20.8.19

जोड़ों का दर्द के कारण व घरेलू ,आयुर्वेदिक उपचार



जोड़ों का दर्द एक या एक से अधिक जोड़ों को प्रभावित कर सकता हैं। जोड़ों का दर्द बहुत कष्टप्रद होता है। इसकी शुरुआत घुटनों में हल्के दर्द के साथ होती है। धीरे-धीरे यह दर्द हाथों की अंगुलियों के जोड़ों में भी आ जाता है। यह दर्द हिलने-डुलने से बढ़ता जाता है। चोटों, उम्र, मोटापा, संरचनात्मक असामान्यताएं, मांसपेशियों में लचीलेपन की कमी आदि जिम्‍मेदार कारक होते हैं। लेकिन कुछ बीमारियों गठिया, बर्साइटिस और मांसपेशियों के दर्द आदि भी जोड़ों के दर्द का कारण होते हैं। 
गाउट
गाउट को अर्थराइटिस का एक प्रकार है। खून और ऊतकों में यूरिक एसिड की मात्रा के बहुत ज्‍यादा बढ़ जाने के कारण जोड़ों में सूजन का कारण बनता है। एक्‍यूट गाउट एक दर्दनाक स्थिति है जो केवल एक ही जोड़ को प्रभावित करती है। जबकि क्रोनिक गाउट में दर्द और सूजन के प्रकरणों को दोहराया जाता है। यह एक से अधिक जोड़ को प्रभावित करता है। यूरिक एसिड के क्रिस्‍टल जोड़ों में जमा होकर जोड़ों में सूजन का कारण बनते हैं।

रूमेटाइड अर्थराइटिस
रूमेटाइड अर्थराइटिस (आर ए) एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। इसमें जोड़ों और आसपास के ऊतकों में सूजन की समस्‍या होती है। यह अन्‍य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी के होने के निश्चित कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, इसलिए मेडिकल साइंस की भाषा में इसे आटो-इम्‍यून डिजीज यानी स्‍व-प्रति‍रक्षित बीमारी कहा जाता है। जिसका अर्थ है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली भ्रान्ति पूर्वक स्‍वस्‍थ ऊतकों पर हमला करती है। इसके कारण सूजन आना और हाथ-पैर के जोड़ों में तेजदर्द की शिकायत सबसे अधिक दिखती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस
यह सबसे आम प्रकार का अर्थराइटिस है। यह बढ़ती उम्र के साथ होता है। यह अंगुलियों और कूल्हों के अलावा पूरे शरीर का भार सहन करने वाले घुटनों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इस समस्‍या के होने पर घुटनों में सूजन और चलते समय घुटने में तेज दर्द होता है। घुटने की नर्म कार्टिलेज, हड्डी को मुलायम तकिये की तरह सहारा देती है, पर उम्र बढ़ने के साथ-साथ वह घिसती जाती है और कम हो जाती है, जिस कारण हड्डियां एक-दूसरे से रगड़ खाने लगती हैं। यह दर्द और सूजन का कारण बनती हैं। वैसे तो यह बीमारी किसी भी महिला या पुरुष को हो सकती है, पर 50 की उम्र पार कर गईं ज्यादातर महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद उनके हार्मोन स्तर में बदलावइस समस्या का आसानी से शिकार हो जाती हैं।


टेन्डीनिटिस

पैरों व हाथों की अंगुलियों के छोटे जोड़ों में स्थित नसों (टेंडन्स) की झिल्ली में सूजन आ जाने से दर्द होना। यह रेशेदार संरचना है जो हड्डी को मांसपेशियों से मिलाती है। टेन्डीनिटिस चोट या अति प्रयोग के कारण होता है। साथ ही उम्र बढ़ने के साथ नसों में लोच खाने के कारण भी यह समस्‍या होती है। रुमेटी गठिया या मधुमेह जैसे रोग भी इस समस्‍या का कारण हो सकते हैं। टेन्डीनिटिस आमतौर पर कोहनी, कंधे और कलाई में पाया जाता है। नसों के पास जोड़ों में दर्द और कोमलता, रात के समय दर्द और मूवमेंट या गतिविधि के दौरान दर्द का बदतर होना जैसे लक्षण पाये जाते हैं।
घुटने का अर्थराइटिस
घुटने का दर्द वह दर्द है जो घुटने के विशेष हिस्‍सों खासकर सामने और बीच में होता है। घुटने में कार्टिलेज के धीरे-धीरे क्षीण होने से यह समस्‍या होती है। कार्टिलेज चिकना और फिसलन पदार्थ है, जो घुटने को आगे झुकते और सीधा करते समय हड्डियों को कुशन और रक्षा देता है। लेकिन कार्टिलेज पर असर होने से घुटनों में फिसलन अनुभव नहीं होती और घुटने की हड्डियां आपस में रगड़कर घर्षण का अनुभव करती है। इसके कारण घुटने आसानी से मूव नहीं कर पाते और उनमें कठोरता, सूजन और दर्द का अनुभव होता है।
ऑस्‍टियोमायइलिटिस
ऑस्‍टियोमायइलिटिस बैक्टीरिया या अन्य कीटाणुओं के कारण होने वाला हड्डी संक्रमण है। आमतौर पर हड्डी संक्रमण बैक्टीरिया के कारण होता है। लेकिन यह कवक या अन्य कीटाणुओं के कारण भी हो सकता है। इस समस्‍या से पीड़ि‍त होने पर बैक्टीरिया हड्डी के बगल में संक्रमित त्‍वचा, मांसपेशियों या चोट के कारण हड्डी में फैल सकता है। या संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्से में शुरू होकर रक्त के माध्यम से हड्डी में फैल सकता है। या संक्रमण हड्डी की सर्जरी के बाद शुरू हो सकता हैं।
बेकर्स सिस्ट : 
घुटने के जोड़ में सिनोवियल फ्लूड का निर्माण होता है, जो जोड़ों को आपस में रगड़ने से रोकता है। जब यह फ्लूड अधिक मात्रा में बनने लगता है, तो घुटने के पिछले हिस्से में इकट्ठा होने लगता है, जिस कारण घुटने में सूजन आती है और पीड़ित व्यक्ति असहज महसूस करता है।
लिगामेंट का टूटना : 
चोट लगने पर इनके टूट जाने से भी घुटनों व जोड़ों का दर्द होता है। लिगामेंट एक प्रकार के लचीले टिशू होते हैं, जो जोड़ों को आपस में जोड़ कर रखते हैं।
बर्साइटिस
बर्साइटिस बर्सा की सूजन और जलन है। बर्सा तरल पदार्थ से भरी थैली है जो मांसपेशियों, नसों और हड्डियों के बीच एक तकिया के रूप में कार्य करती है। बर्साइटिस अक्‍सर अति प्रयोग का परिणाम होता है। यह गतिविधि के स्तर में बदलाव जैसे मैराथन के लिए प्रशिक्षण ओर अधिक वजन के कारण हो सकता है।
बर्साइटिस चोट, रुमेटी अर्थराइटिस, गाउट और संक्रमण के कारण होता है। लेकिन कभी-कभी इसके कारण नहीं पाये जाते। बर्साइटिस सामान्यतः अत्यधिक दबाव के कारण होता है। कंधा, कोहनी, कूल्‍हा और घुटना सबसे अधिक प्रभावित होता है। इस समस्‍या के होने पर स्थानीय जोड़ों में दर्द और कठोरता बनी रहती है और साथ ही बर्सा के चारों ओर घेरे में जोड़ों के आसपास सूजन रहती है।
डिस्लोकेशन : 
जोड़ के अपनी जगह से हिल जाने या उखड़ जाने के कारण भी दर्द होने लगता है।
जोड़ों के दर्द के उपचार -
पुराने समय में उम्र बढ़ने के साथ−साथ व्यक्ति को जोडों में दर्द की परेशानी होती थी, लेकिन आज के समय में यह समस्या कम उम्र में ही तकलीफ देने लगती हैं और इसके पीछे मुख्य कारण है व्यक्ति का गलत लाइफस्टाइल। वैसे तो लोग जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए दवाइयों का सेवन करते हैं, लेकिन आज हम आपको इस दर्द से मुक्ति दिलाने के लिए कुछ आसान व घरेलू उपाय बता रहे हैं−
हीट एंड कोल्ड पैक
पीठ के निचले हिस्से व गठिया के दर्द से निजात दिलाने में हीट एंड कोल्ड पैक का इस्तेमाल बेहद प्रभावकारी होता है। जहां हीट मसल्स को रिलैक्स करते हैं और स्टिफनेस दूर होती है। इसके लिए आप गर्म पानी की बोतल व हीट पैड का प्रयोग करें।
वहीं कोल्ड पैक के लिए आप बर्फ का प्रयोग करें। इसके लिए आप कपड़े में बर्फ लपेंटे और प्रभावित स्थान पर रखें। इससे दर्द व सूजन में आराम मिलेगा।
सेंधा नमक
मांसपेशियों व जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए सेंधा नमक से नहाना एक बेहद पुराना नुस्खा है। मैग्नीशियम और सल्फेट में समृद्ध सेंधा नमक आसानी से स्किन के अब्जार्ब हो जाते हैं, जिससे आपको सूजन, मांसपेशियों की ऐंठन व दर्द से निजात मिलती है। जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए बाथटब में गुनगुना पानी डालकर उसमें दो कप सेंधा नमक डालें और करीबन 20 मिनट के लिए इस पानी में बैठें। इससे आपको तुरंत जोड़ों के दर्द से निजात मिलेगी।


सेब का सिरका

दो चम्मच सेब का सिरका
एक गिलास गर्म पानी
सेब के सिरके को पानी में डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।
फिर इस पानी को पी जाएं। संभव हो, तो भोजन से पहले इसे पिएं।
आप सेब के सिरके को थोड़े-से नारियल तेल में मिक्स करके प्रभावित जगह पर लगा भी सकते हैं।
आप प्रतिदिन कम से कम दो बार तो जरूर करें।
सेब के सिरके में एसिटिक एसिड होता है, जो एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। इस गुण के कारण ही यह जोड़ों में दर्द व घुटने की सूजन को कम कर सकता है । घुटने के दर्द का इलाज करने के लिए आप इस विधि को अपना सकते हैं।
जरूरी है व्यायाम
सिर्फ जोड़ों में ही नहीं, बल्कि शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द का एक कारण व्यक्ति का व्यायाम न करना भी होता है। दरअसल, जब व्यक्ति व्यायाम नहीं करता तो उसका वजन तो बढ़ता है ही, साथ ही शारीरिक रूप से एक्टिव न होने पर कई तरह की बीमारियां उसे अपनी चपेट में ले लेती हैं। इसलिए सिर्फ जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए ही नहीं, अपितु स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन कुछ देर व्यायाम अवश्य करें।
हल्दी
एक चम्मच हल्दी
एक गिलास नारियल/बादाम का दूध
सबसे पहले दूध को गर्म कर लें।
फिर इसमें हल्दी को डालकर मिक्स कर दें।
अब आप इस दूध को हल्का गर्म होने पर पिएं।
आप रोज दो बार यह दूध पी सकते हैं।
हल्दी में करक्यूमिन नामक प्रमुख तत्व पाया जाता है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। कुछ वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि हल्दी के प्रयोग से जोड़ों के दर्द व घुटने की सूजन को कम किया जा सकता है। इसलिए, हल्दी के जरिए घुटने के दर्द का इलाज किया जा सकता है।
घटाए वजन
जोड़ों के दर्द का एक मुख्य कारण अधिक वजन भी होता है। वजन अधिक होने पर जोड़ों व शरीर की हड्डी पर जोर पड़ता है, जिसके कारण उनमें दर्द होता है। ऐसे में आप अपने वजन को संतुलित रखने का प्रयास करें। साथ ही अपनी डाइट पर भी ध्यान दें ताकि आपके शरीर को पर्याप्त पोषण प्राप्त हो और आपका शरीर रोगमुक्त रहे। जिन लोगों को जोड़ों में दर्द होता है, उन्हें अपनी डाइट में ओमेगा 3 फैटी एसिड, ताजे फल व सब्जियां व अधिक से अधिक एंटी−ऑक्सीडेंट्स को शामिल करें।


अदरक-

अदरक का एक इंच टुकड़ा
एक कप पानी
साफ कपड़ा
अदरक को पानी में डालकर करीब पांच मिनट तक उबालें।
इसके बाद पानी को छानकर थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें।
फिर कपड़े को इस पानी में डालकर निचोड़ लें और प्रभावित जगह पर रखें।
अब शरीर के प्रभावित हिस्से को इस कपड़े से लपेट दें।
आप इस पानी को चाय की तरह पी भी सकते हैं।
बेहतर परिणाम के लिए इसे दिन में कई बार किया जा सकता है।
अगर आपको ऑस्टियोअर्थराइटिस के कारण घुटने में दर्द हो रहा है, तो आप इससे निपटने के लिए अदरक का इस्तेमाल कर सकते हैं । अदरक में जिंजेरॉल पाया जाता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है। साथ ही इसे एनाल्जेसिक यानी दर्द को कम करने वाली जड़ी-बूटी भी माना गया है। आप घुटने के दर्द का इलाज करने के लिए अदरक का प्रयोग कर सकते हैं।

 लाल मिर्च
तीन चम्मच लाल मिर्च
एक कप जैतून का तेल
आधा कप बीवैक्स का चूर्ण
एक डबल बॉयलर
एक जार
लाल मिर्च को जैतूल के तेल में मिक्स कर दें।
इसे डबल बॉयलर में डालकर मध्यम आंच पर करीब 10 मिनट तक उबालें।
अब इसमें बीवैक्स को डालकर लगातार हिलाते रहें।
बीवैक्स के पूरी तरह घुलने और मिश्रण के मुलायम होने तक इसे हिलाते रहें।
इसके बाद मिश्रण को करीब 10 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें और बाद में बाहर निकालकर फिर से फेंटें।
अब इसे फिर से 15 मिनट के लिए ठंडा होने दें और एक बार फिर अच्छी तरह फेंटें।
आपका मिश्रण तैयार है। अब इसे जार में डालकर ढक दें और फ्रिज में रख दें।
अब आपको जब भी जरूरत हो, इसका इस्तेमाल करें।
आप इस पेस्ट को दिनभर में कई बार प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं।
लाल मिर्च में कैप्साइसिन पाया जाता है, जो घुटनों के दर्द को ठीक करने का काम कर सकता है। कैप्साइसिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी व एनाल्जेसिक गुण पाए जाते हैं, जो प्राकृतिक रूप से दर्द निवारक का काम करते हैं। घुटनों के दर्द का इलाज लाल मिर्च से किया जा सकता है।

मेथी दाने
दो चम्मच मेथी दाने
एक गिलास पानी
पानी में मेथी दाने डालकर रातभर के लिए छोड़ दें।
अगली सुबह पानी को छानकर पी लें।
आप पानी के साथ मेथी दानों को पीसकर पेस्ट भी बना सकते है। फिर इस पेस्ट को प्रभावित जगह पर लगाएं।
आप रोज एक बार इस पेस्ट का इस्तेमाल जरूर करें
मेथी दानों में भी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण होते हैं, जो पेन किलर की तरह काम करते हैं। इसके इस्तेमाल से घुटने की सूजन को कम किया जा सकता है । मेथी दाने के इस्तेमाल से घुटनों के दर्द का इलाज किया जा सकता है।


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जोड़ों का दर्द,संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| औषधि से बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं| बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज़ के बावजूद निराश रोगी इस औषधि से आरोग्य हुए हैं| त्वरित असर औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं|

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पीलिया रोगी का आहार ,परहेज व उपचार:Piliya rog Ayurvedic nuskhe


 पीलिया यकृत की विकृति अर्थात यकृत के रोगग्रस्त होने के कारण होने वाला रोग है | यकृत के रोग ग्रस्त होने के बाद सबसे पहले लक्षण के रूप में पीलिया (Jaundice) ही प्रकट होता है | इसमें रोगी के त्वचा, नाखूनों, आँखों, एवं मूत्र में पीले रंग की अधिकता हो जाती है | इसका मुख्य कारण रक्त में पित रस की अधिकता (Bile Juice) होना होता है | वैसे दिखने में यह बहुत ही साधारण सा रोग प्रतीत होता है , लेकिन अगर सही समय पर उपचार एवं उचित आहार न लिए जाएँ तो पीलिया जानलेवा रोग बन जाता है |
पीलिया के लक्षण 
पीलिया होने पर निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते है |
रोगी की त्वचा, नाख़ून एवं आँखों में पीलापन आने लगता है |
भूख कम लगने लगती है |
चक्कर आना, जी मचलाना एवं उलटी होना |
पेट दर्द होना |
सिरदर्द होना |
पेशाब में पीलापन |
शरीर कमजोर हो जाता है |
रोगी को कब्ज एवं अरुचि जैसी समस्याएँ भी होने लगती है |
अधिकतर शाम के समय रोगी को तीव्र बुखार आती है | 
 

पीलिया रक्‍त में बिलीरुबिन की मात्रा का बढ़ना है। पीलिया या ज्‍वाइंडिस का उपचार संभव है लेकिन पीलिया के दौरान और पीलिया के रोगी क्‍या खाएं और क्‍या न खाए यह भी अहम है। अक्‍सर हमें पीलिया में परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा बहुत से लोगों द्वारा सलाह दी जाती है पीलिया में क्‍या क्‍या नहीं खाना चाहिए। पीलिया के उपचार के दौरान आपको पीलिया के आहार में भी विशेष ध्‍यान देना चाहिए। क्‍योंकि कुछ खाद्य पदार्थ पीलिया के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ पीलिया के लक्षणों को बढ़ाने का भी कारण हो सकते हैं। इसलिए पीलिया रोगी के साथ ही उनके परिजनों को पीलिया में क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं इसकी जानकारी होना आवश्‍यक है।

ज्‍वाइंडिस एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है जिसमें शरीर का रंग पीला पड़ने लगता है। पीलिया रक्‍त में बिलीरुबिन का एक बिल्‍डअप है। बिलीरुबिन एक पीला वर्णक है जो लाल रक्‍त कोशिकाओं के टूटने के दौरान जारी किया जाता है। इनकी अधिकता के कारण शरीर के बहुत से अंग जैसे त्‍वचा, आंखें, मसूड़े और नाखून आदि का रंग पीला पड़ने लगता है। लीवर आमतौर पर रक्‍त से बिलीरुबिन को हटाने का काम करता है इसलिए पीलिया आमतौर पर जिगर या लीवर की बीमारी से संबंधित होता है।
 पीलिया के अधिकांश मामले नवजात शिशुओं, छोटे बच्‍चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले वयस्‍कों में भी हो सकता है। अधिकांश मामलों में बिलीरुबिन की मात्रा रक्‍त में 2 से 3 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर या इससे अधिक होने पर पीलिया के लक्षणों का कारण बनता है।
 तेल मसालेदार, खट्टा, नमकीन, क्षारीय और बहुत गर्म खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और शराब आदि पीलिया रोग का कारण बनता है। बढ़ा हुआ पित्त (in the form of bile) तब यकृत के रक्‍त और मांसपेशीय ऊतको (muscular tissue) को कमजोर कर देता है जिससे यकृत के चैनलों में अवरोध उत्पन्न होता है और इस प्रकार पित्त को रक्‍त में वापस भेज दिया जाता है जिससे आंखों और त्वचा का रंग पीला हो जाता है। दिन में सोना, यौन गतिविधी में अतिसंवेदनशीलता, अधिक शारीरिक परिश्रम, वासना, भय, क्रोध और तनाव आदि भी पीलिया के कारण हो सकते हैं।
 किसी भी स्‍वस्‍थ्‍य व्‍यक्ति या रोगी के लिए आहार का विशेष महत्‍व होता है। इसी तरह पीलिया रोगी के लिए कुछ विशेष प्रकार के आहार होते हैं जो बहुत ही फायदेमंद होते हैं। भोजन या आहार करने के बाद पाचन के दौरान यकृत पित्त का उत्‍पादन करता है जो आंतों में मौजूद वसा को तोड़ने में प्रभावी है। इसके अलावा लीवर खाना पचाने वाले पोषक तत्‍वों, विषाक्‍त पदार्थों और दवाओं के प्रसंस्‍करण या चयापचय के लिए भी जिम्‍मेदार है। सभी खाद्य और पेय पदार्थों का शरीर द्वारा उपयोग करने के लिए स्‍वस्‍थ यकृत की आवश्‍यकता होती है। लेकिन विभिन्‍न पोषक तत्‍वों और रसायनों को अलग-अलग पचाया जाता है और चयापचय किया जाता है।
लेकिन यदि आप आसानी से न पचने वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं तो आपका पाचन तंत्र और यकृत सही तरीके से काम नहीं करता है। परिणामस्‍वरूप शरीर में विषाक्‍तता की मात्रा अधिक हो जाती है। इसलिए आपको पीलिया के दौरान कुछ विशेष प्रकार के हल्‍के और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।
 पीलिया रोगी के उपचार के दौरान डॉक्‍टर रोग की गंभीरता के अनुसार कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को खाने का सुझाव देते हैं। इसके अलावा यह किसी अंतर्निहित चिकित्‍सा स्थितियों के आधार पर आहार अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे विशेष खाद्य और पेय पदार्थ होते हैं जो पीलिया रोगी के आहार में शामिल किये जा सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद पोषक तत्‍व पीलिया के लक्षणों को कम करने, प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा दिलाने में सहायक होते हैं। आइए जाने पीलिया रोग का उपचार करने के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थ क्‍या हैं।
 

पीलिया रोग या हेपेटाइटिस बी होने पर रोगी को पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए। यकृत को पीलिया के लक्षणों से उबारने में मदद का यह सबसे अच्‍छा तरीका है कि शरीर में पानी की कमी न हो। पानी न केवल पाचन को आसान बनाने में मदद करता है बल्कि यह जिगर और गुर्दे को विषाक्‍त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। सामान्‍य रूप से लोगों को रोजाना कम से कम 64 औंस या सिर्फ 2 लीटर पानी की आवश्‍यकता होती है। इसके अलावा लोग पीलिया होने के दौरान मुंह का स्‍वाद बनाए रखने के लिए प्रति गिलास पानी 1 या 2 चम्‍मच नींबू के रस को भी मिला सकते हैं। यह उनकी रोग प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में सहायक होता है।

  पीलिया रोग से बचाव के उपाय में आप ताजे फलों और सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। ताजे फल और सब्जियों में शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट और फाइबर होते हैं। जो चयापचय के दौरान लीवर की क्षति को कम करने में सहायक होते हैं। साथ ही ये खाद्य पदार्थ पचने में भी आसान होते हैं। लगभग सभी फलों और सब्जियों में यकृत स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले पोषक तत्‍व होते हैं। लेकिन कुछ विशेष किस्‍म के फलों और सब्जियां यकृत स्थिति के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। इनमें शामिल हैं :
क्रैनबेरी (करोंदा), ब्‍लूबेरी और अंगूर
सभी प्रकार के खट्टे फल विशेष रूप से नींबू, संतरा अंगूर आदि।
पपीता और तरबूज
कद्दू, शकरकंद और रतालु या याम
एवोकैडो, जैतून और टमाटर
गाजर, बीट और शलजम
ब्रोकोली, फूल गोभी और ब्रसेल्‍स स्‍प्राउट्स, पालक, कोलार्ड जैसी क्रूस सब्जियां
अदरक और लहसुन
अच्‍छे लाभ प्राप्‍त करने के लिए रोगी को फल, हरी सब्जियां आदि खाना चाहिए।
 ज्‍वाइंडिस रोगी के लिए कॉफी और हर्बल चाय का सेवन लाभकारी होता है। कॉफी और हर्बल चाय में एंटीऑक्‍सीडेंट के साथ ही कैफीन की उचित मात्रा होती है। जिसके कारण यह पाचन को प्रोत्‍साहित करने में सहायक होता है। बहुत ही कम मात्रा या मॉडरेशन में कॉफी का सेवन यकृ‍त की क्षति जैसे लक्षणों को कम करने में सहायक है। इसलिए पीलिया रोगी को नियमित रूप से अपने आहार में कॉफी या हर्बल चाय की नियंत्रित या कम मात्रा को विशेष रूप से शामिल करना चाहिए।
 साबुत अनाज- 
पीलिया या हेपिटाइटिस बी के रोगी को उपचार के दौरान साबुत अनाज का पर्याप्‍त सेवन करना चाहिए। साबुत अनाज खाद्य पदार्थों में स्‍वस्‍थ वसा, फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट और खनिज पदार्थ की अच्‍छी मात्रा होती है। ये सभी घटक यकृत स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने में सहायक हैं। 2013 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार जो लोग नियमित रूप से ओट्स का सेवन करते हैं 12 सप्‍ताह के बाद उनके यकृत स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार हुआ। क्‍योंकि ओट्स बीटा-क्‍लूकन समृद्ध खाद्य पदार्थ है।
 अधिकांश नट्स और फलियां एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर होते हैं। जिनमें विटामिन सी, ई और फेनोलिक एसिड की भी उच्‍च मात्रा होती है। साबुत अनाज, नट्स और फलियां भी आमतौर पर स्‍वस्‍थ वसा और फाइबर के अच्‍छे स्रोत हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है‍ कि नियमित रूप से सेवन करने पर अखरोट और अन्‍य पौधे आ‍धारित खाद्य नट्स लिवर के कार्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यदि आप भी पीलिया रोग का इलाज करा रहे हैं तो किसी अनुभवी व्‍यक्ति की सलाह के आधार पर इन नट्स और फलियों को अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
स्वाभाविक रूप से पाचन एंजाइम बिलीरुबिन के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। आप पाचन एंजाइमों को इन चीजों से प्राप्त कर सकते हैं।
शहद से
नारंगी और इसके छिल्‍कों से
अनानास से
पपीता
आम
 विषाक्‍त पदार्थों (toxic substances) को शरीर से बाहर निकालने के लिए घुलनशील फाइबर यकृत की मदद करता है और पाचन को आसान बनाता है। ये महत्‍वपूर्ण पोषक तत्‍व विभिन्‍न प्रकार के खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं जैसे कि :
फल
सब्जियां
फलियां
नट्स
साबुत अनाज आदि
उच्‍च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों मे शामिल हैं :
क्रूसिफेरस सब्जियां जैसे ब्रोकली
जामुन
दलिया
बादाम
भूरा चावल
 भोजन करते समय उच्‍च फाइबर लेने का प्रयास करें। पुरुषों को प्रतिदिन 38 ग्राम और महिलाओं को 25 ग्राम फाइबर खाने का प्रयास करना चाहिए।
पीलिया एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है जिसका समय पर उपचार किया जाना आवश्‍यक है। पीलिया का घरेलू उपचार या डॉक्‍टरी इलाज के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करना चाहिए इन खाद्य पदार्थों में शामिल हैं :


पीलिया में केला फायदेमंद – 

पीलिया होने की स्थिति में रोगी को नियमित रूप से केला का सेवन करना चाहिए। केला में मौजूद पोषक तत्‍व और अन्‍य घटक लीवर को स्‍वस्‍थ रखने और पीलिया के लक्षणों को कम करने में प्रभावी होते हैं।

पीलिया में अनार होता है अच्‍छा

 पीलिया रोग रक्‍त में आई विषाक्‍तता के कारण होता है। हम सभी जानते हैं कि अनार का नियमित सेवन स्‍वस्‍थ रक्‍त के उत्‍पादन में सहायक होता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट रक्‍त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करते हैं। इसलिए रोगी को नियमित रूप से अनार का सेवन करना चाहिए।

पीलिया में हल्‍दी का इस्‍तेमाल करें – 

हल्‍दी एक जड़ी बूटी है जिसे हम सभी लोग मसाले के रूप में उपयोग करते हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्‍व, खनिज पदार्थ, एंटीऑक्‍सीडेंट और विशेष रूप से मौजूद करक्‍यूमन घटक पीलिया के लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

पीलिया में परहेज

यकृत सहित अधिकांश आंतरिक शारीरिक ऊतकों के लिए शराब हानिकारक होती है। अधिक मात्रा में शराब का उपयोग करना पुरानी लीवर की सूजन का कारण बन सकता है, जो यकृत को अस्‍वस्‍थ्‍य कर सकती है और फाइब्रोसिस (fibrosis) का कारण बन सकता है।

शराब का सेवन नहीं

  पीलिया या अन्‍य यकृत संबंधी समस्‍याओं बाले लोगों को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
पीलिया रोगी नहीं खाना चाहिए आयरन की अधिक मात्रा
लौह का सेवन करने से सावधान रहना महत्‍वपूर्ण है। बहुत अधिक लोहा यकृत स्‍कार्फिंग का कारण बन सकता है।
प्रोटीन लोहे (Iron) का अच्‍छा स्रोत है इसलिए यकृत के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए इसे कम करने की कोशिश करना चाहिए।

नमक कम खाना चाहिए

नमक का ज्‍यादा उपयोग यकृत को नुकसान पहुंचा सकता है और जल प्रतिधारण में भी योगदान दे सकता है। प्रसंस्‍कृत और डिब्‍बा बंद खाद्य पदार्थो में सोडियम की मात्रा हो सकती है। नमक का उपयोग करने के बजाए आप अपने पकवानों में लहसुन पाउडर, प्‍याज पाउडर या अयस्‍कों जैसे पदार्थों का उपयोग करने का प्रयास करें।
पीलिया रक्‍त और यकृत से संब‍ंधित बीमारी है। पीलिया के दौरान क्‍या खाना चाहिए और क्‍या नहीं यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। पीलिया होने पर खाने वाले आहार पीलिया के लक्षणों को प्रभावित करते हैं। पीलिया में परहेज करना भी आवश्‍यक है।

नहीं खाना चाहिए अधिक चीनी

परिष्‍कृत चीनी, उच्‍च फ्रक्‍टोज मकई सिरप (fructose corn syrup)और संसाधित चीनी के अन्‍य रूप भी यकृत में वसा का निर्माण कर सकते हैं। चीनी में उच्‍च प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थ वसा में भी अधिक होते हैं जो नुकसान के खतरे को बढ़ा देते हैं।

विशिष्ट परामर्श-





यकृत,प्लीहा,आंतों के रोगों मे अचूक असर हर्बल औषधि "उदर रोग हर्बल " चिकित्सकीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है|पेट के रोग,लीवर ,तिल्ली की बीमारियाँ ,पीलिया रोग,कब्ज और गैस होना,सायटिका रोग ,मोटापा,भूख न लगना,मिचली होना ,जी घबराना ज्यादा शराब पीने से लीवर खराब होना इत्यादि रोगों मे प्रभावशाली है|बड़े अस्पतालों के महंगे इलाज के बाद भी निराश रोगी इस औषधि से ठीक हुए हैं| औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 9826795656 पर संपर्क करें|

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बादाम के तेल गुण औ स्वास्थ्य लाभ


बादाम तेल का इस्तेमाल आप सेहत और खूबसूरती दोनों के लिए कर सकते हैं. बादाम की ही तरह बादाम का तेल भी पोषक तत्वों और खनिजों से भरपूर होता है. इस तेल का इस्तेमाल आप खाना बनाने के लिए भी कर सकते हैं और चेहरे पर लगाने के लिए भी.
बादाम का तेल कच्चे बादामों से ही निकाला जाता है। बादाम के तेल में पर्याप्त मात्रा में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड के साथ ही विटामिन ई एवं पोटैशियम, प्रोटीन और जिंक भारी मात्रा में पाए जाते हैं। अन्य तेलों की अपेक्षा हल्का होने के कारण बादाम के तेल का इस्तेमाल रसोई में भी किया जाता है।
बादाम का तेल मीठा और कड़वा दो प्रकार का होता है। बादाम का कड़वा तेल बादाम को दबाकर निकाला जाता है। इसमें एमिगाडलिन होता है जो प्रसंस्करण के बाद हानिकारक हाइड्रोसायनिक एसिड में बदल जाता है। इसमें औषधीय तत्व मौजूद होने के बावजूद भी कड़वा तेल को खाया नहीं जाता है। इसका इस्तेमाल किसी विशेष जरूरत के लिए ही किया जाता है। जबकि बादाम का मीठा तेल खाने के योग्य होता है। इस तेल का लाभ बालों एवं चेहरे को बहुतायत में मिलता है। इसके अलावा भोजन बनाने में भी किया जाता है।
ज्यादातर लोगों को बादाम के विषय में एक सामान्य सी बात जो पता है, वह यह है कि इसे खाने से मस्तिष्क तेज होता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि बादाम तेल के फायदे क्या हैं। यहां आपको इसके फायदे के बारे में हम बताने जा रहे हैं।


बालों के लिए लाभकारी

बादाम का तेल बालों के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।
यह बालों की रुसी और बालों का झड़ना कम करता है।
बालों के दो मुहे हो जाने पर यदि बादाम के तेल से मालिश करते है तो फायदा होता है।
बादाम के तेल का उपयोग कंडीशनर के रूप में भी कर सकते है इसके उपयोग से बाल चमकदार और लम्बे होते है।
उपयोग विधि
बालों को लंबा बनाने के लिए 2 चम्मच बादाम के तेल में 2 चम्मच आरंडी का तेल मिलाये।
इस तेल से बालों की मालिश करे लगभग 10 मिनट तक।
इसके बाद बालों को हलके गर्म पानी के धो ले । शेम्पू का इस्तेमाल करने के लिए कोई अच्छा सा माइल्ड शेम्पू ही उपयोग करे इससे बाल अच्छे रहते है।
इस तेल को सप्ताह में 1 बार ज़रूर लगाए। इससे बाल तेजी से बढ़ेंगे ।

बालों की रूसी दूर करने में
यदि आपके सिर में रूसी इतनी ज्यादा हो गई हो कि आपके कपड़े पर गिर जा रही हो तो अपने सिर में बादाम के तेल से मसाज करें। बादाम का तेल मृत कोशिकाओं को नष्ट कर डैंड्रफ को दूर करने में उपयोगी है। यह बालों को पोषण प्रदान करता है और बालों से संबंधित सभी समस्याओं को दूर करता है। बादाम का तेल सिर को ठंडक प्रदान करता है और बालों में जमी मृत कोशिकाओं को बाहर निकालता है। एक चम्मच आंवला पावडर में बादाम का तेल मिलाकर धीरे-धीरे बालों में लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। अब बालों में शैंपू कर लें। बाल सूखने के बाद आपके बालों से रूसी गायब मिलेगी।


बादाम का तेल डार्क सर्कल हटाने के लिए
 
अगर किसी व्यक्ति के आंखों के नीचे डार्क सर्कल पड़ जाते हैं तो वह देखने में काफी भद्दे लगते हैं। इस परिस्थिति में आपको आंखों के नीचे बादाम का तेल लगाकर हल्के हाथों से मसाज करना चाहिए। बादाम के तेल में विटामिन ईपाया जाता है जो त्वचा की मरम्मत करता है और नियमित रूप से मसाज करने पर डार्क सर्कल को दूर कर देता है। इसके अलावा यह तेल झुर्रियों को खत्म करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
सोरायसिस और एक्जिमा के इलाज में
बादाम का तेल त्वचा संबंधी बीमारियों एवं संक्रमण जैसे मुंहासे, सोरायसिस और एक्जिमा के इलाज में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह त्वचा की जलन एवं खुजलाहट को कम करके त्वचा को आराम देता है। यह तेल एक विलेपन के रूप में काम करता है और यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है। इसमें मॉश्चराइजिंग गुण भी पाया जाता है जो त्वचा को नमी प्रदान कर एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है।
कब्ज दूर करने में
कब्ज को दूर करने में भी बादाम के तेल का उपयोग में लाया जाता है। गुनगुने पानी में बादाम के तेल की कुछ बूंदे मिलाकर दिन में दो बार पीने से कब्ज क्षण भर में दूर हो जाता है। इसके अलावा बादाम का तेल पेट भी ठीक रखता है और भोजन की अच्छी तरह से पचाने में मदद करता है। इसके अलावा गर्म दूध में बादाम तेल की कुछ बूंदे मिलाकर पीने से वजन भी तेजी से कम होता है। बादाम मोनोअनसैचुरेटेड फैट से भरपूर होता है जो मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है जिससे वजन घटने में सहायता मिलती है।


हृदय रोगों में

 बादाम के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है जो हृदय को स्वस्थ रखता है और इसे बीमारियों से बचाता है। मीठे बादाम का तेल फोलिक एसिड, अनसैचुरेटेड फैट, प्रोटीन के साथ ही पोटैशियम से भी भरपूर होता है जो हृदय की सेहत को ठीक रखने में लोगों द्वारा उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा यह टाइप-2 डायबिटीज को दूर कर कोलेस्ट्रॉल एवं उच्च रक्तचाप की समस्या को भी दूर करता है।
अन्य लाभ-
*अगर आपका हीमोग्लोबिन कम है तो आज से ही बादाम के तेल को अलग-अलग रूपों में लेना शुरू कर दें. इसमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने का काम करता है.
*बादाम के तेल में ओमेगा-6 फैटी एसिड्स होते हैं. ओमेगा-6 दिमाग की सेहत के लिए एक आवश्यक तत्व है. इससे दिमाग को पोषण मिलता है.
*गर्भावस्था में बादाम तेल का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है. गर्भावस्था में बादाम तेल के सेवन से डिलीवरी के नॉर्मल होने की संभावना बढ़ जाती है. इसमें मौजूद फॉलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व मां और बच्चे दोनों को फायदा पहुंचाते हैं.
*बादाम तेल के सेवन से कोलेस्ट्रॉल संतुलित रहता है. बादाम के नियमित सेवन से दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है.
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19.8.19

दशमूल जड़ी बूटी के स्वास्थ्य लाभ


 दशमूल हर्ब का नाम दश और मूल की संधि से बना है जिसका अर्थ है कि दस जड़ी-बूंटियों की जड़ें। दशमूल हर्ब में दस जड़ी-बूंटियों के गुण एक साथ होते हैं इसलिए इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी होता है।
  दशमूल शरीर के लिए काफी उपयोगी हर्ब होता है। दशमूल हर्ब का उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक दवाओं के रुप में किया जाता रहा है। 10 आयुर्वेदिक जड़ी-बूंटियों के मिश्रण से दशमूल हर्ब बनाया जाता है। यह जड़ी-बूंटी नसों की समस्याओं, मसल्स की ऐंठन, हड्डियों और जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए लाभकारी होता है। दशमूला सूजन की समस्या को दूर करने के लिए बेहद लाभकारी होता है। आइए जानते हैं शरीर के लिए कैसे दशमूला हर्ब का सेवन लाभकारी होता है।

  भारत में दशमूल 10 जड़ी बूटियों का सबसे अच्छा संयोजन है, जो विभिन्न चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जाता है। इसके बड़े स्वास्थ्य लाभ हैं। इसमें आयुर्वेद की 10 सर्वश्रेष्ठ जड़ें हैं जो हमें कई तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं। ये जड़ें हमें तंत्रिका समस्याओं, मांसपेशियों में ऐंठन, हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं से राहत दे सकती हैं। दशमूल, सूजन और अन्य कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए जादुई रूप से काम करता है। 
दशमूल जड़ी बूटी के स्वास्थ्य लाभ-
रूक रूककर और तेज बुखार में है फायदेमंद
पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है
सांस की समस्याओं को रोकता है
माइग्रेन के दर्द को कम करता है
सूजन, दर्द और गठिया की सूजन से राहत देता है
दशमूल जड़ी-बूटियों में 10 जड़ें- 




दशमूल 10 सर्वश्रेष्ठ हर्बल जड़ों का एक संयोजन है जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत देता है। दशमूल बनाने वाली सर्वश्रेष्ठ 10 जड़ी-बूटियों इस प्रकार हैं।

अग्निमंथ
गंभारी
बिल्व
पृश्निपर्णी
बृहती
कंटकारी
गोखरू
पटाला हर्ब
शालपर्णी
श्योनाक
दशमूल के स्वास्थ्य लाभ:
रूक रूककर और तेज बुखार में है फायदेमंद -
दशमूल में बहुत सारे एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो रुक-रुक कर या बहुत तेज बुखार को ठीक करने में मदद करते हैं। यह आपके शरीर के तापमान का प्रबंधन कर सकता है और इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है। 
दशमूला हर्ब में में एंटी प्रेट्रिक गुण होते हैं जो कि तेज बुखार को ठीक करने के लिए लाभकारी होते हैं। यह शरीर के तापमान को सही रखता है। किसी भी अन्य आयुर्वेदिक औषधि की तुलना में दशमूला का सेवन बुखार को ठीक करता है। कुछ अन्य हर्ब्स का सेवन करके भी बुखार को ठीक किया जा सकता है
पाचन सुधारे
पाचन संबंधी समस्याएं और गैस का बनना इंसान की सबसे आम समस्याएं हैं। लेकिन दशमूल इन सबसे राहत दिलाने में मदद करता है। वास्तव में, फूड एलर्जी का सबसे अच्‍छा घरेलू उपचार है।


सांस की समस्याओं को रोकता है

दशमूल श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करता है। यह छाती और श्वसन रास्‍तों की सूजन को कम करता है। यह सबसे अच्छा काम करता है जब आप हर्बल घी के साथ इसका सेवन करते हैं। 10 जड़ी का सूत्रीकरण अस्थमा, काली खांसी और सामान्‍य खांसी को कम कर सकते हैं।
सूजन, दर्द और गठिया से राहत देता है

दशमूल अद्भुत है, जब यह गठिया के लक्षणों जैसे सूजन, दर्द से राहत देता है। इसमें एनाल्जेसिक या पेनकिलर प्रभाव होता है जो गठिया की समस्याओं का इलाज करता है।
माइग्रेन के दर्द 
माइग्रेन के दर्द को कम करने के लिए भी दशमूल हर्ब उपयोगी होता है। बहुत सारे लोगों को माइग्रेन के दर्द के साथ-साथ उल्टी, जी-मिचलाने, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या होती है। जिसे ठीक करने के लिए दशमूला हर्ब का सेवन उपयोगी होता है।
दशमूल क्वाथ (दशमूल काढ़ा) के रोगों में लाभ :
✦इसका उपयोग पीठ के निचले हिस्से में दर्द, कटिस्नायुशूल, कंपकंपी, पार्किंसंस रोग में किया जाता है।
✦फेफड़ों : सूखी खांसी और श्वसन कमजोरी के लिए टॉनिक के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।
✦सभी प्रकार के बुखार
✦तनाव
✦अनिद्रा
✦संधिशोथ
✦खांसी और अस्थमा
✦कमजोरी
दशमूल क्वाथ के फायदे और उपयोग :
1-तनाव दूर करने में –
तनाव कई अतिरिक्त बीमारियों का मूल कारण है। दिव्य दशमूल क्वाथ एक उत्कृष्ट रचना है जो दिमाग पर से तनाव कम करती है। यह दवा तनाव और इसके संबंधित रोगों के लिए प्राकृतिक इलाज है।
2-मासिक धर्म विकारों में –
मासिक धर्म विकारों और गर्भावस्था को प्राप्त करने से संबंधित स्त्री रोग संबंधी विकारों में उपयोगी।
3-अवसाद में –
यह प्राकृतिक जड़ी बूटी तनाव और अवसाद को कम करती है और आपके दिमाग को आराम देती है।
4- रक्तचाप के नियंत्रण में –
यह नींद विकार से रोकने में मदद करता है और आपके रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है।
5-गठिया रोग में –
दशमूल क्वाथ का नियमित उपयोग गठिया जैसी पुरानी बीमारियों से रोकता है।
6-थकान दूर करने में –
यह दवा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और सिरदर्द और थकान से बचने में मदद करती है।




7- खाँसी में –

दशमूल क्वाथ (दशमूल काढ़ा) में “अरण्डी की जड़ “अथवा “पोहकरमूल का चूर्ण” डाल कर पीने से श्वास, खाँसी और पसली की पीड़ा शान्त हो जाती है।(
8- सन्निपात ज्वर में –
सन्निपात ज्वर, मोह और तन्द्रा होने पर-दशमूल के काढ़े में “पीपर का चूर्ण” मिला कर पीना बहुत ही अच्छा है
9- धनुस्तम्भ रोग में –
दशमूल का काढ़ा पिलाना और शरीर में कड़वा तेल मलना हितकारी है।
10- पक्षाघात रोग में –
दशमूल का काढ़ा हींग और सेंधा नमक मिलाकर पिलाना हितकर है।( और पढ़े – लकवा के 37 घरेलु इलाज )
11- सूतिका रोग में –
इस रोग में भी दशमूल के काढ़े में पीपर का चूर्ण मिलाकर पिलाना चाहिये ।
12- हृदयशूल में –
हृदयशूल, पीठ के शूल और कमर के शूल में-देशमूल का काढ़ा सवेरे ही पीना चाहिये ।
13- बुखार में –
इस क्वाथ का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के वातश्लैष्मिक ज्वर शीघ्र नष्ट होते हैं
14-पाश्र्वशूल में –
सन्निपात ज्वर, समस्त प्रकार के सूतिका रोग, ग्रह, कण्ठ ग्रह, पाश्र्वशूल,तथा वातरोगों को शीघ्र नष्ट करता है। विशेषतया सूतिका रोग मेंअधिक लाभप्रद है।
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घमरा के औषधीय गुण:ghamra ke gun



घमरा (Tridax procumbens) का पौधा भारतीय पारंपरिक चिकित्‍सा में प्रयोग किया जाने वाला एक औषधीय पौधा है। घमरा का पौधा विशेष रूप से एक खरपतवार है। लेकिन घमरा के औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। घमरा का प्रयोग कुछ सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। आप घमरा के लाभ सूजन दूर करने, घावों का उपचार करने, संक्रमण को रोकने आदि के लिए कर सकते हैं। घमरा का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है जैसे घमरा को पीस कर इसका रस निकालना या पेस्‍ट का उपयोग करना। इसके अलावा घमरा का तेल भी निकाला जाता है जो हमारे कई उपयोगों में आता है।
घमरा जिसे ट्राइडैक्‍स प्रोकम्‍बेन्‍स (Tridax procumbens) के नाम से जाना जाता है। यह व्‍यापक रूप से फैली हुई पर्णपाती जड़ी बूटी है। यह एक खरपतवार है जिसकी प्रकृति बारहमासी होती है। अपने औषधीय गुणों के कारण इस जड़ी बूटी का व्‍यापक उपयोग किया जा रहा है। इस पौधे की पत्तियों और इनसे निकाले गए अर्क में औषधीय गुण होते हैं। घमरा को आमतौर पर कोटबुटन (coatbuttons) या ट्राइडैक्स डेज़ी (tridax daisy) के रूप में जाना जाता है, डेज़ी परिवार में फूलों के पौधे की एक प्रजाति है।
घमरा का पौधा एक बारहमासी जड़ी बूटी और खरपतवार दोनों ही है। इसका पौधा लगभग वेल या लता की तरह फैलता है जिसकी ऊंचाई 30 से 50 सेंटी मीटर तक हो सकती है। यह पौधा कई शाखाओं में बटा होता है जिन पर छोटे-छोटे कांटेदार रूए होते हैं। इसकी पत्तियां मोटी, दानेदार और अंडाकार होती हैं जिनके किनारे नुकीले होते हैं। घमरा की पत्तियों की दोनों सतहों में रूएदार बाल होते हैं। घमरा के फूल पीले या सफेद होते हैं। इसके फल भी कठोर बालों से ढ़के होते हैं। घमरा का पौधा आपको विशेष रूप से खेतों, बेकार पड़ी पथरीली जमीनों या सड़क के किनारे देखने को मिल सकते हैं। आइए जाने घमरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व क्‍या हैं।


घमरा का उपयोग औषधीय प्रयोजनो के लिए प्राचीन समय से किया जा रहा है। क्‍योंकि घमरा का पौधा कई पोषक तत्वों से भरपूर है। घमरा के पौधे में अल्‍कलॉइड, स्‍टेरॉयड, कैरोटीनॉइड, फ्लेवोनाइड्स जैसे कैटेचिन, सेंटाओरीन और बेरेगेन्‍स आदि होते हैं। इसके अलावा फैटी एसिड, फाइटोस्‍टेरॉल, टैनिन और अन्‍य खनिज पदार्थ भी इसमें अच्‍छी मात्रा में होते हैं। घमरा के पौधे का उपयोग मधुमेह, गठिया आदि के इलाज के लिए किया जाता है क्‍योंकि घमरा में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भी होते हैं।

भारत में घमरा का उपयोग परंपरागत रूप से घाव भरने के लिए किया जाता है। घमरा में थक्‍कारोधी (anticoagulant), एंटीफंगल और कीट के जहर (insect repellent) को दूर करने वाले गुण होते हैं। घमरा की पत्तियों से प्राप्‍त रस को सीधे ही घाव के ऊपर लगाया जाता है। औषधीय गुणों के कारण घमरा की पत्तियों और इससे प्राप्‍त रस का उपयोग कई प्रकार के त्‍वचा संक्रमणों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा घमरा का उपयोग यकृत विकारों, हेपेटोप्रोटेक्‍शन (hepatoprotection), गैस्‍ट्राइटिस (gastritis) और पेट की जलन(heartburn) आदि के आयुवेर्दिक इलाज में किया जाता है। घमरा (ट्राइडैक्स प्रमोम्बेंस) का उपयोग भारत के कुछ हिस्सों में स्थानीय उपचारकर्ताओं द्वारा फोड़े, फुंसियों और कट के उपचार के रूप में भी किया जाता है।

विषाक्‍तता को दूर करने के लिए

आप अपने शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को दूर करने के लिए घमारा का उपयोग कर सकते हैं। हमारे शरीर में यकृत प्रमुख विषहरण अंग है। हमारे लिवर में डिटॉक्सिफिकेशन मैकेनिज्‍म में एंजाइम होते हैं। शरीर में किसी प्रकार की चोट या विषाक्‍तता होने के दौरान एंजाइम को रक्‍त में प्र‍वाहित किया जाता है। घमरा में इन एंजाइमों को उत्‍तेजित करने और इन्‍हें बढ़ाने में सहायक होता है। एक पशु अध्‍ययन से पता चलता है कि यह शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को प्रभावी तरीके से कम कर सकता है।

कैंसर से बचाये

घमरा की पत्तियों में मौजूद आवश्‍यक तेल की मौजूदगी के कारण घमरा पौधे का जलीय अर्क कैंसर कोशिकाओं को रोकने में सहायक होता है। नियमित रूप से उपयोग करने पर यह फेफड़ों के कैंसर के विकास पर एंटी-मेटास्‍टेटिक (anti-metastatic) गतिविधि दिखाते हैं। जो कि शरीर के वजन, डब्‍ल्‍यूबीसी और हीमोग्‍लोबिन की संख्‍या में वृद्धिकरते हैं। इसके अलावा घमरा के पौधे में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट भी शरीर की कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं से बचाने में सहायक होते हैं।


उच्‍च रक्‍तचाप के लिए

उच्‍च रक्‍तचाप भी एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है। लेकिन घमरा के पौधे का उपयोग कर आप इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। उच्‍च रक्‍तचाप हृदय, कोरोनरी धमनी रोग, मायोकार्डियल रोधगलन और कंजेस्टिव हार्ट फेल जैसी समस्‍याओं का कारण बन सकता है। लेकिन इन समस्याओं से बचने के लिए आप घमरा के अर्क का सेवन कर सकते हैं। यह उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है।

घाव का इलाज करे

घमरा की पत्तियों के रस का पारंपरिक रूप से घावों का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है। घमरा के औषधीय गुण और पोषक तत्‍व रक्‍तस्राव को रोकने और उपचार प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यदि आप भी घाव या चोट के जख्‍म को ठीक करना चाहते हैं तो घमरा का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप घमरा पौधे के रस को सीधे ही घाव पर लगाएं। ऐसा करने से चोट या घाव से रक्‍तस्राव को रोका जा सकता है। साथ ही यह घाव को ठीक करने की प्रक्रिया को तेज करता है। घमरा पौधे के गुण त्‍वचा संक्रमण को भी भी प्रभावी रूप से दूर कर सकते हैं।

सूजन दूर करे

घमरा एक औषधीय जड़ी बूटी है जो कई प्रकार की शारीरिक समस्‍याओं को दूर कर सकती है। अपने औषधीय गुणों के कारण घमरा का उपयोग सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसमें मौजूद सूजन विरोधी गुण चोट की सूजन, कब्‍ज से होने वाले दर्द आदि को कम करने में सहायक होते हैं। आप भी इस प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए घमरा का उपयोग कर सकते हैं।

गठिया का उपाय

गठिया एक दर्द और सूजन वाली समस्‍या है जो कि बहुत ही कष्‍टदायक होती है। इस बीमारी के दौरान शरीर के जोड़ों में सूजन और दर्द बना रहता है। लेकिन इस प्रकार की समस्‍या को दूर करने में घमरा का उपयोग किया जा सकता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से गठिया के दर्द प्रभावित जगह पर घमरा के तेल से मालिश करने पर यह दर्द और सूजन को दूर कर सकता है। घमरा में ऐसे घटक होते हैं जो सूजन प्रभावित कोशिकाओं को आराम दिलाने और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। आप भी गठिया रोगी के दर्द और सूजन का इलाज करने के लिए घमरा का तेल या घमरा की पत्तियों के पेस्‍ट का उपयोग कर सकते हैं।


घमरा का अर्क मधुमेह को रोके

मधुमेह रोगियों के लिए घमरा के पौधे का अर्क बहुत ही फायदेमंद होता है। घमरा के पौधे में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से 7 दिनों तक घमरा के अर्क का सेवन करने से शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा यह शरीर में इंसुलिन उत्‍पादन को भी सक्रिय करता है जो रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बढ़ने से रोकता है। यदि आप भी डायबिटिक रोगी हैं तो घमरा के अर्क का सेवन कर सकते हैं। यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

संक्रमण से बचाये

औषधीय जड़ी बूटी घमरा में एंटी बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो हमें संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं। नियमित रूप से घमरा के अर्क का उपयोग कर आप जीवाणु संक्रमण के पेचिश, दस्‍त और आंतों संबंधी विकारों को दूर कर सकते हैं। घमरा के पौधे में सक्रिय घटक जैसे टैनिन, फलेवोनाइड्स एथिल एस्‍टर और अन्‍य घटक होते हैं। ये सभी घटक शरीर में मौजूद संक्रमण को रोकने और उन्‍हें फैलने से बचाते हैं। यदि आप भी इसी तरह के किसी संक्रमण का इलाज करना चाहते हैं तो घमरा के पौधे का उपयोग कर सकते हैं।

सावधानी-

घमरा एक औषधीय पौधा है जिसका उपयोग कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में घमरा का उपयोग करने के नुकसान भी हो सकते हैं।
कुछ लोगों को घमरा का उपयोग करने पर एलर्जी हो सकती है। जिससे त्‍वचा में खुजली, चकते या जलन हो सकती है।
अधिक मात्रा में घमरा के अर्क का सेवन करने से उल्टी, मतली और दस्‍त आदि की समस्‍या भी हो सकती है।
मधुमेह रोगियों को घमरा के अर्क का बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। अन्‍यथा शरीर में रक्‍त शर्करा का स्‍तर बहुत नीचे जा सकता है जो हानिकारक होता है।
गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए यह सुरक्षित है या नहीं इस पर शोध चल रहे हैं। इसलिए इन महिलाओं को भी घमरा के अर्क का सेवन करने से बचना चाहिए।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो घमरा या इससे बने अन्‍य उत्‍पादों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लें।
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धनिया के हैं कमाल के स्वास्थ्य लाभ



धनिया एक जड़ी-बूंटी के रुप में उगने वाला प्राकृतिक पौधा है इसकी पत्तियों और बीजों का इस्तेमाल हमारे रसोइ घरों में किया जाता है। खाना बनाने के लिए साबुत धनिया, धनिए के बीज, धनिए के पाउडर और धनिए की पत्तियों का काफी इस्तेमाल करते हैं। धनिए का पानी भी सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुणों के साथ ही बहुत सारे विटामिन और मिनरल भी होते हैं इसलिए धनिया सेहत के लिए उपयोगी होता है।
धनिया प्रकृति शीतल और खुश्क होता है। इसे अंग्रेजी में कोरिएंडर कहते है। हरी धनिया के पत्ते भोजन बनाने में ज्यादातर उपयोग किये जाते है। इससे हमारा भोजन बहुत स्वादिष्ट बनता है। इसको पॉलीथिन में रखने से ताजा बना रहता है। धनिया के फल को बंद मुंह के बर्तन और ठन्डे स्थान पर रखना चाहिए। धनिया का काम ठंडक पहुँचाना है। अगर इसे खुले मुंह के बर्तन में रखेंगे को इसका तेल उड़ जाता है। इसके तेल उड़ जाने के बाद इसका गुण में कमी आ जाती है।
हरी धनिया का कैसे उपयोग करे
इसके पत्ते की चटनी बनाकर या सब्जी में डालकर खा सकते है। इसकी पत्तियों को अच्छी तरह से धुलकर बारीक-बारीक काट ले। इसे सब्जी, सलाद, बिरयानी आदि पर भुरभुराकर खाये। इसको कच्चा ही खाने से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। पेशाब में जलन और रुका हुआ पेशाब की समस्या दूर होती है। इससे कब्ज, रक्त चाप, अम्लपित्त, मानसिक तनाव, चिंता आदि में लाभ मिलता है। हरी धनिया को खाते रहने से शरीर में संक्रमण फैलने की समस्या उत्पन्न नहीं होती है। शरीर निरोगी बना रहता है।
हरा धनिया के फायदे सूजन को कम करता है: 
धनिए में एंटी-इंफ्लेमेंट्री गुण होते हैं इसलिए धनिए का सेवन करने से सूजन कम होती है। त्वचा की सूजन कम करने हेतु धनिए के एसेशिंयल ऑयल का भी उपयोग करना लाभकारी होता है।


हरा धनिया के फायदे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में
 
Hara dhania हरा धनिया में फाइबर होता है। इसलिए इसका सेवन करने से सेहत पाचन तंत्र सही रहता है और पेट की बीमारियां नहीं होती है।
हरा धनिया के फायदे डायबिटीज को नियंत्रित करने में
धनिया खून में शर्करा के लेवल को कम करता है इसलिए इसका सेवन करने से इंसुलिन का स्तर सही बना रहता है यहीं कारण है कि धनिए का सेवन करना डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। धनिया खाने से शुगर जैसी समस्या से राहत मिलती है।
*. त्वचा के लिए
धनिया एक्जिमा, सूखेपन और फंगल संक्रमण जैसे त्वचा विकारों को साफ करने में मददगार है. ये कई एंटीऑक्सिडेंटों से भी समृद्ध है जो मुक्त कणों से त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं. इसमें मौजूद विटामिन ए एक महत्वपूर्ण घुलनशील विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट है जो बलगम झिल्ली और त्वचा स्वस्थ बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
* गठिया से राहत
धनिया में पाया जाने वाला एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे गठिया के उपचार में उपयोगी बनाता है. कारण इसका उपयोग गठिया से राहत पाने के लिए भी किया जाता है. गठिया के के मरीज इसकी सहायता ले सकते हैं.
* उच्च रक्तचाप में
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ ही धनिया उच्च रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है. यह पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज और लोहे का अच्छा स्रोत है. यह उच्च पोटेशियम और कम सोडियम के कारण हृदय की दर और रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मददगार है.
* वजन कम करने के लिए
वजन कम करने या उपापचय को नियंत्रित करने में धनिया मुख्य भूमिका निभाता है. इसके लिए आपको धनिये के बीज का इस्तेमाल करना होगा. इसके नियमित इस्तेमाल से आप अपना वजन कम कर सकते हैं.
* थायराइड में
धनिये का बीज हार्मोन को नियमित करके हमें थायराइड के खतरे से बचाने का काम करता है. इसमें उच्च प्रकार के विटामिन, खनिज, और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो थायराइड की समस्या में बहुत लाभदायक होते हैं.
* मासिक धर्म के लिए
अत्यधिक मासिक धर्म के प्रवाह से पीड़ित महिलाओं को उबले धनिये के बीज के पानी का सेवन करना चाहिए. यह रक्तस्राव को नियंत्रित करता है. धनिया में मौजूद आयरन रक्त की कमी को पूरा करके ऊर्जा के स्तर में भी सुधार करता है.
* बालों के लिए
धनिया का रस नए बालों के विकास में काफी लाभकारी है. ये बालों के झड़ने की समस्या से छुटकारा दिलाती हैं. क्योंकि इसमें आवश्यक विटामिन और प्रोटीन होते हैं जो बालों के विकास में मदद करते हैं.
* पाचन के लिए
धनिया पाचन तंत्र के अन्य लक्षण जैसे गैस, सूजन और चिड़चिड़ापन आदि से छूटकारा दिलाने में मदद करता है. इसका उपयोग आंतों को पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में मदद करता है.
*. शुगर के उपचार में
धनिया का बीज इंसुलिन की गतिविधि को नियमित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है. यह अन्य सामान्य चयापचय कार्यों के ठीक से होने के लिए रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से कम करता है. इसके लिए आप धनिया पाउडर या धनिया बीज का उपयोग करी, सूप, अचार, रस में कर सकते हैं.
* फायदे एलर्जी में
इसमें मौजूद उच्च एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण ये एलर्जी और आँखों की खुजली से राहत प्रदान करता है. यह एलर्जी के आम लक्षणों जैसे पित्ती, खुजली और सूजन को दूर करने में मदद करता है.
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पथरी निकालने का बढ़िया तरीका है धनिया
-एक लीटर पानी में साठ ग्राम धनिया डालकर अच्छी तरह उबाले। उबल जाने पर इसके पानी को छान ले। इसके पानी में एक कप मूली का रस और आवश्यकतानुसार सेंधा नमक मिला ले। इसको खाना खाने के बाद प्रतिदिन पांच-पांच चम्मच की मात्रा में सुबह शाम ले। पथरी टुकड़े में होकर निकल जाएगी। पथरी में नमक कम और पानी अधिकाधिक मात्रा में पिए।
-सौंफ, सूखा खड़ा धनिया और मिश्री तीनो 50-50 ग्राम एक लीटर पानी में भिगो दे। सुबह इसे पानी से छान ले। इसे पीसकर फिर इसी पानी में मिला ले और इसे छानकर पी जाये। अगर एक बार में ये पानी न पिया जाये तो प्यास लगने पर पिए। इसी तरह सुबह भी भिगोकर शाम को पिए। इससे पेशाब खुलकर आएगा और पथरी निकल जाएगी। पथरी निकालने के लिए जितना पानी पिए उतना फायदा करेगा। नमक का सेवन कम करे।
कोलेस्ट्राल कम करने में सहायक धनिया
एक गिलास पानी में चार चम्मच Dhaniya डालकर उबाले। आधा पानी रहने पर इसको ठंडा होने के लिए रख दे। हल्का गुनगुना रहने पर इसे छानकर प्रतिदिन पिए। इससे पेशाब अधिक आएगा और कोलेस्ट्राल कम होगा।


धातु गिरना बंद करता है धनिया

*सूखा पिसा हुआ धनिया और पिसा हुआ मिश्री समान मात्रा में ले। दोनों को मिलाकर दो-दो चम्मच प्रतिदिन तीन बार ठन्डे पानी से सेवन करे। इससे धातु गिरना बंद हो जाता है।
दमा, खांसी में धनिया
अधिक खांसी आता हो या दमा के कारण सांस फूलता हो तो उसमे धनिया बहुत फायदेमंद होता है।
-इसमें Dhaniya और मिश्री को समान मात्रा में पीस ले। इसे चावलों के पानी के साथ लेने से बहुत लाभ मिलता है।
-धनिये की पत्तियों का रस आधा कप में आवश्यकतानुसार सेंधा नमक मिलाकर पीने से दमा में फायदा मिलता है।
श्वेतप्रदर में लाभदायक धनिया
-दो चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच मिश्री ले। इसे एक गिलास पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान ले। हल्का गर्म रहने पर रात को सोते समय एक बार प्रतिदिन पीने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है।
योनि संक्रमण को दूर करने में उपयोगी धनिया
*पेशाब में जलन, दर्द, खुजली, सूजन, घाव, संक्रमण आदि हो तो इसमें धनिया बहुत उपयोगी है।
आवंला, धनिया और मिश्री समान मात्रा में लेकर पीस ले। इसे दिन में दो-दो चम्मच सुबह शाम पानी के साथ फंकी लेने से योनि संक्रमण दूर होता है।
धनिया पाउडर का पोषण चार्ट देखा जाए। तो इसमे 8 प्रतिशत फाइबर, 2.9 प्रतिशत कैल्शियम और अन्य गुणकारी तत्व पाए जाते हैं। यह एंटी डायबीटिक भी होता है। इस कारण यूरोप के कई देशों में इसको एंटी डायबीटिक पौधे के रूप में भी जाना जाता है। इसके अनेको-अनेक फायदे है। आइये जानते है विस्तार से:-
थाइरोइड ग्रंथि में धनिया उपयोगी
इसकी क्रिया बढ़ जाने या कम हो जाने पर पांच चम्मच खड़ा धनिया ले। इसे एक गिलास पानी में अच्छी तरह उबाल ले। इसे छानकर पीने से थाइरोइड की ग्रंथि पिघल जाएगी।
सुंदरता बढ़ाने में उपयोगी धनिया
चेहरे और शरीर की सुंदरता बढ़ाने के लिए धनिया बहुत ही उपयोगी होता है।
-दो चम्मच खड़ा धनिया ले। इसे दो गिलास पानी में चार घंटे भिगोकर रख दे। पानी से Dhaniya को छानकर अलग कर दे। प्रतिदिन इसी पानी से आंखे बंद करके चेहरे को एक से डेढ़ महीने तक धुले। चेहरा में निखार आएगा और कालादाग, धब्बे दूर होकर सुंदरता बढ़ाएगा।
-घमौरियां हो जाने पर इस पानी से नहाने पर इस समस्या से छुटकारा मिलता है।
-नहाने या हाथ-पैर धोने के लिए धनिया को ज्यादा मात्रा में ले।
-भोजन करने के बाद एक चम्मच धनिया का फंकी ले। इससे आंतरिक सौंदर्य बढ़ता है।
रोग निरोधक और शक्तिवर्धक बढ़ाता है धनिया
प्रतिदिन धनिया का सेवन किसी न किसी तरह करते रहे। पत्ती की चटनी बनाकर, सब्जी में डालकर या खड़ा धनिया खाते रहे। इससे हमारे शरीर में संक्रमण होने की समस्या नहीं रहेगी। जो निरोगी बनाये रखने में सहायक होती है।
जीरा 30 ग्राम, हल्दी 20 ग्राम, धनिया 30 ग्राम ले। इसमें सौंफ, सोंठ, काली मिर्च और तेजपत्ता सबको दस-दस ग्राम और दालचीनी 5 ग्राम में लेकर मिला ले। इन सबको दो चम्मच घी में अच्छी तरह से भूने। इसे एक साफ़ कांच की शीशी में भर ले। मसाले बनकर तैयार है। जब भी भोजन करने बैठे तो इस मसाले को चटनी या भोजन पर भुरका ले। इससे भोजन अधिक स्वादिष्ट लगेगा। कफ, दमा, खांसी, रक्तप्रदर, टी. बी. छाले, बवासीरआदि रोंगो में लाभ मिलता है। ये मसाले शरीर को निरोगी बनाये रखने और ताकत प्रदान करते है।
चोट लगने पर धनिया लाभदायक
देखा जाये तो चोट लगने पर दर्द और सूजन होना स्वाभाविक है। इससे नीला धब्बा भी पड़ जाता है।
-हल्दी और Dhaniya को बराबर मात्रा में लेकर पीस ले। खाने में काम आने वाला तेल डालकर दोनों को तवे पर भून ले। इसे चोट लगे हुए स्थान पर लेप करके पट्टी बाँध ले। चोट का दर्द और सूजन जल्द ही ठीक हो जायेगा।


थकावट में फायदेमंद धनिया

यात्रा करते समय, काम करते वक्त या अन्य किसी कारणवश थकावट आ गई हो।
-बीस दाने सुखी Dhaniya लेकर चबाये। इससे थकावट दूर हो जाएगी। यात्रा के समय एक शीशी सूखी धनिया साथ में रखे जिससे आराम मिलेगा। अगर घुटनो दर्द हो रहा हो तो धनिया खाने के साथ ही पैरो के घुटनो तक ठन्डे पानी में डुबोये रखे। या घुटनो से नीचे पैरो तक ठंडा पानी डाले।
वात पित्त को दूर करने में सहायक धनिया
-Dhniya और सौंफ को समान मात्रा में लेकर तवे पर सेककर पीस ले। इसको दो-दो चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी के साथ फंकी ले। इससे वात पित्त की समस्या दूर हो जाएगी।
मिरगी में लाभदायक धनिया
एपिलेप्सी यानी मिरगी की बीमारी दूर करने के लिए Dhaniya बहुत लाभदायक होता है।
-इसमें 50 ग्राम धनिया लेकर एक लीटर पानी में डालकर इतना उबाले की 1/3 भाग पानी बचे। इसे छानकर इसमें आवश्यकतानुसार नमक मिलाकर इसको चार भाग कर ले। इसे दिन में चार बार पिए। इससे मिर्गी के दौरे आना बंद हो जायेंगे।
सिरदर्द में उपयोगी धनिया
–सर्दी जुकाम से उत्पन्न सिरदर्द में चार चम्मच धनिया और दो चम्मच मिश्री एक गिलास पानी में उबाले। जब आधा पानी रह जाये तो इसे छान ले। इससे सिरदर्द ठीक हो जायेगा।
चेचक की गर्मी में धनिया के लाभ
-इसकी गर्मी निकालने के लिए चेचक ठीक होने के बाद Dhaniya और जीरा 2-2 चम्मच ले। इसे मिटटी के बर्तन में एक गिलास पानी लेकर भिगो दे। सुबह उस पानी में मिश्री या चीनी मिलाकर पिए। इससे मल साफ़ हो जाता है और गर्मी साफ़ हो जाती है।
चक्कर आने में धनिया फायदेमंद
कमजोरी, बीमारी या यात्रा के दौरान चक्कर आ रहा है।
-एक चम्मच Dhaniya और दो चम्मच सौंफ दोनों को पीसकर मिला ले। इसे प्रतिदिन सुबह शाम गर्म पानी के साथ फंकी लेने पर चक्कर आना बंद हो जाता है।
गले में दर्द और जलन को दूर करता है धनिया
-गले में संक्रमण हो जाने से गले में दर्द होने लगता है। इससे छुटकारा पाने के लिए दो-दो चम्मच सूखा धनिया हर तीन घंटे पर चबा-चबाकर चूसते रहे। इससे संक्रमण को दूर कर गले के दर्द में आराम मिलता है। विशेषकर गर्मी से हो रहे दर्द में बहुत फायदा मिलता है।
धनिया से नुकसान
जो व्यक्ति यौन शक्ति में दुर्बलता महसूस करता हो। Dhaniya उसके लिए हानिकारक है।
सूखा या हरा धनिया के अधिक मात्रा में सेवन करने से शुक्राणु और कामशक्ति में कमी आ जाती है।
इसके ज्यादा सेवन से स्त्रियों के मासिक धर्म रुक जाते है।

हरी मिर्च खाने के स्वास्थ्य लाभ -डॉ॰आलोक


हरी मिर्च कई तरह के पोषक तत्वों जैसे- विटामिन ए, बी6, सी, आयरन, कॉपर, पोटेशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती है. यही नहीं इसमें बीटा कैरोटीन, क्रीप्टोक्सान्थिन, लुटेन -जॅक्सन्थि‍न आदि स्वास्थ्यवर्धक चीजें मौजूद हैं. वैसे तो आमतौर पर इसका इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही किया जाता रहा है लेकिन हाल में हुए कई शोध इस बात का दावा करते हैं कि हरी मिर्च खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.
लाल मिर्च हो या हरी मिर्च भोजन में जबतक ना डाली जाए तो सब्जी अधूरी-सी लगती है। हरी मिर्च की बात करें तो इसका इस्तेमाल केवल भोजन में तीखापन और स्वाद लाने के लिए ही यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। हरी मिर्च सेहत के लिए गुणों का खजाना है। यह आपके स्वास्थ्य को कई तरह से बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। जानिए...


1. हरी मिर्च में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि‍सी भी प्रकार के संक्रमण से शरीर और त्वचा की रक्षा करते हैं।

2. हरी मिर्च में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाते है।
3. हरी मिर्च में डाइट्री फाइबर्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है।
4. कैंसर के खतरे को कम करती
शरीर की आंतरिक सफाई के साथ ही फ्री रेडिकल से बचाकर कैंसर के खतरे को कम करती है।
5.हरी मिर्च में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है. विटामिन सी दूसरे विटामिन्स को शरीर में भली प्रकार अवशोषित होने में मदद करता है.
6. हरी मिर्च एंटी-ऑक्सीडेंट का एक अच्छा माध्यम है. हरी मिर्च में डाइट्री फाइबर्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है.
7.  आंखों और त्वचा के लिए
विटामिन ए से भरपूर हरी मिर्च आंखों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है.
8. ब्लड शुगर को कम करने में 
हाल में हुई कुछ स्टडीज के अनुसार, हरी मिर्च ब्लड शुगर को कम करने में कारगर होती है .5. अगर आपको ह्रदय से जुड़ी कोई समस्या है तो आपको मिर्ची का सेवन अवश्य करना चाहिए। दिल के लिए मिर्ची बहुत लाभदायक होती है। मिर्ची का सेवन करने से रक्त के थक्कों की समस्या नही होती है।
9. पाचनतंत्र मजबूत
मिर्ची का सेवन करने से हमारा पाचनतंत्र मजबूत बना रहता है। मिर्ची में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जिससे मिर्च से बने भोजन का पाचन अच्छे से होता है।


10.आई केयर में-

हरी मिर्च के कई पोषक तत्वों में से एक विटामिन ए है, विटामिन ए दृष्टि में सुधार के लिए बहुत अच्छा माना जाता है और साथ ही किसी भी उम्र के लोगों के आंख के दर्द को भी काम करने में मदद करता है।
11. स्किन केयर में-
हरी मिर्च में विटामिन सी का भी समृद्ध स्रोत होता है जिसे हरी मिर्च खाने से हमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी मिल जाता है जिसके कारण त्वचा को स्वस्थ रखने के साथ चमकदार बनाने में मदद मिलती है
12. प्रतिरक्षा प्रणाली में-
नियमित रूप से हरी मिर्च सेवन करने से मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने में मदद मिलती है।
13. पाचन में-
भोजन की पाचन शक्ति को बढ़ाने वाले व्यंजनों और सलाद के बाद हरी मिर्च ही विटामिन सी का बहुत ही अच्छा स्रोत है जिसे पाचन शक्ति बढ़ती है
14. फेफड़ो से सम्बंधित समस्याएं  रोकने में-
रोज हरी मिर्च खाने से सर्दी-जुखाम और खाँसी में तो मदद मिलती है साथ ही फेफड़ों में कैंसर को रोकने में भी मदद मिल जाती है
15..हड्डी की सुरक्षा  में-
हरी मिर्च ऊतकों की मरम्मत का काम भी करती है साथ ही नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करती है रोज हरी मिर्च के सेवन से हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने में मदद मिलती है


16. उम्र को कम दिखाने में-

जो लोग रोज भोजन के साथ हरी मिर्च खाते है उनकी त्वचा शिकन मुक्त हो जाती है जिसे लंबे समय तक उनके चहरे पर चमक बरकरार रहती है साथ ही वो लोग लंबे समय तक अपनी बढ़ती उम्र से दूर रहते है
17. कब्ज को रोकने में-
हरी मिर्च मानव शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए जानी जाती है और इस प्रकार ये कब्ज को रोकने में मदद करती है। ये आहार फाइबर का भी अच्छा स्रोत है जो आंत प्रणाली के सही तरह से काम करने में मदद करता है
18. वजन घटाने में-
हरी मिर्च शरीर की अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करता है साथ ही ये मानव शरीर की उपापचय बढ़ाने और वजन घटाने में मदद करता है।
19. मूड अच्छा करने में-
हरी मिर्च खाने से मानव मस्तिष्क में अच्छा महसूस करने वाले हार्मोन बढ़ जाते है जिसके कारण मूड अच्छा होने में मदद मिलती है
20. पेट के कैंसर को रोकने में-
हरी मिर्च में कई तरह के तत्वों पाए जाते है जो पेट से संबंधित समस्याओं और साथ ही पेट के कैंसर को रोकने में मदद करते है।
21. लार बनाने में-
खाद्य पदार्थ चबाते समय लार का बनना जरुरी होता है क्योकि उसके कारण भोजन का सही से पाचन होता है और हरी मिर्च खाने में लार को बनाने में मदद करती है जिसके कारण भोजन को अच्छी तरह से चबाने में तथा साथ ही पाचन प्रक्रिया में मदद मिलती है।
22.मूड बूस्टर के रूप में
 हरी मिर्च को मूड बूस्टर के रूप में भी जाना जाता है. यह मस्तिष्क में एंडोर्फिन का संचार करती है जिससे हमारा मूड काफी हद तक खुशनुमा रहने में मदद मिलती है. 
23.लंग कैंसर से बचाव
 कई शोधों में लंग कैंसर से बचाव के तौर पर भी हरी मिर्च के प्रयोग को फायदेमंद माना गया है. हालांकि अभी तक इसकी कोई प्रमाणिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
24. हरी मिर्च में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसकी वजह से शरीर बैक्टीरिया-फ्री रहता है और यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करता है. 
25..आथ्रॉईटिस 
.आथ्रॉईटिस के मरीजों के लिए मिर्ची बहुत लाभदायक होती है। अगर आपके शरीर में दर्द होता है तो आपको मिर्च का सेवन जरूर करना चाहिए। हमारे शरीर के दर्द को कम करने मे सहायता प्रदान करता है।