16.2.15

गैस और खांसी में लाभकारी अरबी





पेट में गैस की समस्या-

अरबी के पत्ते डंठल के साथ लिए जाएं और पानी में उबालकर पानी को छान लिया जाए। फिर इस पानी में उचित मात्रा में घी मिलाकर 3 दिनों तक दिन में दो बार दिया जाए, तो लंबे समय से चली आ रही गैस की समस्या में फायदा होता है।

* लंबे समय से चली आ रही खांसी-

उबली हुई अरबी को खाने से पुराने समय से चली आ रही खांसी में भी बेहद आराम मिलता है। कई इलाकों में आदिवासी इसे शहद में मिलाकर लेने की सलाह देते हैं।

* कीड़े-मकोड़े के काटने पर-
अगर किसी कीड़े-मकोड़े के काटने से कोई हिस्सा कट गया है, तो कटे हुए हिस्से पर अरबी को छीलकर रगड़ने से राहत मिलती है। किसी तरह का जहर हो तो वो भी असर नहीं कर पाता है।

  • जलना- जले हुए स्थान पर अरबी पीसकर लगाने से फेफोले नही पड़ते और जलन भी समाप्त हो जाती है।

  • सूखी खासी- सूखी खासी में अरबी की सब्जी खाने से कफ पतला होकर बाहर निकल जाता है।

  • हृदय रोग-
    बड़ी इलायची, काली मिर्च, काला जीरा, अदरक आदि से तैयार अरबी की सब्जी कुछ दिनों तक नियमित सेवन करने रहने से हृदय दौर्बय, रक्ताल्पाता (खून की कमी) व अन्य हृदय रोग जाते रहते है।

  • बर्र या ततैया का काटना- दंशित स्थान पर अरबी काटकर तथा घिसकर लगा देनी चाहिए। इससे विष कम हो जायेगा और सुजन भी कम हो जायेगी।

  • वायु का गोला- 


    अरबी के पौधे के डन्ठल को पत्तों सहित वाष्प (भाप) पर उबालकर निचोंड लें और उसमें ताजा घी मिला 3-4 दिन तक पिलाते रहने से वात गुल्म में लाभ होता है।

  • गंजापन- अरबी (घुईया काली) के रस का कुछ दिनों तक नियमित सिर पर मर्दन करने से केशों का गिरना रूक जाता है। तथा नयें केश भी उग आतें है।

  • रक्तार्श- अरबी का रस कुछ दिनों तक पिलाना हितकर रहता है।
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