26.4.17

गठिया का उपचार होम्योपैथिक द्वारा


होम्योपैथी में गठिया का निश्चित रोक थाम एवं ईलाज है। होम्योपैथिक ईलाज द्वारा जोड़ों का बिगड़ना रोका जा सकता है एवं सूजन खत्म की जा सकती है। ठतलवदपं एक कारगार दवा है जिसमें चलने से मरीज के जोड़ों का दर्द बढ़ता है एवं Rhus tox जवग में चलने से मरीज को जोड़ों से आराम मिलता है।Calcarea Carb भी एक कारगार दवा है। जिसमें जोड़ों का दर्द बैठने एवं चलने एवं पानी का कार्य करने से बढ़ता है। Ruta में मरीज को पैर Stretch करने से आराम मिलता है। Causticum एवं Angustura दर्द से आराम देती है जब हड्डियों में क्रेकिंग हो तबबहुत से लोगों को जैसे ही मालूम होता है कि उन्हें गठिया है, तो वे जीने की उमंग ही खो बैठते हैं। लेकिन जिस तरह हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है, उस तरह गठिया का भी मुकाबला करके सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है और दर्द को कम किया जा सकता है।
जोड़ों का दर्द साधारणतया दो प्रकार के होते हैं। छोटे जोड़ों के दर्द को वात यानी रिक्हिटज्म कहते हैं। वात रोग (गाउट) में जोड़ों की गाँठें सूज जाती हैं, बुखार भी आ जाता है। बेहद दर्द एवं बेचैनी रहती है।
कारण: अधिक माँस खाना, ओस या सर्दी लगना, देर तक भीगना, सीसा धातुओं से काम करने वाले को लैड प्वाइजनिंग होना, खटाई और ठंडी चीजों का सेवन करना, अत्यधिक मदिरा पान एवं वंशानुगत (हेरिडिटी ) दोष। 

गठिया
आपके शरीर के जोड़ों में सूजन उत्पन्न होने की स्थिति को गठिया कहते है। अथवा आपके जोड़ों के बीच की cartilage degenerate होने की स्थिति से गठिया उत्पन्न होती है।
गठिया लंबे समय से जोड़ों को अधिक कार्य में लिए जाने जोड़ों पर चोट लग जाने इत्यादि से हो जाती है।
गठिया के लक्षण- जोड़ों में
दर्द
अस्थिरता
सूजन
सुबह के वक्त अकड़न
सीमित उपयोग
पास गर्माहट
आस पास त्वचा पर लालीपन



गठिया 100 से अधिक प्रकार की होती है। जिसमें प्रमुख है-
Osteoathritis:- यह वृद्धाअवस्था में धीरे धीरे बढ़ती है। इसमें सुजन नहीं होती है। सुबह Stiffness मेे होती है और asymmetric होती है। इसको Wear & tear गठिया भी कहते है।
Rheumatoid arthritis- यह स्व प्रतिरक्षित रोग है। इसमें जोड़ों का दर्द, सूजन एवं कठोरता एवं छोटे जोड़ों में किसी भी उम्र में हो सकती है।

औषधियाँ - लक्षणानुसार काल्मिया लैटविया, कैक्टस ग्रेड़ीफ्लोरा, डल्कामारा, लाईकोयोडियम, काली कार्ब, मैगफास, स्टेलेरिया मिडि़या, फेरम-मिक्रीरीकम इत्यादि अत्यंत कारगर होम्योपैथिक दवाएँ हैं।
* गठिया कई किस्म का होता है और हरेक का अलग-अलग तरह से उपचार होता है। सही डायग्नोसिस से ही सही उपचार हो सकता है।
लक्षण: - रोग के आरंभ में पाचन क्रिया का मंद पड़ना। पेट फूलना (अफारा) एवं अम्ल का रहना (एसिडिटी), कंस्टिपेशन रहना। क्रोनिक (पुराने) रोग होने पर पेशाब गहरा लाल एवं कम मात्रा में होना।
*सही डायग्नोसिस जल्द हो जाए तो अच्छा। जल्द उपचार से फायदा यह होता है कि नुकसान और दर्द.कम होता है। उपचार में दवाइयाँ, वजन प्रबंधन, कसरत, गर्म या ठंडे का प्रयोग और जोड़ों को अतिरिक्त नुकसान से बचाने के तरीके शामिल होते हैं।
*जोड़ों पर दबाव से बचें। ऐसे यंत्र हैं जिससे रोजमर्रा का काम आसान हो जाता है। जितना वजन बताया गया है, उतना ही बरकरार रखें। ऐसा करने से कूल्हों व घुटनों पर नुकसान देने वाला दबाव कम पड़ता है।
*गठिया में ज्यादातर लोगों के लिए सबसे अच्छी कसरत चहलकदमी है। इससे कैलोरी बर्न हो जाती है। मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और हड्डियों में घनत्व बढ़ जाता है।
*पानी में की जाने वाली कसरतों से भी ताकत आती है, गति में वृद्धि होती है और जोड़ों में टूटफूट भी कम होती है।
*हाल के शोधों से मालूम हुआ है कि विटामिन सी व अन्य एंटीऑक्सीडेंट ऑस्टियो-आर्थराइटिस के खतरे को कम करते हैं और उसे बढ़ने से भी रोकते हैं। इसलिए संतरा खाओ या संतरे का जूस पियो। ध्यान रहे कि संतरा व अन्य सिटरस फल फोलिक एसिड का अच्छा स्रोत हैं।
*आपके आहार में पर्याप्त कैल्शियम होना चाहिए। इससे हड्डियाँ कमजोर पड़ने का खतरा नहीं रहता। अगर साधारण दूध नहीं पीना चाहते तो दही, चीज और आइसक्रीम खाएँ। पावडर दूध पुडिंग, शेक आदि में मिला लें। मछली, विशेषकर सलमोन (काँटे सहित) भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत है।
*नाश्ता अच्छा करें। फल, ओटमील खाएँ और पानी पीएँ। जहाँ तक मुमकिन हो कैफीन से बचें।
*वे जूते न पहने जो आपका पंजा दबाते हों और आपकी एड़ी पर जोर डालते हों। पैडेड जूता होना चाहिए और जूते में पंजा भी खुला-खुला रहना चाहिए।
* सोते समय गर्म पानी से नहाना मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और जोड़ों के दर्द को आराम पहुँचाता है। साथ ही इससे नींद भी अच्छी आती है।
* अपने डॉक्टर को यह अवश्य बता दें कि गठिया के अलावा आप किसी और परेशानी के लिए और कौन सी दवाई लेते हैं, चाहे वह न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट ही क्यों न हो।
* काम के दौरान कई-कई बार ब्रेक लेकर सख्त जोड़ों और सूजी मांसपेशियों को स्ट्रैच करें।




अपनी डाइट में विटामिन सी युक्त खाघ पदार्थ और सप्पलीमेंट का सेवन रोज करें। लो फैट डेयरी प्रोडक्ट जैसे, दूध या दही शरीर में सीरम यूरिक लेवल को कम करता है। इसे खाइये और गठिया से निजात पाइये। ओमेगा 3 फैटी एसिड अगर बैलेंस ना हो तो जोडो का दर्द पैदा हो सकता है इसलिये इसे बैलेंस करने के लिये हरी सब्जियां जैसे, पालक, ब्रॉक्ली, प्याज, अदरक आदि का सेवन करें। कार्बोहाइड्रेट्स वाले आहार जैसे, पास्ता, ब्रेड, फ्राई फूड और जंक फूड से दूर रहें।
कद्दू में खूब सारा कैरोटीन होता है जो जोड़ों की सूजन को कम करता है।
बादाम, काजू, अखरोठ और कद्दू के बीज में ओमेगा 3 फैटी एसिड तथा एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कि सूजन को कम कर के दर्द दूर करता है। मछली खाएं इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो जोड़ो की सूजन को कम करने में मददगार होता है। ग्रीन टी इसमें बहुत सारा एंटीऑक्सीडेंट और नीकोटीन होता है जो दर्द को दबा देता है। ऑलिव ऑयल इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है। संतरा खाएं इसमें विटामिन सी होता है जो कि स्वास्थ्य वर्धक कोलाजिन होता है। विटामिन सी से हड्डियां मजबूत बनती हैं। प्याज खाएं इसमें एसपिरिन के मुकाबले एक रसायन होता है जो दर्द को गायब कर देता है।

विशिष्ट परामर्श-  

संधिवात,,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त होकर चल फिर सकने योग्य हो जाते हैं||औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|
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