12.2.17

भस्मक रोग के घरेलू उपचार: Over eating disease

भस्मक रोग (Over eating)
परिचय:-
भस्मक रोग एक प्रकार का ऐसा रोग है जिसमें रोगी हर समय खाता ही रहता है। रोगी जितना भी खाना खा ले उसे ऐसा लगता है कि उसने अभी तो कुछ भी नहीं खाया है और वह बहुत अधिक खाने लगता है।भस्मक रोग में व्यक्ति की खुराक बहुत होती है। क्षुधा तृप्त नहीं होती है किन्तु बहुत खाने के बाद भोजन उदर में भस्म हो जाता है। १५—१५ दिन महीनों तक टट्टी (पखाना) नहीं जाता है। और खाता बराबर रहता है।*विदारी कन्द का रस, घी और दूध मिलाकर पीने से भस्मक रोग दूर होता है।
भस्मक रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
इस रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को एनिमा क्रिया के द्वारा पेट साफ करना चाहिए और इसके बाद दिन में 2 बार कटिस्नान करना चाहिए।
*रात को सोते समय रोगी को अपनी कमर पर भीगी पट्टी लगाकर कुछ समय के लिए सोना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करने से भस्मक रोग ठीक हो जाता है।



*इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने के लिए सबसे पहले रोगी को कुछ दिनों तक रसाहार तथा फलाहार भोजन करना चाहिए और इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य भोजन करना चाहिए।
*भस्मक रोग को ठीक करने के लिए आसमानी रंग की बोतल के सूर्यतप्त जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 8 बार रोगी को सेवन कराना चाहिए। इससे रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है
*रात को सोते समय रोगी को अपनी कमर पर भीगी पट्टी लगाकर कुछ समय के लिए सोना चाहिए। ऐसा कुछ दिनों तक लगातार करने से भस्मक रोग ठीक हो जाता है।

* हिग्वाष्टक चूर्ण— सौंठ, मिर्च, पीपल, सेंधानमक, सफेद जीरा, कालाजीरा, अजमोद, ये सातों बराबर—बराबर चूर्ण पीस छानकर इनके आँठवा भाग हींग घी में भूनकर मिला दो। विधि— १ चम्मच चूर्ण ५ (ग्रास) रोटी महीन मीड़कर उसमें १ चम्मच घी डालकर उसी में चूर्ण मिला दें। फिर उसे भोजन में सबसे पहले ५ कौर खाएँ बाद मेें भोजन करते रहें। सभी प्रकार उदर शूल, एवं मदाग्नि दूर कर देता है।
*ओधा (चिरचिरे) के बीज और दूध की खीर खाने से घोर भस्मक रोग दूर होता है।
*बेर की गुठली के अन्दर के बीजों का चूर्ण १/२ चम्मच पानी से लेने पर भस्मक रोग ठीक हो जाता है। ज्वालामुखी चूर्ण/ (क्षुद्यावर्धक)



* भूख बढ़ाने हेतु— हींग, अमलवेल, त्रिकुटा (सौंट, पीपर, पीपलमूर) चितावर की जड़, जवारवार, पोहर—कयूर, त्रिफला, (हर्र, बहेड़ा आँवला) और अनार, इन सभी को समान भाग लेकर महीन पीसकर छान कर रखें चूर्ण के वजन के बराबर पुराना गुड़ मिला दो १० ग्राम चूर्ण सुबह—शाम पानी से सेवन करें भूख बढ़ती है। हाजमा होता है।हींग घी में भूनकर डालें।
* दवानल चूर्ण— सेंधानमक १० ग्राम पीपलामूर २० ग्राम पीपर ३० ग्राम चव्च ५० ग्राम चीतू की छाल (चितावर) ५० ग्राम सौंठ ६० ग्राम हरड़ ६० ग्राम इन सबको कूट पीस कर छान लें।
*हर्र, पीपल, सौंठ, ५०—० ग्राम प्रत्येक लेकर चूर्ण छान लो इसे (त्रिसम) कहते हैं। १/२—१/२ चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करें भूख बढ़ती है। प्यास शान्त होती है। छाछ (मट्ठे) में मन्दाग्नि नष्ट करने की पूरी सामथ्र्य है इसे ऋतु अनुसार इस प्रकार सेवन करना चाहिए। सम्पूर्ण रोग नष्ट होते हैं। मट्ठे में सौंठ, कालीमिर्च, पीपल का चूर्ण मट्ठे की मात्रानुसार १ लीटर मट्ठे १० ग्राम चूर्ण एवं सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से सर्वरोग दूर होते हैं।
*पकी मीठी इमली के पने में सेंधानमक कालीमिर्च, और भुनी हींग थोड़ी डालकर पीने से मन्दाग्नि ठीक होती है। भूख बढ़ती है।
* चने का खार कुछ दिन सेवन करने से बिगड़ी पाचन शक्ति सुधर जाती है।
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