होते हैं जो थॉयरॉइड ग्लैंड की सक्रियता को बूस्ट करने का काम करते हैं.

*जो लोग अस्थमा के रोगी हैं उनके लिए सिंघाड़ा वरदान से कम नहीं है। अस्थमा के रोगीयों को 1 चम्मच सिंघाड़े के आटे को ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए। एैसा नियमित करने से अस्थमा रोग में लाभ मिलता है।

*बवासीर के रोग में सिंघाड़े के सेवन से लाभ मिलता है। यदि सूखे या खूनी बवासीर हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें। जल्द ही बवासीर में कमी आयेगी और रक्त आना बंद हो जाएगा।
*वे महिलाएं जिनका गर्भाशय कमजोर हो वे सिंघाड़े का या सिंघाडे़ का हल्वे का सेवन नियमित करती रहें। लाभ मिलेगा।

*दूर करे गले की खराश-

सिंघाड़े में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व गले की खराश और कफ कम करने में प्रभावी रूप से फायदेमंद होते हैं। खांसी के लिए यह टॉनिक का काम करता है।

*टॉन्सिल का इलाज

इसमें मौजूद आयोडीन गले में होने वाले टॉन्सिल के इलाज में लाभदायक है। इसमें ताजा फल या चूर्ण खाना दोनों फायदेमंद होता है। सिंघाड़े को पानी में उबाल कर कुल्ला करने से भी आराम मिलता है।

*गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान

गर्भाशय की दुर्बलता व पित्त की अधिकता से गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही जिन स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है, उन्हें सिंघाड़ा खाने से लाभ होता है। इसके सेवन से भ्रूण को पोषण मिलता है और वह स्थिर रहता है। सात महीने की गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है। सिंघाड़े के नियमित और उपयुक्त मात्र में सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ व सुंदर होता है।

*सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है। इसलिए सिंघाड़े का नियमित सेवन करना चाहिए।
*गले से सबंधी बीमारियों के लिए सिंघाड़ा बहुत ही लाभदायक है। गला खराब होने पर या गला बैठने पर आप सिंघाड़े के आटे में दूध मिलाकर पीयें इससे जल्दी ही लाभ मिलेगा। गले में टांसिल होने पर सिंघाड़ा का सेवन करना न भूलें।

*सिंघाडे़ में आयोडीन की प्रर्याप्त मात्रा होने की वजह से यह घेघां रोग में फायदा करता है।

*आखों की रोशनी को बढ़ाने में भी सिंघाडा फायदा करता है क्योंकि इसमें विटामिन ए सही मात्रा में पाया जाता है।

*यौन दुर्बलता को दूर करता है|

यह यौन दुर्बलता को भी दूर करता है। 2-3 चम्मच सिंघाड़े का आटा खाकर गुनगुना दूध पीने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है।





*सूजन और दर्द में राहत-
सिंघाड़ा सूजन और दर्द में मरहम का काम करता है। शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर सिंघाड़े के छिलके को पीस कर लगाने से आराम मिलता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। यह त्वचा की झुर्रियां कम करने में मदद करता है। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।
* इसमें पॉलीफेनॉलिक और फ्लेवोनॉयड एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसके अलावा ये एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-कैंसर गुणों से भी भरपूर होता है. साथ ही यह अनिद्रा की समस्या को दूर करने में भी सहायक होता है|
*बालों का संरक्षक
बाल झड़ने की समस्या आम है। सिंघाड़े में मौजूद निमैनिक और लॉरिक जैसे एसिड बालों को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं।
*फटी एड़ियों से छुटकारा
एड़ियां फटने की समस्या शरीर में मैग्नीज की कमी के कारण होती है। सिंघाड़ा ऐसा फल है, जिसमें पोषक तत्वों से मैग्नीज ग्रहण करने की क्षमता होती है। सिंघाड़े के नियमित सेवन से शरीर में मैग्नीज की कमी नहीं हो पाती और शरीर हेल्दी बनता है।
*वजन बढ़ाने में सहायक
सिंघाड़े के पाउडर में मौजूद स्टार्च पतले लोगों के लिए वरदान साबित होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर मोटा और शक्तिशाली बनता है।
*बुखार व घबराहट में फायदेमंद
*रोज 10-20 ग्राम सिंघाड़े के रस का सेवन करने से आराम मिलता है।
*मूत्र संबंधी बीमारियों के इलाज में यह सहायक है।
पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना जैसी बीमारियों में सिंघाड़े का सेवन लाभदायक है।
*नाक से नकसीर यानी खून बहने पर सिघाड़े के सेवन से फायदा होता है। यह नाक से बहने वाले नकसीर को बंद कर देता है।
*प्रसव होने के बाद महिलाओं में कमजोरी आ जाती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए महिलाओं को सिंघाड़े का हलवा खाना चाहिए यह शरीर में होने वाली कमजोरी को दूर करता है।





*कैल्शियम की सही मात्रा की वजह से सिंघाड़ा हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है।
* सिंघाड़े के इस्तेमाल से पुरूषों के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है। साथ यह काम की क्षमता को भी बढ़ता है। इसका प्रयोग आप सिंघाड़े के हलवे के रूप में भी कर सकते हैं। अथवा दूध में दो चम्मच सिंघाड़े का आटा मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं।
*सिंघाड़ा कोई साधारण फल नहीं है इसमें छिपे हैं कई गुण जो आपके शरीर और स्वास्थ दोनों के लिए लाभदायक हैं। सिंघाड़े के ये गुण शायद अभी तक आपको नहीं मालूम थे। अब नियमित रूप से इसका सेवन करें ताकी आप और आपका परिवार स्वस्थ जीवन जी सके।
*दाद खुजली का इलाज
नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को पीसकर नियमित रूप से लगाने पर दाद-खुजली ठीक हो जाती है।

*नकसीर होने पर राहत
जिन लोगों की नाक से खून आता है, उन्हें बरसात के मौसम के बाद कच्चे सिंघाड़े खाना फायदेमंद है।

*खाने में सावधानियां
एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 5-10 ग्राम ताजे सिंघाड़े खाने चाहिए। पाचन प्रणाली के लिहाज से सिंघाड़ा भारी होता है, इसलिए ज्यादा खाना नुकसानदायक भी हो सकता है। पेट में भारीपन व गैस बनने की शिकायत हो सकती है। सिंघाड़ा खाकर तुरंत पानी न पिएं। इससे पेट में दर्द हो सकता|







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