20.6.20

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका के अचूक हर्बल उपचार

  

संधिवात रोग में शरीर के जोडों और अन्य भागों में सूजन आ जाती है और रोगी दर्द से परेशान रहता है। चलने फ़िरने में तकलीफ़ होती है।यह रोग शरीर के तंतुओं में विकार पैदा करता है,प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है,जोड शोथ युक्त हो जाते हैं,हिलने डुलने में कष्ट होता है।कलाई,घुटनों और ऊंगली ,अंगूठे में संधिवात का रोग ज्यादा देखने में आता है। कभी-कभी बुखार आ जाता है।भूख नहीं लगना भी इस रोग का लक्षण है। समय पर ईलाज नहीं करने पर आंखों,फ़ेफ़डों,हृदय व अन्य अंग दुष्प्रभावित होने लगते हैं।

संधिवात के कारण- 


१)आनुवांशिक कारण
२)खान-पान की असावधानियां
३) जोडों पर ज्यादा शारीरिक दवाब पडना
४) जोडों का कम या जरूरत से अधिक उपयोग करना
५) स्नायविक तंतुओं में विकार आ जाना और मेटाबोलिस्म में व्यवधान पड जाना।
६) सर्द वातावरण में शरीर रखने का कुप्रभाव
७)बुढापा और हार्मोन का असुंतुलन


संधिवात रोगी क्या करें और क्या न करें-

१) सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि रोगी २४ घंटे में मौसम के अनुसार ४ से ६ लिटर पानी पीने की आदत डालें। शरीर के जोडों में यूरिक एसीड जमा हो जाता है और इसी से संधिवात रोग जन्म लेता है। ज्यादा पानी पीने से ज्यादा पेशाब होगा और यूरिक एसीड बाहर निकलता रहेगा।
२) फ़ल और हरी सब्जीयां अपने आहार में प्रचुरता से शामिल करें।इनमें भरपूर एन्टीओक्सीडेन्ट तत्व होते हैं जो हमारे इम्युन सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं।रोजाना ७५० ग्राम फ़ल या सब्जियां या दोनों मिलाकर उपयोग करते रहें।इनका रस निकालकर पियेंगे तो भी वही लाभ प्राप्त होगा।
३)ताजा गाजर का रस और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिश्रण कर १५ मिलि प्रतिदिन लें।
४) ककडी का रस पीना भी संधिवात में लाभकारी है।
५) संधिवात रोगी को चाहिये कि सर्दी के मौसम में धूप में बैठे।
6) चाय,काफ़ी,मांस से संधिवात रोग उग्र होता है इसलिये जल्दी ठीक होना हो तो इन चीजों का इस्तेमाल न करें।
7) शकर का उपयोग हानिकारक होता है।




८) तला हुआ भोजन,नमक,शकर तेज मिर्च-मसाले,शराब छोडेंगे तो जल्दी ठीक होने के आसार बनेगे
९) संधिवात रोगी के लिये यह जरूरी है कि हफ़्ते में दो दिन का उपवास करें।
१०) काड लिवर आईल ५ मिलि की मात्रा में सुबह शाम लेने से संधिवात में फ़ोरन लाभ मिलता है।
११) पर्याप्त मात्रा में केल्शियम और विटामिन डी की खुराकें लेते रहें। ये विटामिन भोजन के माध्यम से लेंगे तो ज्यादा बेहतर रहेगा।
१२) तीन नींबू का रस और ४० ग्राम एप्सम साल्ट आधा लिटर गरम पानी में मिश्रित कर बोतल में भर लें। दवा तैयार है। ५ मिलि दवा सुबह शाम पीयें। यह नुस्खा बेहद कारगर है।
१३) मैने साईटिका रोग में आलू का रस पीने का ईलाज बताया है। संधिवात में भी आलू का रस अशातीत लाभकारी है। २०० मिलि रस रोज पीना चाहिये।
१४) ज्यादा सीढियां चढना हानिकारक है।
१५)अपने काम और विश्राम के बीच संतुलन बनाये रखना जरूरी है।
१६) अदरक का रस पीना संधिवात के दर्द में शीघ्र राहत पहुंचाता है।
१७) अलसी के बीज मिक्सर में चलाकर पावडर बनालें। २० ग्राम सुबह और २० ग्राम शाम को पानीके साथ लें। इसमे ओमेगा फ़ेट्टी एसीड होता है जो इस रोग में अत्यंत हितकर माना गया है।इससे कब्ज का भी निवारण हो जाता है।

विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| हर्बल औषधि होने के बावजूद यह तुरंत असर चिकित्सा है| सैकड़ों वात रोग पीड़ित व्यक्ति इस औषधि से आरोग्य हुए हैं|  बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त गतिशीलता हासिल करते हैं|औषधि के लिए वैध्य श्री दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क कर सकते हैं| 



15.6.20

मोटापे से मुक्ति से मुक्ति की होम्योपैथिक औषधीयां:Motapa khatm

Image result for मोटापे के लिए होम्योपैथी: और घरेलू उपचार
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मोटापा कई बीमारियों की जड़ है, यह सभी जानते है। लेकिन इससे मुक्ति पाना इतना आसान भी नहीं होता। यहां वजन कम करने यानी मोटापा घटाने से संबंधित कुछ आसान उपाय दिए गए है जिन्हें रोजाना अपनाकर आप सिर्फ एक हफ्ते यानी सात दिन में वजन कम कर सुडौल काया एक बार फिर से पा सकते है। होम्योपैथिक चिकित्सा मोटापा एवं उसके विभिन्न पहलुओं का उपचार करता है। इन दवाओं से पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है, चयापचय की क्रिया अच्छी होती है, जिसकी वजह से मोटापा कम होता है।
वजन घटाने के लिए कई लोग होम्योपैथी उपचार का सहारा लेते हैं।

वजन घटाने के लिए होम्योपैथिक उपचार को सुरक्षित माना गया है एवं यह सभी उम्र के लोगों के लिए कारगर एवं उपयुक्त होता है, क्योकि ये बहुत ही कोमल और पतले होते हैं और आमतौर पर इनका शरीर पर कुप्रभाव नहीं होता।
   आप वजन घटाने के लिए यदि कोई अन्य प्राकृतिक पूरक या उपचार ले रहे हैं तो भी आप होम्योपैथिक दवाइयां ले सकते हैं, क्योंकि यह दूसरे उपचार में न तो अवरोध पैदा करता है न हीं बुरा प्रभाव डालता है।
वजन घटाने के लिए होम्योपैथी में कई प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। वजन घटाने से पूर्व एक महत्वपूर्ण बात पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए कि आप कितने मोटे हैं तथा आपको कितना वजन घटाने की जरूरत है। इसके लिए आपको होम्योपैथिक चिकित्सक से मिलकर वजन कम करने के सबसे अच्छे विकल्प का परामर्श लेना चाहिए साथ ही उपचार शुरू करने से पूर्व आपको यह भी जान लेना चाहिए कि आपको अपने जीवन शैली में क्या-क्या बदलाव लाना है।

कैलोट्रोपिस जाइगैन्टिया Q – 

इस दवा की 5-5 बूंदें आधा कप पानी में मिलाकर प्रतिदिन तीन बार लेने से कुछ ही दिनों में मोटापा कम होने लगता हैं |

फाइटोलक्का बेरी O, 3x –

 यह मोटापा घटाने की अत्यन्त प्रसिद्ध दवा है । इस दवा का नियमित सेवन करने से मोटापा कम होने लगता है । इसके साथ नैट्रम सल्फ 200 भी लेने से अधिक लाभ होता है ।

फ्युकस वेसिक्यूलॉसस Q – 

डॉ० यदुवीर सिन्हा कहते हैं कि यह दवा मोटापा घटाने की सर्वोत्तम औषधि है क्योंकि इसमें आयोडीन प्रचुर मात्रा में होता है । इसका सेवन लम्बे समय तक करना चाहिये ।

ग्रेफाइटिस 200 –

 ऐसे व्यक्ति जिनका मोटापा बेढंगा है जैसे- पेट, कूल्हे आदि पर चर्वी एकत्र होकर बेडौल मोटापा बढ़ता हो तो व्यक्ति को यह दवा अवश्य देनी चाहिये । अगर रोगी गोरे रंग का है तो यह दवा अधिक लाभप्रद सिद्ध होगी ।

पीडोफाइलम 30 – 

यदि मोटापे के कारण केवल पेट बढ़ रहा हो तो यह दवा देनी चाहिये । साथ ही, नैट्रम सल्फ 12x देना भी उपयोगी है ।

एसकुलेन्टाइन Q – 

यह दवा निरापद रूप से अतिशीघ्र चर्वी को घटाकर शरीर को सुडौल बनाती है। यह कलेजे को मजबूत बनाती है और सर्वांगीण स्वास्थ्य को सुधारती है । मोटे व्यक्तियों के वातज रोगों और दर्दों को दूर करने की इसमें अमोघ शक्ति है ।

सोपिया 200 – 

यदि कोई स्पष्ट कारण न हो और स्त्रियों का पेट अनावश्यक रूप से बढ़ रहा हो तो इस दवा की एक मात्रा प्रति सप्ताह देने से पेट नहीं बढ़ता है और अपनी स्वाभाविक अवस्था में रहता है ।

क्रोकस सैटाइवा 30 – 

यदि प्रसव के बाद स्त्रियों का पेट लटक जाये या बड़ा हो जाये तो यह दवा प्रतिदिन तीन बार देने से कुछ ही दिनों में लाभ होता है ।

सल्फर 30 – 

बच्चों का पेट बिना  स्पष्ट कारण के बढ़ने पर उन्हें यह दवा देनी चाहिये ।

कल्केरिया कार्ब 200 – 

डॉ० सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार ने कहा है कि जिन व्यक्तियों की शारीरिक बनावट इस दवा के लक्षणों से मिलती-जुलती है उन्हें यह दवा देने से उनकी शारीरिक बनावट बदल जाती है और उनका मोटापा कम होने लगता है ।

घरेलु नुस्खे

*मूली के रस में थोडा नमक और निम्बू का रस मिलाकर रोजाना पी लेने से मोटापा कम हो जाता है और शरीर सुडौल हो जाता है।
*गेहूं, चावल,बाजरा और साबुत मूंग को समान मात्रा में लेकर सेककर इसका दलिया बना लिजिएं। इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेद तिल 50 ग्राम भी मिला दें। 50 ग्राम  दलिये को 400 मि.ली.जल में पकाएं। स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लिजिएं। रोजाना एक महीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनक लाभ होता है।
*अश्वगंधा के एक पत्ते को हाथ से मसलकर गोली बनाकर  सुबह-दोपहर-शाम को भोजन से एक घंटा पहले या खाली पेट जल के साथ निगल लिजिएं। एक सप्ताह के  सेवन के साथ फल,सब्जियों,दूध,छाछ और जूस पर रहते हुए कई किलो वजन कम हो सकता है।
* एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर उसको छाले और 1-1 spoon की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमित लेने करने से मोटापा दूर होता है।
* चित्रक कि जड़ का चूर्ण  1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर हो सकता है। 


वजन कम करने के उपाय 

आहार में गेहूं के आटे और मैदा से बने सभी भोजनों का सेवन एक महिने तक बिलकुल बंद रखें। इसमें रोटी भी शामिल है। अपना पेट पहले के 4-6 दिन तक केवल दाल,सब्जियां और मौसमी फल खाकर ही भरें। दालों में आप सिर्फ छिलके वाली मूंग कि दाल, अरहर या मसूर की दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडद की दाल नहीं। सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं। गाजर,मूली,ककड़ी,पालक,पतागोभी,पके टमाटर और हरी मिर्च लेकर सलाद बना लिजिएं। सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च,सैंधा नमक,जीरा बुरककर और निम्बू निचोड़कर खाएं। बस गेहूं कि बनी रोटी छोडकर दाल,सब्जी,सलाद और एक गिलास छाछ का भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए। इसमें मात्रा अधिक भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं। इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें। इसके बाद गेहूं कि बनी रोटी कि जगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू कीजिए। 5 किलो देशी चना और 1 kg जौ को मिलाकर साफ़ करके पिसवा लिजिएं। 6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में और आधी मात्रा में दाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू कीजिए। एक महीने बाद गेहूं कि रोटी खाना शुरू कर सकते हैं लेकिन शुरुआत एक रोटी से करते हुए धीरे धीरे बढाते जाएँ। भादों के महीने में छाछ का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिये इस महीनें में छाछ का प्रयोग नां कीजिए।
बेक्ड फूड बिल्कुल नहीं खाए। इसका मतलब यह हुआ कि आप केक, कुकीज, मफिंस, ब्रेड आदि खाने से परहेज करे। यहीं नहीं आप इस दौरान बेक्ड चिप्स ,बेक्ड स्नैक आदि भी खाने से बचे। किसी भी तरह की मिठाई को आप हर्गिज नहीं खाए। अगर आप कुछ मीठा खाना ही चाहते है तो सिर्फ ताजा फल खाए।

तला हुआ भोजन

तले हुए भोजन में कैलोरी और नमक बहुत ज्यादा होता है। इसलिए आप मछली, पॉल्टी फॉर्म प्रोडक्ट या कोई भी वैसा मीट नहीं खाए जो तला हुआ हो। साथ ही फ्रेंच फ्राईज, पोटैटो चिप्स,ब्रेड पकौड़ा,समोसा, फ्राइड वेजिटेबल खाने से भी आप बचे। आप वैसी चीजें खाए जो कम प्रोटीन वाली हो और तली हुई नहीं हो।

हाई कैलोरी वाले ड्रिंक्स

जो भी पेय पदार्थ यानी ड्रिंक्स मीठा होता है उसमें कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। आपको इनसे बचना होगा। साथ ही आप पानी की भरपूर मात्रा ले। एल्कोहल (शराब, बीयर और कॉकटेल), स्पोर्ट्स ड्रिंक, मीठी चाय ,फ्लेवर्ड कॉफी, सोडा, फ्लेवर्ड पानी ,विटामिन पानी आदि से आप तौबा कर लें। अगर आपको फ्लेवर्ड पानी पीने की इच्छा हो तो आप उसे घर पर बनाकर पीए।

अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाएं

इन सात दिनों तक आपको मेहनत करने के लिए कमर कस लेनी चाहिए। आपको टोटल वेट लॉस वर्कआउट प्रोग्राम पर जमकर काम करने की जरूरत है। इसलिए आपको सात दिनों तक रोजमर्रा की अपनी शारीरिक गतिविधियों को तेज करना होगा यानी बढ़ाना होगा। आपको फैट गलाने वाली कसरत यानी वर्कआउट को करना चाहिए ताकी आपका वजन कम हो सके। अगर आपको अपना वजन कम करना है तो आपको रोजाना फैट बर्निंग वर्कआउट करना चाहिए। इसमें कसरत के अलावा ,पैदल चलना, जॉगिंग आदि शामिल होते है।

10 हजार कदमों की चहलकदमी

अगर आप किसी वजह से वर्कआउट नहीं कर पा रहे तो आपको कम-से-कम रोजाना 10 हजार कदम चलना चाहिए। इसलिए आपको रोजाना 10 हजार कदमों की चहलकदमी करनी होगी। अगर आप रोजाना पंद्रह या बीस हजार कदम चलते है तो फिर आपको एक्टिविटी मॉनिटर या फिर एप्प डाउनलोड कर अपने कदमों को रोजाना आकलन करना होगा।
इस तरह से आप इन उपायों को करके फैट बर्न कर अपने वजन में कमी ला सकते है और मोटापा घटा सकते है। लेकिन एक बात ध्यान रहे कि आपको इस रूटीन को हमेशा के लिए अपनाना होगा। अपनी जीवनचर्या को उस मुताबिक ढालना होगा जिससे फैट आगे नहीं बने और जो शरीर में जो मौजूदा फैट है वो बर्न हो जाए।
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  • 13.6.20

    गर्मी मे दही खाने के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ



     कहते हैं किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले दही खाने से उस काम के लिए जाने वाले को सफलता मिलती है।दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की तुलना में जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां, जैसे अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है।डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दूध से बनने वाले दही का उपयोग खाने में हजारों सालों से हो रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने वाले कैल्शियम की मात्रा दूध की अपेक्षा दही में 18 गुणा ज्यादा होती है।पेट की गर्मी दूर करता है- दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है।
    आंतों के रोग- अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही का नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं।
    दिल के रोग में भी आता है काम- 


    में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है।

    हड्डियों को दे मजबूती- 
    दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है।

    जोड़ों के दर्द करे ठीक- हींग का छौंक लगाकर दही खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है।
    प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन से भरपूर- 
    दही सेहत और सौंदर्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसमें दूध के मुकाबले कैल्श‍ियम अधि‍क होता है।
    पाचन शक्ति बढ़ाता है- 
    दही का नियमित सेवन शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है। यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है।
    आंतों के रोग
    अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही का नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं।
    बवासीर रोग से पीड़ित रोगियों को दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीने से फायदा मिलता है
    वजन
    दुबले-पतले व्यक्तियों को अगर दही में किशमिश, बादाम या छुहारा मिलाकर दिया जाए तो वजन बढ़ने लगता है, जबकि दही के सेवन से शरीर की फालतू चर्बी को भी हटाया जा सकता है
    दिल के रोग
    दही में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है। यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है।
    बालों की सुंदरता
    बालों को सुंदर और आकर्षक बनाए रखने के लिए दही या छाछ से बालों को धोने से फायदा होता है। इसके लिए नहाने से पहले बालों में दही से अच्छी मालिश करनी चाहिए।कुछ समय बाद बालों को धो लेने से बालों की खुश्की या रूसी खत्म हो जाती है।
    मुंह के छाले
    दही की मलाई को मुंह के छालों पर दिन में दो-तीन बार लगाने से छाले दूर हो जाते हैं। दही और शहद को समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से भी मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।



    दही और बेसन के मिश्रण से मालिश करें। कुछ देर बाद नहा लें। पसीने की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
     बच्चों के दांत
    दही के साथ शहद मिलाकर जिन बच्चों के दांत निकल रहे हों, उन्हें चटाना चाहिए। इससे दांत आसानी से निकल जाते हैं।
    अनिद्रा
    रात में नींद न आने की परेशानी से निपटने के लिए दही और छाछ का सेवन फायदेमंद होता है|
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    मेथी का पानी पीने के जबर्दस्त फायदे

    पेट मे कीड़ों के घरेलू आयुर्वेदिक उपचार:pet ke kide


     

    गंदा और अशुद्ध भोजन के सेवन से आंत में कीड़े पड़ जाते हैं, इसके कारण पेट में गैस, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी समस्‍यायें होती हैं, इन कीड़ों को निकाने के लिए घरेलू उपचार आजमायें।

    पेट में कीड़े पड़ जायें तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों में होती है लेकिन बड़ों की आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं। ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं। इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्‍य होना, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी कई प्रकार की समस्‍यायें होती हैं। इसके कारण रोगी को खाने में रुचि नहीं होती और उसे चक्‍कर भी आते हैं। गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं। अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को यह समस्‍या अधिक होती है। घरेलू उपचार के जरिये इस समस्‍या का इलाज किया जा सकता है।बच्चों के पेट कीड़े होना आम बात है लेकिन यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो बच्चों में विकास रुक जाता है | इसी बात को ध्यान में रखकर सरकार भी इसके लिए अभियान चला रही है और स्कूलों में कीड़े मारने की दवा मुफ्त में वितरित करवा रही हैं | यह वास्तव में एक ऐसी बीमारी है जो कि अन्दर ही अन्दर बच्चों को खा जाती है और पता ही नहीं चलता है, इसलिए इसके बारे में जानकारी और इलाज जरूरी है |
    इसलिए आइये आज जानते हैं कि पेट में होने क्या – क्या कारण है और इनसे बचने के क्या-क्या घरेलु उपाय हैं

    पेट में कीड़े होने का कारण Reasons For Worms In Stomach

    गंदी मिट्टी में खेलने, मिट्टी खाने, फल व सब्जियों द्वारा बच्चों के पेट में कीड़े व कृमि पहुंच जाते हैं जो उनकी आंतों में वंश-वृद्धि करके जीवित रहते हैं। कई बार ज्यादा मीठे पदार्थों के सेवन से भी पेट में कीड़े हो जाते हैं। लेकिन कई in कारणों पर नियंत्रण करना संभव नहीं होता हैं |

    पेट में कीड़े होने का लक्षण 

    कैसे जाने कि बच्चों के पेट में कीड़े है और वो बच्चों को नुक्सान पंहुचा रहें है () | चुनचुने (पिनवर्म), केचुए, राउंड वर्म, टेप वर्म व अन्य अनेक कीड़े बच्चों के पेट में होते हैं। जब ये काटते हैं तो बच्चे को गुदा में तेज खुजली होती है। शरीर पीला पड़ने लगता है, बेचैनी बढ़ जाती है, निढाल हो जाते हैं तथा स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है।


    पेट में कीड़े होने का उपचार

    * अरंड ककड़ीः 

    अरंड ककड़ी का एक चम्मच दूध प्रातः पीने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। यह बच्चों के लिए उत्तम औषधि है।

    * नीबूः 

    आधे नीबू को काटकर उसमें काला नमक और काली मिर्च डालकर गरम करके बच्चे को चुसाएं। इससे पेट के कीडे नष्ट हो जाते हैं।6. शहतूतः शहतूत व खट्टे अनार के छिलकों को पानी में उबालकर पिलाने से कीड़ों का अंत हो जाता है |

    * नारियलः 

    बच्चों को नारियल का पानी पिलाने तथा कच्चा नारियल खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसी प्रकार नारियल का गूदा चबाकर खाने व इसके तीन घंटे बाद 200 ग्राम दूध में दो चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर पिलाएं इससे बच्चों के पेट के कीड़े मल के साथ बाहर निकल आते हैं।

    * अनारः 

    अनार के रस का रोजाना प्रयोग करते रहने से बच्चों के पेट के कीड़े आसानी से नष्ट हो जाते हैं।

    *. ईसबगोलः 

    यदि पेचिश में कीड़े निकलते हों तो ईसबगोल का उपयोग सहायक सिद्ध होता है। ईसबगोल की भूसी के साथ भुनी हुई सौंफ का चूर्ण मिलाकर खिलाएं। इससे बच्चों का पेट साफ हो जाएगा व कीड़े भी निकल जाएंगे।
    *आधा चम्मच अजवायंन का चूरन एक कप छास के साथ दिन मे २ बार कुछ दीनो तक पिए. इसको सेवन करने से आपके पेट के कीड़े मर जाएँगे.
    *बायविडंग का चूरन का काढ़ा देने से पेट के कीड़े मर जाते है. दूध मे बायविडंग मिलाकर पीने से बच्चो के पेट मे कीड़े नही होते है.
    *सबेरे खाली पेट गुड खाये .और १५ मिनिट बाद चम्मच भर पीसी हुई अजवाइन पानी के साथ निगल ले. इस तरह गुड की मिठास से पेट के कीड़े pet ke kide एक जगह एकत्र होंगे. उपर से अजवाइन खा लेने से ये सब कीड़े मरके शौच के साथ बाहर निकल जाएँगे.

    *काला नमक

    चुटकी भर काला नमक और आधा ग्राम अजवायन चूर्ण मिला लीजिए, इस चूर्ण को रात के समय रोजाना गर्म पानी से लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। अगर बड़ों को यह समस्‍या है तो काला नमक और अजवायन दोनों को बराबर मात्रा में लीजिए। सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेट के कीड़े  pet ke kide दूर हो जायेंगे।

    *कच्‍चे आम की गुठली

    बच्‍चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्‍चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।

    *टमाटर के जरिये

    टमाटर का प्रयोग खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट के कीड़ों  pet ke kide को नष्‍ट करने के लिए कर सकते हैं। टमाटर को काटकर, उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर इसका सेवन कीजिए। इस चूर्ण का सेवन करने के बाद पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं।

    *लहसुन की चटनी

    पेट की समस्‍या दूर करने के साथ आंतों को पूरी तरह से साफ करने के लिए लहसुन का प्रयोग करें। अगर बच्‍चे या बड़े किसी को भी पेट में कीड़े pet ke kide  हैं तो उसे लहसुन की चटनी खिलायें। लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

    *तुलसी के पत्‍ते

    तुलसी भी एंटी-बैक्‍टीरियल होती है, किसी भी प्रकार के संक्रमण के उपचार के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। पेट में कीड़े होने पर तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसका सेवन करने से आंत पूरी तरह से साफ हो जाती है और पेट में गैस और कब्‍ज की भी शिकायत नहीं होती है।

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    12.6.20

    श्वास अथवा दमा रोग के अचूक नुस्खे

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    श्वास अथवा दमा श्वसन तंत्र की भयंकर कष्टदायी बीमारी है। यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्षेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है।
    एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या वातावरण के संपर्क में आने से,बीडी,सिगरेट धूम्रपान करने से,ज्यादा सर्द या ज्यादा गर्म मौसम,सुगन्धित पदार्थों,आर्द्र हवा,ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।

    अब यहां ऐसे घरेलू नुस्खों का उळ्लेख किया जा रहा है जो इस रोग ठीक करने,दौरे को नियंत्रित करने,और श्वास की कठिनाई में राहत देने वाल सिद्ध हुए हैं--
    १) तुलसी के १५-२० पत्ते पानी से साफ़ करलें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे राहत मिलती है।
    २) एक केला छिलके सहित भोभर या हल्की आंच पर भुनलें। छिलका उतारने के बाद १० नग काली मिर्च का पावडर उस पर बुरककर खाने से श्वास की कठिनाई तुरंत दूर होती है।
    ३) दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटलें।
    ४) तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसलें ,इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ मिलता है।

    5) पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से फ़ोरन शांति मिलती है।
    ६) १० ग्राम मैथी के बीज एक गिलास पानी मे उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करलें और पी जाएं। यह उपाय दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में फ़यदेमंद है।

    ७) एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है।एलर्जी नियंत्रित होती है।
    ८) सूखे अंजीर ४ नग रात भर पानी मे गलाएं,सुबह खाली पेट खाएं।इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है।
    ९) सहजन की पत्तियां उबालें।छान लें| उसमें चुटकी भर नमक,एक चौथाई निंबू का रस,और काली मिर्च का पावडर मिलाकर पीयें।दमा का बढिया इलाज माना गया है।


    १०) शहद दमा की अच्छी औषधि है।शहद भरा बर्तन रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गन्ध श्वासके साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।
    ११) दमा में नींबू का उपयोग हितकर है।एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिये।
    १२) लहसुन की ५ कली ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।
    १३) अनुसंधान में यह देखने में आया है कि आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं।
    14) दमा के रोगी को सिंथेटिक बिस्तर पर नहीं लेटना चाहिये। यह दमा रोग में ट्रिगर फ़ेक्टर का काम करता है।
    १५) एक अनुभूत उपचार यह है कि दमा रोगी को हर रोज सुबह के वक्त ३-४ छुहारा अच्छी तरह बारीक चबाकर खाना चाहिये।अच्छे परिणाम आते हैं।इससे फ़ेफ़डों को शक्ति मिलती है और सर्दी जुकाम का प्रकोप कम हो जाता है।



    16) सौंठ श्वास रोग में उपकारी है। इसका काढा बनाकर पीना चाहिये।
    १७) गुड १० ग्राम कूट लें। इसे १० ग्राम सरसों के तेल मे मसलकर-मिलाकर सुबह के वक्त खाएं। ४५ दिन के प्रयोग से काफ़ी फ़ायदा नजर आएगा।
    १८) पीपल के सूखे फ़ल श्वास चिकित्सा में गुणकारी हैं। बारीक चूर्ण बनाले। सुबह -शाम एक चम्मच लेते रहें लाभ होगा।
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    कब्ज का पक्का इलाज के नुस्खे

                  
                                                                                           
                                                                                              
     अनुपयुक्त खान-पान के चलते कब्ज लोगों में एक सर्वाधिक प्रचलित रोग बन चुका है। यह पाचन-तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल विसर्जन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को २-३ बार होता है। कुछ लोगों को हफ़्ते में २ या ३ बार ही शौचालय जाने से काम चल जाता है।
    ज्यादा कठोर और सूखा मल जिसे बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे,यही कब्ज का लक्षण है। ऐसा मल हफ़्ते में ३ बार से भी कम होता है और यह कब्ज का दूसरा मुख्य लक्षण होता है। कब्ज रोगियों में पेट के फ़ूलने की शिकायत भी आमतौर पर मिलती है। वैसे तो यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज की प्रधानता पाई जाती है। कुदरती पदार्थों के इस्तेमाल करने से यह रोग जड से खत्म हो जाता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है।


    १) शरीर में तरल की कमी होना कब्ज का मूल कारण है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर ३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा मेहसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।
    २) भोजन में रेशा की मात्रा ज्यादा रखने से स्थाई रूप से कब्ज मिटाने में मदद मिलती है। सब्जियां और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।
    ३) सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।
    ४)पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।

    ५) रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।
    ६) इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।
    ७)नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।

    ८)एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।
    ९)एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है
    १०) नान वेज फ़ुड से कब्ज और एसिडीटी(अम्लता) पैदा होती है। मांसाहार और ज्यादा मसालेदार भोजन से परहेज करना हितकारी उपाय है।
    ११) दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।
    १२)अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है।
    १3) अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।) एक और बढिया तरीका है। अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है।

    शरीर को तंदुरस्त रखने के लिये अलसी का उपयोग बेहद उपकारी है।
    १५) पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।
    १६) अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।
    1७) मुनका में कब्ज नष्ट करने के गुण हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।
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    11.6.20

    खून की कमी के घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे

                                        
     खून में हेमोग्लोबिन या रक्त कण की कमी हो जाने को एनिमिया अर्थात रक्ताल्पता का रोग कहा जाता है। हमारे शरीर की शिराओं और धमनियों में जो खून प्रवाहित होता है उसमें करीब आधा भाग रक्त कणों का होता है। ये रक्तकण आक्सीजन को शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इन रक्त कणों के निर्माण में आयरन (लोहतत्व), प्रोटीन, और विटामिन्स ,खास कर फ़ोलिक एसिड और विटामिन बी१२ की अहम भूमिका रहती है। इन रक्त कणों का जीवन काल लगभग चार माह का होता है । फ़िर ये नष्ट हो जाते हैं और इनकी जगह नये रक्त कण आ जाते हैं। इन्सान के शरीर के १०० ग्राम खून में करीब १५ ग्राम हेमोग्लोबिन होना आवश्यक है। प्रति मिलि लिटर खून में ५ मिलियन रक्तकण मौजूद रहना जरूरी है। यह भी बताते चलें कि हमारी मज्जा(bone marrow) में रक्तकण बनाने की फ़ेक्टरी है जो रोजाना तकरीबन १०० मिलियन नये रक्त कण बनाकर शरीर को सप्लाई करती रहती है।





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    के लक्षण--
    शरीर में खून की कमी हो जाने पर रोगी कमजोरी, थकावट, शक्तिहीनता और चक्कर आना जैसे लक्छण बताता है। अन्य लक्षण गिनावें तो चमडी पर समय पूर्व झुर्रियां पड जाना ,याददाश्त की कमी, मामूली काम करने या चलने पर सांस फ़ूल जाना, घाव हो जाने पर उसके ठीक होने या भरने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगना,सिर दर्द होना और दिल की धडकन बढ जाना ये लक्षण भी रक्त की कमी के रोगी में अक्सर देखने को मिलते हैं। एनिमिया रोगी की श्लेष्मिक झिल्लियां पीली दिखाई देती हैं। 1) शरीर में लोह तत्व बढाने के लिये सबसे अच्छा तरीका यह है भोजन से इसकी पूर्ति करें। चाय,काफ़ी और अम्ल विरोधि (एन्टासिड) दवाएं उपयोग में न लाएं। ये चीजें शरीर द्वारा लोह तत्व ग्रहण करने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं। लोह तत्व की वृद्धि के लिये हरे मटर,हरे चने(छोले),अंडे,मछली, कलेजी दूध का प्रचुर उपयोग करना उत्तम है। जो लोग शाकाहारी हैं वे अपने भोजन में पालक,सभी तरह की हरी सब्जियां, दालें अंजीर,अखरोट बदाम काजू, किशमिश,खजूर, आदि रक्त वर्धक पदार्थो का भरपूर उपयोग करना चाहिये।सेवफ़ल,टमाटर भोजन में शामिल करें।
    2) एक सेवफ़ल के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य पीने से खून की कमी दूर होती है।
    3) टमाटर और सेवफ़ल का रस प्रत्येक २०० मिलिलिटर मिश्रण करके रोज सुबह लेने से रक्ताल्पता में आशातीत लाभ होता है।
    4) ताजा सलाद खाने और शहद से शरीर में हेमोग्लोबिन बढकर एनिमिया का निवारण होता है।
    5) विटमिन बी१२, फ़ोलिक एसिड,और विटामिन सी ग्रहण करने से हेमोग्लोबिन की वृद्धि होती है। दूध,मांस,गुर्दे और कलेजी में प्रचुर विटामिन बी१२ पाया जाता है।

    6) मैथी की सब्जी कच्ची खाने से लोह तत्व मिलता है। किशोरावस्था की लडकियों में होने वाली खून की कमी में मैथी की पत्तियां उबालकर उपयोग करने से बहुत फ़ायदा होता है। मैथी के बीज अंकुरित कर नियमित खाने से रक्ताल्पता का निवारण होता है।

    7) सब्जी और फ़ल -- 

     सभी पत्तेदार सब्जीयां और खासकर पालक में प्रचुर मात्रा मे लोह तत्व पाया जाता-है। इनसे मिलने वाला आयरन श्रेष्ठ दर्जे का होता है। यह लोह तत्व शरीर में ग्रहण होने के बाद बडी तेजी से रक्त कण बनते हैं और रक्ताल्पता शीघ्र ही दूर हो जाती है।
    8) खून की कमी दूर करने में सोयाबीन का महत्वपूर्ण स्थान है। इसमे आयरन होता है और श्रेष्ठ दर्जे का प्रोटीन भी होता है। लेकिन एनिमिया रोगी की पाचन शक्ति कमजोर होती है इसलिये सोयाबीन का दूध बनाकर पीना उचित रहता है।
    9) ७ नग बादाम दो घन्टे पानी में गला दें। फ़िर छिलका उतारकर खरल में पेस्ट बनाकर रोज खाने से नया खून बनता है और रक्ताल्पता लाभ होता है।


    10) तिल और शहद-

    दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।


    11) काफी और चाय खतरनाक-


    काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।


    12) ठंडा स्नान-


    दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने के बाद सूरज की रोशनी में बैठें।


    13) अंकुरित भोजन-


    आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।


    14) आम-

    पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।

    15) मूंगफली और गुड़-

    शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।

    16) सिंघाड़ा-

    सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।

    17) मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर-



    , अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।


    18) फलो का सेवन-

    अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।

    19) आंवले और जामुन का रस-

    आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
    20) टमाटर का रस-एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।

    21) हरी सब्जिया-

    बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।


    22) फालसा-


    फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।


    23) लहसुन-

    शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।


    24) सेब का जूस-


    सेब का जूस रोज पीएं।


    25) चुकंदर-


    चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इस जूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।
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