17.8.15

बरसात के मौसम में बढ़ जाती है संधिवात की समस्या





     बरसात के मौसम में अक्सर  लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत बढ़ जाती है जिसे संधिवात या अर्थराइटिस भी कहा जाता है।  आपके जोड़ों का दर्द स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग की तुलना में बदलते मौसम का बेहतर संकेत माना जा सकता है। 

   कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो संधिवात  की समस्या बढ़ा सकते हैं, हालांकि खुराक या खाद्य संवेदनशीलता या अस्वीकार्यता के कारण शायद ही अर्थराइटिस की समस्या होती है। संधिवात की  चेतावनी देने वाले लक्षणों में दर्द, सूजन, अकडऩ और जोड़ों को मोडऩे में दिक्कत शामिल हैं। संधिवात  के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक उभर सकते हैं और कई बार जब अर्थराइटिस पुराना रोग बन जाता है तो इसके लक्षण आते-जाते रहते हैं और लंबे समय तक बरकरार रहते हैं। अर्थराइटिस की पीड़ा विशेष रूप से एक या अधिक जोड़ों में या इनके आसपास दर्द, कष्ट, जकडऩ और सूजन से समझी जा सकती है जिसे रूमेटिक स्थितियों से पहचाना जाता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे या अचानक से बढ़ सकते हैं। कुछ रूमेटिक स्थितियों में इम्युन सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) तथा शरीर के विभिन्न अंदरूनी अंगों का भी योगदान रहता है। रूमेटोइड अर्थराइटिस और लूपस जैसे अर्थराइटिस के कुछ प्रकार कई अंगों को प्रभावित कर सकते हैं और व्यापक लक्षण का कारण बन सकते हैं।

    यह रोग 50 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले लोगों में अधिक पाया जाता है लेकिन बच्चों समेत हर उम्र के व्यक्तियों को यह रोग प्रभावित कर सकता है। मौसम के बदलाव संबंधी जोड़ों का दर्द आम तौर पर ऑस्टियोअर्थराइटिस तथा रूमेटोइड अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्तियों में देखा गया है जिन्हें नितंब, घुटने, कुहनी, कंधे तथा हाथ में दर्द की शिकायत हो सकती है। इन जोड़ों में बैरोरिसेप्टर्स नामक संवेदी नाडिय़ां होती हैं जो बैरोमेट्रिक (वायुदाबीय) बदलाव की पहचान कर सकती हैं। ये रिसेप्टर्स खास तौर पर जब प्रतिक्रिया देते हैं जब बैरोमेट्रिक दबाव निम्न रहता है, मसलन जब बारिश की बौछार से पहले मौसम बदल जाता है। अर्थराइटिस जोड़ के दर्द से पीडि़त व्यक्ति ऐसे बैरोमेट्रिक बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं। निम्न बैरोमेट्रिक दबाव के साथ उच्च नमी का ताल्लुक जोड़ों का दर्द और अकडऩ बढऩे से होता है, हालांकि इनमें से कोई एक कारण भी इस दर्द की वजह बन सकता है। कुल मिलाकर, आंधी-तूफान से पहले निम्न बैरोमेट्रिक दबाव और नमी में वृद्धि जोड़ों के दर्द एवं अकडऩ बढ़ाने का कारण बन सकती है। ऐसे में सबसे अच्छी सलाह यही है कि आप पूरे वर्ष किसी भी मौसम में यथासंभव अत्यंत सक्रिय बने रहें। खूब सारा पानी पीयें और बिना वजन उठाने वाला व्यायाम करते हुए अपने जोड़ों को सक्रिय रखें।

   ओमेगा-3 फैटी एसिड, ग्लूकोसामाइन तथा कोंड्रोइटिन सल्फेट भी ऐसे लोगों के लिए काफी लाभकारी हो सकता है।अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्तियों को दर्द, कामकाज तथा मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में शारीरिक सक्रियता और व्यायाम के लाभ देखे गए हैं। हल्के-फुल्के व्यायाम से अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्तियों को कार्डियोवैस्क्यूलर रोग, डायबिटीज, मोटापा और शिथिलता की चपेट में आने का खतरा कम हो जाता है। इनमें से कुछ रिस्क फैक्टर्स में सुधार किया जा सकता है जबकि अन्य में नहीं। नहीं सुधारे जा सकने वाले (अपरिवर्तनीय) रिस्क फैक्टर्स: उम्र: ज्यादातर प्रकार के अर्थराइटिस का खतरा उम्र बढऩे के साथ ही बढ़ता जाता है। 

      अर्थराइटिस के ज्यादातर प्रकार महिलाओं में अधिक आम होते हैं। अर्थराइटिस से पीडि़त लोगों में 60 प्रतिशत महिलाएं ही होती हैं। लेकिन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में गठिया की शिकायत अधिक देखी गई है। 

        कुछ पेशे में बार-बार घुटने को मोडऩा और झुकाना पड़ता है और यह घुटने में ऑस्टियोअर्थराइटिस का कारण बन सकता है। कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जो अर्थराइटिस की समस्या बढ़ा सकते हैं, हालांकि खुराक या खाद्य संवेदनशीलता या अस्वीकार्यता के कारण शायद ही अर्थराइटिस की समस्या होती है। अर्थराइटिस की चेतावनी देने वाले लक्षणों में दर्द, सूजन, अकडऩ और जोड़ों को मोडऩे में दिक्कत शामिल हैं। अर्थराइटिस के लक्षण धीरे-धीरे या अचानक उभर सकते हैं और कई बार जब अर्थराइटिस पुराना रोग बन जाता है तो इसके लक्षण आते-जाते रहते हैं और लंबे समय तक बरकरार रहते हैं।

   अर्थराइटिस के चार मुख्य चेतावनी भरे लक्षण हैं -

    दर्द: अर्थराइटिस का दर्द लगातार बना रह सकता है या फिर यह आता-जाता रह सकता है। यह दर्द या तो एक ही जगह बना रह सकता है या फिर शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है। 

सूजन: कुछ प्रकार के अर्थराइटिस प्रभावित जोड़ की ऊपरी त्वचा को लाल और सूजन-भरा बना देते हैं जिसे छूने पर गर्माहट का अहसास होता है।

 अकडऩ: अकडऩ अर्थराइटिस का एक विशेष लक्षण होता है, खासकर जब आप सुबह के वक्त टहल रहे हों या लंबे समय बाद डेस्क पर बैठ रहे हों या कार चला रहे हों। किसी जोड़ को मोडऩे में दिक्कत: जोड़ को मोडऩे में या कुर्सी से उठने में कठिनाई होती है और यह कष्टकारी होता है। रूमेटोइड अर्थराइटिस के कुछ लक्षणों में शामिल हैं:-

     सांस लेते वक्त सीने में दर्द की शिकायत, आंख और मुंह का सूखना, आंखों मे जलन, खुजलाहट और पानी आना,  हाथों और पैरों में संवेदनशून्यता, सिहरन या जलन, नींद आने में परेशानियां अर्थराइटिस को दवाइयों के साथ-साथ उचित गतिविधियों और व्यायाम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। ये दवाइयों रोग में सुधार लाने वाली दवाइयां कहलाती हैं।

     जहां तक खानपान की बात है तो अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्ति को डेयरी उत्पादों, गेहूं, मांस, आलू, काली मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी सब्जियों, अल्कोहल, कॉफी, चीनी, सैचुरेटेड फैट, अधिक नमक और बादाम के सेवन से बचना चाहिए। इसकी सूजन और दर्द से राहत पाने के लिए इप्सम सॉल्ट बॉथ की सलाह दी जाती है। जोड़ों पर स्थानीय मिट्टी का लेप भी लगाया जा सकता है।

एक कप गर्म पानी में दो चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर इसे नियमित रूप से पीने से बेहतर असर होता है।
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