8.7.15

बरसात के मौसम की बीमारियों से रहें सावधान ! : Be careful of diseases in the rainy season !








   


बरसात के मौसम में गंदे पानी और विषैले खाद्य पदार्थों के कारण बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। वातावरण में नमी के बढ़ने से वायरस, फंगस एव बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

हाइपोथर्मिया ( तापक्रम  कम हो जाना) इस मौसम की सबसे सामान्य बीमारी है। इसमें ज्यादा देर तक भीगने के बाद शरीर का तापमान सामान्य से कम हो जाता है। इससे ठंड लगने लगती है, खून का प्रवाह कम होने लगता है तथा हृदय की गति बढ़ जाती है। इसके अलावा कंपकपी, सर्दी, खांसी, जुकाम-बुखार आदि बीमारियां भी हो जाती हैं।

इस मौसम में गंदे पानी के कारण होने वाली संक्रामक बीमारियों का प्रकोप भी रहता है। सबसे ज्यादा खतरा हेपेटाइटिस-ई यानी पीलिया और टायफाइड का होता है। इसके अलावा डायरिया, पेचिश, दस्त लगना, आंतों में इंफेक्शन आदि भी इस सीजन की आम बीमारियां हैं।



इन बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय साफ पानी है। बरसात में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है। इस कारण मच्छर, मक्खियों के पनपने का दौर शुरू होता है, जिनसे मलेरिया, डेंगू, दिमागी बुखार जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

बरसात का मौसम आते ही चिकुनगुनिया का हमला भी होने लगता है। यह वायरस से होने वाली बीमारी है, जिसके लक्षण डेंगू बुखार जैसे ही होते हैं। यह बीमारी मच्छर जनित है।

इसमें जोड़ों के दर्द के साथ अचानक बुखार, मितली, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द के साथ सूजन बढ़ने लगती है। दमा के मरीजों को तो खास सावधानी बरतनी चाहिए। इस मौसम में सांस फूलने या खांसी आने जैसी समस्या आम है।

सड़कों पर गंदा पानी भरने या गंदे पानी के सेवन से इस मौसम में स्किन इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जात है। मसलन, फोड़े-फुंसी, दाद-खुजली आदि। इस मौसम की एक सामान्य बीमारी है लेप्टोस्पायरोसिस, जो कि चूहे के कारण फैलती है।

इसके अलावा गीले खेतों में काम करने, गंदे पानी में भीगने, पालतू जानवर आदि के संपर्क में आने से भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में मधुमेह रोगियों को विशेष तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है।

कहीं भी बाहर जाने से फिसलने से चोट लगने का खतरा रहता है। ऐसे में घाव भरने में समय लगता है। इसलिए, बरसात के मौसम में लगी चोट आपके लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है। दूसरा, जख्म में इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
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