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1.5.10

कब्ज मिटाने के कारगर उपचार: how to fight constipation?

                           कब्ज(कांस्टीपेशन) के सरल उपचार
                                                                                              - डाँ.दयाराम आलोक
                                                                                                                           9926524852
                                                                                          
अनुपयुक्त खान-पान के चलते कब्ज लोगों में एक सर्वाधिक प्रचलित रोग  बन चुका है। यह पाचन-तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल विसर्जन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को २-३ बार होता है। कुछ लोगों को हफ़्ते में २ या ३ बार ही शौचालय जाने से काम चल जाता है।

      ज्यादा कठोर और सूखा मल जिसे बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे,यही कब्ज का लक्षण है। ऐसा मल हफ़्ते में ३ बार से भी कम होता है और यह कब्ज का दूसरा मुख्य लक्षण होता है। कब्ज रोगियों में पेट के फ़ूलने की शिकायत भी आमतौर पर मिलती है। वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज की प्रधानता पाई जाती है। कुदरती पदार्थों के इस्तेमाल करने से यह रोग जड से खत्म हो जाता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।
 
१) शरीर में तरल की  कमी  होना कब्ज का मूल कारण है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर ३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और  असुविधा मेहसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।
  २) भोजन में रेशा की मात्रा ज्यादा रखने से स्थाई रूप से कब्ज मिटाने में मदद मिलती है। सब्जियां और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।





३) सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।






४)पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।



५) रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।







६)इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।





७)नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।






८)एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।










९)एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है।

१०) नान वेज फ़ुड से कब्ज और एसिडीटी(अम्लता) पैदा होती है। मांसाहार और ज्यादा मसालेदार भोजन से परहेज करना हितकारी उपाय है।






११) दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।






१२)अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है।







१२)अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।









१३)  एक और बढिया तरीका है। अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है।शरीर को तंदुरस्त रखने के लिये अलसी का उपयोग बेहद उपकारी है।








१४) पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।






१५) अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।





16) मुनका में कब्ज नष्ट करने के गुण हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।








सूचना-  मेरे चिकित्सा लेखों की अन्य ब्लागरों द्वारा चोरी किये जाने  की प्रवृत्ति बढती जा रही है। डा.हकीम युनुस खान ने १८-१०-२०१० को यह लेख कापी-पेस्ट कर  अपने ब्लाग  http://janhai.blogspot.in/  पर चोरी से स्थापित कर लिया।  बाद में  डा.अयाज अहमद ने  इस लेख को "ब्लागर्स फ़ोरम इंटरनेशनल "के अंतर्गत  http://hbfint.blogspot.in/   पर  फ़रवरी २१,२०१२ को कापी-पेस्ट कर लिया । निंदनीय कृत्य है।
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