19.8.19

दशमूल जड़ी बूटी के स्वास्थ्य लाभ


 दशमूल हर्ब का नाम दश और मूल की संधि से बना है जिसका अर्थ है कि दस जड़ी-बूंटियों की जड़ें। दशमूल हर्ब में दस जड़ी-बूंटियों के गुण एक साथ होते हैं इसलिए इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी होता है।
  दशमूल शरीर के लिए काफी उपयोगी हर्ब होता है। दशमूल हर्ब का उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक दवाओं के रुप में किया जाता रहा है। 10 आयुर्वेदिक जड़ी-बूंटियों के मिश्रण से दशमूल हर्ब बनाया जाता है। यह जड़ी-बूंटी नसों की समस्याओं, मसल्स की ऐंठन, हड्डियों और जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए लाभकारी होता है। दशमूला सूजन की समस्या को दूर करने के लिए बेहद लाभकारी होता है। आइए जानते हैं शरीर के लिए कैसे दशमूला हर्ब का सेवन लाभकारी होता है।

  भारत में दशमूल 10 जड़ी बूटियों का सबसे अच्छा संयोजन है, जो विभिन्न चिकित्सा विज्ञान और आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जाता है। इसके बड़े स्वास्थ्य लाभ हैं। इसमें आयुर्वेद की 10 सर्वश्रेष्ठ जड़ें हैं जो हमें कई तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं। ये जड़ें हमें तंत्रिका समस्याओं, मांसपेशियों में ऐंठन, हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं से राहत दे सकती हैं। दशमूल, सूजन और अन्य कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए जादुई रूप से काम करता है। 
दशमूल जड़ी बूटी के स्वास्थ्य लाभ-
रूक रूककर और तेज बुखार में है फायदेमंद
पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है
सांस की समस्याओं को रोकता है
माइग्रेन के दर्द को कम करता है
सूजन, दर्द और गठिया की सूजन से राहत देता है
दशमूल जड़ी-बूटियों में 10 जड़ें- 




दशमूल 10 सर्वश्रेष्ठ हर्बल जड़ों का एक संयोजन है जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से राहत देता है। दशमूल बनाने वाली सर्वश्रेष्ठ 10 जड़ी-बूटियों इस प्रकार हैं।

अग्निमंथ
गंभारी
बिल्व
पृश्निपर्णी
बृहती
कंटकारी
गोखरू
पटाला हर्ब
शालपर्णी
श्योनाक
दशमूल के स्वास्थ्य लाभ:
रूक रूककर और तेज बुखार में है फायदेमंद -
दशमूल में बहुत सारे एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो रुक-रुक कर या बहुत तेज बुखार को ठीक करने में मदद करते हैं। यह आपके शरीर के तापमान का प्रबंधन कर सकता है और इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है। 
दशमूला हर्ब में में एंटी प्रेट्रिक गुण होते हैं जो कि तेज बुखार को ठीक करने के लिए लाभकारी होते हैं। यह शरीर के तापमान को सही रखता है। किसी भी अन्य आयुर्वेदिक औषधि की तुलना में दशमूला का सेवन बुखार को ठीक करता है। कुछ अन्य हर्ब्स का सेवन करके भी बुखार को ठीक किया जा सकता है
पाचन सुधारे
पाचन संबंधी समस्याएं और गैस का बनना इंसान की सबसे आम समस्याएं हैं। लेकिन दशमूल इन सबसे राहत दिलाने में मदद करता है। वास्तव में, फूड एलर्जी का सबसे अच्‍छा घरेलू उपचार है।


सांस की समस्याओं को रोकता है

दशमूल श्वसन संबंधी समस्याओं को कम करता है। यह छाती और श्वसन रास्‍तों की सूजन को कम करता है। यह सबसे अच्छा काम करता है जब आप हर्बल घी के साथ इसका सेवन करते हैं। 10 जड़ी का सूत्रीकरण अस्थमा, काली खांसी और सामान्‍य खांसी को कम कर सकते हैं।
सूजन, दर्द और गठिया से राहत देता है

दशमूल अद्भुत है, जब यह गठिया के लक्षणों जैसे सूजन, दर्द से राहत देता है। इसमें एनाल्जेसिक या पेनकिलर प्रभाव होता है जो गठिया की समस्याओं का इलाज करता है।
माइग्रेन के दर्द 
माइग्रेन के दर्द को कम करने के लिए भी दशमूल हर्ब उपयोगी होता है। बहुत सारे लोगों को माइग्रेन के दर्द के साथ-साथ उल्टी, जी-मिचलाने, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या होती है। जिसे ठीक करने के लिए दशमूला हर्ब का सेवन उपयोगी होता है।
दशमूल क्वाथ (दशमूल काढ़ा) के रोगों में लाभ :
✦इसका उपयोग पीठ के निचले हिस्से में दर्द, कटिस्नायुशूल, कंपकंपी, पार्किंसंस रोग में किया जाता है।
✦फेफड़ों : सूखी खांसी और श्वसन कमजोरी के लिए टॉनिक के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।
✦सभी प्रकार के बुखार
✦तनाव
✦अनिद्रा
✦संधिशोथ
✦खांसी और अस्थमा
✦कमजोरी
दशमूल क्वाथ के फायदे और उपयोग :
1-तनाव दूर करने में –
तनाव कई अतिरिक्त बीमारियों का मूल कारण है। दिव्य दशमूल क्वाथ एक उत्कृष्ट रचना है जो दिमाग पर से तनाव कम करती है। यह दवा तनाव और इसके संबंधित रोगों के लिए प्राकृतिक इलाज है।
2-मासिक धर्म विकारों में –
मासिक धर्म विकारों और गर्भावस्था को प्राप्त करने से संबंधित स्त्री रोग संबंधी विकारों में उपयोगी।
3-अवसाद में –
यह प्राकृतिक जड़ी बूटी तनाव और अवसाद को कम करती है और आपके दिमाग को आराम देती है।
4- रक्तचाप के नियंत्रण में –
यह नींद विकार से रोकने में मदद करता है और आपके रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है।
5-गठिया रोग में –
दशमूल क्वाथ का नियमित उपयोग गठिया जैसी पुरानी बीमारियों से रोकता है।
6-थकान दूर करने में –
यह दवा आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और सिरदर्द और थकान से बचने में मदद करती है।




7- खाँसी में –

दशमूल क्वाथ (दशमूल काढ़ा) में “अरण्डी की जड़ “अथवा “पोहकरमूल का चूर्ण” डाल कर पीने से श्वास, खाँसी और पसली की पीड़ा शान्त हो जाती है।(
8- सन्निपात ज्वर में –
सन्निपात ज्वर, मोह और तन्द्रा होने पर-दशमूल के काढ़े में “पीपर का चूर्ण” मिला कर पीना बहुत ही अच्छा है
9- धनुस्तम्भ रोग में –
दशमूल का काढ़ा पिलाना और शरीर में कड़वा तेल मलना हितकारी है।
10- पक्षाघात रोग में –
दशमूल का काढ़ा हींग और सेंधा नमक मिलाकर पिलाना हितकर है।( और पढ़े – लकवा के 37 घरेलु इलाज )
11- सूतिका रोग में –
इस रोग में भी दशमूल के काढ़े में पीपर का चूर्ण मिलाकर पिलाना चाहिये ।
12- हृदयशूल में –
हृदयशूल, पीठ के शूल और कमर के शूल में-देशमूल का काढ़ा सवेरे ही पीना चाहिये ।
13- बुखार में –
इस क्वाथ का प्रयोग करने से समस्त प्रकार के वातश्लैष्मिक ज्वर शीघ्र नष्ट होते हैं
14-पाश्र्वशूल में –
सन्निपात ज्वर, समस्त प्रकार के सूतिका रोग, ग्रह, कण्ठ ग्रह, पाश्र्वशूल,तथा वातरोगों को शीघ्र नष्ट करता है। विशेषतया सूतिका रोग मेंअधिक लाभप्रद है।
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घमरा के औषधीय गुण:ghamra ke gun



घमरा (Tridax procumbens) का पौधा भारतीय पारंपरिक चिकित्‍सा में प्रयोग किया जाने वाला एक औषधीय पौधा है। घमरा का पौधा विशेष रूप से एक खरपतवार है। लेकिन घमरा के औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। घमरा का प्रयोग कुछ सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। आप घमरा के लाभ सूजन दूर करने, घावों का उपचार करने, संक्रमण को रोकने आदि के लिए कर सकते हैं। घमरा का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है जैसे घमरा को पीस कर इसका रस निकालना या पेस्‍ट का उपयोग करना। इसके अलावा घमरा का तेल भी निकाला जाता है जो हमारे कई उपयोगों में आता है।
घमरा जिसे ट्राइडैक्‍स प्रोकम्‍बेन्‍स (Tridax procumbens) के नाम से जाना जाता है। यह व्‍यापक रूप से फैली हुई पर्णपाती जड़ी बूटी है। यह एक खरपतवार है जिसकी प्रकृति बारहमासी होती है। अपने औषधीय गुणों के कारण इस जड़ी बूटी का व्‍यापक उपयोग किया जा रहा है। इस पौधे की पत्तियों और इनसे निकाले गए अर्क में औषधीय गुण होते हैं। घमरा को आमतौर पर कोटबुटन (coatbuttons) या ट्राइडैक्स डेज़ी (tridax daisy) के रूप में जाना जाता है, डेज़ी परिवार में फूलों के पौधे की एक प्रजाति है।
घमरा का पौधा एक बारहमासी जड़ी बूटी और खरपतवार दोनों ही है। इसका पौधा लगभग वेल या लता की तरह फैलता है जिसकी ऊंचाई 30 से 50 सेंटी मीटर तक हो सकती है। यह पौधा कई शाखाओं में बटा होता है जिन पर छोटे-छोटे कांटेदार रूए होते हैं। इसकी पत्तियां मोटी, दानेदार और अंडाकार होती हैं जिनके किनारे नुकीले होते हैं। घमरा की पत्तियों की दोनों सतहों में रूएदार बाल होते हैं। घमरा के फूल पीले या सफेद होते हैं। इसके फल भी कठोर बालों से ढ़के होते हैं। घमरा का पौधा आपको विशेष रूप से खेतों, बेकार पड़ी पथरीली जमीनों या सड़क के किनारे देखने को मिल सकते हैं। आइए जाने घमरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व क्‍या हैं।


घमरा का उपयोग औषधीय प्रयोजनो के लिए प्राचीन समय से किया जा रहा है। क्‍योंकि घमरा का पौधा कई पोषक तत्वों से भरपूर है। घमरा के पौधे में अल्‍कलॉइड, स्‍टेरॉयड, कैरोटीनॉइड, फ्लेवोनाइड्स जैसे कैटेचिन, सेंटाओरीन और बेरेगेन्‍स आदि होते हैं। इसके अलावा फैटी एसिड, फाइटोस्‍टेरॉल, टैनिन और अन्‍य खनिज पदार्थ भी इसमें अच्‍छी मात्रा में होते हैं। घमरा के पौधे का उपयोग मधुमेह, गठिया आदि के इलाज के लिए किया जाता है क्‍योंकि घमरा में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भी होते हैं।

भारत में घमरा का उपयोग परंपरागत रूप से घाव भरने के लिए किया जाता है। घमरा में थक्‍कारोधी (anticoagulant), एंटीफंगल और कीट के जहर (insect repellent) को दूर करने वाले गुण होते हैं। घमरा की पत्तियों से प्राप्‍त रस को सीधे ही घाव के ऊपर लगाया जाता है। औषधीय गुणों के कारण घमरा की पत्तियों और इससे प्राप्‍त रस का उपयोग कई प्रकार के त्‍वचा संक्रमणों को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसके अलावा घमरा का उपयोग यकृत विकारों, हेपेटोप्रोटेक्‍शन (hepatoprotection), गैस्‍ट्राइटिस (gastritis) और पेट की जलन(heartburn) आदि के आयुवेर्दिक इलाज में किया जाता है। घमरा (ट्राइडैक्स प्रमोम्बेंस) का उपयोग भारत के कुछ हिस्सों में स्थानीय उपचारकर्ताओं द्वारा फोड़े, फुंसियों और कट के उपचार के रूप में भी किया जाता है।

विषाक्‍तता को दूर करने के लिए

आप अपने शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को दूर करने के लिए घमारा का उपयोग कर सकते हैं। हमारे शरीर में यकृत प्रमुख विषहरण अंग है। हमारे लिवर में डिटॉक्सिफिकेशन मैकेनिज्‍म में एंजाइम होते हैं। शरीर में किसी प्रकार की चोट या विषाक्‍तता होने के दौरान एंजाइम को रक्‍त में प्र‍वाहित किया जाता है। घमरा में इन एंजाइमों को उत्‍तेजित करने और इन्‍हें बढ़ाने में सहायक होता है। एक पशु अध्‍ययन से पता चलता है कि यह शरीर में मौजूद विषाक्‍तता को प्रभावी तरीके से कम कर सकता है।

कैंसर से बचाये

घमरा की पत्तियों में मौजूद आवश्‍यक तेल की मौजूदगी के कारण घमरा पौधे का जलीय अर्क कैंसर कोशिकाओं को रोकने में सहायक होता है। नियमित रूप से उपयोग करने पर यह फेफड़ों के कैंसर के विकास पर एंटी-मेटास्‍टेटिक (anti-metastatic) गतिविधि दिखाते हैं। जो कि शरीर के वजन, डब्‍ल्‍यूबीसी और हीमोग्‍लोबिन की संख्‍या में वृद्धिकरते हैं। इसके अलावा घमरा के पौधे में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट भी शरीर की कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं से बचाने में सहायक होते हैं।


उच्‍च रक्‍तचाप के लिए

उच्‍च रक्‍तचाप भी एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है। लेकिन घमरा के पौधे का उपयोग कर आप इसके लक्षणों को कम कर सकते हैं। उच्‍च रक्‍तचाप हृदय, कोरोनरी धमनी रोग, मायोकार्डियल रोधगलन और कंजेस्टिव हार्ट फेल जैसी समस्‍याओं का कारण बन सकता है। लेकिन इन समस्याओं से बचने के लिए आप घमरा के अर्क का सेवन कर सकते हैं। यह उच्‍च रक्‍तचाप के लक्षणों को कम करने में सहायक होता है।

घाव का इलाज करे

घमरा की पत्तियों के रस का पारंपरिक रूप से घावों का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है। घमरा के औषधीय गुण और पोषक तत्‍व रक्‍तस्राव को रोकने और उपचार प्रक्रिया को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यदि आप भी घाव या चोट के जख्‍म को ठीक करना चाहते हैं तो घमरा का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप घमरा पौधे के रस को सीधे ही घाव पर लगाएं। ऐसा करने से चोट या घाव से रक्‍तस्राव को रोका जा सकता है। साथ ही यह घाव को ठीक करने की प्रक्रिया को तेज करता है। घमरा पौधे के गुण त्‍वचा संक्रमण को भी भी प्रभावी रूप से दूर कर सकते हैं।

सूजन दूर करे

घमरा एक औषधीय जड़ी बूटी है जो कई प्रकार की शारीरिक समस्‍याओं को दूर कर सकती है। अपने औषधीय गुणों के कारण घमरा का उपयोग सूजन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसमें मौजूद सूजन विरोधी गुण चोट की सूजन, कब्‍ज से होने वाले दर्द आदि को कम करने में सहायक होते हैं। आप भी इस प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए घमरा का उपयोग कर सकते हैं।

गठिया का उपाय

गठिया एक दर्द और सूजन वाली समस्‍या है जो कि बहुत ही कष्‍टदायक होती है। इस बीमारी के दौरान शरीर के जोड़ों में सूजन और दर्द बना रहता है। लेकिन इस प्रकार की समस्‍या को दूर करने में घमरा का उपयोग किया जा सकता है। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से गठिया के दर्द प्रभावित जगह पर घमरा के तेल से मालिश करने पर यह दर्द और सूजन को दूर कर सकता है। घमरा में ऐसे घटक होते हैं जो सूजन प्रभावित कोशिकाओं को आराम दिलाने और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। आप भी गठिया रोगी के दर्द और सूजन का इलाज करने के लिए घमरा का तेल या घमरा की पत्तियों के पेस्‍ट का उपयोग कर सकते हैं।


घमरा का अर्क मधुमेह को रोके

मधुमेह रोगियों के लिए घमरा के पौधे का अर्क बहुत ही फायदेमंद होता है। घमरा के पौधे में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि नियमित रूप से 7 दिनों तक घमरा के अर्क का सेवन करने से शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा यह शरीर में इंसुलिन उत्‍पादन को भी सक्रिय करता है जो रक्‍त शर्करा के स्‍तर को बढ़ने से रोकता है। यदि आप भी डायबिटिक रोगी हैं तो घमरा के अर्क का सेवन कर सकते हैं। यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

संक्रमण से बचाये

औषधीय जड़ी बूटी घमरा में एंटी बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो हमें संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं। नियमित रूप से घमरा के अर्क का उपयोग कर आप जीवाणु संक्रमण के पेचिश, दस्‍त और आंतों संबंधी विकारों को दूर कर सकते हैं। घमरा के पौधे में सक्रिय घटक जैसे टैनिन, फलेवोनाइड्स एथिल एस्‍टर और अन्‍य घटक होते हैं। ये सभी घटक शरीर में मौजूद संक्रमण को रोकने और उन्‍हें फैलने से बचाते हैं। यदि आप भी इसी तरह के किसी संक्रमण का इलाज करना चाहते हैं तो घमरा के पौधे का उपयोग कर सकते हैं।

सावधानी-

घमरा एक औषधीय पौधा है जिसका उपयोग कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त करने के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में घमरा का उपयोग करने के नुकसान भी हो सकते हैं।
कुछ लोगों को घमरा का उपयोग करने पर एलर्जी हो सकती है। जिससे त्‍वचा में खुजली, चकते या जलन हो सकती है।
अधिक मात्रा में घमरा के अर्क का सेवन करने से उल्टी, मतली और दस्‍त आदि की समस्‍या भी हो सकती है।
मधुमेह रोगियों को घमरा के अर्क का बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। अन्‍यथा शरीर में रक्‍त शर्करा का स्‍तर बहुत नीचे जा सकता है जो हानिकारक होता है।
गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए यह सुरक्षित है या नहीं इस पर शोध चल रहे हैं। इसलिए इन महिलाओं को भी घमरा के अर्क का सेवन करने से बचना चाहिए।
यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो घमरा या इससे बने अन्‍य उत्‍पादों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लें।
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धनिया के हैं कमाल के स्वास्थ्य लाभ



धनिया एक जड़ी-बूंटी के रुप में उगने वाला प्राकृतिक पौधा है इसकी पत्तियों और बीजों का इस्तेमाल हमारे रसोइ घरों में किया जाता है। खाना बनाने के लिए साबुत धनिया, धनिए के बीज, धनिए के पाउडर और धनिए की पत्तियों का काफी इस्तेमाल करते हैं। धनिए का पानी भी सेहत के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुणों के साथ ही बहुत सारे विटामिन और मिनरल भी होते हैं इसलिए धनिया सेहत के लिए उपयोगी होता है।
धनिया प्रकृति शीतल और खुश्क होता है। इसे अंग्रेजी में कोरिएंडर कहते है। हरी धनिया के पत्ते भोजन बनाने में ज्यादातर उपयोग किये जाते है। इससे हमारा भोजन बहुत स्वादिष्ट बनता है। इसको पॉलीथिन में रखने से ताजा बना रहता है। धनिया के फल को बंद मुंह के बर्तन और ठन्डे स्थान पर रखना चाहिए। धनिया का काम ठंडक पहुँचाना है। अगर इसे खुले मुंह के बर्तन में रखेंगे को इसका तेल उड़ जाता है। इसके तेल उड़ जाने के बाद इसका गुण में कमी आ जाती है।
हरी धनिया का कैसे उपयोग करे
इसके पत्ते की चटनी बनाकर या सब्जी में डालकर खा सकते है। इसकी पत्तियों को अच्छी तरह से धुलकर बारीक-बारीक काट ले। इसे सब्जी, सलाद, बिरयानी आदि पर भुरभुराकर खाये। इसको कच्चा ही खाने से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। पेशाब में जलन और रुका हुआ पेशाब की समस्या दूर होती है। इससे कब्ज, रक्त चाप, अम्लपित्त, मानसिक तनाव, चिंता आदि में लाभ मिलता है। हरी धनिया को खाते रहने से शरीर में संक्रमण फैलने की समस्या उत्पन्न नहीं होती है। शरीर निरोगी बना रहता है।
हरा धनिया के फायदे सूजन को कम करता है: 
धनिए में एंटी-इंफ्लेमेंट्री गुण होते हैं इसलिए धनिए का सेवन करने से सूजन कम होती है। त्वचा की सूजन कम करने हेतु धनिए के एसेशिंयल ऑयल का भी उपयोग करना लाभकारी होता है।


हरा धनिया के फायदे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में
 
Hara dhania हरा धनिया में फाइबर होता है। इसलिए इसका सेवन करने से सेहत पाचन तंत्र सही रहता है और पेट की बीमारियां नहीं होती है।
हरा धनिया के फायदे डायबिटीज को नियंत्रित करने में
धनिया खून में शर्करा के लेवल को कम करता है इसलिए इसका सेवन करने से इंसुलिन का स्तर सही बना रहता है यहीं कारण है कि धनिए का सेवन करना डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। धनिया खाने से शुगर जैसी समस्या से राहत मिलती है।
*. त्वचा के लिए
धनिया एक्जिमा, सूखेपन और फंगल संक्रमण जैसे त्वचा विकारों को साफ करने में मददगार है. ये कई एंटीऑक्सिडेंटों से भी समृद्ध है जो मुक्त कणों से त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं. इसमें मौजूद विटामिन ए एक महत्वपूर्ण घुलनशील विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट है जो बलगम झिल्ली और त्वचा स्वस्थ बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
* गठिया से राहत
धनिया में पाया जाने वाला एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण इसे गठिया के उपचार में उपयोगी बनाता है. कारण इसका उपयोग गठिया से राहत पाने के लिए भी किया जाता है. गठिया के के मरीज इसकी सहायता ले सकते हैं.
* उच्च रक्तचाप में
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ ही धनिया उच्च रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है. यह पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज और लोहे का अच्छा स्रोत है. यह उच्च पोटेशियम और कम सोडियम के कारण हृदय की दर और रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मददगार है.
* वजन कम करने के लिए
वजन कम करने या उपापचय को नियंत्रित करने में धनिया मुख्य भूमिका निभाता है. इसके लिए आपको धनिये के बीज का इस्तेमाल करना होगा. इसके नियमित इस्तेमाल से आप अपना वजन कम कर सकते हैं.
* थायराइड में
धनिये का बीज हार्मोन को नियमित करके हमें थायराइड के खतरे से बचाने का काम करता है. इसमें उच्च प्रकार के विटामिन, खनिज, और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो थायराइड की समस्या में बहुत लाभदायक होते हैं.
* मासिक धर्म के लिए
अत्यधिक मासिक धर्म के प्रवाह से पीड़ित महिलाओं को उबले धनिये के बीज के पानी का सेवन करना चाहिए. यह रक्तस्राव को नियंत्रित करता है. धनिया में मौजूद आयरन रक्त की कमी को पूरा करके ऊर्जा के स्तर में भी सुधार करता है.
* बालों के लिए
धनिया का रस नए बालों के विकास में काफी लाभकारी है. ये बालों के झड़ने की समस्या से छुटकारा दिलाती हैं. क्योंकि इसमें आवश्यक विटामिन और प्रोटीन होते हैं जो बालों के विकास में मदद करते हैं.
* पाचन के लिए
धनिया पाचन तंत्र के अन्य लक्षण जैसे गैस, सूजन और चिड़चिड़ापन आदि से छूटकारा दिलाने में मदद करता है. इसका उपयोग आंतों को पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से अवशोषित करने में मदद करता है.
*. शुगर के उपचार में
धनिया का बीज इंसुलिन की गतिविधि को नियमित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है. यह अन्य सामान्य चयापचय कार्यों के ठीक से होने के लिए रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से कम करता है. इसके लिए आप धनिया पाउडर या धनिया बीज का उपयोग करी, सूप, अचार, रस में कर सकते हैं.
* फायदे एलर्जी में
इसमें मौजूद उच्च एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण ये एलर्जी और आँखों की खुजली से राहत प्रदान करता है. यह एलर्जी के आम लक्षणों जैसे पित्ती, खुजली और सूजन को दूर करने में मदद करता है.
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पथरी निकालने का बढ़िया तरीका है धनिया
-एक लीटर पानी में साठ ग्राम धनिया डालकर अच्छी तरह उबाले। उबल जाने पर इसके पानी को छान ले। इसके पानी में एक कप मूली का रस और आवश्यकतानुसार सेंधा नमक मिला ले। इसको खाना खाने के बाद प्रतिदिन पांच-पांच चम्मच की मात्रा में सुबह शाम ले। पथरी टुकड़े में होकर निकल जाएगी। पथरी में नमक कम और पानी अधिकाधिक मात्रा में पिए।
-सौंफ, सूखा खड़ा धनिया और मिश्री तीनो 50-50 ग्राम एक लीटर पानी में भिगो दे। सुबह इसे पानी से छान ले। इसे पीसकर फिर इसी पानी में मिला ले और इसे छानकर पी जाये। अगर एक बार में ये पानी न पिया जाये तो प्यास लगने पर पिए। इसी तरह सुबह भी भिगोकर शाम को पिए। इससे पेशाब खुलकर आएगा और पथरी निकल जाएगी। पथरी निकालने के लिए जितना पानी पिए उतना फायदा करेगा। नमक का सेवन कम करे।
कोलेस्ट्राल कम करने में सहायक धनिया
एक गिलास पानी में चार चम्मच Dhaniya डालकर उबाले। आधा पानी रहने पर इसको ठंडा होने के लिए रख दे। हल्का गुनगुना रहने पर इसे छानकर प्रतिदिन पिए। इससे पेशाब अधिक आएगा और कोलेस्ट्राल कम होगा।


धातु गिरना बंद करता है धनिया

*सूखा पिसा हुआ धनिया और पिसा हुआ मिश्री समान मात्रा में ले। दोनों को मिलाकर दो-दो चम्मच प्रतिदिन तीन बार ठन्डे पानी से सेवन करे। इससे धातु गिरना बंद हो जाता है।
दमा, खांसी में धनिया
अधिक खांसी आता हो या दमा के कारण सांस फूलता हो तो उसमे धनिया बहुत फायदेमंद होता है।
-इसमें Dhaniya और मिश्री को समान मात्रा में पीस ले। इसे चावलों के पानी के साथ लेने से बहुत लाभ मिलता है।
-धनिये की पत्तियों का रस आधा कप में आवश्यकतानुसार सेंधा नमक मिलाकर पीने से दमा में फायदा मिलता है।
श्वेतप्रदर में लाभदायक धनिया
-दो चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच मिश्री ले। इसे एक गिलास पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान ले। हल्का गर्म रहने पर रात को सोते समय एक बार प्रतिदिन पीने से श्वेतप्रदर में लाभ मिलता है।
योनि संक्रमण को दूर करने में उपयोगी धनिया
*पेशाब में जलन, दर्द, खुजली, सूजन, घाव, संक्रमण आदि हो तो इसमें धनिया बहुत उपयोगी है।
आवंला, धनिया और मिश्री समान मात्रा में लेकर पीस ले। इसे दिन में दो-दो चम्मच सुबह शाम पानी के साथ फंकी लेने से योनि संक्रमण दूर होता है।
धनिया पाउडर का पोषण चार्ट देखा जाए। तो इसमे 8 प्रतिशत फाइबर, 2.9 प्रतिशत कैल्शियम और अन्य गुणकारी तत्व पाए जाते हैं। यह एंटी डायबीटिक भी होता है। इस कारण यूरोप के कई देशों में इसको एंटी डायबीटिक पौधे के रूप में भी जाना जाता है। इसके अनेको-अनेक फायदे है। आइये जानते है विस्तार से:-
थाइरोइड ग्रंथि में धनिया उपयोगी
इसकी क्रिया बढ़ जाने या कम हो जाने पर पांच चम्मच खड़ा धनिया ले। इसे एक गिलास पानी में अच्छी तरह उबाल ले। इसे छानकर पीने से थाइरोइड की ग्रंथि पिघल जाएगी।
सुंदरता बढ़ाने में उपयोगी धनिया
चेहरे और शरीर की सुंदरता बढ़ाने के लिए धनिया बहुत ही उपयोगी होता है।
-दो चम्मच खड़ा धनिया ले। इसे दो गिलास पानी में चार घंटे भिगोकर रख दे। पानी से Dhaniya को छानकर अलग कर दे। प्रतिदिन इसी पानी से आंखे बंद करके चेहरे को एक से डेढ़ महीने तक धुले। चेहरा में निखार आएगा और कालादाग, धब्बे दूर होकर सुंदरता बढ़ाएगा।
-घमौरियां हो जाने पर इस पानी से नहाने पर इस समस्या से छुटकारा मिलता है।
-नहाने या हाथ-पैर धोने के लिए धनिया को ज्यादा मात्रा में ले।
-भोजन करने के बाद एक चम्मच धनिया का फंकी ले। इससे आंतरिक सौंदर्य बढ़ता है।
रोग निरोधक और शक्तिवर्धक बढ़ाता है धनिया
प्रतिदिन धनिया का सेवन किसी न किसी तरह करते रहे। पत्ती की चटनी बनाकर, सब्जी में डालकर या खड़ा धनिया खाते रहे। इससे हमारे शरीर में संक्रमण होने की समस्या नहीं रहेगी। जो निरोगी बनाये रखने में सहायक होती है।
जीरा 30 ग्राम, हल्दी 20 ग्राम, धनिया 30 ग्राम ले। इसमें सौंफ, सोंठ, काली मिर्च और तेजपत्ता सबको दस-दस ग्राम और दालचीनी 5 ग्राम में लेकर मिला ले। इन सबको दो चम्मच घी में अच्छी तरह से भूने। इसे एक साफ़ कांच की शीशी में भर ले। मसाले बनकर तैयार है। जब भी भोजन करने बैठे तो इस मसाले को चटनी या भोजन पर भुरका ले। इससे भोजन अधिक स्वादिष्ट लगेगा। कफ, दमा, खांसी, रक्तप्रदर, टी. बी. छाले, बवासीरआदि रोंगो में लाभ मिलता है। ये मसाले शरीर को निरोगी बनाये रखने और ताकत प्रदान करते है।
चोट लगने पर धनिया लाभदायक
देखा जाये तो चोट लगने पर दर्द और सूजन होना स्वाभाविक है। इससे नीला धब्बा भी पड़ जाता है।
-हल्दी और Dhaniya को बराबर मात्रा में लेकर पीस ले। खाने में काम आने वाला तेल डालकर दोनों को तवे पर भून ले। इसे चोट लगे हुए स्थान पर लेप करके पट्टी बाँध ले। चोट का दर्द और सूजन जल्द ही ठीक हो जायेगा।


थकावट में फायदेमंद धनिया

यात्रा करते समय, काम करते वक्त या अन्य किसी कारणवश थकावट आ गई हो।
-बीस दाने सुखी Dhaniya लेकर चबाये। इससे थकावट दूर हो जाएगी। यात्रा के समय एक शीशी सूखी धनिया साथ में रखे जिससे आराम मिलेगा। अगर घुटनो दर्द हो रहा हो तो धनिया खाने के साथ ही पैरो के घुटनो तक ठन्डे पानी में डुबोये रखे। या घुटनो से नीचे पैरो तक ठंडा पानी डाले।
वात पित्त को दूर करने में सहायक धनिया
-Dhniya और सौंफ को समान मात्रा में लेकर तवे पर सेककर पीस ले। इसको दो-दो चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी के साथ फंकी ले। इससे वात पित्त की समस्या दूर हो जाएगी।
मिरगी में लाभदायक धनिया
एपिलेप्सी यानी मिरगी की बीमारी दूर करने के लिए Dhaniya बहुत लाभदायक होता है।
-इसमें 50 ग्राम धनिया लेकर एक लीटर पानी में डालकर इतना उबाले की 1/3 भाग पानी बचे। इसे छानकर इसमें आवश्यकतानुसार नमक मिलाकर इसको चार भाग कर ले। इसे दिन में चार बार पिए। इससे मिर्गी के दौरे आना बंद हो जायेंगे।
सिरदर्द में उपयोगी धनिया
–सर्दी जुकाम से उत्पन्न सिरदर्द में चार चम्मच धनिया और दो चम्मच मिश्री एक गिलास पानी में उबाले। जब आधा पानी रह जाये तो इसे छान ले। इससे सिरदर्द ठीक हो जायेगा।
चेचक की गर्मी में धनिया के लाभ
-इसकी गर्मी निकालने के लिए चेचक ठीक होने के बाद Dhaniya और जीरा 2-2 चम्मच ले। इसे मिटटी के बर्तन में एक गिलास पानी लेकर भिगो दे। सुबह उस पानी में मिश्री या चीनी मिलाकर पिए। इससे मल साफ़ हो जाता है और गर्मी साफ़ हो जाती है।
चक्कर आने में धनिया फायदेमंद
कमजोरी, बीमारी या यात्रा के दौरान चक्कर आ रहा है।
-एक चम्मच Dhaniya और दो चम्मच सौंफ दोनों को पीसकर मिला ले। इसे प्रतिदिन सुबह शाम गर्म पानी के साथ फंकी लेने पर चक्कर आना बंद हो जाता है।
गले में दर्द और जलन को दूर करता है धनिया
-गले में संक्रमण हो जाने से गले में दर्द होने लगता है। इससे छुटकारा पाने के लिए दो-दो चम्मच सूखा धनिया हर तीन घंटे पर चबा-चबाकर चूसते रहे। इससे संक्रमण को दूर कर गले के दर्द में आराम मिलता है। विशेषकर गर्मी से हो रहे दर्द में बहुत फायदा मिलता है।
धनिया से नुकसान
जो व्यक्ति यौन शक्ति में दुर्बलता महसूस करता हो। Dhaniya उसके लिए हानिकारक है।
सूखा या हरा धनिया के अधिक मात्रा में सेवन करने से शुक्राणु और कामशक्ति में कमी आ जाती है।
इसके ज्यादा सेवन से स्त्रियों के मासिक धर्म रुक जाते है।

हरी मिर्च खाने के स्वास्थ्य लाभ -डॉ॰आलोक


हरी मिर्च कई तरह के पोषक तत्वों जैसे- विटामिन ए, बी6, सी, आयरन, कॉपर, पोटेशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती है. यही नहीं इसमें बीटा कैरोटीन, क्रीप्टोक्सान्थिन, लुटेन -जॅक्सन्थि‍न आदि स्वास्थ्यवर्धक चीजें मौजूद हैं. वैसे तो आमतौर पर इसका इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही किया जाता रहा है लेकिन हाल में हुए कई शोध इस बात का दावा करते हैं कि हरी मिर्च खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.
लाल मिर्च हो या हरी मिर्च भोजन में जबतक ना डाली जाए तो सब्जी अधूरी-सी लगती है। हरी मिर्च की बात करें तो इसका इस्तेमाल केवल भोजन में तीखापन और स्वाद लाने के लिए ही यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। हरी मिर्च सेहत के लिए गुणों का खजाना है। यह आपके स्वास्थ्य को कई तरह से बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। जानिए...


1. हरी मिर्च में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो कि‍सी भी प्रकार के संक्रमण से शरीर और त्वचा की रक्षा करते हैं।

2. हरी मिर्च में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाते है।
3. हरी मिर्च में डाइट्री फाइबर्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है।
4. कैंसर के खतरे को कम करती
शरीर की आंतरिक सफाई के साथ ही फ्री रेडिकल से बचाकर कैंसर के खतरे को कम करती है।
5.हरी मिर्च में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है. विटामिन सी दूसरे विटामिन्स को शरीर में भली प्रकार अवशोषित होने में मदद करता है.
6. हरी मिर्च एंटी-ऑक्सीडेंट का एक अच्छा माध्यम है. हरी मिर्च में डाइट्री फाइबर्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू बनी रहती है.
7.  आंखों और त्वचा के लिए
विटामिन ए से भरपूर हरी मिर्च आंखों और त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है.
8. ब्लड शुगर को कम करने में 
हाल में हुई कुछ स्टडीज के अनुसार, हरी मिर्च ब्लड शुगर को कम करने में कारगर होती है .5. अगर आपको ह्रदय से जुड़ी कोई समस्या है तो आपको मिर्ची का सेवन अवश्य करना चाहिए। दिल के लिए मिर्ची बहुत लाभदायक होती है। मिर्ची का सेवन करने से रक्त के थक्कों की समस्या नही होती है।
9. पाचनतंत्र मजबूत
मिर्ची का सेवन करने से हमारा पाचनतंत्र मजबूत बना रहता है। मिर्ची में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जिससे मिर्च से बने भोजन का पाचन अच्छे से होता है।


10.आई केयर में-

हरी मिर्च के कई पोषक तत्वों में से एक विटामिन ए है, विटामिन ए दृष्टि में सुधार के लिए बहुत अच्छा माना जाता है और साथ ही किसी भी उम्र के लोगों के आंख के दर्द को भी काम करने में मदद करता है।
11. स्किन केयर में-
हरी मिर्च में विटामिन सी का भी समृद्ध स्रोत होता है जिसे हरी मिर्च खाने से हमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी मिल जाता है जिसके कारण त्वचा को स्वस्थ रखने के साथ चमकदार बनाने में मदद मिलती है
12. प्रतिरक्षा प्रणाली में-
नियमित रूप से हरी मिर्च सेवन करने से मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखने में मदद मिलती है।
13. पाचन में-
भोजन की पाचन शक्ति को बढ़ाने वाले व्यंजनों और सलाद के बाद हरी मिर्च ही विटामिन सी का बहुत ही अच्छा स्रोत है जिसे पाचन शक्ति बढ़ती है
14. फेफड़ो से सम्बंधित समस्याएं  रोकने में-
रोज हरी मिर्च खाने से सर्दी-जुखाम और खाँसी में तो मदद मिलती है साथ ही फेफड़ों में कैंसर को रोकने में भी मदद मिल जाती है
15..हड्डी की सुरक्षा  में-
हरी मिर्च ऊतकों की मरम्मत का काम भी करती है साथ ही नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करती है रोज हरी मिर्च के सेवन से हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने में मदद मिलती है


16. उम्र को कम दिखाने में-

जो लोग रोज भोजन के साथ हरी मिर्च खाते है उनकी त्वचा शिकन मुक्त हो जाती है जिसे लंबे समय तक उनके चहरे पर चमक बरकरार रहती है साथ ही वो लोग लंबे समय तक अपनी बढ़ती उम्र से दूर रहते है
17. कब्ज को रोकने में-
हरी मिर्च मानव शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए जानी जाती है और इस प्रकार ये कब्ज को रोकने में मदद करती है। ये आहार फाइबर का भी अच्छा स्रोत है जो आंत प्रणाली के सही तरह से काम करने में मदद करता है
18. वजन घटाने में-
हरी मिर्च शरीर की अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करता है साथ ही ये मानव शरीर की उपापचय बढ़ाने और वजन घटाने में मदद करता है।
19. मूड अच्छा करने में-
हरी मिर्च खाने से मानव मस्तिष्क में अच्छा महसूस करने वाले हार्मोन बढ़ जाते है जिसके कारण मूड अच्छा होने में मदद मिलती है
20. पेट के कैंसर को रोकने में-
हरी मिर्च में कई तरह के तत्वों पाए जाते है जो पेट से संबंधित समस्याओं और साथ ही पेट के कैंसर को रोकने में मदद करते है।
21. लार बनाने में-
खाद्य पदार्थ चबाते समय लार का बनना जरुरी होता है क्योकि उसके कारण भोजन का सही से पाचन होता है और हरी मिर्च खाने में लार को बनाने में मदद करती है जिसके कारण भोजन को अच्छी तरह से चबाने में तथा साथ ही पाचन प्रक्रिया में मदद मिलती है।
22.मूड बूस्टर के रूप में
 हरी मिर्च को मूड बूस्टर के रूप में भी जाना जाता है. यह मस्तिष्क में एंडोर्फिन का संचार करती है जिससे हमारा मूड काफी हद तक खुशनुमा रहने में मदद मिलती है. 
23.लंग कैंसर से बचाव
 कई शोधों में लंग कैंसर से बचाव के तौर पर भी हरी मिर्च के प्रयोग को फायदेमंद माना गया है. हालांकि अभी तक इसकी कोई प्रमाणिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
24. हरी मिर्च में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसकी वजह से शरीर बैक्टीरिया-फ्री रहता है और यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करता है. 
25..आथ्रॉईटिस 
.आथ्रॉईटिस के मरीजों के लिए मिर्ची बहुत लाभदायक होती है। अगर आपके शरीर में दर्द होता है तो आपको मिर्च का सेवन जरूर करना चाहिए। हमारे शरीर के दर्द को कम करने मे सहायता प्रदान करता है।

लहसुन खाने के हैं कमाल के स्वास्थ्य लाभ,lahsun ke fayde


लहसुन खाने के स्वाद में तेजी बढ़ाता है. बिना लहसुन के खाने का स्वाद एकदम फीका लगता है. ज्यादातर लोग खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए लहसुन का इस्तेमाल करते हैं, इससे जायका काफी कुछ बदल जाता है, लेकिन लहसुन स्वाद के साथ-साथ हमारे स्वास्थ्य के लिए भी काफी अच्छा होता है. खाली पेट लहसुन का सेवन करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. आइए जानते हैं इसके फायदे:

डाइबिटीज, डिप्रेशन और कैंसर में खाएं लहसुन:

लहसुन शरीर को परजीवियों और कीड़ों से बचाता है, कई बीमारियां जैसे डाइबिटीज, डिप्रेशन और कैंसर की रोकथाम में सहायक सहायक होता है. लहसुन का सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या काफी कम हो सकती है. इससे बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है.
एंटीबैक्टिरियल गुणों से भरपूर है लहसुन: रोजाना लहसुन खाने से बार-बार जुकाम नहीं होता है. इसका एंटीबैक्टिरियल गुण गले के दर्द से राहत दिलाता है. इसके अलावा यह अस्थमा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस जैसी परेशानियों में भी काफी फायदेमंद है.

दिल रहेगा सेहतमंद

लहसुन दिल से संबंधित समस्याओं को भी दूर करता है. लहसुन खाने से खून का जमाव नहीं होता है और हार्ट अटैक होने का खतरा कम हो जाता है. लहसुन और शहद के मिश्रण को खाने से दिल तक जाने वाली धमनियों में जमा वसा निकल जाता है, जिससे ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक तरह दिल तक पहुंचता है.
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इससे ह्रदय घात की संभावना बेहद कम हो जाती है इसकी वजह है कि यह खून का जमना (ब्लॉकेज) कम करता है.

डायबिटीज़ से लड़ने में मदद करता है लहसुन-

हर रोज़ बदलती और असंतुलित जीवनशैली की वजह से कई लोग डायबिटीज़ यानी मधुमेह की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। लेकिन काफ़ी कम ही लोग जानते हैं कि लहसुन का सेवन करने से डायबिटीज़ पर लगाम लगाई जा सकती है। आईआईसीटी (भारत) के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहों को लहसुन खिलाया। इसके बाद चूहों के खून में ग्लूकोज़ और ट्राइग्लिसराइड के स्तर में कमी पाई गई। इसके अलावा, चूहों के शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता में भी वृद्धि देखने को मिली । इसलिए, अगर आपको डायबिटीज़ का संदेह है या डायबिटीज़ है तो आप लहसुन का सेवन करें। यह शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित कर इंसुलिन की मात्रा बढ़ाता है।



वज़न घटाने में मदद करता है लहसुन

आजकल हर किसी की व्यस्त दिनचर्या होती है। घर और काम के बीच तालमेल बनाने के चक्कर में लोग अपनी सेहत पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। खान-पान ठीक नहीं होने और नियमित रूप से व्यायाम न कर पाने की वजह से लोग मोटापे की बीमारी का शिकार भी होने लगे हैं।
हालांकि, कई बार लोग नियमित रूप से व्यायाम करने की और खान-पान में परहेज़ करने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे ज़्यादा दिनों तक ऐसा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में लहसुन बढ़ते वज़न को रोकने में काफ़ी हद तक मददगार साबित हो सकता है। यह एडीपोजेनिक ऊत्तकों की अभिव्यक्ति को रोकने में मदद करता है, थर्मोजेनेसिस को बढ़ाता है और हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। अपने इन अनोखे गुणों की वजह से लहसुन आपको मोटापे से राहत दिला सकता है।आप हर रोज़ खाली पेट कच्चे लहसुन की कुछ कलियों का सेवन कर सकते हैं। उसके कुछ देर बाद आप गुनगुने पानी में नींबू का शरबत बनाकर भी पी सकते हैं।

पाचन के लिए अच्छा है लहसुन:

लहसुन खाने से आपकी पाचन क्रिया अच्छी होती है. यह पेट की समस्याओं जैसे कि डायरिया, कब्ज और गैस में भी राहत देता है. इसके लिए खौलते हुए पानी में लहसुन की 4 से 5 कलियां डालकर ठंडा कर लें फिर रात भर इसे रखा रहने दें. सुबह उठकर खाली पेट इस पानी को पी जाएं. इससे पेट की दिक्कतें कम हो जाएंगी.

हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है लहसुन

इन दिनों लोगों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, तो कुछ लोग घरेलू नुस्खे अपनाते हैं। हाई ब्लड प्रेशर में घरेलू उपाय के तौर पर लहसुन का सेवन काफ़ी उपयोगी साबित हुआ है। दरअसल, लहसुन में बायोएक्टिव सल्फ़र यौगिक, एस-एललिस्सीस्टीन मौजूद होता है, जो ब्लड प्रेशर को 10 mmhg (सिस्टोलिक प्रेशर) और 8 mmhg (डायलोस्टिक प्रेशर) तक कम करता है। चूंकि सल्फर की कमी से भी हाई ब्ल्ड प्रेशर की समस्या होती है, इसलिए शरीर को ऑर्गनोसल्फर यौगिकों वाला पूरक आहार देने से ब्लड प्रेशर को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।

सर्दी-ज़ुकाम से बचाता है लहसुन

मौसम में बदलाव की वजह से सर्दी-ज़ुकाम होना बहुत ही आम बात है। लेकिन, ज़रूरी नहीं कि इन बीमारियों के उपचार के लिए हर बार अंग्रेज़ी दवाओं का ही सेवन किया जाए। दरअसल, लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फ़ंगल और एंटी-ऑक्सिडेंट गुणों की भरमार होती है। इसमें एलियानेस (या एलियान) नामक एंजाइम मौजूद होता है, जो एलिसिन नामक सल्फ़र युक्त यौगिक में परिवर्तित होता है। यह यौगिक सफ़ेद रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है, जो सर्दी-ज़ुकाम के वायरस से लड़ने में मदद करता है।लहसुन की कुछ कलियों को आप घी में भूनकर भी खा सकते हैं।

किडनी संक्रमण को रोकता है लहसुन

लहसुन किडनी संक्रमण की रोकथाम में भी मदद करता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि लहसुन उस पी. एरुजिनोसा के विकास को रोकने में मदद कर सकता है, जो यूटीआई और गुर्दे के संक्रमण के लिए ज़िम्मेदार होता है।

गठिया में लहसुन खाने से मिलती है राहत

लहसुन हड्डियों के लिए भी काफी लाभदायक है। ऐसा पाया गया है कि लहसुन के सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी हड्डियों की बीमारी से जूझ रहे रोगियों को काफ़ी राहत मिलती है। वैज्ञानिकों ने प्रयोगों के ज़रिए साबित किया है कि लहसुन अंडाइक्टोमी-प्रेरित हड्डी सोखन को दबाने में सक्षम है। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया है कि लहसुन डायलिल डाइसल्फाइड मैट्रिक्स को कम करने वाले एंज़ाइमों को दबाने में मदद करता है। इस तरह लहसुन हड्डियों को होने वाले नुकसान को भी रोकता है।


गर्भावस्था में लहसुन के सेवन से होने वाले लाभ
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गर्भावस्था के शुरुआती दौर में लहसुन को सीमित मात्रा में खाने में शामिल कर किया जा सकता है। इस समय लहसुन का प्रभाव भ्रूण पर कम पड़ता है । हालांकि, गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में लहसुन का प्रयोग थोड़ा सोच समझकर करना चाहिए। इस दौरान लहसुन का गलत प्रभाव पड़ने से खून का पतला होना, पेट खराब होना या लो ब्लड प्रेशर होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए, गर्भावस्था में लहसुन खाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें

लीवर को सेहतमंद रखता है लहसुन

जिन लोगों को लीवर में सूजन की शिकायत होती है, उनके लिए एक सीमित मात्रा में लहसुन का सेवन करना उपयोगी साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि लहसुन में पाए जाने वाले एस-एलील्मर कैप्टोसाइटिस्टीन (एसएएमसी) हेपेटिक चोटों के उपचार में मददगार होते हैं। वहीं, लहसुन का तेल एंटीऑक्सीडेटिव गुणों से भरपूर होता है, जो लीवर की सूजन से बचाव करता है।

गले की खराश से राहत देता है लहसुन

लहसुन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण गले में ख़राश जैसी परेशानी से हमारा बचाव करते हैं। लहसुन में एलीसिन नाम का ऑर्गनॉसुल्फ़र यौगिक भी होता है, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। जब भी गले में खराश जैसा महसूस हो, तो सरसों तेल में एक या दो लहसुन की कलियां डालकर उसे गुनगुना होने तक गर्म करें। इसके बाद गुनगुने तेल को हल्का-हल्का गले के आस-पास लगाएं।

कान दर्द होने पर राहत देता है लहसुन

कान में होने वाले हल्के संक्रमण या दर्द में भी लहसुन फ़ायदेमंद होता है। लहसुन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफ़ंगल और एंटीवायरल गुण कान के दर्द या संक्रमण से राहत दिलाते हैं।आप चाहें तो लहसुन का तेल कान में लगा सकते हैं। ये तेल बाज़ार में उपलब्ध होता है। इसके अलावा, आप घर पर भी लहसुन का तेल बना सकते हैं।

दांत दर्द से निजात दिलाता है लहसुन

वज्ञानिकों का मानना है कि लहसुन को माउथवॉश के तौर पर इस्तेमाल करना काफ़ी लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा, ऐसे टूथपेस्ट या माउथवॉश का इस्तेमाल करना भी अच्छा होता है, जिसमें लहसुन के गुण मौजूद हो। अगर आपको दांत दर्द की शिकायत है, तो हर रोज़ एक कच्चे लहसुन की कली चबाएं। इसके अलावा, आप एक लहसुन की कली में सेंधा नमक लगाकर दर्द वाले दांत पर लगाएं। इससे आपको दांत के दर्द से आराम मिलेगा।

मुंहासे और पिंपल से छुटकारा दिलाता है लहसुन

शरीर में विषाक्त पदार्थों के जमा होने से या फिर किसी संक्रमण की वजह से कील-मुंहासे हो सकते हैं। ऐसे में लहसुन का नियमित सेवन कील-मुंहासों से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। आप ठंडे पानी के साथ एक लहसुन की कली का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा खूब पानी पिएं ताकि आपके शरीर में पानी की सही मात्रा बनी रहे।


दमा में राहत देता है लहसुन

अस्थमा यानी दमा के मरीज़ों के लिए भी लहसुन काफ़ी लाभकारी है। सरसों के तेल में लहसुन पकाकर उस तेल से अगर नाक, गले और फेफड़ों के पास मालिश की जाए, तो यह छाती में जमे कफ़ से निजात दिला सकता है। वैज्ञानिकों को इस बात के सबूत भी मिले हैं कि लहसुन अस्थमा से होने वाले दुष्प्रभावों को कम कर सकता है।
बुखार या ठंड लगने पर राहत देता है लहसुन
ठंड लगने पर या बुख़ार होने पर अगर लहसुन का उपयोग किया जाए,ये तो रोगी को बहुत हद तक राहत मिल सकती है।अगर कच्चा लहसुन खाना पसंद न हो, तो आप गर्म सरसों तेल में एक-दो लहसुन की कलियां डालकर उससे शरीर की मालिश कर सकते हैं

कैंसर से बचाता है लहसुन 

लहसुन में डायलिसिल्फ़ाइड मौजूद होता है, जो ऑक्सीडेटिव तनाव को रोकने में मदद करता है। लहसुन में मौजूद सेलेनियम कैंसर से लड़ने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। साथ ही सेलेनियम डीएनए उत्परिवर्तन और अनियंत्रित सेल प्रसार और मेटास्टेसिस को भी रोकता है।
लहसुन ट्यूमर और पेट के कैंसर की आशंका को कुछ हद तक कम करता है।
इसलिए, अगर आप कैंसर के खतरे को कम करना चाहते हैं, तो स्वस्थ जीवन शैली के साथ लहसुन का नियमित सेवन करें।

कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम में मददगार है लहसुन 

ज़्यादा तेल-घी वाले खान-पान की वजह से लोगों को कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या भी हो रही है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी एक जांच में पाया है कि पुराने लहसुन में के सेवन से शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (जो कि हानिकारक कोलेस्ट्रॉल होता है) के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी तक लहसुन के इस गुण को लेकर वैज्ञानिकों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई है।

हाई ब्लड शुगर के स्तर को घटाता है लहसुन

अगर आप हाई ब्लड शुगर की समस्या से पीड़ित हैं, तो आपको अपने आहार में लहसुन को शामिल करना चाहिए। कुवैत के वैज्ञानिकों ने लैब में पशुओं पर कच्चे और उबले हुए लहसुन का प्रयोग करके पता लगाया है, कि कच्चे लहसुन में ब्लड शुगर के स्तर को कम करने की क्षमता होती है।


लहसुन दिलाता है गैस और एसिडिटी से राहत

आजकल लोग गलत खान-पान के कारण एसिडिटी यागैस की समस्या के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में सब्ज़ी पकाते समय उसमें हल्का लहसुन डालें। इस तरह से पकाई गई सब्ज़ी खाने से आपको गैस ओर एसिडिटी से राहत मिल सकती है। हालांकि, अगर आपको ज़्यादा परेशानी है, तो लहसुन से परहेज़ करें।सब्ज़ी पकाते समय चुटकी भर या चम्मच में थोड़ा सा बारीक कटा लहसुन या लहसुन का पेस्ट डालें। ध्यान रखें कि कच्चे लहसुन का सेवन न करें, वरना एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है।

छाले या फोड़े को ठीक करने में मदद करता है लहसुन

लहसुन में एलिन, एलिसिन और एजोइन जैसे सल्फ़र यौगिक मौजूद होते हैं, जो छाले या फोड़े को ठीक होने में मदद करते हैं। साथ ही लहसुन में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं, जो बैक्टीरिया को मारते हैं और छाले या फोड़े को बढ़ने से रोकते हैं।अगर आपको साबूत लहसुन खाना पसंद नहीं, तो आधा चम्मच से भी कम लहसुन का पेस्ट या एक लहसुन की कली को बारीक़ काटकर खाने में उपयोग करें।

सोरायसिस की रोकथाम में कारगर है लहसुन

सोरायसिस एक प्रकार का त्वचा रोग है, जिसमें खुजली होने लगती है और त्वचा लाल हो जाती है। यह बीमारी ज़्यादातर सिर की त्वचा, कोहनी और घुटनों को प्रभावित करती है। इस बीमारी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन लहसुन खाने से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। लहसुन में डायलिल सल्फ़ाइड और एजेन जैसे यौगिक होते हैं। ये यौगिक न्यूक्लिअर ट्रांसमिशन कारक कप्पा बी (जिसकी वजह से सोरायसिस होता है) को निष्क्रिय कर देते हैं।दो से तीन लहसुन की कलियों को हरे प्याज़, ब्रोकली और चुकंदर के रस के साथ मिलाकर उसका सेवन करें।

दाद में राहत देता है लहसुन

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं, लहसुन में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। ये गुण किसी भी तरह के संक्रमण से शरीर को बचा सकते हैं। इसलिए, जिस व्यक्ति को दाद की बीमारी होती है, उसे अपने भोजन में हल्की मात्रा में लहसुन को शामिल करने की राय दी जाती है। हालांकि, लहसुन दाद की बीमारी से पूरी तरह छुटकारा नहीं दिला सकता। लेकिन, यह दाद की वजह से होने वाली खुजली से राहत दिला सकता है।आप अपने भोजन में एक निश्चित मात्रा में लहसुन को शामिल कर सकते हैं।

झुर्रियों को कम करता है लहसुन

कई बार लोगों की त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां नज़र आने लगती हैं।दरअसल, ऐसा गलत खान-पान, तनाव, सूर्य की हानिकारक किरणों और बदलती जीवनशैली की वजह से होता है। ऐसे में अगर लहसुन का सेवन किया जाए, तो समय से पहले चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों से बचा जा सकता है। लहसुन में एस-एलिल सिस्टीन पाया जाता है जो त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों और झुर्रियों से बचाने में मदद करता है। लहसुन में एंटीऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लैमटोरी गुण भी होते हैं, जो झुर्रियां कम करने में मदद करते हैं। सुबह नींबू और शहद के साथ लहसुन की एक कली खाएं।

लहसुन बालों को झड़ने से रोके 

आज के समय में बालों का झड़ना एक आम समस्या है। आमतौर पर धूल, प्रदूषण, अशुद्ध पानी और खराब खान-पान की वजह से बाल झड़ने की समस्या होती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि लहसुन का जेल और बीटामेथेसोन वालरेट बाल झड़ने की समस्या पर रोक लगा सकता है। आप अगर मांसाहारी हैं, तो मछली में लहसुन का उपयोग कर सकते हैं। इससे बालों को फ़ायदा हो सकता है। इसके अलावा, आप पालक के स्मूदी के साथ लहसुन का सेवन कर सकते हैं।
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सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस(गर्दन का दर्द) के उपचार

वजन कम करने के लिए कितना पानी कैसे पीएं?

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब रुकावट की कारगर हर्बल औषधि

सेक्स का महारथी बनाने वाले आयुर्वेदिक नुस्खे


आर्थराइटिस(संधिवात),गठियावात ,सायटिका की तुरंत असर हर्बल औषधि

खीरा ककड़ी खाने के जबर्दस्त फायदे

महिलाओं मे कामेच्छा बढ़ाने के उपाय

मुँह सूखने की समस्या के उपचार

गिलोय के जबर्दस्त फायदे

इसब गोल की भूसी के हैं अनगिनत फ़ायदे

कान मे तरह तरह की आवाज आने की बीमारी

छाती मे दर्द Chest Pain के उपचार

सिर्फ आपरेशन नहीं ,किडनी की पथरी की १००% सफल हर्बल औषधि

किडनी फेल रोगी का डाईट चार्ट और इलाज

तिल्ली बढ़ जाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय/sex power

कई बीमारियों से मुक्ति द‍िलाने वाला है गिलोय


किडनी स्टोन के अचूक हर्बल उपचार

स्तनों की कसावट और सुडौल बनाने के उपाय

लीवर रोगों के अचूक हर्बल इलाज

सफ़ेद मूसली के आयुर्वेदिक उपयोग

दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के आशु लाभकारी उत्पाद

मेथी का पानी पीने के जबर्दस्त फायदे

18.8.19

ब्लड प्रेशर के उतार चढ़ाव को कंट्रोल मे रखने के घरेलू उपाय



अगर आपका डाइट प्‍लान सही नहीं है तो आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं। ये स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं ही आगे चलकर ह्रदय रोगों, ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या, कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियों का रूप ले लेती हैं। ब्‍लड प्रेशर को नियमित करने के लिए स्‍वस्‍थ और पोषणयुक्‍त आहार की बहुत जरूरत है। उच्‍च रक्‍तचाप के लिए ऐसा आहार होना चाहिए जिसमें नमक और सोडियम की मात्रा कम हो। ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या होने से आदमी की मौत भी हो सकती है। रक्‍तचाप की समस्‍या दो प्रकार की होती है, उच्‍च रक्‍तचाप (High Blood Pressure) और निम्‍न रक्‍तचाप (Low Blood Pressure)। उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या को हाइपरटेंशन भी कहा जाता है। ब्‍लड का प्रेशर 80/130 होना चाहिए। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जो ब्लड प्रेशर घटने और बढ़ने की समस्या से परेशान रहते हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कि ब्‍लड प्रेशर को नियमित करने के लिए कैसे अपना डाइट चार्ट तैयार करना चाहिए।
सोडियम की कम मात्रा
ब्‍लड प्रेशर के मरीज के खाने में में पोटेशियम की मात्रा ज्यादा हो और सोडियम की मात्रा कम होनी चाहिए। यदि उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या है तो नमक का सेवन कम करना चाहिए। साथ ही डेयरी उत्पादों, चीनी, रिफाइंड खाद्य-पदार्थों, तली-भुनी चीजों, कैफीन और जंक फूड से परहेज करना चाहिए।
कम मात्रा में बाजरा, गेहूं का आटा, ज्वार, मूंग साबुत तथा अंकुरित दालों का सेवन करना चाहिए। इससे ब्‍लड प्रेशर बढ़ता है।
पालक, गोभी, बथुआ जैसी हरी सब्जियों का सेवन करने से ब्‍लड प्रेशर सामान्‍य रहता है।
सब्जियों में लौकी, नींबू, तोरई, पुदीना, परवल, सहिजन, कद्दू, टिण्डा, करेला आदि का सेवन करना चाहिए।
अजवायन, मुनक्का व अदरक का सेवन रोगी को फायदा पहुंचाता है।
फलों में मौसमी, अंगूर, अनार, पपीता, सेब, संतरा, अमरूद, अन्नानास आदि सेवन कर सकते हैं।
बादाम बिना मलाई का दूध, छाछ सोयाबीन का तेल, गाय का घी, गुड़, चीनी, शहद, मुरब्बा आदि का सेवन कर सकते हैं।
नियमित और पौष्टिक आहार के अलावा नियमित रूप से व्‍यायाम और योगा ब्‍लड प्रेशर को नियमित करने में बहुत मदद करता है। सकारात्‍मक सोच रखने से ब्‍लड प्रेशर सामान्‍य रहता है।
पानी का अधिक सेवन
ब्‍लड प्रेशर के मरीज को ज्‍यादा पानी का सेवन करना चाहिए। दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए।
ताजे फलों और सब्जियों का सेवन


उच्च रक्तचाप के रोगी को ज्यादा मात्रा में भोजन नहीं करना चाहिए, साथ ही गरिष्ठ भोजन से भी परहेज करना चाहिए। खाने में नियमित रूप से ताजे फलों और सीजनल हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करना चाहिए। लहसुन, प्याज, साबुत अनाज, सोयाबीन आदि का सेवन करने से ब्‍लड प्रेशर सामान्‍य रहता है।

1. ओट्स
अगर आप हाइपरटैंशन से पीड़ित है तो आपको नाश्ते में फाइबर से भरे हुए  ओट्स का एक बाउल बहुत फायदा देगा। उच्च रक्तचाप के साथ ही यह शरीर के बुरे कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है और दिल की कई बीमारियों को ठीक करता है।
2.अनार
अनार में कई बीमारियों को दूर करने के गुण हैं। व्यक्ति को लगातार दो हफ्तों तक अनार के जूस का एक गिलास शाम के समय दिया जाए तो बी.पी कंट्रोल होने लगता है।


3.चुकंदर

इसे अगर आप अपने डाइट में नहीं शामिल करते तो अब स्थान देना शुरू करें क्योंकि इसमें नाइट्रेट होता है और जिससे इसके एक गिलास जूस लेने के बाद एक ही घंटे में उच्चरक्तचाप नियंत्रित होने लगता है।
4.डार्क चाॅकलेट
डार्क चॉकलेट में एंटीऑक्सीडेंट्स काफी मात्रा में होते है, जिसे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। ‘डार्क चॉकलेट’ शरीर में उसी तरह से असर करता है, जैसे रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए ली जाने वाली कोई दवा असर करती है।
5.लहसुन
इसमें हाई ब्लड प्रैशर को ठीक करने के बहुत गुण पाए जाते है। लहसुन का सेवन करने से भी उच्चरक्तचाप नियंंत्रित रखा जा सकता है।

हड्डियों के जोड़ मजबूत करने के आहार



हमारी हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन व अन्य कई प्रकार के मिनरल से मिलकर बनी होती हैं। किंतु अनियमित जीवनशैली, खान-पान व शारीरिक निष्क्रीयता की वजह से ये मिनरल खत्म होने लगते हैं, जिससे हड्डियों का घनत्व (बोन डेंसिटी) कम होने लगता है और धीरे-धीरे वो घिसने और कमजोर होने लगती हैं। कई बार हड्डीयों में यह कमजोरी इतनी हो जाती है कि मामूली सी चोट लगने पर भी फ्रैक्चर हो जाता है।
जॉइंट्स यानी हड्डियों का जोड़ हमें मजबूती देने के साथ-साथ ईजी मोबिलिटी में भी मदद करते हैं। ऐसे में अगर जॉइंट्स स्मूथली काम न करे तो हमें कई तरह की परेशानियों और दर्द का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा ये बेहद जरूरी है कि जॉइंट्स के साथ हमारा अच्छा रिश्ता बना रहे।
भारत मे आज कल हड्डियों से जुड़ी समस्या बहुत आम बात हो गई है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, हड्डी, जोड़ और कमर का दर्द जीवन का अभिन्न अंग बन जाता है। आज हर दस में से लगभग चार स्त्रियों और चार में से एक पुरुष को हड्डी से जुड़ी कोई न कोई समस्या घेरे रहती है। पर ध्यान रहे, हड्डियां रातों-रात कमजोर नहीं होतीं। यह प्रक्रिया सालों-साल चलती है। डॉक्टरों का मानना है कि 15-25 वर्ष तक की उम्र में हड्डियों का मास यानी द्रव्यमान पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है। ऐसे में बचपन और युवावस्था के समय का खान-पान, पोषण, जीवनशैली और व्यायाम आगे चल कर हड्डियों की सेहत को निर्धारित करने वाले कारक बनते हैं।हड्डियों कमजोर होने के कारण और हड्डियों का खोखलापन होने से सिल्पडिकस, थोड़ी सी चोट से टुट जाना, हड्डियों का दर्द होना, हड्डी भूरभरी होना आदि|
हड्डियों से जुड़ी समस्या के उपचार -
पिस्ता, अखरोट और बादाम-
ये कुछ ऐसे ड्राई फ्रूट्स हैं जिनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटमिन ई, प्रोटीन और अल्फा-लिनोलेनिक भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। खासकर अखरोट में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस से छुटकारा पाने में मदद करता है।


पालक

ऐंटिऑक्सिडेंट्स से भरपूर पालक ऑस्टियोआर्थराइटिस को कम करने में मदद करने के साथ ही सूजन, जलन और दर्द को भी कम करता है। आप चाहें तो पालक का सूप, जूस, पालक की सब्जी या फिर कई अलग-अलग तरीकों से पालक को अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं।
*ब्रॉकली
*ब्रॉकली मे सल्फोराफेन पाया जाता है जो जोड़ों के दर्द की तकलीफ को कम करने के साथ ही रूमेटाइड आर्थराइटिस के लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है। ब्रॉकली खाने का ढेरों फायदा आपको मिले इसके लिए इसे अपने सलाद या फिर स्टर-फ्राई सब्जी में यूज करें।
मछली
साल्मन, ट्यूना और ट्रॉट जैसी मछलियों की वरायटी में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड भरपूर मात्रा में होता है जो सूजन-जलन और उत्तेजना से लड़कर जोड़ों के दर्द को तुरंत कम करने में मदद करता है। इन मछलियों में विटमिन डी की मात्रा भी काफी अधिक होती है जो आर्थराइटिस और उस जैसी कई बीमारियों के लक्षणों को कम करता है।
जोड़ मजबूत करने के निम्न उपाय भी बहुत महत्व पूर्ण है-
१) रिफाईनड तेल खाना छोड दें । रिफाइंड तेल में ज्यादा लाईपो कैमिकल होता है और यह शरीर के केल्सियम को मूत्र के जरिये बाहर निकालता है। केल्शियम अल्पता से अस्थि-भंगुरता होती है। रिफाइंड की बजाय कच्ची घाणी का तेल प्रचुरता से उपयोग करें।
२) प्रतिदिन बाजरा और तिल का तेल उपयोग करें। यह ओस्टियो पोरोसिस( अस्थि मृदुता) का उम्दा इलाज है।खोखली और कमजोर अस्थि-रोगी को यह उपचार अति उपादेय है।
३) एक चम्मच शहद नियमित तौर पर लेते रहें। यह आपको अस्थि भंगुरता से बचाने का बेहद उपयोगी नुस्खा है।
४) दूध केल्सियम की आपूर्ति के लिये श्रेष्ठ है। इससे हड्डिया ताकतवर बनती हैं। गाय या बकरी का दूध भी लाभकारी है।
५) विटामिन “डी ” अस्थि मृदुता में परम उपकारी माना गया है। विटामिन डी की प्राप्ति सुबह के समय धूपमें बैठने से हो सकती है। विटामिन ’डी” शरीर में केल्सियम संश्लेशित करने में सहायक होता है।शरीर का २५ प्रतिशत भाग खुला रखकर २० मिनिट धूपमें बैठने की आदत डालें।


६) एक गेहूं के दाने के समान चूना तरल पदार्थ में मिलाकर खाये, यह कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं ।(पथरी का रोगी चुना ना खाये)
७) तिल के उत्पाद अस्थि मृदुता निवारण में महत्वपूर्ण हैं। इससे औरतों में एस्ट्रोजिन हार्मोन का संतुलन बना रहता है। एस्ट्रोजिन हार्मोन की कमी महिलाओं में अस्थि मृदुता पैदा करती है।तिल का तेल उत्तम फ़लकारक होता है।
८) केफ़िन तत्व की अधिकता वाले पदार्थ के उपयोग में सावधानी बरतें। चाय और काफ़ी में अधिक केफ़िन तत्व होता है। दिन में बस एक या दो बार चाय या काफ़ी ले सकते हैं।
९) बादाम अस्थि मृदुता निवारण में उपयोगी है। ११ बादाम रात को पानी में गलादें। छिलके उतारकर गाय के २५० मिलि दूध के साथ मिक्सर या ब्लेन्डर में चलावें। नियमित उपयोग से हड्डियों को भरपूर केल्शियम मिलेगा और अस्थि भंगुरता का निवारण करने में मदद मिलेगी।
१०) बन्द गोभी में बोरोन तत्व पाया जाता है। हड्डियों की मजबूती में इसका अहम योगदान होता है। इससे खून में एस्ट्रोजीन का स्तर बढता है जो महिलाओं मे अस्थियों की मजबूती बढाता है। पत्ता गोभी की सलाद और सब्जी प्रचुरता से इस्तेमाल करें।
११) नये अनुसंधान में जानकारी मिली है कि मेंगनीज तत्व अस्थि मृदुता में अति उपयोगी है। यह तत्व साबुत गेहूं,पालक,अनानास,तिल और सूखे मेवों में पाया जाता है। इन्हें भोजन में शामिल करें।
१२) विटामिन “के” रोजाना ५० मायक्रोग्राम की मात्रा में लेना हितकर है। यह अस्थि भंगुरता में लाभकारी है।
१३) सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि हड्डियों की मजबूती के लिये नियमित व्यायाम करें और स्वयं को घर के कामों में लगाये रखें।
१४) भोजन में नमक की मात्रा कम कर दें। भोजन में नमक ज्यादा होने से सोडियम अधिक मात्रा मे उत्सर्जित होगा और इसके साथ ही केल्शियम भी बाहर निकलेगा।
१५) २० ग्राम तिल थोडे से गुड के साथ मिक्सर में चलाकर तिलकुट्टा बनालें। रोजाना सुबह उपयोग करने से अस्थि मृदुता निवारण में मदद मिलती है।
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खांसी-जुकाम दूर करने के नुस्खे


खांसी-जुकाम हर बदलते मौसम के साथ आने वाली समस्या है। खांसीबैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी, साइनस इन्फेक्शन या ठण्ड के कारण हो सकती है लेकिन हमारे देश में हर परेशानी के लिए लोग डॉक्टरों के पास नहीं जाते। हमारी ही किचन में कई ऐसे नुस्खे छिपे होते हैं जिनसे खांसी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी बीमारियां फुर्र हो जाती हैं।
इन सामान्य सी दिखने वाली बीमारियों का अगर सही समय पर उपचार न किया जाए तो ये आपके शरीर में गंभीर समस्या पैदा कर देती है। खांसी भी एक ऐसी समस्या है, जो मौसम में बदलाव से आपको दिक्कत दे सकती है। मौसम की जरा सी करवट लोगों को खांसी और जुकाम जैसी समस्याएं दे सकती है। अगर खांसी का समय रहते इलाज न किया जाए तो ये टीबी का रूप ले सकती है। हालांकि खांसी होने पर ये पता होना जरूरी है कि आपको कैसी खांसी है। सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी ज्यादातर लोगों को परेशान करती है।'
खांसी चाहे बड़े को हो या फिर बच्चों को सभी को परेशान कर देती है। ये एक ऐसी समस्या है जो घर के किसी भी सदस्य को होने पर पूरे घर को तकलीफ में डाल देती है। खांसी होने पर इंसान को अपने सभी काम करने में दिक्कत आती है और उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता। अगर आप भी बाजार से खांसी का सिरप ले लेकर परेशान हो गए हैं और आपकी खांसी जाने का नाम नहीं ले रही है तो हम आपको इसी समस्या से निजात पाने का बेहद आसान और अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिसे आजमाकर आप मिनटों में खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
खांसी को दूर करने के असरदार उपाय


लहसुन

लहसुन की कलियों को कच्चा चबाएं या इसे पानी में उबालकर काढ़े के रूप में इसका इस्तेमाल करें। दोनों ही तरीकों से यह फायदेमंद है। तीखेपन को दूर करने के लिए इसमें स्वादानुसार शहद की मात्रा मिलाई जा सकती है।
*अगर आपको सूखी खांसी है तो एक बतासे में थोडा सा लौंग का तेल लगाकर खा लें। ऐसा करने से आपको सूखी खांसी में काफी राहत मिलेगी।
नमक वाला पानी
सूखी हो या कफ, दोनों ही प्रकार की खांसी के इलाज में नमक मिला पानी पिएं, साथ ही इससे गारगल भी करें। इसकी गर्माहट मिलने से गले में हो रही परेशानियों दूर होती हैं।
इसके अलावा आप सूखी खांसी से राहत पाने के लिए आप मुंह में सौंफ रखकर चबाएं। नियमित रूप से ऐसा करने से खांसी से छुटकारा मिलता है।
तुलसी
तुलसी के पत्ते कई प्रकार की बीमारियों को दूर करते हैं। खांसी के साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या भी बनी हुई है तो लहसुन, अदरक, काली मिर्च, अजवाइन और तुलसी की पत्तियों को एक साथ उबालकर इसका काढ़ा बनाएं। बहुत ही असरदार इलाज है। यहां तक कि डॉक्टर भी इसे पीने की सलाह देते हैं।
नींबू
नींबू का रस सेहत से लेकर सुंदरता तक को बढ़ाने में बहुत ही फायदेमंद होता है। खांसी की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान हैं तो नींबू के रस में हल्का सा शहद मिलाकर दिन में कम से कम 3-4 बार पिएं। बहुत जल्द आराम मिलेगा।
गाय का घी 
खांसी से छुटकारा पाने का सबसे अचूक तरीका है गाय के घी को लेकर उसे छाती पर मलना। दिन में दो बार ऐसा करने से भी खांसी में जल्दी आराम मिलता है।

शहद में आंवले का पाउडर
अगर आप खांसी की समस्या को जड़ से मिटाने चाहते हैं तो एक चम्मच शहद में आंवले के पाउडर की थोड़ी मात्रा मिलाएं और सुबह-शाम उसका उसका सेवन करें। नियमित रूप से ऐसा करने से खांसी की समस्या से राहत मिलेगी।



सरसों तेल की मालिश

दवाईयां खाने के बाद भी अगर खांसी कम नहीं हो रही है और खांसते-खांसते आपके सीने में दर्द हो गया है, तो आप सरसों तेल को गर्म करके उसमे थोडा कपूर मिला कर अच्छी तरह से छाती और पीठ की मालिश करें। दिन में तीन बार तक ऐसा करने से खांसी की समस्या और दर्द से छुटकारा मिलता है।

अगर आप जल्द से जल्द खांसी को ठीक करना चाहते हैं तो एक चम्मच हल्दी पाउडर को दूध में मिलाकर पीएं। ऐसा करने से खांसी की समस्या से निजात मिलती है।
अदरक
अदरक के टुकड़ों को शहद के साथ मिलाकर चबाएं। इसके अलावा अदरक का जूस निकालकर उसमें शहद की कुछ बूंदे मिलाकर पीना भी बहुत ही फायदेमंद रहेगा।
शहद
सिर्फ शहद चाटना भी खांसी दूर करने का कारगर फॉर्मूला है। रात को सोने से पहले 1 चम्मच शहद पिएं। इसकी एंटी-बैक्टीरियल तत्व खांसी से जल्द राहत दिलाता है।
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